Sunday, 27 Sep 2026 | 09:27 AM

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फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है

फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है

अगर आपके पास करोड़ों रुपए हैं, तो भी आप शोरूम जाकर अपनी पसंद की फेरारी कार नहीं खरीद सकते। इसके कुछ स्पेशल और लिमिटेड एडिशन मॉडल्स जैसे- फेरारी ला-फेरारी या हालिया पुरोसांग्वे एसयूवी को खरीदने के लिए पहले आपको अपना बैकग्राउंड बताना होगा। यहां तक कि हो सकता है कि कंपनी खुद तय करे कि वह आपको गाड़ी बेचेगी या नहीं। फेरारी को लेकर दीवानगी का आलम यह है कि अगर आज आप कोई कार बुक करते हैं तो 2028 या 2029 में वह आपको मिल पाएगी। फेरारी रफ्तार और लग्जरी का ऐसा संगम है जो इसे सुपर-कार बनाती है। हालांकि फेरारी के इतिहास में दो ऐसे संकट भी आए जब कंपनी दिवालिया होने के करीब पहुंच कर अस्तित्व के लिए जूझती नजर आई। 1969 में यह दिवालिया होने के कगार पर थी, लेकिन तब फिएट ने हिस्सेदारी खरीदकर इसे बचा लिया। असली चुनौती 1988 में इसके संस्थापक एंजो फेरारी के निधन के बाद आई। 80 के दशक के अंत में सट्टेबाजों की वजह से कारों की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं। इसे कलेक्टर बबल कहा गया। जब 90 के दशक में वैश्विक मंदी आई और यह बुलबुला फूटा, तो 1991 के पीक के मुकाबले 1993 तक इसकी बिक्री आधी रह गई। कारें अपनी साख खोने लगी थीं। 8.50 लाख करोड़ रुपए की कंपनी है फेरारी आज फेरारी दुनिया के सबसे मजबूत ऑटोमोटिव और सुपर-कार ब्रांड्स में से एक है। ब्रांड्स फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार इसे दुनिया के सिर्फ 12 ब्रांड को मिलने वाली AAA+ रेटिंग हासिल है। आज यह करीब 8.50 लाख करोड़ रु. मूल्य की कंपनी है। वर्तमान में इसके दुनियाभर में करीब 5,718 कर्मचारी हैं। अगर भारत की बात करें तो यहां फेरारी की एक्स-शोरूम कीमत ₹3.76 करोड़ से शुरू होकर ₹10.37 करोड़ रु. तक जाती है। नई फेरारी कार के लिए ग्राहकों को दो साल तक की वेटिंग रहती है। देश में पूरा कोटा सोल्ड-आउट रहता है। शुरुआत – गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर ने रखी थी फेरारी की नींव इटली के मोदेना शहर में जन्मे और गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर एंजो फरारी ने 1939 में ऑटो एवियो कोस्त्रुजियोनी नाम से कंपनी शुरू की थी, लेकिन दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने के कारण करीब 8 साल तक काम बंद रहा। इसके बाद 1947 में उन्होंने फेरारी नाम से पहली कार सड़क पर उतारी। कार रेसिंग उनका जुनून था। नए कदम – लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी उतरी कंपनी कंपनी लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी धूम मचा रही है। हाल ही में मिलान फैशन वीक में फेरारी कलेक्शन पेश किया गया। