नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ से करीब 400 अरब नेपाली रुपये के नुकसान का शुरुआती अनुमान है। हादसे में अब तक 1,344 शव मिल चुके हैं, जबकि करीब 5 हजार लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ का असर अब नेपाल के पर्यटन कारोबार पर भी दिख रहा है। सितंबर से नवंबर के पीक टूरिस्ट सीजन में होटल और ट्रैवल कंपनियों की बुकिंग रद्द होने लगी हैं। काठमांडू के एक होटल की करीब 20% बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। होटल के मैनेजिंग डायरेक्टर के मुताबिक, बाढ़ के बाद एक हफ्ते में खासकर ऑनलाइन बुकिंग में तेजी से कैंसिलेशन हुआ। खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ से करीब 400 अरब नेपाली रुपये के नुकसान का शुरुआती अनुमान है। हादसे में अब तक 1,344 शव मिल चुके हैं, जबकि करीब 5 हजार लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ का असर अब नेपाल के पर्यटन कारोबार पर भी दिख रहा है। सितंबर से नवंबर के पीक टूरिस्ट सीजन में होटल और ट्रैवल कंपनियों की बुकिंग रद्द होने लगी हैं। काठमांडू के एक होटल की करीब 20% बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। होटल के मैनेजिंग डायरेक्टर के मुताबिक, बाढ़ के बाद एक हफ्ते में खासकर ऑनलाइन बुकिंग में तेजी से कैंसिलेशन हुआ। नेपाल बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें… खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमित दुबे की साइबर कहानियां पहुंचीं हिरानी-नीरज पांडे तक:बोले- क्रिमिनल डिवाइस नहीं, पहले इंसान को हैक करता है, ऐसे बचें साइबर ठगी से

साइबर क्राइम एक्सपर्ट और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अमित दुबे ने करियर में ऐसे कई मामलों की जांच की है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थे। उनकी वास्तविक इन्वेस्टिगेशन की कहानियां राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ और नीरज पांडे की ‘हैक क्राइम्स ऑनलाइन’ तक पहुंचीं। एटीएम चोरी, किडनैपिंग और एक एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट से फॉलोअर्स गायब होने जैसे मामलों से अमित ने साइबर क्राइम की बदलती दुनिया को करीब से देखा है। उनका कहना है कि अपराधी हर बार डिवाइस को हैक नहीं करता, कई बार पहले इंसान के भरोसे को हैक करता है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अमित ने साइबर क्राइम की अपनी इन्वेस्टिगेशन, फिल्ममेकर्स के साथ काम करने के अनुभव और आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियों पर खुलकर बात की। सवाल: आपकी वास्तविक साइबर इन्वेस्टिगेशन राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज तक पहुंची। उनसे यह कनेक्शन कैसे बना? जवाब: कोविड के दौरान राजू सर से मेरा कनेक्शन हुआ। उस समय साइबर क्राइम को लेकर हमारी बातचीत शुरू हुई और फिर वीडियो कॉल पर कई बार चर्चा हुई। मैंने उन्हें अपने काम और अलग-अलग इन्वेस्टिगेशन से जुड़ी कहानियां बताईं। उन्हें लगा कि इन केसों में सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि इंसानी व्यवहार और भावनाओं की भी काफी संभावनाएं हैं। इसके बाद हमने इन कहानियों पर काम करना शुरू किया। यह कोई छोटा प्रोसेस नहीं था। 6 साल तक कहानी और स्क्रिप्ट पर काम हुआ, कई ड्राफ्ट तैयार हुए और चीजों को लगातार बेहतर किया गया। सवाल: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ में एटीएम चोरी वाला सीन भी है। क्या यह आपके किसी वास्तविक केस से जुड़ा है? जवाब: हां, एटीएम चोरी का मामला मेरे वास्तविक अनुभवों से जुड़ा है। साइबर क्राइम की इन्वेस्टिगेशन में कई बार कोई केस शुरुआत में बहुत जटिल दिखाई देता है। आपको लगता है कि इसके पीछे बहुत हाईटेक तरीका होगा, लेकिन जब आप घटनाओं के पैटर्न और डिजिटल फुटप्रिंट को जोड़ते हैं तो तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगती है। यही चीज इस केस में भी थी। वास्तविक घटना को स्क्रीन पर उसी रूप में रखना संभव नहीं होता, इसलिए कहानी के हिसाब से उसमें बदलाव किए जाते हैं, लेकिन उसका बेस और इन्वेस्टिगेशन का अनुभव वास्तविक होता है। सवाल: इस केस से आम लोगों के लिए भी एक सीख निकलती है कि साइबर क्राइम हमेशा बहुत हाईटेक नहीं होता, क्या कहना चाहेंगे? जवाब: बिल्कुल। हम अक्सर मान लेते हैं कि साइबर क्रिमिनल कोई बहुत बड़ा कंप्यूटर एक्सपर्ट होगा और वह ऐसी तकनीक इस्तेमाल करेगा, जिसे समझना हमारे लिए मुश्किल है। जबकि कई मामलों