Wednesday, 05 Aug 2026 | 09:32 PM

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बिना इजाजत क्वीन-2 बनाने के आरोप पर प्रोडक्शन की सफाई:कहा- ये सीक्वल-प्रीक्वल नहीं, टाइटल पर किसी का अधिकार नहीं, 250 करोड़ का मुकदमा दायर हुआ है

बिना इजाजत क्वीन-2 बनाने के आरोप पर प्रोडक्शन की सफाई:कहा- ये सीक्वल-प्रीक्वल नहीं, टाइटल पर किसी का अधिकार नहीं, 250 करोड़ का मुकदमा दायर हुआ है

कंगना रनोट की अपकमिंग फिल्म विवादों से घिर गई है। फैंटम स्टूडियो ने दावा किया है कि ये उनकी फिल्म क्वीन का सीक्वल है, जिसे गैरकानूनी तरीके से जियो स्टार (स्टार स्टूडियो 18) बिना उनकी इजाजत के बना रहा है। फैंटम स्टूडियो ने जियो स्टार के खिलाफ 250 करोड़ का मुकदमा भी दायर किया है, हालांकि अब मामले में प्रोडक्शन ने सभी दावों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि कंगना की अपकमिंग फिल्म क्वीन की सीक्वल नहीं है। जियो स्टूडियो के स्टेंटमेंट में लिखा गया है, “स्टार स्टूडियो18 (स्टार स्टूडियो) इस समय कंगना रनोट के साथ एक नई फिल्म पर काम कर रहा है। यह पूरी तरह मौलिक और स्वतंत्र कहानी है। इसका किसी भी पहले बनी फिल्म की कहानी, किरदार या रचनात्मक पहलुओं से कोई संबंध नहीं है। यह किसी मौजूदा फिल्म का न तो सीक्वल है और न ही प्रीक्वल।” फिल्म के टाइटल में ‘क्वीन’ शब्द के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कंपनी ने कहा,”‘क्वीन’ अंग्रेजी भाषा का एक सामान्य शब्द है। किसी भी पक्ष का इस सामान्य शब्द पर विशेष या एकाधिकार वाला अधिकार नहीं हो सकता और ऐसा दावा कानूनन भी सही नहीं है। जियोस्टार इस कानूनी विवाद से पूरी तरह अवगत है और उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष मजबूती से रखेगा। हमें अपने मामले की मजबूती पर पूरा भरोसा है।” जानिए क्या है पूरा विवाद? कुछ समय पहले ही कंगना रनोट ने सोशल मीडिया से एक फोटो शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है। पोस्ट में क्वीन लिखा हुआ था, जिसके बाद से ही अनुमान लगाया कि ये क्वीन 2 की शूटिंग है। क्वीन बनाने वाले फैंटम स्टूडियो ने इसका विरोध किया और जियो स्टार की ओर से बातचीत की नाकाम कोशिश के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में 250 करोड़ का मुकदमा दायर कर दिया। याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि जियो स्टार ने बिना इजाजत ये फिल्म बनाई है, जबकि इसके राइट्स जिसमें सीक्वल के राइट्स भी शामिल हैं, फैंटम के पास हैं। फिल्म क्वीन के बारे में- फिल्म क्वीन 2014 में रिलीज हुई थी, जिसे विकास बहल ने डायरेक्ट किया था। फिल्म एक सीधी-सादी लड़की रानी की कहानी थी, जिसकी शादी से ठीक पहले बॉयफ्रेंड शादी से इनकार कर देता है। शादी टूटने के बाद रानी अकेले हनीमून पर जाती है, जहां विदेशी दोस्तों के साथ वो रोमांचक जिंदगी जीती है। ये कंगना के करियर की 5 सबसे बेहतरीन फिल्मों में शामिल है। इस फिल्म के लिए कंगना रनोट को बेस्ट एक्ट्रेस का पहला नेशनल अवॉर्ड मिला था। फैंटम प्रोडक्शन के बारे में जानिए-

PM मोदी ने किया शाहरुख की फिल्म का जिक्र:'कुछ कुछ होता है' से समझाए भारत-इंडोनेशिया के रिश्ते; करण जौहर ने जताई खुशी

PM मोदी ने किया शाहरुख की फिल्म का जिक्र:'कुछ कुछ होता है' से समझाए भारत-इंडोनेशिया के रिश्ते; करण जौहर ने जताई खुशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के पहले पड़ाव पर इंडोनेशिया पहुंचे हैं। जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को समझाने के लिए बॉलीवुड फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ के नाम का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि जब दोनों देश साथ चलते हैं, तो ‘कुछ कुछ’ नहीं बल्कि ‘बहुत कुछ’ होता है। पीएम के इस बयान पर फिल्म के डायरेक्टर करण जौहर ने सोशल मीडिया पर खुशी जताई है और इसे अपने लिए सम्मान की बात कहा है। फिल्म के नाम से समझाया दोनों देशों का रिश्ता जकार्ता में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक जुड़ाव पर बात की। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में भारत का गाना ‘कुछ कुछ होता है’ बहुत लोकप्रिय है। इसी का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर चलते हैं, तो ‘कुछ कुछ’ से भी आगे बढ़कर ‘बहुत कुछ’ होता है। पीएम मोदी के इस बयान के बाद वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। करण जौहर बोले- मेरे लिए सम्मान की बात पीएम मोदी के इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद फिल्म के डायरेक्टर करण जौहर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। करण जौहर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस भाषण की क्लिप शेयर की। उन्होंने लिखा कि हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जकार्ता में ‘कुछ कुछ होता है’ के बारे में बात करते देखकर वे बहुत खुश और सम्मानित महसूस कर रहे हैं। करण ने आगे लिखा कि प्यार एक ऐसी भाषा है जो सभी सीमाओं से परे है। इस गाने को हमेशा जिंदा रखने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार जताया। ‘कुछ कुछ होता है’ से करण ने किया था डेब्यू जिस फिल्म का जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किया, वह करण जौहर के करियर की बेहद खास फिल्म है। साल 1998 में आई ‘कुछ कुछ होता है’ से करण जौहर ने बतौर निर्देशक बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। इस फिल्म में शाह रुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी मुख्य भूमिकाओं में थे, जबकि सलमान खान ने फिल्म में कैमियो रोल किया था। यह फिल्म और इसके गाने भारत के साथ-साथ कई एशियाई देशों में आज भी पसंद किए जाते हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने किया स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार, 6 जुलाई 2026 को इंडोनेशिया पहुंचे थे। जकार्ता पहुंचने पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया, जिसके बाद वे अपने तय कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई है और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। तीन देशों के दौरे पर हैं प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा तीन देशों की यात्रा का पहला हिस्सा है। इंडोनेशिया के बाद वे ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर जाएंगे। इसके बाद उनके दौरे का आखिरी पड़ाव न्यूजीलैंड होगा। इस तीन देशों के दौरे का मुख्य उद्देश्य इन्डो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रमुख सहयोगी देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना है। इस यात्रा के दौरान व्यापार, डिफेंस, टेक्नोलॉजी, इन्वेस्टमेंट और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जा रही है।