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में कदम रख रही है, जिसके लिए मारानेलो में एक नई ‘ई-बिल्डिंग’ शुरू की गई है। इसके अलावा, मरीन इंजीनियरिंग और सेलिंग की दुनिया में भी प्रवेश की तैयारी कर रही है। यूं संकट में फंसी थी रेसिंग पर फोकस, ग्राहकों की अनदेखी – एंजो फेरारी का जुनून सिर्फ रेसिंग और फॉर्मूला वन जीतना था। इस रवैये के कारण उन्होंने कभी ग्राहकों की पसंद, आराम या लग्जरी को प्राथमिकता नहीं दी। लीडरशिप का अड़ियल रवैया, आंतरिक कलह – 1961 में एंजो की पत्नी ने प्रबंधन के कामों में दखल देना शुरू किया। जब अधिकारियों ने विरोध किया, तो एंजो ने कई प्रबंधकों को नौकरी से निकाल दिया। आर्थिक मंदी और कलेक्टर बबल का फूटना – 80 के दशक के अंत में लोग ये कारें निवेश के तौर पर खरीदते थे। 90 के दशक में मंदी की वजह से बिक्री आधी रह गई और कंपनी गहरे वित्तीय घाटे में डूब गई। भविष्य की रणनीति का अभाव – एंजो की मृत्यु के बाद फिएट के अधिकारियों ने कमान संभाली, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं थी। इस तरह की वापसी लुका डि मोंटेजेमोलो की लीडरशिप – 1991 में लुका डि मोंटेजेमोलो फेरारी के चेयरमैन बने। सबसे पहले कारों की क्वालिटी को सुधारा। सुनिश्चित किया कि फेरारी सड़क पर भी आरामदायक और भरोसेमंद हो। ब्रांड लाइसेंसिंग का विस्तार – मोंटेजेमोलो ने लग्जरी कपड़े, घड़ियां, परफ्यूम और अन्य लाइफस्टाइल उत्पादों के लिए अपने मशहूर ‘प्रान्सिंग हॉर्स’ लोगो को लाइसेंस पर देकर करोड़ों रुपए कमाए। एक्सक्लूसिविटी बरकरार रखना – लुका की रणनीति स्पष्ट थी- ‘हमेशा बाजार की मांग से एक कार कम बनाओ। इस कृत्रिम कमी ने अमीरों के बीच फेरारी का आकर्षण कई गुना बढ़ा दिया पर्सनलाइजेशन – 1993 में ‘फेरारी चैलेंज’ शुरू किया, जो फेरारी मालिकों के लिए एक एमेच्योर रेसिंग सीरीज थी। कई भारी पर्सनलाइजेशन के विकल्प दिए। ऐसे पड़ा नाम – कंपनी का नाम इसके संस्थापक एंजो फेरारी के सरनेम पर रखा गया है। रेसिंग शौकीन एंजो ने खुद ही यह नाम तय किया था। सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी – लैंबॉर्गिनी, मैकलारेन, पॉर्श, एस्टन मार्टिन और बुगाटी दुनियाभर में इसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों में हैं। – 3.5 लाख कारें ही बनाई हैं फेरारी ने आज तक। – 60 से ज्यादा देशों में व्यापार करती है कंपनी दुनियाभर में। – 179 अधिकृत डीलर हैं दुनियाभर में फेरारी के। -13,640 कारें बिकी कंपनी की 2025 में विभिन्न देशों में।

