पुतिन बोले- रूस-भारत के बीच इस साल कारोबार बढ़ा:दोनों देशों के दशकों से रिश्ते मजबूत; भारत के विदेश मंत्री जयशंकर से मॉस्को में मुलाकात की

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि इस साल रूस और भारत के बीच कारोबार बढ़ा है। उन्होंने यह बात रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन में सोमवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान कही। पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच दशकों से मजबूत रिश्ते बने हुए हैं। दोनों देश व्यावहारिक तौर पर लगभग सभी क्षेत्रों में अपना सहयोग जारी रखे हुए हैं। भारतीय विदेश मंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपकी आज की यात्रा रूस-भारत के बीच दशकों से कायम रिश्तों की मजबूती को दिखाती है। उन्होंने कहा, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस साल हमारा कारोबार बढ़ा है। पिछले साल इसमें थोड़ी कमी आई थी, लेकिन इस साल यह बढ़ रहा है। जयशंकर रूसी उपप्रधानमंत्री से भी मिले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को में रूस के उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इस दौरान दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर भी बात हुई। जयशंकर रविवार को मॉस्को पहुंचे थे। वह रूस के अपने दो दिन के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS नेताओं के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
ईरान की करेंसी रियाल 20 लाख प्रति डॉलर पर पहुंची:यह अब तक का सबसे निचला स्तर, अमेरिकी प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

ईरान की मुद्रा रियाल सुबह के कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 लाख पर पहुंच गई। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रियाल का अब तक का सबसे निचला रिकॉर्ड स्तर है। अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी, लंबे समय से जारी आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध की वजह से ईरान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है। अमेरिका की ‘इकोनॉमिक डी-डे’ की तैयारी, नए प्रतिबंधों से बढ़ेगा दबाव ईरानी रियाल में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वाशिंगटन नए और अधिक कड़े प्रतिबंधों का ऐलान करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका ने इस कदम को “इकोनॉमिक डी-डे” करार दिया है। अमेरिका का मकसद इन कड़े वित्तीय प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव को चरम पर पहुंचाना है, जिससे रियाल पर आने वाले दिनों में और ज्यादा गिरावट का खतरा मंडरा रहा है। युद्ध और महंगाई से पहले से ईरान परेशानी ईरान की करेंसी 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पहले भी दबाव में थी। देश पहले से ही महंगाई और नेगेटिव आर्थिक विकास दर का सामना कर रहा था। हालांकि, पिछले छह महीनों से जारी युद्ध और संघर्ष ने ईरानी अर्थव्यवस्था को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाया है, जिससे रियाल लगातार नए निचले स्तर को छू रहा है। अमेरिकी नेवल नाकेबंदी से क्रूड ऑयल और समुद्री व्यापार प्रभावित अमेरिका द्वारा ईरान के आसपास की गई नौसैनिक नाकेबंदी ने देश के आयात और निर्यात व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ईरान का मुख्य राजस्व स्रोत कच्चा तेल का निर्यात रहा है, लेकिन नाकेबंदी की वजह से उसके तेल टैंकरों की आवाजाही पर रोक लग गई है। इसके चलते देश में विदेशी मुद्रा भंडार विशेषकर अमेरिकी डॉलर की भारी कमी हो गई है, जिससे अनौपचारिक बाजारों में डॉलर की मांग और कीमत दोनों अनियंत्रित रूप से बढ़ गई हैं। आगे क्या: महंगाई और रोजमर्रा की चीजों के दाम और बढ़ने के आसार रियाल के कमजोर होने का सीधा असर ईरान के आम नागरिकों पर पड़ने वाला है। दूसरे देशों से आने वाला सामान, खानस और दवाइयों की कीमतें बढ़ जाएंगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका की प्रस्तावित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पाबंदियां लागू होती हैं और नाकेबंदी जारी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में रियाल में और गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे ईरान में महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है।
