Tuesday, 25 Aug 2026 | 02:22 AM

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अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को भी नागरिकता नहीं; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को भी नागरिकता नहीं; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अमेरिका में जन्म लेने वाले लोगों को नागरिकता मिलने के दायरे को सीमित करने की कोशिश की है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने इमिग्रेशन) से जुड़े दो कार्यकारी आदेश साइन किए हैं। इनमें से एक आदेश अमेरिका में पैदा होने वाले उन लोगों की संख्या को सीमित करेगा, जो अमेरिकी नागरिकता पाने के पात्र हैं। ट्रम्प ने बताया कि दूसरा आदेश ‘बर्थ टूरिज्म’ पर लगाम लगाने के लिए है। इसके तहत उन विदेशी पर्यटकों पर वीजा प्रतिबंध बढ़ाए जाएंगे, जो अमेरिका में आकर बच्चे को जन्म देना चाहते हैं। इससे पहले बर्थराइट सिटीजनशिप को सीमित करने की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन अब वे दोबारा इसके लिए कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आदेशों के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन ट्रम्प का मानना है कि उनके ये नए कदम संवैधानिक होंगे। जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था इससे पहले जून में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने बर्थराइट सिटीजनशिप को बरकरार रखा था। कोर्ट ने ट्रम्प के उन पिछले प्रयासों को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने यह घोषित करने की कोशिश की थी कि अमेरिका में अवैध-अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। कोर्ट ने कहा था कि अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से मौजूद लोगों के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिकता पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’ मामले में अपने पहले के फैसले का भी हवाला दिया और कहा कि विदेशी माता-पिता से अमेरिका में पैदा हुए बच्चे इसके हकदार हैं। कैसे मिला था बर्थराइट सिटीजनशिप का अधिकार व्हाइट हाउस के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि ये एग्जीक्यूटिव एक्शन 14वें संशोधन के मूल मकसद पर आधारित हैं। अमेरिकी संविधान में किया गया 14वां संशोधन खास तौर पर गृह युद्ध के बाद इसलिए बनाया गया था ताकि यह पक्का किया जा सके कि गुलामों के बच्चे नागरिक बन सकें। इसका उद्देश्य हर विदेशी नागरिक के बच्चे को स्वतः नागरिकता देना नहीं था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, ऐसी नागरिकता के लिए अयोग्य लोगों की कैटेगरी का दायरा बढ़ाने के लिए कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। बर्थराइट-बर्थ टूरिज्म पर नए आदेश का असर 2024 में बर्थ टूरिज्म से पैदा हुए बच्चों की संख्या 9600 थी ट्रम्प प्रशासन इसे बहुत बड़े खतरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े कुछ और बताते हैं। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के मुताबिक अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में से एक बहुत ही छोटा हिस्सा ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक 22,000 से 26,000 बच्चों के पेरेंट्स अमेरिकी नागरिकता पाने के मकसद से वहां पहुंचते हैं। 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली मांओं के केवल 9,600 जन्म दर्ज किए गए थे।

अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को नागरिकता नहीं मिलेगी; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को भी नागरिकता नहीं; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अमेरिका में जन्म लेने वाले लोगों को नागरिकता मिलने के दायरे को सीमित करने की कोशिश की है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने इमिग्रेशन से जुड़े दो कार्यकारी आदेश साइन किए हैं। इनमें से एक अमेरिका में पैदा होने वाले उन लोगों की संख्या को सीमित करेगा, जो यहां नागरिकता पाने के हकदार हैं। ट्रम्प ने बताया कि दूसरा आदेश ‘बर्थ टूरिज्म’ पर लगाम लगाने के लिए है। इसके तहत उन विदेशी पर्यटकों पर वीजा प्रतिबंध बढ़ाए जाएंगे, जो अमेरिका में आकर बच्चे को जन्म देना चाहते हैं। इससे पहले बर्थराइट सिटीजनशिप को सीमित करने की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन अब वे दोबारा इसके लिए कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आदेशों के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन ट्रम्प का मानना है कि उनके ये नए कदम संवैधानिक होंगे। जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था इससे पहले जून में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने बर्थराइट सिटीजनशिप को बरकरार रखा था। कोर्ट ने ट्रम्प के उन पिछले प्रयासों को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने यह घोषित करने की कोशिश की थी कि अमेरिका में अवैध-अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। कोर्ट ने कहा था कि अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से मौजूद लोगों के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिकता पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’ मामले में अपने पहले के फैसले का भी हवाला दिया और कहा कि विदेशी माता-पिता से अमेरिका में पैदा हुए बच्चे इसके हकदार हैं। कैसे मिला था बर्थराइट सिटीजनशिप का अधिकार व्हाइट हाउस के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि ये एग्जीक्यूटिव एक्शन 14वें संशोधन के मूल मकसद पर आधारित हैं। अमेरिकी संविधान में किया गया 14वां संशोधन खास तौर पर गृह युद्ध के बाद इसलिए बनाया गया था ताकि यह पक्का किया जा सके कि गुलामों के बच्चे नागरिक बन सकें। इसका उद्देश्य हर विदेशी नागरिक के बच्चे को स्वतः नागरिकता देना नहीं था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, ऐसी नागरिकता के लिए अयोग्य लोगों की कैटेगरी का दायरा बढ़ाने के लिए कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। बर्थराइट-बर्थ टूरिज्म पर नए आदेश का असर 2024 में बर्थ टूरिज्म से पैदा हुए बच्चों की संख्या 9600 थी ट्रम्प प्रशासन इसे बहुत बड़े खतरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े कुछ और बताते हैं। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के मुताबिक अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में से एक बहुत ही छोटा हिस्सा ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक 22,000 से 26,000 बच्चों के पेरेंट्स अमेरिकी नागरिकता पाने के मकसद से वहां पहुंचते हैं। 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली मांओं के केवल 9,600 जन्म दर्ज किए गए थे। ————– ट्रम्प से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम: पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए अब राह पहले जैसी आसान नहीं रही। ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। इसके उलट पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा वीजा मिले हैं। पढ़ें पूरी खबर…

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के सख्त नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के सख्त नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

पर्सनल, कार या होम लोन न चुकाने वाले ग्राहकों के मोबाइल और लैपटॉप बैंक बंद या डिसेबल नहीं कर सकते। रिजर्व बैंक यानी RBI ने 6 अगस्त को यह साफ कर दिया है। बैंक सिर्फ उन्हीं मामलों में ऐसा कर सकते हैं, जहां वो डिवाइस खुद बैंक के लोन पर खरीदा गया हो। केंद्रीय बैंक का यह कदम ग्राहकों को मिलने वाली धमकियों, प्राइवेसी के उल्लंघन और रिकवरी के नाम पर होने वाली प्रताड़ना को रोकने के लिए उठाया गया है। सवाल-जवाब में समझिए ये नए नियम क्या हैं… सवाल 1: RBI ने लोन रिकवरी को लेकर क्या नया आदेश दिया है? जवाब: रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की वसूली के लिए कर्जदार के मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट को सॉफ्टवेयर की मदद से लॉक या डिसेबल नहीं कर सकता। सवाल 2: क्या बैंक किसी भी स्थिति में फोन या लैपटॉप लॉक नहीं कर सकते? जवाब: बैंक केवल एक ही शर्त पर डिवाइस को डिसेबल कर सकते हैं, अगर वह मोबाइल या लैपटॉप खुद उसी बैंक या कंपनी के लोन पर खरीदा गया हो। अगर लोन या फाइनेंस किसी अन्य चीज के लिए लिया गया है, तो डिवाइस लॉक करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सवाल 3: जिन मामलों में डिवाइस फाइनेंस हुआ है, क्या वहां बैंक तुरंत फोन बंद कर सकते हैं? जवाब: नहीं, RBI ने कहा है कि अगर डिवाइस लोन पर खरीदा भी गया है, तो बैंक सीधे या शुरुआत से ही फोन लॉक नहीं कर सकते। बैंकों को चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। सवाल 4: अगर लोन पर खरीदा फोन लॉक होता भी है, तो कौन-कौन से फीचर्स चालू रहेंगे? जवाब: RBI के मुताबिक, फोन की जरूरी सेवाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसमें इनकमिंग कॉल्स, SMS और इमरजेंसी SOS फीचर्स शामिल हैं। लोन बकाया होने की स्थिति में भी ये सेवाएं चालू रखनी होंगी। सवाल 5: डिवाइस लॉकिंग टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए क्या नियम हैं? जवाब: RBI ने साफ किया है कि बैंक या थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर बिना जांचे-परखे या थर्ड-पार्टी अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें उस डिवाइस के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) प्लेटफॉर्म से बाकायदा सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। सवाल 6: RBI को ये सख्त नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: लंबे समय से ग्राहकों की शिकायतें आ रही थीं कि रिकवरी एजेंसियां और बैंक उन्हें परेशान कर रहे हैं। रिकवरी एजेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो डालकर बदनाम करने और अभद्र भाषा (गैली-गलौज) का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हीं शिकायतों के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया। सवाल 7: रिकवरी एजेंटों को कर्जदार की जानकारी देने पर क्या निर्देश दिए गए हैं? जवाब: RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ कर्जदार या गारंटर की निजी जानकारी बहुत सीमित दायरे में ही शेयर करें। केवल उतनी ही जानकारी दी जाए, जितनी लोन रिकवरी की जिम्मेदारी निभाने के लिए बेहद जरूरी हो। सवाल 8: ये नए नियम कब से लागू होंगे और इसकी प्रक्रिया कब शुरू हुई थी? जवाब: RBI के सर्कुलर के अनुसार, ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। बता दें कि इससे पहले केंद्रीय बैंक ने मई में ‘कंडक्ट ऑफ रेगुलेटेड एंटिटीज इन रिकवरी ऑफ लोन्स’ का एक ड्राफ्ट पेश किया था, जिस पर मिले फीडबैक के बाद अब फाइनल गाइडलाइंस जारी की गई हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या हैं आपके अधिकार

