AIIMS portable MRI| Brain Imaging technology| मशीन खुद चलकर आएगी मरीज के पास, करेगी MRI, एम्स दिल्ली में शुरू हुई कमाल की सुविधा

होमताजा खबरDelhi मशीन खुद चलकर आएगी मरीज के पास, करेगी MRI, एम्स में शुरू हुई कमाल की सुविधा Last Updated:May 02, 2026, 17:17 IST AIIMS नई दिल्ली ने देश का पहला पोर्टेबल बेडसाइड MRI शुरू किया है. इससे ICU और इमरजेंसी में बिना मरीज को हिलाए ब्रेन इमेजिंग की जा सकेगी. रेडियोसर्जरी ग्लोबल के सहयोग से इसे एम्स लाया गया है. एम्स नई दिल्ली में शुरू हुई बेडसाइड पोर्टेबल एमआरआई की सुविधा. AIIMS Delhi Portable MRI: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली ने देश में पहली बार पोर्टेबल बेडसाइड MRI सिस्टम शुरू कर दिया है.यह तकनीक गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए गेम चेंजर साबित होने वाली है. अब ICU, इमरजेंसी और न्यूरोसर्जिकल वार्ड में मरीज को बिस्तर से हिलाए बिना ब्रेन की इमेजिंग की जा सकेगी. देश में पहली बार ऐसी कोई मशीन लाई गई है जो न्यरोलॉजी विभाग में क्रांतिकारी साबित होने वाली है. परंपरागत MRI से अलगअभी तक एम्स में पारंपरिक एमआरआई मशीनों से स्कैन किया जाता था. ये एमआरआई मशीनें बड़ी, महंगी और स्थिर होती हैं. इनमें स्कैन के लिए मरीज को ICU से MRI रूम तक ले जाना पड़ता है, जो गंभीर मरीजों के लिए जोखिम भरा होता है. नया अल्ट्रा-लो-फील्ड पोर्टेबल एमआरआई छोटा, व्हील वाला और आसानी से मरीज के बेड तक ले जाया जा सकता है. यह सिस्टम न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस सेंटर में डॉ. शैलेश गायकवाड़ की टीम के नेतृत्व में उपयोग में लाया जा रहा है. किन मरीजों को फायदा?डॉ. शैलेश गायकवाड़ ने बताया कि यह तकनीक स्ट्रोक, ट्रॉमा, ICU मॉनिटरिंग, बच्चों और पोस्ट-ऑपरेटिव न्यूरोसर्जिकल केस में तेज डायग्नोसिस की सुविधा देगी. इमरजेंसी में जहां समय की कमी होती है और मरीज को शिफ्ट करना खतरनाक है, वहां यह सिस्टम जीवन रक्षक साबित होगा. डॉक्टरों का कहना है कि इससे फैसला लेने की गति बढ़ेगी और मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी. भारत के लिए ऐतिहासिक कदमभारत में इस पोर्टेबल MRI को नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद AIIMS में लगाया गया है. अस्पताल को रेडियोसर्जरी ग्लोबल के सहयोग से यह उपलब्ध हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पॉइंट-ऑफ-केयर न्यूरो डायग्नोस्टिक्स में नई क्रांति लाएगा. दूरदराज के क्षेत्रों और छोटे अस्पतालों में भी ब्रेन इमेजिंग की पहुंच बढ़ेगी. मरीजों और चिकित्सा क्षेत्र पर प्रभावपोर्टेबल MRI से मरीजों को अनावश्यक ट्रांसफर का खतरा कम होगा, संक्रमण का जोखिम घटेगा और समय की बचत होगी. AIIMS के इस कदम से देशभर के अस्पतालों में ऐसी तकनीक अपनाने की राह खुल सकती है. यह खासकर संसाधन सीमित क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
मलाइका अरोड़ा बोलीं- बेटे अरहान ने शादी से इनकार किया:कहा- ग्रैंडकिड्स भूल जाइए, प्रदूषण और खराब माहौल में बच्चे नहीं चाहता हूं

मलाइका अरोड़ा ने बेटे अरहान खान को लेकर एक बात शेयर की। उन्होंने बताया कि अरहान ने कहा कि वह शादी नहीं करना चाहते और बच्चे भी प्लान नहीं कर रहे हैं। मलाइका के मुताबिक, बेटे ने मजाक में कहा, “ग्रैंडकिड्स की उम्मीद छोड़ दो।” हाल ही में टाइम्स एंटरटेनमेंट को दिए इंटरव्यू में मलाइका रिश्तों और शादी पर बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी रिश्तों को अलग नजरिए से देखती है। उनका बेटा कई बार ऐसी बातें बोलता है, जो उन्हें सोचने पर मजबूर करती हैं। मलाइका ने बताया कि अरहान ने उनसे कहा, “मैं शादी नहीं करूंगा, इसलिए ग्रैंडकिड्स के बारे में भूल जाइए।” वजह पूछने पर अरहान ने बढ़ते प्रदूषण और खराब माहौल का जिक्र किया। उसने कहा कि AQI 500-1000 तक पहुंच