Wednesday, 23 Sep 2026 | 09:08 PM

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ऑस्ट्रेलिया में सम्मान मिला, भावुक हुईं रानी मुखर्जी:प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटी से सर्वोच्च सम्मान मिला; शाहरुख के बाद सम्मान पाने वालीं दूसरी भारतीय एक्टर

ऑस्ट्रेलिया में सम्मान मिला, भावुक हुईं रानी मुखर्जी:प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटी से सर्वोच्च सम्मान मिला; शाहरुख के बाद सम्मान पाने वालीं दूसरी भारतीय एक्टर

बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया की लॉ ट्रोब यूनिवर्सिटी ने ‘डॉक्टर ऑफ लेटर्स’ (D.Litt.) की मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया है। स्टेज पर यह सम्मान लेते व्यक्त रानी मुखर्जी भावुक दिखाई दीं। मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वेयर में इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) 2026 के दौरान 14 अगस्त को आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया गया। उन्हें तीन दशक के करियर और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों में योगदान के लिए रानी को यह सर्वोच्च उपाधि मिली है। वे शाहरुख खान के बाद ला ट्रोब यूनिवर्सिटी से यह सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय कलाकार बन गई हैं। शाहरुख के बाद सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय कलाकार ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने इससे पहले साल 2019 में शाहरुख खान को सिनेमा और सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट दी थी और उनके नाम पर पीएचडी स्कॉलरशिप की घोषणा की थी। यूनिवर्सिटी के चांसलर जॉन ब्रम्बी एओ ने कहा कि रानी मुखर्जी के काम ने सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय, समानता और समावेश जैसे विषयों पर चर्चा शुरू की है। यूनिवर्सिटी ने महिलाओं, बच्चों और वंचित समुदायों के लिए उनके निरंतर काम की सराहना की। शुरुआत से ही जोखिम भरे रोल चुने: रानी मुखर्जी समारोह में सम्मान स्वीकार करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा कि यह उनके जीवन के सबसे विनम्र और भावुक पलों में से एक है। बचपन में वे अपने माता-पिता और देश को गौरवान्वित करना चाहती थीं और सिनेमा उस सपने को पूरा करने का माध्यम बन गया। रानी ने बताया कि उन्होंने करियर की शुरुआत से ही जोखिम भरे रोल चुने हैं। वे हमेशा ऐसी कहानियों का हिस्सा बनीं, जिन्होंने सबसे पहले उनके दिल को छुआ और लोगों को प्रेरित किया। एक्टिंग में एक्सीलेंस के लिए भी विशेष सम्मान आईएफएफएम 2026 में रानी मुखर्जी को उनकी बेहतरीन एक्टिंग और वैश्विक पहचान के लिए एक विशेष प्रशस्ति पत्र भी दिया गया। फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे ने कहा कि यह सम्मान रानी की कला और सिनेमा की उस ताकत का जश्न है जो दो देशों को जोड़ती है। 13 से 23 अगस्त तक चलने वाले इस फेस्टिवल में भारतीय फिल्मों और कहानियों के प्रभाव को दिखाया जा रहा है। तीन दशक का करियर और सामाजिक मुद्दों पर फिल्में रानी मुखर्जी ने 1990 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने ‘गुलाम’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘साथिया’, ‘हम तुम’, ‘बंटी और बबली’ और ‘युवा’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया। इसके बाद उन्होंने ‘ब्लैक’, ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘हिचकी’ और ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ जैसी फिल्मों के जरिए लैंगिक न्याय, महिलाओं के अधिकार, दिव्यांगों के समावेश और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को बड़े पर्दे पर मजबूती से रखा।

सर्वे- भारत-पाक एक-दूसरे को सबसे बड़ा खतरा मान रहे:दोनों देशों में अच्छे रिश्ते की उम्मीद, लेकिन भरोसा नहीं; रूस और चीन को सहयोगी माना

सर्वे- भारत-पाक एक-दूसरे को सबसे बड़ा खतरा मान रहे:दोनों देशों में अच्छे रिश्ते की उम्मीद, लेकिन भरोसा नहीं; रूस और चीन को सहयोगी माना