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

पर्सनल, कार या होम लोन न चुकाने वाले ग्राहकों के मोबाइल और लैपटॉप बैंक बंद या डिसेबल नहीं कर सकते। रिजर्व बैंक यानी RBI ने 6 अगस्त को यह साफ कर दिया है। बैंक सिर्फ उन्हीं मामलों में ऐसा कर सकते हैं, जहां वो डिवाइस खुद बैंक के लोन पर खरीदा गया हो। केंद्रीय बैंक का यह कदम ग्राहकों को मिलने वाली धमकियों, प्राइवेसी के उल्लंघन और रिकवरी के नाम पर होने वाली प्रताड़ना को रोकने के लिए उठाया गया है। सवाल-जवाब में समझिए ये नए नियम क्या हैं… सवाल 1: RBI ने लोन रिकवरी को लेकर क्या नया आदेश दिया है? जवाब: रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की वसूली के लिए कर्जदार के मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट को सॉफ्टवेयर की मदद से लॉक या डिसेबल नहीं कर सकता। सवाल 2: क्या बैंक किसी भी स्थिति में फोन या लैपटॉप लॉक नहीं कर सकते? जवाब: बैंक केवल एक ही शर्त पर डिवाइस को डिसेबल कर सकते हैं, अगर वह मोबाइल या लैपटॉप खुद उसी बैंक या कंपनी के लोन पर खरीदा गया हो। अगर लोन या फाइनेंस किसी अन्य चीज के लिए लिया गया है, तो डिवाइस लॉक करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सवाल 3: जिन मामलों में डिवाइस फाइनेंस हुआ है, क्या वहां बैंक तुरंत फोन बंद कर सकते हैं? जवाब: नहीं, RBI ने कहा है कि अगर डिवाइस लोन पर खरीदा भी गया है, तो बैंक सीधे या शुरुआत से ही फोन लॉक नहीं कर सकते। बैंकों को चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। सवाल 4: अगर लोन पर खरीदा फोन लॉक होता भी है, तो कौन-कौन से फीचर्स चालू रहेंगे? जवाब: RBI के मुताबिक, फोन की जरूरी सेवाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसमें इनकमिंग कॉल्स, SMS और इमरजेंसी SOS फीचर्स शामिल हैं। लोन बकाया होने की स्थिति में भी ये सेवाएं चालू रखनी होंगी। सवाल 5: डिवाइस लॉकिंग टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए क्या नियम हैं? जवाब: RBI ने साफ किया है कि बैंक या थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर बिना जांचे-परखे या थर्ड-पार्टी अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें उस डिवाइस के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) प्लेटफॉर्म से बाकायदा सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। सवाल 6: RBI को ये सख्त नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: लंबे समय से ग्राहकों की शिकायतें आ रही थीं कि रिकवरी एजेंसियां और बैंक उन्हें परेशान कर रहे हैं। रिकवरी एजेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो डालकर बदनाम करने और अभद्र भाषा (गैली-गलौज) का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हीं शिकायतों के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया। सवाल 7: रिकवरी एजेंटों को कर्जदार की जानकारी देने पर क्या निर्देश दिए गए हैं? जवाब: RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ कर्जदार या गारंटर की निजी जानकारी बहुत सीमित दायरे में ही शेयर करें। केवल उतनी ही जानकारी दी जाए, जितनी लोन रिकवरी की जिम्मेदारी निभाने के लिए बेहद जरूरी हो। सवाल 8: ये नए नियम कब से लागू होंगे और इसकी प्रक्रिया कब शुरू हुई थी? जवाब: RBI के सर्कुलर के अनुसार, ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। बता दें कि इससे पहले केंद्रीय बैंक ने मई में ‘कंडक्ट ऑफ रेगुलेटेड एंटिटीज इन रिकवरी ऑफ लोन्स’ का एक ड्राफ्ट पेश किया था, जिस पर मिले फीडबैक के बाद अब फाइनल गाइडलाइंस जारी की गई हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या हैं आपके अधिकार

