Tuesday, 05 May 2026 | 04:29 PM

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तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम घोषित किए: सुप्रियो, कुमार, गुरुस्वामी, मल्लिक | राजनीति समाचार

England vs New Zealand live score: Follow ball-by-ball commentary, latest scorecard and all match action from the all-important Super Eights clash in Colombo. (AP)

आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2026, 21:55 IST मेनेका गुरुस्वामी एक वकील हैं जिन्होंने आईपीएसी मामले में मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व किया था। राज्यसभा चुनाव के लिए बाबुल सुप्रियो 4 टीएमसी उम्मीदवारों में शामिल हैं (क्रेडिट इंस्टाग्राम) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की, जिसमें बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार (पूर्व डीजीपी, पश्चिम बंगाल), मेनका गुरुस्वामी और कोएल मलिक का नाम शामिल है। एक्स पर घोषणा करते हुए, पार्टी ने कहा, “हमें आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार (पूर्व डीजीपी, पश्चिम बंगाल), मेनका गुरुस्वामी और कोयल मलिक की उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।” पार्टी ने भी नामांकित व्यक्तियों को उनके नेतृत्व और प्रतिबद्धता पर विश्वास व्यक्त करते हुए बधाई दी। इसमें कहा गया है, “हम उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हैं। वे तृणमूल की लचीलेपन की स्थायी विरासत और हर भारतीय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उसकी अटूट प्रतिबद्धता को कायम रखें।” यह घोषणा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हुई है, जो इस साल अप्रैल में होने की संभावना है। चार उम्मीदवारों के बारे में मेनेका गुरुस्वामी एक वकील हैं जिन्होंने आईपीएसी मामले में मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व किया था। कोएल मलिक एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिनके पिता एक मशहूर अभिनेता थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो बाद में टीएमसी में शामिल हो गए। राजीव कुमार ने जुलाई 2024 से 31 जनवरी, 2026 को अपनी सेवानिवृत्ति तक पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में कार्य किया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 27 फरवरी, 2026, 21:46 IST समाचार राजनीति राज्यसभा चुनाव के लिए टीएमसी के 4 उम्मीदवारों में बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, बाबुल सुप्रियो शामिल हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार(टी)टीएमसी राज्यसभा नामांकन(टी)बाबुल सुप्रियो राज्यसभा(टी)राजीव कुमार टीएमसी(टी)मेनका गुरुस्वामी राज्यसभा(टी)कोयल मलिक टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल राज्यसभा चुनाव(टी)तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार

बालाघाट पंचायतकर्मियों ने सीईओ के खिलाफ किया प्रदर्शन:कहा- तबादलों पर रोक के बावजूद सचिवों को इधर-उधर भेजा जा रहा

बालाघाट पंचायतकर्मियों ने सीईओ के खिलाफ किया प्रदर्शन:कहा- तबादलों पर रोक के बावजूद सचिवों को इधर-उधर भेजा जा रहा

बालाघाट में जिला पंचायत सीईओ और पंचायत कर्मचारियों के बीच का विवाद अब आंदोलन में बदल गया है। वित्तीय वर्ष (Financial Year) खत्म होने से पहले काम का टारगेट पूरा करने के दबाव को लेकर कर्मचारियों ने सीईओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को पंचायत सचिवों, जनपद और जिला पंचायत कर्मचारियों के साथ ही इंजीनियरों ने एक ‘संयुक्त मोर्चा’ बना लिया है। उन्होंने एलान किया है कि कल से दो दिनों तक सभी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। कर्मचारियों के गंभीर आरोप पंचायत सचिव संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र चित्रिव ने सीईओ अभिषेक सराफ पर मनमानी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के खिलाफ जाकर कर्मचारियों के वेतन काटे जा रहे हैं। तबादलों पर रोक के बावजूद सचिवों को इधर-उधर भेजा जा रहा है। बेवक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) ली जाती है, जिससे महिला कर्मचारियों को बहुत दिक्कत होती है। सरकारी नियमों को दरकिनार कर बेजा दबाव बनाया जा रहा है। सीईओ ने दी सफाई इन आरोपों पर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ का कहना है कि साल खत्म होने वाला है और उन पर भी काम पूरा करने का सरकारी दबाव है। उन्होंने सफाई दी कि वे दफ्तर के समय में ही बैठकें लेते हैं ताकि शासन के काम समय पर पूरे हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सब काम की जिम्मेदारी की वजह से है, न कि किसी को परेशान करने के लिए।

