Tuesday, 15 Sep 2026 | 02:09 AM

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राजगढ़ में शादीशुदा प्रेमी जोड़े ने पेड़ पर फांसी लगाई:पांच साल से एक दूसरे को जानते थे; दो दिन में दूसरी ऐसी घटना

राजगढ़ में शादीशुदा प्रेमी जोड़े ने पेड़ पर फांसी लगाई:पांच साल से एक दूसरे को जानते थे; दो दिन में दूसरी ऐसी घटना

राजगढ़ जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र के दुर्गपुरा गांव में मंगलवार सुबह एक प्रेमी जोड़े के शव गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल की पहाड़ी पर नीम के पेड़ से लटके मिले। युवक ने गमछे और महिला ने चुन्नी से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, वहीं पुलिस ने पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। सुबह करीब 10 बजे बकरी चराने गए एक युवक की नजर पहाड़ी पर पेड़ से लटके दोनों शवों पर पड़ी। वह घबरा गया और तुरंत गांव पहुंचकर लोगों को जानकारी दी। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को खबर दी गई। कुछ ही देर में पूरा गांव घटनास्थल पर जुट गया। सूचना मिलते ही एसडीओपी धर्मवीर सिंह और भोजपुर थाना प्रभारी अजय यादव मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए खिलचीपुर अस्पताल भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी। पांच साल से चल रहा था प्रेम प्रसंग, दोनों थे शादीशुदा मृतकों की पहचान चैनसिंह तंवर (37) और मांगीबाई (35) के रूप में हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे और पिछले करीब पांच साल से उनके बीच प्रेम संबंध था। दोनों पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी हैं। इस रिश्ते को लेकर दोनों परिवारों में पहले भी विवाद हो चुका था। परिजनों के अनुसार, करीब एक साल पहले दोनों घर छोड़कर भाग गए थे। उस समय परिजन उन्हें राजस्थान से ढूंढकर वापस लेकर आए थे। बाद में पंचायत और पुलिस के सामने समझाइश देकर दोनों को अलग कर दिया गया था। इसके बाद मांगीबाई पिछले चार महीने से अपने मायके कोयला गांव में रह रही थी। सोमवार को घर से निकले, फिर नहीं लौटे जानकारी के मुताबिक, सोमवार को चैनसिंह घर से खिलचीपुर जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। वहीं मांगीबाई भी अपने मायके कोयला से बिना बताए निकल गई थी। मंगलवार सुबह दोनों के शव एक ही पेड़ पर अलग-अलग फंदों में लटके मिले। घटनास्थल से पुलिस को शराब की दो बोतलें भी बरामद हुई हैं। हालांकि, पुलिस ने आत्महत्या के पीछे के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं किया है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पिता प्रभुलाल के अनुसार, चैनसिंह खेती और मजदूरी करता था और उसके चार बच्चे हैं। वहीं मांगीबाई का भी एक 10 वर्षीय बेटा है। दो दिन पहले भी हुई थी ऐसी ही घटना गौरतलब है कि दो दिन पहले ही दुर्गपुरा से करीब 8 किलोमीटर दूर ढाबलीखुर्द गांव में भी एक प्रेमी जोड़े ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी।

पैदल जा रहे दंपती को वाहन ने टक्कर मारी:मंडला में पति का पैर कटकर अलग, मौत, पत्नी गंभीर घायल; खेत से घर जा रहे थे

पैदल जा रहे दंपती को वाहन ने टक्कर मारी:मंडला में पति का पैर कटकर अलग, मौत, पत्नी गंभीर घायल; खेत से घर जा रहे थे

