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अगर ब्लड प्रेशर 200 के पार हो जाए तो क्या होगा, डॉक्टर बोले – यह मेडिकल इमरजेंसी, मौत का भी खतरा

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Last Updated:April 15, 2026, 15:09 IST High Blood Pressure Crisis: अगर ब्लड प्रेशर 200 के पार चला जाए, तो यह एक खतरनाक मेडिकल इमरजेंसी होती है. इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक आ सकता है. डॉक्टर ने बताया कि बीपी बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो इससे किडनी और आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर की मदद लेना जरूरी होता है, क्योंकि लापरवाही जानलेवा हो सकती है. बीपी अगर 200 के पार हो जाए, तो हाइपरटेंसिव क्राइसिस हो सकता है. इसमें जान भी जा सकती है. Can BP Over 200 Be Fatal: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आजकल तेजी से बढ़ रही है और हर उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं. ब्लड प्रेशर का सामान्य स्तर 120/80 mmHg माना जाता है, लेकिन जब इससे ज्यादा हो जाता है, तब हाइपरटेंशन की कंडीशन पैदा हो जाती है. अगर बीपी अचानक 200 के पार पहुंच जाए, तो यह बेहद खतरनाक स्थिति बन जाती है. कई लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि इतना ज्यादा ब्लड प्रेशर शरीर के कई जरूरी अंगों को तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है. डॉक्टर इसे मेडिकल इमरजेंसी मानते हैं, जिसे नजरअंदाज करने से मौत हो सकती है. लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया कि जब ब्लड प्रेशर 200 या उससे ऊपर चला जाता है, तो इसे हाइपरटेंसिव क्राइसिस कहा जाता है. इस स्थिति में दिल, दिमाग, किडनी और आंखों पर तुरंत दबाव बढ़ जाता है. इससे खून की नसें कमजोर हो सकती हैं और फटने का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि इस स्थिति में तुरंत इलाज जरूरी होता है. बीपी हाई होने का सबसे बड़ा खतरा दिमाग पर पड़ता है. बहुत ज्यादा बीपी के कारण ब्रेन में ब्लड वेसल्स फट सकती हैं, जिससे स्ट्रोक हो सकता है. इससे कई मरीजों को लकवा मार जाता है. मरीज को तेज सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखना, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण भी महसूस होते हैं. अगर समय पर इलाज न मिले, तो मौत हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि हार्ट पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है. हाई ब्लड प्रेशर के कारण दिल को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट अटैक आ सकता है. लंबे समय तक ऐसा रहने पर हार्ट फेल होने का खतरा भी बढ़ सकता है. इसके अलावा किडनी और आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है. किडनी की छोटी-छोटी नसें खराब हो सकती हैं, जिससे किडनी फेलियर का खतरा रहता है. वहीं आंखों की नसों पर असर पड़ने से नजर कमजोर हो सकती है या अचानक विजन लॉस हो सकता है. सही समय पर इलाज से हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, विजन लॉस और स्ट्रोक से बचा जा सकता है. अब सवाल है कि अगर किसी का बीपी 200 के पार हो जाए, तो क्या करें? डॉक्टर लोकेंद्र ने बताया कि किसी का बीपी 200 के आसपास या उससे ज्यादा हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या नजदीकी अस्पताल जाएं. घर पर खुद से दवा लेने या इंतजार करने की गलती बिल्कुल न करें. मरीज को शांत रखें, ज्यादा हिलने-डुलने से बचाएं और तुरंत मेडिकल सहायता लें. ब्लड प्रेशर का 200 के पार जाना शरीर के लिए अलार्म की तरह है. यह संकेत देता है कि तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. सही समय पर इलाज से जान बच सकती है. अगर इस दौरान लापरवाही की, तो जान जा सकती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 15:09 IST

उधारी की राह पर भारतीय, 10 साल का रिकॉर्ड टूटा:जीवनशैली और एसेट्स के लिए बढ़ रहा पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का चलन

उधारी की राह पर भारतीय, 10 साल का रिकॉर्ड टूटा:जीवनशैली और एसेट्स के लिए बढ़ रहा पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का चलन