स्पेन के जंगल में आग, 12 की मौत, VIDEO:4 लोग कार में जिंदा जले, 19 अब भी लापता; इलेक्ट्रिक वायर से आग की आशंका

स्पेन के जंगल में आग, 12 की मौत, VIDEO:4 लोग कार में जिंदा जले, 19 अब भी लापता; इलेक्ट्रिक वायर से आग की आशंका

स्पेन के दक्षिणी हिस्से में एंडालूसिया में शुक्रवार को लगी भीषण जंगल की आग में 12 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 19 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह स्पेन के सबसे बड़ी जंगलों की आग की घटनाओं में से एक है। रॉयटर्स के मुताबिक, एक गाड़ी में चार लोग जिंदा जल गए। उनकी कार का स्टीयरिंग व्हील दाईं ओर था, जिससे वे ब्रिटिश लग रहे थे। वहीं, अपनी कारें छोड़ भागने की कोशिश कर रहे 7 लोग भी मृत पाए गए। अधिकारियों ने बताया कि वे निर्धारित निकासी मार्ग की बजाय दूसरे रास्ते से निकलने की कोशिश कर रहे थे और वहीं उनकी मौत हो गई। एंडालूसिया की इमरजेंसी सर्विस ने शुरुआती कॉल के आधार पर बताया कि बिजली की गिरी हुई वायर से आग लगी, जो तेजी से जंगल में फैल गई। दूसरी तरफ बिजली कंपनी एंडेसा के प्रवक्ता ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा कि जांच में जिस केबल की बात हो रही है, उसमें बिजली का प्रवाह ही नहीं था। इसलिए आग की असली वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। भीषण आग की 4 तस्वीरें यूरोप में हीटवेव से जंगल की आग का खतरा बढ़ा इस साल यूरोप में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव ने जंगल की आग का खतरा काफी बढ़ा दिया है। फ्रांस की सिविल प्रोटेक्शन एजेंसी के प्रमुख जूलियन मेरियन ने कहा कि 2026 का वाइल्डफायर सीजन असामान्य रूप से तेज शुरुआत के साथ आया है। उनके मुताबिक सर्दियों और वसंत में हुई अच्छी बारिश से उगी घनी वेजिटेशन अब लगातार पड़ रही गर्मी में सूख चुकी है और आग के लिए ईंधन का काम कर रही है। फ्रांस में इस साल अब तक 8,000 से ज्यादा आग की घटनाओं में लगभग 100 वर्ग मील क्षेत्र जल चुका है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। फ्रांस-स्पेन सीमा पर पाइरेनीज क्षेत्र में लगी आग के कारण 10 हजार से ज्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। वहीं स्पेन के मलागा क्षेत्र के बेनहावीस कस्बे में भी जंगल की आग के कारण करीब एक हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। खबर लगातर अपडेट हो रही है…

पाचन उपचार: एसिडिटी और गैस से संबंधित परेशानियाँ? तो रामबाण इलाज हैं रसोई में राखें ये चीजें; इन 5 का प्रयोग करें

पाचन उपाय

10 जुलाई 2026 को 16:40 IST पर अद्यतन किया गया पाचन के उपाय: आजकल की बिजी लाइफ स्टाइल में बाहर का खाना और गलत खान-पान के साथ-साथ देर तक छुपे काम करने की आदतें पेट से जुड़ी बातें आम हो गई हैं। एसिडिटी, गैस और पेट की जलन जैसी एलर्जी से बचने के लिए हमारी रसोई में ही मौजूद हैं कई आसान उपाय। आइए जानते हैं 5 ऐसी आदतों के बारे में जो पाचन तंत्र को ठीक करने में सहायक को बनाए रखने में मदद करती हैं। अनुसरण करना : सौंफ खाना खाने के बाद सौंफ़ खाने से सेहत के लिए बढ़िया है। इसके गुण पेट की सामग्रियों को आराम पहुंचाते हैं और गैस बनने से असुविधा होती है। आप खाने के बाद 1 बड़ा सौंफ़ चौबा सकते हैं। छवि: फ्रीपिक जीरा जीरा एंजाइम्स को सक्रिय करने का काम करता है, जिससे खाना जल्दी पचता है और एसिडिटी का खतरा कम होता है। जीरे को पानी में डूबकर उसका सेवन पेट के लिए पसंद है। छवि: फ्रीपिक अँग्रेज़ पेट की सूजन को कम करने और पाचन क्रिया को तेज करने में मदद मिलती है। पाचन तंत्र धीमा होने से अक्सर जलन और एसिडिटी की समस्या होती है। इसमें अदरक वाली चाय, गर्म पानी में रेस्तरां या भोजन शामिल कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक ऍमएलएम इलायची प्लांटर दूर नहीं होता, बल्कि पाचन को भी नुकसान पहुंचाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण पेट की सूजन को कम करते हैं। खाने के बाद 1- 2 इलायची चबाना या इसे चाय और दूध के ढांचे में नारियल प्रभावशाली होता है। छवि: फ्रीपिक तुलसी तुलसी को औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है। विशेष भोजन से पेट की जलन शांत होती है और सूजन में राहत मिलती है। आप सुबह खाली पेट तुलसी के पत्ते के पत्ते या तुलसी की चाय का सेवन कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 10 जुलाई 2026 16:40 IST पर