में अपराध बहुत साधारण तरीके से शुरू होता है। छोटी-सी लापरवाही, किसी व्यक्ति पर भरोसा या जानकारी शेयर करना आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है। इन्वेस्टिगेशन में भी कई बार बड़ी सफलता किसी बहुत बड़े सुराग से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चीजों को जोड़ने से मिलती है। सवाल: राजकुमार हिरानी के बाद आपका जुड़ाव नीरज पांडे से भी हुआ। दोनों के काम करने के तरीके में क्या अंतर महसूस किया? जवाब: दोनों की अपनी अलग स्टोरीटेलिंग लैंग्वेज है। नीरज सर थ्रिल और सस्पेंस को बहुत मजबूत तरीके से बिल्ड करते हैं। उनके साथ काम करते हुए यह ध्यान रहता है कि दर्शक लगातार अगला मोड़ जानना चाहे। राजू सर का तरीका थोड़ा अलग है। वे गंभीर विषय में भी ह्यूमन इमोशन, ह्यूमर और रिश्तों की परतें तलाशते हैं। लेकिन एक चीज दोनों में समान है- दोनों कहानी को विश्वसनीय बनाना चाहते हैं। खासकर जब विषय साइबर क्राइम हो तो तकनीकी चीजें सही होना बहुत जरूरी है। सवाल: नीरज पांडे की ‘हैक क्राइम्स ऑनलाइन’ में साइबर क्राइम को पर्दे पर उतारना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि साइबर क्राइम को बहुत तकनीकी भी न बना दें और इतना सरल भी न कर दें कि वह अविश्वसनीय लगे। अगर आप सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन, कोड या टेक्निकल शब्द दिखाएंगे तो आम दर्शक कहानी से जुड़ नहीं पाएगा। इसलिए यह जरूरी है कि टेक्नोलॉजी के साथ इंसान की कहानी भी दिखाई जाए- अपराधी ऐसा क्यों कर रहा है, पीड़ित कैसे फंसता है और जांच करने वाला किस तरह चीजों को जोड़ता है। यही संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है। सवाल: आपकी इन्वेस्टिगेशन में ऐसा कौन-सा केस रहा, जो आपको आज भी याद है? जवाब: किडनैपिंग का एक केस काफी दिलचस्प था। उसमें डिजिटल लोकेशन और दूसरी ऑनलाइन जानकारियों को जोड़कर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। बीच में लोकेशन से जुड़ी जानकारी बदलती रही, जिससे जांच मुश्किल हुई। लेकिन अलग-अलग डिजिटल संकेतों को जोड़ते हुए पुलिस आगे बढ़ती रही। आखिरकार उस व्यक्ति को सुरक्षित बरामद किया गया। इस तरह के मामलों में टेक्नोलॉजी अकेले काम नहीं करती। टेक्नोलॉजी से मिले संकेतों को सही तरीके से समझना और उन्हें ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। सवाल: यानी अपराधी अपनी डिजिटल मौजूदगी छिपाने की कोशिश करे, फिर भी कुछ न कुछ सुराग बच जाता है? जवाब: डिजिटल दुनिया में पूरी तरह गायब होना आसान नहीं है। हम फोन, ईमेल, सोशल मीडिया, क्लाउड और कई दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इन सबके बीच कहीं न कहीं डिजिटल फुटप्रिंट बनते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर केस तुरंत सुलझ जाएगा। कई बार एक सुराग दूसरे सुराग से जुड़ता है और फिर धीरे-धीरे पूरी तस्वीर सामने आती है। इन्वेस्टिगेशन में धैर्य बहुत जरूरी है। सवाल: एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट से फॉलोअर्स गायब होने वाला मामला भी काफी अलग था। आखिर उसमें क्या हुआ? जवाब : उस एक्ट्रेस की डिजिटल पहचान के साथ छेड़छाड़ हुई थी। अकाउंट का नाम और पहचान बदलने के बाद स्थिति ऐसी बन गई कि पुराना अकाउंट अलग रूप में दिखाई देने लगा। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि उनके पुराने फॉलोअर्स उसी डिजिटल पहचान से जुड़े हुए थे। हमने अलग-अलग डिजिटल सुरागों और अकाउंट से जुड़ी जानकारियों को जोड़कर पुराने अकाउंट तक पहुंचने का रास्ता निकाला। इस केस से यह समझ आता है कि सोशल मीडिया अकाउंट सिर्फ एक यूजरनेम और पासवर्ड नहीं है। उसके पीछे आपकी पूरी डिजिटल पहचान और वर्षों की मेहनत जुड़ी होती है। सवाल: क्या सेलिब्रिटी के सोशल मीडिया अकाउंट पर आम यूजर के मुकाबले ज्यादा खतरा रहता है? जवाब: खतरा इसलिए ज्यादा
अमित दुबे की साइबर कहानियां पहुंचीं हिरानी-नीरज पांडे तक:बोले- क्रिमिनल डिवाइस नहीं, पहले इंसान को हैक करता है, ऐसे बचें साइबर ठगी से

