महिला आरक्षण-परिसीमन पर शाह आज लोकसभा में जवाब देंगे:प्रियंका का आरोप- असम की तरह देश की सीटों की काट-छांट होगी; शाम 4 बजे वोटिंग

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों पर आज लोकसभा में दूसरे दिन चर्चा होगी। अमित शाह इस पर जवाब देंगे। गुरुवार को उन्होंने कहा था कि परिसीमन को लेकर विपक्ष के जितने भी सवाल हैं। वे केजी के बच्चों की तरह उन्हें समझाएंगे। शाम 4 बजे तीनों बिल पर वोटिंग कराई जाएगी। लोकसभा स्पीकर ने बिलों पर चर्चा के लिए 15 घंटे का समय तय किया। गुरुवार को करीब 12 घंटे तक पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी बात रखी। कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी, गौरव गोगोई, वेणुगोपाल ने बिल के विरोध में अपनी बातें कहीं। प्रियंका ने कहा कि असम की तरह देशभर की सीटों की काट-छांट की जाएगी। पीएम ने भी करीब 35 मिनट का भाषण दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह मोदी की गारंटी है और वादा है। विपक्ष इसका क्रेडिट ले सकता है। 16 अप्रैल: संसद के विशेष सत्र का पहला दिन; किसने क्या कहा पीएम मोदी बोले- मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा। फिर अलग पहलू हो जाता है। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं। सबकी फोटो छपवा देंगे। ले लो जी क्रेडिट। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं। प्रियंका बोलीं- महिलाएं बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को पहचान लेती प्रियंका गांधी ने कहा, पीएम के खोखले आश्वासनों के बावजूद संसद में राज्यों की मौजूदगी बदल जाएगी। जिस तरह असम में उन्होंने मनचाही सीटों को काटा, नई सीमाएं बनाएं उसी तरह यह देश में करेंगे। मौजूदा सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक रही है। ये ओबीसी वर्ग का हक छीन रहे हैं, ताकि कुछ प्रदेशों की ताकत को कम किया जा सके। शाह जी हंस रहे हैं, पूरी प्लानिंग बना रखी है। चाणक्य आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते। अखिलेश बोले- हम चाहते हैं कि पहले जनगणना हो अखिलेश ने कहा- ये लोग पिछड़े वर्ग की 33 प्रतिशत महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई, कि कैसे क्षेत्र बनाए जाएं कि इसका फायदा इन लोगों को ही मिले। इसलिए हम चहते हैं कि पहले जनगणना हो, जब आंकड़े आ जाएं तभी परिसीमन हो। इसलिए हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं को जोड़कर भी जनगणना हो। कंगना रनोट बोलीं- कुछ अच्छा होता है, तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने लोकसभा में कहा कि जब भी कुछ अच्छा होने लगता है तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते है। एक तरफ प्रधानमंत्री जी की नीति है, तो दूसरे तरफ विपक्ष के लोग। मुलायम सिंह यादव जी ने कहा था कि अगर ये बिल आएगा तो सिर्फ शहरी महिलाएं ही सदन में आएगी। ये है विपक्ष की सोच। अब जानिए संसद में किन तीन बिलों पर चर्चा हो रही है परिसीमन में क्या होगा: सरकार कानून बनाकर तय करेगी अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी। सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते। क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई) को इसके पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। तीन दशक से पेंडिंग था महिला आरक्षण बिल संसद में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव करीब 3 दशक से पेंडिंग है। यह मुद्दा पहली बार 1974 में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने वाली समिति ने उठाया था। 2010 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण बिल को बहुमत से पारित करा लिया था। तब सपा और राजद ने बिल का विरोध करते हुए तत्कालीन UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी थी। इसके बाद बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया। तभी से महिला आरक्षण बिल पेंडिंग है। 2023 में मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल को पास कराया। यह कानून बना, अब इसमें संसोधन के जरिए बदलाव किया जा रहा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… PM ने दोस्त कहा तो अखिलेश ने हाथ जोड़ लिए; संसद के टॉप-8 मोमेंट्स केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधन बिल पेश किए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी स्पीच के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अपना दोस्त कहा। इस पर अखिलेश ने हंसते हुए हाथ जोड़ लिए। प्रियंका गांधी ने शाह को देखते हुए कहा- अगर चाणक्य जिंदा होते तो आपको देखकर चौंक जाते। शाह मुस्कुराने लगे। पूरी खबर पढ़े…