अमेरिका के थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के नए सर्वे में भारत और पाकिस्तान के लोगों की सोच में गहरा अंतर सामने आया है। दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को अपना सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। सर्वे के मुताबिक, दोनों देशों के लोग अपने पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं मानते कि दूसरा देश भी रिश्ते सुधारना चाहता है। भारत में 36% लोगों ने रूस को अपना सबसे जरूरी सहयोगी बताया। अमेरिका को 16% लोगों ने चुना। वहीं, पाकिस्तान में 75% लोगों ने चीन को अपना बड़ा सहयोगी माना। 12% ने सऊदी अरब को देश का दोस्त बताया। 21% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान पर पॉजिटिव राय रखी प्यू के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पाकिस्तान को लेकर नेगेटिव सोच कोई नई बात नहीं है। हालांकि, भारत के अलग-अलग समुदायों में राय एक जैसी नहीं है। 21% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान के बारे में पॉजिटिव राय जताई। हिंदुओं में यह आंकड़ा 6% रहा। खतरे के सवाल पर भी अंतर दिखा। 34% भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान को भारत का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा बताया, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 57% था। दूसरी ओर, सर्वे में करीब 10 में 9 पाकिस्तानियों की भारत को लेकर सोच नेगेटिव है। भारत को लेकर यह नेगेटिव सोच पाकिस्तान के अलग-अलग सोशल ग्रुप्स में ज्यादा दिखाई दिया है। पहलगाम हमले के बाद रिश्ते और बिगड़े सर्वे में भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव का भी जिक्र है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। इसके बाद भारत सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया। सिंधु जल संधि से जुड़ा विवाद पाकिस्तान के लिए खास तौर पर अहम है। पाकिस्तान की खेती और पानी की जरूरत का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। भारतीय रूस और पाकिस्तानी चीन को सहयोगी मान रहा अमेरिका रूस चीन भारत की विदेश नीति किसी एक देश के साथ नहीं जुड़ी सर्वे से भारत की विदेश नीति की एक और अहम बात सामने आती है। भारत में किसी एक विदेशी देश को लेकर पाकिस्तान जैसी एकतरफा मजबूत पसंद नहीं दिखती। भारत की विदेश नीति में कई बड़े देशों के साथ एक साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश दिखाई देती है। भारत अमेरिका के साथ रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ रूस के साथ उसके पुराने रक्षा संबंध हैं। चीन के साथ सीमा पर तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है, लेकिन बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देश कई मुद्दों पर साथ भी काम करते हैं। इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और मल्टी-अलाइनमेंट की नीति से जोड़कर देखा जा सकता है। यानी भारत किसी एक बड़े देश के खेमे में पूरी तरह जाने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने हित के हिसाब से रिश्ते बनाए रखना चाहता है। ——————- पाकिस्तान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोका तो मुंहतोड़ जवाब देंगे: कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को एक बार फिर धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

बच्चन परिवार की लीगेसी पर कोर्ट में सवाल:ऐश्वर्या-अभिषेक की बेटी आराध्या ने मौत की खबरों के खिलाफ किया था केस, जानिए क्या है मामला

बच्चन परिवार की लीगेसी पर कोर्ट में सवाल:ऐश्वर्या-अभिषेक की बेटी आराध्या ने मौत की खबरों के खिलाफ किया था केस, जानिए क्या है मामला

बॉलीवुड के दिग्गज बच्चन परिवार का नाम दशकों से हिंदी सिनेमा की पहचान और विरासत से जुड़ा रहा है। अब इसी नाम और उसकी प्रतिष्ठा से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद अहम सवाल उठाए हैं। आराध्या बच्चन की सेहत को लेकर फैलाई गई झूठी खबरों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी मशहूर परिवार के नाम और उसकी प्रतिष्ठा को एक लीगेसी माना जा सकता है? अगर हां, तो क्या यह लीगेसी अगली पीढ़ियों तक कानूनी सुरक्षा के साथ आगे बढ़ सकती है? आराध्या बच्चन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने परिवार के नाम और उसकी प्रतिष्ठा को लेकर अहम सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी मशहूर परिवार के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा को लीगेसी की तरह अगली पीढ़ियों तक कानूनी सुरक्षा मिल सकती है? अगर मिल सकती है, तो यह सुरक्षा कितनी पीढ़ियों तक जारी रहेगी? जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि किसी ट्रेडमार्क की पहचान उसके प्रोडक्ट या सर्विस की वजह से बनती है। लेकिन किसी व्यक्ति या परिवार के नाम की पहचान उसकी उपलब्धियों, काम और समाज में उसकी प्रतिष्ठा से बनती है। ऐसे में सवाल है कि क्या यह प्रतिष्ठा भी परिवार की लीगेसी की तरह आगे बढ़ सकती है। कोर्ट ने तीन बड़े सवाल उठाए- पहला सवाल- क्या परिवार की प्रतिष्ठा अगली पीढ़ियों तक जा सकती है? कोर्ट यह देखेगा कि अगर किसी परिवार के नाम की प्रतिष्ठा ट्रेडमार्क जैसी मानी जाए, तो क्या यह प्रतिष्ठा अगली पीढ़ियों तक बनी रह सकती है? अगर हां, तो इसकी कानूनी सीमा क्या होगी? दूसरा सवाल- क्या फेक न्यूज भी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स का उल्लंघन है? कोर्ट यह भी देखेगा कि अगर किसी सेलिब्रिटी या उसके परिवार को लेकर बेहद आपत्तिजनक और झूठी खबरें फैलाई जाती हैं, तो क्या इसे इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स का उल्लंघन माना जा सकता है? तीसरा सवाल- क्या मानहानि को भी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जोड़ा जा सकता है? कोर्ट यह समझने की कोशिश करेगा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली मानहानि को क्या इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के तहत लाया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि ये सवाल अंतिम नहीं हैं और मामले में आगे और मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। बच्चन परिवार की लीगेसी का भी मुद्दा आराध्या की तरफ से पेश वकील प्रवीण आनंद ने कहा कि मामला सिर्फ आराध्या की प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि पूरे बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा का है। उन्होंने कोर्ट के सामने कहा कि बच्चन परिवार की तस्वीरों और ‘बच्चन’ नाम का इस्तेमाल कर ऐसे वीडियो बनाए गए, जिनमें आराध्या की मौत या कैंसर जैसी झूठी बातें कही गईं। इससे परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। यही वजह है कि अब कोर्ट के सामने एक बड़ा सवाल है कि क्या किसी मशहूर परिवार के नाम और उसकी प्रतिष्ठा को एक लीगेसी माना जा सकता है और क्या उस लीगेसी को कानूनी सुरक्षा दी जा सकती है? 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को करेगा। इस दौरान परिवार की प्रतिष्ठा, फेक न्यूज, मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े सवालों पर आगे चर्चा होगी। इस मामले का फैसला सिर्फ बच्चन परिवार के लिए नहीं, बल्कि दूसरे सेलिब्रिटी परिवारों के लिए भी अहम हो सकता है। इससे यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किसी परिवार के नाम, पहचान, तस्वीर और प्रतिष्ठा को ऑनलाइन गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर कानून किस तरह सुरक्षा देता है।

