Tuesday, 22 Sep 2026 | 03:55 PM

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रिया चक्रवर्ती बोलीं- 18 की उम्र में चेहरा सही कराया:तब 3 लाख सैलरी मिलती थी, कमाई से ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया

रिया चक्रवर्ती बोलीं- 18 की उम्र में चेहरा सही कराया:तब 3 लाख सैलरी मिलती थी, कमाई से ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया

अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कॉमेडियन तन्मय भट्ट के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में रिया ने बताया कि 17-18 साल की उम्र में एमटीवी वीजे के तौर पर उन्हें 3 लाख रुपए सैलरी मिलती थी। रिया के मुताबिक वे खुद को बहुत अमीर मानती थीं और उन्होंने यह सारा पैसा अपने चेहरे का ब्यूटी ट्रीटमेंट कराने में खर्च कर दिया था। इसके साथ ही रिया ने बताया कि उनके करियर का पहला सेलिब्रिटी इंटरव्यू सलमान खान का था, जिनसे उस वक्त सब डरते थे। चेहरे की सर्जरी पर खर्च की सैलरी रिया ने अपनी सैलरी का जिक्र करते हुए कहा कि 17-18 साल की उम्र में 3 लाख रुपए महीना मिलना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी। जब तन्मय ने उनसे पूछा कि उन्होंने इस पैसे का क्या किया, तो रिया ने बेबाकी से जवाब दिया कि उन्होंने यह पैसा अपने चेहरे को ठीक कराने यानी ब्यूटी ट्रीटमेंट पर खर्च किया। तन्मय के पूछने पर कि क्या उन्हें भी ऐसा कराना चाहिए, रिया ने सलाह दी कि हर किसी को यह कराना चाहिए क्योंकि अब टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो गई है। सब सलमान से डरते थे, इसलिए मुझे इंटरव्यू करने दिया बातचीत में रिया ने बताया कि एमटीवी वीजे के रूप में काम करते समय उन्होंने सबसे पहले सलमान खान का इंटरव्यू लिया था। रिया ने कहा कि बाकी टीम मेंबर्स ने उन्हें आसानी से सलमान का इंटरव्यू करने दिया, क्योंकि बाकी लोग सलमान से डरते थे। रिया ने हंसते हुए कहा कि उस दौर में केवल अच्छे दिखने वाले लोगों को ही बोलने की इजाजत होती थी। सुशांत केस में सीबीआई ने दी क्लीन चिट रिया चक्रवर्ती के पर्सनल लाइफ की बात करें तो जून 2020 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद वे विवादों में आ गई थीं। इस मामले में रिया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग्स से जुड़े केस में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। साल 2025 में सीबीआई ने इस केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सीबीआई ने साफ किया कि सुशांत की हत्या या रिया द्वारा उन्हें खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई सबूत नहीं मिला है। मुंबई की अदालत ने सीबीआई की इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। ‘रोडीज’ से की वापसी, नए शो में नजर आएंगी विवादों के बाद रिया को इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया था। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में ‘रोडीज: कर्म या कांड’ शो में गैंग लीडर बनकर वापसी की। इसके अलावा 2024 में रिया ने अपना क्लॉथिंग ब्रांड ‘चैप्टर 2’ भी लॉन्च किया। अब रिया जल्द ही करण जौहर के रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स 2’ में नजर आने वाली हैं। यह शो 13 अगस्त को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगा। इसमें मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारुकी और श्वेता तिवारी समेत 21 सेलिब्रिटीज हिस्सा ले रहे हैं।

रिया चक्रवर्ती बोलीं- 18 की उम्र में चेहरा सही कराया:तब 3 लाख सैलरी मिलती थी, कमाई से ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया

रिया चक्रवर्ती बोलीं- 18 की उम्र में चेहरा सही कराया:तब 3 लाख सैलरी मिलती थी, कमाई से ब्यूटी ट्रीटमेंट कराया

अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कॉमेडियन तन्मय भट्ट के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में रिया ने बताया कि 17-18 साल की उम्र में एमटीवी वीजे के तौर पर उन्हें 3 लाख रुपए सैलरी मिलती थी। रिया के मुताबिक वे खुद को बहुत अमीर मानती थीं और उन्होंने यह सारा पैसा अपने चेहरे का ब्यूटी ट्रीटमेंट कराने में खर्च कर दिया था। इसके साथ ही रिया ने बताया कि उनके करियर का पहला सेलिब्रिटी इंटरव्यू सलमान खान का था, जिनसे उस वक्त सब डरते थे। चेहरे की सर्जरी पर खर्च की सैलरी रिया ने अपनी सैलरी का जिक्र करते हुए कहा कि 17-18 साल की उम्र में 3 लाख रुपए महीना मिलना उनके लिए बहुत बड़ी बात थी। जब तन्मय ने उनसे पूछा कि उन्होंने इस पैसे का क्या किया, तो रिया ने बेबाकी से जवाब दिया कि उन्होंने यह पैसा अपने चेहरे को ठीक कराने यानी ब्यूटी ट्रीटमेंट पर खर्च किया। तन्मय के पूछने पर कि क्या उन्हें भी ऐसा कराना चाहिए, रिया ने सलाह दी कि हर किसी को यह कराना चाहिए क्योंकि अब टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो गई है। सब सलमान से डरते थे, इसलिए मुझे इंटरव्यू करने दिया बातचीत में रिया ने बताया कि एमटीवी वीजे के रूप में काम करते समय उन्होंने सबसे पहले सलमान खान का इंटरव्यू लिया था। रिया ने कहा कि बाकी टीम मेंबर्स ने उन्हें आसानी से सलमान का इंटरव्यू करने दिया, क्योंकि बाकी लोग सलमान से डरते थे। रिया ने हंसते हुए कहा कि उस दौर में केवल अच्छे दिखने वाले लोगों को ही बोलने की इजाजत होती थी। सुशांत केस में सीबीआई ने दी क्लीन चिट रिया चक्रवर्ती के पर्सनल लाइफ की बात करें तो जून 2020 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद वे विवादों में आ गई थीं। इस मामले में रिया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग्स से जुड़े केस में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। साल 2025 में सीबीआई ने इस केस में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सीबीआई ने साफ किया कि सुशांत की हत्या या रिया द्वारा उन्हें खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई सबूत नहीं मिला है। मुंबई की अदालत ने सीबीआई की इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। ‘रोडीज’ से की वापसी, नए शो में नजर आएंगी विवादों के बाद रिया को इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया था। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में ‘रोडीज: कर्म या कांड’ शो में गैंग लीडर बनकर वापसी की। इसके अलावा 2024 में रिया ने अपना क्लॉथिंग ब्रांड ‘चैप्टर 2’ भी लॉन्च किया। अब रिया जल्द ही करण जौहर के रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स 2’ में नजर आने वाली हैं। यह शो 13 अगस्त को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगा। इसमें मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारुकी और श्वेता तिवारी समेत 21 सेलिब्रिटीज हिस्सा ले रहे हैं।

ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो पहले वाले पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे प्लेन तक पहुंचे

ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो पहले वाले पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे प्लेन तक पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किए में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प ने कहा- अगर कोई हमला होता तो उसी प्लेन को निशाना बनाया जाता। मैं वही करता हूं, जो सुरक्षा एजेंसियां कहती हैं। मुझे लगातार धमकियां मिलती रहती हैं। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। व्हाइट हाउस ने कहा- नए विमान की सुरक्षा में कोई कमी नहीं कतर से मिले वाले विमान की सुरक्षा पर सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने कहा कि इस विमान में ट्रम्प और उनके साथ मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका के कई दुश्मन ट्रम्प को निशाना बनाना चाहते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए हम हर जरूरी तरीका अपनाते हैं। यानी व्हाइट हाउस ने यह नहीं माना कि नए विमान में सुरक्षा की कोई कमी थी। उसका कहना है कि ट्रम्प की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं। पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मामले पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।

धुरंधर एक्टर राकेश बेदी संभालेंगे आरसीएल की कप्तानी:भूख के खिलाफ क्रिकेट से बदलाव की पहल, अब हर रन भरेगा भूखों की थाली

धुरंधर एक्टर राकेश बेदी संभालेंगे आरसीएल की कप्तानी:भूख के खिलाफ क्रिकेट से बदलाव की पहल, अब हर रन भरेगा भूखों की थाली