TVK प्रमुख और अभिनेता विजय पर बेवफाई का आरोप:पत्नी संगीता ने 25 साल बाद दायर की तलाक याचिका

TVK प्रमुख और अभिनेता विजय पर बेवफाई का आरोप:पत्नी संगीता ने 25 साल बाद दायर की तलाक याचिका

साउथ के मशहूर अभिनेता और तमिलागा वेट्री काझागम (TVK) प्रमुख थलापति विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम ने अपने 25 साल के वैवाहिक जीवन के बाद तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। उनकी तरफ से दायर पिटिशन में आरोप लगाया गया है कि विजय ने अधिकारियों और व्यक्तियों के साथ संबंध रखे, जिससे उनका वैवाहिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सिलीब्रिटी सर्कल में यह मामला तुरंत सुर्खियों में आ गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, संगीता ने चेन्नगपट्टू फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि विजय पर बेवफाई (इन्फिडेलिटी) का गंभीर आरोप है, और इसी कारण अब वह साथ नहीं रहना चाहती। इससे पहले यह दंपती मीडिया के सामने अक्सर एक साथ दिखते थे, लेकिन अब संगीता द्वारा तलाक की मांग किए जाने से तमिल सिनेमा व राजनीति के दोनों मोर्चों पर चर्चा शुरू हो गई है। विजय के खिलाफ दायर इस पिटिशन को अदालत ने विकासशील मामला बताया है और आगे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के तर्क सुने जाएंगे। विजय और संगीता की पहली मुलाकात 1990 के दशक के आखिर में हुई थी। संगीता उस समय यूके में रहती थीं और विजय की बड़ी फैन थीं। बताया जाता है कि वह उनकी एक फिल्म की शूटिंग के दौरान चेन्नई पहुंचीं और सेट पर उनसे मिलने की इच्छा जताई। मुलाकात के दौरान संगीता ने विजय को बताया कि वह उनकी फिल्मों की नियमित दर्शक हैं। यह बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदली। बाद में दोनों परिवारों की सहमति से रिश्ता आगे बढ़ा और 25 अगस्त 1999 को शादी कर ली। शादी के बाद संगीता ज्यादातर लाइमलाइट से दूर रहीं, लेकिन पारिवारिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में विजय के साथ नजर आती रही हैं। इस कपल के दो बच्चे हैं। बेटा जेसन संजय जो फिल्ममेकिंग की पढ़ाई कर चुके हैं, और बेटी दिव्या साशा है। विजय ने अपने लंबे 33 साल के फिल्मी करियर के बाद 30 जनवरी 2026 को घोषणा की कि वह अभिनय से संन्यास ले रहे हैं और अब पूरी तरह राजनीति पर ध्यान देंगे। उनकी आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अभी तक यह फिल्म नहीं रिलीज हो पाई है। इस फिल्म को अभी सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला है। इससे पहले मेकर्स ने फिल्म को सेंसर बोर्ड में सबमिट किया, लेकिन बोर्ड ने सर्टिफिकेट जारी नहीं किया और मामला मद्रास हाईकोर्ट तक पहुंच गया। सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमिटी ने फिल्म की समीक्षा करना बाकी रखा है, इसलिए फाइनल सर्टिफिकेट नहीं मिला है, जिससे रिलीज डेट तय नहीं हो पा रही है।

TVK चीफ-एक्टर विजय की पत्नी ने तलाक याचिका दायर की:पति पर एक्ट्रेस से अफेयर का आरोप; शादी के 27 साल हुए, दो बच्चे भी

TVK चीफ-एक्टर विजय की पत्नी ने तलाक याचिका दायर की:पति पर एक्ट्रेस से अफेयर का आरोप; शादी के 27 साल हुए, दो बच्चे भी