नेतन्याहू ने ब्रिटेन को बताया ‘इस्लामिक रिपब्लिक’:बोले- परमाणु हथियार रखने वाला पहला ऐसा देश होगा; इजराइल को लेकर इंग्लैंड में सोच बदली

नेतन्याहू ने ब्रिटेन को बताया ‘इस्लामिक रिपब्लिक’:बोले- परमाणु हथियार रखने वाला पहला ऐसा देश होगा; इजराइल को लेकर इंग्लैंड में सोच बदली

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ब्रिटेन पर तंज कसते हुए उसे ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ऐसा इस्लामिक देश बन सकता है, जिसके पास परमाणु हथियार हों। नेतन्याहू ने यह बात गुरुवार को आर्मी रेडियो के एक पॉडकास्ट में कही। नेतन्याहू ने ब्रिटेन की मौजूदा स्थिति की तुलना ईरान से करते हुए कहा कि इजराइल यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। नेतन्याहू ने कहा- आप ब्रिटेन को ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन’ कह सकते हैं। किसी ने कहा था कि परमाणु हथियार रखने वाला पहला इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन होगा। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ऐसा दूसरा देश न हो… आप जानते हैं मैं ईरान की बात कर रहा हूं।” नेतन्याहू का बयान सुनिए… नेतन्याहू बोले- ब्रिटेन में इजराइल को लेकर सोच बदली नेतन्याहू ब्रिटेन और यूरोप में आबादी में हो रहे बदलावों की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ दशक पहले ब्रिटेन में इजराइल को लेकर सोच आज से काफी अलग थी। उन्होंने 1967 में अरब देशों के साथ हुए युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के बेटे और पोते उस समय पत्रकार बनकर इजराइल आए थे। उन्होंने युद्ध की रिपोर्टिंग इजराइल के पक्ष में की थी। नेतन्याहू ने कहा कि आज के ब्रिटेन में ऐसा माहौल देखना मुश्किल है। नेतन्याहू यूरोप को लेकर ऐसा क्यों कहते हैं? नेतन्याहू ने यह भी कहा कि पूरे यूरोप में ब्रिटेन जैसी स्थिति बन रही है। वह पहले भी यूरोप में बढ़ती मुस्लिम आबादी और दूसरे देशों से आने वाले मुस्लिम प्रवासियों को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ वहां की सरकारों का इजराइल के प्रति रुख भी बदल रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले के बाद गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई शुरू हुई। इसके बाद कई यूरोपीय देशों ने इजराइल की कार्रवाई और गाजा में आम लोगों की स्थिति को लेकर उसकी आलोचना की। नेतन्याहू का मानना है कि यूरोप में आबादी में हो रहे बदलाव भी इजराइल के खिलाफ बढ़ती आलोचना की एक वजह हैं। वेंस ने भी ब्रिटेन को लेकर ऐसा बयान दिया था नेतन्याहू का यह बयान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की 2024 की एक टिप्पणी से मिलता-जुलता है। उन्होंने एक भाषण में बताया था कि वह और उनका एक दोस्त इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि परमाणु हथियार रखने वाला पहला इस्लामी देश कौन होगा। वेंस ने कहा- मुझे लगा कि शायद यह ईरान हो सकता है। पाकिस्तान तो पहले से ही परमाणु हथियार रखने वाला देश है। हालांकि ब्रिटेन भी ऐसा देश बन सकता है, क्योंकि वहां लेबर पार्टी सत्ता में आ गई है। दरअसल, उस समय ब्रिटेन में लेबर पार्टी की जीत के बाद कीर स्टार्मर प्रधानमंत्री बने थे। वेंस ब्रिटेन में प्रवासियों को लेकर लेबर पार्टी की नीतियों पर तंज कसते हुए यह टिप्पणी कर रहे थे। वेंस उस समय ओहायो से अमेरिकी सीनेटर थे।