UK की व्हिस्की-कारें भारत में 7 दिन बाद सस्ती मिलेंगी:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू होगा; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे

UK की व्हिस्की-कारें भारत में 7 दिन बाद सस्ती मिलेंगी:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू होगा; जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे

भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर 7 दिन बाद सस्ते मिलेंगे। क्योंकि, भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यानी इस दिन से भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। करीब 3 साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और उनके UK समकक्ष कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर साइन किए थे। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा ‘ऐतिहासिक पल’ इस व्यापार समझौते के लागू होने से पहले दोनों देशों के बिजनेस और कंपनियों के पास तैयारी करने के लिए अब सिर्फ एक महीने से भी कम बचा है। भारत में UK की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “उल्टी गिनती शुरू हो गई है! UK और भारत इस बात पर सहमत हुए हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यह आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए एक ऐतिहासिक पल है, जो हमारी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ग्रोथ के एक नए युग की शुरुआत करेगा।” सवाल जवाब में समझिएं इस एग्रीमेंट से क्या-क्या फायदा होगा… सवाल 1: भारत में कौन सी चीजें सस्ती होंगी? जवाब: UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इससे कई चीजें सस्ती होंगी: सवाल 2: भारत के किन-किन सेक्टर्स को फायदा होगा? जवाब: टेक्सटाइल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और केमिकल जैसे सेक्टर्स को फायदा होगा। 1. टेक्सटाइल सेक्टर यूके में भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स जैसे चादर, परदे पर 8-12% टैक्स लगता था, वो अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में अगले तीन साल में 40% तक की ग्रोथ हो सकती है। 2. गहने और चमड़े का सामान भारत से यूके जाने वाली ज्वेलरी और चमड़े के सामान जैसे बैग, जूतों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे छोटे बिजनेस (MSME) और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा फायदा होगा। साथ ही यूके के रास्ते यूरोप में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। 3. इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे कार के पुर्जे पर लगने वाला इम्पोर्ट टैक्स खत्म कर दिया है। इससे भारत, यूके और यूरोप की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन और मजबूत होगी। पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा। 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस भारतीय फार्मा कंपनियों को यूके में जेनेरिक दवाइयों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मिलेगी। इससे भारत की दवाइयां यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में आसानी से पहुंचेंगी और दवाओं का अप्रूवल भी जल्दी मिलेगा। 6. खाने-पीने का सामान, चाय, मसाले और समुद्री प्रोडक्ट्स बासमती चावल, झींगा जैसे समुद्री प्रोडक्ट, प्रीमियम चाय और मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। 7. केमिकल्स और स्पेशलिटी मटेरियल्स एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशल केमिकल्स पर टैक्स कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख हब से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक यूके में अपने केमिकल निर्यात को दोगुना कर दे। 8. ग्रीन एनर्जी और क्लीनटेक ये समझौता रिन्यूएबल एनर्जी में जॉइंट वेंचर्स का रास्ता खोलेगा, जिसमें सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यूके भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में और निवेश करेगा, जिससे नई टेक्नोलॉजीज का को-डेवलपमेंट होगा। सवाल 3: इस डील से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा? जवाब: FTA भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कई तरह से फायदेमंद है: सवाल 4: यह एग्रीमेंट कब से लागू होगा? जवाब: यह समझौता 24 जुलाई 2025 को साइन हुआ है, लेकिन इसे लागू होने में करीब एक साल लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की केंद्रीय कैबिनेट और UK की संसद से मंजूरी जरूरी है। भारत की केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। सवाल 5: भारत-UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कब शुरू हुई थी? जवाब: भारत और UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो करीब 3.5 साल बाद पूरी हुई। 2014 से भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) के साथ 3 ऐसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ इसी तरह के समझौतों पर एक्टिवली बातचीत कर रहा है। सवाल 6: ट्रेड एग्रीमेंट्स कितने टाइप के होते हैं? जवाब: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को उसके नेचर के हिसाब से अलग-अलग नाम दिए जाते हैं। इनमें PTA (प्रेफरेंशियल), RTA (रीजनल) और BTA (बाइलेटरल) शामिल हैं। WTO इस तरह के सभी इकोनॉमिक इंगेजमेंट्स को RTA नाम देता है। सवाल 7: भारत ने किन देशों के साथ इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं? जवाब: भारत ने श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, मॉरीशस, ASEAN और EFTA ब्लॉक्स के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स किए हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ डील हासिल करने के बाद भारत ने अपना FTA फोकस ईस्ट (ASEAN, जापान, कोरिया) से वेस्टर्न पार्टनर्स की ओर शिफ्ट कर दिया है। भारत अब एक्सपोर्ट्स का विस्तार करने और वेस्ट की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए EU और US के साथ FTA को प्राथमिकता दे रहा है।

PM मोदी ने किया शाहरुख की फिल्म का जिक्र:'कुछ कुछ होता है' से समझाए भारत-इंडोनेशिया के रिश्ते; करण जौहर ने जताई खुशी

