Thursday, 15 Oct 2026 | 08:06 AM

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भारत में मिलने वाले ये 10 गर्मियों के फल, जिन्हें आप भुला चुके हैं, फायदे और स्वाद में जबरदस्त, आपके फलों की लिस्ट में हैं शामिल?

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Forgotten summer fruits from india: खानपान में मौसमी चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए. सर्दियों में जो फल-सब्जियां मिलती हैं, उसे जरूर खाना चाहिए. उसी तरह गर्मियों में मिलने वाले फलों, हरी सब्जियों को भी अपनी डाइट में हर दिन शामिल करना जरूरी है. गर्मी के मौसम में कई ऐसे फल होते हैं, जो पानी से भरपूर होते हैं. जैसे खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, खीरा, लीची, आम आदि. इन फलों का सेवन तो आप हर दिन करते हैं, लेकिन गर्मियों में मिलने वाली फलों की लिस्ट यहीं समाप्त नहीं होती है. कई ऐसे फल भी हैं, जिनको लोग भूल चुके हैं. इनमें से कुछ तो मार्केट में मिलते भी हैं, लेकिन लोग इन्हें कम ही खरीदते हैं. आपको यहां कुछ ऐसे फलों के बारे में बता रहे हैं, जो गर्मियों के लिए बेस्ट और बेहद ही फायदेमंद साबित होते हैं, लेकिन लोग इनका सेवन न के बराबर करते हैं. फालसा- डार्क बैंगनी रंग का फालसा फल गर्मियों में खाए जाने वाला फल है, लेकिन काफी लोग इसके बारे में नहीं जानते या इसे बेकार समझ कर खरीदते नहीं हैं. फालसा शरीर को ठंडक देता है. स्वाद में खट्टा-मीठा फालसा खाने से पाचन दुरुस्त रहता है. शरीर को कई फायदे मिलते हैं. लसोड़ा- शायद आपने इस फल का नाम ना सुना हो, लेकिन ये गर्मियों में खाया जाने वाला फल है. इसे इंग्लिश में ग्लू बेरी (Glue berry) कहते हैं. लसोड़ा की तासीर ठंडी होती है. ऐसे में गर्मियों में ये शरीर को ठंडक प्रदान करता है. गैस दूर करता है, पेट को हेल्दी रखता है. पेट की गर्मी, कब्ज आदि को दूर करता है. ये देखने में हरे रंग का गोल और छोटा सा एक जंगली फल है. इससे अचार और सब्जी बनती है. हालांकि, यह सिर्फ दो महीने मई और जून में ही मिलता है. भोजन में इसके कम उपयोग के कारण शहरों में ये बहुत अधिक नजर नहीं आता है. लसोड़ा फल सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. जंगली जलेबी- जलेबी की तरह टेढ़ी-मेढ़ी दिखने वाली जंगली जलेबी एक जंगली फल है. इसके अंदर काला बीज होता है. इसके अंदर मीठा, सफेद रंग का गूदा होता है. ये एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस आदि से भरपूर होती है. इसे खाने से पाचन सही रहता है. इम्यूनिटी बूस्ट होती है. हड्डियां मजबूत होती हैं. हालांकि, अब जंगली जलेबी की खेती बहुत कम होती है, जिससे ये नॉर्मल मार्केट में नहीं मिलती है. जंगली जलेबी करोंदा- यह छोटा सा अंडाकार और रंग में सफेद-गुलाबी होता है, जिसका अचार भी बनता है. स्वाद में खट्टे करोंदे को भारत की जंगली क्रैनबेरी भी कहते हैं. हालांकि, इसका सेवन अब