तमिल सुपरस्टार और मिलगा वेट्री कजगम(TVK) प्रमुख विजय की पत्नी संगीता ने 24 फरवरी 2026 को चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दाखिल की है। याचिका में विजय पर एक एक्ट्रेस के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर केस फैमिली वेलफेयर कमिटी को भेज दिया। दंपति पिछले दो साल से अलग रह रहे थे। दोनों की शादी 1999 में हुई थी। शादी को 27 साल हो चुके हैं। कोर्ट में इस मामले पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को करेगा। विजय की टीम और संगीता ने मामले पर अबतक कोई बयान नहीं दिया है। शादी को 27 साल हो चुके हैं विजय और संगीता की शादी को करीब 27 साल हो चुके हैं। 25 अगस्त 1999 को कपल शादी के बंधन में बंधे थे। जल्द ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया और दोनों ने शादी का फैसला कर लिया। दोनों ने उस दौर में हिंदू और ईसाई दोनों धर्मों से शादी की थी। 2000 में कपल ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया जिसका नाम जेसन संजय है, वहीं 2005 में उनके घर बेटी का जन्म हुआ। रैली में भगदड़ से विवादों में आए विजय 27 सितंबर तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम यानी TVK की रैली में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। बताया गया है कि 9 साल की एक बच्ची गुम हो गई थी। विजय ने मंच से उसे तलाशने की अपील पुलिस और अपने लोगों से की, जिसके बाद वहां भगदड़ जैसे हालात बन गए। इसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी। भीड़ में फंसने से कई लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई और कई लोग और कार्यकर्ता बेहोश होने लगे। हालात बिगड़ते देख विजय ने भाषण रोक दिया और लोगों से शांति की अपील की। इसके बाद वे भाषण छोड़कर निकल गए। विजय की रैली के लिए 10 हजार लोगों की परमिशन थी। प्रशासन को 50 हजार लोगों के जुटने का अनुमान था, लेकिन वहां करीब 1 लाख 20 हजार लोग एकत्र हो गए थे। मामले में CBI ने 6 घंटे पूछताछ की थी इसी साल 12 जनवरी को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन(CBI) ने रैली में भगदड़ मामले में एक्टर से 6 घंटे पूछताछ की थी। विजय सुबह 11.29 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच काली रेंज रोवर से नई दिल्ली के CBI हेडकॉर्टर पहुंचे थे, शाम को लगभग 6.15 बजे बाहर निकले थे।

कमर दर्द: सुबह-सुबह ही होता है कमर दर्द? तो शरीर की इस चेतावनी को न करें अनदेखा; जानिए कारण

कमर दर्द: सुबह-सुबह ही होता है कमर दर्द? तो शरीर की इस चेतावनी को न करें अनदेखा; जानिए कारण

सुबह नींद खुलते ही अगर आपके कमर में दर्द या जकड़न महसूस हो रही है, तो यह सिर्फ थकान नहीं है। अक्सर हमारा शरीर किसी भी बड़ी समस्या से पहले छोटा-छोटा संकेत देता है। सुबह का कमर दर्द भी ऐसा ही एक अहम संकेत हो सकता है, जिसे अनसुना करना ठीक नहीं है। ऐसे में डॉ. गौरव बत्रा न्यूरोसर्जन (मस्तिष्क एवं स्पाइनल स्पाइन) ने बताया कि सुबह उल्टी ही पीठ में दर्द होना बिल्कुल भी ठीक नहीं होना चाहिए। सुबह कमर में दर्द होने का मुख्य कारण ग़लत सोने की मुद्रा यदि आपके पेट के बल खराब हो गए हैं या आपके सोने की स्थिति सही नहीं है, तो रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे कमर और गर्दन में दर्द हो सकता है। गद्दार और तकिया: बहुत सख्त या बहुत खतरनाक गद्दारों को सही समर्थन नहीं देता। इसी तरह गलत तकिया भी गर्दन और कमर में दर्द की वजह बन सकता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना: 6-8 घंटे तक लगातार एक ही पोजीशन में सोने से मांसपेशियां और जोड़ों में दर्द होता है, जिससे सुबह-सुबह दर्द महसूस होता है। स्वास्थ्य से जुड़ी बातें: अगर दर्द लंबे समय तक बना रहता है, तो यह मसाले में टुकड़ा, टुकड़े डिस्क, गठिया यानी गठिया या सूजन जैसी चीजों का संकेत हो सकता है। अगर कमर में दर्द 2-3 हफ्ते से ज्यादा हो रहा हो, दर्द पेट दर्द तक हो, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो, या दर्द बहुत तेज हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। आपका शरीर हमेशा किसी बड़ी परेशानी से पहले संकेत देता है। सुबह उठते ही होने वाला कमर दर्द भी एक ऐसा ही चेतावनी संकेत हो सकता है। समय पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। अपने अचूक और सोने की सलाह में छोटे-छोटे बदलाव करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)पीठ दर्द

सलमान की को-स्टार रहीं डेजी शाह ने एग्स फ्रीज कराए:एक्ट्रेस ने कहा- परिवार बनाने के लिए शादी जरूरी नहीं है