बीते एक दशक में हमारी आर्थिक आदतें तेजी से बदल रही हैं। ईएमआई, क्रेडिट कार्ड और होम लोन अब जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय परिवारों की वित्तीय देनदारियां बढ़कर जीडीपी के 6.2% पर पहुंच गई हैं, जो बीते एक दशक का उच्चतम स्तर है। क्लाइंट एसोसिएट्स के वाइट पेपर ‘द न्यू इंडियन हाउसहोल्ड बैलेंस शीट’ के अनुसार, भारतीयों की उधारी अब उनकी बचत की रफ्तार को पीछे छोड़ रही है। महामारी के बाद के दौर में घरेलू कर्ज में 44.6% सीएजीआर की बढ़त हुई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज का बढ़ना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। यह बढ़ते आत्मविश्वास और भविष्य की बेहतर कमाई की उम्मीद का भी संकेत है। बड़ा बदलाव क्या है? – बचत घट रही है – महामारी से पहले शुद्ध वित्तीय बचत जीडीपी का 7.7% थी। वित्त वर्ष 2024 में यह घटकर 5.2% रह गई। यानी हर 100 रुपए में से निवेश के लिए कम पैसे बचते हैं। – कर्ज बढ़ रहा है – घरेलू वित्तीय देनदारियां जीडीपी का 4.1% (महामारी से पहले) से बढ़कर अब 6.2% हो गई हैं, यह एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर है। – प्रॉपर्टी में निवेश बढ़ा- कुल बचत में भौतिक संपत्ति (मुख्यतः रियल एस्टेट) की हिस्सेदारी 58-60% से 70% हो गई है। – शेयर-म्यूचुअल फंड में उछाल- इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश वित्त वर्ष 2020 के 4% से तीन गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 15% हो गया है। 6.2% जीडीपी के अनुपात में घरेलू कर्ज; बीते एक दशक के उच्चतम स्तर पर। 44.6% महामारी के बाद उधारी की सालाना विकास दर; बचत से ज्यादा रफ्तार। 5.2% जीडीपी के मुकाबले शुद्ध वित्तीय बचत; दशक के निचले स्तर के करीब। (स्रोत: क्लाइंट एसोसिएट्स – द न्यू इंडियन हाउसहोल्ड बैलेंसशीट (2025) क्रेडिट कार्ड, पर्सनल – वाहन लोन का कर्ज बीते एक दशक में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा क्रेडिट कार्ड का क्रेज – अब कर्ज सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल के लिए भी लिया जा रहा है। यह सेगमेंट 25.2% की दर से सबसे तेजी से बढ़ रहा है। पर्सनल लोन – लाइफस्टाइल अपग्रेड और कंजम्पशन के लिए पर्सनल लोन में 20.1% की ग्रोथ देखी गई है। फिजिकल एसेट्स का मोह – कुल घरेलू बचत का 70% हिस्सा अब रियल एस्टेट जैसे फिजिकल एसेट्स में जा रहा है, जिससे हाथ में नकदी की कमी हो रही है। प्लानिंग चार अहम काम जो हमें बिना देर किए शुरू करने चाहिए 1: एसआईपी शुरू करें: इक्विटी और म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश दीर्घकालिक संपत्ति बनाएगा। 2: कर्ज की समीक्षा करें: क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन की लागत सबसे ज़्यादा होती है, पहले इन्हें चुकाएं। 3: फंड बनाएं: 6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं, लिक्विड एफडी या डेट फंड में रखें। 4: पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई करें: सिर्फ रियल एस्टेट नहीं, इक्विटी, डेट और गोल्ड का संतुलन रखें।

धर्मेंद्र के निधन पर भावुक हुए बॉबी देओल:पापा के साथ और वक्त बिताने का पछतावा; कहा- दुख ने ईशा और अहाना के करीब लाया

धर्मेंद्र के निधन पर भावुक हुए बॉबी देओल:पापा के साथ और वक्त बिताने का पछतावा; कहा- दुख ने ईशा और अहाना के करीब लाया

बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र के निधन को करीब 140 दिन बीत चुके हैं। उनके छोटे बेटे बॉबी देओल ने पिता के जाने के बाद अपना पहला इंटरव्यू दिया है। बॉबी ने बताया कि उनके पापा की मौत ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। इस दौरान उन्होंने अपने पछतावे और सौतेली बहनों ईशा और अहाना देओल के साथ बदलते रिश्तों पर भी खुलकर बात की। पापा के साथ और वक्त बिताने का है पछतावा बॉबी देओल ने एस्क्वायर इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे अपने पापा के साथ और भी क्वालिटी टाइम बिताना चाहते थे। बॉबी ने भावुक होते हुए कहा,कई ऐसे दिन होते हैं जब मुझे लगता है कि काश मैं पापा के साथ और बैठता। काश मैंने उनसे और सवाल पूछे होते। अब मैं अपने बेटों, पत्नी और परिवार के साथ रहने को लेकर ज्यादा सजग रहता हूं। बॉक्स ऑफिस, रिव्यूज और रोल्स… ये सब आखिर में मायने नहीं रखते। इंस्टाग्राम पर आज भी देखते हैं धर्मेंद्र की रील्स सफलता के मायने बताते हुए बॉबी ने कहा कि कामयाबी इस बात से मापी जाती है कि आप अपने प्रियजनों के साथ कितना वक्त बिता पाते हैं। उन्होंने कहा, बिना किसी अपने के शोहरत और दौलत का क्या फायदा? मैं आज भी इंस्टाग्राम पर उनकी (धर्मेंद्र) रील्स देखता रहता हूं। वे बहुत ही सादगी भरे और गर्मजोशी से भरे इंसान थे। कभी-कभी लगता है कि वे रील के जरिए सीधे मुझसे ही बात कर रहे हैं। दुख ने ईशा और अहाना के करीब लाया धर्मेंद्र के निधन के बाद देओल परिवार में एक सकारात्मक बदलाव आया है। बॉबी ने बताया कि इस दुख ने उन्हें अपनी सौतेली बहनों ईशा और अहाना देओल के करीब ला दिया है। बॉबी ने कहा, हम सभी अपने-अपने तरीके से इस दुख से निपट रहे हैं। कभी-कभी दुख की वजह से लोग एक-दूसरे को गलत समझ लेते हैं, लेकिन वक्त के साथ सब ठीक हो जाता है। किसी अपने को खोना परिवार को करीब लाने का अपना तरीका जानता है। धर्मेंद्र को भी था अपने पिता के लिए मलाल बॉबी ने एक पुरानी याद साझा करते हुए बताया कि उनके पिता अक्सर कविताएं और छंद सुनाते थे। उन कविताओं में धर्मेंद्र का अपने पिता के साथ ज्यादा वक्त न बिता पाने का दर्द और पछतावा झलकता था। बॉबी ने कहा, उनकी बातों ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मुझे लगता है कि यह जीवन का एक चक्र है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है। 24 नवंबर को हुआ था निधन बता दें कि धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर को मुंबई में 89 साल की उम्र में हुआ था। ब्रीच कैंडी अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 12 दिन बाद उन्होंने आखिरी सांस ली थी। उनके अंतिम संस्कार में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान और सलमान खान समेत बॉलीवुड के कई बड़े सितारे पहुंचे थे।