अचार तक ही सीमित हो गया है. वैसे आपको ठेले पर करोंदा दिखे तो जरूर खरीद कर इसे खाएं. सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है ये फल. गर्मियों में आप सब्जी, चटनी बनाकर सेवन कर सकते हैं. विटामिन सी, आयरन से भरपूर करोंदा, पाचन तंत्र, इम्यूनिटी, ब्लड प्रेशर को सही रखता है. शहतूत- इस फल का रंग डार्क बैंगनी होता है. इसका स्वाद मीठा होता है. ये फल जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए मार्केट में ये जल्दी नहीं दिखाई देता है. गर्मियों में ये पाचन सही रखता है. इम्यूनिटी बूस्ट करता है. खून की कमी दूर करता है. कोलेस्ट्रॉल को नॉर्मल करता है. हार्ट डिजीज, कैंसर, शुगर लेवल हाई होने से बचाता है. आपको कहीं भी इस मौसम में शहतूत दिखे तो इसे जरूर खाएं. शहतूत फल कमरख- काटने पर सितारे जैसी बनावट में दिखने वाला कमरख यानी स्टार फ्रूट स्वाद में खट्टा-मीठा होता है. गर्मियों में इसे खाने से शरीर डिहाइड्रेशन से बचा रहता है. हालांकि, कमरख का सेवन लोग बहुत ही कम करते हैं. यह विटामिन सी, फाइबर से भरपूर होता है. पाचन तंत्र के लिए हेल्दी है. रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. रामफल- ये फल सीताफल (custard apple) का ही एक रिश्तेदार. यह फल तब अधिक पकता है, जब गर्मी अपने चरम पर होती है. इसकी बनावट सीताफल जैसी होती है, लेकिन यह कम मीठा और अधिक मिट्टी जैसा स्वाद वाला होता है. ऐसा माना जाता है कि यह शरीर को भीषण गर्मी और धूप से होने वाली एलर्जी से निपटने में मदद करता है. रामफल खिरनी- ये फल भी गर्मियों का है, जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है. यह भारतीय जंगलों में पाया जाता है. पीले-नारंगी रंग का ये छोटा सा फल स्वाद में मीठा होता है. फाइबर, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ये फल गर्मियों में मई के महीने में कुछ ही दिनों के लिए मिलता है. संभवत: इसलिए भी अधिकतर लोग इस फल के बारे में नहीं जानते होंगे. यह फल जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए व्यावसायिक रूप से ये फल बहुत कम दिखाई देता है. कोकम – यह चमकीला लाल फल गर्मियों में मिलने वाला एक दुर्लभ फ्रूट है. स्वाद में ये बेहद खट्टा होता है. यह कुछ ही दिनों में खराब हो जाता है. गर्मियों में इससे एनर्जी ड्रिंक, शरबत बनाकर पी सकते हैं. कोकम (Garcinia indica) एक प्राकृतिक शीतलक है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडक, हाइड्रेशन प्रदान करता है. लू से बचाता है. पाचन दुरुस्त रखता है. वजन घटाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है. कोकम फल चलता – पूर्वी भारत के दलदलों और जंगलों में पाया जाने वाला यह फल कठोर, कुरकुरे कवर से सुरक्षित रहता है. इसका स्वाद खट्टा-कड़वा होता है. चटनी और दाल में इसका उपयोग अभी भी होता है, लेकिन आजकल गर्मियों में कच्चे फल के रूप में इसकी खपत तेजी से घट रही है.

