रूस में हिमस्खलन, 11 पर्वतारोहियों की मौत:33 लोगों के ग्रुप पर बर्फ गिरी; 6 अभी लापता, 50 से ज्यादा बचावकर्मी तलाश में जुटे

रूस के उत्तरी काकेशस इलाके में स्थित माउंट मिजहिरगी पर रविवार शाम हिमस्खलन हुआ। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में 11 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। वहीं 10 लोग किसी तरह सुरक्षित नीचे उतर आए, लेकिन 6 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव दल उनकी तलाश में जुटा हुआ है। जब हादसा हुआ उस समय 33 पर्वतारोहियों का एक समूह पहाड़ पर चढ़ाई कर रहा था। अचानक पहाड़ से बड़ी मात्रा में बर्फ खिसककर उनके ऊपर आ गिरी, जिससे कई लोग बर्फ के नीचे दब गए। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू:सरकार बोली- राजधानी सना को कब्जे में लेंगे; हूतियों का दावा- सऊदी एयरपोर्ट और अरामको को निशाना बनाया

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच फिर जंग तेज हो गई है। सरकार ने हूतियों के कब्जे वाली राजधानी सना को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। ताइज, अल-बायदा और अल-जौफ समेत कई इलाकों में लड़ाई हो रही है। दूसरी तरफ हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के अबहा एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और तेल और गैस कंपनी अरामको की सुविधाओं को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है। सऊदी पर जेल पर हवाई हमले का आरोप 7 सितंबर को हूतियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने अल-जौफ प्रांत के अल-हज्म शहर की एक जेल पर हवाई हमला किया। शुरुआत में कहा गया था कि हमले में एक बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हुई है और कम से कम 7 लोग घायल हुए हैं। बाद में अल-जौफ सिविल डिफेंस के प्रमुख हसन साबौला ने मौतों का आंकड़ा बढ़कर 11 बताया। उन्होंने कहा कि 20 कैदी अभी भी मलबे में लापता हैं। हूती मीडिया के मुताबिक, मरने वालों में जेल में किसी से मिलने आया एक बच्चा भी शामिल था। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अरब ने जेल भी हमले के आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हूतियों का दावा- सऊदी के 4 निगरानी ड्रोन गिराए जेल हमले के आरोप के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। हूतियों ने कहा कि उन्होंने अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अरामको की कुछ सुविधाओं को निशाना बनाया। इसके अलावा सऊदी अरब के 4 निगरानी ड्रोन भी गिराए। इन हमलों से हुए नुकसान की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू:सरकार बोली- राजधानी सना को कब्जे में लेंगे; हूतियों का दावा- सऊदी एयरपोर्ट और अरामको को निशाना बनाया

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच फिर जंग तेज हो गई है। सरकार ने हूतियों के कब्जे वाली राजधानी सना को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। ताइज, अल-बायदा और अल-जौफ समेत कई इलाकों में लड़ाई हो रही है। दूसरी तरफ हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के अबहा एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और तेल और गैस कंपनी अरामको की सुविधाओं को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है। सऊदी पर जेल पर हवाई हमले का आरोप 7 सितंबर को हूतियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने अल-जौफ प्रांत के अल-हज्म शहर की एक जेल पर हवाई हमला किया। शुरुआत में कहा गया था कि हमले में एक बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हुई है और कम से कम 7 लोग घायल हुए हैं। बाद में अल-जौफ सिविल डिफेंस के प्रमुख हसन साबौला ने मौतों का आंकड़ा बढ़कर 11 बताया। उन्होंने कहा कि 20 कैदी अभी भी मलबे में लापता हैं। हूती मीडिया के मुताबिक, मरने वालों में जेल में किसी से मिलने आया एक बच्चा भी शामिल था। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अरब ने जेल भी हमले के आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हूतियों का दावा- सऊदी के 4 निगरानी ड्रोन गिराए जेल हमले के आरोप के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। हूतियों ने कहा कि उन्होंने अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अरामको की कुछ सुविधाओं को निशाना बनाया। इसके अलावा सऊदी अरब के 4 निगरानी ड्रोन भी गिराए। इन हमलों से हुए नुकसान की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। सऊदी का दावा- हूती हमलों में 73 लोग घायल इधर हूतियों पर सऊदी शहरों में नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप है। इन हमलों में 73 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। हमलों का असर अबहा, खमिस मुशैत, नजरान और जिजान में पड़ा। सऊदी पक्ष के मुताबिक, घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सऊदी अरब ने इन हमलों का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। यमनी सरकार ने कहा- अब सना वापस लेंगे बढ़ते तनाव के बीच यमन के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर मेजर जनरल समीर अल-साबरी ने कहा कि सरकार ने सना को वापस लेने का फैसला किया है। सरकार समर्थित सेना ने हूती ठिकानों पर रॉकेट और हवाई हमले किए हैं। जमीन पर भी दोनों पक्षों के बीच भारी लड़ाई चल रही है। सरकार समर्थित सेना के प्रवक्ता माजिद अल-नुजैली ने कहा कि लक्ष्य यमन को हूतियों के कब्जे से मुक्त कराना और सना को फिर से सभी यमनियों की राजधानी बनाना है। सरकार ने सना जाने वाली कुछ प्रमुख सड़कों पर आम लोगों को जाने से बचने की चेतावनी भी दी है। अल-जौफ क्यों बना अहम मोर्चा? यमन का अल-जौफ सऊदी अरब की सीमा के करीब है। यह इलाका सना की दिशा में जाने वाले महत्वपूर्ण रास्तों से जुड़ा है। इसलिए यहां बढ़त बनाने से सरकार समर्थित सेना को राजधानी की तरफ आगे बढ़ने में रणनीतिक फायदा मिल सकता है। इसी वजह से अल-जौफ में चल रही लड़ाई को मौजूदा सैन्य अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। ताइज और अल-बायदा में भी लड़ाई तेज सरकार और हूतियों के बीच लड़ाई सिर्फ अल-जौफ तक सीमित नहीं है। ताइज, अल-बायदा और मारिब में भी दोनों पक्षों के बीच संघर्ष तेज हुआ है। ताइज पश्चिमी यमन का महत्वपूर्ण इलाका है। यहां लंबे समय से सरकार और हूतियों के बीच संघर्ष रहा है। अल-बायदा यमन के बीच में स्थित है। यह उत्तर और दक्षिण के कई इलाकों को जोड़ता है। इन इलाकों पर नियंत्रण से दोनों पक्षों को सैनिकों और हथियारों की आवाजाही में फायदा मिल सकता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता:रामानंद सागर के पोते ने रामायण कास्टिंग पर उठाए सवाल, कहा- एनिमल कैरेक्टर का बोझ है

रामानंद सागर के पोते और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर शिव सागर ने नितेश तिवारी की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर को भगवान राम के रोल में लेने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ‘एनिमल’ के बाद वह रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। शिव सागर ने न्यूज एजेंसी ANI से नितेश तिवारी की रामायण पर कहा, “एक कास्टिंग को छोड़कर मुझे बाकी पूरी कास्टिंग बहुत पसंद है। पर्सनली मैं ‘एनिमल’ के बाद मैं रणबीर कपूर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता। जब मैं रामजी को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि किसी नए चेहरे को लिया जाना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “आप एक बहुत मजबूत सपोर्टिंग कास्ट ले सकते हैं। यश बहुत अच्छे लग रहे हैं और साई पल्लवी भी बहुत अच्छी लग रही हैं। उन दोनों के साथ पिछली भूमिकाओं का इतना बोझ नहीं है। रणबीर के साथ बहुत बोझ है। इसलिए हम आमतौर पर अपने सीरियल्स में नए चेहरे लेते हैं, ताकि उनकी कोई पिछली छवि या इतिहास न हो।” उन्होंने शिव सागर ने कहा, “हो सकता है कि अगर रणबीर को नहीं लिया जाता, तो फिल्म की मार्केटिंग इतनी अच्छी तरह नहीं हो पाती। इस बारे में भी सोचना चाहिए। लेकिन मेरा निजी मानना है कि ऐसे किरदारों के लिए नया चेहरा लेना बेहतर होता है। क्योंकि ‘रामायण’ के बाद क्या लोग उन्हें फिर ‘एनिमल’ जैसी फिल्म में स्वीकार कर पाएंगे? खासकर जब