बादशाह को चैलेंज कर चुकीं हरियाणवी लेडी सिंगर को धमकी:लॉरेंस गैंग का मैसेज-2 दिन में गोली लगेगी; 'आजा तनै बादशाह सुनाऊं रे टरीरी' गा चुकीं

‘आजा बादशाह तनै सुनाऊं रै टटीरी’ सॉन्ग से रैपर बादशाह को चैलेंज करने वाली हरियाणवी सिंगर सुदेश को लॉरेंस गैंग के नाम से धमकी मिली है। उनके वॉट्सएप नंबर पर मैसेज कर लिखा- ”लॉरेस ग्रुप से अंकित बोलू हूं। 2 लाख भेज दे चुपचाप, 2 दिन का टाइम है, फिर गोली लगेगी” सुदेश ने कैथल SP मनप्रीत सिंह को शिकायत देकर सुरक्षा की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। मोबाइल नंबर की लोकेशन चेक की जा रही है। इधर, पाखंडवाद पर कन्ट्रोवर्सी के बीच सुदेश ने करीब 15 दिन पहले ही ‘खीर पाखंड़िया की’ सॉन्ग गाया था। वहीं, 1 मार्च 2026 को रिलीज हुए बादशाह के ‘टटीरी’ सॉन्ग के जवाब में सुदेश ने 9 मार्च को ‘बोली ए टटीरी’ सॉन्ग गाया था। हालांकि बादशाह के सॉन्ग को बैन कर दिया गया था। मैसेज में लिखा- तेरा भी टाइम आ लिया सिंगर सुदेश को धमकी देने वाले व्यक्ति ने खुद को अंकित बताते हुए लिखा- तेरा भी टाइम आ लिया है, चुपचाप 2 लाख रुपए दे दे। फिर यह ना कहना कि ये के हो गया मेरे साथ। जय बलकारी, लॉरेंस ग्रुप। इसके बाद लिखा कि 2 दिन का टाइम है तेरे धोरे, नहीं फिर गोली चलेगी। नंबर ब्लॉक करने से पहले सोच भी लेना। पुलिस धोरे जा या फिर किसी के पास जा। चेक कर लिए, कोई ना, तेरे को टाइम दिया है। अब पढ़िए, पुलिस शिकायत में क्या बताया वॉट्सएप मैसेज भेग मांगे पैसे: शिकायत के अनुसार, सुदेश के मोबाइल पर 10 सितंबर की रात 10:48 बजे से 11:43 बजे तक एक अज्ञात मोबाइल नंबर से लगातार मैसेज आए। आरोप है कि मैसेज भेजने वाले ने 2 लाख रुपए की मांग की। पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। लॉरेंस गैंग का मेंबर बताया: सुदेश ने पुलिस को बताया कि वह धमकी देने वाले व्यक्ति को नहीं जानती। उन्होंने धमकी भरे मैसेज के स्क्रीनशॉट भी शिकायत के साथ पुलिस को उपलब्ध करवाए हैं। वहीं, सुदेश का कहना है कि पूरा परिवार डरा हुआ है। धमकी के कारण रातभर सो भी नहीं पा रहे। एसपी से सुरक्षा मांगी: सिंगर सुदेश ने 11 सितंबर को कैथल एसपी मनप्रीत सिंह को शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। सिंगर को भेजा गया धमकी भरा मैसेज क्या है, बादशाह और सुदेश के टटीरी सॉन्ग बादशाह का बैन हो चुका ‘टटीरी’ सॉन्ग हरियाणवी लोकगीत टटीरी को बादशाह ने नए रैप वर्जन में 1 मार्च को रिलीज किया था। रिलीज होने के बाद से ही उन पर अश्लील शब्दों और दृश्य दिखाने के आरोप लगे थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस सॉन्ग का बॉयकाट शुरू हो गया। विरोध बढ़ने के बाद रैप वर्जन को कई प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, उसी विवाद के बाद कई कलाकारों ने टटीरी गीत को अपने-अपने अंदाज में गाकर रिलीज किया। सुदेश का ऐसी न थी ‘टटीरी’ सॉन्ग क्यूट रोहिल्ला यूट्यूब चैनल पर 9 मार्च को असली टटीरी नाम से सॉन्ग रिलीज हुआ था। इस गीत में सीधे तौर पर बादशाह को संबोधित करते हुए कहा गया है कि वह टटीरी गीत को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। सॉन्ग के लिरिक्स है- ”आज्या तनै बादशाह सुनाऊं रे टरीरी, ऐसी ना थी जैसी तनै बनाई रे टटीरी। गंदा गाकै पेश करया क्यू आई तनै काण ना, गलत बौलै धी बेटी नै, के तेर घर मै भाण ना, गाने मैं गंदगीं मचाई रे भतेरी।” ————– यह खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर ने गाया- ऐसी ना थी,जैसी तनै बनाई ‘टटीरी’:बादशाह का नाम लेकर ‘तेरे घर में बहन-बेटी ना’ लिरिक्स गाए; सिमरन का न्यू सॉन्ग रिलीज हरियाणवी लोक गीत ‘टटीरी’ को अब सिंगरों ने नए वर्जन में गाकर बॉलीवुड रैपर बादशाह को जवाब दिया है। यूट्यूब से हटाए गए बादशाह के टटीरी सॉन्ग में उनके साथ काम करने वाली सिमरन जागलान में भी इसे अब नए ढंग में पेश किया है। (पूरी खबर पढ़ें)
भारत पर 100% टैरिफ बिल पर अमेरिकी संसद में वोटिंग:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रम्प लगा सकेंगे भारी शुल्क; सीनेट से पास हो चुका

अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज उस बिल पर अंतिम वोटिंग होगी, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है। इसका असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ सकता है। हालांकि, इस वोटिंग का मतलब भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लगना नहीं है। बिल कानून बना तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ऐसा टैरिफ लगाने की कानूनी शक्ति मिल जाएगी। मंगलवार को हाउस ने 214-211 वोट से बिल को अंतिम वोटिंग के लिए आगे बढ़ाया था। इससे पहले अमेरिकी सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है। यह बिल कानून बना तो भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स आदि के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है, तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। अगर अमेरिकी संसद का निचला सदन इसे मंजूरी दे देता है, तो बिल व्हाइट हाउस जाएगा। यहां राष्ट्रपति ट्रम्प के साइन करते ही यह कानून बन जाएगा। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। पूरी खबर पढ़ें…
कहीं कीचड़ में स्कूल जाते बच्चे, कहीं घुटनों तक पानी:कहीं फिसलन, कहीं सांप-बिच्छू तो, कहीं पानी में डूबने का खतरा; वीडियो वायरल

एमपी के रायसेन जिले में गैरतगंज तहसील में आने वाले देवनगर में स्कूल जाती छात्राओं का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल की तरफ जा रहे हैं और उनकी पीठ पर स्कूल बैग हैं और ये इन बच्चों का आम रास्ता है। कीचड़ भरे रास्ते से रोज जाते हैं स्कूल वे आगे जाकर पहले पानी ढूंढते हैं ताकि अपने पैर साफ कर सकें उसके बाद ही स्कूल तक पहुंच पाते हैं। इसी वजह से इन बच्चों ने पैरों में किसी भी तरह की कोई चप्पल या जूते भी नहीं पहन रखे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बच्चे रोज इसी तरह स्कूल जाने को मजबूर हैं, कई बार वे फिसलकर गिर पड़ते हैं और चोटिल हो जाते हैं। इसी मुश्किल रास्ते की वजह से कई बार छोटे बच्चों का स्कूल जाना कठिन हो जाता है। खतरनाक रास्ते से जाने की वजह से सांप-बिच्छू के काटने का भी खतरा रहता है। स्कूल टीचर भी कर चुके हैं सड़क की मांग वहीं स्कूल टीचर का कहना है कि कई बार वे इसकी शिकायत कर चुकी हैं और पंचायत प्रशासन से सड़क बनाने के लिए आवेदन भी दे चुके हैं लेकिन अभी तक कोई भी हल नहीं निकला है। वहीं ग्रामीणों को कहना है कि सरपंच से कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं कि बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। साथ ही आम लोगों को भी आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन सरपंच का कहना है कि वो रोड नहीं बनवाएगा। बिहार में 25 सालों से पुल की मांग ये सिर्फ एमपी के के गांव की तस्वीर नहीं है ऐसा ही एक वीडियो देशभर से आ रहे हैं। बिहार के गया जिले के मानपुर प्रखंड में कईया गांव का है। जहां बच्चे घुटने तक पानी पार करकर स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां एक तरफ नदी है और एक तरफ नहर लेकिन कोई पुल नहीं है। इस वजह से बच्चों को रोज इसी तरह स्कूल जाना पड़ता है। 3 महीने में 3 हफ्ते ही स्कूल जा पा रहे बच्चे ग्रामीणों की शिकायत है कि बच्चे बारिश के समय कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं क्योंकि पानी बढ़ जाता है और न रोड है न पुल है। जिससे बच्चों के डूबने का खतरा होता है इसलिए बच्चे 3 महीने की बारिश में हफ्ते में 1-2 दिन ही स्कूल जा पाते हैं, उन्हें मजबूरी में क्लास छोड़नी पड़ती हैं। ‘डीएम साहब हमारे स्कूल की रोड बनवा दीजिए’ ऐसा ही एक ओर वीडियो वायरल हो रहा है, दावा है कि ये वीडियो एमपी के बुरहानपुर जिले के देवला ग्राम पंचायत का है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ में सिर पर किताबें लेकर स्कूल से वापस घर की तरफ आ रहे हैं। इस वीडियो में बच्चे अपना स्कूल दिखा रहे हैं और कह रहे हैं ‘डीएम साहब हमारे स्कूल की रोड बनवा दीजिए, वो हमारा स्कूल है, स्कूल जाने में दिक्कत होती है। ‘ शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के मुताबिक शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) के सेक्शन 6 के तहत बच्चों के स्कूल की दूरी के स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। साथ ही रास्ते पर बेहतर रोशनी और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होना चाहिए। ————————– मिड डे मील में कहीं कीड़े, कहीं सड़े आलू:आरोप छात्रों से प्रिंसिपल कहते हैं- शिकायत की तो केस कर देंगे, देशभर के कई राज्यों के मामले एमपी के छिंदवाड़ा के मानेगांव में स्कूली बच्चों के मध्यान भोजन यानी मिड डे मील में खाने की गुणवत्ता, सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें..