कुरुक्षेत्र NIT में सुसाइड के बाद हॉस्टल वार्डन बदलीं:सुसाइड नोट में लिखा- मैंने पैसे-सीट वेस्ट की; छात्रा के पिता बोले- पढ़ने में होशियार थी

हरियाणा में NIT कुरुक्षेत्र में बीटेक की छात्रा दीक्षा सुसाइड केस में संस्थान ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गर्ल हॉस्टल की चीफ वॉर्डन, डिप्टी वॉर्डन और एसोसिएट डीन स्टूडेंट वेल्फेयर को बदला गया है। गर्ल हॉस्टल की चीफ वॉर्डन डॉ. वृंदा गोयल की जगह प्रो. ज्योति ओहरी और डिप्टी चीफ वॉर्डन डॉ रितु गर्ग को बनाया गया है। NIT के PRO प्रो. ज्ञान भूषण ने बताया कि एसोसिएट डीन प्रो. वीके वाजपेयी और डॉ. पूनम जिंदल को लगाया गया है। वहीं, कुरुक्षेत्र में अस्पताल पहुंचे दीक्षा के पिता शशि कुमार दुबे ने बताया कि हमारी लड़की बहुत मजबूत थी। पढ़ने में भी वो शुरू से अच्छी रही। JEE मेंस में भी अच्छे नंबर आए था। यहां भी कॉलेज में परफॉरमेंस अच्छा था। कॉलेज प्रशासन और प्रोफेसर भी मानते हैं कि दीक्षा पढ़ाई में अच्छी थी, लेकिन फिर भी हमारी लड़की ने सुसाइड किया। इसमें जरूर कुछ न कुछ है। पिता बोले- हम छोड़ेंगे नहीं, चाहे कुछ भी करना पड़ा NIT के स्टूडेंट के आरोप पर पिता ने कहा कि हम यहां नहीं थे। छात्र ने कुछ कहा, तो हमने पुलिस से बात की है। पुलिस ने हमें आश्वासन दिए है। अगर इन कार्रवाई नहीं हुई तो हम यहां से लेकर बिहार तक जाएंगे। अपनी बच्ची की बात को हम दबने नहीं देंगे और हम छोड़ेंगे नहीं, चाहे इसमें हमें कुछ भी करना पड़े। भाई बोले- परिवार को अभी तक यकीन नहीं हो रहा दीक्षा के मौसेरे भाई ओंकार ने बताया कि घटना ने एक-दो दिन पहले ही उसकी घर पर बातचीत हुई थी। परिवार को अभी तक यकीन नहीं हो रहा कि दीक्षा इस तरह का कदम उठा सकती है। ओंकार ने बताया कि दीक्षा ने अपनी सारी पढ़ाई अलीगढ़ से की थी। 12वीं के बाद उसने IIT के लिए एग्जाम दिया था। तब ऑल इंडिया में उसका 15 हजार के आसपास रैंक आया था और उसका नम्बर कुरुक्षेत्र NIT में पड़ा था। बता दें कि NIT कुरुक्षेत्र में दीक्षा के सुसाइड के बाद देर रात तीन बजे तक कैंपस में हंगामा चला। हंगामे को देखते हुए एनआईटी प्रशासन ने मेन गेट बंद कर दिया और पुलिस बुला ली। इससे छात्र नाराज हो गए और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक छात्रा को ब्रह्मसरोवर में जाकर सुसाइड करने की बात कहने वाले प्रोफेसर पर कार्रवाई नहीं होती, वे यहां से नहीं उठेंगे। उन्होंने स्पोर्ट्स इंचार्च शहाबुद्दीन को भी सस्पेंड करने की मांग रखी। सूचना पर DSP हेडक्वार्टर सुनील कुमार, लाडवा DSP निर्मल सिंह और शाहाबाद DSP रामकुमार मौके पर पहुंचे। करीब छह घंटे बाद डायरेक्टर प्रो. ब्रह्मजीत स्टूडेंट के बीच पहुंचे और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर आज ही विचार होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने धरना-प्रदर्शन खत्म कर दिया। उधर, शुक्रवार सुबह एनआईटी प्रशासन की ओर से 17 अप्रैल से 4 मई तक छुट्टियां घोषित कर दी गई। एनआईटी प्रवक्ता प्रो. ज्ञान भूषण ने कहा कि कैंपस में अभी स्ट्रैस के माहौल है। बच्चे घर पर जाकर तैयारी करेंगे। उनके वाइवा भी ऑनलाइन लिए जाएंगे। वाइवा का शेड्यूल अभी जारी नहीं किया गया है। पहले जानिए… हंगामा कर रहे छात्रों ने क्या आरोप लगाए वार्डन ने गेट नहीं खोला, बिना चेक किए ही दीक्षा को डेड घोषित किया स्टूडेंट ने बताया कि छात्रा दीक्षा ऑर्टिफिशियल एंड डेटा साइंस स्ट्रीम की पढ़ाई कर रही थी। वह बिहार के बक्सर जिले की रहने वाली थी। उसके सुसाइड करते ही वार्डन को सूचित किया था। वार्डन ने NIT की हेल्थ टीम बुलाई, तो उस टीम बाहर से झांक कर ही दीक्षा को डेड घोषित कर दिया। पहले तो वार्डन ने गेट भी नहीं खोला था। प्रोफेसर ने सवाल पूछने पर डांटा, NIT प्रशासन ने पुलिस बुलाई छात्रा की एक दोस्त ने बताया कि दीक्षा का शव काफी देर तक फंदे पर लटका रहा, किसी ने ध्यान नहीं दिया। जब हमने प्रोफेसर से सवाल पूछे तो उन्होंने हमें डांटना शुरू कर दिया। छात्रों का कहना है कि पिछले करीब 2 महीने में कैंपस में ये चौथा सुसाइड है। इसे लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया तो एनआईटी प्रशासन ने मौके पर पुलिस बुला ली। छात्रों का आरोप है कि उनकी बात तक नहीं सुनी जा रही। प्रोफेसर कहते हैं- हम पढ़ाए या न पढ़ाए, हमारी सरकारी नौकरी स्टूडेंट ने बताया कि एक प्रोफेसर ये बोलता है कि सुसाइड करना है तो कॉलेज के बाहर करो, अंदर क्यो कर रहे हो। 