नेतन्याहू ने ब्रिटेन को बताया ‘इस्लामिक रिपब्लिक’:बोले- परमाणु हथियार रखने वाला पहला ऐसा देश होगा; इजराइल को लेकर इंग्लैंड में सोच बदली

नेतन्याहू ने ब्रिटेन को बताया ‘इस्लामिक रिपब्लिक’:बोले- परमाणु हथियार रखने वाला पहला ऐसा देश होगा; इजराइल को लेकर इंग्लैंड में सोच बदली

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ब्रिटेन पर तंज कसते हुए उसे ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ऐसा इस्लामिक देश बन सकता है, जिसके पास परमाणु हथियार हों। नेतन्याहू ने यह बात गुरुवार को आर्मी रेडियो के एक पॉडकास्ट में कही। नेतन्याहू ने ब्रिटेन की मौजूदा स्थिति की तुलना ईरान से करते हुए कहा कि इजराइल यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। नेतन्याहू ने कहा- आप ब्रिटेन को ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन’ कह सकते हैं। किसी ने कहा था कि परमाणु हथियार रखने वाला पहला इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन होगा। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ऐसा दूसरा देश न हो… आप जानते हैं मैं ईरान की बात कर रहा हूं।” नेतन्याहू का बयान सुनिए… नेतन्याहू बोले- ब्रिटेन में इजराइल को लेकर सोच बदली नेतन्याहू ब्रिटेन और यूरोप में आबादी में हो रहे बदलावों की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ दशक पहले ब्रिटेन में इजराइल को लेकर सोच आज से काफी अलग थी। उन्होंने 1967 में अरब देशों के साथ हुए युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के बेटे और पोते उस समय पत्रकार बनकर इजराइल आए थे। उन्होंने युद्ध की रिपोर्टिंग इजराइल के पक्ष में की थी। नेतन्याहू ने कहा कि आज के ब्रिटेन में ऐसा माहौल देखना मुश्किल है। नेतन्याहू यूरोप को लेकर ऐसा क्यों कहते हैं? नेतन्याहू ने यह भी कहा कि पूरे यूरोप में ब्रिटेन जैसी स्थिति बन रही है। वह पहले भी यूरोप में बढ़ती मुस्लिम आबादी और दूसरे देशों से आने वाले मुस्लिम प्रवासियों को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ वहां की सरकारों का इजराइल के प्रति रुख भी बदल रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले के बाद गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई शुरू हुई। इसके बाद कई यूरोपीय देशों ने इजराइल की कार्रवाई और गाजा में आम लोगों की स्थिति को लेकर उसकी आलोचना की। नेतन्याहू का मानना है कि यूरोप में आबादी में हो रहे बदलाव भी इजराइल के खिलाफ बढ़ती आलोचना की एक वजह हैं। वेंस ने भी ब्रिटेन को लेकर ऐसा बयान दिया था नेतन्याहू का यह बयान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की 2024 की एक टिप्पणी से मिलता-जुलता है। उन्होंने एक भाषण में बताया था कि वह और उनका एक दोस्त इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि परमाणु हथियार रखने वाला पहला इस्लामी देश कौन होगा। वेंस ने कहा- मुझे लगा कि शायद यह ईरान हो सकता है। पाकिस्तान तो पहले से ही परमाणु हथियार रखने वाला देश है। हालांकि ब्रिटेन भी ऐसा देश बन सकता है, क्योंकि वहां लेबर पार्टी सत्ता में आ गई है। दरअसल, उस समय ब्रिटेन में लेबर पार्टी की जीत के बाद कीर स्टार्मर प्रधानमंत्री बने थे। वेंस ब्रिटेन में प्रवासियों को लेकर लेबर पार्टी की नीतियों पर तंज कसते हुए यह टिप्पणी कर रहे थे। वेंस उस समय ओहायो से अमेरिकी सीनेटर थे। इस्लामिक रिपब्लिक और इस्लामिक देश में अंतर हर इस्लामिक देश जरूरी नहीं कि इस्लामिक रिपब्लिक हो। जैसे पाकिस्तान दोनों श्रेणियों में आता है। लेकिन इंडोनेशिया मुस्लिम बहुल देश है, फिर भी उसे इस्लामिक रिपब्लिक नहीं कहा जाता।

