Tuesday, 22 Sep 2026 | 07:10 PM

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हर्षवर्धन राणे और संजीदा शेख ने कन्फर्म किया रिलेशनशिप!:पुणे रिसोर्ट में साथ समय बिताया, तस्वीरों के बैकग्राउंड से खुलासा; 2022 में लिया आमिर अली से तलाक

हर्षवर्धन राणे और संजीदा शेख ने कन्फर्म किया रिलेशनशिप!:पुणे रिसोर्ट में साथ समय बिताया, तस्वीरों के बैकग्राउंड से खुलासा; 2022 में लिया आमिर अली से तलाक

हीरामंडीः द डायमंड बाजार एक्ट्रेस संजीदा शेख ने पुणे वेकेशन की तस्वीरों से हर्शवर्धन राणे से रिलेशनशिप का हिंट दिया है। दरअसल, कुछ समय पहले ही संजीदा ने पुणे के एक आउटस्कर्ट रिसोर्ट की तस्वीरें पोस्ट की थीं। उनकी शेयर की गईं तस्वीरों का बैकग्राउंड वही था, जहां से हर्षवर्धन राणे ने भी तस्वीरें पोस्ट की थीं। देखिए संजीदा और हर्षवर्धन की तस्वीरें, जिससे उठे सवाल- हर्षवर्धन ने अपनी पोस्ट में कई और तस्वीरें भी पोस्ट कीं। ये तस्वीरें पुणे के विंड्स ओवर वॉटर के केबिन की हैं। दोनों ने ही एक ही लोकेशन की तस्वीरें शेयर कीं, लेकिन किसी भी तस्वीर में साथ नजर नहीं आए। तस्वीरों के बाद से ही दोनों की डेटिंग की खबरें तेज हो चुकी हैं। दोनों की पोस्ट में भी फैंस रिलेशनशिप पर सवाल कर रहे हैं। तैश में साथ काम कर चुके हैं हर्षवर्धन-संजीदा संजीदा शेख ने साल 2020 की फिल्म तैश में हर्षवर्धन राणे के साथ काम किया था। फिल्म रिलीज के बाद से ही दोनों की डेटिंग की खबरें सुर्खियों में रही हैं। इससे पहले भी दोनों जंगल सफारी के एक जैसे बैकग्राउंड वाली तस्वीरों से चर्चा में रह चुके हैं।

हर्षवर्धन राणे और संजीदा शेख ने कन्फर्म किया रिलेशनशिप!:पुणे रिसोर्ट में साथ समय बिताया, तस्वीरों के बैकग्राउंड से खुलासा; 2022 में लिया आमिर अली से तलाक

हर्षवर्धन राणे और संजीदा शेख ने कन्फर्म किया रिलेशनशिप!:पुणे रिसोर्ट में साथ समय बिताया, तस्वीरों के बैकग्राउंड से खुलासा; 2022 में लिया आमिर अली से तलाक

हीरामंडीः द डायमंड बाजार एक्ट्रेस संजीदा शेख ने पुणे वेकेशन की तस्वीरों से हर्शवर्धन राणे से रिलेशनशिप का हिंट दिया है। दरअसल, कुछ समय पहले ही संजीदा ने पुणे के एक आउटस्कर्ट रिसोर्ट की तस्वीरें पोस्ट की थीं। उनकी शेयर की गईं तस्वीरों का बैकग्राउंड वही था, जहां से हर्षवर्धन राणे ने भी तस्वीरें पोस्ट की थीं। देखिए संजीदा और हर्षवर्धन की तस्वीरें, जिनसे उठे सवाल- हर्षवर्धन ने अपनी पोस्ट में कई और तस्वीरें भी पोस्ट कीं। ये तस्वीरें पुणे के विंड्स ओवर वॉटर के केबिन की हैं। दोनों ने ही एक ही लोकेशन की तस्वीरें शेयर कीं, लेकिन किसी भी तस्वीर में साथ नजर नहीं आए। तस्वीरों के बाद से ही दोनों की डेटिंग की खबरें तेज हो चुकी हैं। दोनों की पोस्ट में भी फैंस रिलेशनशिप पर सवाल कर रहे हैं। तैश में साथ काम कर चुके हैं हर्षवर्धन-संजीदा संजीदा शेख ने साल 2020 की फिल्म तैश में हर्षवर्धन राणे के साथ काम किया था। फिल्म रिलीज के बाद से ही दोनों की डेटिंग की खबरें सुर्खियों में रही हैं। इससे पहले भी दोनों जंगल सफारी के एक जैसे बैकग्राउंड वाली तस्वीरों से चर्चा में रह चुके हैं।

अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे

अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे

अमेरिका चीन और रूस से बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी परमाणु नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। NBC न्यूज के मुताबिक, पेंटागन ऐसी रणनीति बना रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे एटम बम (टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार) भी इस्तेमाल का विकल्प होंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों या सीमित युद्ध में किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई नीति पर पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अभी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े परमाणु हमले का विकल्प है या फिर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति में बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन को रोका जा सके।। टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार क्या हैं? टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कम क्षमता वाले परमाणु हथियार होते हैं। इन्हें पूरे शहर को तबाह करने के बजाय युद्ध के मैदान में दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस, मिसाइल लॉन्च साइट, टैंक फॉर्मेशन या सैनिकों की तैनाती जैसे सीमित लक्ष्यों पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है। अमेरिका नीति क्यों बदल रहा है? अमेरिका को लगता है कि अगर भविष्य में चीन या रूस से जंग हुई, तो सिर्फ बड़े परमाणु हमले का विकल्प काफी नहीं होगा। इसलिए वह छोटे एटम बमों को भी अपनी सैन्य योजना में शामिल करना चाहता है। उसका मानना है कि इससे दुश्मन पर दबाव बनेगा और जरूरत पड़ने पर सीमित जवाब देना आसान होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर छोटे एटम बम इस्तेमाल का विकल्प बन गए, तो उन्हें चलाने की संभावना भी बढ़ जाएगी। इससे कोई भी सामान्य जंग देखते-देखते परमाणु जंग में बदल सकती है। रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रूस दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु जखीरा रखने वाला देश है। SIPRI और FAS के मुताबिक उसके पास 5,459 परमाणु हथियार हैं। अमेरिका 5,177 हथियारों के साथ दूसरे स्थान पर है। दोनों देशों के पास दुनिया के करीब 88% परमाणु हथियार हैं। वहीं, चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार हैं। संख्या में वह काफी पीछे है, लेकिन परमाणु हथियारों का जखीरा सबसे तेजी से वही बढ़ा रहा है। 1945 के बाद परमाणु हथियारों का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? द्वितीय विश्व युद्ध में अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। इसके बाद दुनिया ने परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता देखी। तभी से बड़ी परमाणु शक्तियों ने इन्हें युद्ध में चलाने के बजाय ‘न्यूक्लियर डिटरेंस’ (परमाणु प्रतिरोध) के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया। न्यूक्लियर डिटरेंस क्या है? इस रणनीति का मतलब है कि अगर कोई देश परमाणु हमला करेगा, तो जवाब में उसे भी उतना ही विनाशकारी परमाणु हमला झेलना पड़ेगा। यानी दोनों पक्षों को अस्वीकार्य नुकसान होगा। इसी डर ने अमेरिका, रूस समेत परमाणु शक्तियों को 1945 के बाद युद्ध में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से रोके रखा है।

अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे

अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे

अमेरिका चीन और रूस से बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी परमाणु नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। NBC न्यूज के मुताबिक, पेंटागन ऐसी रणनीति बना रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे एटम बम (टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार) भी इस्तेमाल का विकल्प होंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों या सीमित युद्ध में किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई नीति पर पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अभी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े परमाणु हमले का विकल्प है या फिर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति में बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन को रोका जा सके। अमेरिका नीति क्यों बदल रहा है? अमेरिका का मानना है कि अगर भविष्य में चीन या रूस से टकराव हुआ, तो राष्ट्रपति के पास सिर्फ बड़े परमाणु हमले का ही नहीं, छोटे एटम बम इस्तेमाल करने का भी विकल्प होना चाहिए। इससे दुश्मन पर दबाव बनाया जा सकेगा और अमेरिका के सहयोगी देशों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। इस पर चिंता क्यों जताई जा रही है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर छोटे एटम बम सैन्य योजना का हिस्सा बन गए, तो उनके इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ जाएगी। इससे कोई भी सामान्य युद्ध परमाणु युद्ध में बदल सकता है। छोटे एटम बम क्या होते हैं? इन्हें टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कहा जाता है। ये बड़े परमाणु बमों से कम ताकतवर होते हैं और इन्हें पूरे शहर नहीं, बल्कि दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस या युद्ध के मैदान में सीमित निशानों पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है। दुनिया में आखिरी बार 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए थे। तब से किसी देश ने इनका इस्तेमाल नहीं किया है।

