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benefits of soaking rice I गर्मीयों में चावल खाने का सही तरीका

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Last Updated:April 27, 2026, 15:02 IST गर्मियों में चावल खाने को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीके से तैयार किया गया चावल सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. चावल को पकाने से पहले करीब 30 मिनट तक भिगोने से इसमें मौजूद एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं और यह पाचन में आसान हो जाता है. साथ ही, चावल शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है. हालांकि, बेहतर पाचन और सुस्ती से बचने के लिए इसे दाल, सब्जियों या सलाद जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित मात्रा में खाना जरूरी है. चंदौली. गर्मियों के मौसम में चावल खाने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं. जैसे क्या चावल रोज खाना ठीक है, इसे कैसे पकाया जाए और क्या यह पाचन के लिए अच्छा होता है? इन्हीं सवालों पर डॉक्टर रिद्धी पांडे ने लोकल18 से बातचीत में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. डॉ. पांडे ने बताया कि चावल को सही तरीके से पकाया जाए, तो यह न सिर्फ आसानी से पचता है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा भी देता है. चावल को पकाने से पहले कम से कम 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखना बेहद फायदेमंद होता है, ऐसा करने से चावल में मौजूद कुछ एंटी-न्यूट्रिएंट्स जैसे फाइटिक एसिड कम हो जाते हैं, जो पाचन में बाधा डाल सकते हैं. भिगोने की प्रक्रिया से डाइजेस्टिव एंजाइम भी सक्रिय हो जाते हैं, जिससे चावल शरीर में जल्दी और आसानी से पचता है. बेहतर हो जाता है टेक्सचर उन्होंने बताया कि भिगोए हुए चावल पकाने पर उनका टेक्सचर भी बेहतर हो जाता है और उनमें मौजूद हानिकारक तत्व काफी हद तक निकल जाते हैं. इससे न सिर्फ पाचन सुधरता है, बल्कि पेट से जुड़ी समस्याओं की संभावना भी कम हो जाती है, जो लोग चावल खाने के बाद भारीपन या गैस की समस्या महसूस करते हैं, उनके लिए यह तरीका खासतौर पर लाभकारी हो सकता है. चावल खाने से आती है नींद रिद्धी पांडे ने बताया कि जहां तक चावल और रोटी की तुलना का सवाल है, तो आमतौर पर चावल को रोटी के मुकाबले हल्का और जल्दी पचने वाला माना जाता है. यही वजह है कि बीमार या कमजोर पाचन वाले लोगों को अक्सर चावल खाने की सलाह दी जाती है. हालांकि, चावल खाने के बाद खासकर गर्मियों में नींद आने की समस्या भी कई लोगों को होती है, इसका कारण चावल का हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स हो सकता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर गिरता है, जिससे सुस्ती महसूस होती है. ऊर्जावान बनाने में करता है मददवहीं, उन्होंने बताया कि इससे बचने के लिए चावल के साथ फाइबर युक्त चीजें जैसे दाल, सब्जियां या सलाद शामिल करना चाहिए. साथ ही, ज्यादा मात्रा में चावल खाने से बचना और संतुलित आहार लेना जरूरी है. अगर सही तरीके से चावल को भिगोकर और संतुलित मात्रा में खाया जाए, तो यह न केवल पाचन के लिए अच्छा है, बल्कि शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में भी मदद करता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chandauli,Uttar Pradesh First Published : April 27, 2026, 15:02 IST

Health Tips: डाइट में शामिल करें इस छोटे से बीज के दो चम्मच, मोटापा और खराब कोलेस्ट्रॉल होगा कंट्रोल

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अलसी के बीज स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. यह वजन घटाने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, डायबिटीज नियंत्रित करने और हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं. सही लाभ पाने के लिए इन्हें हल्का भूनकर पाउडर बनाकर सीमित मात्रा में रोजाना सेवन करना जरूरी है.