‘द इंडिया स्टोरी’ में दिखेगा थाली का जहर:कैंसर की ट्रेन से कोर्टरूम तक असल घटनाओं से प्रेरित है फिल्म

‘द इंडिया स्टोरी’ में दिखेगा थाली का जहर:कैंसर की ट्रेन से कोर्टरूम तक असल घटनाओं से प्रेरित है फिल्म

श्रेयस तलपदे और काजल अग्रवाल स्टारर ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। निर्देशक चेतन डीके और राइटर-प्रोड्यूसर सागर शिंदे की यह फिल्म मिलावटी खान-पान, पेस्टिसाइड्स और कैंसर के बढ़ते खतरे जैसे गंभीर मुद्दों को सस्पेंस, ड्रामा और क्राइम के साथ पेश करेगी। निर्देशक का दावा है कि फिल्म में दर्शकों को ओरिजिनल क्राउड और रियल लोकेशंस दिखाई देंगी, क्योंकि उनका उद्देश्य कहानी को अधिकतम वास्तविकता के साथ परदे पर उतारना था। एक बच्ची की मौत की खबर से कहानी की प्रेरणा आई निर्देशक चेतन डीके बताते हैं कि ‘मैं पहले किसी भारतीय क्रांतिकारी पर फिल्म बनाना चाहता था, लेकिन इसी दौरान सागर शिंदे के करीबी दोस्त की छह-सात साल की बेटी की पेस्टिसाइड्स से जुड़े कैंसर के कारण मौत हो गई। इस घटना ने पूरी टीम को झकझोर दिया।’ रिचर्स के दौरान ही एक ‘कैंसर ट्रेन’ के बारे में भी पता चला फिल्म के लिए की गई रिसर्च में लगभग ढाई से तीन साल लगे। रिसर्च के दौरान ही पता चला कि पंजाब के भटिंडा में एक ट्रेन को लोग ‘कैंसर ट्रेन’ के नाम से जानते हैं, क्योंकि वहां प्रदूषण और रसायनों के असर से लोग कैंसर का शिकार हो गए। हमारी फिल्म ऐसे ही गंभीर मुद्दों के इर्द-गिर्द है। बॉम्बे हाईकोर्ट के सीन्स के लिए नायगांव में विशेष सेट बना फिल्म की शूटिंग कोल्हापुर, पुणे, मुंबई, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, कोलकाता, हैदराबाद और अन्य स्थानों पर की गई। चेतन डीके का कहना है कि ‘मैंने अधिकांश सीन्स को वास्तविक लोकेशंस पर शूट किया और केवल कुछ सीन्स में ही क्रोमा का उपयोग किया। कुल मिलाकर फिल्म की शूटिंग 60 से 65 दिनों में पूरी हुई, जबकि पूरा शूटिंग शेड्यूल लगभग आठ से नौ महीने तक चला। बॉम्बे हाईकोर्ट के सीन्स के लिए नायगांव में विशेष सेट तैयार किया गया, जहां 12 दिनों तक कोर्टरूम सीक्वेंस फिल्माए गए। यह पूरे इंडिया की फिल्म है, इसलिए हमने टाइटल ‘द इंडियन स्टोरी’ रखा है। इसका टैगलाइन ‘स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ है।’ कम्प्यूटर जनरेटेड नहीं, असली क्राउड के साथ हुई पूरी शूटिंग निर्देशक के अनुसार ‘फिल्म में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 80 कैरेक्टर हैं। कुछ क्राउड सीन 2-3 तीन हजार लोगों के साथ शूट किए गए हैं। कुल 8 से 10 हजार असल क्राउड हायर हुआ था। क्राउड को कोर्ट, ट्रेन के सीन से लेकर पंजाब, हिमाचल, हैदराबाद, कोलकाता गुजरात, केरला आदि में दिखाया गया है। क्लाइमैक्स की शूटिंग में 10-12 दिन लगे हैं। इसकी शूटिंग कोल्हापुर में हुई है।’ मध्य प्रदेश से लेकर साउथ तक जाकर की गई रिसर्च निर्देशक चेतन के मुताबिक…‘ मध्य प्रदेश से लेकर केरल के कासरगोड गांव और तमिलनाडु तक कई जगहों के मामलों का अध्ययन किया गया। कुछ इलाकों में वर्षों से केमिकल छिड़काव के कारण बच्चों के जन्म से ही विकलांग होने और कैंसर के मामलों में वृद्धि भी देखने को मिली। जब हमें पता चला कि बाजार में ऐसे उत्पाद भी बिक रहे हैं, जिनमें असली दूध की मात्रा नगण्य है, तब लगा कि यह विषय सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी है।’ सैनिक के रोल में दिखेंगे श्रेयस, काजल बनी हैं वकील फिल्म की कहानी एक ऐसे सैनिक की है, जिसकी बेटी पेस्टिसाइड्स से जुड़े कैंसर के कारण मर जाती है। इसके बाद वह किसान, कंपनियों और सिस्टम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ता है। श्रेयस इसमें सैनिक बने हैं, वहीं काजल अग्रवाल उस वकील का किरदार निभा रही हैं, जो अदालत में उनका साथ देती है। मुरली शर्मा एक ईमानदार अधिकारी और मनीष वाधवा विपक्षी वकील बने हैं।’

