पतंजलि ग्रुप खरीदेगा मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

पतंजलि आयुर्वेद को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बीमा नियामक IRDAI से मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। नियामक ने 28 जुलाई 2026 के पत्र के जरिए इस अधिग्रहण को हरी झंडी दी है।यह मंजूरी पत्र जारी होने की तारीख से अगले 3 महीने तक मान्य रहेगी। पतंजलि के साथ कौन-कौन से फाउंडेशन शामिल हैं? इस अधिग्रहण प्रक्रिया में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के साथ कई धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्ट/फाउंडेशन भी शामिल हैं। इनमें एस.आर. फाउंडेशन, रीति फाउंडेशन, आरआर फाउंडेशन, सुरुचि फाउंडेशन और स्वाति फाउंडेशन के नाम शामिल हैं। ये सभी मिलकर मैग्मा जनरल इंश्योरेंस के मौजूदा शेयरधारकों से हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेंगे। मार्च 2025 में हुआ था शेयर परचेज एग्रीमेंट इस डील की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी, जब पतंजलि-एलेड बायर ग्रुप और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) पर दस्तखत किए गए थे। 12 मार्च 2025 को कंपनी ने एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद regulatory समीक्षा प्रक्रिया में देरी के कारण 12 मार्च 2026 को एग्रीमेंट की लॉन्ग-स्टॉप डेट (समय सीमा) को आगे बढ़ाया गया था। 1 साल से ज्यादा समय से अटका था रेगुलेटरी अप्रूवल एग्रीमेंट साइन होने के बाद से यह सौदा लगभग 16 महीने से नियामक समीक्षा के तहत अटका हुआ था। IRDAI की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब मालिकाना हक बदलने का रास्ता साफ हो गया है। खरीदार समूह को अब अगले तीन महीनों की तय सीमा में शेयर ट्रांसफर और IRDAI द्वारा रखी गई शर्तों को पूरा करना होगा। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में बदलेगा मालिकाना हक सभी जरूरी औपचारिकताएं, लीगल प्रोसेस और कांट्रैक्ट से जुड़ी शर्तें पूरी होने के बाद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का ओनरशिप ट्रांसफर पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के पतंजलि ग्रुप की मौजूदगी और मजबूत होगी।
मैग्मा जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पतंजलि ग्रुप खरीदेगा:IRDAI से मंजूरी मिली, मार्च 2025 में हुई थी डील; 3 महीने में पूरी होगी प्रोसेस

पतंजलि आयुर्वेद और धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बीमा नियामक IRDAI से मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। मीडिया रिर्पोट्स के अनुसार लगभग 4,500 करोड़ रुपए में ये डील हुई है। नियामक ने 28 जुलाई 2026 के पत्र के जरिए इस अधिग्रहण को हरी झंडी दी है।यह मंजूरी पत्र जारी होने की तारीख से अगले 3 महीने तक मान्य रहेगी। 73.6% हिस्सेदारी खरीदेगी पतंजलि इस डील के तहत पतंजलि आयुर्वेद 73.6% हिस्सेदारी खरीदेगी, जबकि धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप 24.5% हिस्सेदारी का मालिक बनेगा। इससे पहले इस कंपनी की सबसे बड़ी हिस्सेदार सनोटी प्रॉपर्टीज (आदार पूनावाला समूह) थी। IRDAI की मंजूरी मिलने के बाद अब पतंजलि मैग्मा जनरल इंश्योरेंस की प्रमोटर कंपनी बन जाएगी। मार्च 2025 में हुआ था शेयर परचेज एग्रीमेंट इस डील की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी, जब पतंजलि-एलेड बायर ग्रुप और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर परचेज एग्रीमेंट (SPA) पर दस्तखत किए गए थे। 12 मार्च 2025 को कंपनी ने एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद regulatory समीक्षा प्रक्रिया में देरी के कारण 12 मार्च 2026 को एग्रीमेंट की लॉन्ग-स्टॉप डेट (समय सीमा) को आगे बढ़ाया गया था। 