बॉलीवुड की महफिल सजी, सितारे जुटे और चर्चा क्रिकेट की हुई, लेकिन इस बार मामला सिर्फ चौके-छक्कों का नहीं है। अभिनेता राकेश बेदी क्रिकेट के मैदान पर कप्तानी करेंगे और उनके हर रन का कनेक्शन जरूरतमंद की थाली से होगा। आरसीएल सीजन-4 में क्रिकेट, मनोरंजन और सामाजिक सरोकार का मेल देखने को मिलेगा, जहां जीत सिर्फ ट्रॉफी की नहीं, बल्कि किसी की भूख मिटाने की भी होगी। मुंबई में मनोरंजन जगत के सितारों की मौजूदगी में रेस्तरां क्रिकेट लीग यानी आरसीएल सीजन-4 का ऐलान हुआ। आमतौर पर कलाकार फिल्मों, शूटिंग या नए प्रोजेक्ट से जुड़कर सुर्खियों में आते हैं, लेकिन इस बार कहानी अलग है। अभिनेता राकेश बेदी अब कैमरे के सामने अभिनय के साथ क्रिकेट मैदान पर भी कप्तानी करते नजर आएंगे। फिल्म ‘धुरंधर’ से चर्चा में आए बेदी आरसीएल सुपरस्टार्स-11 की कमान संभालेंगे। लेकिन इस लीग की कहानी सिर्फ सितारों, बल्ले और चौकों-छक्कों तक सीमित नहीं है। आरसीएल सीजन-4 को ‘भूख मुक्त भारत’ अभियान से जोड़ा गया है। अक्टूबर में नई दिल्ली में होने वाली प्रतियोगिता का खास संदेश है-‘10 रन = 100 भोजन’। यानी मैदान पर बनाए गए हर 10 रन सिर्फ स्कोरबोर्ड नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि 100 जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने की कोशिश भी करेंगे। इस बार बल्लेबाज के बल्ले से निकला हर रन किसी की थाली तक पहुंचने वाली उम्मीद बनेगा। आरसीएल और ‘भूख मुक्त भारत’ अभियान के संस्थापक अरविंद कुमार ने कहा कि इस पहल की शुरुआत क्रिकेट की लोकप्रियता का इस्तेमाल समाज के लिए करने की सोच के साथ हुई। उनका कहना है कि एक तरफ लाखों लोग पर्याप्त भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में खाने योग्य भोजन बर्बाद हो जाता है। ऐसे में भोजन कूड़ेदान में जाने के बजाय जरूरतमंद की थाली तक पहुंचना चाहिए। किसानों से लेकर बधिर महिला क्रिकेट टीम तक मैदान में आरसीएल सीजन-4 में समाज के अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों की टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें ट्रांसजेंडर लोगों की टीम, भारतीय महिला बधिर क्रिकेट टीम, किसानों, प्रभावशाली व्यक्तित्वों, रसोइयों, दिल्ली पुलिस और दिल्ली पब्लिक स्कूल इंदिरापुरम की टीमें शामिल हैं। नेपाल से शेफ रत्ना तामांग के नेतृत्व में दोस्तों की टीम भी प्रतियोगिता का हिस्सा बनेगी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अतुल वासन भी इस पहल से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि आरसीएल की सबसे बड़ी खासियत इसका सामाजिक उद्देश्य है। क्रिकेट में आमतौर पर रन, रिकॉर्ड और औसत की चर्चा होती है, लेकिन यहां हर रन जरूरतमंद के लिए भोजन का माध्यम बन सकता है। किसान प्रभावशाली व्यक्तित्व जुगाड़ू कमलेश ने बताया कि भारतीय गांवों के किसान भी इस बार क्रिकेट के मैदान पर उतरेंगे। उनका कहना है कि किसान देश का पेट भरता है और अब वही किसान भूख के खिलाफ इस अभियान का हिस्सा बनकर खेलेंगे। कार्यक्रम में अभिनेता रजा मुराद, सुनील पाल, बिंदू दारा सिंह, शाहबाज खान और अरुण बख्शी समेत फिल्म जगत से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। आरसीएल सीजन-4 का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता जीतना नहीं है। आयोजकों के मुताबिक इस बार मैदान पर बनाए जाने वाले रन भूख, भोजन की बर्बादी और सामाजिक जिम्मेदारी के खिलाफ संदेश भी देंगे। इस मुकाबले में असली जीत तब होगी, जब क्रिकेट के जरिए ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों की थाली तक भोजन पहुंचेगा।

धुरंधर एक्टर राकेश बेदी संभालेंगे आरसीएल की कप्तानी:भूख के खिलाफ क्रिकेट से बदलाव की पहल, अब हर रन भरेगा भूखों की थाली

धुरंधर एक्टर राकेश बेदी संभालेंगे आरसीएल की कप्तानी:भूख के खिलाफ क्रिकेट से बदलाव की पहल, अब हर रन भरेगा भूखों की थाली

बॉलीवुड की महफिल सजी, सितारे जुटे और चर्चा क्रिकेट की हुई, लेकिन इस बार मामला सिर्फ चौके-छक्कों का नहीं है। अभिनेता राकेश बेदी क्रिकेट के मैदान पर कप्तानी करेंगे और उनके हर रन का कनेक्शन जरूरतमंद की थाली से होगा। आरसीएल सीजन-4 में क्रिकेट, मनोरंजन और सामाजिक सरोकार का मेल देखने को मिलेगा, जहां जीत सिर्फ ट्रॉफी की नहीं, बल्कि किसी की भूख मिटाने की भी होगी। मुंबई में मनोरंजन जगत के सितारों की मौजूदगी में रेस्तरां क्रिकेट लीग यानी आरसीएल सीजन-4 का ऐलान हुआ। आमतौर पर कलाकार फिल्मों, शूटिंग या नए प्रोजेक्ट से जुड़कर सुर्खियों में आते हैं, लेकिन इस बार कहानी अलग है। अभिनेता राकेश बेदी अब कैमरे के सामने अभिनय के साथ क्रिकेट मैदान पर भी कप्तानी करते नजर आएंगे। फिल्म ‘धुरंधर’ से चर्चा में आए बेदी आरसीएल सुपरस्टार्स-11 की कमान संभालेंगे। लेकिन इस लीग की कहानी सिर्फ सितारों, बल्ले और चौकों-छक्कों तक सीमित नहीं है। आरसीएल सीजन-4 को ‘भूख मुक्त भारत’ अभियान से जोड़ा गया है। अक्टूबर में नई दिल्ली में होने वाली प्रतियोगिता का खास संदेश है-‘10 रन = 100 भोजन’। यानी मैदान पर बनाए गए हर 10 रन सिर्फ स्कोरबोर्ड नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि 100 जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने की कोशिश भी करेंगे। इस बार बल्लेबाज के बल्ले से निकला हर रन किसी की थाली तक पहुंचने वाली उम्मीद बनेगा। आरसीएल और ‘भूख मुक्त भारत’ अभियान के संस्थापक अरविंद कुमार ने कहा कि इस पहल की शुरुआत क्रिकेट की लोकप्रियता का इस्तेमाल समाज के लिए करने की सोच के साथ हुई। उनका कहना है कि एक तरफ लाखों लोग पर्याप्त भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में खाने योग्य भोजन बर्बाद हो जाता है। ऐसे में भोजन कूड़ेदान में जाने के बजाय जरूरतमंद की थाली तक पहुंचना चाहिए। किसानों से लेकर बधिर महिला क्रिकेट टीम तक मैदान में आरसीएल सीजन-4 में समाज के अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों की टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें ट्रांसजेंडर लोगों की टीम, भारतीय महिला बधिर क्रिकेट टीम, किसानों, प्रभावशाली व्यक्तित्वों, रसोइयों, दिल्ली पुलिस और दिल्ली पब्लिक स्कूल इंदिरापुरम की टीमें शामिल हैं। नेपाल से शेफ रत्ना तामांग के नेतृत्व में दोस्तों की टीम भी प्रतियोगिता का हिस्सा बनेगी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अतुल वासन भी इस पहल से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि आरसीएल की सबसे बड़ी खासियत इसका सामाजिक उद्देश्य है। क्रिकेट में आमतौर पर रन, रिकॉर्ड और औसत की चर्चा होती है, लेकिन यहां हर रन जरूरतमंद के लिए भोजन का माध्यम बन सकता है। किसान प्रभावशाली व्यक्तित्व जुगाड़ू कमलेश ने बताया कि भारतीय गांवों के किसान भी इस बार क्रिकेट के मैदान पर उतरेंगे। उनका कहना है कि किसान देश का पेट भरता है और अब वही किसान भूख के खिलाफ इस अभियान का हिस्सा बनकर खेलेंगे। कार्यक्रम में अभिनेता रजा मुराद, सुनील पाल, बिंदू दारा सिंह, शाहबाज खान और अरुण बख्शी समेत फिल्म जगत से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। आरसीएल सीजन-4 का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता जीतना नहीं है। आयोजकों के मुताबिक इस बार मैदान पर बनाए जाने वाले रन भूख, भोजन की बर्बादी और सामाजिक जिम्मेदारी के खिलाफ संदेश भी देंगे। इस मुकाबले में असली जीत तब होगी, जब क्रिकेट के जरिए ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों की थाली तक भोजन पहुंचेगा।

