सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:76,900 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक चढ़ा; IT और FMCG शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 28 जुलाई को बढ़त देखने को मिल रही है। सेंसेक्स करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 76,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक की बढ़त है, ये 24,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और FMCG शेयर्स में आज ज्यादा खरीदारी है। 87 डॉलर पर आया कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के दाम में आज करीब 2% की गिरावट है। ये आज 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव में कमी आने में दामों में गिरावट है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार 27 जुलाई को अमेरिकी बाजार में मिलाजुला कारोबार रहा 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹9,400 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी बढ़त इससे पहले कल यानी 27 जुलाई को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 776 अंक की बढ़त के साथ 76,836 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 229 अंक की बढ़त रही, ये 23,996 पर बंद हुआ था।
सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:76,900 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक चढ़ा; IT और FMCG शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 28 जुलाई को बढ़त देखने को मिल रही है। सेंसेक्स करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 76,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक की बढ़त है, ये 24,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और FMCG शेयर्स में आज ज्यादा खरीदारी है। 87 डॉलर पर आया कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के दाम में आज करीब 2% की गिरावट है। ये आज 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव में कमी आने में दामों में गिरावट है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार 27 जुलाई को अमेरिकी बाजार में मिलाजुला कारोबार रहा 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹9,400 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी बढ़त इससे पहले कल यानी 27 जुलाई को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 776 अंक की बढ़त के साथ 76,836 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 229 अंक की बढ़त रही, ये 23,996 पर बंद हुआ था।
हरियाणा के सुधीर सांगवान CJP कोर टीम के मेंबर:कभी मेडिकल स्टोर पर ₹200 की नौकरी की; 'मामला लीगल है' वेब-सीरिज में SHO पेप्सू से फेमस हुए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के अलावा एक और चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यह चेहरा था हरियाणा के चरखी दादरी निवासी और एक्टर सुधीर सांगवान का। सुधीर नेटफ्लिक्स की चर्चित वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’, फिल्म ‘RAAKH’ और कई OTT प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुके हैं। मामला लीगल सीरिज में SHO पेप्सू से उन्हें पहचान मिली। एक्टिंग के साथ-साथ वे इन दिनों CJP की संस्थापक कोर टीम के सदस्य भी हैं। चरखी दादरी के छोटे से गांव छप्पर से निकलकर सुधीर ने संघर्ष के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। किसान परिवार से आने वाले सुधीर ने आर्थिक तंगी के दौर में मेडिकल स्टोर हेल्पर पर 200 रुपए के लिए नौकरी की। इसके बाद सिम कार्ड हॉकर, डीजे, ट्रांसपोर्ट कंपनी कर्मचारी और बैंकिंग सेक्टर में भी काम किया। दैनिक भास्कर ने सुधीर सांगवान से बातचीत कर उनके गांव से OTT तक के सफर और CJP से जुड़ने की पूरी कहानी जानी। बैंकों में काम करने से लेकर खुद के स्टार्टअप तक शुरू किए सुधीर सांगवान का जन्म 9 नवंबर 1988 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छप्पर गांव के किसान परिवार में हुआ। शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। बाद में राजस्थान के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान थिएटर से जुड़े। आर्थिक तंगी के कारण भिवानी के सरकारी कॉलेज में ग्रेजुएशन बीच में छोड़नी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कम उम्र में ही काम शुरू कर दिया। सबसे पहले मेडिकल स्टोर पर हेल्पर बने, जहां रोजाना ₹200 मिलते थे। अतिरिक्त कमाई के लिए रात में डीजे बजाते और फोटोग्राफी भी करते थे। साल 2006 में ₹3,500 महीने की सैलरी पर ट्रांसपोर्ट कंपनी में असिस्टेंट बने। दो साल बाद एक विदेशी कार्गो कंपनी में सुपरवाइजर बने और 2010 तक काम किया। इसके बाद HDFC बैंक में कैशियर के रूप में बैंकिंग सेक्टर में कदम रखा। 2016 में कोटक महिंद्रा बैंक में ब्रांच मैनेजर बने। इसी साल इक्विटस बैंक में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) बने, जहां उनकी सैलरी ₹1.24 लाख महीने तक पहुंच गई। नौकरी के साथ उन्होंने MoneyMind.com और LoanWon.com नाम से लोन सर्विस स्टार्टअप शुरू किए। 2019 में MyMistri.com लॉन्च किया, जिसे बाद में करीब ₹40 लाख में बेच दिया। इसके बाद ‘तुरंत डील’ नाम से प्रॉपर्टी स्टार्टअप और कोरोना काल में ZORKA Grocery शुरू की, लेकिन घाटे के कारण दोनों कारोबार बंद करने पड़े। 