रहा है, ऐसे माहौल में बच्चों को दुनिया में लाना सही नहीं लगता। मलाइका ने माना कि बेटे की सोच उनसे अलग है। उन्होंने उसे समझाया कि जिंदगी के हर फेज का अलग अनुभव होता है और परिवार बनाना भी उसका हिस्सा है। उन्होंने कहा कि रिश्ते बदलते रहते हैं और जिंदगी में कुछ भी स्थायी नहीं होता। इंसान को परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है। इंटरव्यू में मलाइका ने सेल्फ-लव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वह हर दिन खुद से प्यार करने को कहती हैं, क्योंकि अगर इंसान खुद को स्वीकार नहीं करेगा, तो जिंदगी खुलकर नहीं जी पाएगा। मलाइका अरोड़ा की शादी 1998 में अरबाज खान से हुई थी। दोनों का 2017 में तलाक हो गया था। अरहान उन्हीं के बेटे हैं। तलाक के बाद भी दोनों बेटे की को-पैरेंटिंग कर रहे हैं। मलाइका लंबे समय तक अर्जुन कपूर के साथ रिश्ते को लेकर भी चर्चा में रहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को दिया झटका, तृतीय वर्ष के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के दस्तावेजों के मामले में प्रवेश की अनुमति दी गई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की शुरुआत से पहले सैद्धांतिक कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। तीसरे में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की अपील को चुनौती देने वाली याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जोयामाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला पूरी तरह से भूमिका में है। शनिवार को विशेष रूप से दोनों जज बैठे थे। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया। लेकिन बेंच ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने साफ किया कि प्राथमिक स्तर के कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग का अधिकार है। बेंच के अध्यक्ष जस्टिस बागची ने कहा, “चुनाव आयोग के केंद्र में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि कर्मचारी केवल केंद्र का ही होगा। लेकिन अगर वह ऐसा भी लिखते हैं, तब भी हम उन्हें गलत नहीं कहते हैं।” न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि तृतीयक केंद्र में सिटकॉल कैमरा होगा, वहां राजनीतिक वैश्वीकरण के एजेंट होंगे। ऐसे में कलाकार के संकट का कोई आधार नहीं है. चुनाव आयोग के वकील ने क्या कहा इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने बात शुरू की. नायडू ने कहा कि निराधार खतरों के तहत पूरी याचिका दायर की गई है। चुनाव आयोग के सरकुल में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि तीसरे चरण में राज्य सरकार के कर्मचारियों की कोई भूमिका ही नहीं होगी। यहां तक कि तीन साल के कर्मचारियों के लिए जो रिटर्निंग ऑफीसर विज़ेट है, वह भी राज्य सरकार का ही अधिकारी होता है। आयोग के वकील ने कहा कि पूरा काम ऐतिहासिक कहा जा रहा है। सरकुल में लिखी गई सभी बातों का पालन करना होगा और उसी आधार पर कर्मचारियों की ड्यूटी निभानी होगी। इसके बाद कोर्ट ने कहा, “इस मामले में किसी भी आदेश का पालन नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि सरकार का पूरी तरह से पालन नहीं किया जाएगा।” उच्च न्यायालय ने भी टीएमसी के दलालों को खारिज कर दिया था इससे पहले, कैथोलिक कांग्रेस ने येली कलकत्ता उच्च न्यायालय में मूर्ति की स्थापना की थी। 30 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने चिकन चॉकलेट्स को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि तीन साल के कर्मचारियों के लिए चुनाव आयोग का पद बनता है। यदि तृतीयक में कोई गड़बड़ी होती है, तो इसके लिए बाद में नामांकन दाखिल किया जा सकता है। केवल खतरों के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जाएगा। यह भी पढ़ें : पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर वोटिंग के दौरान फूट, खुलासा- सामने आए टीएमसी-बीजेपी कार्यकर्ता, वीडियो (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल 2026(टी)पश्चिम बंगाल 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)भारत(टी)ममता बनर्जी(टी)ममता बनर्जी टीएमसी(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी
पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त एक समय बॉलीवुड में आना चाहती थीं। इसकी वजह एक्टिंग का सपना नहीं, बल्कि पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने इन्साइड थॉट्स आउट लाउड पॉडकास्ट में कहा कि बचपन में उन्हें लगता था कि फिल्मों में आने से वह पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हुआ था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई, तब संजय दत्त ने पूछा था कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। त्रिशाला के मुताबिक, उन्होंने पिता से कहा था कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इस पर संजय दत्त ने समझाया कि सिर्फ स्टार किड होने से कोई ए-लिस्ट एक्ट्रेस नहीं बनता। उन्होंने बेटी को वही करने की सलाह दी, जिसमें उसकी असली रुचि हो। त्रिशाला ने कहा कि उनके पिता जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें सही दिशा दिखाने की कोशिश की। बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र चुना। वह अब थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य पर कम खुलकर बात होती है। वह लोगों को बताना चाहती थीं कि संघर्ष सामान्य है। त्रिशाला ने दीपिका पादुकोण की भी तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन पर खुलकर बात की थी। त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने माता-पिता के साथ सामान्य पारिवारिक जिंदगी नहीं जी। वह बचपन से अमेरिका में रहीं और भारत कम आ पाती थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह संजय दत्त के साथ होती हैं, उन्हें सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।
पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त एक समय बॉलीवुड में आना चाहती थीं। इसकी वजह एक्टिंग का सपना नहीं, बल्कि पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने इन्साइड थॉट्स आउट लाउड पॉडकास्ट में कहा कि बचपन में उन्हें लगता था कि फिल्मों में आने से वह पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हुआ था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई, तब संजय दत्त ने पूछा था कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। त्रिशाला के मुताबिक, उन्होंने पिता से कहा था कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इस पर संजय दत्त ने समझाया कि सिर्फ स्टार किड होने से कोई ए-लिस्ट एक्ट्रेस नहीं बनता। उन्होंने बेटी को वही करने की सलाह दी, जिसमें उसकी असली रुचि हो। त्रिशाला ने कहा कि उनके पिता जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें सही दिशा दिखाने की कोशिश की। बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र चुना। वह अब थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य पर कम खुलकर बात होती है। वह लोगों को बताना चाहती थीं कि संघर्ष सामान्य है। त्रिशाला ने दीपिका पादुकोण की भी तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन पर खुलकर बात की थी। त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने माता-पिता के साथ सामान्य पारिवारिक जिंदगी नहीं जी। वह बचपन से अमेरिका में रहीं और भारत कम आ पाती थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह संजय दत्त के साथ होती हैं, उन्हें सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।
बेटे के गम में मां की मौत, सदमा कैसे ले लेता है जान, इमोशनल शॉक पीड़ित को कैसे संभालें?

