Tuesday, 22 Sep 2026 | 09:07 AM

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उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी ने छात्रों से बात की:स्टूडेंट्स ने हिंदी में सुनाया कविताएं; मोदी बोले- ये मेरे दिल की भावनाएं जैसी

उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी ने छात्रों से बात की:स्टूडेंट्स ने हिंदी में सुनाया कविताएं; मोदी बोले- ये मेरे दिल की भावनाएं जैसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे के दौरान ताशकंद स्थित महात्मा गांधी सेंटर का दौरा किया। यहां उज्बेक छात्रों ने हिंदी में उनकी लिखी कविताओं की कुछ पंक्तियां सुनाईं। अपनी कविताएं छात्रों की आवाज में सुनकर मोदी भावुक हो गए और कहा कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं होने के बावजूद छात्रों ने कविताओं की भावनाओं को बिल्कुल उसी तरह व्यक्त किया, जैसी भावनाएं उनके दिल में थीं। इस दौरान मोदी ने उज्बेकिस्तान में भारत, महात्मा गांधी और तमिल संस्कृति को लेकर बढ़ती रुचि का जिक्र किया और तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने का सुझाव दिया। वहीं, उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्ते कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचे और 11 समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। उज्बेकिस्तान में भारतीय संस्कृति का बढ़ा प्रभाव कार्यक्रम में एक उज्बेक इंडोलॉजिस्ट ने कहा कि शायद दुनिया में बहुत कम ऐसे देश होंगे जहां लोगों में भारत को लेकर इतना प्यार है। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान में लगभग हर नागरिक ‘नमस्ते’ शब्द से परिचित है। यह भी बताया कि उज्बेकिस्तान में भारतीय कला, नृत्य, संगीत, दर्शन और योग को लेकर भी लोगों की रुचि बढ़ रही है। तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में हो अनुवाद PM मोदी ने तमिल साहित्य और ‘तिरुक्कुरल’ का भी जिक्र किया। उन्होंने संस्थान की 80वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने की दिशा में काम किया जा सकता है। कार्यक्रम में मौजूद वक्ता ने जवाब दिया कि इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। मोदी ने कहा कि तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद होने से भारतीय दर्शन और विचारों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दुनिया की प्राचीन भाषाओं में मौजूद दार्शनिक विचार यह बताते हैं कि सभ्यता की शुरुआत से ही मानव सोच कितनी गहरी रही है। खबर अपडे़ट हो रही है…

फरीदाबाद के कॉलेज में सिंगर सुनंदा शर्मा ने मचाया धमाल:झूम उठे स्टूडेंट्स, तालियों-सीटियों से गूंजा परिसर; पंजाबी सुरों से सजी शाम

फरीदाबाद के कॉलेज में सिंगर सुनंदा शर्मा ने मचाया धमाल:झूम उठे स्टूडेंट्स, तालियों-सीटियों से गूंजा परिसर; पंजाबी सुरों से सजी शाम

फरीदाबाद शहर के एक निजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में पंजाबी और बॉलीवुड की मशहूर गायिका सुनंदा शर्मा ने अपनी प्रस्तुति से छात्र-छात्राओं में जोश भर दिया। सुनंदा शर्मा के मंच पर पहुंचते ही कॉलेज परिसर तालियों और सीटियों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में विद्यार्थी और अन्य लोग उन्हें देखने और सुनने के लिए कार्यक्रम में पहुंचे। गायिका ने अपने लोकप्रिय पंजाबी गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। कई गीतों पर विद्यार्थी उनके साथ गाते और झूमते नजर आए। कार्यक्रम के दौरान सुनंदा शर्मा ने एक के बाद एक अपने लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति पर युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद विद्यार्थियों ने मोबाइल फोन से उनके वीडियो बनाए और प्रस्तुति के यादगार पलों को कैमरे में कैद किया। सुनंदा शर्मा ने भी मंच से विद्यार्थियों के उत्साह का जवाब देते हुए उनसे बातचीत की और संगीत के साथ कार्यक्रम का माहौल खुशनुमा बना दिया। सोशल मीडिया से शुरू हुआ संगीत का सफर सुनंदा शर्मा का संगीत सफर सोशल मीडिया से शुरू हुआ। उन्होंने पंजाबी गीत ‘सुच्चा सूरमा’ गाकर सोशल मीडिया पर साझा किया था। यह गीत लोगों को काफी पसंद आया और इसके बाद उन्हें पंजाबी संगीत इंडस्ट्री में काम करने के मौके मिलने लगे। इसके बाद ‘बिल्ली अख’ और ‘पटाके’ जैसे गीतों ने उन्हें खास पहचान दिलाई। पंजाबी संगीत से बॉलीवुड तक बनाई पहचान सुनंदा शर्मा ने पंजाबी संगीत के साथ बॉलीवुड में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने बादशाह के साथ फिल्म ‘नवाबजादे’ के लिए ‘तेरे नाल नचना’ गीत गाया। इसके बाद ‘लुका छुपी’ फिल्म का ‘पोस्टर लगवा दो’ और ‘जय मम्मी दी’ का ‘मम्मी नू पसंद’ जैसे गीत भी उनके खाते में आए। ‘बारिश की जाए’ गीत में भी उनकी आवाज सुनने को मिली। अभिनय में भी आजमाया हाथ सुनंदा शर्मा ने गायकी के साथ अभिनय में भी कदम रखा। उन्होंने दिलजीत दोसांझ के साथ पंजाबी फिल्म ‘सज्जन सिंह रंगरूट’ से अभिनय की शुरुआत की। वर्ष 2024 में उन्होंने कान फिल्म महोत्सव में भी भारत और पंजाबी संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।