साइबर क्राइम एक्सपर्ट और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अमित दुबे ने करियर में ऐसे कई मामलों की जांच की है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थे। उनकी वास्तविक इन्वेस्टिगेशन की कहानियां राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ और नीरज पांडे की ‘हैक क्राइम्स ऑनलाइन’ तक पहुंचीं। एटीएम चोरी, किडनैपिंग और एक एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट से फॉलोअर्स गायब होने जैसे मामलों से अमित ने साइबर क्राइम की बदलती दुनिया को करीब से देखा है। उनका कहना है कि अपराधी हर बार डिवाइस को हैक नहीं करता, कई बार पहले इंसान के भरोसे को हैक करता है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अमित ने साइबर क्राइम की अपनी इन्वेस्टिगेशन, फिल्ममेकर्स के साथ काम करने के अनुभव और आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियों पर खुलकर बात की। सवाल: आपकी वास्तविक साइबर इन्वेस्टिगेशन राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज तक पहुंची। उनसे यह कनेक्शन कैसे बना? जवाब: कोविड के दौरान राजू सर से मेरा कनेक्शन हुआ। उस समय साइबर क्राइम को लेकर हमारी बातचीत शुरू हुई और फिर वीडियो कॉल पर कई बार चर्चा हुई। मैंने उन्हें अपने काम और अलग-अलग इन्वेस्टिगेशन से जुड़ी कहानियां बताईं। उन्हें लगा कि इन केसों में सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि इंसानी व्यवहार और भावनाओं की भी काफी संभावनाएं हैं। इसके बाद हमने इन कहानियों पर काम करना शुरू किया। यह कोई छोटा प्रोसेस नहीं था। 6 साल तक कहानी और स्क्रिप्ट पर काम हुआ, कई ड्राफ्ट तैयार हुए और चीजों को लगातार बेहतर किया गया। सवाल: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ में एटीएम चोरी वाला सीन भी है। क्या यह आपके किसी वास्तविक केस से जुड़ा है? जवाब: हां, एटीएम चोरी का मामला मेरे वास्तविक अनुभवों से जुड़ा है। साइबर क्राइम की इन्वेस्टिगेशन में कई बार कोई केस शुरुआत में बहुत जटिल दिखाई देता है। आपको लगता है कि इसके पीछे बहुत हाईटेक तरीका होगा, लेकिन जब आप घटनाओं के पैटर्न और डिजिटल फुटप्रिंट को जोड़ते हैं तो तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगती है। यही चीज इस केस में भी थी। वास्तविक घटना को स्क्रीन पर उसी रूप में रखना संभव नहीं होता, इसलिए कहानी के हिसाब से उसमें बदलाव किए जाते हैं, लेकिन उसका बेस और इन्वेस्टिगेशन का अनुभव वास्तविक होता है। सवाल: इस केस से आम लोगों के लिए भी एक सीख निकलती है कि साइबर क्राइम हमेशा बहुत हाईटेक नहीं होता, क्या कहना चाहेंगे? जवाब: बिल्कुल। हम अक्सर मान लेते हैं कि साइबर क्रिमिनल कोई बहुत बड़ा कंप्यूटर एक्सपर्ट होगा और वह ऐसी तकनीक इस्तेमाल करेगा, जिसे समझना हमारे लिए मुश्किल है। जबकि कई मामलों में अपराध बहुत साधारण तरीके से शुरू होता है। छोटी-सी लापरवाही, किसी व्यक्ति पर भरोसा या जानकारी शेयर करना आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है। इन्वेस्टिगेशन में भी कई बार बड़ी सफलता किसी बहुत बड़े सुराग से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चीजों को जोड़ने से मिलती है। सवाल: राजकुमार हिरानी के बाद आपका जुड़ाव नीरज पांडे से भी हुआ। दोनों के काम करने के तरीके में क्या अंतर महसूस किया? जवाब: दोनों की अपनी अलग स्टोरीटेलिंग लैंग्वेज है। नीरज सर थ्रिल और सस्पेंस को बहुत मजबूत तरीके से बिल्ड करते हैं। उनके साथ काम करते हुए यह ध्यान रहता है कि दर्शक लगातार अगला मोड़ जानना चाहे। राजू सर का तरीका थोड़ा अलग है। वे गंभीर विषय में भी ह्यूमन इमोशन, ह्यूमर और रिश्तों की परतें तलाशते हैं। लेकिन एक चीज दोनों में समान है- दोनों कहानी को विश्वसनीय बनाना चाहते हैं। खासकर जब विषय साइबर क्राइम हो तो तकनीकी चीजें सही होना बहुत जरूरी है। सवाल: नीरज पांडे की ‘हैक क्राइम्स ऑनलाइन’ में साइबर क्राइम को पर्दे पर उतारना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि साइबर क्राइम को बहुत तकनीकी भी न बना दें और इतना सरल भी न कर दें कि वह अविश्वसनीय लगे। अगर आप सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन, कोड या टेक्निकल शब्द दिखाएंगे तो आम दर्शक कहानी से जुड़ नहीं पाएगा। इसलिए यह जरूरी है कि टेक्नोलॉजी के साथ इंसान की कहानी भी दिखाई जाए- अपराधी ऐसा क्यों कर रहा है, पीड़ित कैसे फंसता है और जांच करने वाला किस तरह चीजों को जोड़ता है। यही संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है। सवाल: आपकी इन्वेस्टिगेशन में ऐसा कौन-सा केस रहा, जो आपको आज भी याद है? जवाब: किडनैपिंग का एक केस काफी दिलचस्प था। उसमें डिजिटल लोकेशन और दूसरी ऑनलाइन जानकारियों को जोड़कर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। बीच में लोकेशन से जुड़ी जानकारी बदलती रही, जिससे जांच मुश्किल हुई। लेकिन अलग-अलग डिजिटल संकेतों को जोड़ते हुए पुलिस आगे बढ़ती रही। आखिरकार