हर महीने ₹610 जमा करने पर मिलेंगे ₹1 लाख:SBI की 'हर घर लखपति' स्कीम में 7.05% तक का ब्याज, जानें इससे जुड़ी खास बातें

हर महीने ₹610 जमा करने पर मिलेंगे ₹1 लाख:SBI की 'हर घर लखपति' स्कीम में 7.05% तक का ब्याज, जानें इससे जुड़ी खास बातें

भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI एक खास रिकरिंग डिपॉजिट यानी RD स्कीम चला रहा है, जिसका नाम ‘हर घर लखपति’ है। यह एक कस्टमाइज्ड RD प्रोडक्ट है, जिसका मकसद है कि आम आदमी हर महीने छोटी-छोटी बचत करके मैच्योरिटी पर ₹1 लाख या उससे ज्यादा का फंड जुटा सके और ‘लखपति’ बन सके। समझें RD क्या है? रिकरिंग डिपॉजिट या RD बड़ी बचत में आपकी मदद कर सकती है। आप इसका इस्‍तेमाल गुल्लक की तरह कर सकते हैं। मतलब आप इसमें हर महीने सैलरी आने पर एक निश्चित रकम डालते रहें और इसके मैच्योर होने पर आपके हाथ में बड़ी रकम होगी। हर घर लखपति स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 3 साल से 10 साल तक रहता है। यानी आप 3 साल से 10 साल तक के लिए निवेश कर सकते हैं। 1 लाख से ज्यादा के लिए भी कर सकते हैं निवेश हर घर लखपति योजना में आप 1 लाख रुपए से ज्यादा का टारगेट भी चुन सकते हैं। इसमें 2, 3 और 4 लाख आदि का टारगेट सेट करके भी निवेश कर सकते हैं। आप जितनी रकम का टारगेट रखते है, आपकी किस्त की राशि उसी हिसाब से तय होती है।

हर महीने ₹610 जमा करने पर मिलेंगे ₹1 लाख:SBI की 'हर घर लखपति' स्कीम में 7.05% तक का ब्याज, जानें इससे जुड़ी खास बातें

हर महीने ₹610 जमा करने पर मिलेंगे ₹1 लाख:SBI की 'हर घर लखपति' स्कीम में 7.05% तक का ब्याज, जानें इससे जुड़ी खास बातें

भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI एक खास रिकरिंग डिपॉजिट यानी RD स्कीम चला रहा है, जिसका नाम ‘हर घर लखपति’ है। यह एक कस्टमाइज्ड RD प्रोडक्ट है, जिसका मकसद है कि आम आदमी हर महीने छोटी-छोटी बचत करके मैच्योरिटी पर ₹1 लाख या उससे ज्यादा का फंड जुटा सके और ‘लखपति’ बन सके। समझें RD क्या है? रिकरिंग डिपॉजिट या RD बड़ी बचत में आपकी मदद कर सकती है। आप इसका इस्‍तेमाल गुल्लक की तरह कर सकते हैं। मतलब आप इसमें हर महीने सैलरी आने पर एक निश्चित रकम डालते रहें और इसके मैच्योर होने पर आपके हाथ में बड़ी रकम होगी। हर घर लखपति स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 3 साल से 10 साल तक रहता है। यानी आप 3 साल से 10 साल तक के लिए निवेश कर सकते हैं। 1 लाख से ज्यादा के लिए भी कर सकते हैं निवेश हर घर लखपति योजना में आप 1 लाख रुपए से ज्यादा का टारगेट भी चुन सकते हैं। इसमें 2, 3 और 4 लाख आदि का टारगेट सेट करके भी निवेश कर सकते हैं। आप जितनी रकम का टारगेट रखते है, आपकी किस्त की राशि उसी हिसाब से तय होती है।

सुष्मिता मुखर्जी बोलीं- मजबूरी में आत्मा बेची, बुरा लगता है:सी-ग्रेड फिल्में करने पर अफसोस जताकर कहा- तब कर्ज लेने वाले घर आकर गालियां देते थे

सुष्मिता मुखर्जी बोलीं- मजबूरी में आत्मा बेची, बुरा लगता है:सी-ग्रेड फिल्में करने पर अफसोस जताकर कहा- तब कर्ज लेने वाले घर आकर गालियां देते थे

कोलकाता में जन्मीं एक्ट्रेस सुष्मिता मुखर्जी ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है, जब उन्हें मजबूरी में सी-ग्रेड फिल्मों में काम करना पड़ा था। फिलहाल ‘जगन्नाथ और पूर्वी की दोस्ती अनोखी’ सीरियल में नजर आ रहीं सुष्मिता ने एक इमोशनल वीडियो में अपने संघर्षों पर खुलकर बात की है। मजबूरी में लिए थे गलत फैसले सुष्मिता ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा कि उन फिल्मों में काम करना उनके लिए बेहद परेशान करने वाला था, जो महिलाओं का अपमान करती थीं। उन्होंने कहा, ‘भगवान का शुक्र है कि मैंने सिर्फ खराब फिल्में चुनी थीं, पोर्नोग्राफी नहीं की। क्या मैंने अपनी आत्मा बेच दी? हां, मैंने अपनी आत्मा बेच दी। मुझे तब भी अच्छा नहीं लगा था और अब भी नहीं लगता, लेकिन यह मेरी मजबूरी थी।’ 2002 में दिवालिया हो गई थी प्रोडक्शन कंपनी एक्ट्रेस ने बताया कि 1983 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पासआउट होने के बाद उनके जीवन में एक ऐसा दौर आया जब उन्हें ये फैसले लेने पड़े। साल 2002 में सुष्मिता और उनके पति की मीडिया कंपनी ‘प्रयास प्रोडक्शन’ पर एक करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। उस समय टेक्नोलॉजी के नए दौर और एंजेल इन्वेस्टमेंट की जानकारी न होने के कारण उनकी कंपनी के साथ-साथ ट्रैक सिनेमा और अनिल चौधरी प्रोडक्शन भी दिवालिया हो गए थे। रिकवरी वाले घर आकर देते थे गालियां सुष्मिता ने बताया कि वह समय बहुत बुरा था। कर्ज देने वाले और रिकवरी एजेंट उनके घर आते थे और गालियां देते थे। उस वक्त उनके बच्चे बहुत छोटे थे, इसलिए उन्हें कर्ज चुकाने के लिए हर तरह का काम करना पड़ा। उन्होंने और उनके पति ने तीन-चार साल तक कड़ी मेहनत की ताकि वे एक करोड़ का कर्ज चुका सकें। बेटी की पढ़ाई के लिए भी थी पैसों की जरूरत आर्थिक दबाव का एक बड़ा कारण उनकी बेटी की पढ़ाई भी थी। सुष्मिता ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए उन्होंने उसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेजने का फैसला किया। हालांकि उनके पति इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को विदेश भेजा। उसकी पढ़ाई काफी महंगी थी, जिसके लिए उन्हें लगातार पैसे कमाने थे। फैसलों पर नहीं है कोई पछतावा सुष्मिता ने 1978 में फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा से शादी की थी, जिससे बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद 1993 में उन्होंने एक्टर और राजनेता राजा बुंदेला से दूसरी शादी की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने फैसलों पर कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी और वे आज अपने पैरों पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अब वह वही काम करती हैं जो उनके दिल को छूता है। उन्हें अब सम्मान भी मिलता है और वह अपनी कमाई से खुश हैं।