यूरोपीय देश साइप्रस के पास फेरी पलटी:270 से ज्यादा लोग सवार थे; रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ

यूरोपीय देश साइप्रस के पास फेरी पलटी:270 से ज्यादा लोग सवार थे; रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ

उत्तरी साइप्रस के तट के पास रविवार को 270 से ज्यादा यात्रियों को ले जा रही फेरी पलट गई। तुर्किये के सरकारी TRT न्यूज चैनल के मुताबिक, फेरी में तट से कुछ किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद पानी भरने लगा। अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। उत्तरी साइप्रस के परिवहन मंत्री एरहान एरिकली ने TRT को बताया कि राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच चुके हैं। कैटामरैन शैली की यह फेरी मर्सिन प्रांत के तुर्किये पोर्ट तासुकु जा रही थी। यह उत्तरी साइप्रस के काइरेनिया पोर्ट से रवाना हुई थी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

‘दिमागी नक्सल’ पर BJP की मीम वॉर:मुन्ना भैया, रॉकी भाई से लेकर KGF तक के सीन इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर विरोध

‘दिमागी नक्सल’ पर BJP की मीम वॉर:मुन्ना भैया, रॉकी भाई से लेकर KGF तक के सीन इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को बीजेपी ने सोशल मीडिया कैंपेन का हिस्सा बना दिया है। पार्टी की अलग-अलग राज्य इकाइयां फिल्मों और वेब सीरीज के चर्चित सीन से ‘दिमागी नक्सल’ पर मीम बना रही हैं। इनमें मिर्जापुर के मुन्ना भैया और कलीन भैया से लेकर KGF और सिंघम के सीन शामिल हैं। हालांकि, कैंपेन का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। बीजेपी की सोशल मीडिया टीम ने शुरू की मीम वॉर 26 अगस्त को बीजेपी छत्तीसगढ़ ने ‘अवेंजर्स असेंबल’ पोस्ट कर दूसरे राज्यों की पार्टी इकाइयों को भी अभियान से जुड़ने का संदेश दिया था। इसके बाद बीजेपी के कई राज्य स्तरीय सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एक के बाद एक मीम पोस्ट किए। इन पोस्ट में फिल्मों और वेब सीरीज के लोकप्रिय किरदारों और सीन को राजनीतिक संदेश से जोड़ा गया। BJP इन मीम्स के जरिए युवाओं, खासकर Gen Z तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है। मुन्ना भैया के सीन से लेकर ‘सिंघम’ तक सबसे ज्यादा चर्चा मिर्जापुर के मुन्ना भैया वाले मीम की हुई। इसमें मुन्ना भैया एक छात्र को थप्पड़ मारते नजर आते हैं और बीजेपी ने छात्र को ‘दिमागी नक्सल’ के तौर पर दिखाया। बीजेपी छत्तीसगढ़ ने संदेश दिया कि ‘दिमागी नक्सल’ बनने के बजाय देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। इसके बाद बीजेपी ने सिंघम के एक सीन का इस्तेमाल किया। इसमें अभिनेता अजय देवगन के किरदार को एक गुंडे की पिटाई करते दिखाया गया और इसे ‘छत्तीसगढ़ स्टाइल’ में दिमागी नक्सल के इलाज से जोड़ा गया। दिल्ली