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बेटे के गम में मां की मौत, सदमा कैसे ले लेता है जान, इमोशनल शॉक पीड़ि‍त को कैसे संभालें?

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Mental Trauma Effects: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. जब मां-बेटे में हुई कहासुनी के बाद बेटे ने जहर खाकर जान दे दी तो मां इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने भी फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली. इलाके में इमोशनल शॉक या भावनात्मक सदमे के कारण हुई इन मौतों ने हलचल पैदा कर दी है. लोग बार-बार यही बात कह रहे हैं कि किसी की मौत का सदमा क्या इतना खतरनाक होता है कि खुदकुशी की कर लेते हैं.

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. कल्‍याणी नागर की मानें तो अचानक का गहरा दुख, तीव्र तनाव, चिंता या ट्रॉमा कई बार व्यक्ति को एक्सट्रीम कदम उठाने पर मजबूर कर देता है. जबकि कई बार इसका साइड इफैक्ट अपने आप ही शरीर पर दिखाई दे जाता है. सदमा भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूपों में नुकसान पहुंचा सकता है.

सदमा ब्रेन और हार्ट पर सीधा असर डाल सकता है. तीव्र भावनात्मक सदमा ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम या हार्ट अटैक जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. अत्यधिक भावनात्मक सदमा व्यक्ति को गहरे अवसाद, हताशा और लाचारी की स्थिति में ले जा सकता है, जहां उसे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आता. बेटे की मौत के बाद संभव है कि इस मां को भी ऐसा ही लगा हो.

हार्ट पर भी असर डालता है सदमा
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार तीव्र सदमा शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन) की अचानक वृद्धि कर देता है. इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती हैं. भावनात्मक सदमा अचानक हार्ट अटैक के लक्षण पैदा कर सकता है, जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना. कुछ मामलों में यह हार्ट फेल्योर या अरिदमिया (Arrhythmia) का कारण बन जाता है, खासकर पहले से हृदय रोग वाले लोगों में.

कैसे पहचानें खतरे के संकेत?
ऐसे में डॉक्टर और एसोसिएशन अक्सर सलाह देते हैं कि जब भी कोई बेहद दुख की घटना हो जाए तो उससे जुड़े व्यक्ति का खास ध्यान रखना जरूरी है, हल्की सी लापरवाही भी जानलेवा हो जाती है. सदमा एक्यूट और क्रॉनिक दोनों ही स्थितियों में खराब है.

सदमे में व्यक्ति चुप रह सकता है, रो सकता है या अचानक बेहोश हो सकता है. उसके सीने में दबाव, बांहों या जबड़े में दर्द, पसीना आना, उल्टी जैसा महसूस हो सकता है. आईसीएमआर की एक रिपोर्ट कहती है कि तीव्र मानसिक तनाव हार्ट अटैक को ट्रिगर कर देता है.

सदमे को कैसे संभालें?

  1. अगर आपके पास सदमे का पीड़ित है तो उसे शांत जगह पर बिठाएं, गहरी सांस लेने को कहें.
  2. अगर उसके सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं. ECG और ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं.
  3. अगर वह फिर ठीक से व्यवहार न करे तो उसे मानसिक सहायता दें, सदमे की काउंसलिंग कराएं. परिवार उसके आसपास रहे, उससे लगातार बात करें, उसे अकेले न छोड़ें.
  4. . अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है तो उसे झटके से कोई दुखभरी सूचना न दें और उसे लगातार व्यायाम करने व दवा लेने के लिए प्रेरित करें.

क्या सदमे से मिल सकती है मुक्ति
भावनात्मक सदमा स्ट्रैस कार्डियोमायोपैथी पैदा कर सकता है, जो ज्यादातर मामलों में रिवर्सिबल होता है, लेकिन समय पर इलाज जरूरी है. AIIMS और PGI चंडीगढ़ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ कहते हैं कि तीव्र दुख में हृदय की निगरानी रखें. योग करें, व्यायाम करें, लोगों से मिलें. स्वस्थ जीवनशैली और मजबूत सामाजिक समर्थन सदमे के प्रभाव को कम कर सकता है.