सलमान की को-स्टार रहीं डेजी शाह ने एग्स फ्रीज कराए:एक्ट्रेस ने कहा- परिवार बनाने के लिए शादी जरूरी नहीं है

डेजी शाह ने सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ से बॉलीवुड में बतौर लीड एक्ट्रेस डेब्यू किया था, जिससे उन्हें पहचान मिली। डेजी ने हाल ही में बताया कि उन्होंने अपने एग्स फ्रीज करवा लिए हैं। 41 साल की एक्ट्रेस ने कहा कि परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं है और वह अपनी शर्तों पर मां बनना चाहती हैं। डेजी शाह ने हाल ही में फिल्मीज्ञान को दिए एक इंटरव्यू में अपनी पर्सनल लाइफ और फैसलों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने एग्स फ्रीज करवाने का फैसला इसलिए किया ताकि भविष्य में उनके पास ऑप्शन खुले रहें। डेजी ने प्यार और पैसा दोनों को जरूरी बताया इंटरव्यू के दौरान, उनसे प्यार और पैसे में से किसी एक को चुनने के लिए कहा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें दोनों यानी पैसे के साथ प्यार चाहिए। उनका मानना ​​है कि किसी भी रिश्ते में इमोशनल कनेक्शन और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी दोनों जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसा पार्टनर पसंद करेंगी जो फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट और सिक्योर हो। शादी को लेकर डेजी ने कहा कि आजकल रोजाना कपल्स के अलग होने या ‘नीले ड्रम’ जैसे मामलों की खबरें सामने आती हैं, जो डरावनी हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उन्होंने इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा है कि इन खबरों ने उनकी सोच को कितना बदला है। शादी के प्लान के बारे में उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने ऊपरवाले पर छोड़ दिया है। बच्चे के लिए शादी जरूरी नहीं: डेजी शाह मदरहुड पर उन्होंने साफ कहा कि बच्चे के लिए शादी जरूरी नहीं है। एग्स फ्रीज कराने के बाद वह जब चाहें तब मां बनने का फैसला ले सकती हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो डेजी शाह को आखिरी बार वेब सीरीज रेड रूम में देखा गया था। वह अब श्रेयस तलपड़े के साथ पलक मुछाल द्वारा डायरेक्ट की गई फिल्म में दिखाई देंगी। बता दें कि डेजी ने अपना करियर बतौर डांसर और मॉडल शुरू किया था। वह कोरियोग्राफर गणेश आचार्य की असिस्टेंट रह चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग और फोटोशूट किए। 2011 में वो कन्नड़ फिल्म भद्रा और हिंदी फिल्म बॉडीगार्ड में नजर आईं। फिर डेजी ने 2014 में सलमान के साथ ‘जय हो’ में काम किया। इसके बाद वह ‘हेट स्टोरी 3’ में नजर आईं। बाद में उन्होंने ‘आक्रमण’, ‘रमरतन’ और ‘रेस 3’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।

'यह हमारे लिए बहुत बड़ा सम्मान है':वेब सीरीज ‘फौदा’ के क्रिएटर लियोर राज ने पीएम मोदी से मुलाकात को बताया खास पल

'यह हमारे लिए बहुत बड़ा सम्मान है':वेब सीरीज ‘फौदा’ के क्रिएटर लियोर राज ने पीएम मोदी से मुलाकात को बताया खास पल