4 सुसाइड हो चुके है डेढ़ महीने के अन्दर, कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है और प्रोफेसर कहते हैं हमारी सरकारी नौकरी है। हम पढ़ाए चाहे ना पढ़ाए। पहले तीन सुसाइड होने के बाद एनआईटी प्रशासन ने एक कमेटी बनाई थी, जिससा काम छात्रों की प्रॉब्लम को सॉल्व करना था, लेकिन कमेटी ने ठीक से काम नहीं किया। स्टूडेंट को जबरदस्ती घर जाने को कहा जा रहा, सीबीआई जांच हो छात्रों ने आरोप लगाया कि NIT प्रशासन ने अब हंगामे को देखते हुए हमारी छुट्टियां कर दी है। हमें जबरदस्ती घर जाने के लिए कहा गया है, जिससे मामले को दबाया जा सके। छात्रों का कहना है कि प्रोफेसर हमें मेंटल हैरेसमेंट करते हैं। डिग्री रोकने का दबाव बनाया जाता है। हमारा कोई पर्सनल इश्यू नहीं है। हम सिर्फ अपनी दोस्त दीक्षा को इंसाफ दिलाने के लड़ रहे हैं। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। NIT प्रवक्ता बोले- आनलाइन लिए जाएंगे वाइवा एनआईटी प्रवक्ता प्रो. ज्ञान भूषण ने कहा कि सेमेस्टर 22 अप्रैल तक था। अब तीन-चार दिन पहले ही उनकी छुट्टी कर दी गई है। कैंपस में अभी स्ट्रैस का माहौल है, बच्चे घर पर जाकर तैयारी कर सकेंगे। अब उनके वाइवा भी ऑनलाइन ही लिए जाएंगे। इसकी नोटिफिकेश भी जारी कर दी जाएगी। वहीं एंड सेमेस्टर एग्जाम की डेटशीट पहले से ही जारी की जा चुकी है, वो ऑफलाइन की होंगे। प्रोफेसर ने आगे कहा कि छात्रों से संवाद करने के लिए एक टीचर को कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। हर एक सेक्शन में 20 बच्चों पर कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। सभी ने बच्चों से भी सुझाव लिए हैं। छात्रों के सुसाइड को लेकर एनआईटी प्रशासन गंभीर है। इंस्टीट्यूट बच्चों के हित के लिए कदम उठा रहा है। बच्चों से भी लगातार बातचीत चल
जिन घरों में शादी, उन्हें देना होगा शादी का कार्ड:भोपाल में कमर्शियल गैस को लेकर नई व्यवस्था; 2 सिलेंडर मिलेंगे

भोपाल में शादी सीजन शुरू होते ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब जिन घरों में शादी है, उन्हें पास की गैस एजेंसी पर शादी का कार्ड जमा कराना होगा। इसके बाद ही अधिकतम दो कमर्शियल सिलेंडर दिए जाएंगे। प्रत्येक सिलेंडर के लिए 2200 रुपए डिपॉजिट देना होगा। दो सिलेंडर के लिए कुल 4400 रुपए जमा कराए जाएंगे, जो इस्तेमाल के बाद सिलेंडर लौटाने पर वापस कर दिए जाएंगे। हालांकि, गैस भरवाने का शुल्क अलग से 1850 रुपए प्रति सिलेंडर देना होगा। सिलेंडर 2 से 3 दिन के भीतर एजेंसी पर लौटाना अनिवार्य रहेगा। कंपनियों से चर्चा के बाद व्यवस्था भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि सभी एलपीजी कंपनियों के अधिकारियों से चर्चा के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए शादी का कार्ड, पहचान पत्र और एक आवेदन देना होगा, जिसमें शादी की तारीख, समय और स्थान की जानकारी देनी होगी। फिर भी राहत नहीं कैटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रिंकू भटेजा ने कहा कि समय पर सिलेंडर नहीं मिले तो मेन्यू कम करना पड़ रहा है। मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे जलाकर खाना बनाना पड़ रहा है। नई व्यवस्था लागू जरूरी दी गई है। लेकिन इससे पूर्ति नहीं हो पाएगी।