चांदी आज ₹1,780 सस्ती हुई, इस महीने ₹3,416 गिरी:सोना सिर्फ ₹159 चढ़ा, जुलाई में ₹2,183 महंगा हुआ; जानें अपने शहर के दाम

चांदी आज ₹1,780 सस्ती हुई, इस महीने ₹3,416 गिरी:सोना सिर्फ ₹159 चढ़ा, जुलाई में ₹2,183 महंगा हुआ; जानें अपने शहर के दाम

चांदी की कीमतों में आज 10 जुलाई को मामूली गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 1,780 रुपए घटकर 2,22,014 रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 1,43,656 रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 159 रुपए बढ़कर 1,43,815 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले 9 जुलाई को यह 1,43,656 लाख पर था। सोना के दाम इस महीने 2,183 रुपए बढ़ें हैं, जबकि चांदी की कीमत 3,416 रुपए गिरी है। 1 जुलाई को सोना ₹1.42 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹2.25 लाख/किलो थी।

चांदी आज ₹1,780 सस्ती हुई, इस महीने ₹3,416 गिरी:सोना सिर्फ ₹159 चढ़ा, जुलाई में ₹2,183 महंगा हुआ; जानें अपने शहर के दाम

चांदी आज ₹1,780 सस्ती हुई, इस महीने ₹3,416 गिरी:सोना सिर्फ ₹159 चढ़ा, जुलाई में ₹2,183 महंगा हुआ; जानें अपने शहर के दाम

चांदी की कीमतों में आज 10 जुलाई को मामूली गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 1,780 रुपए घटकर 2,22,014 रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 1,43,656 रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 159 रुपए बढ़कर 1,43,815 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले 9 जुलाई को यह 1,43,656 लाख पर था। सोना के दाम इस महीने 2,183 रुपए बढ़ें हैं, जबकि चांदी की कीमत 3,416 रुपए गिरी है। 1 जुलाई को सोना ₹1.42 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹2.25 लाख/किलो थी।

शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी:कोर्ट में सरेंडर करूंगी, हत्या हो जाए तो भी मंजूर, देश की मिट्टी पर मरना चाहती हूं

शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी:कोर्ट में सरेंडर करूंगी, हत्या हो जाए तो भी मंजूर, देश की मिट्टी पर मरना चाहती हूं