ट्रम्प बोले- ईरान से जंग जल्द खत्म हो सकती है:हूती विद्रोहियों का यमन में मिसाइल और ड्रोन अटैक, 30 सैनिकों की मौत

ट्रम्प बोले- ईरान से जंग जल्द खत्म हो सकती है:हूती विद्रोहियों का यमन में मिसाइल और ड्रोन अटैक, 30 सैनिकों की मौत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ जारी जंग जल्द खत्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ संघर्ष अब ज्यादा लंबा चलेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है और जरूरत के मुताबिक नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं। उधर, यमन की सेना ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें 30 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर डेजी पर मिसाइल हमला करने का भी दावा किया है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज डील जल्द संभव: AP की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता जल्द हो सकता है। ईरान-ओमान के बीच मसौदा अंतिम चरण में है। 2. ट्रम्प बोले- ईरान खुद बातचीत चाहता है: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने खुद बातचीत की पहल की है और दोनों देशों के बीच वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, समझौता ईरान के लिए सबसे बेहतर विकल्प होगा। 3. होर्मुज और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की आवाजाही घटी: समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से बुधवार को सिर्फ 2 जहाज गुजरे, जबकि तनाव से पहले यहां रोज 130-140 जहाज गुजरते थे। बाब-अल-मंदेब में भी शिपिंग ट्रैफिक लगातार घट रहा है। 4. होर्मुज में टोल लगा तो दुनिया में महंगाई बढ़ेगी: दुनिया के आठ बड़े शिपिंग संगठनों ने UN और IMO से अपील की है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टोल या सर्विस शुल्क न लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे शिपिंग महंगी होगी और वैश्विक महंगाई बढ़ेगी। 5. लेबनान में 2 इजराइली सैनिकों की मौत: दक्षिणी लेबनान में एक इमारत में धमाके में दो इजराइली सैनिक मारे गए और चार घायल हुए। इसके बाद इजराइल ने कई इलाकों में हवाई हमले किए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के सख्त नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के सख्त नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