सुष्मिता मुखर्जी बोलीं- मजबूरी में आत्मा बेची, बुरा लगता है:सी-ग्रेड फिल्में करने पर अफसोस जताकर कहा- तब कर्ज लेने वाले घर आकर गालियां देते थे

सुष्मिता मुखर्जी बोलीं- मजबूरी में आत्मा बेची, बुरा लगता है:सी-ग्रेड फिल्में करने पर अफसोस जताकर कहा- तब कर्ज लेने वाले घर आकर गालियां देते थे

कोलकाता में जन्मीं एक्ट्रेस सुष्मिता मुखर्जी ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है, जब उन्हें मजबूरी में सी-ग्रेड फिल्मों में काम करना पड़ा था। फिलहाल ‘जगन्नाथ और पूर्वी की दोस्ती अनोखी’ सीरियल में नजर आ रहीं सुष्मिता ने एक इमोशनल वीडियो में अपने संघर्षों पर खुलकर बात की है। मजबूरी में लिए थे गलत फैसले सुष्मिता ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा कि उन फिल्मों में काम करना उनके लिए बेहद परेशान करने वाला था, जो महिलाओं का अपमान करती थीं। उन्होंने कहा, ‘भगवान का शुक्र है कि मैंने सिर्फ खराब फिल्में चुनी थीं, पोर्नोग्राफी नहीं की। क्या मैंने अपनी आत्मा बेच दी? हां, मैंने अपनी आत्मा बेच दी। मुझे तब भी अच्छा नहीं लगा था और अब भी नहीं लगता, लेकिन यह मेरी मजबूरी थी।’ 2002 में दिवालिया हो गई थी प्रोडक्शन कंपनी एक्ट्रेस ने बताया कि 1983 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पासआउट होने के बाद उनके जीवन में एक ऐसा दौर आया जब उन्हें ये फैसले लेने पड़े। साल 2002 में सुष्मिता और उनके पति की मीडिया कंपनी ‘प्रयास प्रोडक्शन’ पर एक करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। उस समय टेक्नोलॉजी के नए दौर और एंजेल इन्वेस्टमेंट की जानकारी न होने के कारण उनकी कंपनी के साथ-साथ ट्रैक सिनेमा और अनिल चौधरी प्रोडक्शन भी दिवालिया हो गए थे। रिकवरी वाले घर आकर देते थे गालियां सुष्मिता ने बताया कि वह समय बहुत बुरा था। कर्ज देने वाले और रिकवरी एजेंट उनके घर आते थे और गालियां देते थे। उस वक्त उनके बच्चे बहुत छोटे थे, इसलिए उन्हें कर्ज चुकाने के लिए हर तरह का काम करना पड़ा। उन्होंने और उनके पति ने तीन-चार साल तक कड़ी मेहनत की ताकि वे एक करोड़ का कर्ज चुका सकें। बेटी की पढ़ाई के लिए भी थी पैसों की जरूरत आर्थिक दबाव का एक बड़ा कारण उनकी बेटी की पढ़ाई भी थी। सुष्मिता ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए उन्होंने उसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेजने का फैसला किया। हालांकि उनके पति इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को विदेश भेजा। उसकी पढ़ाई काफी महंगी थी, जिसके लिए उन्हें लगातार पैसे कमाने थे। फैसलों पर नहीं है कोई पछतावा सुष्मिता ने 1978 में फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा से शादी की थी, जिससे बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद 1993 में उन्होंने एक्टर और राजनेता राजा बुंदेला से दूसरी शादी की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने फैसलों पर कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी और वे आज अपने पैरों पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अब वह वही काम करती हैं जो उनके दिल को छूता है। उन्हें अब सम्मान भी मिलता है और वह अपनी कमाई से खुश हैं।