मंडला जिले के टिकरिया थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-30 पर बबैहा पुल के पास तेज रफ्तार वाहन ने पैदल जा रहे पति-पत्नी को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें पति की जान चली गई और पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं। जुझारी गांव के रहने वाले 50 साल के रामचरण मरकाम अपनी पत्नी धनवती के साथ खेत का काम निपटाकर घर लौट रहे थे। जब वे बबैहा पुल पर पहुंचे, तभी एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने उन्हें टक्कर मारी और ड्राइवर गाड़ी लेकर मौके से भाग निकला। नाले में जा गिरे रामचरण टक्कर इतनी भीषण थी कि रामचरण का पैर कट गया और वे उछलकर पुल के नीचे नाले में जा गिरे। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। काफी तलाश के बाद पुलिस को नाले से रामचरण का शव मिला और उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। पत्नी की हालत नाजुक घायल पत्नी धनवती मरकाम को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उनके सिर में गंभीर चोटें आई हैं और उनकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद इलाके में काफी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है।

जल-मिट्टी-चिता सत्याग्रह के बाद कल सांकेतिक फांसी:छतरपुर में केन-बेतवा परियोजना का विरोध तेज; प्रदर्शनकारी जमीन नहीं छोड़ने पर अड़े

जल-मिट्टी-चिता सत्याग्रह के बाद कल सांकेतिक फांसी:छतरपुर में केन-बेतवा परियोजना का विरोध तेज; प्रदर्शनकारी जमीन नहीं छोड़ने पर अड़े

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी और किसानों का आंदोलन पहले से और तेज हो गया। मंगलवार को जिले में कई मोर्चों पर एक साथ प्रदर्शन हुए, जिनमें ‘जल सत्याग्रह’, ‘मिट्टी सत्याग्रह’ और ‘चिता आंदोलन’ शामिल थे। आंदोलनकारियों ने कल (बुधवार) को सांकेतिक फांसी की घोषणा की है। आज (मंगलवार) बड़ी संख्या में ग्रामीण केन नदी में उतरकर घंटों पानी में खड़े रहे। उन्होंने अपने विस्थापन के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस केन नदी के पानी के नाम पर यह परियोजना बनाई जा रही है, वही अब उनके उजड़ने का कारण बन रही है। आंदोलनकारियों ने इसे “जीवन और अस्तित्व की अंतिम लड़ाई” बताया। बोले- पुश्तैनी जमीन नहीं छोड़ेंगे ‘मिट्टी सत्याग्रह’ का मंगलवार को दूसरा दिन था। ग्रामीणों ने अपने खेतों की मिट्टी हाथ में लेकर संकल्प लिया कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। वहीं, ‘चिता आंदोलन’ दसवें दिन भी जारी रहा, जहां लोग प्रतीकात्मक चिताओं के पास बैठकर विस्थापन के दर्द को व्यक्त कर रहे हैं। इसके साथ ही कई प्रभावित गांवों में ‘चूल्हा बंद’ रखा गया। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भूखे रहकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं, जिससे गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। आरोप- फर्जी ग्राम सभाएं कराई गईं प्रभावितों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फर्जी ग्राम सभाएं कराई गईं, अधूरा मुआवजा दिया गया और दबाव बनाकर बेदखली की कोशिश की जा रही है। आंदोलनकारियों का दावा है कि रुंज, मझगांय और नेगुवा बांध से जुड़ी ग्राम सभाएं केवल कागजों में पूरी कर ली गईं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांवों में बिचौलिये सक्रिय हैं, जो मुआवजे की राशि में अवैध कटौती कर रहे हैं। पहचान पत्रों के नाम पर गरीबों से पैसे वसूले जा रहे हैं। जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर के अनुसार, प्रशासन के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी जमीनी सच्चाई से दूर रहकर केवल कागजी कार्रवाई कर रहे हैं। भटनागर ने कहा, “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश स्वीकार नहीं करेंगे।” कल सांकेतिक फांसी का ऐलान आंदोलनकारियों ने बुधवार को ‘सांकेतिक फांसी आंदोलन’ की घोषणा की है। उनका कहना है कि जमीन और आजीविका छिनने के बाद जीवन का कोई अर्थ नहीं बचता। यह प्रदर्शन प्रशासन को चेतावनी देने के लिए किया जाएगा। फिलहाल हजारों ग्रामीण प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं। ‘भूख-पड़ताल’ जारी है और आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है, “हम पानी में खड़े हैं, भूखे हैं और चिता पर लेटने को तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।”