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में भारत से बांग्लादेश देश लौटेंगी और कोर्ट में सरेंडर करेंगी। रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, मेरी हत्या भी कर सकते हैं, लेकिन मुझे लौटना ही होगा। अगर मौत भी आए, तो मैं अपने देश की मिट्टी पर मरना चाहती हूं, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं। हसीना 2024 में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद उन्हें छात्र आंदोलन पर कार्रवाई से जुड़े मामले में मौत की सजा सुनाई गई। वह इन आरोपों से इनकार करती रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश लौटकर अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे। हालांकि, उन्होंने वापसी की सटीक तारीख नहीं बताई। हसीना बोलीं- पार्टी नेताओं पर दमन हो रहा है हसीना ने कहा कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार कार्रवाई हो रही है। उनके मुताबिक, लगभग सभी बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोग छिपकर रहने को मजबूर हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल समेत अवामी लीग के कुछ अन्य निर्वासित नेता भी उनके साथ लौटने की तैयारी में हैं। कमाल पर भी मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। हसीना बोलीं- वापसी को लेकर सरकार से कोई बात नहीं की हसीना ने कहा कि उन्होंने अपनी वापसी को लेकर बांग्लादेश सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र, मतदान का अधिकार, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय ऐसे विषय नहीं हैं जिन पर गुप्त बातचीत हो।” उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस लाने के लिए भारत को लगातार पत्र भेज रही है। उन्होंने कहा, “मैं खुद ही लौटूंगी।” बांग्लादेश सरकार ने हसीना के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले पर टिप्पणी नहीं की। हालांकि अप्रैल में भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार कर रहा है और नई सरकार के साथ रचनात्मक तरीके से संबंध मजबूत करना चाहता है। ‘अगर हमने गलत किया है तो फैसला जनता करे’ हसीना ने कहा कि उन्हें जेल जाने का डर नहीं है क्योंकि वह पहले भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। 1981 में निर्वासन से लौटने के बाद सैन्य शासन के खिलाफ आंदोलनों के दौरान उन्हें कई बार हिरासत में लिया गया था। 2007 में भी उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों में जेल भेजा गया था। बाद में रिहा होने के बाद उन्होंने 2008 का चुनाव जीता था। उन्होंने कहा, “कोई भी सरकार लंबे समय तक सत्ता में रहती है तो उससे गलतियां हो सकती हैं। लेकिन किसी सरकार के सही या गलत होने का फैसला जनता को करना चाहिए।” रॉयटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में 2024 के छात्र आंदोलन पर कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की मौत होने की बात कही गई है। इसी कार्रवाई से जुड़े मामले में शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई गई थी। हसीना ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि अदालत की कार्रवाई शुरू होने पर लोग खुद देखेंगे कि मामला कितना निष्पक्ष है।

ओपनएआई कर्मियों ने बेचे शेयर, पैसा रियल एस्टेट में:सैन फ्रांसिस्को में घरों के औसत दाम 17 करोड़ तक; गैर-टेक परिवार शहर छोड़ रहे

ओपनएआई कर्मियों ने बेचे शेयर, पैसा रियल एस्टेट में:सैन फ्रांसिस्को में घरों के औसत दाम 17 करोड़ तक; गैर-टेक परिवार शहर छोड़ रहे