Summer Tips: गर्मियों में रामबाण है आंवला मुरब्बा! कब्ज-एसिडिटी से दिलाए राहत, ऐसे करें सेवन

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Last Updated:April 21, 2026, 13:01 IST गर्मियों की तपती धूप में शरीर को ठंडक और सेहत दोनों चाहिए और इसका देसी जवाब है आंवला का मुरब्बा. खट्टा-मीठा स्वाद वाला यह पारंपरिक फूड सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों से बचाव का भी आसान उपाय है. तराई क्षेत्रों में मिलने वाला आंवला, जब मुरब्बे के रूप में इस्तेमाल होता है, तो यह इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर पेट की समस्याओं तक में राहत देने वाला प्राकृतिक टॉनिक बन जाता है. लखीमपुर खीरी. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोग अपने खान-पान को लेकर ज्यादा सजग हो जाते हैं. इस समय ऐसी चीजों की तलाश रहती है जो शरीर को ठंडक पहुंचाए और साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. यही कारण है कि पारंपरिक देसी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिनमें मुरब्बा एक खास स्थान रखता है. गर्मियों के मौसम में मुरब्बा की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि मुरब्बा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद पाया जाता है. खीरी जिले के तराई इलाके में आंवला के पौधे अधिक पाए जाते हैं, ऐसे में सर्दियों के मौसम में आंवला आपको बाजारों में मिल जाएगा. वहीं गर्मियों के मौसम में आंवला का मुरब्बा किसी देसी औषधि से कम नहीं है. आंवला में विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट से भरपूर होता है ऐसे में पाचन से लेकर कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google लोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सुबह खाली पेट मुरब्बा का सेवन करने से कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से आपको राहत मिल जाएगी. पेट साफ ना हो पाने के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं, ऐसे में मुरब्बा का सेवन करने से पेट की गर्मी शांत होती है. आंवला का मुरब्बा इम्यूनिटी बूस्टर होता है, जोकि हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. बदलते मौसम के कारण खांसी, जुकाम जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है, सुबह खाली पेट मुरब्बा खाने से त्वचा में निखार आता हैं. आप आसानी से घर पर मुरब्बा बना सकते हैं इसके लिए सबसे पहले आपको आंवला लेना होगा, उसके बाद आंवला को साफ़ पानी से धो लें. फिर आंवला में छेद कर गर्म पानी में उबाल लें. फिर 1 किलो चीनी की चाशनी तैयार कर ले, चाशनी की सफाई के लिए 1 चम्मच दूध डालें और ऊपर आने वाले जांघ को हटा दें. चिपचिपा होने तक उबालें, इसमें आप इलायची पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. फिर उसके बाद उबले हुए आंवला को चाशनी में डूबा दे. 4 से 5 दिन के लिए आप मुरब्बा को एक सुरक्षित स्थान पर रख दें, इसके बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं. First Published : April 21, 2026, 13:01 IST

