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वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट-2026 में 3 भारतीय महिलाएं:सफीना ने 20लाख बेटियों को स्कूल लौटाया, 14 देशों को मुफ्त दवा दिलवा रहीं रेशमा; 7.5 लाख छात्राओं को सशक्त कर रहीं सौजानी

वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट-2026 में 3 भारतीय महिलाएं:सफीना ने 20लाख बेटियों को स्कूल लौटाया, 14 देशों को मुफ्त दवा दिलवा रहीं रेशमा; 7.5 लाख छात्राओं को सशक्त कर रहीं सौजानी

टाइम मैगजीन ने 2026 के वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट के लिए 16 महिलाओं को चुना है। लिस्ट में भारतीय और भारतीय मूल की तीन महिलाएं भी हैं। ये सभी लीडर्स ज्यादा बराबरी वाली दुनिया बनाने के लिए काम कर रही हैं। साथ ही महिलाओं और लड़कियों की सबसे बड़ी चुनौतियां हल करने में जुटी हैं। यह प्रोजेक्ट टाइम के सालाना वुमन ऑफ द ईयर लिस्ट से अलग है। इसे 2020 में शुरू किया गया था। कवर पर हॉलीवुड अभिनेत्री टेयाना टेलर हैं। फिल्म ​‘वन बैटल आफ्टर अनादर’ में उनका प्रदर्शन उम्दा रहा है। कुछ अनदेखे चेहरे जैसे- सिएरा लियोन के पहले मातृत्व केंद्र की अगुआई करने वाली इसाता डुम्बुया, अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर पर ह्यूमैनिटेरियन अभियान चला रही सिस्टर नॉरमा पिमेंटेल भी हैं। पढ़िए चुनिंदा लीडर्स का प्रेरक सफर… सफीना हुसैन- पढ़ाई अधूरी रही, इसी टीस को ताकत बनाया, जीता ‘एशिया का नोबेल’
बचपन गरीबी, हिंसा व अधूरी पढ़ाई के दर्द से गुजरा। इसी टीस को ताकत बनाया और मुंबई में ‘एजुकेट गर्ल्स’ की नींव रखी। वे कहती हैं,‘मैं जानती हूं पीछे छूट जाना कैसा लगता है। बीते साल संस्था ने भारत के गांवों की 20 लाख लड़कियों को स्कूल लौटाने में सफलता हासिल की। लक्ष्य 15 लाख ही था। इसके लिए संस्था को रैमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला। उनका एनजीओ यह सम्मान पाने वाला पहला संगठन बना। हाल में आई उनकी किताब ‘एवरी लास्ट गर्ल’ में अंतिमबाला का किरदार हर उस लड़की का प्रतीक है, जिसकी आवाज अनसुनी कर दी गई।
‘कोई भी लड़की बकरी चराना या बाल वधू बनना नहीं चाहती, हर लड़की… बस स्कूल जाना चाहती है’- सफीना रेशमा केवलरमानी – सिकल सेल का इलाज खोजा, अब डायबिटीज को हराने में जुटीं
ठान चुकी हैं, लाइलाज बीमारियों को जड़ से मिटाना है। किडनी डॉक्टर से शुरू हुआ सफर आज दुनिया की दिग्गज बायोटेक कंपनी (वर्टेक्स) की पहली महिला सीईओ बनने तक जा पहुंचा है। उनके नेतृत्व में वर्टेक्स भारत समेत दुनिया के 14 देशों में ‘सिस्टिक फाइब्रोसिस’ (फेफड़ों की बीमारी) की महंगी दवाएं मुफ्त उपलब्ध करा रही है। रेशमा के नेतृत्व में कंपनी ने सिकल सेल बीमारी के लिए क्रिस्पर आधारित पहली जीन-एडिटिंग थेरेपी लॉन्च की। अब डायबिटीज और किडनी रोगों को पूरी तरह खत्म करने वाली थेरेपी पर काम कर रही हैं।
‘दवाओं का असली मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि इंसान को मौत के मुंह से खींच लाना है’- रेशमा रेशमा सौजानी – अमेरिकी माताओं की आवाज, चाइल्डकेयर अभियान का चेहरा
शरणार्थी की बेटी और पहली भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस प्रत्याशी ने साहस से सत्ता को झकझोरा। इससे अमेरिका में माताओं के लिए सस्ते चाइल्डकेयर और न्यूयॉर्क में ‘यूनिवर्सल केयर’ का रास्ता खुला। अपनी संस्थाओं ‘मॉम्स फर्स्ट’ व ‘गर्ल्स हू कोड’ के जरिए 7.6 लाख छात्राओं को सशक्त कर रही हैं। हम बेटियों को ‘परफेक्ट’ बनाना चाहते हैं, जबकि बेटों को ‘बहादुर’। समाज में असली समानता तब आएगी जब हम महिलाओं को अपनी गलतियों पर शर्मिंदा होना नहीं, बल्कि अपनी बहादुरी पर गर्व करना सिखाएंगे।’
‘असली ताकत ‘जीतने’ में नहीं, बल्कि ‘हारने के बाद भी दोबारा खड़े होने के साहस’ में है’- रेशमा सौजानी

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टाइम मैगजीन ने 2026 के वुमन ऑफ द ईयर प्रोजेक्ट के लिए 16 महिलाओं को चुना है। लिस्ट में भारतीय और भारतीय मूल की तीन महिलाएं भी हैं। ये सभी लीडर्स ज्यादा बराबरी वाली दुनिया बनाने के लिए काम कर रही हैं। साथ ही महिलाओं और लड़कियों की सबसे बड़ी चुनौतियां हल करने में जुटी हैं। यह प्रोजेक्ट टाइम के सालाना वुमन ऑफ द ईयर लिस्ट से अलग है। इसे 2020 में शुरू किया गया था। कवर पर हॉलीवुड अभिनेत्री टेयाना टेलर हैं। फिल्म ​‘वन बैटल आफ्टर अनादर’ में उनका प्रदर्शन उम्दा रहा है। कुछ अनदेखे चेहरे जैसे- सिएरा लियोन के पहले मातृत्व केंद्र की अगुआई करने वाली इसाता डुम्बुया, अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर पर ह्यूमैनिटेरियन अभियान चला रही सिस्टर नॉरमा पिमेंटेल भी हैं। पढ़िए चुनिंदा लीडर्स का प्रेरक सफर… सफीना हुसैन- पढ़ाई अधूरी रही, इसी टीस को ताकत बनाया, जीता ‘एशिया का नोबेल’
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‘दवाओं का असली मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि इंसान को मौत के मुंह से खींच लाना है’- रेशमा रेशमा सौजानी – अमेरिकी माताओं की आवाज, चाइल्डकेयर अभियान का चेहरा
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‘असली ताकत ‘जीतने’ में नहीं, बल्कि ‘हारने के बाद भी दोबारा खड़े होने के साहस’ में है’- रेशमा सौजानी

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