मशहूर वेब सीरीज ‘फौदा’ के क्रिएटर लियोर राज ने शुक्रवार को इजराइल के यरुशलम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात को बहुत बड़ा सम्मान बताया। लियोर राज ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत जैसे बड़े देश के प्रधानमंत्री से मिलना उनके लिए खास पल था। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि भारत में उनकी सीरीज को बड़ी संख्या में दर्शक देखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक्टिंग, प्रोडक्शन और आर्ट को सपोर्ट करते हैं। यह देखकर उन्हें अच्छा लगा। उन्होंने कहा, “हमारे लिए यह बहुत सम्मान की बात है। हमें भारत में बहुत दर्शक मिलते हैं। आपके प्रधानमंत्री से यह सम्मान मिलना बड़ी बात है। वह अपने देश में कला और प्रोडक्शन को सपोर्ट करते हैं। हमें भी अपने देश में इससे सीख लेनी चाहिए। हम फिर से भारत के साथ काम करना चाहेंगे।” लियोर राज ने बताया कि उनकी सीरीज ‘फौदा’ का नेटफ्लिक्स प्रीमियर गोवा फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। उन्होंने कहा कि वह फिर से भारत आना चाहते हैं और दोबारा ऐसा मौका मिलना चाहिए। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की इजराइल यात्रा के बाद शुक्रवार को भारत लौट आए। नौ साल में यह उनकी पहली इजराइल यात्रा थी। इस दौरान भारत और इजराइल ने अपने रिश्तों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया। पॉलिटिकल थ्रिलर वेब सीरीज है ‘फौदा’ ‘फौदा’ एक इजराइली पॉलिटिकल थ्रिलर वेब सीरीज है। इसमें इजराइल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे संघर्ष को दिखाया गया है। अरबी भाषा में ‘फौदा’ का मतलब ‘अराजकता’ यानी Chaos होता है। सीरीज की कहानी इजराइल की एक गुप्त डिफेंस यूनिट मिस्तारविम के कमांडर डोरोन के आसपास घूमती है। डोरोन रिटायरमेंट के बाद फिर ड्यूटी पर लौटता है। उसका मकसद हमास के एक बड़े आतंकवादी, जिसे ‘द पैंथर’ कहा जाता है, को पकड़ना है। डोरोन को पहले लगा था कि वह मारा जा चुका है, लेकिन बाद में पता चलता है कि वह जिंदा है। हालांकि इसके किरदार काल्पनिक हैं, लेकिन कहानी असली घटनाओं से प्रेरित है। यह इजराइल की अंडरकवर यूनिट ‘दुवदेवन’ के अनुभवों पर आधारित है। सीरीज के निर्माता लियोर रज खुद इस यूनिट का हिस्सा रह चुके हैं और उन्होंने डोरोन का किरदार भी निभाया है। अब तक इसके चार सीजन आ चुके हैं। हर सीजन में 12 एपिसोड हैं। पांचवें सीजन की घोषणा भी हो चुकी है। इसकी कहानी 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद की स्थिति पर आधारित होगी।

वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट-2026 में 3 भारतीय महिलाएं:सफीना ने 20लाख बेटियों को स्कूल लौटाया, 14 देशों को मुफ्त दवा दिलवा रहीं रेशमा; 7.5 लाख छात्राओं को सशक्त कर रहीं सौजानी

वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट-2026 में 3 भारतीय महिलाएं:सफीना ने 20लाख बेटियों को स्कूल लौटाया, 14 देशों को मुफ्त दवा दिलवा रहीं रेशमा; 7.5 लाख छात्राओं को सशक्त कर रहीं सौजानी