जापान में एक घंटे में पूरे महीने की बारिश:4 की मौत, एयरपोर्ट पर 7 हजार लोग फंसे; पहली बार खतरे की सबसे ऊंची चेतावनी जारी

जापान में एक घंटे में पूरे महीने की बारिश:4 की मौत, एयरपोर्ट पर 7 हजार लोग फंसे; पहली बार खतरे की सबसे ऊंची चेतावनी जारी

जापान की राजधानी टोक्यो से सटे चिबा प्रांत में गुरुवार रात महज एक घंटे में 115 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य तौर पर पूरे अगस्त महीने में होने वाली बारिश के बराबर है। मूसलाधार बारिश के बाद कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन गई, जिसमें अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 घायल भी हुए हैं। भारी बारिश के कारण नारिता एयरपोर्ट पर 7 हजार यात्री रातभर फंसे रहे, जबकि 4 लाख से ज्यादा लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश देना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने पहली बार इस इलाके के लिए लेवल-5 की सबसे ऊंची चेतावनी जारी की है। यह सबसे ऊंचा अलर्ट होता है, जिसे जान पर तत्काल खतरा होने की स्थिति में जारी किया जाता है। 45 हजार घरों की बिजली गई, सेना राहत काम में जुटी मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक, गर्म और नमी वाली हवा जब ऊपर मौजूद ठंडी हवा से मिली, तो वातावरण बेहद खराब हो गया। इसी वजह से बहुत तेज बारिश हुई। विभाग ने बताया कि शुक्रवार देर रात तक बारिश जारी रहने की आशंका है। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बिगड़ गए। करीब 45 हजार घरों की बिजली गुल हो गई, जबकि राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए जापान की सेना भी तैनात की गई है। कारों में फंसे लोगों की जान गई इचिकावा शहर में बाढ़ से भरी सड़क पर 60 से 70 साल उम्र के एक व्यक्ति का शव मिला। वहीं, सकुरा शहर में 66 साल की एक महिला की मौत हो गई। उनकी कार बाढ़ के पानी में फंस गई थी। इसके अलावा दो और लोगों की भी मौत हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वे भी बाढ़ के दौरान अपनी कारों से बाहर नहीं निकल सके। गवर्नर बोले- ऐसा पहले कभी नहीं देखा चिबा के गवर्नर तोशिहितो कुमागाई ने शुक्रवार सुबह पत्रकारों से कहा कि जापान के पुराने मौसम रिकॉर्ड को देखते हुए भी यह बेहद खराब स्थिति है। उन्होंने कहा- बेहद खतरनाक हालात हैं। मैंने जीवन में पहले भी कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, लेकिन इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं देखी। कुमागाई ने कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है और बचाव अभियान जारी रखा जाएगा। बारिश थमी, लेकिन खतरा अभी बरकरार शुक्रवार को बारिश कम हो गई, लेकिन प्रशासन ने अभी भी बाढ़ के खतरे को लेकर लोगों को सावधान किया है। जापान के भूमि, बुनियादी ढांचा, परिवहन और पर्यटन मंत्रालय के अधिकारी कज़ुहितो शिमामोटो ने लोगों से कहा कि जिन इलाकों में बाढ़ का खतरा ज्यादा है, वहां अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएं। उन्होंने लोगों से स्थानीय प्रशासन के निकासी आदेशों पर ध्यान देने और खतरा बढ़ने से पहले सुरक्षित जगह जाने की अपील की। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया में बहुत ज्यादा बारिश और दूसरी खतरनाक मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं।

जापान में एक घंटे में पूरे महीने की बारिश:4 की मौत, एयरपोर्ट पर 7 हजार लोग फंसे; पहली बार खतरे की सबसे ऊंची चेतावनी जारी

जापान में एक घंटे में पूरे महीने की बारिश:4 की मौत, एयरपोर्ट पर 7 हजार लोग फंसे; पहली बार खतरे की सबसे ऊंची चेतावनी जारी

