गुरुग्राम की बिजली सप्लाई करेंगे अडानी:ग्रांट ऑफ लाइसेंस के लिए अप्लाई किया; HREC की हियरिंग पूरी, 70% लोग प्राइवेटाइजेशन के पक्ष में

हरियाणा में पहली बार गुरुग्राम की बिजली वितरण व्यवस्था में निजी क्षेत्र की बड़ी एंट्री का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है। अडानी समूह की बिजली वितरण कंपनी ने गुरुग्राम में बिजली सप्लाई के लिए ग्रांट ऑफ लाइसेंस की औपचारिक याचिका दायर कर दी है। यह आवेदन विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 15 (लाइसेंस पाने की प्रक्रिया) प्रोसीजर फॉर ग्रांट ऑफ लाइसेंस के तहत हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) में दाखिल किया गया है। सुनवाई के दौरान आयोग के सामने आए फीडबैक में करीब 70% लोगों ने निजी क्षेत्र की कंपनी के जरिए बिजली वितरण का समर्थन किया है। साथ ही एक और कंपनी इलेवन की ओर से बताया गया कि उनकी भी इस प्रोजेक्ट में गुरुग्राम और नूंह में 4,716.73 करोड़ रुपए के निवेश की योजना है। अब अंतिम फैसला आयोग को लेना है। बता दें कि गौतम अदानी की प्रमुख बिजली वितरण और पारेषण कंपनी का नाम अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड है। इसके अलावा, मुंबई में बिजली वितरण का कार्य उनकी सहायक कंपनी अदानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड द्वारा किया जाता है। इस संबंध में हरियाणा के उर्जा मंत्री अनिल विज का पक्ष जानने की कोशिश की गई, उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। SMS का भी जवाब नहीं दिया। अडानी और दूसरी कंपनी की ओर से इस तरह रखा गया पक्ष क्या कहते है लाइसेंस के नियम और क्या पड़ेगा असर, 2 पॉइंट में जानिए… विरोध भी शुरू हुआ, इनेलो नेता ने सरकार को घेरा संपत सिंह ने भी किया दावा हरियाणा सरकार के पूर्व वित्त मंत्री एवं इनेलो नेता संपत सिंह ने बताया कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) की पब्लिक हियरिंग में शामिल हुआ था। मैंने अपने पक्ष आयोग के समक्ष रख दिया है। सरकार हरियाणा के बिजली सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की एट्रीं करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि देश के बड़े उद्योगपति गौतम शांतिलाल अडानी की कंपनी ने भी गुरुग्राम में बिजली सप्लाई के लिए अप्लाई किया है। हम इसका विरोध करेंगे। क्या बोले एसोसिएशन पदाधिकारी हरियाणा इंजीनियरिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत कुमार कुंडू ने बताया कि हमें इसका नोटिस अभी नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि आज आयोग की हियरिंग में हमारी ओर से बिजली सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की एंट्री का विरोध किया गया है। आगे भी हम इसका विरोध करेंगे।
लारेंस-गोल्डी गैंग पर FBI का पहली बार बड़ा एक्शन:अमेरिका-कनाडा समेत कई देशों में 50 जगह रेड, 24 अरेस्ट, ड्रग-आर्म्स बरामद

अमेरिका में पहली बार गैंगस्टर लॉरेंस, गोल्डी बराड़ और जग्गू भगवानपुरिया पर आरोप तय किए गए हैं। इनमें खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड को भी जोड़ा गया है। आरोप है कि इसकी साजिश लॉरेंस और गोल्डी बराड़ दोनों ने मिलकर रची थी। दावा है कि आरोपियों में लॉरेंस, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा और अन्य सहयोगियों के नाम शामिल हैं। आरोप पत्र में बताया गया कि लॉरेंस भारत में जेल में रहते हुए भी अपने नेटवर्क को चलाता है और उसके सहयोगी भारत अमेरिका, कनाडा तथा यूरोप में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। उधर, अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने 7 जुलाई 2026 को अमेरिका, कनाडा और यूरोप में संयुक्त एक्शन के दौरान भारत से जुड़े गैंगस्टर्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। इस अभियान में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुल 37 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यूएस फेडरल सरकार के अधिकारियों ने कहा कि वो जल्द ही भारतीय सरकार से लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और एक्टिव पुलिस चीफ पुंदरप्रीत सिंह के औपचारिक प्रत्यर्पण की मांग करेंगे। इसके अलावा एफबीआई ने गोल्डी बराड़ पर 50 हजार डॉलर का इनाम घोषित किया है। 