एआई मॉडल में बिना निर्देश भ्रामक व्यवहार का अनूठा मामला:खुद बनाई फर्जी पहचान, साइबर हमले की कोशिश की; पकड़े जाने पर सबूत मिटाए

एआई मॉडल में बिना निर्देश भ्रामक व्यवहार का अनूठा मामला:खुद बनाई फर्जी पहचान, साइबर हमले की कोशिश की; पकड़े जाने पर सबूत मिटाए

एआई अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन के एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट (एआईएसआई) की एक टेस्टिंग में दो एडवांस एआई मॉडल ऐसे व्यवहार करते मिले, जिसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी। टेस्ट के दौरान एंथ्रोपिक के माइथोस एआई ने इंसानों जैसी फर्जी ऑनलाइन पहचान बनाई। फिर निजी संदेश भेजे और लोगों को भरोसे में लेकर ‘गिटहब’ सिस्टम में नुकसान पहुंचाने वाला कोड डालने की कोशिश की। जब इसकी गतिविधियों पर सवाल उठे तो इसने अपने पुराने रिकॉर्ड को सामान्य दिखाने के लिए उसमें बदलाव किए और नई पहचान अपनाने पर भी विचार किया। यह पहली बार है जब किसी एआई मॉडल में बिना किसी निर्देश के इतने स्पष्ट ऑटोनोमस और भ्रामक व्यवहार देखने को मिला। हालांकि पूरी प्रक्रिया के दौरान मानव निगरानी मौजूद थी, इसलिए एआई अपने मकसद में सफल नहीं हो सका। इस मामले में एआई मॉडल को सिर्फ एक साइबर सिक्योरिटी चुनौती हल करने का काम दिया गया था। इसके लिए उसे इंटरनेट तक पहुंच दी गई थी, ताकि यह समझा जा सके कि वास्तविक परिस्थितियों में एआई क्या कर सकता है। लेकिन एआई ने तय दायरे से आगे बढ़कर खुद लोगों की पहचान खोजी, उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाए और उन्हें फाइल शेयरिंग सर्विस के जरिए संदेश भेजकर सिस्टम तक पहुंच हासिल करने की कोशिश की। एआईएसआई का कहना है कि इससे पता चलता है कि ज्यादा सक्षम होते एआई मॉडल भविष्य में उम्मीद से अलग व्यवहार भी कर सकते हैं। ब्रिटेन के एआई मंत्री कनिष्क नारायण ने कहा कि ऐसे जोखिमों की पहचान करना और उन्हें सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि इसे और सुरक्षित बनाया जा सके। एंथ्रोपिक और ओपनएआई, दोनों ने कहा कि यह परीक्षण सामान्य इस्तेमाल जैसे हालात में नहीं किया गया था। टेस्ट के दौरान उनके मॉडल की सामान्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को कम या हटाया गया था। एंथ्रोपिक ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि ओपनएआई ने कहा कि वह भविष्य में ऐसे परीक्षणों को और सुरक्षित बनाने के लिए मूल्यांकन एजेंसियों के साथ काम जारी रखेगी। टेस्ट में एआई को नहीं मिला था धोखा देने का कोई निर्देश एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट ने कहा कि माइथोस एआई को न तो लोगों को धोखा देने और न ही उससे बचने का कोई विशेष निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद उसने खुद फर्जी पहचान बनाई और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। संस्था के मुताबिक, पहली बार बिना किसी खास प्रॉम्प्ट के एआई में इस स्तर का स्वायत्त और भ्रामक व्यवहार देखने को मिला। हालांकि, ऐसी घटनाएं बहुत सीमित परिस्थितियों में हुईं।