हूती विद्रोहियों का सऊदी जहाज पर मिसाइल हमला:2 पाकिस्तानी समेत 3 की मौत; रेड सी में अब तक 8 जहाजों को निशाना बनाया

हूती विद्रोहियों का सऊदी जहाज पर मिसाइल हमला:2 पाकिस्तानी समेत 3 की मौत; रेड सी में अब तक 8 जहाजों को निशाना बनाया

यमनी सरकार से जुड़े मीडिया के मुताबिक, ईरान समर्थित हूतियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में एक जहाज पर हमला किया। इस हमले में तीन क्रू मेंबर मारे गए, जिनमें दो पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक था। यमनी सरकार समर्थित मीडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अल-जुम्हूरिया टीवी ने बताया कि यमन के हूतियों के हमले में दो पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक की मौत हुई है। जहाज का नाम नहीं बताया गया अल-जुम्हूरिया टीवी ने हमले में निशाना बनाए गए जहाज का नाम नहीं बताया। ईरान की समाचार एजेंसी आईएसएनए के मुताबिक, यह सऊदी जहाज था और उसे मिसाइल से निशाना बनाया गया। सऊदी अरब की नाकाबंदी का ऐलान करने के बाद हूती संगठन उसके आसपास के समुद्री इलाकों में जहाजों पर हमले कर रहा है। संगठन ने सऊदी अरब के अंदर भी हमले किए हैं। इन हमलों का केंद्र बाब अल-मंदेब स्ट्रेटरहा है। यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। लाल सागर में जहाजों की आवाजाही पर असर हूतियों के हमलों से सऊदी अरब का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। समुद्री यातायात पर भी असर पड़ा है, जिसके चलते जहाज सुरक्षा कारणों से लाल सागर और स्वेज नहर से बच रहे हैं। अब जहाज पश्चिमी देशों तक पहुंचने के लिए अफ्रीका के चारों ओर से जा रहे हैं। इससे सामान की डिलीवरी धीमी हो रही है, सामान की कमी बढ़ रही है, सप्लाई लाइन का संकट बन रहा है और रोजमर्रा का खर्च बढ़ रहा है। यमन में ईरान और सऊदी अरब आमने-सामने ईरान और सऊदी अरब यमन में छद्म युद्ध लड़ रहे हैं। दोनों देश वहां विरोधी पक्षों का समर्थन करते हैं। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि ईरान हूतियों के साथ है। हूती संगठन यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है। हूतियों ने 2023 और 2024 में भी लाल सागर में नियमित रूप से जहाजों पर हमले किए थे। इससे समुद्री यातायात पर असर पड़ा था। इस समय हूतियों के हमलों का असर इसलिए ज्यादा महसूस हो रहा है, क्योंकि दुनिया पहले से ही होर्मुज स्ट्रेटके बंद होने से जूझ रही है। होर्मुज और स्वेज नहर में यातायात धीमा ईरान जहाजों को होर्मुज स्ट्रेटसे गुजरने की अनुमति नहीं दे रहा है। वहीं, हूती संगठन अब लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमला कर रहा है। दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की आवाजाही होर्मुज स्ट्रेटसे होती है। लाल सागर में मौजूद स्वेज नहर पूर्वी गोलार्ध को पश्चिमी गोलार्ध से जोड़ती है। अब दोनों जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही बहुत धीमी हो गई है।