पर्सनल, कार या होम लोन न चुकाने वाले ग्राहकों के मोबाइल और लैपटॉप बैंक बंद या डिसेबल नहीं कर सकते। रिजर्व बैंक यानी RBI ने 6 अगस्त को यह साफ कर दिया है। बैंक सिर्फ उन्हीं मामलों में ऐसा कर सकते हैं, जहां वो डिवाइस खुद बैंक के लोन पर खरीदा गया हो। केंद्रीय बैंक का यह कदम ग्राहकों को मिलने वाली धमकियों, प्राइवेसी के उल्लंघन और रिकवरी के नाम पर होने वाली प्रताड़ना को रोकने के लिए उठाया गया है। सवाल-जवाब में समझिए ये नए नियम क्या हैं… सवाल 1: RBI ने लोन रिकवरी को लेकर क्या नया आदेश दिया है? जवाब: रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की वसूली के लिए कर्जदार के मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट को सॉफ्टवेयर की मदद से लॉक या डिसेबल नहीं कर सकता। सवाल 2: क्या बैंक किसी भी स्थिति में फोन या लैपटॉप लॉक नहीं कर सकते? जवाब: बैंक केवल एक ही शर्त पर डिवाइस को डिसेबल कर सकते हैं, अगर वह मोबाइल या लैपटॉप खुद उसी बैंक या कंपनी के लोन पर खरीदा गया हो। अगर लोन या फाइनेंस किसी अन्य चीज के लिए लिया गया है, तो डिवाइस लॉक करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सवाल 3: जिन मामलों में डिवाइस फाइनेंस हुआ है, क्या वहां बैंक तुरंत फोन बंद कर सकते हैं? जवाब: नहीं, RBI ने कहा है कि अगर डिवाइस लोन पर खरीदा भी गया है, तो बैंक सीधे या शुरुआत से ही फोन लॉक नहीं कर सकते। बैंकों को चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। सवाल 4: अगर लोन पर खरीदा फोन लॉक होता भी है, तो कौन-कौन से फीचर्स चालू रहेंगे? जवाब: RBI के मुताबिक, फोन की जरूरी सेवाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसमें इनकमिंग कॉल्स, SMS और इमरजेंसी SOS फीचर्स शामिल हैं। लोन बकाया होने की स्थिति में भी ये सेवाएं चालू रखनी होंगी। सवाल 5: डिवाइस लॉकिंग टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए क्या नियम हैं? जवाब: RBI ने साफ किया है कि बैंक या थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर बिना जांचे-परखे या थर्ड-पार्टी अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें उस डिवाइस के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) प्लेटफॉर्म से बाकायदा सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। सवाल 6: RBI को ये सख्त नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: लंबे समय से ग्राहकों की शिकायतें आ रही थीं कि रिकवरी एजेंसियां और बैंक उन्हें परेशान कर रहे हैं। रिकवरी एजेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो डालकर बदनाम करने और अभद्र भाषा (गैली-गलौज) का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हीं शिकायतों के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया। सवाल 7: रिकवरी एजेंटों को कर्जदार की जानकारी देने पर क्या निर्देश दिए गए हैं? जवाब: RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ कर्जदार या गारंटर की निजी जानकारी बहुत सीमित दायरे में ही शेयर करें। केवल उतनी ही जानकारी दी जाए, जितनी लोन रिकवरी की जिम्मेदारी निभाने के लिए बेहद जरूरी हो। सवाल 8: ये नए नियम कब से लागू होंगे और इसकी प्रक्रिया कब शुरू हुई थी? जवाब: RBI के सर्कुलर के अनुसार, ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। बता दें कि इससे पहले केंद्रीय बैंक ने मई में ‘कंडक्ट ऑफ रेगुलेटेड एंटिटीज इन रिकवरी ऑफ लोन्स’ का एक ड्राफ्ट पेश किया था, जिस पर मिले फीडबैक के बाद अब फाइनल गाइडलाइंस जारी की गई हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या हैं आपके अधिकार