50 जगह रेड, ड्रग्स-हथियार सीज अमेरिकी फेडरल अथॉरिटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अहम खुलासे किए। बताया कि वे इंडिया बेस्ड ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप के खिलाफ कई सालों से इंटरकॉन्टिनेंटल जांच कर रहे थे। इसके तहत उन्होंने कम से कम 2 दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां यूएस, कनाडा और यूरोप में हुई हैं। आरोपियों के खिलाफ कम से कम 50 सर्च वारंट लागू किए गए थे, जिसके बाद हजार किलो नारकोटिक्स ड्रग्स और दर्जनों हथियार सीज किए गए हैं। गैंगस्टर लॉरेंस जेल से चला रहा गैंग यूएस फेडरल सरकार और लॉस एंजेल्स के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी जनरल के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस पूरे इंडियन बेस्ड क्रिमिनल ऑर्गेनाइजेशन नेटवर्क को इंडिया की जेल में बैठा गैंगस्टर लॉरेंस हेड कर रहा है। नॉर्थ अमेरिका में इसके ऑपरेशन गोल्डी बराड़ लीड कर रहा था और यूरोप में सारा काम रोहित गोदारा द्वारा संभाला जा रहा था। हालांकि इंडिया में लोग जानते हैं कि इन तीनों गैंग लीडरों के बीच अब फूट पड़ गई है और ये एक-दूसरे के विरोधी बन चुके हैं, लेकिन यूएस अथॉरिटीज का कहना है कि ये तीनों अब तक मिलकर काम करते आए हैं।
पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा दिन:सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे, शाम को ऑस्ट्रेलिया के तीसरे दौरे पर होंगे रवाना

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा दिन है। पीएम बुधवार को यहां के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। यह मंदिर 1000 साल से ज्यादा पुराना है। इससे पहले मंगलवार को जकार्ता में भारत-इंडोनेशिया के बीच 20 समझौते हुए। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा। इसी के साथ फिलीपींस, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहेंगे पीएम इंडोनेशिया के बाद, पीएम 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे। पीएम मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के प्रमुख कारोबारियों को संबोधित करेंगे। साथ ही, भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान PM के इंडोनेशिया दौरे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिका ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की:सीरिक, केश्म और बंदर अब्बास को निशाना बनाया; होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद कार्रवाई

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के दक्षिणी हिस्से में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिका का आरोप है कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ था। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सीरिक, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बाद कई इलाकों में आग लग गई, हालांकि नुकसान और हताहतों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, एयरस्ट्राइक में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी रडार, मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन ठिकानों और कुछ बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया गया। CENTCOM ने कहा कि ईरान ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को निशाना बनाया, इसलिए यह जवाबी कार्रवाई की गई। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस होने के दावे पर बोलीं हेमा मालिनी:आज के स्टार्स की फीस का थोड़ा भी नहीं मिला, पैसों के लिए काम नहीं किया

बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस और सांसद हेमा मालिनी ने 1970 और 80 के दशक में इंडस्ट्री की सबसे महंगी एक्ट्रेस होने के दावे को खारिज कर दिया है। ‘हिंदी रश’ पॉडकास्ट में हेमा मालिनी ने कहा कि उन्हें कभी भी आज के स्टार्स जितनी मोटी फीस नहीं मिली। उन्होंने साफ किया कि वे पैसों के लिए काम नहीं करती थीं। लोकप्रियता बढ़ने के साथ फीस में केवल मामूली बढ़ोतरी होती थी। एक्ट्रेस के मुताबिक, उनके काम को निर्माताओं ने पसंद किया, लेकिन कमाई से ज्यादा उनके लिए फिल्मों का अनुभव और पहचान मायने रखती थी। आज के स्टार्स की फीस का थोड़ा भी नहीं मिलता था हेमा मालिनी ने इंटरव्यू में पूछा कि यह किसने कहा कि वे सबसे महंगी एक्ट्रेस थीं? उन्होंने बताया कि उनके दौर में बहुत कम पैसे मिलते थे। आज के दौर के कलाकारों को जो बड़ी रकम मिलती है, उन्हें उसका एक छोटा हिस्सा भी नहीं मिलता था। एक्ट्रेस ने कहा कि निर्देशक और निर्माता उन्हें बहुत पसंद करते थे, लेकिन उन्होंने कभी पैसों को सामने रखकर काम नहीं किया। जैसे-जैसे नाम बढ़ता गया, मेकर्स अपनी मर्जी से भुगतान थोड़ा बढ़ा देते थे। लिफाफा मिलता, उसे दीक्षा की तरह मानती थीं हेमा मालिनी ने बताया कि उनके काम का पूरा मैनेजमेंट उनकी मां संभालती थीं। उनकी मां निर्माताओं को लेकर बहुत उदार थीं। अगर कोई निर्माता आकर कहता था कि वह इस फिल्म के लिए ज्यादा पैसे नहीं दे सकता, तो उनकी मां बिना किसी आपत्ति के मान जाती थीं। उन्होंने कभी किसी फिल्म के लिए यह शर्त नहीं रखी कि इतनी फीस मिलने पर ही काम करेंगी। निर्माता जो भी छोटा-मोटा लिफाफा दे दे थे, उसे वे दीक्षा की तरह स्वीकार कर लेती थीं। पैसों से बढ़कर उनके लिए फिल्मों से मिलने वाला सम्मान था। ‘सपनों का सौदागर’ से शुरू हुआ था फिल्मी सफर हेमा मालिनी ने साल 1968 में आई फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद 1970 और 1980 के दशक में वे एक बड़ी स्टार बनकर उभरीं। उन्होंने ‘सीता और गीता’, ‘शोले’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘सत्ते पे सत्ता’ और ‘बागबान’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। दर्शकों के बीच उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को काफी पसंद किया गया, जिसके बाद उन्हें बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ कहा जाने लगा। राजनीति में सक्रिय हैं और मिल चुका है पद्म श्री फिल्मों के अलावा हेमा मालिनी एक कुशल भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वर्तमान में वे राजनीति में सक्रिय हैं और लोकसभा सदस्य (सांसद) के रूप में काम कर रही हैं। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए साल 2000 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था। इसके बाद साल 2012 में सर पदमपत सिंहानिया यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी दी थी। अभिनय के बाद निर्देशन में भी आजमाया हाथ अभिनय में सफलता पाने के बाद हेमा मालिनी ने निर्देशन और प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने साल 1992 में फिल्म ‘दिल आशना है’ का निर्देशन और निर्माण किया था। इस फिल्म में शाहरुख खान और दिव्या भारती मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद साल 1995 में उन्होंने अपनी भतीजी मधू और सुदेश बेरी को लेकर फिल्म ‘मोहिनी’ बनाई थी। बाद में उन्होंने फिल्मों में काम कम कर दिया और क्लासिकल डांस के साथ टीवी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना शुरू किया।
हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस होने के दावे पर बोलीं हेमा मालिनी:आज के स्टार्स की फीस का थोड़ा भी नहीं मिला, पैसों के लिए काम नहीं किया

बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस और सांसद हेमा मालिनी ने 1970 और 80 के दशक में इंडस्ट्री की सबसे महंगी एक्ट्रेस होने के दावे को खारिज कर दिया है। ‘हिंदी रश’ पॉडकास्ट में हेमा मालिनी ने कहा कि उन्हें कभी भी आज के स्टार्स जितनी मोटी फीस नहीं मिली। उन्होंने साफ किया कि वे पैसों के लिए काम नहीं करती थीं। लोकप्रियता बढ़ने के साथ फीस में केवल मामूली बढ़ोतरी होती थी। एक्ट्रेस के मुताबिक, उनके काम को निर्माताओं ने पसंद किया, लेकिन कमाई से ज्यादा उनके लिए फिल्मों का अनुभव और पहचान मायने रखती थी। आज के स्टार्स की फीस का थोड़ा भी नहीं मिलता था हेमा मालिनी ने इंटरव्यू में पूछा कि यह किसने कहा कि वे सबसे महंगी एक्ट्रेस थीं? उन्होंने बताया कि उनके दौर में बहुत कम पैसे मिलते थे। आज के दौर के कलाकारों को जो बड़ी रकम मिलती है, उन्हें उसका एक छोटा हिस्सा भी नहीं मिलता था। एक्ट्रेस ने कहा कि निर्देशक और निर्माता उन्हें बहुत पसंद करते थे, लेकिन उन्होंने कभी पैसों को सामने रखकर काम नहीं किया। जैसे-जैसे नाम बढ़ता गया, मेकर्स अपनी मर्जी से भुगतान थोड़ा बढ़ा देते थे। लिफाफा मिलता, उसे दीक्षा की तरह मानती थीं हेमा मालिनी ने बताया कि उनके काम का पूरा मैनेजमेंट उनकी मां संभालती थीं। उनकी मां निर्माताओं को लेकर बहुत उदार थीं। अगर कोई निर्माता आकर कहता था कि वह इस फिल्म के लिए ज्यादा पैसे नहीं दे सकता, तो उनकी मां बिना किसी आपत्ति के मान जाती थीं। उन्होंने कभी किसी फिल्म के लिए यह शर्त नहीं रखी कि इतनी फीस मिलने पर ही काम करेंगी। निर्माता जो भी छोटा-मोटा लिफाफा दे दे थे, उसे वे दीक्षा की तरह स्वीकार कर लेती थीं। पैसों से बढ़कर उनके लिए फिल्मों से मिलने वाला सम्मान था। ‘सपनों का सौदागर’ से शुरू हुआ था फिल्मी सफर हेमा मालिनी ने साल 1968 में आई फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद 1970 और 1980 के दशक में वे एक बड़ी स्टार बनकर उभरीं। उन्होंने ‘सीता और गीता’, ‘शोले’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘सत्ते पे सत्ता’ और ‘बागबान’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। दर्शकों के बीच उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को काफी पसंद किया गया, जिसके बाद उन्हें बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ कहा जाने लगा। राजनीति में सक्रिय हैं और मिल चुका है पद्म श्री फिल्मों के अलावा हेमा मालिनी एक कुशल भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वर्तमान में वे राजनीति में सक्रिय हैं और लोकसभा सदस्य (सांसद) के रूप में काम कर रही हैं। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए साल 2000 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया था। इसके बाद साल 2012 में सर पदमपत सिंहानिया यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी दी थी। अभिनय के बाद निर्देशन में भी आजमाया हाथ अभिनय में सफलता पाने के बाद हेमा मालिनी ने निर्देशन और प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने साल 1992 में फिल्म ‘दिल आशना है’ का निर्देशन और निर्माण किया था। इस फिल्म में शाहरुख खान और दिव्या भारती मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद साल 1995 में उन्होंने अपनी भतीजी मधू और सुदेश बेरी को लेकर फिल्म ‘मोहिनी’ बनाई थी। बाद में उन्होंने फिल्मों में काम कम कर दिया और क्लासिकल डांस के साथ टीवी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना शुरू किया।
कृति सेनन ने फिल्म 'मिमी' के समय एग्स फ्रीज कराए:बोलीं- शादी या बच्चे अपनी मर्जी से होने चाहिए, मां बनने का कोई दबाव नहीं चाहती

बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन ने खुलासा किया है कि उन्होंने अपनी फिल्म ‘मिमी’ की तैयारी के दौरान अपने एग्स फ्रीज कराए थे। ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ को दिए एक इंटरव्यू में कृति ने बताया कि इस फिल्म के रोल के लिए उन्हें वजन बढ़ाना था। चूंकि एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया में शरीर में भारीपन आता है, इसलिए उन्होंने इस समय का समझदारी से इस्तेमाल किया। 