रियलिटी शोज पर भड़के महाभारत एक्टर सौरभ राज:कहा- TRP बटोरने के लिए जिस हद तक गिर रहे हैं वो शर्मनाक, ये मनोरंजन नहीं घिनौना प्रदर्शन है

रियलिटी शोज पर भड़के महाभारत एक्टर सौरभ राज:कहा- TRP बटोरने के लिए जिस हद तक गिर रहे हैं वो शर्मनाक, ये मनोरंजन नहीं घिनौना प्रदर्शन है

मशहूर टीवी शो महाभारत में भगवान कृष्ण का किरदार निभाने वाले एक्टर सौरभ राज ने रियलिटी शोज पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मेकर्स टीआरपी बटोरने के लिए जिस हद तक गिर रहे हैं वो शर्मनाक है। उनका ये बयान तब सामने आया है, जब ओटीटी प्लेटफॉर्म में लॉकअप 2, अलायंस और भोजपुरी बवाल जैसे शोज चर्चा में हैं। सौरभ राज ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से रियलिटी शोज पर निशाना साधते हुए लिखा है, ‘मुझे कहा गया था कि इस मुद्दे पर चुप रहूं, क्योंकि प्रोफेशनली इसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन इंसानियत के नाते अब बोलना जरूरी है। रियलिटी शोज को अब खुद अपनी हकीकत का सामना करने की जरूरत है। सिर्फ टीआरपी बटोरने के लिए ये जिस हद तक गिर चुके हैं, वह बेहद शर्मनाक है। यह मनोरंजन बिल्कुल नहीं है। यह बीमार मानसिकता, अमानवीयता, मानसिक उत्पीड़न, क्रूरता और विकृत सोच का घिनौना प्रदर्शन है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘हैरानी होती है कि इतने बड़े और मशहूर होस्ट ऐसे शो में यह सब होते हुए कैसे चुपचाप देखते रहते हैं और इसे होने देते हैं। यह बेहद दुखद और चिंताजनक है। उम्मीद है कि इंडस्ट्री में अब भी कुछ समझदारी बाकी है और समय रहते इस पर लगाम लगेगी। आखिर हम समाज के लिए किस तरह का मानदंड तय कर रहे हैं?’ क्या लॉकअप 2 पर एक्टर ने साधा निशाना इन दिनों 3 रियलिटी शोज चर्चा में हैं। पहला है नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुआ लॉक अप-2, जिसकी विजेता श्रेया कालरा बनी हैं। दूसरा शो है अमेजन प्राइम का अलायंस और तीसरा है जियो हॉटस्टार का भोजपुरी बवाल। जहां अलायंस स्ट्रेटजी का साफ सुथरा रियलिटी शो है, वहीं नेटफ्लिक्स का लॉक अप 2, गाली गलौज और झगड़ों के चलते विवादों में रहा। शो में सेक्शुएलिटी का मजाक बनाया गया और अभद्र भाषा भी इस्तेमाल हुई। इसके अलावा 2 अगस्त से जियो हॉटस्टार में स्ट्रीम हो रहा रियलिटी शो भोजपुरी बवाल भी सुर्खियों में है, जिसमें भोजपुरी एक्ट्रेस, बॉलीवुड एक्ट्रेस का मजाक उड़ाती दिखी हैं। 2 रियलिटी शोज का हिस्सा रहे एक्टर सौरभ राज रियलिटी शोज पर सवाल खड़े करने वाले सौरभ राज खुद भी 2 रियलिटी शोज खतरों के खिलाड़ी 11 और नच बलिए में नजर आ चुके हैं। बता दें कि सौरभ राज कई माइथोलॉजिकल शोज देवों के देव महादेव, महाकालीः अंत ही आरंभ है, महाभारत में नजर आए हैं। उन्हें असल पहचान महाभारत में भगवान कृष्ण के किरदार से मिली थी। इनके अलावा वो कसम से, परिचय, मीत मिला दे रब्बा और पटियाला बेब्स में नजर आए हैं।