श्रीलंका विमेंस ने बांग्लादेश से टी20 सीरीज जीती:दूसरे टी-20 में 21 रन से हराया; तीन मैच की सीरीज में 2-0 से आगे

श्रीलंका विमेंस ने बांग्लादेश से टी20 सीरीज जीती:दूसरे टी-20 में 21 रन से हराया; तीन मैच की सीरीज में 2-0 से आगे

श्रीलंका महिला टीम ने सिलहट में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में बांग्लादेश को 21 रन से हराकर 2-0 से अजेय बढ़त बना ली। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 154 रन बनाए, जवाब में बांग्लादेश निर्धारित ओवर में 5 विकेट पर रन ही बना सकी। हर्षिता समराविक्रमा ने 29 गेंद पर 49 रन बनाए श्रीलंका की शुरुआत खराब रही। टीम ने 22 रन पर ही हसीनी परेरा का विकेट गंवा दिया। वह 11 गेंद पर 9 रन बनाकर आउट हुई। दूसरे विकेट के लिए कप्तान चमारी अटापट्टू और इमेशा दुलानी के बीच 44 रन की साझेदारी हुई। इमेशा ने 25 गेंद पर 27 रन, जबकि अटापट्टू ने 37 गेंद पर 42 रन बनाए। श्रीलंका ने आखिरी 4 ओवर में 60 रन बनाए। इस दौरान हर्षिता समराविक्रमा ने 29 गेंदों पर 49 रन की पारी खेली। उन्होंने 4 चौके और 2 छक्के लगाए। नीलाक्षिका सिल्वा ने नाबाद 22 रन बनाए। बांग्लादेश की ओर से फारिहा, सुल्ताना, नाहिदा और रितु ने 1-1 विकेट लिए। श्रीलंकाई स्पिनर्स के सामने बांग्लादेश ने घुटने टेके बांग्लादेश के लिए दिलारा अख्तर और जुएरिया फर्दोस की ओपनिंग जोड़ी ने 46 रन जोड़े। पावरप्ले के बाद श्रीलंका के स्पिनर्स ने रन गति को धीमा रखा। 7 से 14 ओवर तक बांग्लादेश सिर्फ 39 रन ही जोड़ सकी और 4 विकेट गवां दिए। इसके बाद जरुरी रन रेट बढ़ता ही गया और बांग्लादेश मैच हार गई। शर्मीन अख्तर ने 47 गेंद पर नाबाद 44 रन की धीमी पारी खेली और बांग्लादेश की टॉप स्कोरर रही। श्रीलंकाई स्पिनर कविशा दिल्हारी ने 4 ओवर में 15 रन देकर 2 विकेट लिए। उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। स्पिनर्स के 12 ओवर में सिर्फ 50 रन ही बने। पहले मैच में श्रीलंका ने 25 रन से जीत दर्ज की थी। 2 मई को सीरीज का तीसरा और आखिरी मैच खेला जाएगा। स्पोर्ट्स यह खबर भी पढ़ें… रियान पराग पर मैच फीस का 25% जुर्माना लगा:ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट पीते दिखे थे, एक डिमेरिट पॉइंट भी मिला पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच के दौरान राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग को IPL के कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। मैच रेफरी ने उन पर कड़ा एक्शन लेते हुए जुर्माना और पेनल्टी पॉइंट लगाया है। पूरी खबर पढ़ें…

श्रीलंका विमेंस ने बांग्लादेश से टी20 सीरीज जीती:दूसरे टी-20 में 21 रन से हराया; तीन मैच की सीरीज में 2-0 से आगे

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जालंधर की युवती की ओमान में संदिग्ध मौत:मां ने एजेंट पर शारीरिक शोषण-उत्पीड़न का लगाया आरोप; आरोपी दफ्तर बंद कर फरार

जालंधर की युवती की ओमान में संदिग्ध मौत:मां ने एजेंट पर शारीरिक शोषण-उत्पीड़न का लगाया आरोप; आरोपी दफ्तर बंद कर फरार

