इस्लामाबाद के अस्पताल में आग, 15 नवजातों की मौत:AC कंप्रेसर में विस्फोट से हादसा; वार्ड में 16 बच्चे थे, सिर्फ 1 बचा

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के एक अस्पताल में बुधवार को आग लगने से 15 नवजात बच्चों की मौत हो गई। हादसा पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) अस्पताल में स्त्री रोग वार्ड की नर्सरी में हुआ। अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के वक्त नर्सरी में 16 नवजात बच्चे मौजूद थे। इनमें से सिर्फ एक बच्चे को बचाया जा सका। रेस्क्यू अधिकारियों के मुताबिक, नर्सरी के अंदर एयर कंडीशनर के कंप्रेसर में विस्फोट हुआ। इसके बाद आग लग गई और तेजी से पूरे वार्ड में फैल गई। आग की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक, आग पर काबू पा लिया गया है। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
कंगना से जुड़े सवाल पर भड़कीं तापसी पन्नू:मीडिया से बोलीं- आप सवाल पूछना बंद करेंगे, तभी विवाद खत्म होगा; कंगना ने 'सस्ती कॉपी' कहा था

बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू कंगना रनोट से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर भड़क गईं। हाल ही में कंगना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तापसी पर उनकी परवरिश और माता-पिता का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया था। इस पर मीडिया से बातचीत के दौरान तापसी ने कहा कि जब लोग और मीडिया उनसे इस मुद्दे पर सवाल पूछना बंद कर देंगे, तब यह विवाद अपने आप खत्म हो जाएगा। तापसी अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गांधारी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बातचीत कर रही थीं। तापसी बोलीं- आप लोग विवाद खत्म नहीं होने देते जब तापसी से कंगना के आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, आप इस बात को खत्म क्यों नहीं होने देते? जब कोई हम दोनों से यह सवाल पूछना बंद कर देगा, तो यह मुद्दा भी खत्म हो जाएगा। आप सब लोगों को यह सब देखने में मजा आ रहा है, इसलिए वही सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे सवाल पूछना अगर आप बंद कर दें, तो यह बात कब की खत्म हो जाती। कंगना ने सस्ती कॉपी कहा, फिर डिलीट की स्टोरी इससे पहले कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो स्टोरीज शेयर की थीं, जिन्हें बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था। उन्होंने लिखा, ‘एक सस्ती कॉपी अपनी आने वाली B-ग्रेड फिल्म को लेकर भी हमेशा की तरह मीडिया में सिर्फ हेडलाइन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मेरी परवरिश और मेरे माता-पिता का बेहद बेशर्मी से मजाक उड़ाया।’ एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ‘मुझे लगता है कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं। मैं कभी किसी बहस में माता-पिता को नहीं लाती, लेकिन आज मैं उनके माता-पिता से भी पूछना चाहती हूं कि वे मेरे माता-पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर सके? इतनी सस्ती कॉपी क्यों? आपकी कोशिशों के लिए मुझे अफसोस है।’ कंगना ने कहा- वो प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं इसके बाद कंगना ने तापसी की टिप्पणी वाली एक खबर शेयर की और कहा कि कई लोग उनकी परवरिश और माता-पिता पर सवाल उठाते हैं। कंगना ने बताया कि उनका परिवार एक प्रतिष्ठित राजपूत जमींदार परिवार से आता है और उनके माता-पिता पढ़े-लिखे हैं। कंगना ने कहा कि यह उनकी निजी पसंद थी कि वह अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल शुरुआत से करें। इसके लिए उनके माता-पिता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? तापसी-कंगना का विवाद कई साल पुराना अभिनेत्री तापसी पन्नू और कंगना रनोट के बीच विवाद काफी पुराना है। विवाद की शुरुआत 2018-19 के आसपास हुई। तापसी ने फिल्म ‘मनमर्जियां’ के प्रमोशन के दौरान कहा था कि कंगना को अपनी बात कहने के लिए फिल्टर की जरूरत है। इसके बाद 2019 में तापसी ने कंगना की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के ट्रेलर की तारीफ की, लेकिन कंगना का नाम नहीं लिया। इस पर कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को ‘सस्ती कॉपी’ कह दिया था। इसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस तेज हुई। इसी दौरान कंगना ने तापसी और स्वरा भास्कर को ‘बी-ग्रेड एक्ट्रेस’ कहा था। कंगना ने कहा था कि दोनों आउटसाइडर होने के बावजूद नेपोटिज्म का समर्थन करती हैं। तापसी ने इस पर कहा था कि आउटसाइडर्स को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें ‘भाई को बिकिनी में राखी क्यों बांधेंगी?’:कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में रिवीलिंग ड्रेस के बाद कंगना रनोट ने उठाए सवाल कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। पूरी खबर पढ़ें
कंगना से जुड़े सवाल पर भड़कीं तापसी पन्नू:मीडिया से बोलीं- आप सवाल पूछना बंद करेंगे, तभी विवाद खत्म होगा; कंगना ने 'सस्ती कॉपी' कहा था

बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू कंगना रनोट से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर भड़क गईं। हाल ही में कंगना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तापसी पर उनकी परवरिश और माता-पिता का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया था। इस पर मीडिया से बातचीत के दौरान तापसी ने कहा कि जब लोग और मीडिया उनसे इस मुद्दे पर सवाल पूछना बंद कर देंगे, तब यह विवाद अपने आप खत्म हो जाएगा। तापसी अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गांधारी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बातचीत कर रही थीं। तापसी बोलीं- आप लोग विवाद खत्म नहीं होने देते जब तापसी से कंगना के आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, आप इस बात को खत्म क्यों नहीं होने देते? जब कोई हम दोनों से यह सवाल पूछना बंद कर देगा, तो यह मुद्दा भी खत्म हो जाएगा। आप सब लोगों को यह सब देखने में मजा आ रहा है, इसलिए वही सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे सवाल पूछना अगर आप बंद कर दें, तो यह बात कब की खत्म हो जाती। कंगना ने सस्ती कॉपी कहा, फिर डिलीट की स्टोरी इससे पहले कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो स्टोरीज शेयर की थीं, जिन्हें बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था। उन्होंने लिखा, ‘एक सस्ती कॉपी अपनी आने वाली B-ग्रेड फिल्म को लेकर भी हमेशा की तरह मीडिया में सिर्फ हेडलाइन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मेरी परवरिश और मेरे माता-पिता का बेहद बेशर्मी से मजाक उड़ाया।’ एक्ट्रेस ने आगे लिखा, ‘मुझे लगता है कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं। मैं कभी किसी बहस में माता-पिता को नहीं लाती, लेकिन आज मैं उनके माता-पिता से भी पूछना चाहती हूं कि वे मेरे माता-पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर सके? इतनी सस्ती कॉपी क्यों? आपकी कोशिशों के लिए मुझे अफसोस है।’ कंगना ने कहा- वो प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं इसके बाद कंगना ने तापसी की टिप्पणी वाली एक खबर शेयर की और कहा कि कई लोग उनकी परवरिश और माता-पिता पर सवाल उठाते हैं। कंगना ने बताया कि उनका परिवार एक प्रतिष्ठित राजपूत जमींदार परिवार से आता है और उनके माता-पिता पढ़े-लिखे हैं। कंगना ने कहा कि यह उनकी निजी पसंद थी कि वह अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल शुरुआत से करें। इसके लिए उनके माता-पिता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? तापसी-कंगना का विवाद कई साल पुराना अभिनेत्री तापसी पन्नू और कंगना रनोट के बीच विवाद काफी पुराना है। विवाद की शुरुआत 2018-19 के आसपास हुई। तापसी ने फिल्म ‘मनमर्जियां’ के प्रमोशन के दौरान कहा था कि कंगना को अपनी बात कहने के लिए फिल्टर की जरूरत है। इसके बाद 2019 में तापसी ने कंगना की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के ट्रेलर की तारीफ की, लेकिन कंगना का नाम नहीं लिया। इस पर कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को ‘सस्ती कॉपी’ कह दिया था। इसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस तेज हुई। इसी दौरान कंगना ने तापसी और स्वरा भास्कर को ‘बी-ग्रेड एक्ट्रेस’ कहा था। कंगना ने कहा था कि दोनों आउटसाइडर होने के बावजूद नेपोटिज्म का समर्थन करती हैं। तापसी ने इस पर कहा था कि आउटसाइडर्स को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें ‘भाई को बिकिनी में राखी क्यों बांधेंगी?’:कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन में रिवीलिंग ड्रेस के बाद कंगना रनोट ने उठाए सवाल कृति सेनन हाल ही में रक्षाबंधन के लिए बने एक ज्वेलरी ब्रांड के विज्ञापन में नजर आई थीं। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न कपड़े पहने थे, जिसमें ब्रालेट जैसा ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी। पूरी खबर पढ़ें
डायरेक्टर कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में निधन:हार्ट अटैक आया था, फिल्म फूल और कांटे से अजय देवगन को लॉन्च किया था