उस व्यक्ति को सुरक्षित बरामद किया गया। इस तरह के मामलों में टेक्नोलॉजी अकेले काम नहीं करती। टेक्नोलॉजी से मिले संकेतों को सही तरीके से समझना और उन्हें ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। सवाल: यानी अपराधी अपनी डिजिटल मौजूदगी छिपाने की कोशिश करे, फिर भी कुछ न कुछ सुराग बच जाता है? जवाब: डिजिटल दुनिया में पूरी तरह गायब होना आसान नहीं है। हम फोन, ईमेल, सोशल मीडिया, क्लाउड और कई दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इन सबके बीच कहीं न कहीं डिजिटल फुटप्रिंट बनते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर केस तुरंत सुलझ जाएगा। कई बार एक सुराग दूसरे सुराग से जुड़ता है और फिर धीरे-धीरे पूरी तस्वीर सामने आती है। इन्वेस्टिगेशन में धैर्य बहुत जरूरी है। सवाल: एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट से फॉलोअर्स गायब होने वाला मामला भी काफी अलग था। आखिर उसमें क्या हुआ? जवाब : उस एक्ट्रेस की डिजिटल पहचान के साथ छेड़छाड़ हुई थी। अकाउंट का नाम और पहचान बदलने के बाद स्थिति ऐसी बन गई कि पुराना अकाउंट अलग रूप में दिखाई देने लगा। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि उनके पुराने फॉलोअर्स उसी डिजिटल पहचान से जुड़े हुए थे। हमने अलग-अलग डिजिटल सुरागों और अकाउंट से जुड़ी जानकारियों को जोड़कर पुराने अकाउंट तक पहुंचने का रास्ता निकाला। इस केस से यह समझ आता है कि सोशल मीडिया अकाउंट सिर्फ एक यूजरनेम और पासवर्ड नहीं है। उसके पीछे आपकी पूरी डिजिटल पहचान और वर्षों की मेहनत जुड़ी होती है। सवाल: क्या सेलिब्रिटी के सोशल मीडिया अकाउंट पर आम यूजर के मुकाबले ज्यादा खतरा रहता है? जवाब: खतरा इसलिए ज्यादा
शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड को दिया था जवाब:बोले थे- ‘पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो’; फिल्म नहीं करूंगा; डायरेक्टर ने सुनाया किस्सा

फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने हाल ही में बताया कि 1990 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड से बॉलीवुड को धमकियां मिलती थीं। उन्होंने बताया कि धमकी मिलने के बावजूद शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार किया और कहा था- “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो।” यह बात फिल्ममेकर ने राइटर हुसैन जैदी के यूट्यूब चैनल पर बताई। सेट पर पहुंच जाते थे अंडरवर्ल्ड के लोग संजय गुप्ता ने बताया कि 1990 के दशक में मुंबई में अंडरवर्ल्ड से फिल्म इंडस्ट्री भी अछूती नहीं थी। कई प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, एक्टर और एक्ट्रेस लगातार डर के माहौल में काम कर रहे थे। अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग कभी फोन करते थे तो कभी सीधे शूटिंग सेट पर पहुंच जाते थे। संजय गुप्ता ने बताया कि उस समय कई बार ऐसे लोग फिल्म के सेट पर आकर बैठ जाते थे। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं होती थी कि वहां कौन शूटिंग कर रहा है। वे आराम से सेट पर मौजूद रहते और अपनी बात मनवाने की कोशिश करते थे। उन्होंने बताया कि अंडरवर्ल्ड की तरफ से फिल्म बनाने और कलाकारों को कास्ट करने तक में दखल दिया जाता था। एक बार उनके पास एक प्रोड्यूसर आया और उसने कई बड़े कलाकारों के साइन किए हुए लेटर दिखाए। संजय के मुताबिक, ये साइनिंग लेटर थे, जिनमें लिखा था कि संबंधित कलाकार उस प्रोड्यूसर की फिल्म में काम करेंगे। प्रोड्यूसर ने उनसे कहा था कि उसके पास लगभग सभी बड़े कलाकारों के साइन हैं और वह जिस अभिनेता के साथ संजय को काम करना हो, उसका नाम बता दें। इसके पीछे अंडरवर्ल्ड का दबाव बताया गया। शाहरुख ने झुकने से इनकार किया था इसी बातचीत में संजय गुप्ता ने शाहरुख का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में वह ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। संजय के मुताबिक, जब शाहरुख को धमकी दी गई तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अंडरवर्ल्ड के लिए कोई फिल्म नहीं करेंगे और न ही उनके कहने पर शो करेंगे। उन्होंने शाहरुख के रवैये को याद करते हुए कहा कि उनका जवाब था- “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो। उससे डरता नहीं हूं।” संजय गुप्ता ने कहा कि शाहरुख ने सीधे तौर पर उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया। फिल्ममेकर के मुताबिक, इसी वजह से अंडरवर्ल्ड के लोग भी शाहरुख की इज्जत करने लगे