बालाघाट में हनुमान जयंती पर निकली शोभायात्रा:साधक मोहित सोनी ने 40 किलो वजनी हनुमान स्वरूप धारण किया; 40 दिनों तक तपस्या की

बालाघाट जिले में हनुमान जयंती पर गुरुवार शाम को श्रद्धा और भक्ति के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस वर्ष आकर्षण का मुख्य केंद्र युवा साधक मोहित सोनी रहे, जिन्होंने भगवान हनुमान का स्वरूप धारण कर 40 किलो वजनी मुकुट के साथ नगर भ्रमण किया। ‘हनुमान सेवा दल समिति’ और ‘मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर ट्रस्ट’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शोभायात्रा से पूरा नगर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। 40 दिनों के कठिन ब्रह्मचर्य और तपस्या के बाद मिली सिद्धि परंपरा के अनुसार, प्रतिवर्ष हनुमान जी का स्वरूप धारण करने के लिए एक साधक का चयन किया जाता है, जिसे 40 दिनों तक कठोर ब्रह्मचर्य का पालन और विशेष साधना करनी होती है। इस वर्ष यह सौभाग्य मोहित सोनी को प्राप्त हुआ। 40 दिनों की तपस्या पूर्ण करने के बाद उन्होंने भारी-भरकम मुकुट और वेशभूषा धारण की और बैंड-बाजे व ढोल की थाप पर भक्तों के साथ नृत्य भी किया। मुख्य मार्गों से गुजरी यात्रा शोभायात्रा का शुभारंभ शाम 8 बजे मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर से हुआ। यहां से यह काली पुतली चौक और अहिंसा द्वार होते हुए नगर के मुख्य मार्गों से निकली। मार्ग में पड़ने वाले सभी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। 11 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों का समापन इस भव्य शोभायात्रा के साथ ही पिछले 11 दिनों से चल रहे विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का भी विधि-विधान से समापन हो गया। आयोजन में हनुमान सेवा दल के शंकर मोटवानी, राजू सोनी, सुनील आडवाणी सहित सैकड़ों की संख्या में पदाधिकारी और श्रद्धालु शामिल हुए। सुरक्षा व्यवस्था के बीच देर रात तक नगर में भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त किया। देखें तस्वीरें…
एलपीजी और पेट्रोल-डीजल उपलब्धता का रोज होगा रिव्यू:कलेक्टरों से सीएस अनुराग जैन बोले- मॉनिटरिंग करें और जमाखोरों पर शीघ्र एक्शन लें