35 साल की कृति ने कहा कि वे बायोलॉजिकल क्लॉक या किसी तरह के सामाजिक दबाव के कारण शादी या बच्चे का फैसला नहीं करना चाहती हैं। वजन बढ़ाने के समय को किया इस्तेमाल कृति सेनन ने बताया कि फिल्म ‘मिमी’ के लिए उन्हें एक बड़ा फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन करना था। उन्हें अपने किरदार के लिए काफी वजन बढ़ाना था। इसी दौरान उन्होंने एग फ्रीजिंग कराने का फैसला किया। कृति के मुताबिक, उन्हें किसी ने सलाह दी थी कि अगर आप ऐसा कर सकती हैं, तो यह खुद को दिया जाने वाला सबसे अच्छा तोहफा है। यह बात उनके दिमाग में बैठ गई थी और जब उन्हें फिल्म के लिए वजन बढ़ाने को कहा गया, तो उन्हें लगा कि यह एग फ्रीजिंग कराने का सबसे सही समय है। शादी और बच्चों के लिए नहीं चाहतीं कोई दबाव एग फ्रीजिंग कराने की वजह बताते हुए कृति ने कहा कि वे भविष्य में मां बनने के समय को लेकर किसी तरह के दबाव में नहीं रहना चाहती हैं। वे कभी भी इस बात से बंधना नहीं चाहतीं कि उन्हें उम्र के कारण अभी शादी करनी है या अभी बच्चे पैदा करने हैं। कृति ने कहा कि शादी या बच्चे का फैसला इंसान को तब करना चाहिए जब वह अंदर से इसके लिए पूरी तरह तैयार महसूस करे। यह फैसला किसी घड़ी की सुई या दबाव को देखकर नहीं होना चाहिए। क्या होती है एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया? एग फ्रीजिंग एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसमें महिला के एग्स को निकालकर उन्हें बिना फर्टिलाइज किए फ्रीज कर दिया जाता है। इसके बाद इन्हें भविष्य में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित स्टोर किया जाता है। यह तकनीक उन महिलाओं की मदद करती है जो किसी वजह से अपनी प्रेग्नेंसी या मदरहुड को कुछ समय के लिए टालना चाहती हैं। कृति ने इस प्रक्रिया के हार्मोनल और इमोशनल असर पर भी बात की और इसे महिलाओं के लिए एक बेहतर विकल्प बताया। हाल ही में हिट रही फिल्म ‘कॉकटेल 2’ वर्कफ्रंट की बात करें तो कृति सेनन को आखिरी बार फिल्म ‘कॉकटेल 2’ में देखा गया था। इस फिल्म में उनके साथ शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में थे। होमी अडजानिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी लव रंजन और तरुण जैन ने लिखी थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई थी और इसने दुनिया भर में 130 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की थी।
कंगना की क्वीन 2 विवादों में:फैंटम स्टूडियो ने जियो स्टूडियो के खिलाफ 250 करोड़ का मुकदमा किया, आरोप- फिल्म के राइट्स

कंगना रनोट ने हाल ही में 2018 में रिलीज हुई हिट फिल्म क्वीन के सीक्वल क्वीन 2 के शूटिंग पूरी की है। शूटिंग खत्म होते ही फिल्म विवादों में आ गई। फिल्म के 50 प्रतिशत राइट्स रखने वाले प्रोडक्शन हाउस ने ये सीक्वल बना रहे जियो स्टूडियो के खिलाफ 250 करोड़ रुपए का मुकदमा दायर किया है। फैंटम स्टूडियो ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट में जियो स्टूडियो के खिलाफ 250 करोड़ का मुकदमा दायर कर आरोप लगाए हैं कि क्वीन 2 बिना परमिशन के बनाई जा रही है। मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, फैंटम स्टूडियोज के पास फिल्म ‘क्वीन’ के 50% राइट्स हैं, जिनमें फिल्म का सीक्वल बनाने का अधिकार भी शामिल है। कंपनी का दावा है कि उसने अब तक किसी भी सीक्वल, एडेप्शन या डेरिवेटिव वर्क के लिए अपनी सहमति नहीं दी है। मुकदमा दायर करने से पहले मांगा था जवाब रिपोर्ट के अनुसार, फैंटम स्टूडियोज ने इस विवाद को सुलझाने के लिए कई बार जियोस्टार से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से किसी भी अनुरोध का जवाब नहीं दिया गया। इस बीच, साल की शुरुआत में फ्लोर पर गई ‘क्वीन 2’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है और अब फिल्म का पोस्ट-प्रोडक्शन भी शुरू हो चुका है। जब कई बार कोशिश करने के बावजूद हल नहीं निकला तो फैंटम स्टूडियो ने कानूनी कार्रवाई शुरू की। कंगना रनोट ने पूरी की क्वीन 2 की शूटिंग ‘क्वीन 2’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। शूटिंग इसी साल की शुरुआत में शुरू हुई थी और फिल्म अब पोस्ट-प्रोडक्शन के चरण में पहुंच गई है। फैंटम प्रोडक्शन के बारे में जानिए- फिल्म क्वीन 2018 में रिलीज हुई थी, जिसे फैंटम फिल्म्स ने बनाया था। इस प्रोडक्शन हाउस को डायरेक्टर विकास बहल, अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवानी और मधु मंटेना ने शुरू किया था। मीटू मूमेंट के बाद विकास बहल और कंपनी के संस्थापकों के बीच मतभेद शुरू हो गए और 2019 में फैंटम प्रोडक्शन बंद कर दिया गया। 