हाईटेक चीन में ‘मान्यताओं’ से तय होते करोड़ों के प्रोजेक्ट:सरकारी से लेकर सैन्य अफसर तक परंपराओं में उलझे; सैकड़ों, हाईवे-पुल प्रभावित

हाईटेक चीन में ‘मान्यताओं’ से तय होते करोड़ों के प्रोजेक्ट:सरकारी से लेकर सैन्य अफसर तक परंपराओं में उलझे; सैकड़ों, हाईवे-पुल प्रभावित

चीन की युआनयांग में नए औद्योगिक पार्क और उससे जुड़ने वाले फोर-लेन हाईवे की योजना मंजूर हो चुकी थी। इंजीनियर नक्शे व बजट को अंतिम रूप दे चुके थे, पर शिलान्यास से पहले ताओवादी फेंग शुई मास्टर ने दावा किया कि प्रस्तावित मार्ग की उत्तर-पूर्व दिशा ली वेई की जन्मतिथि के अनुसार अशुभ है और इससे करिअर प्रभावित हो सकता है। इसके बाद वेई ने हाईवे का रूट बदलवा दिया। इसके लिए अतिरिक्त जमीन लेनी पड़ी। प्रोजेक्ट 14 महीने लेट हुआ और 21 करोड़ रुपए लागत बढ़ गई। इसी तरह जियांग्शी प्रांत में पुल का निर्माण 20% हो चुका था। इसी दौरान अधिकारी झेंग गुआंगझोउ ने फेंग शुई सलाहकार से परामर्श लिया। सलाहकार ने दावा किया कि पुल का पिलर क्षेत्र की कथित ‘ड्रैगन वेंस’ (प्राकृतिक ऊर्जा) को काट रहा है, जिससे झेंग को जेल हो सकती है। उन्होंने निर्माण रुकवा दिया और पिलर 50 मीटर आगे बढ़वा दिया। पहले से बने पिलर भी तोड़ने पड़े। प्रोजेक्ट दो साल तक अटका रहा और 29 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। चीन में फेंग शुई और कई मान्यताएं सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई प्रशासनिक फैसलों और ​प्रोजेक्ट को भी प्रभावित कर रही है। दिलचस्प यह है कि इन मान्यताओं का खुलकर विरोध करने वाली ‘कम्युनिस्ट पार्टी’ के अफसर और मेयर ही इनके घोर समर्थक बने हुए हैं। ​वॉल स्ट्रीट की रिपोर्ट के अनुसार इन मान्यताओं के कारण बीते एक दशक में सैकड़ों हाईवे, पुल व औद्योगिक पार्क प्रभावित हुए। नक्शे बदलने व तोड़-फोड़ से प्रोजेक्ट्स 3 से 4 साल लेट हुए। एक ही मामले में 23 में से 16 बड़े प्रोजेक्ट बीच में ही रद्द या ठप कर दिए गए। सेना को ऑडिट कराना पड़ा – चीन की सबसे संवेदनशील रॉकेट फोर्स और रक्षा तंत्र में हुई बड़ी कार्रवाई के पीछे भ्रष्टाचार के अलावा इन पारंपरिक मान्यताओं को भी बड़ी वजह बताया गया। जांच में पता चला कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी आधुनिक सैन्य जरूरतों के बजाय ताओवादी भविष्यवाणियों (ताओ धर्म की विद्या के आधार पर अनुमान) प्राचीन ग्रंथों और गणनाओं के आधार पर फैसले ले रहे थे। इनके चलते कई रक्षा प्रोजेक्ट्स व रणनीतिक ढांचों की मंजूरी में महीनों की देरी हुई। हालात इतने गंभीर हो गए कि 2023-24 में चीन को रक्षा बजट और प्रमुख प्रोजेक्ट्स का ऑडिट कराना पड़ा। ‘अशुभ दिशा’ मानकर निवेश कम, जीडीपी औसतन 2.3% कम बोस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 2000 से 2018 के बीच 300 चीनी मेयरों की जन्मतिथियों व उनकी कथित ‘अशुभ’ दिशाओं की स्टडी की। ताकि पता चल सके कि वे जन्मतिथि व मान्यताओं के आधार पर किस तरह फैसले लेते हैं। नतीजे चौंकाने वाले थे। जिन क्षेत्रों को मेयर अशुभ दिशा में मानते थे, वहां कम निवेश करते थे। इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा और उन जिलों की जीडीपी औसतन 2.3% कम रही। रोजगार व निजी निवेश भी घटे। इससे चीन को हर साल कुल जीडीपी का 0.1% का घाटा हुआ। दस साल में यह नुकसान 15 लाख करोड़ रु. रहा।

दुनिया का ब्यूटी हब बन रहा दक्षिण कोरिया:लोगों के आइडिया से तैयार प्रोडक्ट महज तीन माह में जमीन पर उतार रहीं मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां

दुनिया का ब्यूटी हब बन रहा दक्षिण कोरिया:लोगों के आइडिया से तैयार प्रोडक्ट महज तीन माह में जमीन पर उतार रहीं मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां

जरा सोचिए, आपके पास किसी स्किनकेयर प्रोडक्ट का आइडिया हो और महज 3 महीने में वह लॉन्च हो जाए। न तो फैक्ट्री लगाने की जरूरत पड़ी और न ही रिसर्च लैब की। यही मॉडल दक्षिण कोरिया की ब्यूटी इंडस्ट्री (K-ब्यूटी) को ग्लोबल पावरहाउस बना रहा है। इसका कारोबारी ढांचा दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी टीएसएमसी जैसा है। जैसे टीएसएमसी दूसरों (जैसे एपल) के डिजाइन पर चिप बनाती है, वैसे ही ओडीएम (ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर) कंपनियां नए ब्रांड्स के आइडिया को प्रोडक्ट में बदल रही हैं। इस बिजनेस मॉडल के केंद्र में कोलमार कोरिया और कॉसमैक्स जैसी कंपनियां हैं, जो खुद का कोई कंज्यूमर ब्रांड नहीं बेचतीं। इनका काम रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित है। कोलमार ने 2024 में ऐसा सिस्टम बनाया, जिससे आइडिया को तैयार प्रोडक्ट में बदलने का समय 9-12 महीने से घटकर सिर्फ 3 महीने रह गया। इनके पास हमेशा 150 से अधिक सेमी-फिनिश्ड प्रोडक्ट्स का कैटलॉग रहता है, जिससे नए उद्यमियों के लिए शुरुआती लागत और रिस्क कम हो जाते हैं। अनोखे बिजनेस मॉडल की बदौलत दक्षिण कोरिया में बिना अपनी फैक्ट्री के कॉस्मेटिक्स बिजनेस करने वाली कंपनियों की संख्या 2025 में बढ़कर 28,412 हो गई। यह एक दशक पहले की तुलना में 4 गुना अधिक है। मैडेका क्रीम और मैन्यो जैसी हिट स्किनकेयर लाइन्स इसी मॉडल की देन हैं। उत्पादन की जिम्मेदारी बाहरी कंपनियों पर होने से नए ब्रांड्स पूरा फोकस सिर्फ मार्केटिंग, ब्रांडिंग और बिक्री पर कर पाते हैं। इस मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के दम पर दक्षिण कोरिया में कॉस्मेटिक्स उत्पादन 17.9 ट्रिलियन वॉन (1.19 लाख करोड़ रुपए) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 2025 में दक्षिण कोरिया का कॉस्मेटिक्स निर्यात 12% बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपए से ऊपर निकल गया। इससे दक्षिण कोरिया अमेरिका को पछाड़कर फ्रांस के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ब्यूटी प्रोडक्ट निर्यातक बन गया। हालांकि, ‘के-ब्यूटी’ की इस जबरदस्त सफलता पर अब ‘सी-ब्यूटी’ का खतरा मंडराने लगा है। चीन की कंपनियां दक्षिण कोरिया का ही कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल अपनाकर तेजी से नए ब्रांड्स लॉन्च कर रही हैं। जिस फॉर्मूले से कोरिया ग्लोबल लीडर बना, अब उसी फॉर्मूले की नकल करके चीन उसके सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश कर रहा है। सरकार की मदद से विस्तार की राह भी आसान सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, दक्षिण कोरिया के सीजे ओलिव यंग जैसे रिटेल नेटवर्क्स ने भी नए ब्रांड्स को वैश्विक प्लेटफॉर्म दिया। इसके 1,400 से अधिक स्टोर्स पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं, जबकि इसका ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 60 देशों में सर्विस दे रहा है। कोरियाई सरकार भी 2020 से कॉस्मेटिक्स को सेमीकंडक्टर और एंटरटेनमेंट की तरह प्रमुख एक्सपोर्ट सेक्टर मानकर सब्सिडी और लोन दे रही है। इससे इस सेक्टर के लिए विस्तार की राह असान हो गई है।

टाटा-ग्रुप के मुख्य ट्रस्ट SRTT से विजय सिंह का इस्तीफा:14 अगस्त को खत्म हो रहा कार्यकाल; सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में बने रहेंगे

टाटा-ग्रुप के मुख्य ट्रस्ट SRTT से विजय सिंह का इस्तीफा:14 अगस्त को खत्म हो रहा कार्यकाल; सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में बने रहेंगे