अमेरिका में AI को लेकर तीन खेमे:मस्क को सभ्यता मिटने का डर, ट्रम्प को चीन से पिछड़ने की चिंता, तीसरा पक्ष इंसानी कंट्रोल चाहता

अमेरिका में AI के विकास की रफ्तार को लेकर बहस तेज है। इसे लेकर तीन अलग-अलग खेमे बन गए हैं। इलॉन मस्क समेत कुछ टेक दिग्गजों को डर है कि AI अगर इंसानों के कंट्रोल से बाहर हुआ तो पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है। वे इसे परमाणु हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प AI की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर अमेरिका को AI की दौड़ में चीन से आगे रखने पर है। उनका मानना है कि ज्यादा रोक-टोक से अमेरिका पीछे रह सकता है। तीसरा खेमा AI को लेकर बीच का रास्ता चाहता है। वह इसकी रफ्तार रोकने के बजाय सुरक्षा नियम और इंसानी निगरानी बनाए रखने के पक्ष में है। राष्ट्रपति ट्रम्प AI पर निगरानी के खिलाफ पिछले एक हफ्ते में AI के विकास को धीमा करने की मांग अमेरिकी राजनीति के बड़े मुद्दों में शामिल हो गई है। कई टेक कंपनियों के बड़े अधिकारी AI पर ज्यादा सावधानी और नियमों की बात कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसका विरोध कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि AI पर नियंत्रण की मांग करने वालों में अमेरिका के राजनीतिक वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों तरफ के लोग शामिल हैं। आम तौर पर इन दोनों विचारधाराओं में बहुत कम मुद्दों पर सहमति होती है, लेकिन AI के मामले में दोनों तरफ के कुछ नेता इसे नियंत्रित करने की जरूरत मानते हैं। AI को लेकर इस लड़ाई का असर सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे तय होगा कि आने वाले समय में AI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में किस तरह इस्तेमाल होगा और दुनिया के लिए इसके नियम कौन तय करेगा। AI का विकास धीमा करने के पक्ष में… डारियो अमोडेई डारियो अमोडेई AI कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने 2021 में OpenAI छोड़कर एंथ्रोपिक शुरू की थी। कंपनी ने खुद को AI की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने वाली कंपनी के तौर पर पेश किया है। अमोडेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य की AI बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने जैसे खतरनाक कामों में हो सकता है। वह AI पर सरकारी नियम बनाए जाने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 3,800 शब्दों का एक लेख लिखकर दुनियाभर में AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की योजना सामने रखी। रुख बदलने वाले… सैम ऑल्टमैन सैम ऑल्टमैन OpenAI के को-फाउंडर और CEO हैं। 2023 में उन्होंने AI से इंसानों के खत्म होने के खतरे से जुड़े एक बयान पर हस्ताक्षर किए थे। उसी साल अमेरिकी सीनेट में उन्होंने ताकतवर AI मॉडल पर नियम बनाने का समर्थन भी किया था। हालांकि, 2025 के बीच तक उनका रुख कुछ बदल गया। उन्होंने कहा कि AI में बड़े बदलाव धीरे-धीरे होंगे और उन्हें संभालना संभव होगा। लेकिन जुलाई 2026 में OpenAI ने खुद माना कि टेस्ट के दौरान उसके दो मॉडल्स जानबूझकर टेस्टिंग से निकल भागे और चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर AI कंपनी Hugging Face के सर्वर तक पहुंच गए। वो भी बिना किसी इंसानी दखल के। इसके बाद ऑल्टमैन ने कहा कि अब AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का समय आ गया है। उन्होंने अमोडेई की इस बात से सहमति जताई कि AI मॉडल के विकास की रफ्तार कम होनी चाहिए। इलॉन मस्क इलॉन मस्क xAI, स्पेसX और टेस्ला के CEO हैं। मस्क लंबे समय से कहते रहे हैं कि AI के खतरनाक होने की संभावना करीब 10 से 20% है। उन्होंने AI को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है और समय रहते नियम बनाने की मांग की है। हालांकि, उन्होंने xAI शुरू की और राष्ट्रपति ट्रम्प को चुनाव में जिताने के लिए बड़ी रकम खर्च की। ट्रम्प प्रशासन में वह कुछ समय तक नियमों में ढील देने से जुड़े काम से भी जुड़े रहे। इसके बावजूद शनिवार को सोशल मीडिया पर मस्क ने अमोडेई की AI को धीमा करने की मांग का समर्थन किया और लिखा कि “डारियो सही हैं।” AI पर बीच का रास्ता चाहते हैं… सत्या नडेला सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और CEO हैं। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और OpenAI के बीच बड़ी साझेदारी को आगे बढ़ाया है। हाल के समय में माइक्रोसॉफ्ट ने अपने खुद के AI टूल्स पर भी जोर बढ़ाया। नडेला ने हाल ही में कहा कि AI का विकास सोच-समझकर और कंट्रोल्ड रफ्तार से होना चाहिए। वह एडवांस्ड AI सिस्टम पर इंसानों की निगरानी के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि ऐसी सुपरइंटेलिजेंस विकसित करने का कोई मतलब नहीं है जो इंसानों के कंट्रोल में न रहे या जिसका फायदा लोगों को न मिले। इसके साथ ही वह AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और खुले AI सिस्टम का भी समर्थन करते हैं। सुंदर पिचाई सुंदर पिचाई अल्फाबेट और गुगल के CEO हैं। पिचाई कई सालों से कहते रहे हैं कि AI इतना जरूरी है कि इस पर सही तरीके से नियम बनने चाहिए। उन्होंने AI के खतरों को भी माना है। हालांकि, वह बहुत कड़े नियमों के बजाय AI के अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से नियम बनाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि AI से मिलने वाले फायदों को हासिल करने में पीछे रहना भी बड़ा खतरा हो सकता है। मार्क जुकरबर्ग मार्क जुकरबर्ग मेटा के चेयरमैन और CEO हैं। उनका मानना है कि AI का कुछ बड़ी कंपनियों के हाथों में सीमित हो जाना ज्यादा बड़ा खतरा है। इसके मुकाबले AI तक ज्यादा लोगों की पहुंच को वह सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं। जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका में AI मॉडल जारी करने की रफ्तार धीमी हुई तो इसका फायदा चीन को मिल सकता है। हालांकि, वह AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को भी मानते हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि मेटा भविष्य में अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल सभी के लिए खुले तौर पर जारी नहीं कर सकती। एलेक्जेंडर वेंग एलेक्जेंडर वेंग 2025 में Meta से जुड़े और कंपनी में AI से जुड़े बड़े कामों की जिम्मेदारी संभाली। वह मेटा के डिजिटल असिस्टेंट AI एजेंट ‘म्यूस’ के विकास से भी
अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक:40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे

अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। कुछ बड़े सरकारी फंड अमेरिकी बॉन्ड में निवेश घटा रहे हैं। कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीदकर अपना भंडार बढ़ा रहे हैं। वहीं, जर्मनी की कंपनियों ने 2026 की पहली छमाही में अमेरिका में निवेश कम किया और चीन में निवेश बढ़ाया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया अमेरिका से पूरी तरह दूर हो रही है। डॉलर अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी रिजर्व करेंसी है और अमेरिकी शेयर बाजार व बॉन्ड में अब भी बड़ी मात्रा में पैसा लगा हुआ है। अमेरिका को कर्ज लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा अमेरिकी बॉन्ड बाजार में निवेशकों की चिंता अब साफ दिखने लगी है। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड सितंबर में करीब 5% तक पहुंच गई। 11 सितंबर को यह 4.93% थी, जबकि इससे पहले 4.979% तक पहुंच चुकी थी। आसान भाषा में समझें तो यील्ड बढ़ने का मतलब है कि अमेरिका को कर्ज लेने के लिए निवेशकों को ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है। यानी सरकार के लिए कर्ज लेना महंगा होता जा रहा है। इसका असर आगे चलकर सरकारी खर्च पर भी पड़ सकता है। बॉन्ड में निवेशकों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी पुराने बॉन्ड की खरीद बढ़ा रहा है। हालांकि, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था मजबूत है और बॉन्ड की हाल की नीलामियां