आंवला मुरब्बा के फायदे I lakhimpur kheri news

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Last Updated:April 13, 2026, 15:43 IST गर्मियों की शुरुआत के साथ आंवला मुरब्बा की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन सुधारने में मदद करता है. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आंवला मुरब्बा सुबह खाली पेट खाने से कब्ज, एसिडिटी और पेट की गर्मी से राहत मिलती है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ खांसी-जुकाम में भी फायदेमंद माना जाता है और त्वचा में निखार लाने में सहायक है. लखीमपुर खीरी. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोग अपने खान-पान को लेकर ज्यादा सजग हो जाते हैं. इस समय ऐसी चीजों की तलाश रहती है जो शरीर को ठंडक पहुंचाए और साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. यही कारण है कि पारंपरिक देसी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिनमें मुरब्बा एक खास स्थान रखता है. गर्मियों के मौसम में मुरब्बा की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि मुरब्बा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद पाया जाता है. खीरी जिले के तराई इलाके में आंवला के पौधे अधिक पाए जाते हैं, ऐसे में सर्दियों के मौसम में आंवला आपको बाजारों में मिल जाएगा. वहीं गर्मियों के मौसम में आंवला का मुरब्बा किसी देसी औषधि से कम नहीं है. आंवला में विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट से भरपूर होता है ऐसे में पाचन से लेकर कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सुबह खाली पेट मुरब्बा का सेवन करने से कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से आपको राहत मिल जाएगी. पेट साफ ना हो पाने के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं, ऐसे में मुरब्बा का सेवन करने से पेट की गर्मी शांत होती है. आंवला का मुरब्बा इम्यूनिटी बूस्टर होता है, जोकि हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. बदलते मौसम के कारण खांसी, जुकाम जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है, सुबह खाली पेट मुरब्बा खाने से त्वचा में निखार आता हैं. मुरब्बा बनाने की रेसिपीआप आसानी से घर पर मुरब्बा बना सकते हैं इसके लिए सबसे पहले आपको आंवला लेना होगा, उसके बाद आंवला को साफ़ पानी से धो लें. फिर आंवला में छेद कर गर्म पानी में उबाल लें. फिर 1 किलो चीनी की चाशनी तैयार कर ले, चाशनी की सफाई के लिए 1 चम्मच दूध डालें और ऊपर आने वाले जांघ को हटा दें. चिपचिपा होने तक उबालें, इसमें आप इलायची पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. फिर उसके बाद उबले हुए आंवला को चाशनी में डूबा दे. 4 से 5 दिन के लिए आप मुरब्बा को एक सुरक्षित स्थान पर रख दें, इसके बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh First Published : April 13, 2026, 15:43 IST

summer pregnancy care tips I कन्नौज समाचार

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Last Updated:April 09, 2026, 19:15 IST गर्मियों में गर्भवती महिलाओं के लिए डिहाइड्रेशन गंभीर खतरा बन सकता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी से चक्कर, कमजोरी और प्री-मैच्योर डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि नियमित रूप से पानी, नारियल पानी, छाछ और पानी से भरपूर फलों का सेवन मां और शिशु दोनों की सेहत के लिए जरूरी है. कन्नौज. गर्मियों का मौसम गर्भवती महिलाओं के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है, जिनमें सबसे आम समस्या है शरीर में पानी की कमी, यानी डिहाइड्रेशन. तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान शरीर से पानी तेजी से कम कर देता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है, क्योंकि इसका सीधा असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर पड़ सकता है. गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से अधिक पानी की जरूरत होती है. पर्याप्त पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, पोषक तत्वों का सही संचार होता है और शिशु के विकास में भी मदद मिलती है. अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो चक्कर आना, थकान, सिरदर्द और यहां तक कि प्री-मैच्योर डिलीवरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. इन चीजों का करें नियमित सेवनगर्मी के मौसम में सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि कुछ प्राकृतिक पेय और फल भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ जरूरी मिनरल्स भी प्रदान करते हैं. इसके अलावा तरबूज, खीरा और मौसमी जैसे फल शरीर में पानी की कमी को दूर करने में बेहद मददगार साबित होते हैं. ये चीजें शरीर को तरोताजा बनाए रखने के साथ ऊर्जा भी देती हैं. दिनभर पानी पीने की बनाएं आदतडॉ. शक्ति बसु बताते हैं गर्भवती महिलाओं को दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीते रहना चाहिए. एक साथ ज्यादा पानी पीने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी लेना ज्यादा फायदेमंद होता है. हमेशा अपने साथ पानी की बोतल रखें और बाहर जाते समय भी पानी पीना न भूलें. यह आदत शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में काफी मदद करती है. क्या बोले डॉक्टर जिला अस्पताल सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु बताते हैं कि डिहाइड्रेशन के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे मुंह सूखना, पेशाब का गहरा रंग, कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना, अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पानी या तरल पदार्थ का सेवन बढ़ा दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें. हर गर्भवती महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी डाइट या हाइड्रेशन प्लान को अपनाने से पहले अपने नज़दीकी डॉक्टर की सलाह जरूर लें. सही मार्गदर्शन और संतुलित खानपान के जरिए गर्मियों में भी खुद को और अपने बच्चे को स्वस्थ रखा जा सकता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kannauj,Uttar Pradesh First Published : April 09, 2026, 19:15 IST