बात रामजी और रामायण की आती है, तो लोग ज्यादा संवेदनशील और भावुक होते हैं।” शिव सागर ने कहा, “पश्चिमी देशों में इसे माइथोलॉजी कहा जाता है। भारत में भी इसे माइथोलॉजी कहा जाता है, लेकिन यह हमारा इतिहास है। लोग हर दिन उनकी पूजा करते हैं। राम हमारे इतिहास का हिस्सा हैं।” कास्टिंग के अलावा कॉस्ट्यूम पर भी जताई नाराजगी शिव सागर ने कुछ कॉस्ट्यूम और कास्टिंग फैसलों पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा, “असल में जनता ही राजा है। जनता जो कहेगी, वही अंतिम फैसला होगा। मुझे कुछ हिस्सों की कास्टिंग और कॉस्ट्यूम पसंद नहीं आए। उन्हें बेहतर किया जा सकता था।” शिव सागर की राय इसलिए भी अहम है, क्योंकि उनके दादा रमनंद सागर ने बेहद लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ बनाया था। शिव सागर ने साई पल्लवी और यश की कास्टिंग की सराहना की और कहा कि आपत्तियों के बावजूद फिल्म की कास्टिंग और क्रिएटिव फैसलों पर दर्शकों की प्रतिक्रिया ही सबसे अहम होगी। ‘रामायण: पार्ट 1’ नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही दो हिस्सों वाली फिल्म है। इसका दुनियाभर में सिनेमाघरों में रिलीज शेड्यूल 6 नवंबर 2026 है। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले ‘ग्लैमरस लुक’ पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी सेना का चित्रण मंगोल लुटेरों की तरह किया गया था। इस भारी विरोध के कारण करोड़ों के बजट में बनी वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी।
रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता:रामानंद सागर के पोते ने रामायण कास्टिंग पर उठाए सवाल, कहा- एनिमल कैरेक्टर का बोझ है

रामानंद सागर के पोते और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर शिव सागर ने नितेश तिवारी की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर को भगवान राम के रोल में लेने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ‘एनिमल’ के बाद वह रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। शिव सागर ने न्यूज एजेंसी ANI से नितेश तिवारी की रामायण पर कहा, “एक कास्टिंग को छोड़कर मुझे बाकी पूरी कास्टिंग बहुत पसंद है। पर्सनली मैं ‘एनिमल’ के बाद मैं रणबीर कपूर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता। जब मैं रामजी को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि किसी नए चेहरे को लिया जाना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “आप एक बहुत मजबूत सपोर्टिंग कास्ट ले सकते हैं। यश बहुत अच्छे लग रहे हैं और साई पल्लवी भी बहुत अच्छी लग रही हैं। उन दोनों के साथ पिछली भूमिकाओं का इतना बोझ नहीं है। रणबीर के साथ बहुत बोझ है। इसलिए हम आमतौर पर अपने सीरियल्स में नए चेहरे लेते हैं, ताकि उनकी कोई पिछली छवि या इतिहास न हो।” उन्होंने शिव सागर ने कहा, “हो सकता है कि अगर रणबीर को नहीं लिया जाता, तो फिल्म की मार्केटिंग इतनी अच्छी तरह नहीं हो पाती। इस बारे में भी सोचना चाहिए। लेकिन मेरा निजी मानना है कि ऐसे किरदारों के लिए नया चेहरा लेना बेहतर होता है। क्योंकि ‘रामायण’ के बाद क्या लोग उन्हें फिर ‘एनिमल’ जैसी फिल्म में स्वीकार कर पाएंगे? खासकर जब बात रामजी और रामायण की आती है, तो लोग ज्यादा संवेदनशील और भावुक होते हैं।” शिव सागर ने कहा, “पश्चिमी देशों में इसे माइथोलॉजी कहा जाता है। भारत में भी इसे माइथोलॉजी कहा जाता है, लेकिन यह हमारा इतिहास है। लोग हर दिन उनकी पूजा करते हैं। राम हमारे इतिहास का हिस्सा हैं।” कास्टिंग के अलावा कॉस्ट्यूम पर भी जताई नाराजगी शिव सागर ने कुछ कॉस्ट्यूम और कास्टिंग फैसलों पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा, “असल में जनता ही राजा है। जनता जो कहेगी, वही अंतिम फैसला होगा। मुझे कुछ हिस्सों की कास्टिंग और कॉस्ट्यूम पसंद नहीं आए। उन्हें बेहतर किया जा सकता था।” शिव सागर की राय इसलिए भी अहम है, क्योंकि उनके दादा रमनंद सागर ने बेहद लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ बनाया था। शिव सागर ने साई पल्लवी और यश की कास्टिंग की सराहना की और कहा कि आपत्तियों के बावजूद फिल्म की कास्टिंग और क्रिएटिव फैसलों पर दर्शकों की प्रतिक्रिया ही सबसे अहम होगी। ‘रामायण: पार्ट 1’ नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही दो हिस्सों वाली फिल्म है। इसका दुनियाभर में सिनेमाघरों में रिलीज शेड्यूल 6 नवंबर 2026 है। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले ‘ग्लैमरस लुक’ पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी सेना का चित्रण मंगोल लुटेरों की तरह किया गया था। इस भारी विरोध के कारण करोड़ों के बजट में बनी वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी।
ब्रिटेन के किले पर पाकिस्तान का झंडा फहराने पर विवाद:दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने विरोध किया, कहा- ऐतिहासिक इमारत पर विदेशी झंडा क्यों

ब्रिटेन के वेल्स में कार्डिफ कैसल (किले) पर पाकिस्तान का झंडा फहराने को लेकर विवाद हो गया है। दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने इसका विरोध किया है। रिफॉर्म के सीनियर नेता रॉबर्ट जेनरिक ने सोशल मीडिया पर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तानी झंडा फहराए जाने का वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों पर विदेशी झंडे फहराया जाना बंद होना चाहिए।उन्होंने लिखा, कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया है। हम अपनी संस्कृति पर कब्जे की इस कोशिश को क्यों होने दे रहे हैं? अब यह हर जगह दिखाई देता है। कार्डिफ काउंसिल ने बताया कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त को कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया था। इससे पहले 9 अगस्त को भी एक कार्यक्रम में झंडा फहराया गया था और वह रातभर लगा रहा। कंजरवेटिव नेता बोलीं- यह सम्मान है, कब्जा नहीं वेल्श कंजरवेटिव सांसद नताशा असगर ने रिफॉर्म के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी, भारतीय और पोलिश समुदायों के झंडा फहराने के कार्यक्रमों में वह खुद शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोग शामिल होते हैं। यह किसी समुदाय का कब्जा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है। असगर ने कहा, “मैं रिफॉर्म की ओर से नस्लीय विवाद भड़काने की कोशिशों से तंग आ चुकी हूं।” उन्होंने रिफॉर्म नेताओं को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने की सलाह दी, ताकि वे देख सकें कि अलग-अलग समुदायों के बीच मेल-जोल कैसे होता है। काउंसिल ने कहा- भारत का झंडा भी फहराया था कार्डिफ काउंसिल के लेबर नेता क्रिस वीवर ने कहा कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का मकसद कार्डिफ में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देना था। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय झंडा भी फहराया गया था। वीवर ने कहा कि काउंसिल लंबे समय से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मौकों पर अलग-अलग देशों के झंडे फहराती रही है। कार्डिफ कैसल पर वेल्स और ब्रिटेन के झंडे भी लगे रहते हैं। उन्होंने कहा, “यह पूरा विवाद गलत जानकारी की वजह से खड़ा हुआ है और अब इसे बंद होना चाहिए।” विवाद में 2024 की पुरानी तस्वीर भी रिफॉर्म वेल्स के नेता डैन थॉमस ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “अब लेबर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहरा रही है।” लेकिन यह तस्वीर नई नहीं थी। इसे 14 अगस्त 2024 को एक BBC पत्रकार ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पोस्ट किया था। सोमवार को कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा नहीं दिखा। BBC Wales ने रिफॉर्म से पूछा कि थॉमस ने दो साल पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल क्यों किया और पोस्ट में ऐसे क्यों लिखा जैसे झंडा अभी फहराया गया हो। रिफॉर्म वेल्स ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। स्थानीय नेता बोले- वेल्स की पहचान को खतरा नहीं वेल्स की एक स्थानीय पार्टी की वेस्टमिंस्टर नेता लिज सेविल रॉबर्ट्स ने भी रिफॉर्म पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश का झंडा फहराने से वेल्स की पहचान को कोई खतरा नहीं है। उनके मुताबिक, रॉबर्ट जेनरिक अपनी पार्टी की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं। रिफॉर्म वेल्स इससे पहले कार्डिफ बे में वेल्स की संसद Senedd के बाहर यूक्रेन का झंडा फहराने का भी विरोध कर चुकी है। पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देने की बात कार्डिफ काउंसिल ने कहा कि कार्डिफ कैसल शहर की प्रमुख ऐतिहासिक और सार्वजनिक इमारतों में से एक है। ऐसे मौकों पर यहां झंडा फहराने से शहर अलग-अलग स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवसरों को सम्मान देता है। काउंसिल के मुताबिक, पाकिस्तान का झंडा फहराना कार्डिफ के बहुसांस्कृतिक समाज और यहां रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को पहचानने का हिस्सा था। खबर अपडेट हो रही है…
ब्रिटेन के किले पर पाकिस्तान का झंडा फहराने पर विवाद:दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने विरोध किया, कहा- ऐतिहासिक इमारत पर विदेशी झंडा क्यों

ब्रिटेन के वेल्स में कार्डिफ कैसल (किले) पर पाकिस्तान का झंडा फहराने को लेकर विवाद हो गया है। दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने इसका विरोध किया है। रिफॉर्म के सीनियर नेता रॉबर्ट जेनरिक ने सोशल मीडिया पर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तानी झंडा फहराए जाने का वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों पर विदेशी झंडे फहराया जाना बंद होना चाहिए।उन्होंने लिखा, कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया है। हम अपनी संस्कृति पर कब्जे की इस कोशिश को क्यों होने दे रहे हैं? अब यह हर जगह दिखाई देता है। कार्डिफ काउंसिल ने बताया कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त को कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया था। इससे पहले 9 अगस्त को भी एक कार्यक्रम में झंडा फहराया गया था और वह रातभर लगा रहा। कंजरवेटिव नेता बोलीं- यह सम्मान है, कब्जा नहीं वेल्श कंजरवेटिव सांसद नताशा असगर ने रिफॉर्म के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी, भारतीय और पोलिश समुदायों के झंडा फहराने के कार्यक्रमों में वह खुद शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोग शामिल होते हैं। यह किसी समुदाय का कब्जा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है। असगर ने कहा, “मैं रिफॉर्म की ओर से नस्लीय विवाद भड़काने की कोशिशों से तंग आ चुकी हूं।” उन्होंने रिफॉर्म नेताओं को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने की सलाह दी, ताकि वे देख सकें कि अलग-अलग समुदायों के बीच मेल-जोल कैसे होता है। काउंसिल ने कहा- भारत का झंडा भी फहराया था कार्डिफ काउंसिल के लेबर नेता क्रिस वीवर ने कहा कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का मकसद कार्डिफ में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देना था। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय झंडा भी फहराया गया था। वीवर ने कहा कि काउंसिल लंबे समय से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मौकों पर अलग-अलग देशों के झंडे फहराती रही है। कार्डिफ कैसल पर वेल्स और ब्रिटेन के झंडे भी लगे रहते हैं। उन्होंने कहा, “यह पूरा विवाद गलत जानकारी की वजह से खड़ा हुआ है और अब इसे बंद होना चाहिए।” विवाद में 2024 की पुरानी तस्वीर भी रिफॉर्म वेल्स के नेता डैन थॉमस ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “अब लेबर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहरा रही है।” लेकिन यह तस्वीर नई नहीं थी। इसे 14 अगस्त 2024 को एक BBC पत्रकार ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पोस्ट किया था। सोमवार को कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा नहीं दिखा। BBC Wales ने रिफॉर्म से पूछा कि थॉमस ने दो साल पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल क्यों किया और पोस्ट में ऐसे क्यों लिखा जैसे झंडा अभी फहराया गया हो। रिफॉर्म वेल्स ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। स्थानीय नेता बोले- वेल्स की पहचान को खतरा नहीं वेल्स की एक स्थानीय पार्टी की वेस्टमिंस्टर नेता लिज सेविल रॉबर्ट्स ने भी रिफॉर्म पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश का झंडा फहराने से वेल्स की पहचान को कोई खतरा नहीं है। उनके मुताबिक, रॉबर्ट जेनरिक अपनी पार्टी की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं। रिफॉर्म वेल्स इससे पहले कार्डिफ बे में वेल्स की संसद Senedd के बाहर यूक्रेन का झंडा फहराने का भी विरोध कर चुकी है। पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देने की बात कार्डिफ काउंसिल ने कहा कि कार्डिफ कैसल शहर की प्रमुख ऐतिहासिक और सार्वजनिक इमारतों में से एक है। ऐसे मौकों पर यहां झंडा फहराने से शहर अलग-अलग स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवसरों को सम्मान देता है। काउंसिल के मुताबिक, पाकिस्तान का झंडा फहराना कार्डिफ के बहुसांस्कृतिक समाज और यहां रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को पहचानने का हिस्सा था। खबर अपडेट हो रही है…
ट्रम्प बोले कनाडाई कंपनी बॉम्बार्डियर विमान अमेरिका में नहीं बिकेंगे:कहा- हमारे बाजार चाहिए तो यहीं बनाओ, US को पिगी बैंक मत समझो

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कनाडाई विमान कंपनी बॉम्बार्डियर को अमेरिका में विमान बेचने से रोकने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर बॉम्बार्डियर को अमेरिकी बाजार में कारोबार करना है तो उसे विमान अमेरिका में ही बनाने होंगे। उन्होंने कनाडा पर अमेरिका के बाजार का गलत फायदा उठाने का आरोप लगाया। ट्रम्प ने सोमवार को ट्रूथ सोशल पर लिखा, अमेरिका में बॉम्बार्डियर की बिक्री अब नहीं होगी। उन्हें अमेरिका को पिगी बैंक समझना बंद करना होगा। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि बॉम्बार्डियर के विमानों की बिक्री रोकने के लिए अमेरिका कौन-सा कदम उठाएगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
ट्रम्प बोले कनाडाई प्लेन अमेरिका में नहीं बिकेंगे:कहा- हमारे बाजार चाहिए तो यहीं बनाओ, US को पिगी बैंक मत समझो

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कनाडाई विमान कंपनी बॉम्बार्डियर को अमेरिका में विमान बेचने से रोकने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर बॉम्बार्डियर को अमेरिकी बाजार में कारोबार करना है तो उसे विमान अमेरिका में ही बनाने होंगे। उन्होंने कनाडा पर अमेरिका के बाजार का गलत फायदा उठाने का आरोप लगाया। ट्रम्प ने सोमवार को ट्रूथ सोशल पर लिखा, अमेरिका में बॉम्बार्डियर विमान की बिक्री अब नहीं होगी। उन्हें अमेरिका को पिगी बैंक समझना बंद करना होगा। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि बॉम्बार्डियर के विमानों की बिक्री रोकने के लिए अमेरिका कौन-सा कदम उठाएगा। अमेरिका बॉम्बार्डियर के लिए सबसे बड़ा बाजार है अमेरिका बॉम्बार्डियर कंपनी के लिए बेहद अहम बाजार है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में बॉम्बार्डियर की कुल आय 9.55 अरब डॉलर रही। इस कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि कमाई का 50 प्रतिशत अमेरिका में किए गए कारोबार से आया। कंपनी ने कहा- हमारे कारण लोगों को नौकरी मिलीं ट्रम्प की धमकी के बाद बॉम्बार्डियर कंपनी ने कहा कि उसका अमेरिका में बड़ा कारोबार है और इससे वहां हजारों लोगों को नौकरी मिलती है। कंपनी ने बताया कि उसकी सप्लाई चेन में अमेरिका के 47 राज्यों की करीब 2,800 कंपनियां शामिल हैं। बॉम्बार्डियर ने यह भी कहा कि उसके विमानों में अमेरिका में बने इंजन, एवियोनिक्स और कई दूसरे अहम उपकरण इस्तेमाल होते हैं। कंपनी इस साल इंडियाना के फोर्ट वेन में अपनी नई फैसिलिटी भी शुरू करने वाली है। जनवरी में भी ट्रम्प ने दी थी धमकी कनाडाई कंपनी बॉम्बार्डियर को लेकर ट्रम्प पहले भी सख्त रुख अपना चुके हैं। जनवरी में उन्होंने कंपनी के विमानों का अमेरिका में सर्टिफिकेशन रद्द करने और कनाडाई विमानों पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उस समय ट्रम्प