तमिलनाडु: जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या बढ़ाने की मांग…भड़के सीएम स्टालिन

तमिलनाडु: जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या बढ़ाने की मांग...भड़के सीएम स्टालिन

विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु के प्रमुख राजनीतिक दलों के विधायकों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के विरोध में स्वर मुखर कर रखा है। परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे दक्षिणी राज्यों में चिंताएं बढ़ी हैं। 1971 की वास्तविकता के अनुसार, जब भारत की जनसंख्या लगभग 550 मिलियन थी, तब मुसलमानों की वर्तमान संख्या 543 सदस्य थी। अब जब जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक हो गई है, तो केंद्र सरकार एक नई परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से संसदीय प्रतिनिधित्व का विस्तार करने की योजना बना रही है। बौद्धों के अनुसार, प्रस्तावित परिसिमन संशोधन का उद्देश्य मोटरसाइकिलों की संख्या 543 से लगभग 850 करना है, जबकि केंद्रशासित प्रयोगशाला से प्रतिनिधित्व 20 से 35 करना है। आने वाले तीन दिनों में वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में पेश होने की उम्मीद है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है, उनका तर्क है कि इससे उन क्षेत्रों को नुकसान होगा, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अधिक हो रही है। खबरों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 2002 के परिसीमन संशोधन अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से 2026 के बजाय 2011 के सिद्धांतों या उसके पहले के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन संशोधन अधिनियम पर विचार किया है, जिससे विवाद और भी बढ़ रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इससे संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व कम होगा और संघीय ढांचे को नुकसान होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इस योजना पर आगे बढ़ती है, तो उनकी पार्टी एक बड़ा आंदोलन फिर से पुराने और पुराने शिक्षकों को देखना शुरू कर देगी। दूसरी ओर, एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने कैंसर को कम करने के लिए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया से तमिल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा। अनुमानों के अनुसार, तमिलनाडु का निचला हिस्सा वर्तमान में 39 से 50 के बीच हो सकता है, जबकि प्रदेश का प्रतिनिधित्व 80 से 80 तक, उत्तर में 143 के करीब हो सकता है, जिससे संसद में सत्ता का संतुलन काफी हद तक बदल जाएगा। इसी बीच, केंद्र सरकार परीसीमन प्रस्ताव के साथ-साथ महिला नाचीज़ पेशावर की भी योजना बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य 2029 के आम चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत नॉमिनेट पेशिंग लागू करना है। यह भी पढ़ें- ‘तमिलनाडु नहीं रहेगा चुप’, स्टालिन की मोदी सरकार को खुली चेतावनी, कहा- सड़क पर उतरेगा हर परिवार (टैग्सटूट्रांसलेट)इलेक्शन(टी)विधानसभा चुनाव(टी)स्टालिन(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)स्टालिन(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026

कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने जल्दबाजी में काम किया’ | राजनीति समाचार

The MP Board 10th and 12th results declared at mpbse.nic.in.