जालंधर के आबादपुरा की रहने वाली एक मां ने अपनी बेटी अंकिता की ओमान में हुई संदिग्ध मौत के लिए एक ट्रैवल एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मां का दावा है कि एजेंट ने उसे धोखे से विदेश भेजा, जहां उसका शारीरिक शोषण और मानसिक उत्पीड़न किया गया। 24 अप्रैल को अंकिता की मौत की खबर मिलने के बाद आरोपी एजेंट दफ्तर बंद कर फरार है। पीड़ित परिवार ने पुलिस कमिश्नर से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपी की गिरफ्तारी और बेटी के शव को वापस लाने की मांग की है। सुनहरे भविष्य का झांसा देकर बुना मौत का जाल आबादपुरा की निवासी मोनिका ने अपनी बेटी अंकिता के बेहतर भविष्य के लिए एक विज्ञापन देखकर एजेंट जसकरण सिंह से संपर्क किया था। अंबिका टावर स्थित ‘जे.आर. एंटरप्राइजेज’ के मालिक जसकरण ने भरोसा दिलाया था कि अंकिता को ओमान में घरेलू काम के लिए 30,000 रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा। इस झांसे में आकर परिवार ने 71,000 रुपये और पासपोर्ट सौंप दिए, जिसके बाद 2 अक्टूबर 2025 को अंकिता को दिल्ली से ओमान भेज दिया गया। फोन पर रो-रोकर सुनाती थी प्रताड़ना ओमान पहुंचने के कुछ समय बाद ही अंकिता के साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया। वह 22 अप्रैल तक अपनी मां के संपर्क में रही। फोन पर वह अकसर रोते हुए बताती थी कि वहां उसका शारीरिक शोषण किया जा रहा है और उसे बुरी तरह पीटा जाता है। मां ने जब एजेंट जसकरण से अपनी बेटी को वापस बुलाने की गुहार लगाई, तो वह हर बार झूठे दिलासे देकर उन्हें टालता रहा। 24 अप्रैल को आई मौत की खबर अंकिता का संपर्क 22 अप्रैल के बाद अचानक टूट गया। इसके बाद ओमान में काम करने वाली एक अन्य महिला ने फोन कर परिवार को झकझोर देने वाली खबर दी। उसने बताया कि 24 अप्रैल 2026 को अंकिता की मौत हो गई है। उस महिला ने भी पुष्टि की कि अंकिता को भारी शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था। जैसे ही अंकिता की मौत की खबर फैली, आरोपी एजेंट जसकरण अपना दफ्तर बंद कर फरार हो गया। पुलिस प्रशासन से न्याय की मांग बेटी को खो चुकी लाचार मां ने अब पुलिस कमिश्नर के पास इंसाफ की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि एजेंट को विदेश भागने से पहले गिरफ्तार किया जाए और अंकिता के शव को भारत लाने की व्यवस्था की जाए। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। यह घटना एक बार फिर उन फर्जी एजेंटों के काले सच को उजागर करती है जो मासूमों को सुनहरे सपनों के नाम पर मौत के कुएं में धकेल देते हैं।

गर्मियों में फ्रूट कस्टर्ड रेसिपी: गर्मी में बिना चीनी के घर में बनी क्रीमी पसंद कस्टर्ड, बच्चे भी हो जाएंगे दीवाने; नोट करें आसान रेसिपी

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 2 कप दूध, 1 बड़ा चम्मच कस्टर्ड पाउडर, 1 कप कटे हुए फल, 5-6 खजूर या 2 नारियल शहद, 4-5 बादाम, 4-5 काजू, 2-3 इलायची। आप क्रूड तो केवल एक नमूना का उपयोग करके भी कस्टर्ड तैयार कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: एक पैन में दूध को मध्यम आंच पर गर्म करें। छोटे सा दूध के अलग-अलग हिस्सों में कस्टर्ड पाउडर नासा लें ताकि गुठलियां न रहें। छवि: फ्रीपिक जब दूध के मसाले लगें, तो इसमें कस्टर्ड वाला मिक्स और लगातार मसाले शामिल रहते हैं। 3-4 मिनट में दूध की उछाल होना। अब कटे हुए खजूर या रखे हुए नारियल। छवि: एआई गैस बंद करके कस्टर्ड को ठंडा होने दें। फिर इसे फ़र्ज़ी में 1-2 घंटे के लिए रख लें। सर्व करने से पहले इसमें कटे हुए चित्र शामिल करें और अच्छे से मिक्स करें। छवि: फ्रीपिक कूल-ठंडा डॉयलेक कस्टर्ड बाउल में शुरुआती और ऊपर से कुछ डॉक्युमेंट्री सहायक उपकरण सर्व कर सकते हैं। आप इसे कोचिंग के साथ भी खरीद सकते हैं। छवि: एआई अनानास या कीवी कास्ट जैसे बहुत से आद्योपांत फल को गोद में लेने से इसका स्वाद प्रभावित हो सकता है। हमेशा फल ठंडा होने के बाद ही, अन्य कस्टर्ड वसा प्राप्त की जा सकती है। छवि: फ्रीपिक यदि अधिक मात्रा में क्रीमी टेक्सचर चाहिए तो थोड़ी सी क्रीम भी मिल सकती है। गर्मी में यह बिना चीनी वाला लाइका कस्टर्ड न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी मज़ेदार है। छवि: फ्रीपिक इससे कस्टर्ड में शामिल हो जाएंगे और चीनी की जरूरत नहीं होगी। इलायची पाउडर और बैलेस्टिक्स स्टैमिना से स्टॉल। एक बार इसे घर पर जरूर बताएं, बच्चा ही नहीं बड़ा भी हो जाएगा। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)फ्रूट कस्टर्ड रेसिपी(टी)फ्रूट कस्टर्ड रेसिपी(टी)गर्मियों के लिए कस्टर्ड रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन कस्टर्ड रेसिपी(टी)फ्रूट कस्टर्ड(टी)ग्रीष्मकालीन विशेष रेसिपी(टी)स्वस्थ फल रेसिपी(टी)फ्रूट रेसिपी(टी)गर्मियों के लिए मीठी डिश(टी)ठंडी रेसिपी