अच्छी रही हैं। नॉर्वे अमेरिकी बॉन्ड में निवेश घटा सकता है अमेरिका से निवेश कम करने वालों में नॉर्वे का सरकारी फंड भी शामिल है। करीब 2.3 ट्रिलियन डॉलर (₹218.5 लाख करोड़) का यह फंड अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में अपना पैसा कम करने की योजना बना रहा है। नॉर्वे के फंड में सरकारी बॉन्ड का हिस्सा 70% से घटाकर 50% करने का प्रस्ताव है। इसमें सबसे बड़ी कटौती अमेरिकी बॉन्ड में होने की संभावना है। इससे अमेरिका के बॉन्ड में नॉर्वे का निवेश करीब 80 अरब डॉलर तक कम हो सकता है। हालांकि, नॉर्वे सिर्फ अमेरिका से दूरी बनाने के लिए यह बदलाव नहीं कर रहा। वह जापान के सरकारी बॉन्ड और दूसरे तरह के बॉन्ड में पैसा लगाने पर भी विचार कर रहा है। इसका मकसद अपना पैसा अलग-अलग जगह लगाना और बेहतर कमाई के मौके तलाशना है। जर्मन कंपनियों का अमेरिका में निवेश 65% घटा, चीन में एक-तिहाई बढ़ा अमेरिका और चीन में जर्मन कंपनियों के निवेश के आंकड़ों में इस साल बड़ा फर्क दिखा है। 2026 की पहली छमाही में अमेरिका में उनका निवेश 65% घटकर 4.3 अरब यूरो रह गया। वहीं, चीन में निवेश करीब एक-तिहाई बढ़कर 5.6 अरब यूरो पहुंच गया। जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट की स्टडी के मुताबिक, अमेरिका में जर्मन कंपनियों का निवेश ऐसे समय घटा है, जब ट्रम्प की टैरिफ और व्यापार नीतियों को लेकर कारोबार में अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं, चीन में पहले से काम कर रही जर्मन कंपनियां अपने कारोबार में लगातार पैसा लगा रही हैं। डॉलर की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही डॉलर अभी भी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली रिजर्व करेंसी है। लेकिन दुनिया के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा धीरे-धीरे कम कर रहे हैं। आईएमएफ के मुताबिक, 2025 की आखिरी तिमाही में दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी 56.77% थी। इससे पिछली तिमाही में यह 56.93% थी। वहीं, चीन की मुद्रा रेनमिन्बी की हिस्सेदारी सिर्फ 1.95% थी। इसका मतलब यह नहीं है कि चीन की मुद्रा अभी डॉलर की जगह लेने वाली है। डॉलर की पकड़ अब भी बहुत मजबूत है। बस कुछ देश अपने पैसे को अलग-अलग जगह रख रहे हैं। वे डॉलर के साथ दूसरी मुद्राओं और सोने में भी अपना भंडार बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे डॉलर के साथ अब सोना भी केंद्रीय बैंकों के लिए अहम रिजर्व बनता जा रहा है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 2025 में कुल 863 टन सोना खरीदा। यह 2024 के मुकाबले कम था, लेकिन लंबे समय के औसत से अब भी काफी ज्यादा रहा। 2022 से 2025 के बीच केंद्रीय बैंकों ने हर साल औसतन करीब 1,000 टन सोना खरीदा। यानी सोने को रिजर्व में शामिल करने का चलन पिछले कुछ सालों से लगातार बना हुआ है। 2026 में भी खरीद जारी चीन-भारत में भी सोने की मांग बढ़ी सोने की बढ़ती मांग सिर्फ केंद्रीय बैंकों तक सीमित नहीं है। आम निवेशक भी सोने में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। 2025 में चीन में सोने की निवेश मांग 28% बढ़ी। भारत में भी सोने में निवेश की मांग 17% बढ़ी। दोनों देशों के बाजारों ने मिलकर दुनिया में सोने की छड़ों और सिक्कों की कुल मांग का आधे से ज्यादा हिस्सा अपने नाम किया। यानी सोने की मांग दो तरफ से बढ़ रही है। एक ओर केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी ओर चीन और भारत जैसे बड़े बाजारों में आम निवेशक भी सोने को निवेश का विकल्प मान रहे हैं। अमेरिका की आर्थिक ताकत अभी भी बरकरार इन बदलावों के बावजूद अमेरिका की आर्थिक ताकत अभी खत्म नहीं हुई है। दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडार में आज भी डॉलर की हिस्सेदारी 56% से ज्यादा है। अमेरिकी शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड में भी दूसरे देशों का पैसा लगा हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना हुआ है और सरकारी बॉन्ड की नीलामी भी अच्छी चल रही है।