एसिडिटी से राहत का देसी उपाय I Sultanpur news

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Last Updated:April 07, 2026, 10:47 IST गलत खान-पान और तनाव की वजह से बढ़ रही एसिडिटी अब आम समस्या बन चुकी है. आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत कर पित्त दोष को शांत करने में मदद करता है और बार-बार होने वाली जलन से राहत दे सकता है. सुल्तानपुर. आज के समय में गलत दिनचर्या और गलत खान-पान की वजह से हमारा स्वास्थ्य कई तरह की बीमारियों का शिकार होता चला जा रहा है. उसी में एक आम समस्या पित्त अम्ल दोष की भी लोगों को ज्यादा हो रही है. पीत अम्ल दोष जिसे आम बोलचाल की भाषा में एसिडिटी भी कहा जाता है. यह समस्या आज के लोगों में ज्यादा हो रही है और एसिडिटी की वजह से कई बार लोगों को ज्यादा तेज पीड़ा भी होने लगती है. ऐसे में आयुर्वेद में एसिडिटी और पित्त को साफ करने के लिए मुलेठी के सेवन को बताया गया है. चिकित्सकों के मुताबिक मुलेठी का सेवन एसिडिटी के लिए रामबाण इलाज है. तीन चीज़ें हैं महत्वपूर्ण सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव लोकल 18 से बताते हैं कि इसके लिए हरी करी और बरी यह तीन चीज काफी इंपोर्टेंट होती हैं. इन्हीं तीनों की वजह से लोगों को एसिडिटी की समस्या होती है. जिसमें हरी का मतलब होता है जल्दी-जल्दी खाना खाना क्योंकि जब हम जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो इससे हमारा पाचन तंत्र खाने को पचाने में अधिक समय लेता है और सही से पचा भी नहीं पाता. वहीं करी का मतलब है मिर्च, मसाला और तली-भुनी हुई चीज का अधिक सेवन करना, ये भी एसिडिटी का कारण बनता है और बरी का मतलब अधिक चिंता करना यानी कि आप अधिक चिंता करते हैं तो भी आपको एसिडिटी हो सकती है. करें यह उपायअगर आपको भी बार-बार एसिडिटी की समस्या आती है तो इसके लिए आप आयुर्वेद के देसी उपाय में मुलेठी का सेवन कर सकते हैं. अगर आप मुलेठी के स्वरस का प्रयोग करते हैं तो यह एसिडिटी के लिए और अधिक फायदेमंद होता है अन्यथा आप मुलेठी के टुकड़े को भी मुंह में रखकर एसिडिटी से छुटकारा पा सकते हैं या फिर आप इसका चूर्ण बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अन्य में भी है फायदेमंद मुलेठी का सेवन करने से हमारे शरीर का पाचन तंत्र मजबूत होता है इसके साथ ही एसिडिटी की भी समस्या दूर होती है लेकिन इन सबके अलावा मुलेठी का सेवन हमारे लिए उन चीजों में भी फायदेमंद है जिन लोगों को खांसी आदि की समस्या है. वह लोग भी मुलेठी का सेवन कर सकते हैं और खांसी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : April 07, 2026, 10:47 IST