बीजेपी ने मिर्जापुर के कलीन भैया वाले सीन से कैंपेन को आगे बढ़ाया। वहीं, गोवा BJP ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा के एक सीन को राजनीतिक मीम में बदल दिया। KGF के मीम पर सबसे ज्यादा विवाद बीजेपी कर्नाटक के शेयर किए KGF के एक सीन पर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सवाल उठे। इसमें रॉकी और उसके साथी पहाड़ी से विरोधियों पर गोलियां चलाते नजर आते हैं। बीजेपी ने इस सीन को एडिट कर अलग-अलग राज्य इकाइयों को हमलावरों और ‘दिमागी नक्सल’ को उनके विरोधियों के तौर पर पेश किया। पोस्ट में लिखा गया कि ‘दिमागी नक्सल’ के खिलाफ पूरी ताकत से अभियान जारी रहेगा। इस पोस्ट के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बीजेपी पर हिंसक राजनीतिक भाषा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि Gen Z या युवाओं को ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा रहा है तो फिल्मों के हिंसक सीन के जरिए जवाब देना क्या सही है। विपक्ष और सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उठाए सवाल कैंपेन को लेकर विपक्ष और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बीजेपी की आलोचना की। एक यूजर ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का जवाब विचारों से दिया जाना चाहिए, गोलियों या हिंसा के संकेतों से नहीं। पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने भी अभियान पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने देश में हिंसक राजनीतिक बयानबाजी को सामान्य बनाने में भूमिका निभाई है। हर राज्य इकाई दूसरी की पोस्ट को आगे बढ़ा रही पिछले कुछ दिनों में बीजेपी के सोशल मीडिया कैंपेन में एक पैटर्न देखने को मिला है। एक राज्य इकाई ‘दिमागी नक्सल’ पर मीम पोस्ट करती है, दूसरी उसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देती है और तीसरी नया मीम जोड़ देती है। BJP IT सेल से जुड़े एक सदस्य के मुताबिक, इसका मकसद अलग-अलग राज्यों के सोशल मीडिया नेटवर्क को एक साथ सक्रिय करना है। इससे एक राज्य की पोस्ट दूसरे राज्यों के यूजर्स तक भी पहुंच सकती है और पार्टी का राजनीतिक नैरेटिव ज्यादा लोगों तक ले जाया जा सकता है। Instagram पर भी अभियान बढ़ाने की तैयारी BJP का यह कैंपेन X तक सीमित नहीं रहने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी की सोशल मीडिया टीम का अगला फोकस Instagram है, जहां Gen Z की बड़ी मौजूदगी है। पार्टी की रणनीति लोकप्रिय फिल्मों और पॉप कल्चर के वायरल सीन को राजनीतिक संदेश से जोड़कर ज्यादा युवाओं तक पहुंच बनाने की है। बीजेपी के एक नेता ने इस अभियान को अभी सिर्फ ‘ट्रेलर’ बताया है।

‘दिमागी नक्सल’ पर BJP की मीम वॉर:मुन्ना भैया, रॉकी भाई से लेकर KGF तक के सीन इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर विरोध