2021 में प्रोडक्शन कंपनी दोबारा शुरू की गई। इसी समय रिलायंस ने फिल्म के शेयर खरीदे थे। ये प्रोडक्शन हाउस अब तक क्वीन, हंसी तो फंसी, अगली, हंटर, बॉम्बे वेलवेट, मसान, शानदार, उड़ता पंजाब, मनमर्जियां, सुपर 30 जैसी फिल्में प्रोड्यूस कर चुका है।
दिलीप कुमार की 5वीं पुण्यतिथि पर भावुक हुईं सायरा बानो:लिखा- साहब मुझे यादों का खजाना देकर गए, उनके बिना जिंदगी में खालीपन है

दिग्गज अभिनेता दिवंगत दिलीप कुमार की आज पांचवीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनकी पत्नी और पूर्व एक्ट्रेस सायरा बानो ने सोशल मीडिया पर एक भावुक नोट शेयर किया है। 81 साल की सायरा बानो ने इंस्टाग्राम पर दिलीप कुमार के साथ अपनी कई पुरानी तस्वीरें पोस्ट की हैं। उन्होंने लिखा कि दिलीप साहब भले ही उनकी नजरों से दूर हो गए हैं, लेकिन वे उनकी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। सायरा ने दिलीप कुमार के साथ बिताए समय को अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और मुकम्मल हिस्सा बताया। यादों को बताया सबसे वफादार साथी सायरा बानो ने अपने पोस्ट में लिखा कि जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि यादों में बनी रहती है। समय के उलट, यादें सबसे वफादार साथी होती हैं। वे बिना बुलाए लौट आती हैं और हर मुस्कान, हर नजर और हर शब्द को इस तरह वापस ले आती हैं जैसे कुछ भी नहीं खोया हो। किसी को याद रखना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि उन्हें कभी भुलाया नहीं गया। दिलीप साहब देकर गए यादों का खजाना सायरा ने दिलीप कुमार को याद करते हुए लिखा कि मुझे लगता है कि साहब ने इस दुनिया को छोड़ने से पहले मुझे एक बड़ा खजाना दिया है। यह खजाना उनकी यादों का है, जो इतना समृद्ध है कि मैं अपनी बाकी की जिंदगी इन्हीं यादों के बीच रहकर बिता दूंगी। उन्होंने आगे लिखा कि 7 जुलाई 2021 को दिलीप कुमार सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को छोड़कर चले गए थे जो उनसे प्यार करती थी। उनके जाने से परिवार, दोस्तों और सिनेमा जगत में एक ऐसा खालीपन आया जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। नजरों से दूर हुए, जिंदगी से नहीं सायरा बानो ने दिलीप कुमार के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए लिखा कि वे दुनिया के लिए एक बड़े स्टार थे, लेकिन मेरे लिए वे मेरी जिंदगी का सहारा और मेरी शांत ताकत थे। हमारी जिंदगी सिर्फ साथ रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से सफल थी। साहब के जाने को पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन वे मेरी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। ऐसा गहरा प्यार समय के सामने नहीं झुकता। वे हर रोज मेरी यादों में रहते हैं। 12-13 साल की उम्र में ही दिलीप कुमार को दिल दे बैठीं सायरा इससे पहले दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में सायरा जी ने कहा था, ‘12-13 साल की थी, जब पहली बार उन्हें देखा था। पहली बार देखते ही मैंने अपनी मां से कहा कि जब बड़ी हो जाऊंगी तो इसी शख्स से शादी करूंगी। वे जब सफेद कुर्ते पजामे में हाथ फोल्ड करके निकलते थे, तो ऐसा लगता था कि इंसान नहीं फरिश्ता आ रहा है। मैं बहुत लकी हूं कि उनसे शादी कर पाई, वर्ना देश में उस वक्त तमाम खूबसूरत लड़कियां थीं, जो उनके लिए मर-मिटने को तैयार थीं।’ दोनों की जोड़ी को माना जाता है मिसाल दिलीप कुमार और सायरा बानो की जोड़ी को बॉलीवुड की सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक माना जाता है। दोनों ने साल 1966 में शादी की थी और दिलीप कुमार के आखिरी समय तक सायरा हमेशा उनके साथ रहीं। दिलीप कुमार के बीमार रहने के दौरान भी सायरा ने पूरी तरह उनका ख्याल रखा। जब दिलीप कुमार जीवित थे, तब आमिर खान और शाह रुख खान जैसे बॉलीवुड के बड़े स्टार्स अक्सर उनके घर उनसे मिलने आया करते थे। लंबी बीमारी के बाद 7 जुलाई 2021 को 98 वर्ष की उम्र में दिलीप कुमार का निधन हो गया था।