जापान की राजधानी टोक्यो से सटे चिबा प्रांत में गुरुवार रात महज एक घंटे में 115 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य तौर पर पूरे अगस्त महीने में होने वाली बारिश के बराबर है। मूसलाधार बारिश के बाद कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन गई, जिसमें अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 घायल भी हुए हैं। भारी बारिश के कारण नारिता एयरपोर्ट पर 7 हजार यात्री रातभर फंसे रहे, जबकि 4 लाख से ज्यादा लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश देना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने पहली बार इस इलाके के लिए लेवल-5 की सबसे ऊंची चेतावनी जारी की है। यह सबसे ऊंचा अलर्ट होता है, जिसे जान पर तत्काल खतरा होने की स्थिति में जारी किया जाता है। 45 हजार घरों की बिजली गई, सेना राहत काम में जुटी मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक, गर्म और नमी वाली हवा जब ऊपर मौजूद ठंडी हवा से मिली, तो वातावरण बेहद खराब हो गया। इसी वजह से बहुत तेज बारिश हुई। विभाग ने बताया कि शुक्रवार देर रात तक बारिश जारी रहने की आशंका है। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बिगड़ गए। करीब 45 हजार घरों की बिजली गुल हो गई, जबकि राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए जापान की सेना भी तैनात की गई है। कारों में फंसे लोगों की जान गई इचिकावा शहर में बाढ़ से भरी सड़क पर 60 से 70 साल उम्र के एक व्यक्ति का शव मिला। वहीं, सकुरा शहर में 66 साल की एक महिला की मौत हो गई। उनकी कार बाढ़ के पानी में फंस गई थी। इसके अलावा दो और लोगों की भी मौत हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वे भी बाढ़ के दौरान अपनी कारों से बाहर नहीं निकल सके। गवर्नर बोले- ऐसा पहले कभी नहीं देखा चिबा के गवर्नर तोशिहितो कुमागाई ने शुक्रवार सुबह पत्रकारों से कहा कि जापान के पुराने मौसम रिकॉर्ड को देखते हुए भी यह बेहद खराब स्थिति है। उन्होंने कहा- बेहद खतरनाक हालात हैं। मैंने जीवन में पहले भी कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, लेकिन इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं देखी। कुमागाई ने कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है और बचाव अभियान जारी रखा जाएगा। बारिश थमी, लेकिन खतरा अभी बरकरार शुक्रवार को बारिश कम हो गई, लेकिन प्रशासन ने अभी भी बाढ़ के खतरे को लेकर लोगों को सावधान किया है। जापान के भूमि, बुनियादी ढांचा, परिवहन और पर्यटन मंत्रालय के अधिकारी कज़ुहितो शिमामोटो ने लोगों से कहा कि जिन इलाकों में बाढ़ का खतरा ज्यादा है, वहां अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएं। उन्होंने लोगों से स्थानीय प्रशासन के निकासी आदेशों पर ध्यान देने और खतरा बढ़ने से पहले सुरक्षित जगह जाने की अपील की। जापान में 15 दिन में 3 तूफान आए मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से जापान में बहुत ज्यादा बारिश और दूसरी खतरनाक मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं। बीते 15 दिनों के भीतर जापान ने एक-एक कर 3 बड़े तूफानों- ‘डॉल्फिन’, ‘चैन-होम’ और ‘पीलोउ’ का सामना किया है। इस वजह से कई शहरों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, भूस्खलन और भीषण बाढ़ जैसे हालात हैं। ओकिनावा से लेकर टोक्यो तक जनजीवन ठप हो गया है, उड़ानें रद्द हैं और हजारों घरों में अंधेरा छाया हुआ है।

पाकिस्तानी PM बोले- भारत पानी रोकेगा तो मुंहतोड़ जवाब देंगे:कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया

पाकिस्तानी PM बोले- भारत पानी रोकेगा तो मुंहतोड़ जवाब देंगे:कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक बार फिर से भारत को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज ने गुरुवार को इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख कभी नहीं बदलेगा। अपने भाषण में शहबाज ने एक बार फिर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराया। फिर दोहराया- ट्रम्प ने कराया था युद्धविराम शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में एक बार फिर दावा किया कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अहम भूमिका रही थी। उन्होंने ट्रम्प की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पहल से समय रहते युद्धविराम संभव हो सका। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे बातचीत से हुआ था और इसमें किसी तीसरे देश की कोई मध्यस्थता नहीं थी। कश्मीर, फिलिस्तीन और अफगानिस्तान पर भी बोले अपने भाषण में शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख नहीं बदलेगा और कश्मीरियों की कुर्बानी बेकार नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन करता रहेगा। अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से उन्होंने अपील की कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दे। साथ ही दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई है। भारत ने पहलगाम हमले के बाद संधि पर लगाई थी रोक अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। तभी से यह मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि पर रोक जारी रहेगी। वहीं, पाकिस्तान का दावा है कि यह संधि अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है और इसे एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों का बंटवारा किया गया था। इसी संधि को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं और हाल के महीनों में यह विवाद फिर से गहरा गया है। गंभीर जल संकट का सामना कर रहा पाकिस्तान रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक- पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था के अहम हिस्से सुक्कुर बैराज को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। पानी का स्तर लगातार घटने से कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

नारनौल के मोहित का अनिल कपूर के शो में चयन:एक मिनट के ऑडिशन वीडियो से एंट्री हुई; 13 सवालों के जवाब देकर सलेक्ट हुए