PM मोदी ने किया शाहरुख की फिल्म का जिक्र:'कुछ कुछ होता है' से समझाए भारत-इंडोनेशिया के रिश्ते; करण जौहर ने जताई खुशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के पहले पड़ाव पर इंडोनेशिया पहुंचे हैं। जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को समझाने के लिए बॉलीवुड फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ के नाम का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि जब दोनों देश साथ चलते हैं, तो ‘कुछ कुछ’ नहीं बल्कि ‘बहुत कुछ’ होता है। पीएम के इस बयान पर फिल्म के डायरेक्टर करण जौहर ने सोशल मीडिया पर खुशी जताई है और इसे अपने लिए सम्मान की बात कहा है। फिल्म के नाम से समझाया दोनों देशों का रिश्ता जकार्ता में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक जुड़ाव पर बात की। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में भारत का गाना ‘कुछ कुछ होता है’ बहुत लोकप्रिय है। इसी का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर चलते हैं, तो ‘कुछ कुछ’ से भी आगे बढ़कर ‘बहुत कुछ’ होता है। पीएम मोदी के इस बयान के बाद वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। करण जौहर बोले- मेरे लिए सम्मान की बात पीएम मोदी के इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद फिल्म के डायरेक्टर करण जौहर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। करण जौहर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस भाषण की क्लिप शेयर की। उन्होंने लिखा कि हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जकार्ता में ‘कुछ कुछ होता है’ के बारे में बात करते देखकर वे बहुत खुश और सम्मानित महसूस कर रहे हैं। करण ने आगे लिखा कि प्यार एक ऐसी भाषा है जो सभी सीमाओं से परे है। इस गाने को हमेशा जिंदा रखने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार जताया। ‘कुछ कुछ होता है’ से करण ने किया था डेब्यू जिस फिल्म का जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किया, वह करण जौहर के करियर की बेहद खास फिल्म है। साल 1998 में आई ‘कुछ कुछ होता है’ से करण जौहर ने बतौर निर्देशक बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। इस फिल्म में शाह रुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी मुख्य भूमिकाओं में थे, जबकि सलमान खान ने फिल्म में कैमियो रोल किया था। यह फिल्म और इसके गाने भारत के साथ-साथ कई एशियाई देशों में आज भी पसंद किए जाते हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने किया स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार, 6 जुलाई 2026 को इंडोनेशिया पहुंचे थे। जकार्ता पहुंचने पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका स्वागत किया। हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया, जिसके बाद वे अपने तय कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई है और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। तीन देशों के दौरे पर हैं प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा तीन देशों की यात्रा का पहला हिस्सा है। इंडोनेशिया के बाद वे ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर जाएंगे। इसके बाद उनके दौरे का आखिरी पड़ाव न्यूजीलैंड होगा। इस तीन देशों के दौरे का मुख्य उद्देश्य इन्डो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रमुख सहयोगी देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना है। इस यात्रा के दौरान व्यापार, डिफेंस, टेक्नोलॉजी, इन्वेस्टमेंट और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जा रही है।

सफलता के साथ कई रिश्ते पीछे छूट जाते हैं:इंद्रजीत लंकेश बोले- दीपिका को लॉन्च किया, फिर साथ काम करने की कोशिश नहीं की

सफलता के साथ कई रिश्ते पीछे छूट जाते हैं:इंद्रजीत लंकेश बोले- दीपिका को लॉन्च किया, फिर साथ काम करने की कोशिश नहीं की