देवास कलेक्टर की कल पीपरी गांव में रात्रि चौपाल:ग्रामीणजनों से रूबरू होकर खुद सुनेंगे समस्याएं

देवास कलेक्टर की कल पीपरी गांव में रात्रि चौपाल:ग्रामीणजनों से रूबरू होकर खुद सुनेंगे समस्याएं

जनसेवा और नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह कल (1 मई) तहसील उदयनगर की ग्राम पंचायत पीपरी में विकासखंड स्तरीय शिविर एवं रात्रि ग्राम चौपाल का आयोजन करेंगे। ग्राम पंचायत पीपरी में दोपहर को विकासखंड स्तरीय शिविर आयोजित होगा। इसमें सभी विभागों के जिला प्रमुख उपस्थित रहेंगे और आवेदकों से सीधे आवेदन प्राप्त करेंगे। मौके पर ही दस्तावेजों का परीक्षण कर समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाएगा। शिविर के बाद शाम 7 बजे से ग्राम चौपाल का आयोजन होगा। चौपाल में कलेक्टर ऋतुराज सिंह उपस्थित जनसमूह और आवेदकों से रूबरू होंगे। कलेक्टर सिंह व्यक्तिगत रूप से आवेदकों की बात सुनकर उनकी समस्याओं का निराकरण करेंगे। ग्रामीण अपनी समस्याएं सीधे कलेक्टर को बता सकेंगे। शिविर एवं ग्राम चौपाल में समस्त जिला अधिकारी उपस्थित रहेंगे। शासन की मंशा के अनुरूप, प्रशासन को जनता के द्वार तक ले जाने के लिए सभी अधिकारी रात्रि भोजन के पश्चात ग्राम पीपरी में ही रात्रि विश्राम भी करेंगे।

पन्ना में तेज हवाओं से उखड़ गए पेड़:पन्ना-अमानगंज मार्ग हुआ बंद, कई गांवों में बिजली गुल

पन्ना में तेज हवाओं से उखड़ गए पेड़:पन्ना-अमानगंज मार्ग हुआ बंद, कई गांवों में बिजली गुल

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में गुरुवार 30 अप्रैल की शाम को तेज आंधी और बेमौसम बारिश ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और पन्ना-अमानगंज मार्ग मुख्य रूप से प्रभावित हुआ। पिपरवाह निवासी ध्रुव अवस्थी ने बताया कि द्वारी और पिपरवाह के बीच दर्जनों बिजली के खंभे और विशालकाय पेड़ गिर गए। इससे पन्ना-अमानगंज मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया, जिससे सड़क के दोनों ओर लगभग 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यात्री फंसे रहे। ओम प्रकाश विश्वकर्मा के अनुसार, बिजली के खंभे गिरने से पिपरवाह सहित दर्जनों गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई ग्रामीणों के घरों की छतें (छप्पर और खपरैल) उड़ गईं। जगह-जगह गिरे पेड़ों ने रास्तों को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है। तूफान के बाद हुई मूसलाधार बारिश ने मलबे और बिजली के तारों को हटाने के काम को और भी मुश्किल बना दिया। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि जल्द से जल्द मार्ग से मलबा हटाकर यातायात सुचारू किया जा सके और क्षतिग्रस्त खंभों को ठीक कर बिजली बहाल की जा सके।

मोटापे की ये कैसी आहट, 14 में से 1 बच्चे का भी वजन कर रहा लिमिट क्रॉस, क्या होगा इसका परिणाम