Mental Trauma Effects: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. जब मां-बेटे में हुई कहासुनी के बाद बेटे ने जहर खाकर जान दे दी तो मां इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने भी फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली. इलाके में इमोशनल शॉक या भावनात्मक सदमे के कारण हुई इन मौतों ने हलचल पैदा कर दी है. लोग बार-बार यही बात कह रहे हैं कि किसी की मौत का सदमा क्या इतना खतरनाक होता है कि खुदकुशी की कर लेते हैं. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. कल्याणी नागर की मानें तो अचानक का गहरा दुख, तीव्र तनाव, चिंता या ट्रॉमा कई बार व्यक्ति को एक्सट्रीम कदम उठाने पर मजबूर कर देता है. जबकि कई बार इसका साइड इफैक्ट अपने आप ही शरीर पर दिखाई दे जाता है. सदमा भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूपों में नुकसान पहुंचा सकता है. सदमा ब्रेन और हार्ट पर सीधा असर डाल सकता है. तीव्र भावनात्मक सदमा ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम या हार्ट अटैक जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. अत्यधिक भावनात्मक सदमा व्यक्ति को गहरे अवसाद, हताशा और लाचारी की स्थिति में ले जा सकता है, जहां उसे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आता. बेटे की मौत के बाद संभव है कि इस मां को भी ऐसा ही लगा हो. हार्ट पर भी असर डालता है सदमा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार तीव्र सदमा शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन) की अचानक वृद्धि कर देता है. इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती हैं. भावनात्मक सदमा अचानक हार्ट अटैक के लक्षण पैदा कर सकता है, जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना. कुछ मामलों में यह हार्ट फेल्योर या अरिदमिया (Arrhythmia) का कारण बन जाता है, खासकर पहले से हृदय रोग वाले लोगों में. कैसे पहचानें खतरे के संकेत?ऐसे में डॉक्टर और एसोसिएशन अक्सर सलाह देते हैं कि जब भी कोई बेहद दुख की घटना हो जाए तो उससे जुड़े व्यक्ति का खास ध्यान रखना जरूरी है, हल्की सी लापरवाही भी जानलेवा हो जाती है. सदमा एक्यूट और क्रॉनिक दोनों ही स्थितियों में खराब है. सदमे में व्यक्ति चुप रह सकता है, रो सकता है या अचानक बेहोश हो सकता है. उसके सीने में दबाव, बांहों या जबड़े में दर्द, पसीना आना, उल्टी जैसा महसूस हो सकता है. आईसीएमआर की एक रिपोर्ट कहती है कि तीव्र मानसिक तनाव हार्ट अटैक को ट्रिगर कर देता है. सदमे को कैसे संभालें? अगर आपके पास सदमे का पीड़ित है तो उसे शांत जगह पर बिठाएं, गहरी सांस लेने को कहें. अगर उसके सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं. ECG और ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं. अगर वह फिर ठीक से व्यवहार न करे तो उसे मानसिक सहायता दें, सदमे की काउंसलिंग कराएं. परिवार उसके आसपास रहे, उससे लगातार बात करें, उसे अकेले न छोड़ें. . अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है तो उसे झटके से कोई दुखभरी सूचना न दें और उसे लगातार व्यायाम करने व दवा लेने के लिए प्रेरित करें. क्या सदमे से मिल सकती है मुक्ति भावनात्मक सदमा स्ट्रैस कार्डियोमायोपैथी पैदा कर सकता है, जो ज्यादातर मामलों में रिवर्सिबल होता है, लेकिन समय पर इलाज जरूरी है. AIIMS और PGI चंडीगढ़ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ कहते हैं कि तीव्र दुख में हृदय की निगरानी रखें. योग करें, व्यायाम करें, लोगों से मिलें. स्वस्थ जीवनशैली और मजबूत सामाजिक समर्थन सदमे के प्रभाव को कम कर सकता है.
बागल में रिपोलिंग के दौरान साइंटिस्ट स्टाफ, भड़के शुभेंदु अधिकारी बोले- लोकतंत्र का भविष्य क्या है…