PMO के फर्जी सिफारिशी पत्र से नौकरी का मामला:सबूतों के अभाव में आरोपी बरी; पुलिस जांच पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के कथित फर्जी सिफारिशी पत्र के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले में आरोपी को साक्ष्य प्रमाणित नहीं होने पर कोर्ट से राहत मिल गई। अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल की कोर्ट ने आरोप सिद्ध न होने पर आरोपी दीपक अवस्थी को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद केस में पुलिस की जांच पर सवाल उठे हैं। घटना 13 अक्टूबर 2023 की है। फरियादी राहुल पिस्तौर ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी कि विजय नगर स्थित अवंतिका गैस एजेंसी के कार्यालय में असिस्टेंट मैनेजर (प्रोजेक्ट) पद पर नियुक्ति के लिए आरोपी दीपक अवस्थी (निवासी झांसी, उत्तर प्रदेश) ने प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली के कथित डायरेक्टर के नाम से जारी एक सिफारिशी पत्र प्रस्तुत किया है। शिकायत के अनुसार, आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर स्वयं को पुलिसकर्मी बताते हुए गैस कंपनी के कार्यालय में उक्त पत्र लेकर पहुंचा था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने पीएमओ से जारी एक प्रशंसा पत्र को कथित रूप से एडिट कर उसे नौकरी की सिफारिश के रूप में प्रस्तुत किया। धोखाधड़ी का केस, हुई थी गिरफ्तारी मामला फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। जांच में मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए थे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब्ती प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य तथ्यों को लेकर विरोधाभासी बिंदु सामने आए। अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध नहीं कर पाया। कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपी दीपक अवस्थी को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद केस में पुलिस विवेचना पर सवाल खड़े हुए हैं।
‘2023 महिला आरक्षण अधिनियम 16 अप्रैल से प्रभावी’: संसद में संशोधनों पर बहस के दौरान केंद्र | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 00:02 IST केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को पारित होने के तीन साल बाद 16 अप्रैल, 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की। केंद्र ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को ऐसे समय में अधिसूचित किया है जब संसद कानून में संशोधन पर विचार कर रही है। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) महिला आरक्षण कानून में बदलाव के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर संसद के विशेष सत्र के दौरान तीखी बहस के बीच, केंद्र ने गुरुवार को 2023 अधिनियम को अधिसूचित किया और कहा कि यह 16 अप्रैल, 2026 से प्रभावी है। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को 16 अप्रैल, 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की – इसके पारित होने के तीन साल बाद – लेकिन संसद इस मामले पर देर रात तक बहस कर रही है और कल प्रस्तावित बदलावों पर मतदान करेगी। कानून मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, अधिनियम विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत कोटा देता है और 16 अप्रैल, 2026 से लागू हो गया है। हालाँकि, यह तुरंत ज्ञात नहीं है कि इसे क्यों अधिसूचित किया गया है जब संसद 2029 में इसके कार्यान्वयन के लिए इसमें संशोधन करने पर बहस कर रही है। अधिसूचना में कहा गया है: “संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार 16 अप्रैल, 2026 को उस तारीख के रूप में नियुक्त करती है जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।” सितंबर 2023 में, संसद ने विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया। इसके तहत, आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं होगा, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन अभ्यास के पूरा होने से जुड़ा था। वर्तमान में लोकसभा में जिन तीन विधेयकों पर बहस हो रही है, वे सरकार द्वारा लाए गए थे ताकि 2029 में महिला कोटा लागू किया जा सके। इस बीच, अधिकारियों ने कहा कि हालांकि अधिनियम लागू हो गया है, लेकिन आरक्षण को वर्तमान सदन में लागू नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसे अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास करने के बाद लागू किया जा सकता है। हालाँकि, घटनाओं के इस विचित्र मोड़ पर किसी का ध्यान नहीं गया और कांग्रेस ने तुरंत इस पर सवाल उठाए। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर गजट अधिसूचना की एक प्रति साझा की और अधिसूचना के समय को “बिल्कुल विचित्र” बताया। ये बिल्कुल विचित्र है. सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम आज लागू हो गया है जबकि इसमें संशोधनों पर बहस चल रही है और कल मतदान होगा। पूरी तरह से हैरान. pic.twitter.com/8d9y2bAGmV-जयराम रमेश (@जयराम_रमेश) 16 अप्रैल 2026 हालांकि सरकार ने कानून को अधिसूचित कर दिया है, लेकिन एक महत्वपूर्ण बाधा बनी हुई है: इसका कार्यान्वयन वर्तमान में अगली जनगणना और परिसीमन अभ्यास पर निर्भर है, जो इसे भविष्य में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहा है। इसलिए, सरकार अब 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए आरक्षण को समय पर लागू करना सुनिश्चित करने के लिए इस संबंध को खत्म करना चाह रही है। (एजेंसी इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 23:30 IST समाचार राजनीति ‘2023 महिला आरक्षण अधिनियम 16 अप्रैल से प्रभावी’: संसद में संशोधनों पर बहस के बीच केंद्र अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण अधिनियम 2023(टी)महिला आरक्षण कानून(टी)131वां संशोधन विधेयक(टी)भारतीय संसद बहस(टी)संवैधानिक संशोधन भारत(टी)महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व(टी)महिलाओं के लिए आरक्षण(टी)2023 अधिनियम अधिसूचना
इंदौर के डेली कॉलेज में फिर 'घमासान':संविधान संशोधन के खिलाफ ओल्ड डेलियन्स ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री तक गुहार

डेली कॉलेज में आंतरिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में पूर्व छात्र (ओल्ड डेलियन्स) कॉलेज के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और बायलॉज (संविधान) में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने वर्तमान प्रबंधन पर नियमों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संस्था की वर्तमान प्रबंधन समिति का कार्यकाल दिसंबर 2025 में समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद अब तक नए चुनाव नहीं कराए गए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग अपनी कुर्सी बचाने के लिए नियमों में मनमाने संशोधन कर रहे हैं, जो कॉलेज की परंपराओं और स्थापित प्रक्रियाओं के खिलाफ है। प्राचार्य से मुलाकात को लेकर तनाव प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब पूर्व छात्रों को प्राचार्य डॉ. बिंद्रा से मिलने से रोक दिया गया। इस पर काफी देर तक बहस और विरोध हुआ। बाद में प्रबंधन ने उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति दी। मुलाकात के दौरान प्राचार्य ने उनकी बात सुनी और मुद्दों को प्रबंधन के समक्ष रखने का आश्वासन दिया। वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल पूर्व छात्रों ने केवल संविधान संशोधन ही नहीं, बल्कि संस्थान की गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बिना वार्षिक साधारण सभा (AGM) बुलाए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं और पूर्व छात्रों की भागीदारी लगातार कम की जा रही है। साथ ही, अनावश्यक शिकायतों और एफआईआर से कॉलेज की राष्ट्रीय स्तर पर छवि प्रभावित हो रही है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी प्रदर्शन में मधुकांत गर्ग, डॉ. सुमित शुक्ला, देवाशीष मजूमदार, कमलेश कासलीवाल, विक्रम खंडेलवाल और नीरज देसाई सहित कई पूर्व छात्र शामिल हुए। ज्ञापन सौंपने के बाद उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं हुई और प्रस्तावित बदलावों पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
Liver Detox: किचन में रखी इन 5 चीजों से करें लिवर की सफाई, नहीं जमने देंगे फैट, फैटी लिवर से बचने का आसान तरीका