लीजेंड्री गायिका MS सुब्बुलक्ष्मी की बायोपिक में रश्मिका:जवाहरलाल नेहरू ने इनसे कहा था- आपके सामने मैं मामूली PM, जानिए क्यों गांधी जी थे फैन

लीजेंड्री गायिका MS सुब्बुलक्ष्मी पर बायोपिक बनेगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जो पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी हिट फिल्में बना चुके हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने फिल्मों से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था- आपके सामने मैं मामूली प्रधानमंत्री हूं द प्रिंट के अनुसार, 1953 में दिल्ली में हुए कर्नाटक समारोह में सुब्बुलक्ष्मी को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने गाने का मौका मिला। जवाहरलाल नेहरू इस बार खुद को उनकी तारीफ करने से नहीं रोक सके। उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी के पास जाकर कहा- आपकी आवाज में दिलों के तार हिला देने की ताकत है, मैं आपके सामने क्या हूं, सिर्फ एक मामूली प्रधानमंत्री। गांधी जी भी फैन थे, सामने बैठाकर करते थे गाने की गुजारिश स्वतंत्रता संग्राम में साथ काम करते हुए महात्मा गांधी और सुब्बुलक्ष्मी की दोस्ती हो गई। गांधी जी को उनकी आवाज इतनी पसंद थी कि उन्होंने कई बार सुब्बुलक्ष्मी से सामने बैठकर रघुपति राघव राजा राम सुनाने की गुजारिश की। 2 अक्टूबर 1947 को महात्मा गांधी ने दिल्ली में सुब्बुलक्ष्मी के लिए एक कार्यक्रम
लीजेंड्री गायिका MS सुब्बुलक्ष्मी की बायोपिक में रश्मिका:जवाहरलाल नेहरू ने इनसे कहा था- आपके सामने मैं मामूली PM, जानिए क्यों गांधी जी थे फैन

लीजेंड्री गायिका MS सुब्बुलक्ष्मी पर बायोपिक बनेगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जो पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी हिट फिल्में बना चुके हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने फिल्मों से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था- आपके सामने मैं मामूली प्रधानमंत्री हूं द प्रिंट के अनुसार, 1953 में दिल्ली में हुए कर्नाटक समारोह में सुब्बुलक्ष्मी को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने गाने का मौका मिला। जवाहरलाल नेहरू इस बार खुद को उनकी तारीफ करने से नहीं रोक सके। उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी के पास जाकर कहा- आपकी आवाज में दिलों के तार हिला देने की ताकत है, मैं आपके सामने क्या हूं, सिर्फ एक मामूली प्रधानमंत्री। गांधी जी भी फैन थे, सामने बैठाकर करते थे गाने की गुजारिश स्वतंत्रता संग्राम में साथ काम करते हुए महात्मा गांधी और सुब्बुलक्ष्मी की दोस्ती हो गई। गांधी जी को उनकी आवाज इतनी पसंद थी कि उन्होंने कई बार सुब्बुलक्ष्मी से सामने बैठकर रघुपति राघव राजा राम सुनाने की गुजारिश की। 2 अक्टूबर 1947 को महात्मा गांधी ने दिल्ली में सुब्बुलक्ष्मी के लिए एक कार्यक्रम
अरब सागर में भारतीय-पाकिस्तानी जहाज टकराए:तेज रफ्तार में आ रहे पाकिस्तानी जहाज ने गलत दिशा में मोड़ा रास्ता, दिल्ली में PAK हाईकमिश्नर तलब

अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों की टक्कर हुई। भारत के मुताबिक, तेज रफ्तार में आ रहे पाकिस्तानी जहाज ने अचानक गलत दिशा में मोड़ लिया, जिससे वह भारतीय नौसेना की यूनिट से टकरा गया। हादसे में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इसके बाद भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कड़ा विरोध जताया। भारत ने पाकिस्तानी नौसेना के इस व्यवहार को गैर-पेशेवर और अस्वीकार्य बताया। 35 साल पुराने समझौते का उल्लंघन बताया भारत ने कहा कि पाकिस्तानी नौसेना के जहाज का व्यवहार अप्रैल 1991 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आर्टिकल 10 का सीधा उल्लंघन है। इस समझौते के तहत दोनों देशों को सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की पहले से जानकारी देनी होती है। भारत और पाकिस्तान पहले भी समुद्र में हुई घटनाओं के मामलों में इस समझौते के आर्टिकल 10 का हवाला दे चुके हैं। भारत बोला- समुद्र में सैन्य यूनिट्स पूरी सावधानी बरतें भारत ने पाकिस्तान से ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, पाकिस्तानी चार्ज डी’अफेयर्स से कहा गया कि वे अपने संबंधित अधिकारियों को सभी सैन्य यूनिट्स को समुद्र में पूरी सावधानी बरतने की सलाह दें। भारत ने दोनों देशों के बीच हुए संबंधित समझौतों के प्रावधानों का पालन करने पर भी जोर दिया। खबर अपडेट हो रही है…