एमपी में गर्मी बढ़ी, पारा 42 पार, नर्मदापुरम सबसे गर्म:अगले 5 दिन तापमान में 3-4 डिग्री बढ़ोतरी होगी, नर्मदा घाटों पर लग रही भीड़

एमपी में गर्मी बढ़ी, पारा 42 पार, नर्मदापुरम सबसे गर्म:अगले 5 दिन तापमान में 3-4 डिग्री बढ़ोतरी होगी, नर्मदा घाटों पर लग रही भीड़

मध्यप्रदेश में गर्मी ने अब तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सीजन में पहली बार तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मंगलवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान नर्मदापुरम में दर्ज किया गया, जहां दिन का तापमान 42.1 डिग्री और रात का तापमान 25.6 डिग्री रहा। नर्मदापुरम के अलावा रतलाम में 41.4 डिग्री और खजुराहो व नौगांव में 41 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। धार में भी तापमान 40.6 डिग्री तक पहुंच गया। मौसमविद एचएस पांडे के अनुसार, जिले में अगले पांच दिनों तक दिन के तापमान में लगातार बढ़त दर्ज होगी। तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। रात के तापमान में भी बदलाव के संकेत हवाओं की दिशा में बदलाव के चलते रात के तापमान में भी वृद्धि होने की संभावना है। पचमढ़ी में मंगलवार को अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री और न्यूनतम 14.2 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होगा, लेकिन यह कमजोर रहेगा। ऐसे में गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। विभाग के मुताबिक अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर सबसे ज्यादा गर्म रहता है। ग्वालियर में तापमान 45 डिग्री और भोपाल में 44 डिग्री तक पहुंचने का रिकॉर्ड रहा है। प्रदेश के सबसे गर्म 5 शहर न्यूनतम तापमान वाले 5 शहर

ट्रम्प ने PM मोदी को फोन किया, 40 मिनट बातचीत:ईरान जंग पर चर्चा, दोनों ने कहा- होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना बहुत जरूरी

ट्रम्प ने PM मोदी को फोन किया, 40 मिनट बातचीत:ईरान जंग पर चर्चा, दोनों ने कहा- होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना बहुत जरूरी

PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच करीब 40 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई। अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली बातचीत थी। फोन कॉल के दौरान पीएम मोदी ने ट्रम्प से कहा, “भारत के लोग आपको पसंद करते हैं।” PM मोदी इस बातचीत को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा- मुझे मेरे दोस्त राष्ट्रपति ट्रम्प का फोन आया। हमने दोनों देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में हुए काम और प्रगति पर बात की। हमने यह भी कहा कि आगे चलकर भारत और अमेरिका के रिश्ते को और मजबूत करेंगे। साथ ही, पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई और इस बात पर जोर दिया कि हॉरमुज खुला और सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-US में जल्द बड़ा समझौता भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच होर्मुज की घेराबंदी के मुद्दे पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले कुछ दिनों और हफ्तों में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा से जुड़े बड़े समझौते होने की उम्मीद है। राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है और कई अहम मुद्दों पर साथ मिलकर काम किया जा रहा है। गोर के मुताबिक, ट्रम्प ने पीएम मोदी से कहा कि हम सभी आपसे प्यार करते हैं। ट्रम्प-मोदी के बीच 20 दिन में दूसरी बातचीत इससे पहले पीएम मोदी और ट्रम्प के बीच 24 मार्च को फोन पर बात हुई थी। उस बातचीत में दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट के हालात पर बात की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत चाहता है कि तनाव कम हो और जल्द से जल्द शांति बहाल हो उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने की अहमियत भी बताई थी, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यह खबर अपडेट हो रही है…

‘…देश को बेच दिया’- पश्चिम बंगाल की रैली के दौरान राहुल गांधी की सरकार पर बड़ा हमला