‘दिमागी नक्सल’ पर BJP की मीम वॉर:मुन्ना भैया, रॉकी भाई से लेकर KGF तक के सीन इस्तेमाल, सोशल मीडिया पर विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को बीजेपी ने सोशल मीडिया कैंपेन का हिस्सा बना दिया है। पार्टी की अलग-अलग राज्य इकाइयां फिल्मों और वेब सीरीज के चर्चित सीन से ‘दिमागी नक्सल’ पर मीम बना रही हैं। इनमें मिर्जापुर के मुन्ना भैया और कलीन भैया से लेकर KGF और सिंघम के सीन शामिल हैं। हालांकि, कैंपेन का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। बीजेपी की सोशल मीडिया टीम ने शुरू की मीम वॉर 26 अगस्त को बीजेपी छत्तीसगढ़ ने ‘अवेंजर्स असेंबल’ पोस्ट कर दूसरे राज्यों की पार्टी इकाइयों को भी अभियान से जुड़ने का संदेश दिया था। इसके बाद बीजेपी के कई राज्य स्तरीय सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एक के बाद एक मीम पोस्ट किए। इन पोस्ट में फिल्मों और वेब सीरीज के लोकप्रिय किरदारों और सीन को राजनीतिक संदेश से जोड़ा गया। BJP इन मीम्स के जरिए युवाओं, खासकर Gen Z तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है। मुन्ना भैया के सीन से लेकर ‘सिंघम’ तक सबसे ज्यादा चर्चा मिर्जापुर के मुन्ना भैया वाले मीम की हुई। इसमें मुन्ना भैया एक छात्र को थप्पड़ मारते नजर आते हैं और बीजेपी ने छात्र को ‘दिमागी नक्सल’ के तौर पर दिखाया। बीजेपी छत्तीसगढ़ ने संदेश दिया कि ‘दिमागी नक्सल’ बनने के बजाय देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। इसके बाद बीजेपी ने सिंघम के एक सीन का इस्तेमाल किया। इसमें अभिनेता अजय देवगन के किरदार को एक गुंडे की पिटाई करते दिखाया गया और इसे ‘छत्तीसगढ़ स्टाइल’ में दिमागी नक्सल के इलाज से जोड़ा गया। दिल्ली बीजेपी ने मिर्जापुर के कलीन भैया वाले सीन से कैंपेन को आगे बढ़ाया। वहीं, गोवा BJP ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा के एक सीन को राजनीतिक मीम में बदल दिया। KGF के मीम पर सबसे ज्यादा विवाद बीजेपी कर्नाटक के शेयर किए KGF के एक सीन पर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सवाल उठे। इसमें रॉकी और उसके साथी पहाड़ी से विरोधियों पर गोलियां चलाते नजर आते हैं। बीजेपी ने इस सीन को एडिट कर अलग-अलग राज्य इकाइयों को हमलावरों और ‘दिमागी नक्सल’ को उनके विरोधियों के तौर पर पेश किया। पोस्ट में लिखा गया कि ‘दिमागी नक्सल’ के खिलाफ पूरी ताकत से अभियान जारी रहेगा। इस पोस्ट के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बीजेपी पर हिंसक राजनीतिक भाषा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि Gen Z या युवाओं को ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा रहा है तो फिल्मों के हिंसक सीन के जरिए जवाब देना क्या सही है। विपक्ष और सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उठाए सवाल कैंपेन को लेकर विपक्ष और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने बीजेपी की आलोचना की। एक यूजर ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का जवाब विचारों से दिया जाना चाहिए, गोलियों या हिंसा के संकेतों से नहीं। पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने भी अभियान पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने देश में हिंसक राजनीतिक बयानबाजी को सामान्य बनाने में भूमिका निभाई है। हर राज्य इकाई दूसरी की पोस्ट को आगे बढ़ा रही पिछले कुछ दिनों में बीजेपी के सोशल मीडिया कैंपेन में एक पैटर्न देखने को मिला है। एक राज्य इकाई ‘दिमागी नक्सल’ पर मीम पोस्ट करती है, दूसरी उसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देती है और तीसरी नया मीम जोड़ देती है। BJP IT सेल से जुड़े एक सदस्य के मुताबिक, इसका मकसद अलग-अलग राज्यों के सोशल मीडिया नेटवर्क को एक साथ सक्रिय करना है। इससे एक राज्य की पोस्ट दूसरे राज्यों के यूजर्स तक भी पहुंच सकती है और पार्टी का राजनीतिक नैरेटिव ज्यादा लोगों तक ले जाया जा सकता है। Instagram पर भी अभियान बढ़ाने की तैयारी BJP का यह कैंपेन X तक सीमित नहीं रहने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी की सोशल मीडिया टीम का अगला फोकस Instagram है, जहां Gen Z की बड़ी मौजूदगी है। पार्टी की रणनीति लोकप्रिय फिल्मों और पॉप कल्चर के वायरल सीन को राजनीतिक संदेश से जोड़कर ज्यादा युवाओं तक पहुंच बनाने की है। बीजेपी के एक नेता ने इस अभियान को अभी सिर्फ ‘ट्रेलर’ बताया है।

पंजाब के 3 लोग नेपाल की बाढ़ में लापता:इनमें जीजा-साले भी शामिल; परिवार से आखिरी बार वीडियो कॉल पर बात हुई थी