थे। संजय ने कहा कि उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में कम से कम एक ऐसा व्यक्ति है, जो सीधे उनके सामने खड़ा है। संजय गुप्ता को भी धमकी मिली थी बातचीत में संजय गुप्ता ने अपना एक पुराना अनुभव भी सुनाया। उन्होंने बताया कि साल 1992-93 में उन्हें अंडरवर्ल्ड की तरफ से फोन आया था। उस समय वह अपनी फिल्म ‘आतिश’ और ‘रामशास्त्र’ पर काम कर रहे थे। एक सुबह उनके घर पर फोन आया। दूसरी तरफ से व्यक्ति ने खुद को ‘नाना’ बताया। संजय को समझ नहीं आया कि कौन नाना है? बाद में उन्हें पता चला कि फोन छोटा राजन का था। संजय के मुताबिक, फोन पर उन्हें गालियां दी गईं। इसके बाद एक प्रोड्यूसर के जरिए उन्हें पता चला कि मामला सीरियस है। उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ कुछ लोगों को भेजा गया है। उन्होंने तुरंत संजय दत्त को फोन किया और कहा कि उन्हें घर से बाहर निकालने में मदद करें। इसके बाद संजय दत्त ने अपने पिता सुनील दत्त की सरकारी गाड़ी उनके घर भेजी। संजय गुप्ता पीछे के रास्ते से उस गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गए। इसके बाद कहानी में एक बड़ा मोड़ आया। संजय दत्त के घर पर रहते हुए संजय गुप्ता को अभिनेता आदित्य पंचोली का फोन आया। उन्होंने पूछा कि संजय कहां हैं और कहा कि उन्हें उनसे तुरंत मिलना है। कुछ देर बाद आदित्य पंचोली वहां पहुंचे और संजय गुप्ता को गले लगाकर कहा- “आई एम सॉरी यार, ये सब मेरी गलती है।” संजय ने उनसे पूछा कि उनकी गलती कैसे? तब आदित्य ने बताया कि पिछली रात वह दोस्तों के साथ शराब पी रहे थे। बातचीत में आदित्य ने कहा था कि ‘आतिश’ में उनका रोल बहुत अच्छा है और इससे उनका करियर बन सकता है, लेकिन ‘रामशास्त्र’ में उनका रोल उतना अच्छा नहीं है। आदित्य ने कहा था कि अगर संजय गुप्ता पर थोड़ा दबाव डाला जाए तो शायद वह ‘रामशास्त्र’ में उनका रोल बेहतर कर देंगे। संजय के मुताबिक, आदित्य ने सीधे फोन नहीं किया था, लेकिन किसी तरह उनकी यह बात आगे पहुंची और मामला धमकी तक पहुंच गया। इसके बाद संजय गुप्ता को फोन कर डराया गया। फोन पर फिर मांगा गया सिर्फ एक बदलाव आखिरकार संजय गुप्ता की अंडरवर्ल्ड से दोबारा बात कराई गई। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें लगा था कोई उनके साथ मजाक कर रहा है और उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि सामने से ऐसा फोन आएगा। संजय के मुताबिक, दूसरी तरफ से उन्हें शांत रहने को कहा गया। फिर कहा गया कि ‘रामशास्त्र’ में आदित्य पंचोली का रोल थोड़ा और अच्छा कर दें। संजय ने बताया कि उन्होंने कहा कि रोल पहले से अच्छा है लेकिन सामने से फिर कहा गया कि जितना हो सके, रोल को और बेहतर कर दें।
शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड को दिया था जवाब:बोले थे- ‘पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो’; फिल्म नहीं करूंगा; डायरेक्टर ने सुनाया किस्सा

फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने हाल ही में बताया कि 1990 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड से बॉलीवुड को धमकियां मिलती थीं। उन्होंने बताया कि धमकी मिलने के बावजूद शाहरुख खान ने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार किया और कहा था- “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो।” यह बात फिल्ममेकर ने राइटर हुसैन जैदी के यूट्यूब चैनल पर बताई। सेट पर पहुंच जाते थे अंडरवर्ल्ड के लोग संजय गुप्ता ने बताया कि 1990 के दशक में मुंबई में अंडरवर्ल्ड से फिल्म इंडस्ट्री भी अछूती नहीं थी। कई प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, एक्टर और एक्ट्रेस लगातार डर के माहौल में काम कर रहे थे। अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग कभी फोन करते थे तो कभी सीधे शूटिंग सेट पर पहुंच जाते थे। संजय गुप्ता ने बताया कि उस समय कई बार ऐसे लोग फिल्म के सेट पर आकर बैठ जाते थे। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं होती थी कि वहां कौन शूटिंग कर रहा है। वे आराम से सेट पर मौजूद रहते और अपनी बात मनवाने की कोशिश करते थे। उन्होंने बताया कि अंडरवर्ल्ड की तरफ से फिल्म बनाने और कलाकारों को कास्ट करने तक में दखल दिया जाता था। एक बार उनके पास एक प्रोड्यूसर आया और उसने कई बड़े कलाकारों के साइन किए हुए लेटर दिखाए। संजय के मुताबिक, ये साइनिंग लेटर थे, जिनमें लिखा था कि संबंधित कलाकार उस प्रोड्यूसर की फिल्म में काम करेंगे। प्रोड्यूसर ने उनसे कहा था कि उसके पास लगभग सभी बड़े कलाकारों के साइन हैं और वह जिस अभिनेता के साथ संजय को काम करना हो, उसका नाम बता दें। इसके पीछे अंडरवर्ल्ड का दबाव बताया गया। शाहरुख ने झुकने से इनकार किया था इसी बातचीत में संजय गुप्ता ने शाहरुख का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में वह ऐसे कलाकार थे, जिन्होंने अंडरवर्ल्ड के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। संजय के मुताबिक, जब शाहरुख को धमकी दी गई तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अंडरवर्ल्ड के लिए कोई फिल्म नहीं करेंगे और न ही उनके कहने पर शो करेंगे। उन्होंने शाहरुख के रवैये को याद करते हुए कहा कि उनका जवाब था- “पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो। उससे डरता नहीं हूं।” संजय गुप्ता ने कहा कि शाहरुख ने सीधे तौर पर उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया। फिल्ममेकर के मुताबिक, इसी वजह से अंडरवर्ल्ड के लोग भी शाहरुख की इज्जत करने लगे थे। संजय ने कहा कि उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में कम से कम एक ऐसा व्यक्ति है, जो सीधे उनके सामने खड़ा है। संजय गुप्ता को भी धमकी मिली थी बातचीत में संजय गुप्ता ने अपना एक पुराना अनुभव भी सुनाया। उन्होंने बताया कि साल 1992-93 में उन्हें अंडरवर्ल्ड की तरफ से फोन आया था। उस समय वह अपनी फिल्म ‘आतिश’ और ‘रामशास्त्र’ पर काम कर रहे थे। एक सुबह उनके घर पर फोन आया। दूसरी तरफ से व्यक्ति ने खुद को ‘नाना’ बताया। संजय को समझ नहीं आया कि कौन नाना है? बाद में उन्हें पता चला कि फोन छोटा राजन का था। संजय के मुताबिक, फोन पर उन्हें गालियां दी गईं। इसके बाद एक प्रोड्यूसर के जरिए उन्हें पता चला कि मामला सीरियस है। उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ कुछ लोगों को भेजा गया है। उन्होंने तुरंत संजय दत्त को फोन किया और कहा कि उन्हें घर से बाहर निकालने में मदद करें। इसके बाद संजय दत्त ने अपने पिता सुनील दत्त की सरकारी गाड़ी उनके घर भेजी। संजय गुप्ता पीछे के रास्ते से उस गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गए। इसके बाद कहानी में एक बड़ा मोड़ आया। संजय दत्त के घर पर रहते हुए संजय गुप्ता को अभिनेता आदित्य पंचोली का फोन आया। उन्होंने पूछा कि संजय कहां हैं और कहा कि उन्हें उनसे तुरंत मिलना है। कुछ देर बाद आदित्य पंचोली वहां पहुंचे और संजय गुप्ता को गले लगाकर कहा- “आई एम सॉरी यार, ये सब मेरी गलती है।” संजय ने उनसे पूछा कि उनकी गलती कैसे? तब आदित्य ने बताया कि पिछली रात वह दोस्तों के साथ शराब पी रहे थे। बातचीत में आदित्य ने कहा था कि ‘आतिश’ में उनका रोल बहुत अच्छा है और इससे उनका करियर बन सकता है, लेकिन ‘रामशास्त्र’ में उनका रोल उतना अच्छा नहीं है। आदित्य ने कहा था कि अगर संजय गुप्ता पर थोड़ा दबाव डाला जाए तो शायद वह ‘रामशास्त्र’ में उनका रोल बेहतर कर देंगे। संजय के मुताबिक, आदित्य ने सीधे फोन नहीं किया था, लेकिन किसी तरह उनकी यह बात आगे पहुंची और मामला धमकी तक पहुंच गया। इसके बाद संजय गुप्ता को फोन कर डराया गया। फोन पर फिर मांगा गया सिर्फ एक बदलाव आखिरकार संजय गुप्ता की अंडरवर्ल्ड से दोबारा बात कराई गई। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें लगा था कोई उनके साथ मजाक कर रहा है और उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि सामने से ऐसा फोन आएगा। संजय के मुताबिक, दूसरी तरफ से उन्हें शांत रहने को कहा गया। फिर कहा गया कि ‘रामशास्त्र’ में आदित्य पंचोली का रोल थोड़ा और अच्छा कर दें। संजय ने बताया कि उन्होंने कहा कि रोल पहले से अच्छा है लेकिन सामने से फिर कहा गया कि जितना हो सके, रोल को और बेहतर कर दें।
कांगो में शादी समारोह में आग, 22 की मौत:कई घायल; बचने के लिए भागे लोग संकरी गलियों में फंसे, सड़क किनारे शव मिले