ईरान की करेंसी रियाल 20 लाख प्रति डॉलर पर पहुंची:यह अब तक का सबसे निचला स्तर, अमेरिकी प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

ईरान की मुद्रा रियाल सुबह के कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 लाख पर पहुंच गई। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह रियाल का अब तक का सबसे निचला रिकॉर्ड स्तर है। अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी, लंबे समय से जारी आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध की वजह से ईरान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है। अमेरिका की ‘इकोनॉमिक डी-डे’ की तैयारी, नए प्रतिबंधों से बढ़ेगा दबाव ईरानी रियाल में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वाशिंगटन नए और अधिक कड़े प्रतिबंधों का ऐलान करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका ने इस कदम को “इकोनॉमिक डी-डे” करार दिया है। अमेरिका का मकसद इन कड़े वित्तीय प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव को चरम पर पहुंचाना है, जिससे रियाल पर आने वाले दिनों में और ज्यादा गिरावट का खतरा मंडरा रहा है। युद्ध और महंगाई से पहले से ईरान परेशान ईरान की करेंसी 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पहले भी दबाव में थी। देश पहले से ही महंगाई और नेगेटिव आर्थिक विकास दर का सामना कर रहा था। हालांकि, पिछले छह महीनों से जारी युद्ध और संघर्ष ने ईरानी अर्थव्यवस्था को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाया है, जिससे रियाल लगातार नए निचले स्तर को छू रहा है। अमेरिकी नेवल नाकेबंदी से क्रूड ऑयल और समुद्री व्यापार प्रभावित अमेरिका द्वारा ईरान के आसपास की गई नौसैनिक नाकेबंदी ने देश के आयात और निर्यात व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ईरान का मुख्य राजस्व स्रोत कच्चा तेल का निर्यात रहा है, लेकिन नाकेबंदी की वजह से उसके तेल टैंकरों की आवाजाही पर रोक लग गई है। इसके चलते देश में विदेशी मुद्रा भंडार विशेषकर अमेरिकी डॉलर की भारी कमी हो गई है, जिससे अनौपचारिक बाजारों में डॉलर की मांग और कीमत दोनों अनियंत्रित रूप से बढ़ गई हैं। आगे क्या: महंगाई और रोजमर्रा की चीजों के दाम और बढ़ने के आसार रियाल के कमजोर होने का सीधा असर ईरान के आम नागरिकों पर पड़ने वाला है। दूसरे देशों से आने वाला सामान, खानस और दवाइयों की कीमतें बढ़ जाएंगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका की प्रस्तावित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ पाबंदियां लागू होती हैं और नाकेबंदी जारी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में रियाल में और गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे ईरान में महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है।
ईरान होर्मुज में जहाजों से टोल वसूलेगा, संसद की मंजूरी:रियाल और पसंद की करेंसी में पेमेंट लेगा; बदले में सुरक्षा और इंश्योरेंस देगा

ईरान की संसद ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल यानी फीस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जिन देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, उनसे समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता हसन काशकवी के मुताबिक, फीस के बदले समुद्री सेवाएं, सुरक्षा और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके अलावा पर्यावरण संबंधी सेवाएं और खास परिस्थितियों में ईंधन भी दिया जाएगा भुगतान ईरानी रियाल या ईरान की पसंद की किसी दूसरी करेंसी में किया जा सकेगा। खबर अपडेट हो रही है…