कनाडा से इसलिए नाराज थे क्योंकि उनका आरोप था कि कनाडा ने अमेरिकी कंपनी गल्फस्ट्रीम के नए विमानों को सर्टिफिकेशन देने से इनकार किया था। उस समय ट्रम्प की धमकी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बॉम्बार्डियर के विमान अभी भी अमेरिका में सर्टिफाइड हैं। अमेरिका-कनाडा के बीच बढ़ रहा ट्रेड वॉर बॉम्बार्डियर पर ट्रम्प की नई धमकी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। पिछले महीने ट्रम्प ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50% टैरिफ लगाया था। इसमें हॉकी स्टिक से लेकर सीमेंट तक के सामान शामिल थे। इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर जवाबी टैरिफ लगाने का फैसला किया है। मंगलवार से अमेरिकी स्टील, एल्युमिनियम और डेयरी उत्पादों पर 15%, 25% और 50% तक शुल्क लगाया जाना है। ———————–
फ्रांस में कर्मचारियों की हड़ताल से एफिल टॉवर बंद रहा:आरोप- हिंदू संगठन के दौरे पर महिला कर्मचारियों को हटाया

फ्रांस का मशहूर एफिल टॉवर कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सोमवार को बंद रहा। हड़ताल हिंदू संगठन BAPS के प्रतिनिधिमंडल के दौरे को लेकर हुई। कर्मचारियों का आरोप है कि शनिवार को BAPS के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी की जगह से हटा दिया गया। स्टाफ यूनियन की प्रतिनिधि डायने डावोआन ने रॉयटर्स से कहा कि प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने पर महिलाओं से अपनी जगह छोड़ने को कहा गया, ताकि वहां पुरुष कर्मचारियों को लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस घटना से महिला कर्मचारी काफी आहत और अपमानित महसूस कर रही हैं। गुस्सा बढ़ने के बाद सोमवार को कर्मचारियों ने बैठक की और प्रबंधन से बात की। मैंनेजमेंट बोला- ऐसा अनुरोध नहीं मानना चाहिए था एफिल टॉवर चलाने वाली कंपनी SETE ने AFP को बताया कि BAPS ने ऐसा इंतजाम करने को कहा था, जिसमें महिलाओं से बातचीत कम से कम हो। SETE ने माना कि उसे यह अनुरोध नहीं मानना चाहिए था। कंपनी ने कहा कि यह उसकी नीतियों और महिला-पुरुष बराबरी के खिलाफ था। SETE के अध्यक्ष एरियल वील ने इसे बिल्कुल गलत बताया। उन्होंने कहा कि एफिल टॉवर महिला-पुरुष बराबरी और फ्रांस के नियमों का सम्मान करता है। BAPS ने घटना पर माफी मांगी BAPS ने कहा कि करीब 100 लोगों का दौरा एफिल टॉवर की टीम के साथ मिलकर तय किया गया था। समय ऐसा रखा गया था कि दूसरे पर्यटकों को कम परेशानी हो। संगठन ने कहा कि उसकी जानकारी में किसी को टॉवर में जाने से नहीं रोका गया। फिर भी, इस घटना से किसी को दुख या परेशानी हुई हो तो उसने माफी मांगी। BAPS खुद को हिंदू आध्यात्मिक और स्वयंसेवी संगठन बताता है। लंदन, लॉस एंजिल्स और सिडनी समेत कई शहरों में इसके मंदिर हैं। रविवार को पेरिस में BAPS के फ्रांस में पहले बड़े मंदिर का उद्घाटन हुआ। पेरिस के मेयर बोले- घटना की जांच होगी पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने मामले की जांच कराने की बात कही। उन्होंने कर्मचारियों के गुस्से को जायज बताया। फ्रांस की समानता मंत्री ऑरोर बर्जे ने कहा, “फ्रांस में महिलाओं से खुद को छिपाने के लिए नहीं कहा जाता। कोई धर्म देश के कानून से ऊपर नहीं है।” दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने कहा कि फ्रांस महिलाओं की मौजूदगी को सीमित करने की बात कभी नहीं मानेगा। पूर्व प्रधानमंत्री गैब्रियल अताल ने कहा कि कोई संस्कृति, आस्था या धर्म महिलाओं को यह नहीं बता सकता कि उन्हें कहां रहना चाहिए। —————————- ये खबर भी पढ़ें…. ट्रम्प को रेयर-अर्थ मिनरल नहीं भेज पा रहा पाकिस्तान:बलूच हमलों से अमेरिकी कंपनी का काम बंद; मुनीर ने वॉशिंगटन में दिखाए थे सैंपल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ड्रीम प्रोजेक्ट अटक गया है। पाकिस्तान से रेअर अर्थ मिनरल (दुर्लभ खनिज) की अगस्त में प्रस्तावित खेप अमेरिका रवाना नहीं हो सकी। इसके बाद कराची और इस्लामाबाद में अमेरिकी कंपनी यूएस स्ट्रेटेजिक मेटल्स (USSM) के दफ्तरों में काम बंद हो गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…