1 साल से ज्यादा समय से अटका था रेगुलेटरी अप्रूवल एग्रीमेंट साइन होने के बाद से यह सौदा लगभग 16 महीने से नियामक समीक्षा के तहत अटका हुआ था। IRDAI की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब मालिकाना हक बदलने का रास्ता साफ हो गया है। खरीदार समूह को अब अगले तीन महीनों की तय सीमा में शेयर ट्रांसफर और IRDAI द्वारा रखी गई शर्तों को पूरा करना होगा। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में बदलेगा मालिकाना हक सभी जरूरी औपचारिकताएं, लीगल प्रोसेस और कांट्रैक्ट से जुड़ी शर्तें पूरी होने के बाद मैग्मा जनरल इंश्योरेंस का ओनरशिप ट्रांसफर पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस सेक्टर में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के पतंजलि ग्रुप की मौजूदगी और मजबूत होगी।
पैसों की जरूरत पड़ने पर FD पर लोन लें:इसमें कम ब्याज पर मिलेगा कर्ज, FD भी नहीं तुड़वानी पड़ेगी; समझें इसका पूरा गणित

फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD आज भी निवेश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद जरिया बना हुआ है। हालांकि, मेडिकल इमरजेंसी, एक्सीडेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर की मरम्मत जैसे अचानक आए खर्चों के समय लोगों के सामने यह सवाल खड़ा हो जाता है कि FD मैच्योर होने से पहले तोड़ना सही है या इसके बदले लोन लेना। पैसे की तुरंत जरूरत, तो क्या करें? किसी भी अचानक आई वित्तीय जरूरत के समय सही फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आपको पैसों की जरूरत कितनी जल्दी है, ब्याज या पेनल्टी का खर्च कितना आ रहा है, आपकी चुकाने की क्षमता कैसी है और यह जरूरत कितने समय (शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म) के लिए है। शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए FD पर लोन बेहतर बैंक आमतौर पर प्री-मैच्योर विड्रॉल पर 0.5% से 1% तक की पेनल्टी लगाते हैं। इसके अलावा, जितने समय तक FD बैंक के पास रही, उतने समय की ही दर से ब्याज मिलता है, जिससे कुल रिटर्न काफी घट जाता है। जैसे मान लीजिए कि आपने 1 लाख रुपए की FD 1 साल के लिए 6% की दर से की, लेकिन आप उसे 6 महीने बाद ही तोड़ देते हैं बैंक आपके पैसों पर 5% की दर से ब्याज देगा, ना कि 6% की दर से। इसके अलावा इस पर पेनाल्टी भी देनी होगी। FD की वैल्यू का 90% तक लोन ले सकते हैं FD की वैल्यू का 90% तक आप लोन ले सकते हैं। मान लीजिए आपकी FD की कीमत 1 लाख रुपए है तो आपको 90 हजार रुपए लोन मिल सकता है। अगर आप FD पर लोन लेते हैं तो आपको फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज से 1-2% ज्यादा ब्याज देना होगा। जैसे मान लीजिए की आपकी FD पर 4% ब्याज मिल रहा है तो आपको 5 से 6% ब्याज दर पर लोन मिल सकता है। लोन न चुकाने पर क्या होगा? अगर कोई व्यक्ति FD पर लोन लेता है और उसे चुका नहीं पाता है, तो जब आपकी FD मैच्योर होगी तब बैंक लोन की बकाया राशि को इसमें से काट लेगा। ऐसे में इसके बाद FD का जो भी पैसा बचेगा वो आपको मिल जाएगा।
भारत ने न्यूयॉर्क टाइम्स को फटकार लगाई:PoK को पाकिस्तानी कश्मीर बताने पर आपत्ति जताई , कहा- यह भारत का अभिन्न हिस्सा है

भारत ने न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ जैसा कुछ नहीं है, केवल पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) है। दूतावास ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा हमेशा रहेंगे। दूतावास ने पाकिस्तान पर इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा करने और वहां रहने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप भी लगाया। भारत ने कहा कि इस मुद्दे पर उसका रुख पहले से स्पष्ट और अपरिवर्तित है। भारतीय दूतावास की यह प्रतिक्रिया न्यूयॉर्क टाइम्स की उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें पीओके में हालिया अशांति और स्थानीय चुनावों का जिक्र करते हुए इस क्षेत्र