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Benefits of moringa I इम्यूनिटी, हड्डियां और ब्लड शुगर के लिए सुपरफूड

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Last Updated:March 19, 2026, 20:43 IST सहजन, जिसे मोरिंगा या शीगरू भी कहते हैं, एक देसी सुपरफूड है. इसके पत्ते, फली और छाल में भरपूर पोषण और औषधीय गुण हैं. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. सही मात्रा में सेवन से यह कई बीमारियों से बचाव में भी लाभकारी है. बलिया. सहजन या मोरिंगा, जिसे शीगरू के नाम से भी जाना जाता हैं, एक ऐसा देसी सुपरफूड है, जो किसी संजीवनी से कम नहीं है. इसके पत्ते, फल (ड्रमस्टिक) और छाल तीनों रूप में ही पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर हैं. अगर इम्युनिटी मजबूत करना आप चाह रहे हैं, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखना चाहते हैं या फिर हड्डियों को ताकत देना चाहते हैं, तो सहजन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह अनेकों बीमारियों को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. काया चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर डॉ. स्नेहामई मिश्रा ने कहा कि, वह उड़ीसा की रहने वाली है, जो अभी फिलहाल शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल बांसडीह रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत मझौली बलिया में एक साल से कार्यरत हैं. चीज एक, लेकिन फायदे अनेक सबसे पहले बात करते हैं सहजन के पत्ते की, ये आयरन, कैल्शियम, विटामिन A, C और E का अच्छा स्रोत हैं. ये न केवल एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाने में मददगार हैं. जिन लोगों को हाई ब्लड शुगर या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए ये पत्ते रामबाण है. यहीं नहीं, इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सूजन कम कर जोड़ों के दर्द में राहत देते हैं. यह दिमाग के लिए भी किसी टॉनिक से कम नहीं है. यह याददाश्त बेहतर बनाने में सहायक होता है. अगर बात सहजन की फली की करे, तो इसे हम ड्रमस्टिक के नाम से जानते हैं. यह फली फाइबर से भरपूर होती हैं, जो पाचन को दुरुस्त कर कब्ज जैसी परेशानियों से छुटकारा दिलाती है. इसमें कैल्शियम और फास्फोरस पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करते हैं. इसके एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर को संक्रमण से भी बचाते हैं. सहजन की छाल और तना भी अद्भुत फायदे देते हैं. इसका काढ़ा गठिया, साइटिका और सूजन जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह पाचन सुधारने और ब्लड शुगर कम करने में भी मददगार है. हालांकि, गर्भवती महिलाओं को इसकी जड़ या छाल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह नुकसानदायक हो सकता है. पत्तों का साग या काढ़ा, फली की सब्जी या सांभर और छाल का काढ़ा बनाकर सेवन किया जाता हैं. लेकिन उपयोग से पहले आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह बहुत जरूरी है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Ballia,Uttar Pradesh First Published : March 19, 2026, 20:43 IST

आगरा में बढ़ती हड्डियों की कमजोरी I युवाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण

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Last Updated:March 18, 2026, 22:06 IST आगरा में हड्डियों की कमजोरी यानी ऑस्टियोपोरोसिस के मामले बढ़ रहे हैं, अब युवाओं में भी इसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं. हल्की चोट में फ्रैक्चर, पीठ में दर्द और कद घटना इसके मुख्य संकेत हैं. डॉक्टर आशीष मित्तल के अनुसार, समय पर इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इस बीमारी से बचा जा सकता है. आगरा. शहर में ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों की संख्या बढ़ी है, आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि बदलती लाइफस्टाइल और खान पान से कई तरह की बीमारियां शिकार बना लेती है. उन्होंने कहा कि हड्डियों से संबंधित मरीज बढ़े है जिसमें युवाओं कि संख्या भी देखी जा रही है. चिकित्सक ने बताया कि मरीजों में ऑस्टियोपोरोसिस कि शिकायत देखी जा रही है. चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी में मरीज कि हड्डियां कमजोर व छिद्रयुक्त होने लगती है. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियों का घनत्व जिसे डेंसिटी भी कहते है यह कम हो जाता है, जिससे वे पतली, नाजुक और ट्रटने यानि कि फ्रेक्चर के प्रति अत्यधिक संभावना बढ़ जाती है. डॉ. ने कहा कि इसका समय रहने उपचार कराना बेहद जरूरी है. दर्द और बार बार फ्रेक्चर होने पर चिकित्सक से करें सम्पर्कआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षणों को पहचाना जा सकता है, हालांकि शुरुआत में इसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते है. उन्होंने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, जिसे अक्सर ‘साइलेंट डिजीज कहते है क्योंकि शुरुआती चरणों में इसका कोई खास लक्षण दिखते नहीं देता है. उन्होंने कहा कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में हल्की चोट से फ्रैक्चर होना (विशेषकर कल्हे, कलाई, रीढ) पीठ में तेज दर्द रहना, समय के साथ कद कम होना और झुककर चलना आदि होते है. डॉ. आशीष ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज को लापरवाही नहीं करनी चाहिए. ऐसे अवस्था में मरीज को तत्काल नज़दीकी हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर अपना इलाज शुरू कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि समय रहने इलाज से बीमारी से छुटकारा भी पाया जा सकता है. ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए हेल्दी फ़ूड खाएंआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचना है तो अपनी जीवन शैली में सुधार करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अनहेल्दी फ़ूड का त्याग कर हेल्दी फ़ूड का इस्तेमाल करना चाहिए. डॉ. आशीष ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए कैल्शियम औरविटामिन डी से भरपूर आहार लें, नियमित रूप से वजन उठाने वाले व्यायाम जैसे चलना, दौड़ना, योगासन आदि करें. डॉ. ने कहा कि युवाओं को धुम्रपान और शराब से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये उपाय हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने और फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में मदद करते है. डॉ. आशीष ने कहा कि यदि हड्डियों में कहीं भी लगातार दर्द बना रहता है तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Agra,Uttar Pradesh First Published : March 18, 2026, 22:06 IST

पलाश के फूल के फायदे: लू, डायबिटीज और त्वचा रोग में असरदार

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Last Updated:March 15, 2026, 19:18 IST फागुन के महीने में तराई क्षेत्र में खिलने वाले टेसू यानी पलाश के फूल सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बढ़ाते, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद में इसके फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग पेट के कीड़े, डायबिटीज, त्वचा रोग और गर्मी से राहत पाने के लिए किया जाता है. गर्मियों में पलाश के फूलों से बना शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ लू से भी बचाने में मदद करता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में टेसू के पेड़ पाए जाते हैं. फागुन माह में पलाश के फूलों की बहार आ जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में टेसु के फूल के नाम से जाना जाता है. वही अब धीरे-धीरे पलाश के पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है. वहीं आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है.  पलाश के बीजों में एंटी वर्म यानी कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. पलाश के बीज का पाउडर नियमित रूप से लेने से पेट के संक्रमण में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा पलाश के फूलों में एस्ट्रिंजेंट गुण मौजूद होता है, जो दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है.  पलाश में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. इसके सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है. वहीं पलाश के पत्तों में टिक्ता गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में कफ और पित्त को कम करने में सहायक होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा संबंधी रोगों में भी पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे खुजली और त्वचा का रूखापन भी कम होता है. इसके अलावा पलाश के बीज का काढ़ा घाव भरने में भी सहायक माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताएं कि गर्मियों के मौसम में पलाश के फूलों की डिमांड बढ़ जाती है, इसके फूल बहुत ही ठंडे माने जाते हैं. जिस कारण गर्मियों में लोग शरबत बनाकर सेवन करते हैं. इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है साथ में गर्मी में लू जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाता है. पलाश के फूलों को अच्छी तरह धूप में सुखाकर पाउडर बना लें और हर सुबह ठंडे पानी के साथ इसका सेवन करें. यह शरीर को हल्का महसूस कराने के साथ-साथ आंतरिक सफाई में मदद करता है. डायबिटीज जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. पलाश का फूल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. First Published : March 15, 2026, 19:18 IST