आखरी अपडेट:15 अप्रैल, 2026, 14:05 IST दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में कथित पार्टी विरोधी गतिविधि के लिए कांग्रेस एमएलसी अब्दुल जब्बार को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘आदेश की समीक्षा के बाद जवाब देंगे’ हाल ही में दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के दौरान कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर अब्दुल जब्बार को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से की गई। जब्बार, जिन्होंने पहले केपीसीसी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, दावणगेरे से कांग्रेस के टिकट के दावेदार भी थे। उन पर उपचुनाव के दौरान पार्टी के चुने हुए उम्मीदवार शमनूर समर्थ के खिलाफ काम करने का आरोप है। ऐसे भी आरोप थे कि उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में एक एसडीपीआई उम्मीदवार का समर्थन किया, जिससे पार्टी के भीतर चिंताएं बढ़ गईं। केपीसीसी द्वारा आधिकारिक बयान एक प्रेस विज्ञप्ति में, कर्नाटक के डिप्टी सीएम और केपीसीसी अध्यक्ष डीके शिवकुमार के कार्यालय ने कहा कि विधान परिषद के सदस्य अब्दुल जब्बार को दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित कर दिया गया है। बयान में पुष्टि की गई कि निर्णय तुरंत प्रभावी होगा। जब्बार के निलंबन के साथ-साथ डीके शिवकुमार ने उनके नेतृत्व में गठित सभी अल्पसंख्यक समितियों को भी भंग कर दिया है। यह कदम केपीसीसी अल्पसंख्यक विंग प्रमुख के पद से उनके हालिया इस्तीफे के बाद उठाया गया है। राजनीतिक नतीजा उपचुनाव के दौरान पार्टी के भीतर आंतरिक असहमति के मद्देनजर यह घटनाक्रम सामने आया है। आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम करने और प्रतिद्वंद्वी का समर्थन करने के आरोपों के कारण सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। जब्बार के बाहर निकलने के बाद पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को सुलझाने और अल्पसंख्यक विंग संरचना को पुनर्गठित करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा है। जब्बार की प्रतिक्रिया निलंबन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, अब्दुल जब्बार ने कहा कि वह कोई भी विस्तृत प्रतिक्रिया देने से पहले आदेश की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें निलंबित किया है, उन्होंने कारण बताए होंगे और वह पार्टी और मीडिया दोनों को जवाब देने से पहले उनकी जांच करेंगे। उन्होंने किसी भी चुनावी झटके के सुझाव को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि कांग्रेस के हारने का कोई सवाल ही नहीं है और विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी जीतेगी। उम्मीदवार चयन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे एक नाम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए और याद दिलाया कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक के दौरान एक परिवार को तरजीह देने के बजाय कुरुबा समुदाय को टिकट देने की मांग की गई थी. जब्बार ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि पार्टी ने जल्दबाजी क्यों की. उन्होंने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे कि इस फैसले के पीछे कौन हो सकता है, यह देखते हुए कि पार्टी ने उन्हें पद और सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक पत्र मिलने के बाद वह इसका पूरा जवाब देंगे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 15 अप्रैल, 2026, 14:02 IST समाचार राजनीति कांग्रेस ने ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ पर अब्दुल जब्बार को निलंबित किया; उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने जल्दबाजी में काम किया’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अब्दुल जब्बार निलंबन(टी)अब्दुल जब्बार कांग्रेस(टी)केपीसीसी अनुशासनात्मक कार्रवाई(टी)दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव(टी)डीके शिवकुमार केपीसीसी(टी)कांग्रेस आंतरिक संघर्ष(टी)अल्पसंख्यक विंग विघटन(टी)एसडीपीआई समर्थन आरोप

अमरावती में लव ट्रैप में फंसाकर 180 लड़कियों का शोषण:350 से ज्यादा अश्लील वीडियो मिले, आरोपी गिरफ्तार, प्रशासन ने घर पर बुलडोजर चलाया

अमरावती में लव ट्रैप में फंसाकर 180 लड़कियों का शोषण:350 से ज्यादा अश्लील वीडियो मिले, आरोपी गिरफ्तार, प्रशासन ने घर पर बुलडोजर चलाया