कन्नड़ सिनेमा के जाने-माने फिल्ममेकर-एक्टर इंद्रजीत लंकेश बेबाक विचारों के लिए भी पहचाने जाते हैं। उन्होंने दीपिका पादुकोण को उनकी पहली फिल्म ‘ऐश्वर्या’ में मौका दिया और पहली मुलाकात में ही उनकी स्टार क्वालिटी पहचान ली थी। अब वह अपनी नई फिल्म ‘जय हिंद जय सिंध’ लेकर आ रहे हैं, जिसे अपने करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म मानते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने दीपिका, पत्रकारिता, पिता पी. लंकेश की विरासत और समाज से जुड़े मुद्दों पर बात की। सवाल: सबसे पहले आपकी नई फिल्म ‘जयहिंद जयसिंध’ की बात करते हैं। यह फिल्म किस बारे में है? जवाब: लोग इसे सिर्फ पार्टिशन फिल्म समझ रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। पार्टिशन इसकी एक परत है। यह एक समकालीन प्रेम कहानी है, जो एक लड़के के परिपक्व होने की यात्रा दिखाती है। इसमें जेन-जी के लिए प्यार, रिश्तों और इंसानियत का संदेश है। मेरा मानना है कि आज नफरत का जवाब इंसानियत है और यही फिल्म का मूल भाव है। आपने कहा कि यह आपके करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म है। सवाल: आपने कहा कि यह आपके करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म है। ऐसा क्यों? जवाब: क्योंकि इसमें सिर्फ मनोरंजन नहीं है। यह ऐसी कहानी है, जिस पर मुझे पूरा विश्वास है। मेरा मानना है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का जरिया भी है। इस फिल्म के जरिए मैंने वही कोशिश की है। सवाल: आपने दीपिका पादुकोण को उनकी पहली फिल्म में लॉन्च किया था। पहली मुलाकात कैसे हुई थी? जवाब: मैं दीपिका पादुकोण को तब से जानता था, जब वह बैडमिंटन खेलती थीं। काफी समय बाद संयोग से हमारी मुलाकात एक लिफ्ट में हुई। वह उस समय मॉडलिंग कर रही थीं। पहली नजर में ही उनकी पर्सनैलिटी, आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस ने मुझे प्रभावित किया। सवाल: क्या उसी मुलाकात में आपने उन्हें फिल्म के लिए तय कर लिया था? जवाब: लगभग हां। मैं उन्हें देखकर प्रभावित हुआ था। बाद में हमने ‘ऐश्वर्या’ के लिए उन्हें साइन किया। मुझे उनके टैलेंट पर पूरा भरोसा था। सवाल: उस वक्त क्या आपको अंदाजा था कि वह इतनी बड़ी स्टार बन जाएंगी? जवाब: बिल्कुल। मुझे विश्वास था कि वह सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाएंगी। बाद में उन्होंने हॉलीवुड में काम किया, इसलिए मेरा विश्वास सही साबित हुआ। सवाल: ‘ऐश्वर्या’ की सफलता ने दीपिका के करियर में कितना बड़ा मोड़ दिया? जवाब: फिल्म बहुत सफल रही थी। सिनेमाघरों में 100 दिन चली। बेंगलुरु में हर जगह दीपिका के पोस्टर लगे थे। इसके बाद बॉलीवुड के दरवाजे उनके लिए खुल गए। शाहरुख को ‘ऐश्वर्या’ की सफलता का पता चला तो उन्होंने मजाक में कहा था कि अब दीपिका को ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे। बाद में फराह खान ने उन्हें ‘ओम शांति ओम’ में लॉन्च किया और बाकी इतिहास है। सवाल: ‘ऐश्वर्या’ के बाद आपने दोबारा दीपिका पादुकोण के साथ काम क्यों नहीं किया? जवाब: देखिए, दीपिका ने अपने करियर में बड़ी ऊंचाइयां हासिल की हैं, जिस पर मुझे गर्व है। वह आज देश की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल हैं और बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही हैं। जब कोई कलाकार उस मुकाम तक पहुंचता है, तो उसकी प्राथमिकताएं, काम करने का दायरा और टीम बदल जाती है। ऐसे में पुराने रिश्ते और संभावित सहयोग पीछे छूट जाते हैं। मैंने हमेशा उनके सफर का सम्मान किया है। इसलिए दोबारा किसी फिल्म के लिए उनसे संपर्क नहीं किया। मेरे मन में उनके लिए सिर्फ सम्मान है और खुशी है कि उनके करियर की शुरुआत में मेरा छोटा-सा योगदान रहा। सवाल: आपके परिवार की पहचान पत्रकारिता से रही है। फिर फिल्मों की तरफ कैसे आना हुआ? जवाब: मेरे पिता पी. लंकेश ने एक छोटा-सा अखबार शुरू किया था, जो बाद में बड़ा संस्थान बना। समय के साथ मीडिया का स्वरूप बदल गया। विजुअल मीडिया, सोशल मीडिया, पीआर और कॉरपोरेट प्रभाव के कारण स्वतंत्र पत्रकारिता पहले से ज्यादा मुश्किल हो गई। मुझे लगा कि जिन बातों पर मैं विश्वास करता हूं, उन्हें फिल्मों के जरिए ज्यादा प्रभावी ढंग से कह सकता हूं। सवाल: क्या आपको लगता है कि आज पत्रकारिता बदल गई है? जवाब: काफी हद तक। मीडिया पर कई तरह के प्रभाव बढ़े हैं। मेरा मानना है कि पत्रकार का काम किसी विचारधारा का समर्थक बनना नहीं, बल्कि सही बात के साथ खड़ा होना है। पत्रकार को सत्ता से सवाल पूछने चाहिए, चाहे सत्ता किसी भी दल की हो। सवाल: यह सोच आपको कहां से मिली? जवाब: मेरे पिता पी. लंकेश से। उन्होंने सिखाया कि पत्रकार न वामपंथी हो, न दक्षिणपंथी। उसे सिर्फ सही पक्ष में खड़ा होना चाहिए। मैं आज भी उसी विचार पर चलता हूं। सवाल: आपकी बहन गौरी लंकेश भी पत्रकारिता का बड़ा नाम थीं। आप उनकी विरासत को कैसे देखते हैं? जवाब: मैं उनकी पत्रकारिता पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मेरे लिए वह सिर्फ बहन नहीं, बल्कि मां जैसी थीं। उनका मेरे जीवन में बहुत बड़ा स्थान है। सवाल: आपने ड्रग्स के खिलाफ खुलकर अभियान चलाया था। इसकी शुरुआत कैसे हुई? जवाब: मैंने देखा कि बेंगलुरु में स्कूल और कॉलेज के बच्चे नशे की चपेट में आ रहे हैं। मुझे लगा कि अगर मैं चुप रहा तो यह गलत होगा। इसलिए मैंने सीसीबी में शिकायत की, आवाज उठाई और विरोध भी झेला। इसके बाद कार्रवाई हुई और जागरूकता बढ़ी, जिससे खुशी हुई। सवाल: विरोध का सामना करना कितना मुश्किल था? जवाब: काफी मुश्किल था। फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग भी मेरे खिलाफ थे। लेकिन अगर किसी बात पर विश्वास हो तो डरना नहीं चाहिए। मैंने वही किया, जो मुझे सही लगा। सवाल: क्या आज भी सामाजिक मुद्दों पर बोलना जरूरी मानते हैं? जवाब: बिल्कुल। सिर्फ पत्रकार ही नहीं, हर जिम्मेदार नागरिक को समाज के मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए। अगर हम चुप रहेंगे तो बदलाव कैसे आएगा? सवाल: आखिर में दर्शकों से क्या कहना चाहेंगे? जवाब: मैं हमेशा वही कहता हूं, जो दिल से महसूस करता हूं। मुझे उम्मीद है कि लोग ‘जयहिंद जयसिंध’ को सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव की तरह देखेंगे। यह मेरे दिल के सबसे करीब है। मुझे लगता है कि यह मेरा अब तक का सबसे बेहतरीन काम है। उम्मीद है कि दर्शक इसे अपना प्यार

सफलता के साथ कई रिश्ते पीछे छूट जाते हैं:इंद्रजीत लंकेश बोले- दीपिका को लॉन्च किया, फिर साथ काम करने की कोशिश नहीं की

सफलता के साथ कई रिश्ते पीछे छूट जाते हैं:इंद्रजीत लंकेश बोले- दीपिका को लॉन्च किया, फिर साथ काम करने की कोशिश नहीं की