पश्चिम बंगाल विधानसभा क्षेत्र में नामांकन के नेता और भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को पिघला और दासपुर क्षेत्र में विधानसभा के दिन सामुहिक कार्यकर्ताओं को दृढ़ संकल्पित करने के लिए चिंता का विषय बना दिया। उन्होंने नामांकन में नामांकन का आरोप लगाया और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की। साहित्यिक संस्था के लिए संवैधानिक संस्था पर उठे सवाल एक पोस्ट में अधिकारी ने लिखा, “क्या लोकतंत्र के भविष्य के अनुरूप कर्मचारियों के हाथों में शामिल किया जा रहा है? यह एक गंभीर चिंता का विषय है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा हमला है। 227-पिंघला एसी और 230-दासपुर एसी के लिए जारी शब्दावली सिद्धांतों को देखने के लिए मैं स्तब्ध हूं, जहां लोकतंत्र के लिए बड़ी संख्या में ठोस और कमजोर कर्मचारियों को जारी किया गया है।” उन्होंने जिबिका के सेवकों, सहायकों और सांकेतिक मतदान अधिकारियों की गिनती के लिए बाजीगरी के प्रश्न पूछे हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि मठ, वीवीपीएटी और डाक मतपत्रों को अचयनित किया जाता है जैसे कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी, जिबिका सेवकों और सहायकों को कैसे चिह्नित किया जा सकता है? ये पद स्वाभाविक रूप से राजनीतिक दबाव के प्रति संवेदनशील होते हैं। विवरण से पता चलता है कि महत्वपूर्ण अभिलेखों के लिए सूचीबद्ध कर्मचारियों पर भरोसा किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टीएमसी का पहला विरोध, ममता बनर्जी के सबसे बड़े नेता बोले-साला स्टालिन के लिए… ‘मतगणना में सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा’उन्होंने आगे कहा कि पिंघला ऐस (227), बिपालेंदु बेरा (जेएसी), शंकर हिल (जेएसी) और नबा कुमार एपिक (बीएलएस) जैसे बेसिक स्टाफ़निक टीम शामिल हैं। यहां तक कि ‘रिज़र्व टैगिंग’ में भी बबला जैसे स्टाफ लगे हुए हैं। अन्य होटलों और यहां तक कि यहां की नोट्स/वीवीएटी की सीलिंग में भी सहायकों, वीईएलई और सहायकों पर नियुक्त डीईओ की भरमार है। सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से ये सुनिश्चित करने को कहा है कि 4 मई को होने वाली माध्यमिक में नियमित सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया जाए. मुख्य चुनाव आयुक्त से हस्तक्षेप की मांगउन्होंने लिखा, “मुख्य चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव अधिकारी पश्चिम बंगाल में हस्तक्षेप करना चाहते हैं, ताकि इन दस्तावेजों में संशोधन किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रारंभिक प्रक्रिया में केवल वैध, नियमित कर्मचारी सरकारी अधिकारी शामिल हों, ताकि सहायक बने रहें।” उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग को लोकतंत्र के संविधान पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए. हम जनता के साथ मिलकर उन लोगों को नौकरी पर नहीं रखना चाहते, जो कि समुदाय विशेष के दल के आधार पर हैं। ये भी पढ़ें बंगाल चुनाव की मतगणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बीजेपी का पहला बयान, कहा- टीएमसी जब भी कोर्ट गई, उसे…
सामंथा ने लॉन्च किया टॉक्सिन फ्री परफ्यूम:रणबीर से रश्मिका तक; परफ्यूम बिजनेस में उतरे सेलेब्स, फैंस से बन रहा नया कनेक्शन

फिल्म स्टार्स लंबे समय से परफ्यूम ब्रांड्स का प्रचार करते रहे हैं, लेकिन अब वे खुद इस बिजनेस में उतर रहे हैं और अपने-अपने तरीके से फैंस से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रणबीर कपूर ने पिछले साल ‘ARKS’ नाम से परफ्यूम लॉन्च किया। इसमें रणबीर ने ऑनलाइन स्ट्रेटजी अपनाई। कंपनी ने स्विगी इंस्टामार्ट से पार्टनरशिप की और इसे क्विक कॉमर्स पर उपलब्ध कराया। वहीं सामंथा रुथ प्रभु का ‘सीक्रेट एलकेमिस्ट’ खुद को भारत का पहला अरोमाथेरेपी-बेस्ड परफ्यूम ब्रांड बताता है, जिसमें टॉक्सिन-फ्री और वेलनेस-फोकस्ड खुशबुओं पर जोर है। रश्मिका मंदाना ने भी ‘डियर डायरी’ नाम से परफ्यूम ब्रांड शुरू की है। उनकी कंपनी ने 2026 के अंत तक 100 स्टोर्स तक विस्तार करने की योजना बनाई है। इधर, हॉलीवुड में भी रिहाना, सेलेना