नारनौल के मोहित का अनिल कपूर के शो में चयन:एक मिनट के ऑडिशन वीडियो से एंट्री हुई; 13 सवालों के जवाब देकर सलेक्ट हुए

नारनौल के 41 वर्षीय व्यापारी मोहित जिंदल बॉलीवुड एक्टर अनिल कपूर के रियलिटी शो ‘इंडिया के टॉप 1%’ में नजर आएंगे। इस शो में देशभर से 100 प्रतिभागियों का चयन हुआ है। शो में मोहित के पास एक करोड़ रुपए तक जीतने का मौका होगा। मोहित ने बताया कि चुने गए प्रतिभागी एक-दूसरे से रीजनिंग और GK के सवालों से एक-दूसरे से मुकाबला करेंगे। ये शो स्टार प्लस और जियो होटस्टार पर प्रसारित किया जाएगा। हांलाकि शो का हाउस कैसा होगा, अभी इसकी जानकारी प्रतिभागियों को नहीं दी गई। इस शो में मोहित की एंट्री एक टीवी एडवरटाइज से हुई। इसके बाद इंटरव्यू में उनसे पूछा गया, शो में एक करोड़ रुपए जीतने पर क्या करेंगे। मोहित का जवाब था- 50 लाख रुपए वृद्धा आश्रम और 50 लाख रुपए अपने परिवार पर खर्चेंगे। इसके बाद 13 सवालों के जवाब देने के बाद उनका फाइनल सलेक्शन हुआ। पहले जानिए, मोहित को शो में कैसे एंट्री मिली ‘सपना सच होने जैसा लग रहा’ मोहित ने बताया कि अनिल कपूर के साथ बैठना और उनके सामने गेम खेलना किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा, मेरे लिए केवल इनाम जीतना ही बड़ी बात नहीं है, बल्कि उनके साथ मंच साझा करने बड़ी खुशी की बात है। मोहित का कहना है कि शो में जाने से पहले पूरी तैयारी कर रहे हैं। चयन की सूचना मिलने के बाद पूरा परिवार तैयारी करने में जुटा हुआ है। बच्चे भी रीजनिंग और जीके के सवाल पूछकर हौंसला बढ़ा रहे हैं। अब, मोहित के परिवार के बारे में जानिए… मोहित जिंदल बिजनेस फैमिली से बिलॉन्ग करते हैं। उनके पास एक अंडर गारमेंट कंपनी की पूरे जिले की एजेंसी है। पिता महेश जिंदल भी उनके साथ ही बिजनेस करते हैं। मोहित ने BA की पढ़ाई की है। मोहित की पत्नी निकिता जिंदल ने बीकॉम किया है। मोहित की 2 बेटी तमन्ना व डिंपी और एक बेटा माधव है। बेटी तमन्ना ने नीट-2026 क्रैक किया है। छोटी बेटी डिंपी कोचिंग कर रही है। वहीं, मोहित अभी अग्रवाल वैश्य समाज के जिला उपाध्यक्ष और हरियाणा व्यापार मंडल के जिला उपाध्यक्ष हैं।

बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव में बीएनपी महासचिव फखरुल की जीत तय:ढाका यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र पढ़ा, वहीं लेक्चरर बने; खालिदा सरकार में मंत्री रह चुके

बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव में बीएनपी महासचिव फखरुल की जीत तय:ढाका यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र पढ़ा, वहीं लेक्चरर बने; खालिदा सरकार में मंत्री रह चुके