'...देश को बेच दिया'- पश्चिम बंगाल की रैली के दौरान राहुल गांधी की सरकार पर बड़ा हमला

राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। उन्होंने भारत-विदेश के व्यापारिक सौदों को लेकर आरोप लगाया कि सरकार ने देश के हितों पर समझौता किया है और यहां तक ​​कहा कि ‘मोदी देशभक्त नहीं, बल्कि देशभक्त हैं।’ ट्रेड डील पर बड़ा आरोपराहुल गांधी ने कहा कि इस तरह भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका के हाथ में आ गई है। उनका दावा है कि सरकार ने अमेरिकी दबाव में यह निर्णय लिया है, जिससे देश को नुकसान होगा। कृषि और उद्योग पर खतरे की बातउन्होंने चेतावनी दी कि इस समझौते से भारत का कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होगा। साथ ही अगर अमेरिकी सामान बड़ी मात्रा में भारत में आ गए, तो छोटे और मध्यम उद्योग बंद हो सकते हैं, जिससे रोजगार पर भी बड़ा असर हो सकता है। डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रश्नराहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने देश का डेटा अमेरिका को भी दे दिया है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी देश की सेना अपने डेटा पर प्रतिबंध लगाती है। 9.5 लाख करोड़ रुपये की खरीद का दावाउन्होंने कहा कि सरकार ने अमेरिका से करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये के सामान का वादा किया है। उनका कहना है, इससे भारतीय बाजार में अमेरिकी सामान ‘सुनामी’ की तरह आने वाले और स्थानीय सामान को नुकसान होगा। बंगाल को होगा ‘डबल नुकसान’राहुल गांधी ने कहा कि इस संकट का असर पश्चिम बंगाल पर सबसे ज्यादा है, क्योंकि यहां पहले से ही उद्योग खराब हो गए हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह रोजगार देने का वादा पूरा नहीं कर पाई। बेरोजगारी पर नैतिकता सरकार परउन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 5 लाख बेरोजगारी भत्ता का वादा किया था, लेकिन 84 लाख युवाओं ने बेरोजगारी भत्ता के लिए आवेदन किया है। बीजेपी-आरएसएस पर संविधान को लेकर हमलाराहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाया कि वे ‘नफ़रत भरी सोच’ के माध्यम से संविधान को ख़राब कर रहे हैं और चुनाव में गड़बड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं। वोटर्स लिस्ट पर भी प्रश्नउन्होंने चुनाव आयोग की विशेष गहनता से समीक्षा (एसआईआर) प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया और कहा कि जहां भी भाजपा और आरएसएस को संभावना है, वे संविधान के खिलाफ काम करते हैं।

‘तमिलनाडु नहीं रहेगा चुप’, स्टालिन की मोदी सरकार को खुली चेतावनी, कहा- सड़क पर उतरेगा हर परिवार