गोमेज जैसे सेलेब्रिटी इस बिजनेस में हैं। जानते हैं इनके बारे में। ये स्टार्स बना रहे अपने पर्सनलाइज्ड परफ्यूम सामंथा रुथ प्रभुका ‘सीक्रेट एलकेमिस्ट’ सामंथा ने मार्च 2026 में ब्रांड सीक्रेट एलकेमिस्ट के जरिए अरोमाथेरेपी-आधारित नए परफ्यूम्स की रेंज लॉन्च की है। ये उनके क्यूरेटेड परफ्यूम है व टॉक्सिन-फ्री हैं। औसतन 100ml परफ्यूम 999 रु. से शुरू है। रश्मिका मंदाना का डियर डायरी रश्मिका ने जुलाई 2025 में परफ्यूम ब्रांड ‘डियर डायरी’ लॉन्च किया। इसकी खुशबुएं उनकी निजी यादों और कूर्ग में बिताए बचपन से प्रेरित हैं। रश्मिका अपने परफ्यूम से फैंस से कनेक्ट बना रही हैं। औसतन 100ml परफ्यूम 2599 रु. का है। सेलेना गोमेज का रेयर ब्यूटी सेलेना ने रेयर ब्यूटी में फ्रेगरेंस लॉन्च किया है। इसमें कैरामेल, पिस्ता व सैंडलवुड जैसे नोट्स शामिल हैं। यह वीगन फ्रेंडली है। इसे यूं डिजाइन किया गया है कि इसकी खुशबू 12 घंटे तक विकसित होती रहे। औसतन 50ml परफ्यूम 4500 रु. का है। बियोंसे का बियोंसे परफ्यूम्स बियोंसे परफ्यूम्स के तहत दो नए परफ्यूम Cé Noir और Cé Lumière लॉन्च किए हैं। इनमें स्किन मस्क नोट इस्तेमाल किया गया है, जिससे खुशबू त्वचा पर धीरे-धीरे पर्सनल एहसास दे। कीमत 15 हजार रु. से शुरू है। रणबीर कपूर ARKS परफ्यूम रणबीर ने ARKS परफ्यूम लॉन्च किया है। इसकी 65% बिक्री ऑनलाइन हो रही है। हर महीने ₹1 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू भी आ रहा है। यह ‘जेंडर-इन्क्लूसिव’ परफ्यूम है। इसकी एक 50ml बोतल की कीमत ₹2,999 रु. है।
नूर जहां, लक्ष्मणभोग से लेकर इमाम पसंद का नाम सुना है? ये हैं देश के रेयर आम,स्वाद, आकार, रंग में जबरदस्त

होमफोटोलाइफ़फूड नूर जहां, लक्ष्मणभोग से लेकर इमाम पसंद का नाम सुना है? ये हैं देश के रेयर आम Last Updated:May 02, 2026, 14:24 IST Rare mango varieties from india: फलों के राजा आम खाने का सीजन आ गया है. कुछ ही दिनों में आपको तरह-तरह के स्वाद, आकार, रंग वेरायटी वाले आम मार्केट में दिख जाएंगे. हर किसी का आम पसंदीदा फल होता है. भारत में सैकड़ों किस्म के आम उगाए जाते हैं. इनमें से तो कुछ आम की किस्में अब दुर्लभ हो गई हैं. ये रेयर किस्म के आम अब तो मिलते भी नहीं हैं. चलिए कुछ ऐसे ही आमों की खासियत के बारे में जानते हैं. कोहितुर Kohitur: कभी मुगल दरबारों में सराहे जाने वाला यह दुर्लभ आम अब लगभग विलुप्त हो चुका है. इसकी भरपूर सुगंध और अत्यधिक दुर्लभता इसे एक बहुमूल्य विलासिता का सामान बनाती है, जो उच्च वर्ग के खरीदारों और निर्यात संग्राहकों के लिए एकदम उपयुक्त है. इमाम पसंद Imam Pasand: इमाम पसंद आम दक्षिण भारत में मिलता है. वहां इसे हिमायत भी कहते हैं. इसकी मिठास रेशमी होती है, लोग इस आम को खूब खाना पसंद करते हैं. हालांकि, कम पैदावार के कारण यह एक विशिष्ट किस्म का आम बनकर रह गया है. किसान भी अब इसे एक प्रीमियम मैंगो के रूप में देखते हैं. मनकुराद Mankurad: पर्यटकों को लुभाने वाली अपनी मनमोहक उष्णकटिबंधीय सुगंध के लिए प्रसिद्ध है ये आम. इस आम को जीआई-टैग प्राप्त हो चुका है. इसका सेवन आप जरूर करें, अगर आपको ये कहीं भी मिल जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google लक्ष्मणभोग Lakshmanbhog: पश्चिम बंगाल का यह आम ऐसे समय में आता है, जब अधिकांश किस्में मुरझाने लगती हैं. इसका सही समय, आकार और भरपूर स्वाद किसानों को गर्मी के मौसम में आपूर्ति में भारी कमी के दौरान बेहतर कीमतें प्राप्त करने में मदद करता है. नूर जहां Noor Jahan: मध्य प्रदेश में नूर जहां आम मिलता है. इस आम का आकार काफी विशाल होता है, इसलिए ये अधिक मशहूर है. इसकी दुर्लभता और आकर्षक रूप-रंग इसे वायरल कर देता है, जिसके चलते लोग फार्म का दौरा करने और सीधे बिक्री करने के लिए प्रेरित होते हैं. फ़ज़ली Fazli : फजली आम बंगाल और बिहार में काफी लोकप्रिय है. यह पल्पिंग और प्रसंस्करण के लिए आदर्श है. इस आम की इंडस्ट्रियल मांग भी खूब होती है. इसे बेचने से कोई नफा-नुकसान नहीं होता है, बल्कि पूरे साल आय आने की स्थिरता की गारंटी बनी रहती है. गुलाब खास Gulab Khas: अपनी विशिष्ट गुलाब जैसी सुगंध के कारण मशहूर है. यह आम उपहार देने के लिए आदर्श है. इसकी अनूठी सुगंध शहरी खरीदारों और प्रीमियम फ्रूट सब्सक्रिप्शन बॉक्स ग्राहकों को आकर्षित करती है, जो इसके लिए अधिक कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