महाराष्ट्र में अमरावती जिले के परवाड़ा में 180 से ज्यादा नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मुख्य आरोपी मोहम्मद अयाज उर्फ तनवीर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सात दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। आरोपी के पास 350 से ज्यादा अश्लील वीडियो मिले हैं जिनसे वह लड़कियों को ब्लैकमेल कर रहा था। पुलिस ने बुधवार को परतवाड़ा में मोहम्मद अयाज के घर बुलडोजर चलाया। आरोपी के तीन साथियों को भी गिरफ्तार किया गया है। लड़कियों को मुंबई और पुणे ले जाकर अश्लील वीडियो बनाए पुलिस के मुताबिक, आरोपी लड़कियों को “लव ट्रैप” में फंसाता था, उन्हें मुंबई और पुणे ले जाकर उनके अश्लील वीडियो बनाता था। इन वीडियो के जरिए उन्हें ब्लैकमेल कर देह व्यापार के लिए मजबूर करता था। राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे की शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने ग्रामीण एसपी विशाल आनंद को ज्ञापन देकर मामले की जांच के लिए SIT बनाने की मांग भी की थी। शिकायत में बताया गया है कि आरोपी व्हाट्सएप और स्नैपचैट ग्रुप के जरिए नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाता था। वह उन्हें प्यार के जाल में फंसाकर अपने साथ ले जाता और फिर उनका शोषण करता था। बताया गया है कि वीडियो की जांच साइबर सेल को अब पुलिस यह जांच कर रही है कि ये वीडियो आरोपी ने अपने दोस्तों या किसी संगठित गिरोह के साथ शेयर किए थे या नहीं। इसी बीच, पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस डिवाइस में कई आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं, जिनकी जांच साइबर सेल की मदद से की जा रही है। इस मामले में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग भी थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों से पूरे समुदाय की छवि खराब होती है, इसलिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है। आरोपी AIMIM में भी रहा वहीं, आरोपी का संबंध सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से भी बताया जा रहा है। उसके सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो और फोटो में वह पार्टी के कार्यक्रमों में नजर आता है और अमरावती के अध्यक्ष हाजी इरफान खान से पत्र लेते हुए दिखता है। हालांकि, मामला सामने आने के बाद उसके इंस्टाग्राम अकाउंट से कई वीडियो हटा दिए गए हैं। पुलिस अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह अभी साफ नहीं है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। ———————- ये खबर भी बने: टाटा सन्स चेयरमैन बोले- नासिक की घटना परेशान करने वाली:सीनियर अफसर से जांच करा रहे, TCS कैंपस में यौन उत्पीड़न, जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप हैं टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने TCS नासिक में लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को गंभीर और परेशान करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच सीनियर अफसर से कराई जा रही है और दोषियों पर सख्त एक्शन लेंगे। रविवार को अपनी पहली प्रतिक्रिया में कंपनी ने कहा था कि कंपनी में किसी भी तरह के उत्पीड़न के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। जैसे ही उसे मामले की जानकारी मिली, उसने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…

जबलपुर में सुसाइड प्वाइंट पर पुलिस तैनात:10वीं-12वीं का आया रिजल्ट, टीचर बोले-परीक्षा का दूसरा अवसर मिलेगा; घबराकर गलत निर्णय न लें

जबलपुर में सुसाइड प्वाइंट पर पुलिस तैनात:10वीं-12वीं का आया रिजल्ट, टीचर बोले-परीक्षा का दूसरा अवसर मिलेगा; घबराकर गलत निर्णय न लें

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) ने बुधवार को हाईस्कूल और हायर सेकंडरी का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया है। परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थी जहां खुश हैं, तो असफल रहे विद्यार्थी दुखी। ऐसे में टीचर और परिवार उन्हें मोटिवेट कर रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि शासन परीक्षा देने का दूसरा मौका भी दे रहा है। उधर, जबलपुर पुलिस ने अहतियाती कदम उठाते हुए तिलवाराघाट, बरगी डैम, भेड़ाघाट और गौरीघाट पर पुलिसकर्मी तैनात कर दिए हैं। इन स्थानों पर पूरी नजर रखी जा रही है। दरअसल, ऐसे में सुसाइड केस बढ़ जाते हैं। पिछले सालों में ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं। असफल हुए हैं तो घबराएं नहीं जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय ने सफल हुए छात्र-छात्राओं को बधाई दी है। साथ ही असफल छात्र-छात्राओं से कहा है कि यह घबराने का नहीं, बल्कि और मेहनत करने का समय है। वे कहते हैं कि शासन परीक्षा का दूसरा मौका दे रहा है। आप अपनी मेहनत से इस परिणाम को बदल सकते हैं। इसलिए दृढ इच्छाशक्ति के साथ फिर से परीक्षा की तैयारी में जुट जाएं और परिणाम को बदलकर दिखाएं। हतोत्साहित न हों विद्यार्थी मॉडल हाईस्कूल की प्रिंसिपल डॉ. अर्चना ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि परीक्षा छात्रों के लिए निश्चित रूप से ऐसा समय होता है, जब सफल न होने पर वे हतोत्साहित हो जाते हैं, लेकिन अब हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। शासन ने दूसरा मौका देने का निर्णय लिया है, जो छात्र असफल हुए हैं, उन्हें उम्मीद से अच्छा परिणाम लाने का एक और मौका और समय मिल रहा है। वे सब कुछ भूलकर परीक्षा की तैयारी में जुट जाएं। डॉ. अर्चना ने बताया कि मॉडल हाईस्कूल में दसवीं में दो बच्चे स्टेट मेरिट में आए हैं, जबकि 12वीं क्लास में चार बच्चों ने प्रदेश की टॉप टेन में जगह हासिल की है। जबलपुर के मॉडल हाईस्कूल में पढ़ने वाली दसवीं कक्षा की छात्रा सिया जैन ने चौथे नंबर की रैंक हासिल की है। उन्होंने अपने साथी छात्र-छात्राओं से अपील की है कि परीक्षा परिणाम विपरीत आने पर बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। हो सकता है कि हमारी मेहनत में कुछ कमी रह गई हो, लेकिन उसके लिए फिर से मौका मिलेगा। क्योंकि लाइफ एक बार ही मिलती है, लेकिन पढ़ाई के लिए मौके कई बार मिलते हैं।

रेवंत रेड्डी ने परिसीमन पर पीएम मोदी को लिखा पत्र, जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ाने का किया विरोध | हैदराबाद-न्यूज़ न्यूज़

The MP Board 10th and 12th results declared at mpbse.nic.in.