गर्मियों में ठंडक और हाइड्रेशन के लिए गन्ने का जूस – फायदे और सावधानियां

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Last Updated:March 12, 2026, 21:14 IST मार्च से बढ़ती गर्मी के बीच गन्ने का जूस बन गया लोगों का पसंदीदा पेय. यह न सिर्फ शरीर को अंदर से ठंडक और ताजगी देता है, बल्कि पाचन, हाइड्रेशन और लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद है. लेकिन उच्च ब्लड शुगर वाले लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए. रायबरेली. मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर दिखाई देने लगा है, तापमान में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी से आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है. बढ़ी हुई गर्मी के कारण लोगों को बार-बार प्यास लगने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. गर्मी के मौसम में तेज धूप की वजह से लोगों को थकान सुस्ती महसूस होती है इस दौरान लोग अपने शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए कई तरह के पेय पदार्थ का सेवन करते हैं. जो गर्मी के मौसम में शरीर में हाइड्रेट रखने के साथ ही तरोताजा बनाए रखने में भी कारगर होते हैं. गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने के साथ ही अंदर से शीतलता प्रदान करने में गन्ने का जूस भी बड़ा ही लाभदायक है. गन्ने के जूस की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को अंदर से शीतलता प्रदान करती है. यह आपको गर्मी के मौसम में चलने वाली तेज लू से भी बचाने में कारगर होता है. इन तत्वों से भरपूर रायबरेली जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ की आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित (एम डी आयुर्वेद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद जयपुर ,राजस्थान) लोकल 18 से बात करते हुए बताती हैं कि गन्ने के जूस में जिंक, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैंगनीज, मैग्नीशियम सहित कई अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं. अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है, तो आपको गन्ने का रस पीना चाहिए. गन्ने के रस में मौजूद पोटैशियम पेट में पीएच लेवल को संतुलित करता है. गन्ने का रस लोगों को हाइड्रेटेड रखता है और इससे कब्ज की समस्या से आराम मिलता है. इनके लिए फायदा आकांक्षा दीक्षित के मुताबिक जिन लोगों को पीलिया की समस्या हो जाती है, उनके लिए गन्ने का जूस किसी अमृत से कम नहीं होता है, क्योंकि गन्ने के जूस में एंटीऑक्सीडेंट होता है ,जो लीवर को संक्रमित होने से बचाते हैं. आगे की जानकारी देते हुए बताती है कि गन्ने का जूस उन लोगों को भूलकर भी नहीं पीना चाहिए. जिनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ हो क्योंकि यह उनके लिए नुकसानदायक होता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Rae Bareli,Uttar Pradesh First Published : March 12, 2026, 21:14 IST

आजमगढ़ में आयुर्वेदिक उपचार की नई सुविधा, 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सक के साथ मिलेगी बेहतर सुविधा

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Last Updated:February 23, 2026, 22:30 IST आजमगढ़ जिले में मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आयुर्वेदिक उपचार की नई सुविधा मिलेगी. अब सीएचसी और पीएचसी केंद्रों पर एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक इलाज भी उपलब्ध होगा. पहले चरण में 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी, जहां मरीज आयुर्वेदिक दवाइयों जैसे काढ़ा, तेल और जड़ी बूटियों से इलाज करवा सकेंगे. ख़बरें फटाफट आजमगढ़. जिले में अब मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक नई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, मंडलीय अस्पताल के साथ-साथ सीएचसी व पीएचसी सेंटरों पर भी अब एलोपैथ दावों के साथ-साथ आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की व्यवस्था भी उपलब्ध होगी. मरीज को आयुर्वेदिक उपचार के लिए शहर मुख्यालय की भाग दौड़ नहीं करनी होगी. उन्हें अब अंग्रेजी दावों के साथ-साथ आयुर्वेदिक इलाज के लिए अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज उपलब्ध होगा और साथ ही दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाएगी. पहले चरण में 25 अस्पतालों पर शुरू होगी यह व्यवस्थाग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को सस्ता सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पहले चरण में जिले 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चिकित्सकों के बैठने के लिए अलग से ओपीडी कक्ष की व्यवस्था होगी, जिसमें अस्पताल में आने वाले मरीजों को एलोपैथ के अलावा आयुर्वेदिक उपचार का विकल्प भी उपलब्ध होगा. समस्याओं को बताते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सकीय सलाह प्राप्त करते हुए दवाइयां भी प्राप्त कर सकेंगे. जड़ी बूटियां से संभव होगा इलाजइसके लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पहले चरण में चयनित सीएचसी और पीएचसी में आयुर्वेदिक चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी, जहां पर आयुर्वेदिक दवाइयां काढ़ा,तेल और आवश्यक जड़ी बूटियां भी उपलब्ध होगी. इस व्यवस्था के शुरू हो जाने से खास तौर पर उन लोगों को राहत मिलेगी जो महंगे निजी अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते. डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, पेट की बीमारियां एवं त्वचा से संबंधित तमाम समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अब प्राकृतिक तरीके से उपचार मिल सकेगा. जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर यह सुविधा प्रथम चरण में उपलब्ध होगी उनमें मार्टिनगंज ब्लॉक का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फूलपुर ब्लॉक के अंबारी पीएससी, बिलरियागंज ब्लॉक के परशुरामपुर, बनकट और जमीन फरेंदा पीएचसी, अजमतगढ़ ब्लॉक के अवुमारी नारायणपुर, बिलरियागंज, तरवां, महानगर ब्लॉक के खरिहानी पीएससी आदि पर आयुष डॉक्टर तैनात किए जाएंगे. About the Author Monali Paul Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें Location : Azamgarh,Uttar Pradesh First Published : February 23, 2026, 22:30 IST