पंजाब के 3 लोग नेपाल की बाढ़ में लापता:इनमें जीजा-साले भी शामिल; परिवार से आखिरी बार वीडियो कॉल पर बात हुई थी

नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ में तरनतारन जिले के तीन लोग लापता हो गए हैं। इनमें गांव रत्तोके के रहने वाले शमशेर सिंह संधू और उनके दो रिश्तेदार शामिल हैं। शमशेर सिंह संधू नेपाल में एंड्रिट्ज कंपनी के त्रिशूल अपर पावर हाउस प्रोजेक्ट में क्रेन ऑपरेटर के तौर पर काम करते हैं। उनके साथ ही उनका साला भुपिंदर सिंह और एक अन्य साले का बेटा रशपाल सिंह नेपाल में रह रहे थे। परिवार के अनुसार, नेपाल में आई बाढ़ के दौरान तीनों का संपर्क अचानक से टूट गया। परिवार के सदस्य गुरजंट सिंह के मुताबिक, शमशेर सिंह से 25 अगस्त को वॉट्सऐप कॉल के जरिए आखिरी बार बातचीत हुई थी। इसके बाद उनसे किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाया। लगातार फोन और संपर्क की कोशिश के बावजूद कोई जानकारी नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। पंचायत ने डीसी से लगाई मदद की गुहार मामले को लेकर गांव की पंचायत भी सक्रिय हो गई है। गांव की सरपंच शोभा कुमारी ने पंचायत की ओर से तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर मदद की मांग की है। पंचायत ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया जाए। पंचायत की मांग है कि नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों के जरिए लापता लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए और अगर वे किसी सुरक्षित स्थान पर हैं, तो उनके परिवार तक जल्द से जल्द जानकारी पहुंचाई जाए। मैप में देखिए कहां टूटा ग्लेशियर नेपाल में आई बाढ़ के बारे में जानिए… नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से अब तक 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं। इनमें 320 भारतीय भी शामिल हैं। वहीं, करीब 400 भारतीय अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं। अब घटना के तीन दिन बाद ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। टूर गाइड के एक ग्रुप ने तिब्बत में एक ऊंची जगह से इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया। वीडियो में नेपाल की सीमा के पास बर्फ से ढके पहाड़ और ग्लेशियर दिखाई दे रहे हैं। अचानक ग्लेशियर की बर्फ और चट्टानों का करीब 800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में गिरता नजर आता है। हिमस्खलन के बाद धूल और मलबा पूरे इलाके में फैल जाता है। वीडियो में नीचे की ओर बहता पानी और मलबा भी दिखाई दे रहा है। ग्रुप जब नीचे उतरा तो रास्ते बंद मिले। इसके बाद उन्हें पता चला कि ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद इलाके में आई बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। तीन पॉइंट में जानिए नेपाल के हालात ************ ये खबर भी पढ़ें: पगड़ी पहने पंजाबी युवकों को होटल में नहीं मिली एंट्री: ऑस्ट्रिया में करवाया था बुक, बोले- पैसे भी रिफंड नहीं किए; प्रबंधन ने बताया ड्रेस कोड पंजाब के सिख युवकों को ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग शहर में स्थित कूल मामा होटल ने एंट्री नहीं दी। मोहाली में ट्रेडिंग फर्म चलाने वाले सिख युवक जसप्रीत ने दावा किया कि होटल मैनेजमेंट ने कहा कि पगड़ी वाले यहां नहीं रह सकते। उन्होंने 27 अगस्त को होटल की ऑनलाइन बुकिंग कराई थी।(पढ़ें पूरी खबर)

कंगना रनोट-बाबा रामदेव की सुलह की इनसाइड स्टोरी:तोहफे-मिठाई लेकर घर पहुंचे प्रवक्ता, कॉल पर हुई बातचीत; बयानबाजी से बचने पर सहमति जताई

कंगना रनोट-बाबा रामदेव की सुलह की इनसाइड स्टोरी:तोहफे-मिठाई लेकर घर पहुंचे प्रवक्ता, कॉल पर हुई बातचीत; बयानबाजी से बचने पर सहमति जताई