कन्नड़ सिनेमा के जाने-माने फिल्ममेकर-एक्टर इंद्रजीत लंकेश बेबाक विचारों के लिए भी पहचाने जाते हैं। उन्होंने दीपिका पादुकोण को उनकी पहली फिल्म ‘ऐश्वर्या’ में मौका दिया और पहली मुलाकात में ही उनकी स्टार क्वालिटी पहचान ली थी। अब वह अपनी नई फिल्म ‘जय हिंद जय सिंध’ लेकर आ रहे हैं, जिसे अपने करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म मानते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने दीपिका, पत्रकारिता, पिता पी. लंकेश की विरासत और समाज से जुड़े मुद्दों पर बात की। सवाल: सबसे पहले आपकी नई फिल्म ‘जयहिंद जयसिंध’ की बात करते हैं। यह फिल्म किस बारे में है? जवाब: लोग इसे सिर्फ पार्टिशन फिल्म समझ रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। पार्टिशन इसकी एक परत है। यह एक समकालीन प्रेम कहानी है, जो एक लड़के के परिपक्व होने की यात्रा दिखाती है। इसमें जेन-जी के लिए प्यार, रिश्तों और इंसानियत का संदेश है। मेरा मानना है कि आज नफरत का जवाब इंसानियत है और यही फिल्म का मूल भाव है। आपने कहा कि यह आपके करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म है। सवाल: आपने कहा कि यह आपके करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म है। ऐसा क्यों? जवाब: क्योंकि इसमें सिर्फ मनोरंजन नहीं है। यह ऐसी कहानी है, जिस पर मुझे पूरा विश्वास है। मेरा मानना है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का जरिया भी है। इस फिल्म के जरिए मैंने वही कोशिश की है। सवाल: आपने दीपिका पादुकोण को उनकी पहली फिल्म में लॉन्च किया था। पहली मुलाकात कैसे हुई थी? जवाब: मैं दीपिका पादुकोण को तब से जानता था, जब वह बैडमिंटन खेलती थीं। काफी समय बाद संयोग से हमारी मुलाकात एक लिफ्ट में हुई। वह उस समय मॉडलिंग कर रही थीं। पहली नजर में ही उनकी पर्सनैलिटी, आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस ने मुझे प्रभावित किया। सवाल: क्या उसी मुलाकात में आपने उन्हें फिल्म के लिए तय कर लिया था? जवाब: लगभग हां। मैं उन्हें देखकर प्रभावित हुआ था। बाद में हमने ‘ऐश्वर्या’ के लिए उन्हें साइन किया। मुझे उनके टैलेंट पर पूरा भरोसा था। सवाल: उस वक्त क्या आपको अंदाजा था कि वह इतनी बड़ी स्टार बन जाएंगी? जवाब: बिल्कुल। मुझे विश्वास था कि वह सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाएंगी। बाद में उन्होंने हॉलीवुड में काम किया, इसलिए मेरा विश्वास सही साबित हुआ। सवाल: ‘ऐश्वर्या’ की सफलता ने दीपिका के करियर में कितना बड़ा मोड़ दिया? जवाब: फिल्म बहुत सफल रही थी। सिनेमाघरों में 100 दिन चली। बेंगलुरु में हर जगह दीपिका के पोस्टर लगे थे। इसके बाद बॉलीवुड के दरवाजे उनके लिए खुल गए। शाहरुख को ‘ऐश्वर्या’ की सफलता का पता चला तो उन्होंने मजाक में कहा था कि अब दीपिका को ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे। बाद में फराह खान ने उन्हें ‘ओम शांति ओम’ में लॉन्च किया और बाकी इतिहास है। सवाल: ‘ऐश्वर्या’ के बाद आपने दोबारा दीपिका पादुकोण के साथ काम क्यों नहीं किया? जवाब: देखिए, दीपिका ने अपने करियर में बड़ी ऊंचाइयां हासिल की हैं, जिस पर मुझे गर्व है। वह आज देश की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल हैं और बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही हैं। जब कोई कलाकार उस मुकाम तक पहुंचता है, तो उसकी प्राथमिकताएं, काम करने का दायरा और टीम बदल जाती है। ऐसे में पुराने रिश्ते और संभावित सहयोग पीछे छूट जाते हैं। मैंने हमेशा उनके सफर का सम्मान किया है। इसलिए दोबारा किसी फिल्म के लिए उनसे संपर्क नहीं किया। मेरे मन में उनके लिए सिर्फ सम्मान है और खुशी है कि उनके करियर की शुरुआत में मेरा छोटा-सा योगदान रहा। सवाल: आपके परिवार की पहचान पत्रकारिता से रही है। फिर फिल्मों की तरफ कैसे आना हुआ? जवाब: मेरे पिता पी. लंकेश ने एक छोटा-सा अखबार शुरू किया था, जो बाद में बड़ा संस्थान बना। समय के साथ मीडिया का स्वरूप बदल गया। विजुअल मीडिया, सोशल मीडिया, पीआर और कॉरपोरेट प्रभाव के कारण स्वतंत्र पत्रकारिता पहले से ज्यादा मुश्किल हो गई। मुझे लगा कि जिन बातों पर मैं विश्वास करता हूं, उन्हें फिल्मों के जरिए ज्यादा प्रभावी ढंग से कह सकता हूं। सवाल: क्या आपको लगता है कि आज पत्रकारिता बदल गई है? जवाब: काफी हद तक। मीडिया पर कई तरह के प्रभाव बढ़े हैं। मेरा मानना है कि पत्रकार का काम किसी विचारधारा का समर्थक बनना नहीं, बल्कि सही बात के साथ खड़ा होना है। पत्रकार को सत्ता से सवाल पूछने चाहिए, चाहे सत्ता किसी भी दल की हो। सवाल: यह सोच आपको कहां से मिली? जवाब: मेरे पिता पी. लंकेश से। उन्होंने सिखाया कि पत्रकार न वामपंथी हो, न दक्षिणपंथी। उसे सिर्फ सही पक्ष में खड़ा होना चाहिए। मैं आज भी उसी विचार पर चलता हूं। सवाल: आपकी बहन गौरी लंकेश भी पत्रकारिता का बड़ा नाम थीं। आप उनकी विरासत को कैसे देखते हैं? जवाब: मैं उनकी पत्रकारिता पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मेरे लिए वह सिर्फ बहन नहीं, बल्कि मां जैसी थीं। उनका मेरे जीवन में बहुत बड़ा स्थान है। सवाल: आपने ड्रग्स के खिलाफ खुलकर अभियान चलाया था। इसकी शुरुआत कैसे हुई? जवाब: मैंने देखा कि बेंगलुरु में स्कूल और कॉलेज के बच्चे नशे की चपेट में आ रहे हैं। मुझे लगा कि अगर मैं चुप रहा तो यह गलत होगा। इसलिए मैंने सीसीबी में शिकायत की, आवाज उठाई और विरोध भी झेला। इसके बाद कार्रवाई हुई और जागरूकता बढ़ी, जिससे खुशी हुई। सवाल: विरोध का सामना करना कितना मुश्किल था? जवाब: काफी मुश्किल था। फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग भी मेरे खिलाफ थे। लेकिन अगर किसी बात पर विश्वास हो तो डरना नहीं चाहिए। मैंने वही किया, जो मुझे सही लगा। सवाल: क्या आज भी सामाजिक मुद्दों पर बोलना जरूरी मानते हैं? जवाब: बिल्कुल। सिर्फ पत्रकार ही नहीं, हर जिम्मेदार नागरिक को समाज के मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए। अगर हम चुप रहेंगे तो बदलाव कैसे आएगा? सवाल: आखिर में दर्शकों से क्या कहना चाहेंगे? जवाब: मैं हमेशा वही कहता हूं, जो दिल से महसूस करता हूं। मुझे उम्मीद है कि लोग ‘जयहिंद जयसिंध’ को सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव की तरह देखेंगे। यह मेरे दिल के सबसे करीब है। मुझे लगता है कि यह मेरा अब तक का सबसे बेहतरीन काम है। उम्मीद है कि दर्शक इसे अपना प्यार