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भारत में डायबिटीज, हाई बीपी और दिल की बीमारियों को लेकर चिंता पहले से बनी हुई है, लेकिन अब एक नई समस्या तेजी से सामने आ रही है. मोटापा अब सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है. हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, स्कूल जाने वाले लगभग हर 14 में से 1 बच्चे का वजन सामान्य सीमा से ज्यादा है. यानी बड़ी संख्या में बच्चे कम उम्र में ही मोटापे की चपेट में आ रहे हैं. यह सिर्फ दिखने का मामला नहीं, बल्कि आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है. TOI में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की जीवनशैली पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है. पहले बच्चे मैदान में खेलते थे, दौड़ते थे और ज्यादा एक्टिव रहते थे. अब उनका समय मोबाइल, टीवी, टैबलेट और वीडियो गेम में ज्यादा बीतता है. घंटों स्क्रीन के सामने बैठने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे कैलोरी बर्न नहीं होती और वजन बढ़ने लगता है. खानपान भी इस समस्या की बड़ी वजह बन चुका है. आजकल बच्चों को घर के ताजे खाने से ज्यादा पैकेट वाले स्नैक्स, चिप्स, बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और मीठे ड्रिंक्स पसंद आने लगे हैं. इनमें कैलोरी ज्यादा होती है, लेकिन जरूरी पोषण कम मिलता है. बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना, मीठी चीजें ज्यादा लेना और समय पर भोजन न करना भी वजन बढ़ाने का कारण बनता है. कम नींद और पढ़ाई का दबाव भी बच्चों की सेहत पर असर डाल रहा है. कई बच्चे देर रात तक जागते हैं, सुबह जल्दी उठते हैं और पूरा आराम नहीं कर पाते. नींद पूरी न होने से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे भूख ज्यादा लग सकती है और वजन बढ़ने की संभावना रहती है. पढ़ाई और कोचिंग के कारण खेलकूद का समय भी कम हो गया है. डॉक्टरों के अनुसार, बचपन का मोटापा आगे चलकर बड़ी बीमारियों की वजह बन सकता है. ज्यादा वजन वाले बच्चों में कम उम्र में ही ब्लड शुगर बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस, फैटी लिवर, सांस फूलना, घुटनों पर दबाव और हार्मोनल गड़बड़ी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. यही बच्चे बड़े होकर डायबिटीज, दिल की बीमारी और हाई कोलेस्ट्रॉल के शिकार हो सकते हैं. यह समस्या अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों और कस्बों में भी बच्चों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है. बाहर का खाना, कम खेलकूद और ज्यादा स्क्रीन टाइम हर जगह आम होता जा रहा है. इसलिए मोटापा अब देशभर में बढ़ती चुनौती बन गया है. इससे बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि बच्चों की दिनचर्या सुधारी जाए. रोज कम से कम एक घंटा आउटडोर खेल या फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है. घर का ताजा खाना, फल, सब्जियां, दाल, दूध और प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा दें. मीठे ड्रिंक्स, पैकेज्ड स्नैक्स और जंक फूड सीमित करें. साथ ही बच्चों की नींद पूरी हो, यह भी ध्यान रखें. माता-पिता की भूमिका भी बहुत अहम है. अगर घर में सभी हेल्दी खानपान अपनाएंगे और एक्टिव रहेंगे, तो बच्चे भी वही सीखेंगे. उन्हें डांटने के बजाय प्यार से सही आदतें सिखाना जरूरी है.

पन्ना में अंधे हत्याकांड का खुलासा:दोस्त ने ही की की चाकू मारकर हत्या, पैसों को लेकर था विवाद

पन्ना में अंधे हत्याकांड का खुलासा:दोस्त ने ही की की चाकू मारकर हत्या, पैसों को लेकर था विवाद