Last Updated:April 16, 2026, 22:55 IST Liver Detox Kaise Kare: खराब खानपान के कारण लिवर को डिटॉक्स करने की जरूरत होती है. वरना इससे फैटी लिवर जैसी प्रोग्रेसिव डिजीज होने का खतरा रहता है, जो जानलेवा भी बन सकती है. अच्छी बात ये है कि इसके लिए आपको किसी डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं है. किचन में रखी चीजों से ही आप लिवर की सफाई कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बाहर का खाना और अनियमित दिनचर्या का सबसे ज्यादा असर हमारे लिवर पर पड़ता है. लिवर शरीर का बहुत जरूरी अंग है, जो खून को साफ करता है, पाचन में मदद करता है और शरीर से गंदगी बाहर निकालता है. वैसे तो ये अंग खुद की सफाई करने में सक्षम होता है, लेकिन यदि आपका लाइफस्टाइल बहुत खराब है, तो आपको इसे डिटॉक्स करने की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में अगर हम इसका ध्यान नहीं रखते, तो यह धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. इससे फैटी लिवर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है, जो कि सिरोसिस यानी लिवर सड़ने की स्थिति तक पहुंच सकता है. इस स्टेज पर लिवर ट्रांसप्लांट ही एक मात्र इलाज रह जाता है, जो न होने पर जान जाने का खतरा रहता है. ऐसे में नेचुरल तरीके से लिवर को कैसे साफ और हेल्दी रख सकते हैं, चलिए यहां जानते हैं. डाइट का लिवर पर असरमेडिकल रिसर्च के अनुसार, लिवर को स्वस्थ रखने में हमारी रोज की डाइट बहुत अहम भूमिका निभाती है. कुछ नेचुरल चीजें ऐसी होती हैं, जो लिवर को साफ करने और मजबूत बनाने में मदद करती हैं. अगर इन्हें रोजाना के खाने में शामिल किया जाए, तो लिवर लंबे समय तक सही तरीके से काम करता है. हरी सब्जियां हैं फायदेमंदपालक, मेथी, सरसों और ब्रोकली जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां लिवर के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं. इनमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं, जो शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. इनमें मौजूद क्लोरोफिल खून को साफ करता है और लिवर का काम आसान बनाता है. लहसुन से बढ़ती है लिवर की ताकतलहसुन में मौजूद सल्फर तत्व लिवर के एंजाइम्स को एक्टिव करता है. इससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलने लगते हैं. साथ ही इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो लिवर को इंफेक्शन से बचाते हैं. नींबू का नियमित सेवन करेंनींबू में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर को साफ रखने में मदद करते हैं. यह शरीर में फैट को पचाने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे लिवर में जमा चर्बी कम होती है. रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना एक अच्छा उपाय माना जाता है. हल्दी का करें इस्तेमालहल्दी में करक्यूमिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो सूजन कम करता है और लिवर की कोशिकाओं को ठीक करने में मदद करता है. यह लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से भी बचाती है और शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है. ग्रीन टी भी है फायदेमंदग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन्स नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करते हैं. रोजाना ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और फैटी लिवर का खतरा कम हो जाता है. ध्यान रखें ये बातेंइन घरेलू उपायों को अपनाने के साथ-साथ संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली भी जरूरी है. सही खानपान और अच्छी आदतों से आप अपने लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 16, 2026, 22:55 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
टीकमगढ़ में अवैध मुरम खनन पर खनिज विभाग का छापा:कांटी खास गांव में सड़क पर मुरम फैलाकर भागे चालक; एक जेसीबी जब्त

टीकमगढ़ जिले के कांटी खास गांव में गुरुवार शाम खनिज विभाग ने अवैध मुरम खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। मुखबिर की सूचना पर पहुंची टीम ने मौके पर अवैध उत्खनन कर रही एक जेसीबी मशीन को जब्त कर लिया है। कार्रवाई के दौरान खनिज माफिया अपने डंपर और ट्रैक्टर लेकर भागने में सफल रहे, जिनका टीम ने काफी दूर तक पीछा भी किया। टीम को देख सड़क पर मुरम फैलाकर भागे चालक दोपहर करीब 3:30 बजे जब टीम मौके पर पहुंची, तब जेसीबी से ट्रैक्टरों और डंपरों में मुरम भरी जा रही थी। अधिकारियों को देखते ही चालक वाहनों को तेज रफ्तार में भगा ले गए और रास्ते में मुरम फैला दी ताकि पीछा न किया जा सके। जिला खनिज अधिकारी विपुल रावत के अनुसार, स्टाफ की कमी की वजह से भागते हुए वाहनों को रोकना संभव नहीं हो सका। 