कार रेसिंग में हादसे का शिकार हुए एक्टर अजित कुमार:बेकाबू होकर दूसरी कार से टकराई गाड़ी, सुरक्षित बचे

साउथ फिल्म एक्टर और कार रेसर अजित कुमार यूरोप में एक हाई-स्पीड एंड्योरेंस रेस के दौरान हादसे का शिकार हो गए। रेसिंग के दौरान उनकी कार बेकाबू होकर दूसरी गाड़ी से जा टकराई। हालांकि, इस हादसे में उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। फिल्मीबीट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हादसा एशियन ला मैंस सीरीज और मिशेलिन ला मैंस कप के रेसिंग इवेंट के दौरान हुआ। अजित कुमार फिल्मों के साथ-साथ लंबे समय से इंटरनेशनल कार रेसिंग में हिस्सा लेते रहे हैं। रेस के दौरान बेकाबू हुई कार रिपोर्ट्स के अनुसार, रेस के दौरान अचानक उनकी कार से कंट्रोल छूट गया और वह ट्रैक पर मौजूद दूसरी कार से टकरा गई। टक्कर के बावजूद अजित कुमार को चोट नहीं लगी। हादसे के बाद वे सुरक्षित कार से बाहर आ गए। अजित कुमार इंटरनेशनल रेसिंग सर्किट में भाग लेने वाले गिने-चुने भारतीय ड्राइवरों में से एक हैं। 2025 में भी तीन बड़े हादसों में बचे थे अजित अजित कुमार के लिए रेसिंग ट्रैक पर हादसे होना नया नहीं है। इससे पहले साल 2025 में भी वे इटली में जीटी4 (GT4) यूरोपियन सीरीज के दौरान हादसे का शिकार हुए थे। उसी साल स्पेन के वालेंसिया में पोर्श स्प्रिंट चैलेंज के दौरान उनकी कार दो बार पलटी खा गई थी। इसके अलावा दुबई में 24एच पोर्श प्रैक्टिस रेस के दौरान भी उनकी कार क्रैश हो गई थी। इन सभी हादसों में वे बिना किसी गंभीर चोट के बच निकले थे। कहा था- ‘एक्सीडेंट के बाद सिर्फ रेस खत्म करने का ख्याल आता है’ कुछ समय पहले द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में अजित ने हादसों के बाद अपनी सोच पर बात की थी। उन्होंने बताया था कि एक्सीडेंट होते ही वे सबसे पहले देखते हैं कि उन्हें कोई चोट तो नहीं लगी है। इसके बाद अगर कार सही हालत में होती है, तो वे रेस पूरी करने की कोशिश करते हैं। अजित ने कहा था कि उन्हें अपने परिवार की चिंता रहती है, क्योंकि ऐसे हादसों से परिवार तनाव में आ जाता है। एक्टर होने के कारण उनके एक्सीडेंट की खबरें ज्यादा सुर्खियों में आती हैं। फिल्मों में काम के दौरान हो चुकी हैं 29 सर्जरी अजित कुमार ने इंटरव्यू में यह भी बताया था कि फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के दौरान उनकी अब तक 29 सर्जरी (ऑपरेशन) हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जिंदगी जीने के दो तरीके होते हैं- या तो आप शिकायत करें या फिर सबक लेकर आगे बढ़ें। एक्टर होने के साथ-साथ अजीत प्रोफेशनल कार रेसर हैं। भारत के अलावा को कई इंटरनेशनल रेसिंग का भी हिस्सा रह चुके हैं। 2003 में उन्होंने फॉर्मूला एशिया BMW चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। इसके अलावा वो फॉर्मूला 2 चैंपियनशिप का हिस्सा रह चुके हैं, जो 2010 में हुई थी। 2015 के बाद अजीत कुमार ने 2025 में 24H दुबई रेसिंग से रेसिंग करियर में कमबैक किया है। ‘डेयरडेविल’ फिल्म में नजर आएंगे अजित वर्कफ्रंट की बात करें तो अजित कुमार को हाल ही में फिल्म ‘विदामुयार्ची’ और ‘गुड बैड अगली’ में देखा गया था। अब वे अपनी अगली फिल्म ‘डेयरडेविल’ में नजर आएंगे, जिसका डायरेक्शन अधिक रविचंद्रन कर रहे हैं। इस फिल्म को उनकी पत्नी शालिनी अजित कुमार का प्रोडक्शन हाउस ‘ब्रेवहार्ट्स प्रोडक्शंस’ प्रोड्यूस कर रहा है।
पहली भारतीय महिला मिमिक्री आर्टिस्ट आशा सिंह जयसवाल का निधन:मीना कुमारी की नकल से फेम मिला, बीआर चोपड़ा की महाभारत में द्रोणाचार्य की पत्नी बनी थीं