Benefits of aloevers I त्वचा, बाल और पाचन के लिए प्राकृतिक उपाय

एलोवेरा

Last Updated:March 30, 2026, 14:26 IST आजकल लोग प्राकृतिक उपचार की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं और ऐसे में एलोवेरा एक बेहतरीन घरेलू उपाय बनकर उभरा है. यह त्वचा, बाल और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होने के साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है. हालांकि इसके उपयोग में सही मात्रा और सावधानी रखना जरूरी है, तभी इसके पूरे लाभ मिल सकते हैं. आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं. कई लोग दवाइयों की जगह प्राकृतिक और घरेलू उपायों को अपनाना पसंद करते हैं. ऐसे में एलोवेरा एक ऐसा पौधा है, जिसे “प्राकृतिक इलाज का खजाना” कहा जाता है. यह पौधा न सिर्फ आसानी से घर में उगाया जा सकता है, बल्कि इसके उपयोग से कई बीमारियों में राहत भी मिलती है. एलोवेरा का सबसे ज्यादा उपयोग त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है. इसके जेल को सीधे चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है. यह पिंपल्स को कम करने में भी मदद करता है. जिन लोगों की त्वचा सूखी रहती है, उनके लिए एलोवेरा एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर का काम करता है. अगर किसी को सनबर्न या जलन की समस्या हो जाए, तो एलोवेरा जेल लगाने से तुरंत ठंडक मिलती है और त्वचा जल्दी ठीक होती है. एलोवेरा बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद है, इसे बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं और टूटना कम होता है. यह डैंड्रफ को खत्म करने में भी मदद करता है. एलोवेरा जेल को नारियल तेल के साथ मिलाकर बालों में लगाने से बाल घने और चमकदार बनते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google एलोवेरा का जूस पीने से पाचन तंत्र बेहतर होता है. यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देता है. रोजाना सुबह खाली पेट थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जूस पीने से पेट साफ रहता है और शरीर हल्का महसूस होता है. हालांकि, एलोवेरा जूस का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है. एलोवेरा में कई तरह के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाते हैं. इसका नियमित सेवन करने से शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है. अगर कहीं कट, छिलन या जलन हो जाए, तो एलोवेरा जेल लगाने से घाव जल्दी भरता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो संक्रमण को रोकते हैं और दर्द को कम करते हैं. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि एलोवेरा का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है. इसके ताजे पत्ते से जेल निकालकर सीधे त्वचा या बालों में लगाया जा सकता है. इसके अलावा बाजार में एलोवेरा जूस और जेल भी उपलब्ध होते हैं. अगर आप घर में एलोवेरा उगाना चाहते हैं, तो यह बहुत आसान है. इसे गमले में लगाकर धूप वाली जगह पर रखें और ज्यादा पानी न दें. यह कम देखभाल में भी अच्छी तरह बढ़ता है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि एलोवेरा जितना फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है. इसका सेवन अधिक मात्रा में करने से पेट खराब हो सकता है. गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. First Published : March 30, 2026, 14:26 IST

गेंदा के फूल के फायदे: त्वचा, पाचन और सूजन में प्राकृतिक औषधीय लाभ

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Last Updated:March 29, 2026, 16:11 IST गेंदा का फूल केवल पूजा और सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक उपचार भी है. त्वचा की समस्याओं से लेकर पाचन सुधारने, सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक, गेंदा का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि, इसका इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना गया है. गेंदा का फूल औषधीय गुणों से भरपूर होता है और यह कई बीमारियों में राहत देने का काम करता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा-पाठ और सजावट के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गेंदा एक असरदार औषधि भी है. आयुर्वेद में गेंदा के फूल, पत्तियां और यहां तक कि इसके रस का भी उपयोग कई तरह की समस्याओं के इलाज में किया जाता है. त्वचा से जुड़ी समस्याओं में गेंदा बहुत फायदेमंद है. अगर किसी को खुजली, दाने, फोड़े-फुंसी या जलन की समस्या हो, तो गेंदा के फूल का लेप लगाने से आराम मिलता है. यह त्वचा को ठंडक देता है और जलन को कम करता है. इसके अलावा, गेंदा से बना तेल भी त्वचा को मुलायम और स्वस्थ रखने में मदद करता है. गेंदा का फूल आंखों के लिए भी लाभकारी माना जाता है, अगर आंखों में जलन, लालिमा या सूजन हो, तो गेंदा के फूल को पानी में उबालकर ठंडा करके उससे आंख धोने से राहत मिलती है. हालांकि, आंखों में इस्तेमाल करने से पहले साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google मालती वर्मा बताती है कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी गेंदा का उपयोग किया जाता है. गेंदा के फूल से बनी चाय या काढ़ा पेट की गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह शरीर के अंदर की सफाई करने में भी मदद करता है और पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है. गेंदा का उपयोग सूजन और दर्द कम करने में भी किया जाता है. इसके फूल में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की सूजन को कम करते हैं. अगर किसी को जोड़ों में दर्द या सूजन की समस्या है, तो गेंदा के तेल से मालिश करने से आराम मिल सकता है. गेंदा का फूल महिलाओं के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसका उपयोग मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. हालांकि, इसका उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है. गेंदा का फूल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. नियमित रूप से इसका सीमित उपयोग करने से शरीर स्वस्थ रहता है. गांवों और छोटे कस्बों में गेंदा का उपयोग घरेलू इलाज के रूप में काफी समय से किया जा रहा है. यह आसानी से मिलने वाला और सस्ता पौधा है, जिसे लोग अपने घरों में भी उगा सकते हैं. यही वजह है कि यह आम लोगों के लिए एक सुलभ औषधि बन चुका है. मालती वर्मा बताती है गेंदा का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी या गर्भवती महिला को उसका प्रयोग करने से पहले किसी किसी डॉक्टर या और आयुर्वेदाचार्य के सलाह बिना किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग केवल 7 दिन तक ही करना चाहिए. First Published : March 29, 2026, 16:11 IST