एक साल में डार्क स्टोर्स डेढ़ गुना बढ़े:पेय पदार्थ, आइसक्रीम और फेस केयर की बिक्री सबसे ज्यादा; 1लाख करोड़ का बाजार

एक साल में डार्क स्टोर्स डेढ़ गुना बढ़े:पेय पदार्थ, आइसक्रीम और फेस केयर की बिक्री सबसे ज्यादा; 1लाख करोड़ का बाजार

देश में क्विक कॉमर्स तेजी से पारंपरिक ई-कॉमर्स को पीछे छोड़ रहा है। इक्विरस कैपिटल की जून 2026 कंज्यूमर सेक्टर रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का डिजिटल कॉमर्स बाजार 2026 में 8 लाख करोड़ रुपए का अनुमानित है, जिसमें क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी 1.08 लाख करोड़ रुपए है। सबसे खास बात यह है कि क्विक कॉमर्स सालाना आधार पर 40% की दर से बढ़ रहा है, जो समूचे डिजिटल कॉमर्स की ग्रोथ रफ्तार से दोगुने से भी ज्यादा है। ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों के डार्क स्टोर नेटवर्क में पिछले एक साल में भारी इजाफा हुआ है। मई 2025 में इन तीनों कंपनियों के मिलाकर 3,405 डार्क स्टोर थे, जो मई 2026 में बढ़कर 5,026 हो गए। यानी महज एक साल में डार्क स्टोर्स की संख्या करीब डेढ़ गुना बढ़ी है। यह आक्रामक विस्तार बताता है कि कंपनियां छोटे शहरों और नए इलाकों में तेजी से पैर पसार रही हैं, ताकि 10-15 मिनट में डिलीवरी का वादा पूरा किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में आइसक्रीम, पेय पदार्थ (बेवरेजेज) और फेस केयर उत्पाद क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सबसे तेज ग्रोथ दिखाने वाली कैटेगरी रहीं। गर्मी के मौसम में इन उत्पादों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है, लेकिन क्विक कॉमर्स ने इस मांग को तुरंत पूरा करने में अहम भूमिका निभाई, जिससे पारंपरिक रिटेल चैनलों पर दबाव बढ़ा है। कमजोर मानसून से ग्रामीण मांग सुस्त पड़ने का खतरा बढ़ा हालांकि कंज्यूमर सेंटीमेंट के लिए एक चिंता की खबर भी है। रिपोर्ट में बताया गया कि 4 जून से 22 जून के बीच देश में सामान्य 97.6 मिलीमीटर के मुकाबले महज 53.1 मिमी बारिश हुई। यानी 46% की भारी कमी। इससे जून 2026 पिछले 146 वर्षों में सबसे सूखे महीनों में शुमार हो गया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अल नीनो की स्थितियां और कमजोर मानसून ग्रामीण आय और मांग पर विपरीत असर डाल सकते हैं, जो एफएमसीजी खपत का एक अहम आधार है। क्विक कॉमर्स – एक नजर में ग्रोथ पैरामीटर मई 2025 मई 2026 वृद्धि डार्क स्टोर्स 3,405 5,026 48% साइज — ₹1.08* 40% साइज लाख करोड़ में, डार्क स्टोर (ब्लिंकिट + इंस्टामार्ट + जेप्टो)

'गलत काम करने वालों की आलोचना होनी चाहिए':अयोध्या में चढ़ावा चोरी पर अनुपम खेर बोले- इससे लोगों की आस्था पर फर्क नहीं पड़ता

'गलत काम करने वालों की आलोचना होनी चाहिए':अयोध्या में चढ़ावा चोरी पर अनुपम खेर बोले- इससे लोगों की आस्था पर फर्क नहीं पड़ता

फिल्म अभिनेता अनुपम खेर मंगलवार को अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि में दर्शन-पूजन कर भगवान राम और बजरंगबली का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘श्री राम भूमि’ की शूटिंग शुरू की। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग अयोध्या में करीब 10 से 12 दिन तक चलेगी। अनुपम खेर ने कहा कि किसी भी नए काम की शुरुआत भगवान के आशीर्वाद से करना शुभ माना जाता है। उन्होंने सभी लोगों के सुख, शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। राम मंदिर से जुड़े हालिया कथित चोरी के मामले पर उन्होंने कहा कि गलत काम करने वालों की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन इससे मंदिर की गरिमा और लोगों की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ता। उनके अनुसार, दान श्रद्धा और विश्वास से किया जाता है, इसलिए किसी की गलती को भगवान, मंदिर या सनातन धर्म से जोड़ना उचित नहीं है।

प्रभास को जोकर कहने पर फंसे थे अरशद वारसी:सफाई में कहा- सिर्फ दोस्तों से मजाक करता हूं, पता है हद क्या है, सेलेब्स ने की थी निंदा

प्रभास को जोकर कहने पर फंसे थे अरशद वारसी:सफाई में कहा- सिर्फ दोस्तों से मजाक करता हूं, पता है हद क्या है, सेलेब्स ने की थी निंदा