योगगुरु बाबा रामदेव और बीजेपी सांसद-एक्ट्रेस कंगना रनौत के बीच पिछले दिनों से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। रक्षाबंधन के मौके पर दोनों के बीच पैचअप की पूरी कवायद दिल्ली के 14 जनपथ स्थित कंगना रनौत के आवास पर हुई। बाबा रामदेव की ओर से उनके प्रवक्ता एस.के. तिजारावाला गिफ्ट लेकर कंगना के घर पहुंचे। दोनों ने बात कर सहमति जताई है कि वह सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी नहीं करेंगे। कंगना ने सुलह के बाद अब बाबा रामदेव को राखी भी भिजवाई है। कंगना से मुलाकात के बाद बाबा रामदेव और कंगना की फोन पर भी बात कराई गई। कंगना के करीबी और उनके राजनीतिक सलाहकार मयंक मधुर के मुताबिक, इस बातचीत के साथ दोनों के बीच चल रही नाराजगी और सार्वजनिक बयानबाजी को खत्म करने पर सहमति बन गई है। मयंक के अनुसार, मुलाकात के बाद सुलह की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और बाबा रामदेव तथा कंगना रनौत की फोन पर बातचीत कराई गई। दोनों के बीच पिछले कुछ दिनों में जो भी मतभेद पैदा हुए थे, उन पर बात हुई। इस पूरे घटनाक्रम में कंगना के सलाहकार मयंक मधुर की पहल भी अहम रही। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जमीन तैयार करने और विवाद को खत्म करने की दिशा में पहल करने के बाद रक्षाबंधन के मौके पर यह मुलाकात संभव हो सकी। 14 जनपथ पर हुई यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि बाबा रामदेव और कंगना रनौत के बीच विवाद पिछले दिनों सार्वजनिक तौर पर काफी चर्चा में रहा था। दोनों की टिप्पणियों और उसके बाद हुई बयानबाजी ने मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सोशल मीडिया पर भी दोनों के समर्थकों के बीच इसे लेकर बहस होती रही। ऐसे में अब रक्षाबंधन के मौके पर विवाद खत्म करने की पहल को एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। कंगना ने कहा- भूल चूक माफ, ईश्वर लंबी आयु दे बाबा रामदेव की ओर से उपहार और मिठाई मिलने के बाद कंगना रनोट ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, ‘त्योहार का दिन होता है सब भूल-चूक माफ करने के लिए। मेरे भाई बाबा रामदेव जी ने बहुत अच्छी बात कही कि विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए। आज रक्षाबंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम, दोनों स्वीकार करती हूं। बहुत धन्यवाद। ईश्वर आपको लंबी आयु दे।’ कंगना रनोट ने बाबा रामदेव को भेजी राखी सुलह होने के बाद कंगना रनोट ने बाबा रामदेव को राखी भेजी। उन्होंने अपनी कार्यकर्ता से वह राखी बंधवाई है। क्या था कंगना रनोट और रामदेव बाबा का पूरा विवाद? कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” विवाद लगभग खत्म हो चुका था, लेकिन कंगना ने डीडी न्यूज के इंटरव्यू में फिर बाबा रामदेव पर बयान दिया। उन्होंने कहा है, ‘बाबा रामदेव मुझसे पहले ही नाराज चल रहे हैं। अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।’

कंगना रनोट-बाबा रामदेव की सुलह की इनसाइड स्टोरी:तोहफे-मिठाई लेकर घर पहुंचे प्रवक्ता, कॉल पर हुई बातचीत; बयानबाजी से बचने पर सहमति जताई

कंगना रनोट-बाबा रामदेव की सुलह की इनसाइड स्टोरी:तोहफे-मिठाई लेकर घर पहुंचे प्रवक्ता, कॉल पर हुई बातचीत; बयानबाजी से बचने पर सहमति जताई