40 लोगों की भीड़ ने जेसीबी छुड़ाने का किया प्रयास कार्रवाई के दौरान करीब 30-40 ग्रामीण और खनन से जुड़े लोग जेसीबी मशीन को छुड़ाने के लिए मौके पर एकत्र हो गए। स्थिति बिगड़ती देख देहात थाने से पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में शाम करीब 6 बजे मशीन को जब्त कर थाने लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, जब्त जेसीबी उत्तर प्रदेश के किसी व्यक्ति की है। अज्ञात आरोपियों पर केस खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन और सरकारी कार्य में बाधा डालने की संभावनाओं को देखते हुए अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस और खनिज विभाग अब फरार डंपर और ट्रैक्टरों की पहचान कर आरोपियों की तलाश में जुट गए हैं। मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
‘अगर यह पारित हो गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’: महिला कोटा विधेयक में ओबीसी के साथ ‘अन्याय’ पर प्रियंका गांधी | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:16 अप्रैल, 2026, 21:47 IST इससे पहले महिला कोटा बिल पर पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि वास्तव में इस कानून का महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा 16 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में बोलती हैं। (छवि: संसद टीवी/पीटीआई) कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी ने गुरुवार को कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस महिला आरक्षण के साथ खड़ी है, लेकिन अगर मौजूदा विधेयक, जैसा कि अभी पेश किया गया है, पारित हो जाता है तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। का स्पष्ट रूप से उत्तर देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन इससे पहले महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी ने कहा था कि असल में इस कानून का महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है. इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस महिला आरक्षण के साथ खड़ी है। गांधी ने संसद में विशेष सत्र के दौरान कहा, वास्तविकता यह है कि यह महिला विधेयक के बारे में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र इन विधेयकों को लाकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों को छीनना चाहता है। उन्होंने कहा, “सरकार जाति जनगणना न कराकर और 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर अड़े रहकर ओबीसी के अधिकारों को छीनना चाहती है। अगर यह विधेयक पारित हो गया तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।” केंद्रीय गृह मंत्री की ओर इशारा करते हुए अमित शाह का अपने भाषण पर प्रसन्नतापूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए, गांधी ने अपनी बात कहने के लिए तीखा हमला किया कि कैसे केंद्र “परिसीमन का अनुचित लाभ” उठा रहा है। “अचानक चुनाव के दौरान, आप सर्वदलीय बैठक के बिना एक सत्र बुलाते हैं। वे (सत्ता पक्ष) एक कथा बनाएंगे और फिर विपक्ष को इसमें डाल देंगे। धर्म संकट (नैतिक दुविधा). हम पीएम (नरेंद्र मोदी) से ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि वह दुनिया के दबाव में हैं।’ काला टीका भी काम आ जाएगा,” उसने कहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष “आपके तीन विधेयकों का पुरजोर विरोध करता है”, और यदि प्रधान मंत्री मोदी वास्तव में महिलाओं की परवाह करते हैं, तो वह उनका राजनीतिक उपयोग नहीं करेंगे। महिला कोटा कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन के लिए पेश किए गए तीन विधेयकों पर लोकसभा में बहस जारी है। ‘महिलाएं उन लोगों को आसानी से पहचान लेती हैं जो उन्हें गुमराह करने की कोशिश करते हैं’ गांधी ने पूछा कि केंद्र सरकार लोकसभा की 543 सीटों पर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण क्यों नहीं दे सकती. उन्होंने कहा कि विधेयक लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने की बात करता है – जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा। बारीकी से पढ़ने पर पता चलता है कि परिसीमन आयोग के तीन सदस्य राज्यों के भाग्य और संसद में उनके