कुछ समय पहले ही अरशद वारसी ने फिल्म कल्कि 2898AD की आलोचना करते हुए कहा था कि फिल्म में प्रभास जोकर की तरह लग रहे थे। इस बयान पर उनकी जमकर आलोचना हुई और फिल्म के डायरेक्टर नाग अश्विन और एक्टर सुधीर बाबू ने उनके बयान की निंदा की। अब अरशद ने इस विवाद पर चुप्पी तोड़ी है और कहा कि वो सिर्फ उनके साथ मजाक करते हैं, जिन्हें वो जानते हैं। प्रभास पर दिए बयान पर अरशद वारसी ने न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘मैं सिर्फ अपने दोस्तों के साथ ही मजाक करता हूं। सच कहूं तो मैं किसी और के साथ मजाक नहीं करता। अगर मुझे कोई मजाक करना होता है, तो मैं सिर्फ उन्हीं लोगों के साथ करता हूं जिन्हें मैं अच्छी तरह जानता हूं और जो मेरे दोस्त हैं।’ आगे एक्टर ने कहा, ‘मुझे पता होता है कि उनके सामने क्या कहना है और कितनी हद तक कहना है। लेकिन अगर मैं किसी को नहीं जानता, तो उसके सामने कुछ भी नहीं कहता, क्योंकि मुझे उसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती। बात बस इतनी-सी है।’ बातचीत में अरशद ने कहा है कि आज कल सोशल मीडिया पर हर बात को लेकर इतनी ज्यादा जांच-पड़ताल होती है कि लोगों को मजाक को मजाक की तरह लेना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम सभी को थोड़ा हल्के-फुल्के अंदाज में जीना चाहिए।” अरशद का मानना है कि असल जिंदगी के अलावा फिल्मों में दिखाए जाने वाले मजाक को भी लोगों को मजाक की तरह ही लेना चाहिए। उन्होंने फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस के उस डायलॉग का उदाहरण दिया, जिसमें उन्होंने एक चीनी टूरिस्ट को हक्का नूडल्स कहा था। अरशद ने कहा, ‘उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। आज लोग उसका ज्यादा विश्लेषण कर सकते हैं, लेकिन वह गलत नहीं है। जैसे हम किसी लड़के को मजाक में ‘बाल की दुकान’ कह देते हैं, उसमें भी कुछ आपत्तिजनक नहीं होता।’ हालांकि, अरशद यह भी कहते हैं कि वह ‘सेल्फ सेंसरशिप’ यानी खुद पर संयम रखने में भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा, “हर किसी को इसका पालन करना चाहिए। मैं व्यक्तिगत तौर पर पाकिस्तानी ह्यूमर का बड़ा प्रशंसक नहीं हूं, क्योंकि वह अक्सर दूसरे लोगों को नीचा दिखाने वाला होता है। उसमें लोगों का मजाक उड़ाना और नाम रखकर चिढ़ाना ज्यादा होता है। कई लोगों को वह पसंद आता है, लेकिन मुझे नहीं। इसी तरह मुझे डबल मीनिंग या सेक्सुअल कॉमेडी भी पसंद नहीं है। यह मेरी निजी पसंद है। लोगों की अपनी-अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन मैं अपने लिए इसी तरह की सेल्फ सेंसरशिप अपनाता हूं।” क्या था अरशद का पुराना बयान और क्यों हुआ विवाद समदीश भाटिया के पॉडकास्ट में अरशद वारसी से पूछा था कि उनकी देखी हुई आखिरी बुरी फिल्म कौन सी थी। इस पर उन्होंने कल्कि का नाम लेकर कहा था, ‘मैंने ‘कल्कि’ देखी तो मुझे अच्छी नहीं लगी। मुझे बहुत तकलीफ होती है पर अमित जी, वो आदमी समझ में ही नहीं आता यार। कसम से अगर उनके जितनी पावर मिल जाए ताे लाइफ बन जाए। वो कमाल हैं, अविश्वसनीय हैं। प्रभास को देखकर मैं वास्तव में दुखी हुआ। वो क्यों थे उस फिल्म में, माफी चाहूंगा पर वो एक जोकर की तरह लग रहे थे। मैं ‘मैड मैक्स’ (हॉलीवुड फिल्म) देखना चाहता हूं। मैं वहां मेल गिब्सन (हॉलीवुड एक्टर) को देखना चाहता हूं। तुमने उसको क्या बना दिया यार। क्यों करते हो ऐसा.. मुझे नहीं समझ में आता।’ अरशद वारसी के बयान पर भड़के डायरेक्टर नाग अश्विन अरशद का बयान सामने आने के बाद कल्कि डायरेक्टर नाग अश्विन ने सोशल मीडिया पर निंदा कर लिखा, “आइए पीछे न जाएं। अब नॉर्थ वर्सेस साउथ या बॉलीवुड वर्सेस टॉलीवुड जैसी बहसें बंद होनी चाहिए। हमें बड़ी तस्वीर पर ध्यान देना चाहिए, एकजुट भारतीय फिल्म इंडस्ट्री। अरशद साहब को अपने शब्दों का चुनाव थोड़ा बेहतर करना चाहिए था, लेकिन कोई बात नहीं। मैं उनके बच्चों के लिए ‘बुज्जी’ के खिलौने भेज रहा हूं। और मैं इतनी मेहनत करूंगा कि जब ‘कल्कि 2’ (K2) रिलीज हो, तो पहले दिन का पहला शो देखने के बाद वही ट्वीट करें कि प्रभास अब तक के सबसे बेहतरीन कलाकार हैं। वहीं साउथ एक्टर सुधीर बाबू ने भड़ककर लिखा, “रचनात्मक आलोचना करना ठीक है, लेकिन किसी के बारे में अपमानजनक बातें करना कभी सही नहीं होता। मुझे अरशद वारसी से ऐसी गैर-पेशेवर टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी। प्रभास का कद इतना बड़ा है कि छोटे सोच वाले लोगों की टिप्पणियों से उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता।”

OTT से हटी, गुरुद्वारों में फ्री दिखेगी दिलजीत की 'सतलुज':स्पेशल स्क्रीनिंग शुरू; फिल्म में पंजाब में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार हत्याओं का दावा

OTT से हटी, गुरुद्वारों में फ्री दिखेगी दिलजीत की 'सतलुज':स्पेशल स्क्रीनिंग शुरू; फिल्म में पंजाब में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार हत्याओं का दावा