'तमिलनाडु नहीं रहेगा चुप', स्टालिन की मोदी सरकार को खुली चेतावनी, कहा- सड़क पर उतरेगा हर परिवार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (एमके स्टालिन) ने प्रस्तावित परिसीमन को केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर इस प्रक्रिया से तमिलनाडु या दक्षिणी राज्यों के रसूख को नुकसान पहुंचता है तो राज्य में बड़े पैमाने पर आंदोलन और पूरे प्रदेश में आंदोलन हो सकता है। एमके स्टालिन ने 14 अप्रैल को वीडियो जारी कर कहा, ‘इस समय मैं केंद्र की बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ अहम बात कहना चाहता हूं।’ संसद सत्र में समाजवादी पार्टी का बहुमत। अगर ऐसा कुछ भी किया गया है जो तमिलनाडु को नुकसान पहुंचाता है या उत्तरी राज्य की राजनीतिक शक्ति को प्रवेश के रूप में लेता है तो हम तमिल में चुप नहीं रहेंगे।’ उनकी यह चेतावनी ऐसे समय में है जब संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, जिसमें संसद और महिला से जुड़े अहम संशोधनों पर चर्चा प्रस्तावित है। तमिल टूल हो जाएं- स्टालिन की दो टूक स्टालिन ने अपने संदेश में साफ कर दिया कि यह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा, ‘तमिलनाडु पूरी ताकत से अपना विरोध दर्ज कराता है। हर परिवार पर उतरेगा। ‘तेलम के मुख्यमंत्री के रूप में मेरे नेतृत्व में, हम एक बड़ा आंदोलन करेंगे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अगर तमिल को विनाश की ओर ले जाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया गया या उत्तर प्रदेश में राजनीतिक ताकतों को संगठित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया तो तमिल का विनाश हो जाएगा।’ यह बयान स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि डीएमके इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जन आंदोलन में शामिल होने की तैयारी में है। विश्वास के तरीके से हो रहा है परिसीमन-स्टायल का आरोप स्टालिन ने केंद्र सरकार पर परिसीमन प्रक्रिया को विश्वास बनाए रखने और राज्यों से बिना सलाह के आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर विश्वास कायम रखा गया है और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बिना किसी राजनीतिक दल या राज्य से सलाह लेकर इसे व्यापक रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद के विशेष सत्र के बीच में संवैधानिक संशोधनों को तेजी से पास करने के लिए कहा जा रहा है। लोकतंत्र और राज्य के अधिकारों पर हमला: एमके स्टालिन सीएम एमके स्टालिन ने इस कदम को सिर्फ समाजवादी प्रक्रिया की ओर नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा, ‘यह संसद में भाजपा सरकार की ओर से लोकतंत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश पर खुला हमला है। इससे भी यह अधिकांश राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला है। हमें यह भी नहीं पता कि यह प्रक्रिया कैसे लागू होगी।’ उन्होंने याद दिलाया कि दक्षिणी राज्यों में केंद्र की सलाह पर जनसंख्या नियंत्रण के उपाय अपनाए गए थे, लेकिन अब भी उनके राजनीतिक अलगाव को खतरा है। ये अंतिम चेतावनी है- मोदी सरकार को संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चट्टानी कंकाल पर कहा, ‘अगर तमिल प्रभावित होता है, तो हम पूरे देश को इसकी अनुभूति कराएंगे। मोदी जी ने फिर से दोहराता हूं कि इस तमिल की ओर से आपको अंतिम चेतावनी दी गई है। तेलुगु लड़कियाँ, तमिल जीतेगा। इसे ख़तरनाक मत समझिए, यह एक चेतावनी है। हमारे लिए सत्य नहीं, सिद्धांत स्थापित हैं। ‘राज्य के अधिकार-प्रमाणित हैं।’ दूध की सफाई के बाद यह विवाद क्यों अहम है? प्रस्तावित पेरिसमन के बाद नॉमिनेटेड की संख्या 543 से 850 तक हो सकती है। माना जा रहा है कि इस जनगणना के आधार पर उत्तरी राज्यों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, जबकि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। यही वजह है कि इस विषय में दक्षिणी राज्यों के कई राजनीतिक खतरे बताए जा रहे हैं। हालांकि पीएम मोदी ने अपनी केरल की रैली में कहा कि जनसंख्या को सुविधाजनक नियंत्रण करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों में जनसंख्या की संख्या कम नहीं होगी और देश भर के राज्यों को लाभ के लिए पैनल के लिए सीटों की कुल संख्या में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि ये चंचल अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि जनसंख्या नियंत्रण के कारण दक्षिण भारत में सीटों की संख्या कम कर दी गई है, लेकिन यह पूरी तरह सच है। पीएम मोदी ने साफ किया कि इस विस्तार से सुनिश्चित किया जाएगा कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के बावजूद दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं होगी। संसद यह सुनिश्चित करने के लिए कदम मजबूत करेगी कि उनकी सीट पूरी तरह से सुरक्षित रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा और तेलंगाना जैसे राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में अच्छा काम किया गया है। उनकी जनसंख्या वृद्धि कम रहने पर भी उनकी कोई सीट कम नहीं होनी चाहिए। ये भी पढ़ें: बंगाल में मुखर भूचाल: टीएमसी का हमला- ईडी बनी ‘बेहद हताश’, बीजेपी-लेफ्ट बोले- मेकर का नेटवर्क घेरा