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

पर्सनल, कार या होम लोन न चुकाने वाले ग्राहकों के मोबाइल और लैपटॉप बैंक बंद या डिसेबल नहीं कर सकते। रिजर्व बैंक यानी RBI ने 6 अगस्त को यह साफ कर दिया है। बैंक सिर्फ उन्हीं मामलों में ऐसा कर सकते हैं, जहां वो डिवाइस खुद बैंक के लोन पर खरीदा गया हो। केंद्रीय बैंक का यह कदम ग्राहकों को मिलने वाली धमकियों, प्राइवेसी के उल्लंघन और रिकवरी के नाम पर होने वाली प्रताड़ना को रोकने के लिए उठाया गया है। सवाल-जवाब में समझिए ये नए नियम क्या हैं… सवाल 1: RBI ने लोन रिकवरी को लेकर क्या नया आदेश दिया है? जवाब: रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की वसूली के लिए कर्जदार के मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट को सॉफ्टवेयर की मदद से लॉक या डिसेबल नहीं कर सकता। सवाल 2: क्या बैंक किसी भी स्थिति में फोन या लैपटॉप लॉक नहीं कर सकते? जवाब: बैंक केवल एक ही शर्त पर डिवाइस को डिसेबल कर सकते हैं, अगर वह मोबाइल या लैपटॉप खुद उसी बैंक या कंपनी के लोन पर खरीदा गया हो। अगर लोन या फाइनेंस किसी अन्य चीज के लिए लिया गया है, तो डिवाइस लॉक करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सवाल 3: जिन मामलों में डिवाइस फाइनेंस हुआ है, क्या वहां बैंक तुरंत फोन बंद कर सकते हैं? जवाब: नहीं, RBI ने कहा है कि अगर डिवाइस लोन पर खरीदा भी गया है, तो बैंक सीधे या शुरुआत से ही फोन लॉक नहीं कर सकते। बैंकों को चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। सवाल 4: अगर लोन पर खरीदा फोन लॉक होता भी है, तो कौन-कौन से फीचर्स चालू रहेंगे? जवाब: RBI के मुताबिक, फोन की जरूरी सेवाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसमें इनकमिंग कॉल्स, SMS और इमरजेंसी SOS फीचर्स शामिल हैं। लोन बकाया होने की स्थिति में भी ये सेवाएं चालू रखनी होंगी। सवाल 5: डिवाइस लॉकिंग टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए क्या नियम हैं? जवाब: RBI ने साफ किया है कि बैंक या थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर बिना जांचे-परखे या थर्ड-पार्टी अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें उस डिवाइस के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) प्लेटफॉर्म से बाकायदा सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। सवाल 6: RBI को ये सख्त नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: लंबे समय से ग्राहकों की शिकायतें आ रही थीं कि रिकवरी एजेंसियां और बैंक उन्हें परेशान कर रहे हैं। रिकवरी एजेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो डालकर बदनाम करने और अभद्र भाषा (गैली-गलौज) का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हीं शिकायतों के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया। सवाल 7: रिकवरी एजेंटों को कर्जदार की जानकारी देने पर क्या निर्देश दिए गए हैं? जवाब: RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ कर्जदार या गारंटर की निजी जानकारी बहुत सीमित दायरे में ही शेयर करें। केवल उतनी ही जानकारी दी जाए, जितनी लोन रिकवरी की जिम्मेदारी निभाने के लिए बेहद जरूरी हो। सवाल 8: ये नए नियम कब से लागू होंगे और इसकी प्रक्रिया कब शुरू हुई थी? जवाब: RBI के सर्कुलर के अनुसार, ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। बता दें कि इससे पहले केंद्रीय बैंक ने मई में ‘कंडक्ट ऑफ रेगुलेटेड एंटिटीज इन रिकवरी ऑफ लोन्स’ का एक ड्राफ्ट पेश किया था, जिस पर मिले फीडबैक के बाद अब फाइनल गाइडलाइंस जारी की गई हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या हैं आपके अधिकार

ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम:65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा

ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम:65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा

अमेरिका में ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर दिख रहा है। 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। वहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा स्टूडेंट वीजा मिले हैं। सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, सख्ती का असर अमेरिका में रहने वाले अप्रवासियों की संख्या पर भी दिखा है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ थी, जो जून तक घटकर 5.19 करोड़ रह गई। 1960 के दशक के बाद यह पहली बार है, जब अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या कम हुई है। भारतीय स्टूडेंट्स को मिलने वाले अमेरिकी वीजा 62% घटे सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को सिर्फ 22,149 F-1 स्टूडेंट वीजा मिले। पिछले साल इसी समय में यह संख्या 58,694 थी। यानी एक साल में भारतीय छात्रों के वीजा 62% घट गए। चीनी छात्रों के वीजा में भी कमी आई। 2025 में मई से अगस्त के बीच चीन के 40,034 छात्रों को F-1 वीजा मिला, जबकि 2024 में इसी समय में यह संख्या 61,075 थी। जहां भारत और चीन के छात्रों को कम F-1 वीजा मिले, वहीं कई दूसरे एशियाई देशों के छात्रों की संख्या बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में वियतनाम के छात्रों को 5,324 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल से 19.6% ज्यादा हैं। इसी दौरान बांग्लादेश के छात्रों को 2,098 F-1 वीजा मिले, यानी 20.1% की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान के छात्रों को 1,928 वीजा मिले, जो 44.3% ज्यादा हैं। ट्रम्प सरकार ने वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग की वीजा में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह ट्रम्प सरकार के नए नियम रहे। जैसे- अमेरिका की जगह यूरोप का रुख कर रहे हैं भारतीय छात्र कई भारतीय छात्र अब यूरोप का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, इटली और नीदरलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों की नई पसंद बन रहे हैं। इसकी वजह कम फीस, आसान वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई के बाद नौकरी के बेहतर मौके हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज की फीस अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से 50% से 80% तक कम होती है। 2015 से 2023 के बीच यूरोप जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 45% बढ़ी, जबकि जर्मनी, फ्रांस, इटली और आयरलैंड में भारतीय छात्रों का दाखिला 68% बढ़ा। वहीं, कुछ भारतीय प्रोफेशनल भी वीजा नियमों और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत लौटने या दूसरे देशों का रुख करने लगे हैं। H-1B वीजा में अब भी भारत सबसे आगे स्टूडेंट वीजा में गिरावट के बावजूद नौकरी के लिए मिलने वाले H-1B वर्क वीजा में भारत की पकड़ अब भी सबसे मजबूत है। 2024 में जारी H-1B वीजा में 71% भारतीयों को मिले। चीन दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया की हिस्सेदारी करीब 1-1% रही। यानी, स्टूडेंट वीजा घटे हैं, लेकिन नौकरी के लिए भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग अब भी सबसे ज्यादा है। अमेरिका अब भी सबसे बड़ा प्रवासी देश सख्त नियमों और वीजा में गिरावट के बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी देश बना हुआ है। बेहतर शिक्षा, नौकरी और कमाई के मौके आज भी लाखों लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करते हैं। 2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1.1 करोड़ प्रवासी मेक्सिको से हैं। इसके बाद भारत (32 लाख), चीन (30 लाख), फिलीपींस (21 लाख) और क्यूबा (17 लाख) का स्थान है। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कुल प्रवासियों में 52% लैटिन अमेरिका और 27% एशिया से हैं। यानी, अमेरिका की प्रवासी आबादी में एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलाव का असर भारत, चीन और दूसरे एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। अमेरिका में विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या घटी अमेरिका आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या भी घटी है। 2025 में करीब 6.83 करोड़ विदेशी टूरिस्ट अमेरिका पहुंचे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7.23 करोड़ था। टूरिस्टों के खर्च में भी 8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई। सबसे ज्यादा गिरावट कनाडा से आने वाले टूरिस्टों में रही। भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और चीन से आने वाले टूरिस्टों की संख्या भी कम हुई, जबकि मेक्सिको से आने वाले टूरिस्ट बढ़े। यानी, ट्रम्प सरकार की सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा ही नहीं, बल्कि इमिग्रेशन और विदेशी टूरिज्म पर भी साफ दिख रहा है।

ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम:65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा

ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम:65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा

अमेरिका में ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर दिख रहा है। 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। वहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा स्टूडेंट वीजा मिले हैं। सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, सख्ती का असर अमेरिका में रहने वाले अप्रवासियों की संख्या पर भी दिखा है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ थी, जो जून तक घटकर 5.19 करोड़ रह गई। 1960 के दशक के बाद यह पहली बार है, जब अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या कम हुई है। भारतीय स्टूडेंट्स को मिलने वाले अमेरिकी वीजा 62% घटे सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को सिर्फ 22,149 F-1 स्टूडेंट वीजा मिले। पिछले साल इसी समय में यह संख्या 58,694 थी। यानी एक साल में भारतीय छात्रों के वीजा 62% घट गए। चीनी छात्रों के वीजा में भी कमी आई। 2025 में मई से अगस्त के बीच चीन के 40,034 छात्रों को F-1 वीजा मिला, जबकि 2024 में इसी समय में यह संख्या 61,075 थी। जहां भारत और चीन के छात्रों को कम F-1 वीजा मिले, वहीं कई दूसरे एशियाई देशों के छात्रों की संख्या बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में वियतनाम के छात्रों को 5,324 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल से 19.6% ज्यादा हैं। इसी दौरान बांग्लादेश के छात्रों को 2,098 F-1 वीजा मिले, यानी 20.1% की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान के छात्रों को 1,928 वीजा मिले, जो 44.3% ज्यादा हैं। ट्रम्प सरकार ने वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग की वीजा में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह ट्रम्प सरकार के नए नियम रहे। जैसे- अमेरिका की जगह यूरोप का रुख कर रहे हैं भारतीय छात्र कई भारतीय छात्र अब यूरोप का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, इटली और नीदरलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों की नई पसंद बन रहे हैं। इसकी वजह कम फीस, आसान वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई के बाद नौकरी के बेहतर मौके हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज की फीस अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से 50% से 80% तक कम होती है। 2015 से 2023 के बीच यूरोप जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 45% बढ़ी, जबकि जर्मनी, फ्रांस, इटली और आयरलैंड में भारतीय छात्रों का दाखिला 68% बढ़ा। वहीं, कुछ भारतीय प्रोफेशनल भी वीजा नियमों और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत लौटने या दूसरे देशों का रुख करने लगे हैं। H-1B वीजा में अब भी भारत सबसे आगे स्टूडेंट वीजा में गिरावट के बावजूद नौकरी के लिए मिलने वाले H-1B वर्क वीजा में भारत की पकड़ अब भी सबसे मजबूत है। 2024 में जारी H-1B वीजा में 71% भारतीयों को मिले। चीन दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया की हिस्सेदारी करीब 1-1% रही। यानी, स्टूडेंट वीजा घटे हैं, लेकिन नौकरी के लिए भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग अब भी सबसे ज्यादा है। अमेरिका अब भी सबसे बड़ा प्रवासी देश सख्त नियमों और वीजा में गिरावट के बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी देश बना हुआ है। बेहतर शिक्षा, नौकरी और कमाई के मौके आज भी लाखों लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करते हैं। 2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1.1 करोड़ प्रवासी मेक्सिको से हैं। इसके बाद भारत (32 लाख), चीन (30 लाख), फिलीपींस (21 लाख) और क्यूबा (17 लाख) का स्थान है। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कुल प्रवासियों में 52% लैटिन अमेरिका और 27% एशिया से हैं। यानी, अमेरिका की प्रवासी आबादी में एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलाव का असर भारत, चीन और दूसरे एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। अमेरिका में विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या घटी अमेरिका आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या भी घटी है। 2025 में करीब 6.83 करोड़ विदेशी टूरिस्ट अमेरिका पहुंचे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7.23 करोड़ था। टूरिस्टों के खर्च में भी 8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई। सबसे ज्यादा गिरावट कनाडा से आने वाले टूरिस्टों में रही। भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और चीन से आने वाले टूरिस्टों की संख्या भी कम हुई, जबकि मेक्सिको से आने वाले टूरिस्ट बढ़े। यानी, ट्रम्प सरकार की सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा ही नहीं, बल्कि इमिग्रेशन और विदेशी टूरिज्म पर भी साफ दिख रहा है।

लाफ्टर चैलेंज से रिजेक्ट हो गए थे कपिल शर्मा:चंदन प्रभाकर बोले- मेकर्स को हाथ जोड़ एंट्री दिलाई, उन्होंने मुझे ही शो से निकाल दिया

लाफ्टर चैलेंज से रिजेक्ट हो गए थे कपिल शर्मा:चंदन प्रभाकर बोले- मेकर्स को हाथ जोड़ एंट्री दिलाई, उन्होंने मुझे ही शो से निकाल दिया