योगगुरु बाबा रामदेव और बीजेपी सांसद-एक्ट्रेस कंगना रनौत के बीच पिछले दिनों से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। रक्षाबंधन के मौके पर दोनों के बीच पैचअप की पूरी कवायद दिल्ली के 14 जनपथ स्थित कंगना रनौत के आवास पर हुई। बाबा रामदेव की ओर से उनके प्रवक्ता एस.के. तिजारावाला गिफ्ट लेकर कंगना के घर पहुंचे। दोनों ने बात कर सहमति जताई है कि वह सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी नहीं करेंगे। कंगना ने सुलह के बाद अब बाबा रामदेव को राखी भी भिजवाई है। कंगना से मुलाकात के बाद बाबा रामदेव और कंगना की फोन पर भी बात कराई गई। कंगना के करीबी और उनके राजनीतिक सलाहकार मयंक मधुर के मुताबिक, इस बातचीत के साथ दोनों के बीच चल रही नाराजगी और सार्वजनिक बयानबाजी को खत्म करने पर सहमति बन गई है। मयंक के अनुसार, मुलाकात के बाद सुलह की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और बाबा रामदेव तथा कंगना रनौत की फोन पर बातचीत कराई गई। दोनों के बीच पिछले कुछ दिनों में जो भी मतभेद पैदा हुए थे, उन पर बात हुई। इस पूरे घटनाक्रम में कंगना के सलाहकार मयंक मधुर की पहल भी अहम रही। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जमीन तैयार करने और विवाद को खत्म करने की दिशा में पहल करने के बाद रक्षाबंधन के मौके पर यह मुलाकात संभव हो सकी। 14 जनपथ पर हुई यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि बाबा रामदेव और कंगना रनौत के बीच विवाद पिछले दिनों सार्वजनिक तौर पर काफी चर्चा में रहा था। दोनों की टिप्पणियों और उसके बाद हुई बयानबाजी ने मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सोशल मीडिया पर भी दोनों के समर्थकों के बीच इसे लेकर बहस होती रही। ऐसे में अब रक्षाबंधन के मौके पर विवाद खत्म करने की पहल को एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। कंगना ने कहा- भूल चूक माफ, ईश्वर लंबी आयु दे बाबा रामदेव की ओर से उपहार और मिठाई मिलने के बाद कंगना रनोट ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, ‘त्योहार का दिन होता है सब भूल-चूक माफ करने के लिए। मेरे भाई बाबा रामदेव जी ने बहुत अच्छी बात कही कि विवाद नहीं, संवाद होना चाहिए। आज रक्षाबंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम, दोनों स्वीकार करती हूं। बहुत धन्यवाद। ईश्वर आपको लंबी आयु दे।’ कंगना रनोट ने बाबा रामदेव को भेजी राखी सुलह होने के बाद कंगना रनोट ने बाबा रामदेव को राखी भेजी। उन्होंने अपनी कार्यकर्ता से वह राखी बंधवाई है। क्या था कंगना रनोट और रामदेव बाबा का पूरा विवाद? कंगना रनोट ने जेन-जी प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा था। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के युवा को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” विवाद लगभग खत्म हो चुका था, लेकिन कंगना ने डीडी न्यूज के इंटरव्यू में फिर बाबा रामदेव पर बयान दिया। उन्होंने कहा है, ‘बाबा रामदेव मुझसे पहले ही नाराज चल रहे हैं। अभी उनसे पूछा गया कि कंगना ने प्रोटेस्टर्स को गटरछाप कहा है, तो उन्होंने कहा, उसका बचपन देखा है क्या था, उसकी जवानी देखी है क्या थी। क्या बाबा रामदेव मेरे बेडरूम में चमगादड़ बनकर लटका हुआ था, उसने देखा है क्या था। क्या देखा। मुझे समझ नहीं आ रहा, ऐसा क्या देखा। बताना चाहिए था न कि क्या देखा।’

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गिस्तान में SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गिस्तान में SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गिस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। उज्बेकिस्तान से जुड़ी 5 खास बातें 1. डबल-लैंडलॉक्ड देश उज्बेकिस्तान समुद्र से पूरी तरह कटा हुआ है। इसके सभी पड़ोसी देश भी लैंडलॉक्ड हैं। दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बहुत कम है। 2. समरकंद का गौरवशाली इतिहास करीब 2700 साल पुराना समरकंद कभी सिल्क रूट का प्रमुख शहर था। एशिया और यूरोप के बीच व्यापार करने वाले यहां से गुजरते थे। 3. सोने का बड़ा उत्पादक उज्बेकिस्तान दुनिया का 10वां सबसे बड़ा सोने का उत्पादक देश है। यहां स्थित मुरुंतौ (Muruntau) दुनिया की सबसे बड़ी ओपन-पिट सोने की खदानों में से एक है। 4. बाबर की जन्मभूमि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का जन्म 1483 में अंदीजान शहर में हुआ था। बाबर बाद में काबुल होते हुए भारत आया और 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई जीतकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। ———————————-