माराडोना की मौत मामले में फिर जांच शुरू हो रही:मेडिकल टीम पर इलाज में लापरवाही के आरोप; पहला ट्रायल रद्द हुआ था

माराडोना की मौत मामले में फिर जांच शुरू हो रही:मेडिकल टीम पर इलाज में लापरवाही के आरोप; पहला ट्रायल रद्द हुआ था

फुटबॉल दिग्गज डिएगो माराडोना की मौत के मामले की जांच दोबारा मंगलवार से शुरू हो रहा है। उनकी मेडिकल टीम पर सही इलाज न देने और लापरवाही बरतने के आरोप हैं। मई 2025 में शुरू हुआ पहला ट्रायल उस समय रद्द कर दिया गया था, जब एक जज पर कोर्ट में बिना अनुमति डॉक्यूमेंट्री शूट कराने का आरोप लगा। अब नए जजों के सामने सुनवाई शुरू होगी। माराडोना को फुटबॉल इतिहास के महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। उन्होंने 1986 वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना को जीत दिलाई थी और ‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल के लिए भी जाने जाते हैं। माराडोना की 25 नवंबर 2020 को 60 साल की उम्र में मौत हुई थी। वे ब्रेन ब्लड क्लॉट की सर्जरी के बाद घर पर रिकवर कर रहे थे। पोस्टमॉर्टम में दिल का दौरा और फेफड़ों में पानी भरने को मौत की वजह बताया गया। मेडिकल टीम पर कुलपेबल होमिसाइड का केस दर्ज इस मामले में मेडिकल टीम के 7 सदस्य ट्रायल का सामना कर रहे हैं। इन पर ‘कुलपेबल होमिसाइड’ का केस दर्ज है। दोषी पाए जाने पर उन्हें 8 से 25 साल तक की सजा हो सकती है। एक्सपर्ट्स माराडोना के इलाज को अपर्याप्त बताया जांच में सामने आया कि टीम को माराडोना की गंभीर हालत की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने जरूरी कदम नहीं उठाए। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने उनके इलाज को ‘लापरवाह और अपर्याप्त’ बताया। ट्रायल में करीब 100 गवाहों के बयान होंगे, जिनमें उनकी बेटियां भी शामिल हैं। यह सुनवाई जुलाई तक चल सकती है। माराडोना ने करियर में 312 गोल दागे मैराडोना ने फुटबॉल करियर में 312 गोल किए। उन्होंने इंटरनेशनल करियर में 91 मैच खेले, जिसमें 34 गोल किए। मैराडोना बार्सिलोना, नेपोली, सेविला, नेवेल्स ओल्ड ब्यूऑयज और बोका जूनियर्स जैसे क्लब से खेल चुके हैं। बार्सिलोना से खेलते हुए उन्होंने 36 मैच में 22 और नेपोली के लिए 188 मैच में 81 गोल किए। करियर में 11 टूर्नामेंट जीते मैराडोना ने करियर में 11 टूर्नामेंट्स जीते हैं। इसमें 1 वर्ल्ड कप खिताब, एक UEFA कप खिताब, एक नेशंस लीग, एक FIFA वर्ल्ड यूथ चैम्पियनशिप और 5 नेशनल कप जीते हैं। मैराडोना को फीफा प्लेयर ऑफ द सेंचुरी से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने एक बार वर्ल्ड कप गोल्डन बॉल, एक बार बेलोन डी’ओर, 2 बार साउथ अमेरिकन फुटबॉलर ऑफ द ईयर, 6 बार नेशनल लीग टॉप स्कोरर अवॉर्ड जीता है।

UK में भारतीय मूल की थेरेपिस्ट बर्खास्त:अंग्रेजी न समझ पाने पर नौकरी गई, फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप

UK में भारतीय मूल की थेरेपिस्ट बर्खास्त:अंग्रेजी न समझ पाने पर नौकरी गई, फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप

यूके में एक भारतीय मूल की स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट साई कीर्तना श्रीपेरंबुदुरु को अंग्रेजी ठीक से न समझ पाने और आवेदन में गलत जानकारी देने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया। कारण यह रहा कि वह मरीजों और सहकर्मियों की बात ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। यह मामला जून 2024 का हो, लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है। र्कीतना ने अक्टूबर 2023 में यॉर्क एंड स्कारबरो टीचिंग हॉस्पिटल्स NHS ट्रस्ट जॉइन किया था। जॉइनिंग के कुछ ही समय बाद सहकर्मियों को पता चला कि वह मरीजों और स्टाफ की अंग्रेजी ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। स्पीच थेरेपिस्ट होने के बावजूद उन्हें उच्चारण, व्याकरण और बातचीत समझने में समस्या थी। अंततः जून 2024 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। अंग्रेजी फर्स्ट लैंग्वेज का दावा गलत निकला आवेदन में कीर्तना ने अंग्रेजी को अपनी पहली भाषा बताया था, लेकिन बाद में रिव्यू मीटिंग में स्वीकार किया कि उनकी मातृभाषा तेलुगु है। बाद में दिसंबर में उन्होंने बताया कि वह नौकरी के साथ-साथ अंग्रेजी सुधारने के लिए क्लास भी ले रही थीं। इस मामले में एक और अहम बात सामने आई कि नौकरी के आवेदन में उन्होंने अंग्रेजी को अपनी ‘फर्स्ट लैंग्वेज’ बताया था। जबकि फॉर्म के नियमों के अनुसार, ‘फर्स्ट लैंग्वेज’ वही मानी जाती है जो व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता हो। केवल अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करना इसे पहली भाषा नहीं बनाता। आमने-सामने की बातचीत से बचना चाहती थी कीर्तना कीर्तना के मैनेजर ने यह भी बताया कि इंटरव्यू के दौरान उसने चैट बॉक्स के जरिए सवाल पूछने का अनुरोध किया था, यानी आमने-सामने बातचीत से बचना चाहती थीं। इसे असामान्य माना गया, खासकर इसलिए क्योंकि वह उस समय यूके में ही रह रही थीं। अस्पताल ट्रस्ट के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि साई कीर्तना अक्टूबर 2023 से जून 2024 तक काम पर थीं और जून में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। कीर्तना ने इस फैसले को चुनौती दी और कहा कि उनकी पढ़ाई अंग्रेजी में हुई है, इसलिए इसे उनकी पहली भाषा माना जाना चाहिए। लेकिन पैनल ने इस तर्क को नहीं माना। पैनल का कहना था कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए गलत जानकारी दी और यह धोखा देने की कोशिश थी। इसके बाद उन्हें रजिस्टर से हटा दिया गया। ट्रिब्यूनल ने क्या कहा आवेदन फॉर्म में साफ लिखा होता है कि “क्या अंग्रेजी आपकी पहली भाषा है?” इसका जवाब ‘हां’ तभी देना चाहिए, जब अंग्रेजी आपकी रोजमर्रा की मुख्य भाषा हो। सिर्फ अंग्रेजी में पढ़ाई करने से यह पहली भाषा नहीं मानी जाती। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, साई कीर्तना का कहना था कि उन्हें सच में लगता था कि उनकी शिक्षा और पेशेवर काम के संदर्भ में अंग्रेजी को उनकी पहली भाषा माना जा सकता है। उन्होंने पैनल को लिखित में बताया कि उन्हें यह नहीं पता था कि यूके के नियमों के अनुसार “पहली भाषा” का मतलब रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली मुख्य भाषा होता है। सुनवाई के बाद पैनल ने कहा कि यह उनकी अंग्रेजी क्षमता की कमी छिपाने की कोशिश थी और इसे बेईमानी माना गया।

UK में भारतीय मूल की स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट बर्खास्त:अंग्रेजी न समझ पाने पर नौकरी गई, फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप

UK में भारतीय मूल की स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट बर्खास्त:अंग्रेजी न समझ पाने पर नौकरी गई, फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप

यूके में एक भारतीय मूल की स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट साई कीर्तना श्रीपेरंबुदुरु को अंग्रेजी ठीक से न समझ पाने और आवेदन में गलत जानकारी देने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया। कारण यह रहा कि वह मरीजों और सहकर्मियों की बात ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। यह मामला जून 2024 का हो, लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है। र्कीतना ने अक्टूबर 2023 में यॉर्क एंड स्कारबरो टीचिंग हॉस्पिटल्स NHS ट्रस्ट जॉइन किया था। जॉइनिंग के कुछ ही समय बाद सहकर्मियों को पता चला कि वह मरीजों और स्टाफ की अंग्रेजी ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। स्पीच थेरेपिस्ट होने के बावजूद उन्हें उच्चारण, व्याकरण और बातचीत समझने में समस्या थी। अंततः जून 2024 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। अंग्रेजी फर्स्ट लैंग्वेज का दावा गलत निकला आवेदन में कीर्तना ने अंग्रेजी को अपनी पहली भाषा बताया था, लेकिन बाद में रिव्यू मीटिंग में स्वीकार किया कि उनकी मातृभाषा तेलुगु है। बाद में दिसंबर में उन्होंने बताया कि वह नौकरी के साथ-साथ अंग्रेजी सुधारने के लिए क्लास भी ले रही थीं। इस मामले में एक और अहम बात सामने आई कि नौकरी के आवेदन में उन्होंने अंग्रेजी को अपनी ‘फर्स्ट लैंग्वेज’ बताया था। जबकि फॉर्म के नियमों के अनुसार, ‘फर्स्ट लैंग्वेज’ वही मानी जाती है जो व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता हो। केवल अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करना इसे पहली भाषा नहीं बनाता। आमने-सामने की बातचीत से बचना चाहती थी कीर्तना कीर्तना के मैनेजर ने यह भी बताया कि इंटरव्यू के दौरान उसने चैट बॉक्स के जरिए सवाल पूछने का अनुरोध किया था, यानी आमने-सामने बातचीत से बचना चाहती थीं। इसे असामान्य माना गया, खासकर इसलिए क्योंकि वह उस समय यूके में ही रह रही थीं। अस्पताल ट्रस्ट के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि साई कीर्तना अक्टूबर 2023 से जून 2024 तक काम पर थीं और जून में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। कीर्तना ने इस फैसले को चुनौती दी और कहा कि उनकी पढ़ाई अंग्रेजी में हुई है, इसलिए इसे उनकी पहली भाषा माना जाना चाहिए। लेकिन पैनल ने इस तर्क को नहीं माना। पैनल का कहना था कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए गलत जानकारी दी और यह धोखा देने की कोशिश थी। इसके बाद उन्हें रजिस्टर से हटा दिया गया। ट्रिब्यूनल ने क्या कहा आवेदन फॉर्म में साफ लिखा होता है कि “क्या अंग्रेजी आपकी पहली भाषा है?” इसका जवाब ‘हां’ तभी देना चाहिए, जब अंग्रेजी आपकी रोजमर्रा की मुख्य भाषा हो। सिर्फ अंग्रेजी में पढ़ाई करने से यह पहली भाषा नहीं मानी जाती। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, साई कीर्तना का कहना था कि उन्हें सच में लगता था कि उनकी शिक्षा और पेशेवर काम के संदर्भ में अंग्रेजी को उनकी पहली भाषा माना जा सकता है। उन्होंने पैनल को लिखित में बताया कि उन्हें यह नहीं पता था कि यूके के नियमों के अनुसार “पहली भाषा” का मतलब रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली मुख्य भाषा होता है। सुनवाई के बाद पैनल ने कहा कि यह उनकी अंग्रेजी क्षमता की कमी छिपाने की कोशिश थी और इसे बेईमानी माना गया।