OTT प्लेटफॉर्म से हटाई गई दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ अब फ्री में पंजाब में गुरुद्वारों दिखाई जाएगी। यह फिल्म पंजाब में आतंकवाद के दौर यानी 90 के दशक में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार युवाओं की हत्या का दावा करने वाले ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। गुरदासपुर से गुरुद्वारों में फिल्म दिखाने की शुरूआत हो चुकी है। यहां गांव मानचोपड़ा में गुरुद्वारा साहिब से अनाउंसमेंट कर गांव के लोगों को फिल्म दिखाई गई। मोगा के गुरुद्वारे में भी फिल्म दिखाई गई। अब बुधवार और गुरुवार को पठानकोट के 2 प्रमुख गुरुद्वारों गुरुद्वारा सिंह सभा, मॉडल टाउन और गुरुद्वारा सिंह सभा सेंट्रल (रानीपुर) में इसकी स्क्रीनिंग का ऐलान कर दिया गया है। भारतीय किसान यूनियन के पंजाब यूथ अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह बैंस ने कहा कि फिल्म को पंजाब के अन्य जिलों और गांव-गांव तक ले जाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें। वहीं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने स्कूल-कॉलेजों में भी फिल्म की स्क्रीनिंग का ऐलान कर दिया है। गुरुद्वारा प्रबंधकों का दावा- इतिहास दबाने की कोशिश हुई पठानकोट के गुरुद्वारा प्रबंधक मनप्रीत सिंह का कहना है कि फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। उनका आरोप है कि पंजाब के इतिहास के एक अहम अध्याय को लोगों तक पहुंचने से रोकने के लिए फिल्म को जानबूझकर OTT प्लेटफॉर्म से हटाया गया। उनका कहना है कि अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फिल्म नहीं दिखाई जाएगी तो गुरुघरों के माध्यम से इसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी खालड़ा के संघर्ष, मानवाधिकारों की लड़ाई और उनके बलिदान से परिचित हो सके। सीनियर वकील बोले- गुरुद्वारों में स्क्रीनिंग गैरकानूनी नहीं OTT से हटाने के बावजूद इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग को लेकर पठानकोट के सीनियर एडवोकेट विशाल कोहली ने कहा कि गुरुद्वारों में संगत के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग करना किसी कानून का उल्लंघन नहीं है। उनके मुताबिक, फिल्म की सामग्री पहले ही अलग-अलग ऑनलाइन माध्यमों पर लोगों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से इसका प्रदर्शन करना गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। DSGMC का ऐलान- गुरुद्वारों के साथ स्कूल-कॉलेजों में भी दिखाई जाएगी फिल्म दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) भी फिल्म के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी इस फिल्म को रोकना इतिहास को दबाने की कोशिश है। उन्होंने घोषणा की कि दिल्ली के गुरुद्वारों में फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग कराई जाएगी। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, संघर्ष और मानवाधिकारों पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। सभी गुरुद्वारा कमेटियों से फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की अपील भी की गई है। दिलजीत की फिल्म में क्या दिखाया गया, जिस पर एतराज? दिलजीत की इस फिल्म में पूर्व CM बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट में हत्या का सीन भी दिखाया गया है। फिल्म की कहानी के लिए इस सीन को पुलिस की क्रूरता के एक टर्निंग पॉइंट के रूप में दिखाया गया है। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि कैसे पुलिस की क्रूरता और निर्दोष लोगों पर बढ़ते अत्याचारों के कारण एक आम आदमी अंदर से टूट जाता है और आतंकवाद या इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाता है। इसमें तत्कालीन DGP केपीएल गिल को IPS बिट्‌टा के तौर पर दिखाया गया है। फिल्म में दिखाया गया है 31 अगस्त 1995 को तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या होती है और इस घटना के ठीक एक हफ्ते बाद यानी 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा का भी अपहरण कर लिया जाता है। मुख्यमंत्री की मौत के बाद जब राजनीतिक माहौल बदला, तो पुलिस को डर था कि खालड़ा उनके इस 25 हजार अवैध दाह-संस्कार के काले राज को दुनिया के सामने न ले आएं, इसलिए वे खालड़ा का अपहरण करने का कदम उठाते हैं। फिल्म हटाने को लेकर केंद्र की क्या चिंता, आगे क्या फैसला लिया? केंद्र ने फिल्म हटाने को लेकर अभी औपचारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। हालांकि सरकारी सोर्सेज के जरिए मीडिया के मुताबिक फिल्म के कुछ हिस्सों का भारत विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग किए जाने की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक, चिंता है कि फिल्म के कुछ दृश्य और सामग्री का इस्तेमाल खालिस्तान समर्थक आंदोलन के पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जा सकता है। खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ऐसा हो सकता है। सरकार का मानना है कि “ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सबसे ऊपर होते हैं। यह राजनीति का विषय नहीं है। हालांकि केंद्र ने भाजपा के पंजाब प्रधान केवल सिंह ढिल्लों की अपील के बाद इस पर रिव्यू कमेटी बनाई है। कमेटी फिल्म की सामग्री, तथ्यों और प्रस्तुत किए गए विषयों का अध्ययन करेगी। जसवंत सिंह खालड़ा के बारे में जानिए, जिनके जीवन पर यह फिल्म बनी बैंक में काम करते थे, लावारिश लाशें खोजनी शुरू कर दीं 1990 के दशक के पंजाब के कई इलाकों में खालिस्तान की मांग जोर पकड़ रही थी। ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ में 6 जून 1984 को खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह ‘भिंडरांवाले’ की मौत हो गई। जवाब में 31 अक्टूबर, 1984 को पीएम इंदिरा गांधी की उनके ही 2 सिख बॉडीगार्ड्स ने हत्या कर दी। इसके बाद खालिस्तान मूवमेंट को कुचलने का दौर शुरू हुआ। 1992 में बेअंत सिंह सीएम बने। तब के पंजाब पुलिस के DGP कंवर पाल सिंह गिल (केपीएस गिल) ने एंटी-टेररिज्म अभियान चलाया। पुलिस को खुली छूट थी। पंजाब के कई इलाकों से हजारों नौजवान रातोंरात गायब हो रहे थे। पुलिस पर निहत्थे लोगों को हिरासत में लेने और फर्जी एनकाउंटर के आरोप लग रहे थे। 1952 में अमृतसर जिले के खालड़ा गांव में जन्मे जसवंत सिंह, तब अमृतसर के एक बैंक में काम करते थे। जनवरी 1995 में वे शिरोमणि अकाली दल की मानवाधिकार यूनिट के महासचिव भी थे। लापता लोगों के डेथ सर्टिफिकेट न होने के चलते उनके परिवार वाले न उनकी संपत्ति पर दावा कर सकते थे और न ही बैंक में उनके खातों से पैसा निकाल पा रहे थे। ऐसे में जसवंत ने लापता लोगों, पुलिस हिरासत में हुई मौतों और श्मशानों में