पन्ना पुलिस ने ग्राम बम्हौरी में हुए एक हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने पुराने पैसों के लेनदेन के विवाद में अपने दोस्त अनिल दहायत की चाकू मारकर हत्या करने वाले आरोपी आलोक सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया है। यह घटना 28 अप्रैल की शाम को सामने आई थी, जब ग्राम बम्हौरी के पास ‘भटवा की तलैया’ में अनिल दहायत का खून से लथपथ शव मिला था। मृतक के पिता बैजू दहायत की शिकायत पर अमानगंज थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मामला (धारा 103(1) BNS) दर्ज किया गया था। थाना प्रभारी अमानगंज रवि सिंह जादौन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 30 अप्रैल को जांच शुरू की। जांच के दौरान गांव के ही आलोक सिंह राजपूत पर संदेह गहराया। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस को पता चला कि आलोक सिंह, जो पैर से लंगड़ाकर चलता है, घायल अवस्था में कुदरा मोड़ के पास भागने की फिराक में था। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपी आलोक सिंह राजपूत ने बताया कि मृतक अनिल दहायत के साथ उसका पैसों को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। 28 अप्रैल की शाम इसी बात पर दोनों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद आलोक ने एक घरेलू चाकू से अनिल पर कई वार किए। इन वारों से अनिल की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू झरकुआ मोड़ पुलिया के पास से बरामद कर लिया है। इस अज्ञात कत्ल का पर्दाफाश करने में थाना प्रभारी रवि सिंह जादौन, सउनि राघवेन्द्र प्रधान, प्र.आर. शिवम शर्मा, गणेश सिंह, देवनारायण शुक्ला, आरक्षक तुलसी, मेहरवान सिंह, विश्वास शुक्ला, अखिलेश पाल और मुनेन्द्र सिंह का विशेष योगदान रहा।

पत्नी ने पति संग रहने से किया इनकार:हाईकोर्ट में अवैध बंधक आरोप खारिज, प्रेमी संग रहने पर बनी सहमति, पिता के पास रहेगा बेटा

पत्नी ने पति संग रहने से किया इनकार:हाईकोर्ट में अवैध बंधक आरोप खारिज, प्रेमी संग रहने पर बनी सहमति, पिता के पास रहेगा बेटा

ग्वालियर हाईकोर्ट में एक वैवाहिक विवाद से जुड़ा मामला सुनवाई के दौरान ही अप्रत्याशित मोड़ लेता नजर आया। पत्नी को अवैध रूप से बंधक बनाए जाने के गंभीर आरोपों के बीच जब महिला को कोर्ट में पेश किया गया तो पूरे मामले की दिशा ही बदल गई। दरअसल, पति लाखन कडेरे ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को प्रतिवादी पक्ष द्वारा जबरन अपने पास रखा गया है और उसे उससे मिलने नहीं दिया जा रहा। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को पेश करने के निर्देश दिए थे। निर्देश के पालन में जब महिला को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया और न्यायालय ने उसकी स्वतंत्र इच्छा जाननी चाही, तो महिला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं है। उसने बताया कि वह अपनी मर्जी से राकेश नामक व्यक्ति के साथ रह रही है और पति के साथ वापस नहीं जाना चाहती। अवैध बंधक बनाए जाने का आरोप कमजोर पड़ा महिला के इस बयान के बाद ‘अवैध बंधक’ बनाए जाने का आरोप स्वतः ही कमजोर पड़ गया और याचिका का मूल आधार खत्म हो गया। इसके बाद कोर्ट में ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई, जिसमें आपसी सहमति से विवाद को समाप्त करने का रास्ता निकाला गया। समझौते के तहत पति लाखन कडेरे ने पत्नी को तलाक देने पर सहमति जताई। हालांकि, उसने स्थायी गुजारा भत्ता (एलिमनी) न देने की शर्त रखी, जिसे महिला ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही, दोनों के चार वर्षीय बेटे की कस्टडी पिता के पास रखने पर भी सहमति बनी। इस निर्णय पर महिला के पिता ने भी अपनी मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट ने कहा- सुनवाई का औचित्य नहीं दोनों पक्षों के बीच सभी मुद्दों पर सहमति बनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता। कोर्ट ने मामले को निष्फल मानते हुए निपटा दिया। इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वैवाहिक विवादों में अदालत का प्रमुख उद्देश्य पक्षकारों की स्वतंत्र इच्छा और सहमति को महत्व देना होता है। साथ ही, यह भी दर्शाता है कि कई बार अदालत की प्रक्रिया के दौरान ही ऐसे मामलों का समाधान आपसी समझ और सहमति से निकल सकता है।