सैन फ्रांसिस्को के डुबोसे ट्राएंगल इलाके में एक आलीशान फ्लैट की कीमत करीब 30 करोड़ डॉलर (2,864 करोड़) रखी गई थी। दिलचस्प बात यह थी कि विक्रेता कैश की जगह ओपनएआई या एंथ्रोपिक के शेयर लेने के लिए भी तैयार था। यह अकेला किस्सा नहीं, बल्कि एआई से आ रहे पैसे का असर है, जो पूरे शहर की तस्वीर बदल रहा है। रियल एस्टेट फर्म रेडफिन के मुताबिक मई में शहर में घरों की औसत कीमत रिकॉर्ड 17.6 लाख डॉलर (16.8 करोड़) तक पहुंच गई, जबकि पूरे अमेरिका में यह औसत महज करीब 4 लाख डॉलर (3.8 करोड़) है। मार्च में शहर के घरों की कीमत 19% बढ़ी, अप्रैल-मई में भी 14% से ज्यादा की तेजी बनी रही। रेडफिन की चीफ इकोनॉमिस्ट डैरिल फेयरवेदर के मुताबिक, यह उछाल सीधे-सीधे एआई कंपनियों के कर्मचारियों की दौलत से जुड़ा है। पिछले साल अक्टूबर में ओपनएआई के 600 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों ने कुल 63,000 करोड़ के शेयर बेचे थे यानी औसतन 105 करोड़ प्रति व्यक्ति। एंथ्रोपिक में भी कर्मचारियों को करीब 57,000 करोड़ के शेयर बेचने की इजाजत मिली थी। एजेंट्स का कहना है कि बोली की जंग अब आम बात हो गई है, जिसमें अक्सर मकान पूछी गई कीमत से लाखों डॉलर ज्यादा में बिकते हैं। नकद भुगतान वाली डील्स भी तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर महंगे इलाकों में। हालांकि हर कोई इस तेजी में साथ नहीं है। बर्कले यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री एनरिको मोरेटी के मुताबिक, अभी एआई बूम का शुरुआती दौर है। मेटा जैसी कंपनियों में हो रही छंटनी इस तेजी पर लगाम भी लगा सकती है। उनका यह भी कहना है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के आने वाले शेयर मार्केट लिस्टिंग से होने वाली ज्यादातर कमाई कर्मचारियों को नहीं, बल्कि दुनियाभर में फैले निवेशकों को मिलेगी। इस बीच शहर के दो परिवारों की कहानी इस बदलाव का दूसरा पहलू दिखाती है। एक परिवार, जिसमें एक सदस्य ओपनएआई में काम करता है, शेयर बेचकर अपने ही इलाके में घर खरीद पाया। वहीं दूसरा गैर-टेक परिवार शहर छोड़कर बाहरी इलाके में जाने को मजबूर हो गया। बहरहाल, डुबोसे ट्राएंगल वाला फ्लैट आखिरकार 32 लाख डॉलर ( 30.5 करोड़) में बिका, जो पूछी गई कीमत से 1.9 करोड़ ज्यादा था। क्या इस डील में एआई शेयर भी शामिल थे, यह जानकारी गोपनीय रखी गई है। एआई का पैसा सबको शहर से बाहर धकेल रहा जिस परिवार को शहर छोड़ना पड़ा, उसके मुखिया सैन फ्रांसिस्को में ही एक बड़े सरकारी पद पर हैं, फिर भी वे शहर में मकान नहीं खरीद सके। अब वे उपनगर में किराए पर लिए घर में रहते हैं, जहां से उन्हें रोज लंबा सफर तय करना पड़ता है। परिवार की मां कहती हैं, ‘अगर शहर में रहने की गुंजाइश होती तो हम कभी न जाते। यह देखकर बुरा लगता है कि एआई का पैसा बाकी सबको बाहर धकेल रहा है।’

सनी देओल ने ली ट्रोलर्स की चुटकी:बोले- किसी ने जूते की फोटो नहीं लेनी; धर्मेंद्र जैसी शर्ट में दिखे

सनी देओल ने ली ट्रोलर्स की चुटकी:बोले- किसी ने जूते की फोटो नहीं लेनी; धर्मेंद्र जैसी शर्ट में दिखे