गन्ने के रस का देसी सिरका: पेट दर्द और बदहजमी का पारंपरिक इलाज

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Last Updated:March 26, 2026, 20:59 IST गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र के किशुनीपुर गांव की 75 वर्षीय इंदिरा सनी आज भी गन्ने के रस से देसी सिरका बनाने की पारंपरिक विधि को जीवित रखे हुए हैं. दो से तीन महीने तक धूप में प्राकृतिक किण्वन से तैयार यह सिरका पाचन संबंधी समस्याओं में असरदार माना जाता है. बिना केमिकल के बनने वाला यह देसी नुस्खा पुराने समय में बदहजमी, पेट दर्द और उल्टी जैसी परेशानियों के लिए घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल होता था. गाजीपुर. आज के दौर में जहां सिरदर्द से लेकर पेट दर्द तक के लिए हम तुरंत अंग्रेजी दवाइयों और एंटीबायोटिक्स की ओर भागते हैं, वहीं हमारे गांवों में आज भी सेहत का खजाना रसोई और परंपराओं में छिपा है. गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र के किशुनीपुर  गांव की रहने वाली 75 वर्षीय इंदिरा सनी एक ऐसी ही विलुप्त होती परंपरा को बचाती है. गन्ने के रस से बना देसी सिरका, यह सिरका केवल शरबत नहीं, बल्कि पुराने समय की एक अचूक औषधि भी है.इंदिरासनी बताती हैं कि असली और शुद्ध सिरका बनाना कोई जल्दबाजी का काम नहीं, बल्कि धैर्य की प्रक्रिया है. वह कहती हैं, पहले गन्ने के ताजे रस को मिट्टी के बर्तनों में भरकर 2 से 3 महीने तक कड़ी धूप में रखा जाता था. इस लंबी अवधि के दौरान रस प्राकृतिक रूप से फर्मेंट (किण्वन) होता है. अशुद्धियों को दूर करने के लिए इसे समय-समय पर महीन कपड़े से छाना जाता था, जिससे रस धीरे-धीरे गाढ़ा और तीखा होने लगता था. कढ़ाई का छौंक और औषधीय गुणसिरका तैयार होने का अंतिम चरण सबसे महत्वपूर्ण है, जब रस पूरी तरह फर्मेंट हो जाता है, तब इसे लोहे की कढ़ाई में हल्का गर्म किया जाता है. इंदिरासनी के अनुसार, इसे एक खास तरीके से तड़का दिया जाता है, जिससे न केवल इसका स्वाद बढ़ता है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी कई गुना बढ़ जाते हैं. यही वह प्रक्रिया है जो इसे बाज़ार में मिलने वाले सिंथेटिक सिरके से कोसों दूर और गुणकारी बनाती है. पेट की समस्याओं का रामबाण इलाजयह देसी सिरका पुराने समय में हर घर की फर्स्ट एड किट हुआ करता था, इंदिरासनी साझा करती हैं कि बदहजमी, असहनीय पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्याओं में यह किसी चमत्कार की तरह काम करता था. अगर किसी का पेट खराब होता या खाना नहीं पचता, तो बस थोड़ी मात्रा में यह सिरका पिला दिया जाता था और एक-दो दिन में मरीज भला-चंगा हो जाता था. आज के आधुनिक जीवन में हम इन पारंपरिक तरीकों से दूर हो गए हैं, लेकिन किशुनीपुर  जैसे गांवों में यह ज्ञान आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Ghazipur,Uttar Pradesh First Published : March 26, 2026, 20:59 IST