फिरोजाबाद में मौसम बदलने से बीमारियां बढ़ीं, डॉक्टर की सलाह जरूरी

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Last Updated:February 21, 2026, 21:45 IST बदलते मौसम में अचानक सर्दी और गर्मी के असर से लोग बीमार हो रहे हैं. वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मनोज कुमार ने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने और मौसम के अनुसार खान-पान व कपड़ों का ध्यान रखने की सलाह दी है. जानें कैसे बचें बीमारियों से. ख़बरें फटाफट फिरोजाबाद. जैसे-जैसे मौसम बदलता जा रहा है, वैसे ही लोग बीमार हो रहे हैं।. सर्दी के बाद गर्मी ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से लोग बीमार हो रहे हैं. लोगों को सर्दी-जुकाम हो रहा है और इसके साथ ही पेट की भी बीमारियां देखने को मिल रही हैं. इसको लेकर डॉक्टर भी मरीजों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की सलाह दे रहे हैं. सर्दी–गर्मी से लोगों को हो रही दिक्कत फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मनोज कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि अचानक मौसम बदल रहा है. रात में लोगों को सर्दी लगती है, तो वहीं दिन में तेज धूप से पसीना आ रहा है, इसलिए यह मौसम स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. इस मौसम में कपड़े पहनने से लेकर खाने-पीने तक की चीजों का सही प्रयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मौसम में लोग एकदम सारे गर्म कपड़े नहीं छोड़ें. इसके साथ ही खाने-पीने के लिए ठंडी चीजों से परहेज करें. डॉ. कुमार ने बताया कि अभी लोग इसी वजह से अधिक बीमार हो रहे हैं कि वे मौसम के हिसाब से चीजें नहीं खा रहे हैं. इस मौसम में अधिक ऑयली, भुनी और फास्ट फूड का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पेट की बीमारियां भी हो सकती हैं. धीरे-धीरे करें बदलाव, वरना हो जाएंगे बीमार वरिष्ठ फिजिशियन ने बताया कि मौसम धीरे-धीरे बदल रहा है, लेकिन लोग एकदम से बदलाव कर देते हैं. इसकी वजह से हमारी बॉडी तापमान के अनुसार काम नहीं कर पाती, इसलिए आपको भी मौसम के हिसाब से रहना चाहिए. यदि कोई भी बीमारी हो, या जो डायबिटीज या हार्ट के मरीज हैं, वे इस मौसम में धीरे-धीरे बाहर निकलें. किसी भी तरह की बीमारी होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाकर संपर्क करें. पानी अच्छे से पीएं और ज्यादा से ज्यादा खान पान का ख्याल रखें. About the Author Monali Paul Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें Location : Firozabad,Uttar Pradesh First Published : February 21, 2026, 21:45 IST