कांगो की राजधानी किंशासा में शादी समारोह के दौरान बिल्डिंग में आग लगने से कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई। कई अन्य लोग घायल हुए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। आग शुक्रवार रात उत्तरी किंशासा के लिंगवाला इलाके में एक इमारत में लगी और शनिवार सुबह तक जारी रही। आग लगने के बाद शादी में मौजूद लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की। बिल्डिंग के संकरे रास्तों और गलियों में बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से हालात बिगड़ गए। लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए बाहर निकलने की कोशिश करते रहे। हादसे के बाद कुछ लोगों को सड़क किनारे लिटाकर उनकी मदद करने की कोशिश की गई। इनमें कुछ लोग जिंदा थे, जबकि कुछ की मौत हो चुकी थी। आग लगने की वजह साफ नहीं अधिकारियों ने अभी तक आग लगने की सही वजह की पुष्टि नहीं की है। कांगो के उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैक्वेमिन शाबानी ने घटनास्थल का शनिवार सुबह दौरा किया। उन्होंने हादसे को दुखद त्रासदी बताया। अधिकारियों ने फिलहाल आग के कारणों की जांच शुरू कर दी है। मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या भी जांच के बाद स्पष्ट हो सकती है। किंशासा में आग की घटनाएं आम स्थानीय मीडिया के मुताबिक किंशासा के घनी आबादी वाले इलाकों में आग लगने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। शहर में तेजी से हो रहे अनियोजित शहरी विकास के कारण कई जगह पर्याप्त अग्निशमन सेवाएं और आपातकालीन सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। सूखी गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं और बढ़ जाती हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार इस साल भी किंशासा में आग लगने के कई हादसे सामने आ चुके हैं।
कांगो में शादी समारोह में आग, 22 की मौत:कई घायल; बचने के लिए भागे लोग संकरी गलियों में फंसे, सड़क किनारे शव मिले

कांगो की राजधानी किंशासा में शादी समारोह के दौरान बिल्डिंग में आग लगने से कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई। कई अन्य लोग घायल हुए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। आग शुक्रवार रात उत्तरी किंशासा के लिंगवाला इलाके में एक इमारत में लगी और शनिवार सुबह तक जारी रही। आग लगने के बाद शादी में मौजूद लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की। बिल्डिंग के संकरे रास्तों और गलियों में बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से हालात बिगड़ गए। लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए बाहर निकलने की कोशिश करते रहे। हादसे के बाद कुछ लोगों को सड़क किनारे लिटाकर उनकी मदद करने की कोशिश की गई। इनमें कुछ लोग जिंदा थे, जबकि कुछ की मौत हो चुकी थी। हादसे से जुड़ी 5 तस्वीरें… आग लगने की वजह साफ नहीं अधिकारियों ने अभी तक आग लगने की सही वजह की पुष्टि नहीं की है। कांगो के उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैक्वेमिन शाबानी ने घटनास्थल का शनिवार सुबह दौरा किया। उन्होंने हादसे को दुखद त्रासदी बताया। अधिकारियों ने फिलहाल आग के कारणों की जांच शुरू कर दी है। मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या भी जांच के बाद स्पष्ट हो सकती है। किंशासा में आग की घटनाएं आम स्थानीय मीडिया के मुताबिक किंशासा के घनी आबादी वाले इलाकों में आग लगने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। शहर में तेजी से हो रहे अनियोजित शहरी विकास के कारण कई जगह पर्याप्त अग्निशमन सेवाएं और आपातकालीन सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। सूखी गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं और बढ़ जाती हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार इस साल भी किंशासा में आग लगने के कई हादसे सामने आ चुके हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें… यमन में हूती विद्रोहियों के हमले में 129 की मौत, बाब अल-मंदेब पर कब्जे की कोशिश यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी फोर्स के बीच भीषण लड़ाई में 129 लोगों की मौत हुई है। यह हाल के वर्षों में यमन में हुई सबसे घातक झड़पों में से एक है। हूती विद्रोही लाल सागर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के करीब अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
ग्रीस एयर शो में करतब दिखा रहा जेट क्रैश:2 पायलट सवार थे, मौत की जानकारी नहीं