'सुशांत सिंह राजपूत के कातिल अब पकड़े जाएंगे':एक्टर के MLA भाई बोले-उद्धव सरकार ने सबूत मिटाए; दिशा सालियान केस में CBI ने की है FIR

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI ने सोमवार को FIR दर्ज की है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा के पिता की याचिका पर CBI जांच के निर्देश दिए थे। FIR दर्ज होने के बाद एक्टर सुशांत सिंह के चचेरे भाई और बीजेपी विधायक नीरज बब्लू ने दावा किया है कि अगर दिशा के हत्यारे पकड़े जाते हैं, तो सुशांत की हत्या का राज भी खुल जाएगा। उद्धव सरकार पर मामलों को दबाने का आरोप नीरज बबलू ने आरोप लगाया कि उस वक्त महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार थी, जो उनके खिलाफ थी। उन्होंने जानबूझकर दोनों हत्याओं के मामलों को दबाने का काम किया। जब बिहार में सीबीआई जांच की मांग उठी, तब तक वहां सभी सबूत मिटा दिए गए थे और तथ्य छिपा लिए गए थे। पूर्व मंत्री ने बताया कि उस समय दिशा सालियान के पिता सदमे में थे, लेकिन महाराष्ट्र में सरकार बदलने और बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उन्हें सुरक्षा और न्याय की उम्मीद जगी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने जांच बढ़ाते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है। ‘सामने आएंगे बड़े नाम, करोड़ों फैंस को न्याय की आस’ नीरज बबलू ने विश्वास जताते हुए कहा कि अब दिशा सालियान के हत्यारे निश्चित रूप से पकड़े जाएंगे और सीधे जेल जाएंगे। दिशा के कातिलों के पकड़े जाते ही सुशांत मामले में भी चीजें बिल्कुल साफ हो जाएंगी। यह स्पष्ट हो जाएगा कि सुशांत की हत्या के पीछे किन ‘बड़े लोगों’ का हाथ था और इसके पीछे का असल मकसद क्या था। 14 जून 2020 को हुई थी सुशांत की मौत 14 जून 2020 में बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत का शव उनके बांद्रा स्थित फ्लैट में मिला था। खबर सामने आते ही पूरे देश में सनसनी मच गई थी। लोगों ने दावा किया कि सुशांत की मौत महज खुदकुशी नहीं हैं, बल्कि उनका मर्डर किया गया है, जिसके बाद हर किसी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था। 25 जून को सुशांत की फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई थी, जिसे पांच डॉक्टरों की टीम द्वारा तैयार किया गया था। इस रिपोर्ट में साफ लिखा था कि एक्टर की मौत फांसी लगने के बाद दम घुटने से हुई है। विसरा रिपोर्ट में भी उनकी मौत को आत्महत्या करार दिया गया। लेकिन परिवार ने गड़बड़ी की आशंका जताते हुए जांच की मांग की। मुंबई पुलिस ने केस की जांच शुरू की, लेकिन मीडिया और पॉलिटिकल प्रेशर की वजह से केस CBI को सौंप दिया गया। 6 अगस्त 2020 को CBI ने FIR दर्ज की। 4 साल 6 महीने बाद मार्च 2025 में CBI ने फाइनल क्लोजर रिपोर्ट फाइल की। इसमें जांच एजेंसी ने कहा है कि आत्महत्या के लिए सुशांत को उकसाने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि सुशांत का परिवार ये मानने को तैयार नहीं कि ये सामान्य सुसाइड केस है। अब जानिए एक्टर सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के बारे में दिशा की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने से हुई थी। घटना के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह भी मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत मिले थे। दिशा केस की शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी। अक्टूबर 2020 में पुलिस ने मौत को सुसाइड बताया था। वहीं दिसंबर 2023 में केस दोबारा खोला गया और SIT बनाई गई। इसमें भी आत्महत्या की बात कही गई थी।