को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ कहा गया था। रिपोर्ट में मीरपुर में सुरक्षा बलों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बीच झड़प, दो लोगों की मौत और चुनावी प्रक्रिया पर पड़े असर का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही अखबार ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों के कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू किए:जॉर्डन में US बेस पर अटैक के बाद जवाबी कार्रवाई; ट्रम्प बोले- अब हमारी बारी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसने ईरान के ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई जॉर्डन में उसके सैन्य ठिकानों और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। सेंटकॉम ने इसे ‘शक्तिशाली प्रतिक्रिया’ बताया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा, “अब हमारी बारी है।” उन्होंने दावा किया कि ईरान को हमले की जानकारी थी और उसने अमेरिका से ऐसा न करने की अपील भी की थी। इससे एक दिन पहले अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। वहीं मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर अमेरिकी स्वामित्व वाले गैस टैंकर ‘एनर्गोस विंटर’ पर भी ड्रोन हमला हुआ। बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 7.3% बढ़कर 88 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिका ने विदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट के आयात पर बैन लगाया:चीन ने आलोचना की, कहा- हमारी कंपनियों को दबाने की कोशिश

अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने विदेशी निर्मित ह्यूमनॉइड रोबोट और पावर इनवर्टर के नए आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम चीन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, क्योंकि वैश्विक बाजार में इन उत्पादों पर चीन का दबदबा है। FCC ने इस फैसले के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का हवाला दिया है। यह प्रतिबंध ऐसे समय में आया है जब सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी नेता शी जिनपिंग के बीच मुलाकात प्रस्तावित है। इस फैसले से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है। क्या है प्रतिबंध का दायरा? FCC के इस आदेश में ह्यूमनॉइड रोबोट के अलावा रोबोट डॉग और पावर इनवर्टर शामिल हैं। पावर इनवर्टर का उपयोग डायरेक्ट करंट (DC) को अल्टरनेटिंग करंट (AC) में बदलने के लिए किया जाता है, जो रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, डेटा सेंटर और घरेलू उपकरणों में काम आते हैं। FCC चेयरपर्सन ब्रेंडन कार ने मंगलवार को कहा कि यह कदम अमेरिका की महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए उठाया गया है। यह प्रतिबंध केवल इन उत्पादों के नए वर्जन पर लागू होगा। चीन का बाजार पर दबदबा वैश्विक स्तर पर ह्यूमनॉइड रोबोट के बाजार में चीन की हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी है। मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों का अनुमान है कि 2030 तक चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार 15 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ओम्डिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में करीब 15,000 ह्यूमनॉइड रोबोट शिप किए गए थे, जिनमें से चीन की दो बड़ी कंपनियों यूनिट्री (Unitree) और एजीआईबॉट (AGIBOT) ने 5,000 से अधिक रोबोट शिप किए। इसकी तुलना में टेस्ला और फिगर एआई जैसी अमेरिकी कंपनियों ने कुछ सौ या उससे कम रोबोट ही शिप किए। चीन ने दी कड़ी प्रतिक्रिया चीन के विदेश मंत्रालय ने इस कदम की आलोचना करते हुए अमेरिका पर राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर चीनी कंपनियों को दबाने का आरोप लगाया है। मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग चीनी व्यवसायों के वैध अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि संरक्षणवाद से अमेरिका अधिक प्रतिस्पर्धी नहीं बनेगा, बल्कि इससे अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं का ही नुकसान होगा। तकनीकी सहयोग पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिबंध से अमेरिकी और चीनी तकनीकी कंपनियों के बीच सहयोग प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के लिए, एनवीडिया (Nvidia) ने जून में एक ह्यूमनॉइड रोबोट डिजाइन पेश किया था, जिसमें चीन की यूनिट्री कंपनी के चेसिस का उपयोग किया गया था। हाल ही में पेंटागन ने यूनिट्री को उन कंपनियों की सूची में शामिल किया है, जिन पर चीनी सेना की मदद करने का आरोप है, हालांकि बीजिंग ने इन दावों को खारिज किया है।
अमेरिका ने इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट पर रोक लगाई:देश की सुरक्षा को खतरा बताया; चीन बोला- बेवजह हमारी कंपनियों को निशाना बनाना गलत

अमेरिका ने चीन समेत दूसरे देशों से आने वाले इंसानों जैसे दिखने वाले (ह्यूमनॉइड) और चार पैरों पर चलने वाले (क्वाड्रुपेड) रोबोट के आयात पर रोक लगा दी है। अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने इस फैसले के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का हवाला दिया है। इस फैसले पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि अमेरिका बिना किसी ठोस सबूत के चीनी कंपनियों को निशाना बना रहा है। चीन ने चेतावनी दी कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी जवाबी कदम उठाएगा। यह कदम चीन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, क्योंकि ह्यूमनॉइड और क्वाड्रुपेड रोबोट के वैश्विक बाजार में चीन की बड़ी हिस्सेदारी है। अमेरिका बोला- अहम सप्लाई चेन को सुरक्षित करना जरूरी FCC चेयरमैन ब्रेंडन कार ने कहा कि यह फैसला अमेरिका की अहम सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए लिया गया है। उनके मुताबिक विदेशों में बने एडवांस रोबोट अमेरिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा और सप्लाई नेटवर्क के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का जोखिम पैदा कर सकते हैं। FCC ने बताया कि यह रोक नए मॉडल के इम्पोर्ट पर लागू होगी। पहले से इस्तेमाल हो रहे मॉडल इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे। FCC के इस आदेश में ह्यूमनॉइड रोबोट के अलावा रोबोट डॉग और पावर इनवर्टर शामिल हैं। पावर इन्वर्टर का इस्तेमाल सोलर और दूसरी रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, डेटा सेंटर और कई घरेलू उपकरणों में होता है। इसलिए इस फैसले का असर ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी पड़ सकता है। चीन का बाजार पर दबदबा वैश्विक स्तर पर ह्यूमनॉइड रोबोट के बाजार में चीन की हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी है। मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों का अनुमान है कि 2030 तक चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार 15 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ओम्डिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में करीब 15,000 ह्यूमनॉइड रोबोट शिप किए गए थे, जिनमें से चीन की दो बड़ी कंपनियों यूनिट्री (Unitree) और एजीआईबॉट (AGIBOT) ने 5,000 से अधिक रोबोट शिप किए। इसकी तुलना में टेस्ला और फिगर एआई जैसी अमेरिकी कंपनियों ने कुछ सौ या उससे कम रोबोट ही शिप किए। चीन ने दी कड़ी प्रतिक्रिया चीन के विदेश मंत्रालय ने इस कदम की आलोचना करते हुए अमेरिका पर राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर चीनी कंपनियों को दबाने का आरोप लगाया है। मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग चीनी व्यवसायों के वैध अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि संरक्षणवाद से अमेरिका अधिक प्रतिस्पर्धी नहीं बनेगा, बल्कि इससे अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं का ही नुकसान होगा। तकनीकी सहयोग पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिबंध से अमेरिकी और चीनी तकनीकी कंपनियों के बीच सहयोग प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के लिए, एनवीडिया (Nvidia) ने जून में एक ह्यूमनॉइड रोबोट डिजाइन पेश किया था, जिसमें चीन की यूनिट्री कंपनी के चेसिस का उपयोग किया गया था। हाल ही में पेंटागन ने यूनिट्री को उन कंपनियों की सूची में शामिल किया है, जिन पर चीनी सेना की मदद करने का आरोप है, हालांकि बीजिंग ने इन दावों को खारिज किया है।
अडाणी एंटरप्राइजेज को ₹1,160 करोड़ का घाटा हुआ:पहली तिमाही में रेवेन्यू 50% बढ़ा, यह ₹32,924 करोड़ पर पहुंचा

अडाणी एंटरप्राइजेज ने 29 जुलाई को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। इस तिमाही में कंपनी को ₹1,160 करोड़ का नेट लॉस हुआ है। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को ₹885 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ था। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 50% बढ़ा है और यह ₹32,924 करोड़ पर पहुंच गया है। यह पिछले साल की समान तिमाही में ₹21,961 करोड़ रहा था। 1988 में अडाणी एंटरप्राइजेज की स्थापना हुई थी अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड अडाणी ग्रुप की कंपनियों का एक हिस्सा है। 1988 में गौतम अडाणी ने एंटरप्राइजेज की स्थापना की थी। कंपनी के चेयरमैन गौतम अडाणी, मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश अडाणी और CEO विनय प्रकाश हैं। कंपनी एनर्जी और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। अडाणी एंटरप्राइजेज देश का सबसे बड़ बिजनेस इनक्यूबेटर है। यह कंपनी एनर्जी एंड यूटिलिटी, ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स, कंज्यूमर गुड्स और प्राइमरी इंडस्ट्री के क्षेत्र में काम करती है।
थाईलैंड में 3 इंडियन टूरिस्ट का अपहरण:5 भारतीय गिरफ्तार; पाकिस्तानी के कहने पर किडनैपिंग की, ₹1.20 करोड़ की फिरौती मांगी थी

थाईलैंड में तीन इंडियन टूरिस्ट के अपहरण का मामला सामने आया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए मंगलवार को 5 भारतीय आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें दुबई में बैठे एक पाकिस्तानी नागरिक ने किडनैपिंग के निर्देश दिए थे। आरोपियों ने पीड़ितों को सस्ते टूर पैकेज का लालच देकर थाईलैंड बुलाया था। इसके बाद उन्हें बंधक बनाकर उनके परिवारों से करीब 1.20 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई। दुबई से संचालित हो रहा था गिरोह पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अवतार सिंह (38), जगजीत सिंह (38), रंभालक कुमार (24), सुखबीर सिंह (37) और कुलरा सिंह (27) के रूप में हुई है। वे इस पाकिस्तानी नागरिक से एक चैट एप्लीकेशन के जरिए पिछले एक महीने से संपर्क में थे। मास्टरमाइंड फिरौती की रकम क्रिप्टोकरेंसी के जरिए लेना चाहता था। पट्टाया के घर में दी गई यातनाएं पीड़ितों की पहचान मोहित (23), आशीष (24) और हिमांशु (20) के रूप में हुई है। आरोपियों ने उन्हें सात दिन के सस्ते टूर पैकेज का झांसा देकर पट्टाया बुलाया था। वहां पहुंचने पर उन्हें एक घर में बंधक बना लिया गया। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें कई दिनों तक भूखा रखा गया, उनके हाथ-पैर बांधकर पीटा गया और उल्टा लटकाकर यातनाएं दी गईं। वीडियो कॉल पर दिखाई गई बर्बरता आरोपियों ने पीड़ितों के शरीर पर लाल स्प्रे पेंट लगाया था, ताकि वीडियो कॉल के दौरान ऐसा लगे कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और खून बह रहा है। इस तरह वे पीड़ितों के परिवारों पर दबाव बनाकर प्रति व्यक्ति 40 लाख रुपये की फिरौती मांग रहे थे। पीड़ितों के परिजनों ने जब भारतीय दूतावास से संपर्क किया, तो दूतावास ने 21 जुलाई को चोनबुरी इमिग्रेशन और पट्टाया पुलिस को अलर्ट किया। पुलिस ने ऐसे किया रेस्क्यू पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और खुफिया जानकारी के आधार पर पट्टाया के एक टाउनहाउस में छापा मारा। वहां तीनों पीड़ित अलग-अलग कमरों में बंधे हुए मिले। उनके मुंह पर टेप लगा था और शरीर पर चोट के निशान थे। पुलिस को मौके से टेप, लकड़ी का डंडा और लाल स्प्रे पेंट बरामद हुआ है। पहले भी हो चुकी है ऐसी वारदात रेस्क्यू किए गए पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उनके आने से पहले भी एक भारतीय को उसी घर में बंधक बनाया गया था। उसे तब छोड़ा गया जब उसके परिजनों ने करीब 30 लाख रुपये की फिरौती चुका दी थी। पुलिस अब मामले के मुख्य सूत्रधार और अन्य पाकिस्तानी संदिग्धों की तलाश कर रही है। आरोपियों को इस काम के बदले नकदी, कीमती सामान और थाईलैंड से बाहर जाने के लिए एयरलाइन टिकट का वादा किया गया था।
टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव पर आतंकवाद फैलाने का आरोप:रूस ने एफआईआर दर्ज की, इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाला; बैन हो सकता है एप

रूस की मुख्य सुरक्षा एजेंसी ‘फेडरल सिक्योरिटी सर्विस’ (FSS) ने मैसेजिंग एप टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव के खिलाफ ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने’ के आरोप तय किए हैं। इसके साथ ही रूस ने उन्हें इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में भी डाल दिया है। FSS ने आरोप लगाया है कि टेलीग्राम का एडमिनिस्ट्रेशन उन चैनल्स, चैट्स और बोट्स को हटाने में नाकाम रहा है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसियां और चरमपंथी संगठन रूस में तोड़फोड़, साइबर फ्रॉड और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद टेलीग्राम प्रशासन ने इन्हें हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पावेल दुरोव पर नया केस दर्ज होने के बाद अब रूस में टेलीग्राम के भविष्य और इसकी सेवाओं पर पूरी तरह बैन लगने की आशंका बढ़ गई है। इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में नाम शामिल FSS ने कानूनी कार्रवाई करते हुए पावेल दुरोव को अंतरराष्ट्रीय भगोड़ा घोषित किया है। उनका नाम इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया गया है। पावेल दुरोव का जन्म रूस में ही हुआ था, लेकिन वे लंबे समय से देश से बाहर रह रहे हैं। उन्होंने 2021 में फ्रांस की नागरिकता हासिल की थी और इस समय वे दुबई से अपनी कंपनी और एप का संचालन कर रहे हैं। टेलीग्राम पर पहले से पाबंदियां, फिर भी लोकप्रिय रूस में टेलीग्राम सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप्स में से एक है। रूसी सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एप पर पहले ही कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके बावजूद आम लोगों से लेकर सरकारी और मिलिट्री से जुड़े लोग भी इस एप का उपयोग करते हैं। नॉलेज बॉक्स क्या है फेडरल सिक्योरिटी सर्विस? FSS रूस की मुख्य आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसी है। यह पूर्ववर्ती सोवियत संघ की एजेंसी KGB की उत्तराधिकारी मानी जाती है। इसका मुख्य काम देश के भीतर आतंकवाद रोकना, सीमाओं की सुरक्षा करना और साइबर सुरक्षा की निगरानी करना है। कौन हैं पावेल दुरोव? 1984 में रूस में जन्मे दुरोव को ‘रूस का मार्क जुकरबर्ग’ कहा जाता है। उन्होंने टेलीग्राम से पहले रूस का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म VK बनाया था। डेटा प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर रूसी सरकार से हुए विवाद के बाद उन्होंने 2014 में रूस छोड़ दिया था।