दिलीप कुमार की 5वीं पुण्यतिथि पर भावुक हुईं सायरा बानो:लिखा- साहब मुझे यादों का खजाना देकर गए, उनके बिना जिंदगी में खालीपन है

दिग्गज अभिनेता दिवंगत दिलीप कुमार की आज पांचवीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनकी पत्नी और पूर्व एक्ट्रेस सायरा बानो ने सोशल मीडिया पर एक भावुक नोट शेयर किया है। 81 साल की सायरा बानो ने इंस्टाग्राम पर दिलीप कुमार के साथ अपनी कई पुरानी तस्वीरें पोस्ट की हैं। उन्होंने लिखा कि दिलीप साहब भले ही उनकी नजरों से दूर हो गए हैं, लेकिन वे उनकी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। सायरा ने दिलीप कुमार के साथ बिताए समय को अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और मुकम्मल हिस्सा बताया। यादों को बताया सबसे वफादार साथी सायरा बानो ने अपने पोस्ट में लिखा कि जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि यादों में बनी रहती है। समय के उलट, यादें सबसे वफादार साथी होती हैं। वे बिना बुलाए लौट आती हैं और हर मुस्कान, हर नजर और हर शब्द को इस तरह वापस ले आती हैं जैसे कुछ भी नहीं खोया हो। किसी को याद रखना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि उन्हें कभी भुलाया नहीं गया। दिलीप साहब देकर गए यादों का खजाना सायरा ने दिलीप कुमार को याद करते हुए लिखा कि मुझे लगता है कि साहब ने इस दुनिया को छोड़ने से पहले मुझे एक बड़ा खजाना दिया है। यह खजाना उनकी यादों का है, जो इतना समृद्ध है कि मैं अपनी बाकी की जिंदगी इन्हीं यादों के बीच रहकर बिता दूंगी। उन्होंने आगे लिखा कि 7 जुलाई 2021 को दिलीप कुमार सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को छोड़कर चले गए थे जो उनसे प्यार करती थी। उनके जाने से परिवार, दोस्तों और सिनेमा जगत में एक ऐसा खालीपन आया जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। नजरों से दूर हुए, जिंदगी से नहीं सायरा बानो ने दिलीप कुमार के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए लिखा कि वे दुनिया के लिए एक बड़े स्टार थे, लेकिन मेरे लिए वे मेरी जिंदगी का सहारा और मेरी शांत ताकत थे। हमारी जिंदगी सिर्फ साथ रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से सफल थी। साहब के जाने को पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन वे मेरी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। ऐसा गहरा प्यार समय के सामने नहीं झुकता। वे हर रोज मेरी यादों में रहते हैं। 12-13 साल की उम्र में ही दिलीप कुमार को दिल दे बैठीं सायरा इससे पहले दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में सायरा जी ने कहा था, ‘12-13 साल की थी, जब पहली बार उन्हें देखा था। पहली बार देखते ही मैंने अपनी मां से कहा कि जब बड़ी हो जाऊंगी तो इसी शख्स से शादी करूंगी। वे जब सफेद कुर्ते पजामे में हाथ फोल्ड करके निकलते थे, तो ऐसा लगता था कि इंसान नहीं फरिश्ता आ रहा है। मैं बहुत लकी हूं कि उनसे शादी कर पाई, वर्ना देश में उस वक्त तमाम खूबसूरत लड़कियां थीं, जो उनके लिए मर-मिटने को तैयार थीं।’ दोनों की जोड़ी को माना जाता है मिसाल दिलीप कुमार और सायरा बानो की जोड़ी को बॉलीवुड की सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक माना जाता है। दोनों ने साल 1966 में शादी की थी और दिलीप कुमार के आखिरी समय तक सायरा हमेशा उनके साथ रहीं। दिलीप कुमार के बीमार रहने के दौरान भी सायरा ने पूरी तरह उनका ख्याल रखा। जब दिलीप कुमार जीवित थे, तब आमिर खान और शाह रुख खान जैसे बॉलीवुड के बड़े स्टार्स अक्सर उनके घर उनसे मिलने आया करते थे। लंबी बीमारी के बाद 7 जुलाई 2021 को 98 वर्ष की उम्र में दिलीप कुमार का निधन हो गया था।