टोल प्लाजा पर अब नहीं रुकेंगी गाड़ियां:सूरत में देश का पहला बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम हुआ लॉन्च, रियल टाइम में कट जाएगा पैसा

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम लॉन्च किया। यह सिस्टम गुजरात में सूरत-भरूच सेक्शन के एनएच-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा पर शुरू किया गया है, जिससे वाहन बिना रुके टोल दे सकेंगे। बैरियर-फ्री टोलिंग मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टेक्नोलॉजी पर आधारित है। यह 120 की स्पीड से भी गुजरने वाली गाड़ियों को बिना रुके टोल पॉइंट से गुजरने की सुविधा देती है। पारंपरिक टोल प्लाजा पर जहां फिजिकल बैरियर होते हैं वहीं यह सिस्टम सेंसर और कैमरों से लैस ओवरहेड फ्रेम का इस्तेमाल करता है, ताकि गाड़ियों की अपने-आप पहचान हो सके और टोल शुल्क रियल टाइम में काट लिया जाए। 120 की स्पीड से भी गुजरने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़ लेगें Ai कैमरे यह सिस्टम FASTag को ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ता है। हाई-परफॉर्मेंस वाले एआई कैमरे 120 किमी की स्पीड से भी गुजरने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं, जबकि RFID रीडर FASTag स्टिकर को स्कैन करते हैं। इसके बाद टोल की रकम सीधे लिंक्ड अकाउंट से काट ली जाती है। अगर किसी गाड़ी में FASTag काम नहीं कर रहा है या गाड़ी पर फास्टैग नहीं लगा है तो कैमरा नंबर प्लेट के जरिए गाड़ी की पहचान कर मालिक को ई-नोटिस भेज देता है। यात्रा समय में कमी और हाईवे पर जाम घटेगा इस प्रणाली से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी बल्कि हाईवे पर लगने वाले जाम में भी कमी आएगी। साथ ही दावा किया जा रहा है कि ईंधन की बचत भी होगी। वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी और टोल संचालन में कम से कम लोगों की जरूरत होगी। नए सिस्टम से ईंधन की होगी बचत मंत्रालय के अनुसार, इस सिस्टम से यात्रा का समय कम होगा, हाईवे पर जाम घटेगा, ईंधन की बचत होगी, वाहन प्रदूषण कम होगा और टोल संचालन में मानव हस्तक्षेप भी कम होगा। बयान में कहा गया कि एमएलएफएफ की शुरुआत भारत के टोल सिस्टम के डिजिटलीकरण और राष्ट्रीय राजमार्गों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। आम लोगों के जीवन को आसान बनाएगा सिस्टम: गडकरी गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह अत्याधुनिक प्रणाली वाहनों को बिना रुके निर्बाध टोल भुगतान की सुविधा देती है। इसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) और फास्टैग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया गया है। उन्होंनेकहा कि यह बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम आम लोगों के जीवन को आसान बनाएगा और व्यापार करने में भी सुविधा देगा, क्योंकि इससे माल और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही तेज और अधिक प्रभावी होगी। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल ₹28 महंगा होने की खबरें गलत:सरकार बोली- दाम बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹25-28 प्रति लीटर बढ़ोतरी की खबरों को सरकार ने गलत बताया है। आज यानी 23 अप्रैल को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने कहा कि दाम बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ये खबरें भ्रामक हैं और डर फैलाने के लिए फैलाई जा रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…