सैफ अली खान पर हमले के आरोपी ने जुर्म कबूला:शरीफुल इस्लाम ने कोर्ट से नरमी की अपील की, पेट में फंसा था चाकू का टुकड़ा

सैफ अली खान पर हमले के आरोपी ने जुर्म कबूला:शरीफुल इस्लाम ने कोर्ट से नरमी की अपील की, पेट में फंसा था चाकू का टुकड़ा

सैफ अली खान पर हमले के आरोपी मोहम्मद शरीफुल इस्लाम ने अपना अपराध स्वीकार करने की अर्जी दायर की है। उसने अदालत से नरमी बरतने की अपील भी की है। उसके वकील विपुल दुशिंग ने इसकी पुष्टि की है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने अभियोजन पक्ष से जवाब दाखिल करने को कहा है और सुनवाई 11 सितंबर तक टाल दी है। 16 जनवरी 2025 की देर रात सैफ के घर में लूट की नीयत से घुसे शख्स ने उन पर हमला किया था। घटना के दो दिन बाद शरीफुल इस्लाम की गिरफ्तारी हुई थी, जो अब तक न्यायिक हिरासत में है। इस महीने की शुरुआत में एडिशनल सेशंस जज जीपी देशमुख ने शरीफुल इस्लाम पर आरोप तय किए थे। इसके साथ ही मामले में ट्रायल का रास्ता साफ हो गया। इस्लाम पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत घातक हथियार का इस्तेमाल करके लूटपाट, गंभीर चोट पहुंचाने और घर में जबरन घुसने के आरोप लगाए गए हैं। उस पर फॉरेनर्स एक्ट और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियमों की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। जांच में सामने आया था कि शरीफुल इस्लाम बांग्लादेशी है, जो फर्जी डॉक्यूमेंट्स की मदद से गैरकानूनी ढंग से भारत में रह रहा है। हमले के बाद बेटे ने पूछा था- क्या आप मरने वाले हैं हाल ही में मोजो स्टोरी को दिए इंटरव्यू में सैफ ने हमले पर बात करते हुए कहा था, ‘मैं बच्चों के कमरे में गया। वह शख्स बच्चे (जेह) को पकड़े हुए था। उसने बच्चे को हल्की चोट पहुंचाई थी और हमारी मेड को भी जख्मी कर दिया था। शायद अगर मैं पहले लाइट जला देता और उससे बात करने की कोशिश करता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। लेकिन उस समय मैंने बिना सोचे-समझे उस पर हमला कर दिया और हमारी हाथापाई शुरू हो गई। इसके बाद वह चाकू लेकर बेकाबू हो गया। चारों तरफ खून और अफरा-तफरी मच गई।’ आगे सैफ ने कहा, ‘मैं वाकई तैमूर के साथ रहना चाहता था। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम मेरे साथ हॉस्पिटल आओगे। उसने मुझे देखा और पूछा, ‘क्या आप मरने वाले हैं?’ मैंने कहा, ‘नहीं, मेरी पीठ में बहुत दर्द है, लेकिन मैं ठीक हो जाऊंगा’, उसने कहा, हां मैं चलूंगा।’ सैफ ने ये भी कहा कि उस शख्स ने उन्हें पूरी ताकत से चाकू मारा था। चाकू का 6 इंच का टुकड़ा उनकी पीठ में रह गया था। वो टुकड़ा रीड़ की हड्डी के पास लगा था। सैफ ने कहा, ‘मेरा एक पैर सुन्न हो रहा था, मैं पैरालाइज होने के बेहद करीब था।’ हमला करने वाले शख्स को माफ करना चाहते हैं सैफ इसी इंटरव्यू में सैफ ने कहा है कि वो हमला करने वाले शख्स को माफ करना चाहते हैं। सैफ ने कहा, “मैं उस आदमी को माफ भी करना चाहता था, क्योंकि मुझे लगता है कि उसने बहुत बड़ी गलती की। मुझे नहीं लगता कि वह झगड़ा करना चाहता था। मैं उसे खुशी-खुशी माफ कर देता, लेकिन जिस तरह से उसने मुझे मारने की कोशिश की, उसे भूल पाना मेरे लिए मुश्किल हो रहा है। यह अमीर और गरीब का मामला है और इसी असमानता की वजह से ऐसा हुआ है।”