वेटरन फिल्ममेकर कुकू कोहली का 77 साल की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में आखिरी सांस ली। कुकू कोहली को हार्ट अटैक आया था। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने इसकी पुष्टि की। कुकू कोहली ने अजय देवगन को फिल्म फूल और कांटे से फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च किया था। यह फिल्म सुपरहिट रही और अजय देवगन को पहचान मिली। इसके बाद कुकू कोहली ने कोहराम, सुहाग, हकीकत और जुल्मी जैसी फिल्में बनाईं। (खबर अपडेट की जा रही है)
ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा। खबर अपडेट हो रही है…
ट्रम्प कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदल सकते हैं:कहा- ‘लेक ओंटारियो’ का नाम ‘लेक अमेरिका’ करने की सोच रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदलने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ रखने पर विचार कर रहे हैं। लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका और कनाडा ने एक-दूसरे पर 50% टैरिफ लगा दिया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, लेक ओंटारिया का नाम बदलने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और न ही औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने किसी जगह का नाम बदलने की बात कही हो। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहने का आदेश दिया था। हालांकि, उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली थी। क्यों अहम है लेक ओंटारियो? लेक ओंटारियो उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों (ग्रेट लेक्स) में से एक है। इसका उत्तरी किनारा कनाडा के ओंटारियो प्रांत और दक्षिणी किनारा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य से जुड़ा है। यह झील दोनों देशों के लिए पीने के पानी, सामान की आवाजाही, मछली पालन और पर्यटन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सेंट लॉरेंस नदी के जरिए यह अटलांटिक महासागर से जुड़ती है, इसलिए यहां से सामान की आवाजाही भी होती है। झील की देखभाल और सुरक्षा के लिए अमेरिका और कनाडा मिलकर काम करते हैं और कई समझौते कर चुके हैं। लेक ओंटारियो को उसका नाम कैसे मिला? ‘ओंटारियो’ नाम मूलनिवासी ह्यूरॉन लोगों की भाषा से आया माना जाता है। इसका अर्थ ‘सुंदर झील’ है। बाद में यूरोपीय लोगों ने भी इस नाम का इस्तेमाल शुरू किया और यही नाम प्रचलित हो गया। इसी से कनाडा के ओंटारियो राज्य का नाम भी पड़ा। यूरोपीय मानचित्रों में यह नाम 17वीं सदी से दिखाई देने लगा था। यानी ‘ओंटारियो’ नाम नया नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। एक दिलचस्प बात यह भी है कि लेक ओंटारियो ग्रेट लेक्स में सबसे छोटी झील है, लेकिन इसका आर्थिक महत्व बहुत बड़ा है। क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अपने सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों और दस्तावेजों में किसी स्थान का नाम बदल सकता है। लेकिन यदि वह स्थान किसी दूसरे देश के साथ साझा है, तो नया नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं हो जाता। यानी अमेरिका अपने आधिकारिक दस्तावेजों में लेक ओंटारियो को कोई नया नाम दे सकता है, लेकिन कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे मानने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यही स्थिति पहले ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ मामले में भी देखने को मिली थी। जनवरी 2025 में ट्रम्प ने अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल में ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने इसे अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में लागू कर दिया, लेकिन मैक्सिको और दूसरे देशों ने पुराने नाम का इस्तेमाल जारी रखा।
अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।
फ्रांस में टॉरनेडो से 41 लोग घायल:300 घरों को नुकसान, छतें उड़ीं; ट्रेन-सड़क और हवाई सेवाओं पर भी असर

फ्रांस के एक गांव में सोमवार को टॉरनेडो आया। इसमें 41 लोग घायल हुए और सैकड़ों घरों को नुकसान पहुंचा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टॉरनेडो से सबसे ज्यादा नुकसान करीब 1,000 आबादी वाले पोमास गांव में हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, यहां करीब 300 घरों को नुकसान पहुंचा और कुछ घरों की छतें पूरी तरह उड़ गईं। परिवहन मंत्री फिलिपे तबारो ने बताया कि ट्रेनें लेट हुईं, सड़कें बंद करनी पड़ीं और हवाई अड्डों पर देरी और उड़ानें रद्द हुईं। देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के कई इलाकों में तूफान को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। टॉरनेडो से जुड़ी तस्वीरें… 117 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली राष्ट्रीय मौसम सेवा मेटेओ-फ्रांस ने बताया कि पास के अरकेट्स-एन-वाल गांव में हवा की रफ्तार 117.48 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। देश के उत्तर में स्थित पेरिस के हवाई अड्डे पर भी देरी और उड़ानें रद्द होने की जानकारी दी गई। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मौके पर 120 से ज्यादा बचावकर्मियों को तैनात किया गया। घायलों में से 15 लोगों को अस्पताल ले जाया गया। घायलों में एक गर्भवती महिला भी शामिल है। उसके पति ने एएफपी को बताया कि घर गिरने से महिला घायल हुई। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
बेसेंट बोले- ईरान के सामने अब दो रास्ते:दुनिया से अलग-थलग पड़कर गुजारे लायक अर्थव्यवस्था या सामान्य होकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में लौटने का मौका

वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं। बेसेंट के मुताबिक, पहला रास्ता पूरी तरह दुनिया से अलग-थलग पड़ना और गुजारे लायक अर्थव्यवस्था तक सीमित रहना है। दूसरा रास्ता सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका पाना है। बेसेंट ने क्या कहा स्कॉट बेसेंट ने कहा, “… ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं: पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग पड़ना और गुजारे लायक अर्थव्यवस्था, या फिर सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका पाना।” पोस्ट में इसके बाद “आज” लिखा है और दो लिंक दिए गए हैं: https://t.co/YHe7NoNkAf और https://t.co/UJfUIEdyV4