सीने में दर्द को न करें नजरअंदाज | symptoms of heart attack

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Last Updated:March 24, 2026, 14:58 IST सीने में अचानक होने वाला दर्द एक गंभीर संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है और समय पर इलाज न मिलने पर हार्ट अटैक का कारण बन सकती है. मऊ. अक्सर देखा जाता है छोटी-छोटी समस्याओं को लोग नजर अंदाज करते हैं, लेकिन उन्हें या नहीं पता कि छोटी सी लापरवाही उनकी जान ले सकती है. वर्तमान में देखा जा रहा है लोगों के सीने में दर्द अधिक हो रहा है और इस दर्द को नजर अंदाज करना लोगों को भारी पड़ जा रहा है. इस बीमारी को लेकर एक्सपर्ट क्या सलाह दे रहे हैं. लोकल 18 से बात करते हुए प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर अरमान अली बताते हैं कि सीने में दर्द कई कारणों से अचानक शुरू हो रही हैं, जिसमें ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं. यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है और यह बड़ी बीमारी बनती चली जा रही है और छोटी सी लापरवाही इस बीमारी में जान तक ले रह रही है, क्योंकि इस बीमारी में सीने में तीव्र गति से अचानक दर्द शुरू हो रहा है. इसमें लोगों को पसीना अधिक आना शुरू हो जा रहा है और उनकी सांस फूलने लगा रही हैं. यदि आप के सीने में अचानक दर्द शुरू हो रहा है तो किसी नजदीकी योग्य चिकित्सक को दिखाकर अपना इलाज शुरू कर दें नहीं आपकी समस्या बढ़ सकती है. छोटी सी लापरवाही में जा सकती है जानयदि इस बीमारी में आप लापरवाही बढ़ाते हैं तो अचानक सीने का दर्द हार्ट अटैक हो सकता है और दिल की गड़बड़ी की वजह से अचानक हृदय गति रुक सकती है और मौत भी हो सकती है. सीने के दर्द को हल्के में ना ले किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें, नहीं तो छोटी सी लापरवाही आपकी जान ले सकती है. यदि आप बीपी, थायराइड या शुगर जैसी बीमारी से ग्रसित हो तो इस बीमारी में आप सावधानी बरतना जरूरी हैं क्योंकि इन बीमारियों में यह समस्या तेजी से आती है और लोगों के सीने में अचानक दर्द होने लगता है जो हृदय गति को रोक देता है. सीने में दर्द से बचने के लिए शुगर बीपी को करें मेंटेनइस समस्या से बचने के लिए यदि आप शुगर के पेशेंट हैं तो शुगर के अनुसार अपना खान-पान रखें, शुगर को मेंटेन रखें. यदि बीपी के मरीज है तो नमक कम खाएं यदि कोलेस्ट्रॉल ज्यादा रहता है तो नियमित व्यायाम करें. हाई-फाई डाइट को अवॉइड करें और हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करें.  सीने का दर्द अचानक शुरू होता है और बहुत तीव्र गति से पहुंचता है यह दर्द अधिकतर कुछ सेकंड या मिनट का होता है, लेकिन कुछ लोगों का दर्द घंटे चला जाता है. जिसमें मरीज की हालत गंभीर बन जाती है और कभी-कभी जान चली जाती है. यदि छाती में दर्द के साथ पसीने आए तो यह हार्ट अटैक के कारण बन सकते हैं. ऐसे में सावधान रहें यदि सेने में दर्द शुरू हो तो किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Mau,Uttar Pradesh First Published : March 24, 2026, 14:58 IST