प्रतिनिधित्व का फैसला करेंगे। कांग्रेस सांसद ने विधायी निकायों में महिला आरक्षण के मुद्दे की पृष्ठभूमि भी बताई। उन्होंने कहा, “यह मुद्दा हर महिला के दिल के करीब है। इस मुद्दे की एक पृष्ठभूमि है। प्रधान मंत्री ने कहा कि यह मुद्दा 30 वर्षों से अवरुद्ध था। इसे नेहरू नामक व्यक्ति ने शुरू किया था। वह नेहरू नहीं जिनसे वे इतना बचते हैं, बल्कि मोतीलाल नेहरू हैं, जिन्होंने एक समिति के अध्यक्ष के रूप में 19 अधिकारों की एक सूची तैयार की थी, जिन्हें कांग्रेस के कराची सत्र में एक प्रस्ताव के रूप में पारित किया गया और भारतीय राजनीति में महिलाओं को समान अधिकार देने का आधार बनाया गया।” उन्होंने कहा कि वह राजीव गांधी ही थे, जो प्रधानमंत्री के रूप में पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण के लिए विधेयक लाए थे नगरपालिका और आखिरकार कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार के दौरान इसके लिए बिल पास हो गया. उन्होंने कहा, “यूपीए के तहत, इसे राज्यसभा में पारित किया गया था लेकिन लोकसभा में आम सहमति नहीं बन सकी। 2018 में, राहुल गांधी ने महिला आरक्षण की मांग करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा।” मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने आगे कहा कि मोदी के संबोधन से ऐसा लगता है कि सत्तारूढ़ भाजपा महिला आरक्षण की चैंपियन है। “कोई भी महिला आपको बताएगी कि महिलाएं उन लोगों को आसानी से पहचान लेती हैं जो उन्हें गुमराह करने की कोशिश करते हैं,” उन्होंने कहा और भाजपा से सावधान रहने का आग्रह किया। महिला कोटा कानून में बदलाव के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक मत विभाजन के बाद लोकसभा में पेश किया गया। केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित संशोधित महिला कोटा कानून को लागू करने के लिए दो सामान्य विधेयक – परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी सदन में पेश किए गए। (एजेंसी इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 18:24 IST समाचार राजनीति ‘अगर यह पारित हो गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’: महिला कोटा विधेयक में ओबीसी के साथ ‘अन्याय’ पर प्रियंका गांधी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण बिल(टी)प्रियंका गांधी(टी)कांग्रेस पार्टी(टी)नरेंद्र मोदी(टी)ओबीसी अधिकार(टी)जाति जनगणना भारत(टी)भारतीय संसद विशेष सत्र(टी)महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व
अशोकनगर में एक ही फंदे पर लटके मिले पति-पत्नी:साड़ी से फंदा बनाकर एक साथ आत्महत्या की, दोनों की एक दो साल की बेटी

अशोकनगर जिले के ईसागढ़ तहसील में गुरुवार सुबह पति-पत्नी के शव फंदे पर लटके मिले। 25 साल के युवक और उसकी पत्नी एक ही फंदे पर साड़ी के फंदे से लटके मिले। दोनों की दो साल की एक बेटी भी है। मृतकों की पहचान भूपेंद्र आदिवासी (25) पुत्र लल्लूराम आदिवासी और उनकी पत्नी मिश्री बाई आदिवासी (लगभग 22-23 वर्ष) के रूप में हुई है। वे इमलीपुरा गांव, थाना कदवाया के रहने वाले थे। दंपती ने अपने घर में एक ही साड़ी से फंदा बनाकर एक साथ आत्महत्या की। युवक की मां ने आवाज लगाई तब देखा घटना का खुलासा गुरुवार सुबह तब हुआ जब भूपेंद्र की मां ने घर का दरवाजा बंद देखा और आवाज देने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। परिजनों ने दरवाजा जोर से धकाया और अंदर जाकर देखा तो दोनों पति-पत्नी फंदे पर लटके हुए थे। ग्रामीणों के अनुसार, दंपती मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। भूपेंद्र शराब का आदी था और नशे में कभी-कभी विवाद करता था, जबकि उनकी पत्नी मिश्री बाई शांत स्वभाव की थी। ग्रामीणों ने कहा कि शायद आर्थिक तंगी और पारिवारिक तनाव के कारण उन्होंने यह कदम उठाया होगा। हालांकि, आत्महत्या के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही कदवाया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों की मदद से दोनों शवों को फंदे से नीचे उतारा। इसके बाद शवों को ईसागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या के पीछे के कारणों की पड़ताल की जा रही है। दंपती की दो साल की बेटी अनाथ हो गई है। फिलहाल परिजन उसकी देखभाल कर रहे हैं।