बॉलीवुड एक्टर सनी देओल गुरुवार को अपनी फिल्म ‘इक्का’ की स्क्रीनिंग के इवेंट में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने हालिया ‘जूता विवाद’ पर मजाकिया अंदाज में रिएक्शन दिया। दरअसल, कुछ दिन पहले ‘इक्का’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में सनी देओल के पहने हुए सफेद रंग के घिसे जूते चर्चा का विषय बन गए थे। वायरल वीडियो में उनके जूते का पिछला हिस्सा दिखाई देने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया गया और इस पर कई मीम्स भी बने। अब फिल्म के एक इवेंट में सनी देओल ने खुद इस मामले पर चुटकी ली। पैपराजी के सामने पोज देते हुए उन्होंने मुस्कुराकर कहा, ‘अरे, जूता नहीं लेना किसी ने?’ उनके इतना कहते ही वहां मौजूद पैपराजी हंस पड़े। इस पर एक पैपराजी ने जवाब दिया, ‘जूता तो सर फुल फ्रेम में आ ही रहा है।’ इसके बाद सनी देओल हंसते हुए आगे बढ़ गए। क्लीन-शेव लुक की भी हुई चर्चा ‘इक्का’ की स्क्रीनिंग के दौरान सनी देओल क्लीन-शेव लुक में नजर आए। उन्होंने ब्लू चेक वाली कैजुअल शर्ट और कैप पहनी थी। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनके इस लुक की तुलना धर्मेंद्र के पुराने अंदाज से की। ‘इक्का’ 10 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। फिल्म में सनी देओल के साथ दीया मिर्जा, अक्षय खन्ना, संजीदा शेख, आकांक्षा रंजन कपूर और शिशिर शर्मा भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का डायरेक्शन सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने किया है। इस फिल्म के जरिए सनी देओल ने ओटीटी पर डेब्यू किया है। सनी देओल जल्द ही बड़े पर्दे पर राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में नजर आएंगे। फिल्म की कहानी 1947 के बंटवारे के दौरान इंसानियत, रिश्तों और बदलते हालात को दिखाती है। फिल्म में सनी के अलावा प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, अली फजल, अभिमन्यु सिंह, खुशी हजारे और कनिका कपूर भी नजर आएंगी। फिल्म का प्रोडक्शन आमिर खान प्रोडक्शंस ने किया है।

फटे जूतों के वायरल वीडियो पर सनी देओल की फिरकी:इवेंट में बोले- किसी ने जूते की फोटो नहीं लेनी, धर्मेंद्र जैसी शर्ट पहनकर पहुंचे

फटे जूतों के वायरल वीडियो पर सनी देओल की फिरकी:इवेंट में बोले- किसी ने जूते की फोटो नहीं लेनी, धर्मेंद्र जैसी शर्ट पहनकर पहुंचे

बॉलीवुड एक्टर सनी देओल गुरुवार को अपनी फिल्म ‘इक्का’ की स्क्रीनिंग के इवेंट में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने हालिया ‘जूता विवाद’ पर मजाकिया अंदाज में रिएक्शन दिया। दरअसल, कुछ दिन पहले ‘इक्का’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में सनी देओल के पहने हुए सफेद रंग के घिसे जूते चर्चा का विषय बन गए थे। वायरल वीडियो में उनके जूते का पिछला हिस्सा दिखाई देने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया गया और इस पर कई मीम्स भी बने। अब फिल्म के एक इवेंट में सनी देओल ने खुद इस मामले पर चुटकी ली। पैपराजी के सामने पोज देते हुए उन्होंने मुस्कुराकर कहा, ‘अरे, जूता नहीं लेना किसी ने?’ उनके इतना कहते ही वहां मौजूद पैपराजी हंस पड़े। इस पर एक पैपराजी ने जवाब दिया, ‘जूता तो सर फुल फ्रेम में आ ही रहा है।’ इसके बाद सनी देओल हंसते हुए आगे बढ़ गए। क्लीन-शेव लुक की भी हुई चर्चा ‘इक्का’ की स्क्रीनिंग के दौरान सनी देओल क्लीन-शेव लुक में नजर आए। उन्होंने ब्लू चेक वाली कैजुअल शर्ट और कैप पहनी थी। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनके इस लुक की तुलना धर्मेंद्र के पुराने अंदाज से की। ‘इक्का’ 10 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। फिल्म में सनी देओल के साथ दीया मिर्जा, अक्षय खन्ना, संजीदा शेख, आकांक्षा रंजन कपूर और शिशिर शर्मा भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का डायरेक्शन सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने किया है। इस फिल्म के जरिए सनी देओल ने ओटीटी पर डेब्यू किया है। सनी देओल जल्द ही बड़े पर्दे पर राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में नजर आएंगे। फिल्म की कहानी 1947 के बंटवारे के दौरान इंसानियत, रिश्तों और बदलते हालात को दिखाती है। फिल्म में सनी के अलावा प्रीति जिंटा, शबाना आजमी, अली फजल, अभिमन्यु सिंह, खुशी हजारे और कनिका कपूर भी नजर आएंगी। फिल्म का प्रोडक्शन आमिर खान प्रोडक्शंस ने किया है।