ग्रीस की वायुसेना का दो सीटों वाला फैंटम F-4 जेट शनिवार को एयर शो के दौरान क्रैश हो गया। हादसा एथेंस के उत्तर में स्थित तानाग्रा एयर फोर्स बेस पर हुआ। विमान के गिरते ही आसमान में काले धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। हादसे के वक्त एयर शो देखने के लिए कई हजार लोग मौजूद थे। हालांकि, दर्शकों में किसी के घायल होने की तत्काल खबर नहीं है। वायुसेना अधिकारियों ने बताया कि विमान में सवार दोनों पायलटों का क्या हुआ, यह अभी साफ नहीं है। यह भी पता नहीं चल पाया है कि वे हादसे से पहले विमान से इजेक्ट कर पाए थे या नहीं। आग बुझाने में जुटी रेस्क्यू टीम जेट के क्रैश होते ही घटनास्थल पर आग लग गई। आग बुझाने के लिए एक हेलिकॉप्टर काफी देर तक मौके के ऊपर मंडराता रहा और पानी का छिड़काव करता रहा। जमीन पर मौजूद बचाव दल भी आग पर काबू पाने में जुटे रहे। हादसा तानाग्रा एयर फोर्स बेस पर आयोजित सालाना ‘एथेंस फ्लाइंग वीक’ एयर शो के दौरान हुआ। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि फैंटम F-4 किस वजह से क्रैश हुआ। हादसे की जांच की जा रही है। खबर अपेडट हो रही है…
रूस अगले 3 दिन यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा:पुतिन ने ट्रम्प के दामाद के मॉस्को पहुंचने पर दिया आदेश, जंग खत्म करने पर बात होगी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर 72 घंटे तक हमले रोकने का आदेश दिया है। क्रेमलिन ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। पुतिन का यह आदेश ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मॉस्को पहुंचे हैं। दोनों रुकी हुई शांति वार्ता को फिर शुरू कराने की कोशिश करेंगे। यूक्रेन पहले ही दोनों के दौरे की जानकारी दे चुका है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिकी दूतों के यूक्रेन दौरे के दौरान उनकी सेना हवाई हमले रोक देगी। उन्होंने रूस से भी ऐसा ही करने को कहा था। ईरान जंग की वजह से अमेरिका का यूक्रेन पर फोकस हटा अमेरिका लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, पिछले छह महीनों में इन कोशिशों की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। इसकी एक वजह अमेरिका का ईरान युद्ध पर ज्यादा फोकस करना भी बताई गई है। विटकॉफ और कुशनर इससे पहले जनवरी में मॉस्को पहुंचे थे। तब दोनों ने क्रेमलिन में पुतिन से मुलाकात की थी। अब एक बार फिर दोनों के मॉस्को पहुंचने पर रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने उनका स्वागत किया। रूस ने हाल में कीव पर हमले बढ़ाए रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता अभी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है। इस बीच, कीव समेत यूक्रेन के कई शहरों पर रूसी हवाई हमले तेज हुए हैं। यूक्रेन भी रूस के अंदर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है। शुक्रवार को एक रूसी ड्रोन ने कीव में यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU के मुख्यालय को निशाना बनाया। SBU रूस के अंदर किए जाने वाले यूक्रेन के कई लंबी दूरी के हमलों में भी भूमिका निभाती है। उधर, यूक्रेन रूस के सैन्य ठिकानों के अलावा तेल रिफाइनरियों और ई-कॉमर्स केंद्रों को भी निशाना बना रहा है। यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का मकसद रूस की युद्ध क्षमता और उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है। शनिवार को जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने रात में कीव और बोरिस्पिल एयरपोर्ट पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि ये हमले उस वक्त हुए, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के यूक्रेन पहुंचने की तैयारी चल रही थी। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने रूस के इन हमलों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस का हवाई क्षेत्र अब ड्रोन और मिसाइलों की वजह से खतरनाक हो चुका है। हालांकि, अमेरिकी दूतों की शांति कोशिशों के लिए यूक्रेन की तरफ से कोई खतरा नहीं है। 3 घंटे हमले रोकने का आदेश कितना असरदार होगा? पुतिन का 72 घंटे तक कीव पर हमले रोकने का आदेश अमेरिकी दूतों की मॉस्को और फिर कीव यात्रा के दौरान बातचीत के लिए कुछ समय जरूर दे सकता है। हालांकि, इसे रूस-यूक्रेन के बीच पूरा युद्धविराम नहीं माना जा सकता। यह आदेश सिर्फ कीव पर रूसी हमले रोकने तक सीमित है। दूसरे इलाकों में दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी रह सकती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन 72 घंटों में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने पर कोई सहमति बन पाएगी, या समय खत्म होते ही रूस फिर हमले शुरू कर देगा। इसलिए अब सबकी नजर विटकॉफ और कुशनर की मॉस्को-कीव यात्रा पर है। अगर दोनों पक्ष किसी अहम मुद्दे पर सहमत होते हैं, तो यह 72 घंटे की रोक आगे की बातचीत का रास्ता खोल सकती है। लेकिन फिलहाल इसे युद्ध खत्म होने की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी।