आखरी अपडेट:15 अप्रैल, 2026, 13:05 IST तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करने के प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन आगाह किया कि इसे परिसीमन से जोड़ने से इसके कार्यान्वयन में देरी हो सकती है। रेवंत रेड्डी ने सीट आवंटन के लिए एक ‘हाइब्रिड मॉडल’ का प्रस्ताव रखा। इसका मतलब यह होगा कि आधी सीटें जनसंख्या के आधार पर आवंटित की जाएंगी, जबकि शेष आधी सीटें आर्थिक विकास, साक्षरता और स्वास्थ्य के आधार पर निर्धारित की जाएंगी। (फोटो क्रेडिट: एक्स) तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटें बढ़ाने की योजना पर कड़ी आपत्ति जताई है। अपने पत्र में, मुख्यमंत्री ने इस कदम के राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थों को रेखांकित करते हुए तर्क दिया कि निर्वाचन क्षेत्र के विस्तार को महिला आरक्षण से जोड़ना त्रुटिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दोनों मुद्दे अलग-अलग हैं और इन्हें एक साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। रेड्डी ने विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करने के प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन आगाह किया कि इसे परिसीमन से जोड़ने से इसके कार्यान्वयन में देरी हो सकती है। उन्होंने केंद्र से निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्गठन की प्रतीक्षा किए बिना, सीटों की मौजूदा संख्या के भीतर तुरंत महिला आरक्षण लागू करने का आग्रह किया। पत्र में उठाई गई एक बड़ी चिंता जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों को लगभग 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव था। रेड्डी ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने तर्क दिया कि जिन राज्यों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का पालन किया और विकास पर ध्यान केंद्रित किया, उन्हें कम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, सीट आवंटन को केवल जनसंख्या के आधार पर करना अलोकतांत्रिक होगा और शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकता है। रेड्डी ने भारत के संघीय ढांचे पर प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक शक्ति असमान रूप से अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों की ओर स्थानांतरित हो सकती है, जिससे संसद में दक्षिणी राज्यों की आवाज कमजोर हो सकती है। उन्होंने बताया कि दक्षिणी राज्य पहले से ही कर हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और आगे राजनीतिक असंतुलन क्षेत्रीय असमानताओं को गहरा कर सकता है। समाधान के रूप में, रेड्डी ने सीट आवंटन के लिए एक “हाइब्रिड मॉडल” प्रस्तावित किया। इस दृष्टिकोण के तहत, आधी सीटें जनसंख्या के आधार पर आवंटित की जाएंगी, जबकि शेष आधी सीटें आर्थिक विकास, साक्षरता दर, स्वास्थ्य संकेतक और समग्र विकास प्रदर्शन जैसे कारकों द्वारा निर्धारित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसा मॉडल संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा और साथ ही उन राज्यों को पुरस्कृत भी करेगा जिन्होंने विकास और जनसंख्या नियंत्रण में निवेश किया है। अंत में, सीएम ने केंद्र से ऐसे गंभीर मुद्दे पर एकतरफा निर्णय नहीं लेने का आग्रह किया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता की रक्षा करने और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्पक्ष और समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक का आह्वान किया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 15 अप्रैल, 2026, 13:05 IST अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। अपने पत्र में, मुख्यमंत्री ने इस कदम के राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थों को रेखांकित करते हुए तर्क दिया कि निर्वाचन क्षेत्र के विस्तार को महिला आरक्षण से जोड़ना त्रुटिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दोनों मुद्दे अलग-अलग हैं और इन्हें एक साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। रेड्डी ने विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करने के प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन आगाह किया कि इसे परिसीमन से जोड़ने से इसके कार्यान्वयन में देरी हो सकती है। उन्होंने केंद्र से निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्गठन की प्रतीक्षा किए बिना, सीटों की मौजूदा संख्या के भीतर तुरंत महिला आरक्षण लागू करने का आग्रह किया। पत्र में उठाई गई एक बड़ी चिंता जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों को लगभग 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव था। रेड्डी ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने तर्क दिया कि जिन राज्यों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का पालन किया और विकास पर ध्यान केंद्रित किया, उन्हें कम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, सीट आवंटन को केवल जनसंख्या के आधार पर करना अलोकतांत्रिक होगा और शक्ति संतुलन को बिगाड़ सकता है। रेड्डी ने भारत के संघीय ढांचे पर प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि राजनीतिक शक्ति असमान रूप से अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों की ओर स्थानांतरित हो सकती है, जिससे संसद में दक्षिणी राज्यों की आवाज कमजोर हो सकती है। उन्होंने बताया कि दक्षिणी राज्य पहले से ही कर हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और आगे राजनीतिक असंतुलन क्षेत्रीय असमानताओं को गहरा कर सकता है। समाधान के रूप में, रेड्डी ने सीट आवंटन के लिए एक “हाइब्रिड मॉडल” प्रस्तावित किया। इस दृष्टिकोण के तहत, आधी सीटें जनसंख्या के आधार पर आवंटित की जाएंगी, जबकि शेष आधी सीटें आर्थिक विकास, साक्षरता दर, स्वास्थ्य संकेतक और समग्र विकास प्रदर्शन जैसे कारकों द्वारा निर्धारित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसा मॉडल संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा और साथ ही उन राज्यों को पुरस्कृत भी करेगा जिन्होंने विकास और जनसंख्या नियंत्रण में निवेश किया है। अंत में, सीएम ने केंद्र से ऐसे गंभीर मुद्दे पर एकतरफा निर्णय नहीं लेने का आग्रह किया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता की रक्षा करने और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्पक्ष और समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक का आह्वान किया। आगे रहें, तेजी से पढ़ें News18 ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड को स्कैन करें और कभी भी,