कनाडा में स्टडी वीजा के नियम बदले:अब ₹17 लाख बैंक बैलेंस रखना होगा; 31 अगस्त तक अप्लाई करने वाले पंजाबियों को फायदा हुआ

स्टडी वीजा पर कनाडा जाने वाले पंजाबियों को अब ज्यादा पैसे खर्चने पड़ेंगे। अब पढ़ने जाने वाले स्टूडेंट्स को अपने रहने-खाने सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए बैंक बैलेंस 17 लाख रखना होगा। इमीग्रेशन रिफ्यूजी सिटिजनशिप डिपार्टमेंट ने नए नियम लागू कर दिए है, जिसे अफिशियल वेबसाइट पर 1 दिन पहले अपडेट किया गया है। कनाडा सरकार का कहना है कि देश में बढ़ रही महंगाई के चलते ये निर्णय लिया गया है। पहले कनाडा स्टडी के लिए जाने वाले स्टूडेंट्स को 15 लाख के करीब सालाना बैंक बैलेंस मेंटेन रखना जरूरी था। IRCC के अनुसार 31 अगस्त तक अप्लाई कर चुके स्टूडेंट्स पर नए नियम लागू नहीं होंगे। 1 सितंबर 2026 से अप्लाई कर रहे स्टूडेंट्स पर नए नियमों के तहत अब कनाडाई यूनिवर्सिटी या कॉलेज में दाखिला लेने से पहले अपनी वित्तीय मजबूती साबित करने करने के लिए पहले से लगभग 2 लाख रुपए ज्यादा बैंक बैलेंस दिखाना होगा। कॉलेज फीस और ट्रेवल खर्च के अतिरिक्त दिखाना हो बैलेंस कनाडा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट (canada.ca) पर जारी ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, अब सिंगल एप्लीकेंट (अकेले जाने वाले छात्र) को लिविंग एक्सपेंस यानी रहने-खाने के खर्च के तौर पर कम से कम 23,448 कनाडाई डॉलर (CAD) का फंड दिखाना अनिवार्य होगा। भारतीय रुपए में यह रकम करीब 17 लाख रुपए बैठती है। इस रकम में कॉलेज की ट्यूशन फीस और भारत से कनाडा आने-जाने का ट्रैवल खर्च शामिल नहीं है। ट्यूशन फीस और यात्रा खर्च का हिसाब इस निर्धारित राशि से अलग रहेगा। परिवार के 4 मेंबर के साथ दिखाने होंगे 30 लाख इमिग्रेशन विभाग (IRCC) के आधिकारिक डेटा चार्ट के मुताबिक, यदि छात्र के साथ उनके परिवार के सदस्य भी कनाडा जाते हैं, तो उसी हिसाब से फंड की सीमा बढ़ जाएगी। दो लोगों के परिवार के लिए यह सीमा 29,185 CAD (20.10 लाख), तीन सदस्यों के लिए 35,880 CAD (24.74 लाख) और चार सदस्यों के परिवार के लिए 43,562 CAD (30.04 लाख) तय की गई है। इसके बाद परिवार के प्रत्येक अतिरिक्त सदस्य के जुड़ने पर 6,315 कनाडाई डॉलर (4.35 लाख) का अतिरिक्त फंड बैंक खाते में दिखाना अनिवार्य होगा। हालांकि, ये नियम क्यूबेक प्रांत को छोड़कर पूरे कनाडा में लागू होंगे, क्योंकि क्यूबेक अपने लिविंग एक्सपेंस के नियम अलग से तय करता है। महंगाई के चलते कनाडा सरकार ने बढ़ाया बजट IRCC की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इस फैसले का मुख्य मकसद कनाडा में रह रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को वित्तीय संकट और महंगाई से बचाना है। बीते कुछ वर्षों में कनाडा के प्रमुख शहरों में रेंट (मकान का किराया), ग्रोसरी और बेसिक यूटिलिटीज के दाम काफी तेजी से बढ़े हैं। पुराना फंड पैरामीटर मौजूदा महंगाई दरों के हिसाब से काफी कम पड़ रहा था, जिसके चलते कई विदेशी छात्रों को वहां जाकर पार्ट-टाइम जॉब्स पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था या रहने-खाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। वीजा अप्लाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान अब 1 सितंबर 2026 के बाद वीजा फाइल जमा करने वाले सभी छात्रों को तीन अलग-अलग मदों में अपना फंड प्रूफ देना होगा। पहला, पहले साल की पूरी ट्यूशन फीस; दूसरा तय लिविंग एक्सपेंस दिखाना होगा जो सिंगल छात्र के लिए 23,448 डालर है। तीसरा, भारत से कनाडा आने-जाने का टिकट खर्च। विशेषज्ञों की सलाह है कि कनाडाई वीजा के रिजेक्शन से बचने के लिए छात्र अपने स्पॉन्सर या बैंक स्टेटमेंट में आधिकारिक वेबसाइट द्वारा तय राशि से थोड़ा अधिक ही बैलेंस मेंटेन रखें, ताकि एप्लीकेशन में कोई अड़चन न आए। कनाडा में 10 लाख पंजाबी रह रहे कनाडा में पंजाबी मूल के लोगों की कुल संख्या लगभग 9.4 लाख से 10 लाख के बीच है, जो वहां की कुल आबादी का करीब 2.6% है।