अमृतसर के रहने कपिल शर्मा को कॉमेडी की दुनिया में पहचान दिलाने में उनके बचपन के दोस्त चंदन प्रभाकर की बड़ी भूमिका रही। चंदन ने अपना करियर दांव पर लगाकर कपिल की ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ में एंट्री करवाई थी। हाल ही में एक इंटरव्यू में चंदन ने बताया कि वह और कपिल मुंबई में शो के ऑडिशन के लिए गए थे। वहां कपिल रिजेक्ट हो गए, जबकि उनका सिलेक्शन हो गया था। इसके बाद कपिल ने दिल्ली में भी ऑडिशन दिया, लेकिन वहां भी उन्हें रिजेक्शन मिला। चंदन ने कपिल को शो में शामिल करने के लिए मेकर्स से काफी आग्रह किया। मेकर्स ने शर्त रखी कि कपिल को जगह देने के लिए किसी एक कंटेस्टेंट को शो छोड़ना होगा। चंदन ने बिना देर किए शो छोड़ दिया और कपिल की एंट्री करवा दी। यहीं से कपिल के करियर को बड़ी उड़ान मिली। हालांकि, कुछ महीने बाद मेकर्स ने चंदन को दोबारा शो में बुला लिया। चंदन प्रभाकर को ‘द कपिल शर्मा शो’ में चंदू चायवाला के किरदार से भी खूब पहचान मिली। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कपिल शर्मा के साथ अपनी दोस्ती और करियर से जुड़े कई किस्से साझा किए। जानिए कैसे दोस्त बने कपिल और चंदन… चंदन प्रभाकर ने ये बड़ी बातें कही… 2013 में ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ शुरू चंदन ने इससे पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 2013 में जब कपिल शर्मा ने अपना खुद का शो ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ शुरू किया, तो उन्होंने अपने सबसे पुराने साथी यानी उन्हें अपने साथ जोड़ा। चंदन को इस शो में ‘चंदू चायवाला’ का आइकॉनिक रोल दिया गया। चंदन के लिए यह किरदार निभाना बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि शो में हर वक्त उनका चेहरा, कपड़े और गरीबी का मजाक उड़ाया जाता था। कपिल अक्सर शो में ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन मजाकिया अंदाज में कहा करते थे, “अगर मैं इसे अमृतसर से पकड़कर मुंबई नहीं लाता, तो यह आज भी वहीं भटक रहा होता। हालांकि चंदन इस बात को दोस्त का प्यार और शो की स्क्रिप्ट का हिस्सा मानकर मुस्कुराते हुए सह लेते थे। ऑस्ट्रेलिया टूर, एयर इंडिया फ्लाइट विवाद चंदन बताते हैं कि मार्च 2017 में कपिल शर्मा और चंदन प्रभाकर के बरसों पुराने रिश्ते में उस वक्त भारी दरार आ गई, जब एक अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान बड़ा विवाद हो गया। ऑस्ट्रेलिया के शो के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हो गई। चंदन ने साफ शब्दों में कपिल से कहा कि तू मुझसे इस तरह बात नहीं कर सकता। चंदन ने वहां आगे काम करने से इनकार कर दिया। वापस भारत लौटते समय एयर इंडिया की फ्लाइट में कपिल शर्मा, सुनील ग्रोवर और चंदन के बीच विवाद और बढ़ गया। मुंबई पहुंचते ही चंदन प्रभाकर, सुनील ग्रोवर व कुछ अन्य सदस्यों ने कपिल के शो ‘द कपिल शर्मा शो’ से अपना नाता तोड़ लिया। बेटी का जन्म, कपिल का पछतावा विवाद के ठीक बाद चंदन की जिंदगी में एक नया मोड़ आया और 31 मार्च में चंदन प्रभाकर के घर एक नन्हीं बेटी ने जन्म लिया। चंदन प्रभाकर ने बताया कि बेटी होने के बाद कपिल शर्मा उनके घर आए और बेटी को शगुन दिया। उसके बाद कपिल शर्मा भावुक हो गए और उन्होंने अपनी पुरानी दोस्ती का वास्ता देकर उन्हें शाे में वापस बुला दिया। उन्होंने बताया कि जून 2017 में वो वापस ‘द कपिल शर्मा शो’ में लौट आए। साल 2018 में जब कपिल शर्मा डिप्रेशन, हेल्थ इश्यूज और मीडिया विवादों के कारण अपने जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे, तब चंदन प्रभाकर किसी ढाल की तरह उनके साथ खड़े रहे। हालांकि जब कपिल शर्मा का शो नेट फिलिक्स पर आया तो चंदन प्रभाकर ने उनका शो फिर से छोड़ दिया। *********** ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़ में ₹3 करोड़ इन्वेस्ट, फिर बंद हुआ शोरूम: ‘बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी’ का पूरा केस, जिसमें कोर्ट ने सलमान खान को तलब किया चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री और स्टाइल एंड क्यूंटेंट ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य को समन जारी किया है। कोर्ट ने इन सभी को 5 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। कोर्ट में याचिका दायर करने वाले कारोबारी का दावा है कि सलमान खान उसे बिग बॉस के सेट पर मिले थे।(पढ़ें पूरी खबर)