बरगद के पत्तों के फायदे: पाचन, त्वचा व जोड़ों के दर्द में असरदार

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Last Updated:February 21, 2026, 21:28 IST वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते, छाल और कोपलें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और रोगाणुरोधी गुणों से भरपूर होती हैं. जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता  को मजबूती प्रदान करते हैं. इन पत्तियों का काढ़ा या अर्क संक्रमण से लड़ने, त्वचा रोगों, मधुमेह और श्वसन संबंधी समस्याओं में कारगर माना जाता है. जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। वट वृक्ष यानी के बरगद के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. जो पाचन में सुधार, त्वचा रोगों, जोड़ों के दर्द, सूजन और डायबिटीज जैसी समस्याओं में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके कोमल पत्तों का लेप घावों को भरने में सहायक है और इनका रस एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में कार्य करता है. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि बरगद के कोमल पत्ते (कूपल) और दूध दस्त, पेचिश और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार हैं. कसैले गुणों के कारण, यह आंतों की गति को नियंत्रित करते हैं और मल को बांधते हैं. इसके कूपलों को रात भर भिगोकर सुबह पानी पीने या दही के साथ सेवन करने से दस्त में तुरंत लाभ होता है. बरगद के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, मोच और सूजन में कारगर हैं. सबसे असरदार उपाय में पत्तों पर घी/सरसों का तेल लगाकर गर्म करें और सूजन वाले स्थान पर बांधें. इसके ताजे पत्तों का लेप खुजली व लाल चकत्तों में आराम देता है. जो एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते और अन्य भाग हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें कैल्शियम और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. जो हड्डियों को मजबूत बनाने, जोड़ों के दर्द, गठिया और सूजन को कम करने में सहायक हैं. यह दर्द से राहत और टूटी हड्डियों के उपचार में मदद करता है. बरगद के पत्ते औषधीय खजाना हैं. जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं. इनमें ट्राइटरपेन्स, फ्रीडेलिन, सिटोस्टेरॉल, और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये पत्ते मधुमेह नियंत्रण, त्वचा रोगों (दाग-धब्बे, खुजली), जोड़ों के दर्द, दस्त, और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं. बरगद के पत्ते जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुणों से भरपूर होते हैं. जो त्वचा की समस्याओं और शरीर के दर्द में राहत देते है. ताजे पत्तों का लेप खुजली, मुंहासे और घावों को जल्दी भरने में मदद करता है. जबकि पत्तों का गर्म काढ़ा जोड़ों के दर्द में उपयोगी है. First Published : February 21, 2026, 21:28 IST

आंवला के अत्यधिक सेवन से एसिडिटी, ब्लड शुगर कम और रक्तस्राव का खतरा.

Moradabad news,hindi news,up news,local news, मुरादाबाद समाचार, हिंदी समाचार, यूपी समाचार, लोकल समाचार।

Last Updated:February 21, 2026, 21:12 IST आंवला स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन या कुछ विशेष परिस्थितियों में यह नुकसानदायक हो सकता है. खाली पेट लेने, ज्यादा मात्रा में खाने, लो ब्लड शुगर या सर्जरी के आसपास इस्तेमाल करने पर यह एसिडिटी, पेट दर्द, रक्तस्राव और कमजोरी जैसी समस्याएँ पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ डॉ. गीतिका शर्मा की सलाह है कि इसे सीमित मात्रा में ही लें. आंवले का अत्यधिक सेवन या कुछ विशेष शारीरिक स्थितियों में यह नुकसानदायक हो सकता है. यह एसिडिटी, पेट में जलन, कब्ज, दस्त, ब्लड शुगर कम होना, और रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकता है. इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. एक्सपर्ट डॉ गीतिका शर्मा ने बताया कि खाली पेट या अत्यधिक सेवन करने पर यह एसिडिटी, जलन और पेट खराब जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है. चूंकि आंवला विटामिन C से भरपूर होता है. इसकी उच्च अम्लीय प्रकृति संवेदनशील पेट या हाइपरएसिडिटी वाले लोगों में एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकती है. लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) वाले लोगों के लिए आंवले का बहुत अधिक सेवन हानिकारक हो सकता है. आंवला रक्त शर्करा के स्तर को काफी कम करता है. यदि आपका शुगर लेवल पहले से ही कम है. तो आंवला इसे और कम कर सकता है. जिससे चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google सर्जरी से दो सप्ताह पहले और बाद में आंवले का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह खून को पतला कर सकता है. जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है. यह ब्लीडिंग जोखिम को बढ़ाता है और ब्लड शुगर/बीपी में उतार-चढ़ाव कर सकता है.  आंवले का सेवन उन लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है जिन्हें इससे एलर्जी है. यह एक दुर्लभ प्रतिक्रिया है. लेकिन एलर्जी होने पर खुजली, पित्ती, त्वचा पर चकत्ते, सूजन, या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. इसके अलावा, अत्यधिक सेवन से एसिडिटी, पेट दर्द, लो ब्लड प्रेशर और किडनी स्टोन की समस्या भी बढ़ सकती है. अत्यधिक आंवला खाने या लगाने से बालों और त्वचा में रूखापन और डैंड्रफ की समस्या हो सकती है. आंवला में मौजूद प्राकृतिक टैनिन और एस्ट्रिंजेंट गुण बालों की प्राकृतिक नमी को कम कर सकते हैं. इसके अलावा, इसके मूत्रवर्धक प्रभाव के कारण डिहाइड्रेशन भी हो सकता है. वैसे तो यह सुरक्षित है, लेकिन अत्यधिक मात्रा में सेवन से दस्त, एसिडिटी और पेट में ऐंठन हो सकती है. गर्भावस्था में किसी भी प्राकृतिक उपाय से पहले विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है. First Published : February 21, 2026, 21:12 IST