दिग्गज अभिनेत्री और भारत की पहली महिला मिमिक्री आर्टिस्ट आशा सिंह जायसवाल का निधन हो गया है। उन्होंने 22 अगस्त को शाम करीब 7:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके बेटे आकाश भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर इस बात की जानकारी दी। आकाश ने अपनी मां को एक ‘कर्मठ लोह-महिला’ बताते हुए लोगों से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की है। आशा सिंह जायसवाल का अंतिम संस्कार 23 अगस्त को सुबह 10 बजे मुंबई के विले पार्ले स्थित पवन हंस श्मशान घाट पर किया गया। बेटे आकाश ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी आशा सिंह जायसवाल के बेटे आकाश भारद्वाज ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखकर अपनी मां के काम को याद किया। उन्होंने लिखा कि उनकी मां के लिए उनका काम ही सब कुछ था। आकाश ने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर उनकी मां के काम को जरूर देखें और याद रखें, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनकी मां का संदेश था कि मृत्यु का दुख मनाने के बजाय आनंद महसूस करना चाहिए। भारत की पहली महिला मिमिक्री आर्टिस्ट के रूप में मिली पहचान आशा सिंह जायसवाल को भारत की पहली महिला मिमिक्री आर्टिस्ट माना जाता है। वे हिंदी सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस मीना कुमारी की आवाज की नकल करने के लिए पहचानी जाती थीं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स में एक्टिंग भी की थी। एक्टिंग के साथ-साथ वे लगातार सामाजिक कार्यों से भी जुड़ी रहीं। मुंबई के विले पार्ले में हुआ अंतिम संस्कार रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशा सिंह जायसवाल का अंतिम संस्कार 23 अगस्त को सुबह 10 बजे मुंबई के विले पार्ले वेस्ट स्थित पवन हंस श्मशान घाट में किया गया। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य और करीबी लोग मौजूद रहे। आशा सिंह जायसवाल एक एंटरप्रेन्योर भी थीं। उन्होंने ‘आशा इवेंट्स एंड फिल्म्स’ नाम की कंपनी बनाई थी, जिसकी वे फाउंडर और ऑपरेटर थीं। इस कंपनी के जरिए वे कई सांस्कृतिक और इवेंट्स आयोजित करती थीं। जीवन के आखिरी दिनों तक वे अपने काम से जुड़ी रहीं।
पाकिस्तान में 12-12 घंटे बिजली कटौती:लोग सड़कों पर उतरे, रास्ता रोका; लगातार कटौती से पानी सप्लाई ठप

पाकिस्तान में कराची के कई इलाकों में लंबे समय से हो रही बिजली कटौती के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने बड़े रास्ते रोके और बिजली सप्लाई बहाल करने की मांग को लेकर टायर जलाए। प्रदर्शन पाकिस्तान की कराची के पाक कॉलोनी, लियाकताबाद, गरीबाबाद, निश्तर रोड, भीमपुरा और रैंचोर लाइन में हुए। इससे शहर के कई प्रमुख हिस्सों में ट्रैफिक पर असर पड़ा। लियाकताबाद में प्रदर्शनकारियों ने बड़े चौराहे और रास्ते रोक दिए। स्थानीय न्यूज आउटलेट डॉन के मुताबिक, निश्तर रोड पर बिजली कटौती को लेकर कारोबारियों और के-इलेक्ट्रिक (केई) कर्मचारियों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद टायर जलाए गए। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
पाकिस्तान में 12-12 घंटे बिजली कटौती:लोग सड़कों पर उतरे, रास्ता जाम किया; लगातार कटौती से पानी सप्लाई ठप

पाकिस्तान के कराची में लंबे समय से जारी बिजली कटौती के खिलाफ शनिवार को कई इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने कई घंटे तक सड़कें जाम रखीं बिजली तुरंत बहाल करने की मांग की। इससे शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया और हजारों लोग जाम में फंस गए। डॉन के मुताबिक, लोगों ने बताया कि उन्हें रोज 12 घंटे या उससे ज्यादा बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई बार कटौती की जानकारी भी पहले नहीं दी जाती। बिजली नहीं होने पर पानी के पंपिंग स्टेशन बंद रहते हैं। इससे पानी की सप्लाई भी रुक रही है और लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। कराची में व्यापारी भी प्रदर्शन में उतरे कराची के निश्तर रोड पर बिजली लंबे समय तक बंद रहने को लेकर व्यापारियों और के-इलेक्ट्रिक (KE) के कर्मचारियों के बीच विवाद भी हुआ। इसके बाद प्रदर्शन तेज हो गया और कई जगह टायर जलाए गए। भिमपुरा और रैंचोर लाइन में दुकानदार भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उनका कहना था कि बिजली की अनियमित सप्लाई से कारोबार को काफी नुकसान हो रहा है। सड़कें बंद होने से साउथ जिले और आसपास के इलाकों में भी ट्रैफिक जाम फैल गया। गुलशन-ए-इकबाल की एक महिला ने बताया कि उनकी मां को बुखार था और सदर में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट था। वे मां को जांच के लिए क्लिनिक ले जा रहे थे, लेकिन उनकी एंबुलेंस सिविक सेंटर के पास करीब 2 घंटे तक जाम में फंसी रही। गरीबाबाद के रहने वाले इमरान ने कहा कि वे समय पर बिजली का बिल भरते हैं, फिर भी 12 घंटे तक बिजली कटती है। उन्होंने कहा, “आज तो हम घर तक नहीं पहुंच पाए। जुलूस और इन प्रदर्शनों की वजह से पूरा शहर जाम है।” खबर लगातार अपडेट हो रही है…
बांग्लादेश- हिंदू परिवार के 4 लोगों की संदिग्ध-हालात में मौत:बंद घर से रिटायर्ड शिक्षक पत्नी और बच्चों के शव मिले; पुलिस जांच में जुटी

बांग्लादेश के रंगपुर शहर में एक हिंदू परिवार के चार लोग संदिग्ध हालात में मृत मिले हैं। इनमें रिटायर्ड स्कूल शिक्षक, उनकी पत्नी, बेटी और बेटा शामिल हैं। चारों के शव शनिवार रात एक बंद घर से मिले। पुलिस, CID और डिटेक्टिव ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है। मृतकों की पहचान गणपति चक्रवर्ती (65), पत्नी प्रीतिलता चक्रवर्ती (50), बेटी आगमी चक्रवर्ती प्रार्थी (23) और बेटे प्रियम चक्रवर्ती (12) के रूप में हुई है। गणपति रंगपुर जिला स्कूल में शिक्षक थे और पिछले साल 31 दिसंबर को रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के बाद वे होम्योपैथी का काम भी कर रहे थे। गुरुवार से परिवार से संपर्क नहीं हुआ, फोन बंद थे परिजनों के मुताबिक, प्रीतिलता की छोटी बहन पूजा चक्रवर्ती ने उनसे गुरुवार दोपहर आखिरी बार बात की थी। इसके बाद गुरुवार रात से परिवार के चारों मोबाइल फोन बंद हो गए। शनिवार रात परिजन रंगपुर के दासपाड़ा इलाके में उनके घर पहुंचे। घर का मुख्य गेट बंद था और अंदर की सभी लाइटें भी बंद थीं। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने घर का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और चारों के शव बरामद किए। चारों के शव घर में अलग-अलग जगह मिले रंगपुर मेट्रोपॉलिटन CID के अधिकारी सुबीर चौधरी के मुताबिक, गणपति का शव छत पर, उनकी पत्नी और बेटी के शव सीढ़ियों के पास मिले। वहीं 12 साल के बेटे प्रियम का शव बिस्तर के नीचे मिला। परिजनों ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि परिवार को किसने और क्यों निशाना बनाया। गणपति की भतीजी सोमा चक्रवर्ती ने कहा कि उनके चाचा का किसी से विवाद या दुश्मनी नहीं थी। परिवार ने दासपाड़ा में नया घर बनाया था और वहीं रह रहा था। गणपति की बेटी आगमी ने इसी साल अंग्रेजी में मास्टर्स की डिग्री पूरी की थी। उनका 12 साल का बेटा प्रियम 5वीं कक्षा में पढ़ता था। पुलिस के साथ CID ने भी मामले की जांच शुरू की रंगपुर मेट्रोपॉलिटन कोतवाली थाने के प्रभारी अधिकारी नजमुल कादेर के मुताबिक, पुलिस के साथ CID और डिटेक्टिव ब्रांच भी मामले की जांच कर रही हैं। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चारों की मौत कब और कैसे हुई और इसके पीछे क्या वजह थी। मौत का सही कारण और घटना का पूरा क्रम अभी सामने नहीं आया है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। खबर अपडेट हो रही है…
इंटरव्यू:राजकुमार संतोषी बोले- ‘घायल’, ‘दामिनी’ से ‘बंटवारा 1947’ तक मेरे लिए कहानी पहले है, कभी ट्रेंड फॉलो नहीं किया