अशोक मित्तल ईडी का छापा: ‘चुनाव से पहले मोदी का तोता…’ आप के सांसद अशोक मित्तल ईडी के रेड पर संजय सिंह का तीखा हमला

अशोक मित्तल ईडी का छापा: 'चुनाव से पहले मोदी का तोता...' आप के सांसद अशोक मित्तल ईडी के रेड पर संजय सिंह का तीखा हमला

ईडी ने बुधवार (15 अप्रैल 2026) को आम आदमी पार्टी के समाजवादी पार्टी के उपनेता अशोक कुमार मिशेल से जुड़े कई खुलासे किए। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा विनिमय अधिनियम यानि फेमा के कथित उल्लंघन का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने केंद्र सरकार पर उत्पाद आधार और ईडी की इस कड़ी की आलोचना की। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप के महासचिव अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी पंजाब में आने वाले 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर चुकी है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा कि पंजाब के लोग इसे नहीं देखेंगे और बीजेपी को इसका जवाब देंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि बीजेपी चुनाव से पहले दलित का इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने लिखा कि अशोक मस्जिद के घर और यूनिवर्सिटी में ईडी की रेड टिपिकल मोदी स्टाइल है और यह दबाव बनाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी किसी दबाव में आने वाली नहीं है. आप नेता मनीष सिसौदिया ने भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि जब भी किसी राज्य में चुनाव होता है तो सबसे पहले ईडी और सीबीआई की झलक दिखाई जाती है. उन्होंने इसे एक तय पैटर्न बताया और कहा कि इसके बाद बड़े-बड़े नेता आते हैं। सिसौदिया ने यह भी कहा कि पंजाब में इस तरह की राजनीति काम नहीं करेगी। AAP सांसद संजय सिंह का बयान आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने केंद्र सरकार और पीडीएफ़ लाइब्रेरी को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तो अच्छी तरह से पता है कि किस दिशा में मुड़ना है और यह उसी तरफ सक्रिय हो जाता है जहां चुनाव होने वाले हैं। उनका कहना है, पंजाब चुनाव से पहले जो घटनाएं सामने आ रही हैं, वे इसी पैटर्न का हिस्सा हैं। संजय सिंह ने कहा कि अशोक मैथ्यूज के खिलाफ हुई कार्रवाई, जिसमें डीडी की फिल्में भी शामिल हैं, सिर्फ एक शुरुआत है। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के नेताओं पर दबाव बनाने के लिए इस तरह की कार्रवाई की जा रही है और आने वाले समय में ऐसी और भी कार्रवाई देखने को मिल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि हर चुनाव से पहले इसी तरह की सामग्री देखने को मिलती है। ये भी पढ़ें: संसद विशेष सत्र: संसद के विशेष सत्र में पास होंगी महिलाएँ, 3 अहम बिल समेत? बदली हुई आर्किटेक्चर का गणित, जानें कैसे (टैग्सटूट्रांसलेट)आप(टी)ईडी छापा(टी)अशोक मित्तल(टी)ईडी छापा अशोक मित्तल(टी)आप समाचार(टी)अरविंद केजरीवाल बयान(टी)पंजाब चुनाव 2027(टी)ईडी सीबीआई विवाद(टी)आम आदमी पार्टी(टी)भाजपा बनाम आप(टी)फेमा मामला(टी)संजय सिंह बयान(टी)आप बनाम भाजपा(टी)ईडी छापा(टी)अशोक मित्तल मामला(टी)पर प्रश्न सीबीआई(टी)पंजाब चुनाव 2027(टी)आम आदमी पार्टी समाचार(टी)आप(टी)ईडी रेड अशोकमिस्टर(टी)अशोक मिर्जा(टी)ईडी रेड अशोकमिस्टर(टी)आप न्यूज(टी)अरविंद गोस्वामी का बयान(टी)पंजाब चुनाव 2027(टी)ईडी सीबीआई विवाद(टी)आम आदमी पार्टी(टी)बीजेपी बनाम आप(टी)फेमा केसर(टी)संजय सिंह बयान(टी)आप बनाम बीजेपी(टी)ईडी रेड(टी)अशोक माइकल केस(टी)सीबीआई पर सवाल(टी)पंजाब चुनाव 2027(टी)एम मैन पार्टी खबर