टाइम मैगजीन ने 2026 के वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट के लिए 16 महिलाओं को चुना है। लिस्ट में भारतीय और भारतीय मूल की तीन महिलाएं भी हैं। ये सभी लीडर्स ज्यादा बराबरी वाली दुनिया बनाने के लिए काम कर रही हैं। साथ ही महिलाओं और लड़कियों की सबसे बड़ी चुनौतियां हल करने में जुटी हैं। यह प्रोजेक्ट टाइम के सालाना वुमन ऑफ द ईयर लिस्ट से अलग है। इसे 2020 में शुरू किया गया था। कवर पर हॉलीवुड अभिनेत्री टेयाना टेलर हैं। फिल्म ​‘वन बैटल आफ्टर अनादर’ में उनका प्रदर्शन उम्दा रहा है। कुछ अनदेखे चेहरे जैसे- सिएरा लियोन के पहले मातृत्व केंद्र की अगुआई करने वाली इसाता डुम्बुया, अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर पर ह्यूमैनिटेरियन अभियान चला रही सिस्टर नॉरमा पिमेंटेल भी हैं। पढ़िए चुनिंदा लीडर्स का प्रेरक सफर… सफीना हुसैन- पढ़ाई अधूरी रही, इसी टीस को ताकत बनाया, जीता ‘एशिया का नोबेल’ बचपन गरीबी, हिंसा व अधूरी पढ़ाई के दर्द से गुजरा। इसी टीस को ताकत बनाया और मुंबई में ‘एजुकेट गर्ल्स’ की नींव रखी। वे कहती हैं,‘मैं जानती हूं पीछे छूट जाना कैसा लगता है। बीते साल संस्था ने भारत के गांवों की 20 लाख लड़कियों को स्कूल लौटाने में सफलता हासिल की। लक्ष्य 15 लाख ही था। इसके लिए संस्था को रैमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला। उनका एनजीओ यह सम्मान पाने वाला पहला संगठन बना। हाल में आई उनकी किताब ‘एवरी लास्ट गर्ल’ में अंतिमबाला का किरदार हर उस लड़की का प्रतीक है, जिसकी आवाज अनसुनी कर दी गई। ‘कोई भी लड़की बकरी चराना या बाल वधू बनना नहीं चाहती, हर लड़की… बस स्कूल जाना चाहती है’- सफीना रेशमा केवलरमानी – सिकल सेल का इलाज खोजा, अब डायबिटीज को हराने में जुटीं ठान चुकी हैं, लाइलाज बीमारियों को जड़ से मिटाना है। किडनी डॉक्टर से शुरू हुआ सफर आज दुनिया की दिग्गज बायोटेक कंपनी (वर्टेक्स) की पहली महिला सीईओ बनने तक जा पहुंचा है। उनके नेतृत्व में वर्टेक्स भारत समेत दुनिया के 14 देशों में ‘सिस्टिक फाइब्रोसिस’ (फेफड़ों की बीमारी) की महंगी दवाएं मुफ्त उपलब्ध करा रही है। रेशमा के नेतृत्व में कंपनी ने सिकल सेल बीमारी के लिए क्रिस्पर आधारित पहली जीन-एडिटिंग थेरेपी लॉन्च की। अब डायबिटीज और किडनी रोगों को पूरी तरह खत्म करने वाली थेरेपी पर काम कर रही हैं। ‘दवाओं का असली मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि इंसान को मौत के मुंह से खींच लाना है’- रेशमा रेशमा सौजानी – अमेरिकी माताओं की आवाज, चाइल्डकेयर अभियान का चेहरा शरणार्थी की बेटी और पहली भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस प्रत्याशी ने साहस से सत्ता को झकझोरा। इससे अमेरिका में माताओं के लिए सस्ते चाइल्डकेयर और न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल केयर’ का रास्ता खुला। अपनी संस्थाओं ‘मॉम्स फर्स्ट’ व ‘गर्ल्स हू कोड’ के जरिए 7.6 लाख छात्राओं को सशक्त कर रही हैं। हम बेटियों को ‘परफेक्ट’ बनाना चाहते हैं, जबकि बेटों को ‘बहादुर’। समाज में असली समानता तब आएगी जब हम महिलाओं को अपनी गलतियों पर शर्मिंदा होना नहीं, बल्कि अपनी बहादुरी पर गर्व करना सिखाएंगे।’ ‘असली ताकत ‘जीतने’ में नहीं, बल्कि ‘हारने के बाद भी दोबारा खड़े होने के साहस’ में है’- रेशमा सौजानी

मायावती की बसपा ने 2027 यूपी चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की, जातिगत अंकगणित पर ध्यान केंद्रित किया | राजनीति समाचार

Former Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal and former Deputy CM Manish Sisodia (Image credit: PTI)

आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2026, 12:41 IST बहुजन समाज पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित गठबंधन को फिर से हासिल करना है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती. (फोटो क्रेडिट: एक्स) 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी एक साल से अधिक समय बाकी है, ऐसे में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी है, जो पार्टी प्रमुख मायावती के तहत सोशल इंजीनियरिंग पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का संकेत है। मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी ने अब तक उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों – पूर्वाचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी से चार उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें दो मुस्लिम और दो ब्राह्मण नेता हैं, जो 2027 के चुनावों के लिए पार्टी के ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित राजनीतिक संयोजन बनाने के प्रयास का संकेत देते हैं। यह कदम 2022 के विधानसभा चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आया है, जब बसपा सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रही, हालांकि वह 18 निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रही। खोई जमीन वापस पाने के लिए दृढ़ संकल्पित पार्टी की योजना मार्च 2026 तक 100 से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करने की है। ये उम्मीदवार कौन हैं? अबुल क़ैस आज़मी (दीदारगंज) आज़मगढ़ की दीदारगंज सीट पर, बसपा ने लंबे समय से पार्टी के नेता अबुल क़ैस आज़मी को मैदान में उतारा है, जिन्होंने पहले 2012 और 2017 में फूलपुर पवई से चुनाव लड़ा था। उन्होंने उन चुनावों में क्रमशः 46,000 और 61,000 वोट हासिल किए और दोनों बार मामूली अंतर से दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने 2022 के चुनावों में भाग नहीं लिया लेकिन अब एक नई सीट पर अपनी संभावनाओं का परीक्षण करेंगे। इस निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिम और दलित आबादी है। यहां करीब 95,000 मुस्लिम और 80,000 दलित मतदाता हैं. ओबीसी में राजभर (38,000), चौहान (14,000) और निषाद (7,000) एक बड़ा समूह बनाते हैं। 2022 में समाजवादी पार्टी ने 37% वोट शेयर के साथ सीट जीती, जबकि बीजेपी को 30% और बीएसपी को 23% वोट मिले। बसपा को उम्मीद है कि वह इन वोटों को एकजुट कर लेगी। फिरोज आफताब (सहारनपुर ग्रामीण) पश्चिमी यूपी के सहारनपुर ग्रामीण से बसपा ने फिरोज आफताब को उम्मीदवार बनाया है, जो हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़कर पार्टी में शामिल हुए हैं। उनके दादा चौधरी जफर अहमद कांग्रेस से यूपी की पहली विधानसभा के लिए चुने गए थे। आफताब ने स्वयं कई चुनाव लड़े हैं, जिसमें 1996 में निर्दलीय चुनाव भी शामिल है, जब वह लगभग 40,000 वोट पाने के बावजूद भाजपा से मात्र 90 वोटों से हार गए थे। इस सीट पर प्रभावशाली ओबीसी और उच्च जाति के मतदाताओं के साथ-साथ मुस्लिम और दलित मतदाताओं का एक बड़ा आधार है। सहारनपुर ग्रामीण में लगभग 1.25 लाख मुस्लिम और 90,000 दलित मतदाता हैं, साथ ही सैनी (32,000), गुर्जर (18,000) और लगभग 24,000 ब्राह्मण-ठाकुर मतदाता हैं। 2022 में सपा के आशु मलिक 1.07 लाख वोटों से जीते, बीजेपी के जगपाल सिंह को 76,000 और बसपा उम्मीदवार को 62,000 वोट मिले. विनोद मिश्र (मुंगरा बादशाहपुर) जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर में ब्राह्मण नेता विनोद मिश्रा को चुना गया है. मिश्रा ने सपा में जाने से पहले भाजपा के साथ अपना करियर शुरू किया, जहां वह 2022 तक रहे। वह छह महीने पहले बसपा में शामिल हुए और अपना पहला चुनाव लड़ेंगे। इस निर्वाचन क्षेत्र में दलित और ओबीसी मतदाताओं के साथ-साथ ब्राह्मणों की भी मजबूत उपस्थिति है। ओबीसी में 30,000 मुसलमानों के साथ पटेल (60,000) और यादव (40,000) प्रभावशाली हैं। 2022 में सपा के पंकज पटेल 92,000 वोटों से जीते, बीजेपी के अजय शंकर दुबे को 86,000 वोट मिले और बसपा उम्मीदवार 32,000 से पीछे रहे. आशीष पांडे (माधौगढ़) बुंदेलखंड की माधौगढ़ सीट पर पार्टी ने क्षेत्र में दलित-ब्राह्मण समीकरण पर भरोसा करते हुए आशीष पांडे को मैदान में उतारा है। 2017 और 2022 में टिकट से वंचित होने के बाद, उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में नामांकन हासिल किया है। माधौगढ़ में लगभग 90,000 दलित मतदाता हैं – जो सबसे बड़ा समूह है – इसके बाद 44,000 ब्राह्मण, 40,000 राजपूत और 20,000 मुस्लिम हैं। कुशवाह और कुर्मी समेत ओबीसी मतदाताओं की संख्या करीब 1.5 लाख है. 2022 में बीजेपी ने 41% वोट शेयर के साथ सीट जीती, जबकि बीएसपी को 27% और एसपी को 24% वोट मिले। बड़ी रणनीति हाल की बैठकों में मायावती ने बार-बार सामाजिक अंकगणित के महत्व पर जोर दिया है। उत्तर प्रदेश की आबादी में दलित लगभग 20%, मुस्लिम लगभग 19% और ब्राह्मण 9-11% के बीच हैं। बसपा नेतृत्व का मानना ​​है कि इन समूहों को एकजुट करने से कई निर्वाचन क्षेत्रों में उसके वोट शेयर में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को जाति आउटरीच प्रयासों का प्रबंधन करने का काम भी सौंपा है, जिसका लक्ष्य समुदायों में अपना समर्थन आधार फिर से बनाना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बसपा की शुरुआती घोषणाओं का उद्देश्य बूथ-स्तरीय संगठन को मजबूत करना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों का मुकाबला करना है, जो वर्तमान में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर हावी हैं। पूर्वी, पश्चिमी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में उम्मीदवारों की शुरुआती घोषणाओं के साथ, बसपा अपनी खोई जमीन वापस पाने और उत्तर प्रदेश की जटिल जाति-संचालित राजनीति में एक निर्णायक खिलाड़ी के रूप में खुद को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रही है। पहले प्रकाशित: 27 फरवरी, 2026, 12:41 IST समाचार राजनीति मायावती की बसपा ने 2027 यूपी चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की, जातिगत अंकगणित पर ध्यान केंद्रित किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027(टी)बीएसपी उम्मीदवार सूची 2027(टी)मायावती सोशल 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मेसी का खुलासा- स्पेन से खेलने का ऑफर ठुकराया:अंग्रेजी न सीख पाने का आज भी मलाल, बोले- भाषा की कमी से कई बड़े लोगों से खुलकर बात नहीं कर सका

मेसी का खुलासा- स्पेन से खेलने का ऑफर ठुकराया:अंग्रेजी न सीख पाने का आज भी मलाल, बोले- भाषा की कमी से कई बड़े लोगों से खुलकर बात नहीं कर सका

अर्जेंटीना के वर्ल्ड कप विजेता कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर बात की है। एक मैक्सिकन पॉडकास्ट के दौरान मेसी ने स्वीकार किया कि बचपन में अंग्रेजी न सीख पाना उन्हें अब भी खलता है। 38 वर्षीय मेसी ने कहा, ‘मुझे कई बातों का अफसोस है, लेकिन बचपन में अंग्रेजी न सीखना सबसे बड़ा पछतावा है। मेरे पास समय था, मैं पढ़ सकता था। करियर के दौरान मुझे दुनिया की कई बड़ी और प्रभावी हस्तियों से मिलने का मौका मिला, लेकिन भाषा की कमी के कारण मैं उनसे खुलकर संवाद नहीं कर सका। मैं ऐसे पलों में खुद को आधा अनजान महसूस करता था। अमेरिका के मेजर लीग सॉकर क्लब इंटर मियामी के लिए खेल रहे मेसी अब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और तैयारी के महत्व के बारे में लगातार समझाते हैं। मेसी 13 साल की उम्र में अपने शहर रोसारियो से स्पेन पहुंचे और बार्सिलोना की प्रसिद्ध एकेडमी ला मासिया से जुड़े। उन्होंने भावुक होकर याद किया, ‘पूरा मोहल्ला हमें एयरपोर्ट छोड़ने आया था। वे लियो मेसी को नहीं, बल्कि मेसी परिवार को विदा कर रहे थे।’ स्पेन में उनका पहला साल बहुत कठिन था। ट्रांसफर नियमों के कारण वे छह महीने तक नहीं खेल पाए और जब खेलने का मौका मिला, तो चोटिल होकर 3 महीने के लिए बाहर हो गए थे। स्पेन में पले-बढ़े और पूरा क्लब करियर वहीं बनाने के कारण मेसी के पास स्पेन की नेशनल टीम से खेलने का विकल्प भी था। उस समय स्पेनिश फुटबॉल फेडरेशन ने उन्हें मनाने की कोशिश की। लेकिन मेसी ने साफ किया कि उनके मन में कभी भ्रम नहीं था। उनका दिल हमेशा अर्जेंटीना के साथ था। करियर के कठिन दौर में जब अर्जेंटीना बड़े टूर्नामेंटों के फाइनल हार रहा था, तब कुछ आलोचकों ने सवाल उठाए थे कि शायद स्पेन के साथ खेलते तो मेसी ज्यादा ट्रॉफी जीतते। लेकिन मेसी ने फैसले पर कभी पछतावा नहीं किया। आठ बार बैलेन डि’ओर जीत चुके मेसी ने स्वीकारा कि भले ही उन्होंने फुटबॉल में इतना कुछ हासिल किया, लेकिन सीखने व बेहतर बनने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। रास्ते में कई अनुभव और सबक मिलते हैं, जो इंसान को बनाते हैं। मैंने एंटोनेला को बार्सिलोना में डिनर के दौरान प्रपोज किया था। हम कई साल से साथ थे और हमारे दो बच्चे भी थे। यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि स्वाभाविक कदम था। यह थोड़ा फिल्मी और रोमांटिक अंदाज में था।