निर्देशक राजकुमार संतोषी ‘बंटवारा 1947’ के जरिए एक बार फिर से सनी देओल के साथ अपनी फिल्म परदे पर लेकर आए हैं। असग़र वजाहत के मूल प्ले को फिल्म में बदलने से लेकर सीक्वल कल्चर और बॉक्स ऑफिस ट्रेंड पर उनसे हुई खास बातचीत… ‘बंटवारा 1947’ का मुख्य किरदार आपके पुराने नायकों से कितना अलग है? मेरी फिल्मों में अक्सर ऐसा किरदार आता है, जो एक पॉइंट तक चीजों को सहता है, समझने की कोशिश करता है, लेकिन फिर उसके सामने ऐसा पल आता है जहां वह तय करता है कि अब चुप नहीं रहा जा सकता। ‘घायल’ में संघर्ष बहुत निजी था। ‘दामिनी’ में न्याय का सवाल था। ‘घातक’ में सिस्टम और ताकत के खिलाफ लड़ाई थी। ‘बंटवारा 1947’ में सिकंदर मिर्जा का संघर्ष दूसरे इंसान की सुरक्षा, सम्मान और इंसानियत से जुड़ा है। तो उसके अंदर बागीपन जरूर है, लेकिन उसका संदर्भ अलग है। वह सिर्फ अपनी लड़ाई नहीं लड़ रहा। उसके सामने यह सवाल है कि जब किसी दूसरे इंसान के साथ गलत हो रहा हो, तो क्या आप सिर्फ तमाशबीन बने रहेंगे? मूल प्ले से फिल्म में क्या बड़ा बदलाव किया गया? सिकंदर मिर्जा के किरदार को ज्यादा एक्टिव बनाया गया है। मूल प्ले में वह घटनाओं के बीच मौजूद है, लेकिन फिल्म में हमें उसकी जर्नी को ज्यादा प्रो-एक्टिव बनाना था। थिएटर और सिनेमा की लैंग्वेज अलग होती है। स्टेज पर एक लंबा डायलॉग, परफॉर्मेंस और सिचुएशन मिलकर किरदार की मनःस्थिति बता सकते हैं। इसलिए हमने यह देखा कि सिकंदर सिर्फ घटनाओं का गवाह न रहे। उसके फैसले कहानी को आगे बढ़ाएं। सनी देओल की लार्जर दैन लाइफ इमेज को इस कहानी में कैसे इस्तेमाल किया? मेरी फिल्मों में पहले किरदार आता है, स्टार की इमेज बाद में। सनी की स्क्रीन प्रेजेंस और इंटेंसिटी बहुत मजबूत है, लेकिन हर फिल्म में उस इंटेंसिटी को एक ही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अगर आप हर बार सिर्फ उनकी पुरानी फिल्मों वाला पैटर्न दोहराएंगे, तो किरदार नया नहीं लगेगा। ‘बंटवारा…’ में सिकंदर को हमने एक्टिव जरूर बनाया, लेकिन उसके लिए सिर्फ फिजिकल एग्रेसन काफी नहीं, अंदर इमोशनल कंट्रोल भी चाहिए था। अलग-अलग जॉनर के बावजूद आपकी फिल्मों की कॉमन सिमिलैरिटी क्या है? जॉनर मेरे लिए बस कहानी कहने का तरीका है, कहानी का मकसद नहीं। ‘दामिनी’ कोर्टरूम ड्रामा है, ‘घातक’ एक्शन ड्रामा है, ‘लज्जा’ सोशल स्टेटमेंट है और ‘खाकी’ क्राइम नैरेटिव है, लेकिन इन सबमें कहीं न कहीं एक सवाल जरूर है कि जब किसी इंसान की गरिमा, उसके अधिकार या उसके साथ न्याय का सवाल सामने आता है, तो वह क्या करता है? मुझे ऐसे किरदार दिलचस्प लगते हैं जिनके पास समझौता करने का विकल्प होता है, लेकिन वे आखिरकार आसान रास्ता नहीं चुनते। एक खास मौके पर उनके भीतर कुछ बदलता है। शायद यही मेरी फिल्मों की कॉमन थीम है। क्या आज सीक्वल फिल्मों के लिए नॉस्टैल्जिया एक बड़ा कॉमर्शियल टूल बन गया है? नॉस्टैल्जिया काम जरूर करता है, लेकिन सिर्फ उसी के भरोसे फिल्म नहीं चल सकती। दर्शक को एक नई कहानी चाहिए। मैंने कभी सिर्फ ट्रेंड देखकर फिल्म नहीं चुनी। कोई सब्जेक्ट मुझे समझ में आता है, उसमें कुछ कहने लायक लगता है तभी मैं उसमें दिलचस्पी लेता हूं। मेरे लिए पहले कहानी है। उसके बाद स्टार, स्केल, ट्रेंड या फ्रेंचाइज है। ‘अंदाज अपना अपना 2’ की काफी चर्चा हो रही है। इसके बनने की क्या संभावनाएं हैं? ‘अंदाज अपना अपना’ सिर्फ दो-चार कैरेक्टर्स या उसके टाइटल की वजह से यादगार नहीं बनी। उसकी स्क्रीनप्ले, डायलॉग्स, कॉमिक टाइमिंग और उसका पूरा कॉमिक रिदम मिलकर उसे खास बनाते हैं। अगर कभी उस स्पिरिट को आगे लेकर जाना है, तो सिर्फ पुराने कैरेक्टर्स को वापस लाना काफी नहीं होगा। ज्यादा जरूरी है कि एक ऐसी नई कहानी हो, जिसमें वही कॉमिक एनर्जी हो। दर्शक को सिर्फ पुरानी फिल्म की कॉपी नहीं चाहिए। उसे नई फिल्म चाहिए, लेकिन उसके अंदर उस दुनिया की फील भी होनी चाहिए।