बांग्लादेश की रूलिंग पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम अलमगीर अब देश के अगले राष्ट्रपति बनने की राह पर हैं। BNP ने गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने 1960 के दशक में ढाका यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की थी और 1972 में वे ढाका कॉलेज में लेक्चरर बने। 2001 में खालिदा जिया के नेतृत्व वाली BNP सरकार में वे पहले कृषि राज्य मंत्री रहे। बाद में उन्होंने नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। BNP के महासचिव पद से इस्तीफा दिया उम्मीदवारी मिलते ही 78 साल के फखरुल ने BNP के महासचिव पद और पार्टी की स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया। गुरुवार को ही उनका नामांकन पत्र चुनाव आयोग में जमा कर दिया गया। BNP के स्थायी समिति सदस्य अब्दुल मोईन खान के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल ढाका के अगरगांव स्थित चुनाव आयोग पहुंचा और मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन को नामांकन पत्र सौंपा। 20 अगस्त को होगा राष्ट्रपति चुनाव बांग्लादेश में राष्ट्रपति को जनता सीधे नहीं चुनती। संसद के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 20 अगस्त को मतदान होगा। फरवरी में हुए आम चुनाव में BNP को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला था। इसलिए फखरुल की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अभी करीब दो साल बाकी था। फिलहाल संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। फखरुल चुनाव जीतते हैं तो वे बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति होंगे। छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर फखरुल का राजनीतिक सफर करीब छह दशक पुराना है। 1960 के दशक में ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की। वे उस समय ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े थे। 1969 में राष्ट्रपति अयूब खान के खिलाफ बड़े जन आंदोलन के दौरान वे छात्र संगठन की ढाका यूनिवर्सिटी इकाई के अध्यक्ष थे। राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया और जेल जाना पड़ा। हालांकि, छात्र राजनीति के बाद वे तुरंत सक्रिय राजनीति में नहीं आए। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षक के तौर पर करियर शुरू किया। 1972 में वे ढाका कॉलेज में लेक्चरर बने। बाद में कई सरकारी कॉलेजों में भी पढ़ाया। सरकारी नौकरी भी की फखरुल ने सरकारी व्यवस्था में भी काम किया। वे इंस्पेक्शन एंड ऑडिट निदेशालय में डिप्टी डायरेक्टर रहे। इसके अलावा बांग्लादेश नेशनल कमीशन फॉर यूनेस्को से भी जुड़े रहे। 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने तत्कालीन उपप्रधानमंत्री एसए बारी के निजी सचिव के तौर पर भी काम किया। लेकिन कुछ साल बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया। 1986 में राजनीति में आए फखरुल ने 1986 में सरकारी नौकरी छोड़ दी। दो साल बाद 1988 में वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ठाकुरगांव नगरपालिका के चेयरमैन चुने गए। 1990 के दशक की शुरुआत में एरशाद विरोधी आंदोलन के दौरान वे BNP में शामिल हुए। 1992 में उन्हें BNP की ठाकुरगांव जिला इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। यहीं से उनकी स्थानीय राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने की शुरुआत हुई। 2001 में सांसद और मंत्री बने 2001 के आम चुनाव में फखरुल ठाकुरगांव-1 सीट से BNP के उम्मीदवार के तौर पर सांसद चुने गए। खालिदा जिया के नेतृत्व वाली BNP सरकार में उन्हें पहले कृषि राज्य मंत्री बनाया गया। बाद में उन्होंने नागरिक उड्डयन और पर्यटन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। 2008 के चुनाव के बाद BNP विपक्ष में चली गई। इसके बाद पार्टी में फखरुल की भूमिका लगातार बढ़ती गई। करीब एक दशक तक BNP के महासचिव रहे 2009 में BNP की राष्ट्रीय परिषद ने फखरुल को वरिष्ठ संयुक्त महासचिव बनाया। 2011 में वे पार्टी के कार्यवाहक महासचिव बने। करीब पांच साल बाद 30 मार्च 2016 को उन्हें आधिकारिक तौर पर BNP का महासचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद करीब एक दशक तक वे पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में रहे। खालिदा जिया की गिरफ्तारी से लेकर सरकार विरोधी प्रदर्शनों और चुनावों को लेकर हुए राजनीतिक टकराव तक, फखरुल लगभग हर बड़े मुद्दे पर BNP की तरफ से सामने रहे। वे मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रमुख नेताओं में भी शामिल रहे। इस दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और कुछ समय जेल में भी बिताना पड़ा। दूसरे कई BNP नेताओं की तुलना में उनकी राजनीतिक भाषा ज्यादा संयमित रही है। लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण वे पार्टी के अनुभवी नेताओं और प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी से अलग हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने राष्ट्रपति पद के लिए फखरुल के नाम का प्रस्ताव रखा। स्थायी समिति से मंजूरी मिलने के बाद फखरुल ने महासचिव और समिति के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया। बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति का पद सक्रिय पार्टी राजनीति से ऊपर होता है। इसलिए उनके पार्टी पदों से इस्तीफे को राष्ट्रपति पद की संभावित नई भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष ने भी उतारा उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव में बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन के नेता और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद ने अपना नामांकन पत्र जमा कर दिया है। हालांकि, संसद में BNP के दो-तिहाई बहुमत के कारण फखरुल की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। छात्र नेता से राष्ट्रपति पद तक का सफर मिर्जा फखरुल इस्लाम अलमगीर का राजनीतिक सफर कई अलग-अलग भूमिकाओं से होकर गुजरा है। छात्र नेता से शुरुआत करने के बाद वे शिक्षक बने, सरकारी अधिकारी के तौर पर काम किया और नगरपालिका अध्यक्ष रहे। इसके बाद सांसद और राज्य मंत्री बने। फिर करीब एक दशक तक BNP के महासचिव के तौर पर पार्टी की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे। अब वे बांग्लादेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की ओर बढ़ रहे हैं। अगर 20 अगस्त को संसद में उन्हें जीत मिलती है, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर पूरे देश के संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभाने की होगी।