2019 में एक्टिंग लाइन में आए, हरियाणवी वेब सीरिज से शुरुआत सुधीर सांगवान बताते हैं कि 2019 में फिल्म निर्माता राहुल दहिया से मुलाकात के बाद एक्टिंग करियर की शुरुआत हुई। पहला मौका हरियाणवी वेब सीरीज ‘विरोध’ में मिला। इसके बाद ‘मायाजाल’, ‘ब्याह के लड्डू’, ‘अखाड़ा’ और ‘स्कैम’ जैसी वेब सीरीज में अलग-अलग किरदार निभाए। मुंबई में 100 से ज्यादा ऑडिशन दिए। ज्यादातर काम उन्हें ऑनलाइन ऑडिशन से मिला। नेटफ्लिक्स की ‘मामला लीगल है’ में SHO जयवंत पेप्सू के रोल से देशभर में पहचान मिली। अमेजन प्राइम वीडियो के विज्ञापन अभियान में मनोज बाजपेयी के साथ भी नजर आए। उनकी फिल्म ‘राख’ अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। अन्ना आंदोलन में शामिल हुए, CJP के मूवमेंट से जुड़े सुधीर ने बताया कि 2011 के अन्ना आंदोलन के दौरान सामाजिक गतिविधियों से जुड़े। इसी दौरान उनकी मुलाकात भिवानी के लोकेश से हुई। बाद में दोनों ने स्टैंड विद नेचर नाम से एक NGO शुरू की। सुप्रीम कोर्ट में ‘कॉकरोच’ शब्द की चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुए मूवमेंट से जुड़े। शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने की वजह से उन्होंने CJP के अभियान में हिस्सा लेना शुरू किया। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पहले बड़े प्रदर्शन में शामिल हुए। उस दिन भीड़ को संभालने के लिए उन्होंने खुद आगे आकर व्यवस्था संभाली। प्रोटेस्ट के दौरान ये समझ नहीं आ रहा था कि वह बड़े स्पीकर को कहां रखें। भीड़ के बीच जब जगह नहीं मिली तो स्पीकर कंधे पर रखकर लोगों के बीच घूमता रहा। इस दौरान उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। 15 जून को जयपुर और 20 जून को जंतर-मंतर के कार्यक्रम में CJP के प्रमुख आशुतोष रानका ने मंच से उनका परिचय कराया। इसके बाद उन्हें CJP की संस्थापक कोर टीम का सदस्य बनाया गया। पूरे देश में टीम तैयार कर रही CJP सांगवान ने बताया कि संगठन देशभर में अपनी टीम का विस्तार कर रहा है। शिक्षा, रोजगार और जनहित के मुद्दों पर अभियान चलाने की तैयारी है। अलग-अलग राज्यों में संगठन की इकाइयों को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे।
मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती सीधे इस लड़ाई में शामिल होने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में शामिल होने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान को ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक ताकत और पकड़ और मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी यमन में 2022 हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच हुए युद्धविराम के बाद लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच स्थायी शांति समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इससे तनाव बना रहा, लेकिन दोनों पक्ष दोबारा बड़े युद्ध से बचना चाहते थे। खासकर सऊदी अरब, क्योंकि कई साल के युद्ध में उसे भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान उठाना पड़ा था। हालात तब बदले, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ गया। ईरान हूती विद्रोहियों का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है। इस वजह से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया और इसका असर यमन पर भी पड़ा। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ने लगा है और एक बार फिर से जंग का खतरा बढ़ गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ दोबारा युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला युद्ध है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने भारी पैसा खर्च किया, लेकिन उसे कोई बड़ा फायदा नहीं मिला। उल्टा उसकी छवि खराब हुई और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि अगर वे सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाते हैं तो उन्हें फायदा हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश में ज्यादा राजनीतिक ताकत चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, “हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं।” ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” ईरान के समर्थन से उन्होंने 2014 में गृहयुद्ध शुरू किया और राजधानी सना पर कब्जा कर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। यमन की उत्तरी सीमा से लगे सऊदी अरब को अपने पड़ोस में ईरान समर्थित हूती संगठन का मजबूत होना बड़ा खतरा लगा। साल 2015 में सऊदी अरब ने 8 और अरब देशों के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग छेड़ दी। इसका मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर से सत्ता में लाना था, जिसे हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से हटा दिया था। करीब 8 साल तक जंग लड़ने के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूती को हराना संभव नहीं है। इसलिए 2022 के बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से भी संपर्क शुरू किया। फिलहाल हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर अपना प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था। वहीं दक्षिणी यमन पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का कंट्रोल है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। आज भी यमन के कई अहम मामलों में सऊदी अरब का प्रभाव बना हुआ है। गाजा जंग की वजह से शांति प्रक्रिया पटरी से उतरी 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते की बातचीत आगे बढ़ी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों से चला आ रहा युद्ध खत्म हो सके। इस बातचीत में
मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती विद्रोही सीधे इस लड़ाई में उतरने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में सक्रिय भूमिका निभाने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक पकड़ और ताकत बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी 2022 में हुए युद्धविराम के बाद यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में स्थायी शांति समझौते पर बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। तनाव बना रहा, मगर दोनों पक्ष बड़े युद्ध से बचने की कोशिश करते रहे। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद हालात तेजी से बदल गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ा है और चार साल पुराना युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ फिर युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला संघर्ष है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन उसे कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। उल्टा उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाकर वे अपनी शर्तें मनवा सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश की राजनीति में बड़ी भूमिका चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं। ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति की लहर यमन भी पहुंची। उस समय राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह करीब 33 साल से सत्ता में थे। युवाओं के प्रदर्शन की वजह से उनकी गद्दी छीन गई। फरवरी 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी राष्ट्रपति बने। लेकिन उनकी सरकार कमजोर थी। हूती विद्रोहियों ने इसका फायदा उठाया और सितंबर 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2015 में राष्ट्रपति हादी को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। सऊदी ने 2015 में हूती के खिलाफ जंग शुरू की हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं रह गया। इससे पड़ोस के सऊदी अरब को खतरा महसूस हुआ क्योंकि हूती का समर्थन ईरान कर रहा था। ऐसे में सऊदी ने 2015 में आठ अरब देशों के साथ मिलकर सैन्य गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग शुरू कर दी। इस गठबंधन का मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर सत्ता में लाना था। करीब आठ साल तक लड़ाई के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूतियों को हराना संभव नहीं है। इसके बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से संपर्क शुरू किया। आज उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर हूतियों का नियंत्रण है। वहीं दक्षिणी यमन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। गाजा युद्ध ने बिगाड़ दिया शांति समझौता 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में स्थायी शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते पर बातचीत आगे बढ़ रही थी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों
भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। हमले के समय जहाज पर 10 क्रू मेंबर सवार थे। इनमें 3 भारतीय नागरिक थे। हमले में भारतीय क्रू मेंबर और चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। जहाज पर मौजूद दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत ने हमले की निंदा की भारत ने जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नागरिक क्रू मेंबर पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। मंत्रालय ने सभी पक्षों से समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है। भारत का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग रूट्स की सुरक्षा जरूरी है और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज था एमवी ओमोर्फी एमवी ओमोर्फी मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर है। इसे 2010 में बनाया गया था। यह उस क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच व्यापारी जहाजों पर बार-बार हमले हुए हैं। इस घटना ने ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के सामने बढ़ते सुरक्षा जोखिम को भी सामने रखा है। भारतीय नाविक दुनिया की मर्चेंट नेवी में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर ब्लैक सी या उसके आसपास के इलाकों में काम से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने को कहा है। एडवाइजरी में नाविकों और शिपिंग कंपनियों को समुद्री मार्गों की पुष्टि करने, इंश्योरेंस कवरेज की जांच करने और इमरजेंसी प्रक्रियाओं को समझने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी असाइनमेंट को स्वीकार करने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। हमले में यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप भारतीय नाविकों की यूनियनों ने इस हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यूक्रेन की ओर से इस आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। हमले की जिम्मेदारी और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध कॉपी में आगे की जानकारी नहीं दी गई है। भारत ने इससे पहले भी कमर्शियल शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखा जाए और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता न हो।
भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। हमले के समय जहाज पर 10 क्रू मेंबर सवार थे। इनमें 3 भारतीय नागरिक थे। हमले में भारतीय क्रू मेंबर और चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। जहाज पर मौजूद दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत ने हमले की निंदा की भारत ने जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नागरिक क्रू मेंबर पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। मंत्रालय ने सभी पक्षों से समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है। भारत का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग रूट्स की सुरक्षा जरूरी है और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज था एमवी ओमोर्फी एमवी ओमोर्फी मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर है। इसे 2010 में बनाया गया था। यह उस क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच व्यापारी जहाजों पर बार-बार हमले हुए हैं। इस घटना ने ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के सामने बढ़ते सुरक्षा जोखिम को भी सामने रखा है। भारतीय नाविक दुनिया की मर्चेंट नेवी में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर ब्लैक सी या उसके आसपास के इलाकों में काम से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने को कहा