इंग्लिश प्रीमियर लीग में सट्टेबाजी के विज्ञापनों पर रोक:रिसर्च – जीतने के बाद भी फैंस खुश होने की बजाय निराश कि पूरी रकम क्यों नहीं लगाई

इंग्लिश प्रीमियर लीग में सट्टेबाजी के विज्ञापनों पर रोक:रिसर्च - जीतने के बाद भी फैंस खुश होने की बजाय निराश कि पूरी रकम क्यों नहीं लगाई

खेलों में सट्टेबाजी (स्पोर्ट्स बेटिंग) के बढ़ते चलन और इसके लुभावने विज्ञापनों के बीच, एक ताजा रिपोर्ट ने इसके मनोवैज्ञानिक और आर्थिक खतरों को उजागर किया है। इंग्लिश प्रीमियर लीग के क्लबों द्वारा सट्टेबाजी स्पॉन्सरशिप पर रोक के बाद हो रहे वित्तीय नुकसान की शिकायतों के बीच, ब्रिटेन के एक वरिष्ठ खेल पत्रकार ने बेटिंग की वास्तविकता परखने के लिए एक प्रयोग किया, जिसके नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं। प्रीमियर लीग में अगले सीजन से खिलाड़ियों की जर्सी के फ्रंट पर सट्टेबाजी कंपनियों के विज्ञापन देने पर स्वैच्छिक रोक लगाई जा रही है। इस फैसले के बाद नौ से ज्यादा क्लबों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें सट्टेबाजी कंपनियों के बराबर पैसे देने वाले अन्य स्पॉन्सर नहीं मिल रहे हैं, जिससे उन्हें करोड़ों का नुकसान हो रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि सट्टेबाजी उद्योग का यह भारी-भरकम मुनाफा सीधे तौर पर आम फैंस की जेब से आता है, जो दांव लगाने की लत का शिकार हो रहे हैं। क्या खेलों की अच्छी समझ होने पर सट्टेबाजी से सुरक्षित तरीके से पैसा कमाया जा सकता है? यह जांचने के लिए ब्रिटिश खेल पत्रकार ने एक सोशल एक्सपेरिमेंट किया। उनका लक्ष्य 10 पाउंड (करीब 1000 रुपए) को सुरक्षित दांव लगाकर 1000 पाउंड (करीब 1 लाख रुपए) में बदलना था। शुरुआती दांव जीतने के बाद, उनकी 10 पाउंड की रकम 120 पाउंड तक पहुंच गई, जिससे यह भ्रम पैदा हुआ कि सिस्टम काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, दांव जीतने के बावजूद पत्रकार को खुशी के बजाय निराशा हुई कि उन्होंने पूरी रकम दांव पर क्यों नहीं लगाई। विशेषज्ञों के अनुसार, यही सट्टेबाजी का सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक जाल है। प्रयोग ने साबित किया कि खेलों की अनिश्चितता के कारण सट्टेबाजी में कोई ‘पक्का फॉर्मूला’ काम नहीं आता। ब्रिटेन के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 14 लाख वयस्क सट्टेबाजी की लत के शिकार हैं। स्मार्टफोन और विज्ञापनों में मशहूर हस्तियों (जैसे पूर्व फुटबॉलर पीटर क्राउच) की मौजूदगी ने इसे एक ग्लैमरस लाइफस्टाइल के रूप में पेश किया है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बेटिंग ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे इंसान के दिमाग को लगातार दांव लगाने के लिए प्रेरित करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति को मैच का रोमांच महसूस करने के लिए उस पर दांव लगाने की जरूरत पड़ती है, तो वास्तव में वह उस खेल का सच्चा प्रशंसक नहीं है। 20 में से 11 क्लबों की जर्सी पर सट्टेबाजी का विज्ञापन सीजन 2025-26 में इंग्लिश प्रीमियर लीग में उतरीं 20 टीमों में से 11 की जर्सी के सामने सट्टेबाजी का विज्ञापन था। यानी आधे से भी ज्यादा। इनमें से अधिकतर क्लब वे थे जो लीग की टॉप-6 टीमों में शामिल नहीं हैं, जैसे एस्टन विला, एवर्टन, वेस्ट हैम, क्रिस्टल पैलेस आदि। अब से सभी टीमें सिर्फ बाजू पर सट्टेबाजी का विज्ञापन लगा सकेंगी, जर्सी के फ्रंट पर नहीं।