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बेटे के गम में मां की मौत, सदमा कैसे ले लेता है जान, इमोशनल शॉक पीड़ि‍त को कैसे संभालें?

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Mental Trauma Effects: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. जब मां-बेटे में हुई कहासुनी के बाद बेटे ने जहर खाकर जान दे दी तो मां इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने भी फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली. इलाके में इमोशनल शॉक या भावनात्मक सदमे के कारण हुई इन मौतों ने हलचल पैदा कर दी है. लोग बार-बार यही बात कह रहे हैं कि किसी की मौत का सदमा क्या इतना खतरनाक होता है कि खुदकुशी की कर लेते हैं.

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. कल्‍याणी नागर की मानें तो अचानक का गहरा दुख, तीव्र तनाव, चिंता या ट्रॉमा कई बार व्यक्ति को एक्सट्रीम कदम उठाने पर मजबूर कर देता है. जबकि कई बार इसका साइड इफैक्ट अपने आप ही शरीर पर दिखाई दे जाता है. सदमा भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूपों में नुकसान पहुंचा सकता है.

सदमा ब्रेन और हार्ट पर सीधा असर डाल सकता है. तीव्र भावनात्मक सदमा ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम या हार्ट अटैक जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. अत्यधिक भावनात्मक सदमा व्यक्ति को गहरे अवसाद, हताशा और लाचारी की स्थिति में ले जा सकता है, जहां उसे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आता. बेटे की मौत के बाद संभव है कि इस मां को भी ऐसा ही लगा हो.

हार्ट पर भी असर डालता है सदमा
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार तीव्र सदमा शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन) की अचानक वृद्धि कर देता है. इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती हैं. भावनात्मक सदमा अचानक हार्ट अटैक के लक्षण पैदा कर सकता है, जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना. कुछ मामलों में यह हार्ट फेल्योर या अरिदमिया (Arrhythmia) का कारण बन जाता है, खासकर पहले से हृदय रोग वाले लोगों में.

कैसे पहचानें खतरे के संकेत?
ऐसे में डॉक्टर और एसोसिएशन अक्सर सलाह देते हैं कि जब भी कोई बेहद दुख की घटना हो जाए तो उससे जुड़े व्यक्ति का खास ध्यान रखना जरूरी है, हल्की सी लापरवाही भी जानलेवा हो जाती है. सदमा एक्यूट और क्रॉनिक दोनों ही स्थितियों में खराब है.

सदमे में व्यक्ति चुप रह सकता है, रो सकता है या अचानक बेहोश हो सकता है. उसके सीने में दबाव, बांहों या जबड़े में दर्द, पसीना आना, उल्टी जैसा महसूस हो सकता है. आईसीएमआर की एक रिपोर्ट कहती है कि तीव्र मानसिक तनाव हार्ट अटैक को ट्रिगर कर देता है.

सदमे को कैसे संभालें?

  1. अगर आपके पास सदमे का पीड़ित है तो उसे शांत जगह पर बिठाएं, गहरी सांस लेने को कहें.
  2. अगर उसके सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं. ECG और ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं.
  3. अगर वह फिर ठीक से व्यवहार न करे तो उसे मानसिक सहायता दें, सदमे की काउंसलिंग कराएं. परिवार उसके आसपास रहे, उससे लगातार बात करें, उसे अकेले न छोड़ें.
  4. . अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है तो उसे झटके से कोई दुखभरी सूचना न दें और उसे लगातार व्यायाम करने व दवा लेने के लिए प्रेरित करें.

क्या सदमे से मिल सकती है मुक्ति
भावनात्मक सदमा स्ट्रैस कार्डियोमायोपैथी पैदा कर सकता है, जो ज्यादातर मामलों में रिवर्सिबल होता है, लेकिन समय पर इलाज जरूरी है. AIIMS और PGI चंडीगढ़ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ कहते हैं कि तीव्र दुख में हृदय की निगरानी रखें. योग करें, व्यायाम करें, लोगों से मिलें. स्वस्थ जीवनशैली और मजबूत सामाजिक समर्थन सदमे के प्रभाव को कम कर सकता है.

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