है। एडवाइजरी में नाविकों और शिपिंग कंपनियों को समुद्री मार्गों की पुष्टि करने, इंश्योरेंस कवरेज की जांच करने और इमरजेंसी प्रक्रियाओं को समझने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी असाइनमेंट को स्वीकार करने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। हमले में यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप भारतीय नाविकों की यूनियनों ने इस हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यूक्रेन की ओर से इस आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। हमले की जिम्मेदारी और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध कॉपी में आगे की जानकारी नहीं दी गई है। भारत ने इससे पहले भी कमर्शियल शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखा जाए और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता न हो।
पेंशनर्स के लिए काम की गाइड:पेंशन रुकने पर न हों परेशान; जानें 5 समस्याएं और उनका समाधान

रिटायरमेंट के बाद पेंशन सिर्फ हर महीने मिलने वाली राशि नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक सुरक्षा होती है। लेकिन पेंशन रुक जाए, जीवन प्रमाण-पत्र जमा न हो पाए, फैमिली पेंशन शुरू न हो, बैंक बार-बार दौड़ाए या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर भ्रम हो जाए, तो अधिकांश पेंशनर्स समझ नहीं पाते कि किस कार्यालय या सरकारी व्यवस्था में जाएं। यहां जानिए पेंशन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी परेशानियां और उनका कैसे समाधान मिलेगा। 1. सबसे पहले जानिए किस समस्या के लिए कहां जाएं गलत कार्यालय पहुंचना पेंशनधारकों की सबसे आम गलती होती है। सही जगह जाने से समय और परेशानी दोनों से बचते हैं। पेंशन रुकी: →बैंक और CPENGRAMS में जाएं। जीवन प्रमाण पत्र: →सीएससी/बैंक या डाकघर। एनपीएस: पेंशन निधि विनियामक विकास प्राधिकरण। ईपीएस-95: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन। रक्षा पेंशन: → स्पर्श (SPARSH) में संपर्क करें। बैंक की शिकायत: →पहले बैंक फिर आरबीआई की एकीकृत लोकपाल व्यवस्था में जा सकते हैं। 2. पेंशन रुकी, देर से आई या गलत कटौती हुई तो… यदि आपकी मासिक पेंशन रुक गई है, देर से आ रही है या बैंक ने गलत कटौती कर दी है, तो सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा या पेंशन वितरण कार्यालय में लिखित शिकायत करें। अधिकांश मामलों का समाधान यहीं हो जाता है। क्या करें – समाधान नहीं मिलने पर केंद्रीकृत पेंशन शिकायत निवारण व निगरानी प्रणाली (CPENGRAMS) में ऑनलाइन शिकायत करें। यहां पर अपना पीपीओ नंबर, बैंक विवरण और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। 3. जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने के लिए कहां जाएं अधिक उम्र, बीमारी या चलने-फिरने में परेशानी होने पर अब बैंक जाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। आप अपने घर पर बैठकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। क्या करें: मोबाइल पर जीवन प्रमाण एप और फेस अथेंटिकेशन की मदद से यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन तैयार कर जमा किया जा सकता है। यदि स्मार्टफोन चलाना कठिन लगता है तो सीएससी या बैंक मित्र की मदद ले सकते हैं। 4. फैमिली पेंशन शुरू नहीं हो रही या बैंक बदलना है… मृत्यु, विवाह प्रमाण-पत्र, आश्रित का आधार, पैन नंबर व बैंक खाता विवरण, मृतक का पीपीओ नंबर,नामांकन फॉर्म आदि दस्तावेज तैयार रखें। फिर संबंधित विभाग या बैंक में आवेदन दें। देरी होने पर निर्धारित शिकायत व्यवस्था का उपयोग करें। क्या करें? : दोनों तरह के मामले में पीपीओ नंबर व आधार सबसे महत्वपूर्ण हैं। देरी होने पर एल्डर 14567 या संबंधित विभाग या बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल करें। पीपीओ नंबर सहित अन्य जानकारी के साथ शिकायत दर्ज कराएं। 5. NPS, UPS या APY समझ में नहीं आ रही… राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, एकीकृत पेंशन योजना या अटल पेंशन योजना (एपीवाय) से जुड़े मामलों में पेंशन निधि विनियामक-विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के एआई चैटबॉट PFRDA पेंशन सहायक से सवाल पूछ सकते हैं। क्या करें? : PFRDA हेल्पलाइन 1800110708 पर सोमवार से शुक्रवार सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे के बीच बात कर सकते हैं। ईमेल: complaints@pfrda.org.in या वेबसाइट: www.pfrda.org.in →पर परेशानी बताएं। (एक्सपर्ट- डॉ. मनजीत सिंह पटेल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन ∙ एससी जैन, जनरल सेक्रेटरी, एआईबीआरए)
चांदी ₹2,050 बढ़कर ₹2.25 लाख पर पहुंची:सोना ₹751 महंगा होकर ₹1.45 लाख का 10 ग्राम हुआ, इस साल ₹1.60 लाख तक जा सकता है

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 27 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,050 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 751 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 27 जुलाई 2026 सोना इस साल ₹12 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 12 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 5 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.25 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
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सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 27 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,050 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 751 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। सोना इस साल ₹12 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 12 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 5 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.25 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके