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस पर कंट्रोल रखने वाले दो मुख्य ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त हो रहा है और उन्होंने अगला कार्यकाल न लेने का फैसला किया है। हालांकि, वे टाटा ग्रुप के दूसरे मुख्य ट्रस्ट सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में ट्रस्टी के पद पर बने रहेंगे। टाटा ट्रस्ट्स- SRTT और SDTT के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। विजय सिंह का यह फैसला टाटा ट्रस्ट्स के भीतर जारी अंदरूनी मतभेदों और रेगुलेटरी कार्यवाही के बीच आया है। रेगुलेटरी पाबंदियों के कारण SRTT फिलहाल ट्रस्टियों की बैठक आयोजित नहीं कर पा रहा है। चैरिटी कमिश्नर की रोक से ₹400 करोड़ के दान और AGM पर संकट महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई में एक एकतरफा आदेश जारी कर SRTT को 16 मई की प्रस्तावित बैठक टालने का निर्देश दिया था। यह आदेश उन शिकायतों के बाद आया था जिनमें सवाल उठाया गया था कि क्या SRTT बोर्ड का गठन महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट के उस बदलाव के हिसाब से है, जो बोर्ड में स्थायी या लाइफ ट्रस्टियों की संख्या 25% तक सीमित करता है। SRTT ने इस रोक से राहत पाने के लिए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से गुहार लगाई है। ट्रस्ट ने चेतावनी दी है कि इस पाबंदी के जारी रहने से लगभग ₹400 करोड़ की फिलैंथरोपिक यानी परोपकारी ग्रांट्स प्रभावित हो सकती हैं। साथ ही 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में ट्रस्ट की भागीदारी में भी बाधा आ सकती है। टाटा संस AGM में चंद्रशेखरन के रि-अपॉइंटमेंट पर होना है फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की AGM में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को फिर से डायरेक्टर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर विचार होना है। चंद्रशेखरन का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन पद पर बने रहना इस बात पर निर्भर करता है कि वे कंपनी के बोर्ड में शामिल रहते हैं या नहीं। SRTT मई में लगे बैन के बाद से कोई बैठक नहीं कर पाया है। इससे यह अनिश्चितता बनी हुई है कि टाटा संस की AGM में वोट कैसे दिया जाएगा और प्रतिनिधि की नियुक्ति कैसे होगी। ट्रस्ट का कहना है कि इस रोक की वजह से टाटा संस से मिलने वाले डिविडेंड की मंजूरी भी अटक सकती है, जिससे इसके चैरिटेबल प्रोग्राम्स चलते हैं। महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट में संशोधन और SRTT का तर्क कानूनी विवाद का मुख्य बिंदु महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट का संशोधन है, जो 1 सितंबर 2025 से लागू हुआ है। यह संशोधन किसी पब्लिक ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफ ट्रस्टियों की संख्या को अधिकतम 25% तक सीमित करता है। SRTT का तर्क है कि यह नियम भविष्य से लागू होता है, इसलिए कानून लागू होने से पहले हुई स्थायी नियुक्तियों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। बाद में चैरिटी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि यह पाबंदी सिर्फ SRTT पर लागू है, अन्य टाटा ट्रस्टों पर नहीं। रतन टाटा के निधन के बाद सामने आए आंतरिक मतभेद रेगुलेटरी जांच और विवादों का यह दौर अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट्स के भीतर उपजे अंदरूनी मतभेदों के बीच देखने को मिल रहा है। अक्टूबर 2025 में जब ट्रस्टियों ने रतन टाटा के करीबी सहयोगी मेहली मिस्त्री का कार्यकाल आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, तब यह तनाव सार्वजनिक हो गया। इसके बाद मिस्त्री ने SRTT, SDTT और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन से इस्तीफा दे दिया था। मिस्त्री ने अपने हटाने के फैसले को चुनौती दी और गवर्नेंस व कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट से जुड़े आरोप लगाए, जिन्हें टाटा ट्रस्ट्स ने खारिज कर दिया। अन्य ट्रस्टों से भी जुड़े रहे हैं विवाद मेहली मिस्त्री ने ‘बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन’ में विजय सिंह और सह-वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन की पात्रता पर भी सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि ट्रस्ट की शर्तों के अनुसार ट्रस्टी का पारसी जोरोस्ट्रियन होना और मुंबई का स्थायी निवासी होना जरूरी है। इसके बाद श्रीनिवासन ने अप्रैल में अन्य कारोबारी व्यस्तताओं का हवाला देकर उस ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया, जबकि सिंह पद पर बने रहे। इसके अलावा, मई में विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन ‘टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट’ के ट्रस्टी भी नहीं रहे, क्योंकि उनके पुनर्गठन प्रस्ताव को ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक सर्वसम्मति नहीं मिल सकी। इस पूरे घटनाक्रम और इस्तीफे पर टिप्पणी के लिए टाटा ट्रस्ट्स और विजय सिंह को भेजे गए ईमेल का प्रकाशन तक कोई जवाब नहीं मिला। क्या है ‘महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट’ का 25% नियम? महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट में 1 सितंबर 2025 से लागू संशोधन के तहत किसी भी पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के गवर्निंग बोर्ड में ‘लाइफ’ या ‘परपेचुअल’ (आजीवन) ट्रस्टियों की संख्या कुल सदस्यों के 25% से अधिक नहीं हो सकती। इस नियम का मकसद ट्रस्टों में पारदर्शिता बढ़ाना और समय-समय पर नई लीडरशिप को मौका देना है। SRTT का तर्क है कि पुराने परपेचुअल अपॉइंटमेंट्स पर यह नया नियम लागू नहीं होता।

ईरान के डर से ट्रम्प ने सीक्रेट फ्लाइट ली थी:तुर्किये में एयरफोर्स वन में बैठने का दिखावा किया, फिर सामान वाली गाड़ी दूसरे प्लेन में पहुंचे

ईरान के डर से ट्रम्प ने सीक्रेट फ्लाइट ली थी:तुर्किये में एयरफोर्स वन में बैठने का दिखावा किया, फिर सामान वाली गाड़ी दूसरे प्लेन में पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन जाने के लिए सीक्रेट रूप से एक छोटे मिलिट्री विमान का इस्तेमाल किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से ट्रम्प की हत्या की विश्वसनीय धमकी मिलने के बाद उनकी यात्रा का पूरा प्लान बदला गया था। तुर्किये की राजधानी अंकारा से निकलते समय ट्रम्प कैमरों के सामने पुराने एयरफोर्स वन में सवार हुए। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली कैटरिंग गाड़ी से चुपचाप छोटे मिलिट्री विमान C-32A तक पहुंचाया गया। पहले बड़े विमान में बैठे, फिर चुपचाप बाहर निकले ट्रम्प 8 जुलाई को नाटो समिट में शामिल होने के लिए अंकारा में थे। वे तुर्किये नए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे, जो कतर के शाही परिवार ने अमेरिका को दिया है। वापसी के समय ट्रम्प पुराने, हल्के नीले रंग के एयरफोर्स वन की सीढ़ियां चढ़ते हुए कैमरों में दिखाई दिए। उस समय यही माना गया कि वे इसी विमान से ब्रिटेन जाएंगे। ट्रम्प ने खुद कहा था कि वे नए विमान की जगह पुराने एयरफोर्स वन से ब्रिटेन जाएंगे। उन्होंने इसे “पुराने समय की याद में” उड़ान बताई थी। नया विमान भी ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस जाना था, जहां अमेरिकी सैनिक उसे देख सकते थे। लेकिन पुराने विमान में बैठने के बाद ट्रम्प उसी से ब्रिटेन नहीं गए। सामान वाली गाड़ी से दूसरे विमान तक पहुंचाया वॉशिंगटन पोस्ट ने एक अमेरिकी अधिकारी और अपनी जांच में मिली अन्य सामग्री के हवाले से बताया कि ट्रम्प के पुराने एयरफोर्स वन में सवार होने के कुछ देर बाद एक कैटरिंग गाड़ी वहां से निकली। इस गाड़ी के जरिए ट्रम्प को एयरपोर्ट पर खड़े छोटे C-32A विमान तक पहुंचाया गया। यह बोइंग 757 का मिलिट्री वर्जन है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में सामने आए वीडियो में भी कैटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। इसके बाद C-32A ट्रम्प को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प विमान में नहीं हैं पुराने एयरफोर्स वन में यात्रा कर रहे पत्रकारों को लगा कि राष्ट्रपति उनके साथ ही विमान में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। इस विमान में मौजूद पत्रकारों को उड़ान के दौरान प्रेस केबिन की खिड़कियों के शेड बंद रखने को कहा गया। ऐसी सावधानी आमतौर पर युद्ध वाले इलाकों में उड़ान के दौरान बरती जाती है। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने जवाब दिया, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे।” ट्रम्प वाला विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर C-32A रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया, जिसमें पत्रकार सवार थे। यह साफ नहीं है कि ट्रम्प C-32A से उतरने के बाद पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। हालांकि, ट्रम्प के साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल के मुताबिक, वे रात 10:56 बजे पुराने एयरफोर्स वन की सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। उन्होंने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की और कतर से मिले नए विमान की तरफ चले गए। ईरान से खतरे के कारण बदला गया था पूरा प्लान वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रम्प को निशाना बनाए जाने की विश्वसनीय धमकी के बाद उनकी तुर्किये से वापसी को सीक्रेट रखा गया। अमेरिकी मीडिया में पहले भी रिपोर्ट आई थी कि ईरान से जुड़े खतरे के कारण ट्रम्प ने तुर्किये से कतर के नए विमान में वापस जाने के बजाय पुराने एयरफोर्स वन का इस्तेमाल किया। यानी जिस विमान में ट्रम्प को जाते हुए दिखाया गया, वह असल में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल हुआ था। ट्रम्प को दूसरे विमान से ब्रिटेन भेजा गया। ऐसा तरीका पहले भी इस्तेमाल हो चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए दूसरे विमान का इस्तेमाल करने का ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है। साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब क्लिंटन एक बिना पहचान वाले सरकारी विमान से पाकिस्तान पहुंचे थे, जबकि उनका आधिकारिक एयरफोर्स वन डिकॉय के तौर पर भेजा गया था। कतर का नया विमान भी सवालों में रहा ट्रम्प जिस नए बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, उसे कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3Harris Technologies ने इसे राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। इसके कुछ दिन बाद यह उन्हें लेकर पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचा। नए विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में मौजूद कुछ सुरक्षा सुविधाएं नए विमान में नहीं हैं या अलग तरह से काम करती हैं। इनमें मिसाइल हमले से बचाने वाली सुरक्षा भी शामिल है। व्हाइट हाउस ने कहा- राष्ट्रपति की सुरक्षा सबसे जरूरी सीक्रेट उड़ान की खबर सामने आने के बाद व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने नए विमान की सुरक्षा का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नए एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। चेउंग ने कहा, “अमेरिका के कई दुश्मन हैं जो राष्ट्रपति को निशाना बनाना चाहते हैं। इन खतरों से निपटने के लिए हम अपने पास मौजूद हर तरीके का इस्तेमाल करते हैं।” पेंटागन ने इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।