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि प्रदेश में एलपीजी सहित अन्य पेट्रोलियम पदार्थ पर्याप्त है और किसी तरह की कोई कमी नहीं है। कलेक्टर्स की जिम्मेदारी है कि वे प्रतिदिन मॉनिटरिंग करें और जमाखोरी के साथ कालाबाजारी की शिकायतों पर त्वरित तथा सख्त कार्रवाई करें। राज्य स्तर और जिला स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता पर प्रतिदिन रिव्यू होगा। मुख्य सचिव जैन ने गुरुवार को मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कलेक्टर्स के साथ जिलों में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा की। बैठक में तय किया गया कि राज्य स्तर और जिला स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता पर प्रतिदिन रिव्यू होगा। मुख्य सचिव जैन ने पीएनजी लाइन वाले जिलों में अधिकाधिक घरेलू कनेक्शन देने के लिए संबंधित एजेंसियों को जिला प्रशासन से नियमित समन्वय करने के साथ ही कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे एजेंसियों को वर्क फोर्स उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के बीच पीएनजी की विशेषताओं का प्रचार-प्रसार करें, जिससे अगले 3 महीने की समय-सीमा में उन क्षेत्रों में अधिकतम घरों तक पाइप से गैस पहुंच सके। बैठक में एक माह में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा की गई। पेट्रोल पंप तथा गैस एजेंसियों पर अब लाइन आदि समाप्त होने के साथ पैनिक बुकिंग बंद होने पर संतोष व्यक्त किया गया। मुख्य सचिव जैन ने निर्देश दिए कि वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव जैन ने गैस की पर्याप्त उपलब्धता और निरंतर आपूर्ति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने घरों में पीएनजी कनेक्शन की समीक्षा की और निर्देश दिए कि पाइप लाइन की क्षमता अनुरूप घरेलू कनेक्शन करें। कनेक्शन जो, बंद हो गए हैं, उन्हें भी पुन: प्रारंभ करें। उन्होंने इन एजेंसियों के लिए विभागों से 24 घंटे में अनापत्ति प्रमाण-पत्र आदि जारी करने के साथ ही कॉलोनियों में कनेक्शन के लिए शिविर लगाने के निर्देश दिए। जमाखोरों और मुनाफाखोरों के खिलाफ सख्त एक्शन लें मुख्य सचिव जैन ने प्रदेश में एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के लागू करने के साथ भारी अर्थदंड और एजेंसियों पर आवश्यक होने पर निलंबन की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि एजेंसियां कई बार मुनाफे के लिए अपने कर्मियों से भी कालाबाजारी कराती है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 3029 गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। 2759 छापे मारे गए हैं। दोषियों के विरुद्ध 11 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है और ऑयल कंपनी के डिपो से निरंतर आपूर्ति जारी है। जिलों में गैस पाइप लाइन बिछाने के सभी आर.ओ.यू आवेदनों को आवेदन प्रस्तुत करने के 24 कार्यकारी घंटों के अंदर डीम्ड सीजीडी अनुमति प्रदान करने के आदेश अनुसार कार्रवाई की जा रही हैं। राज्य शासन को अतिरिक्त 10% एलपीजी आवंटन प्राप्त हो चुका है। 27 मार्च 2026 को भारत सरकार द्वारा कॉमर्शियल एलपीजी का अतिरिक्त 20% आवंटन उद्योग जैसे-स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, डाई, केमिकल्स, प्लास्टिक्स आदि के लिए किया गया है और उद्योगों को कॉमर्शियल गैस सप्लाई अनुसार की जा रही है। बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश को केरोसीन आवंटन और एवं प्रत्येक जिले में 2 पेट्रोल पंपों का आंकलन प्रक्रियाधीन है। विभाग द्वारा केरोसीन वितरण के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। केरोसीन का वितरण मांग के आधार पर होगा। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारी और ऑयल कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
पन्ना में अब सरकार चलाएगी शराब दुकानें:ठेकेदार नहीं मिलने पर आबकारी अधिकारी संभालेंगे कमान; आरक्षक-नगर सैनिक बनेंगे सेल्समैन

मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति के तहत पन्ना जिले में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाई है। जिला प्रशासन ने 31 मार्च की समय सीमा तक सभी 39 दुकानों के टेंडर निकालने का प्रयास किया था, लेकिन इनमें से 6 दुकानों के लिए कोई ठेकेदार नहीं मिला। इसके चलते कलेक्टर की अध्यक्षता वाली ‘जिला निष्पादन समिति’ ने इन दुकानों का संचालन सीधे करने का निर्णय लिया है। पवई-अजयगढ़ समेत 6 दुकानें आबकारी विभाग के पास जिला आबकारी अधिकारी मुकेश कुमार मौर्य ने बताया कि पवई, गुनौर, सलेहा, कृष्णगढ़, अजयगढ़ और मोहन्द्रा की शराब दुकानों का संचालन अब विभाग स्वयं करेगा। जब तक इन दुकानों की नीलामी प्रक्रिया सफल नहीं हो जाती, तब तक आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ही यहां की संपूर्ण व्यवस्थाएं संभालेंगे। जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उपनिरीक्षकों को सौंपी जिम्मेदारी दुकानों के सुचारू संचालन के लिए उपनिरीक्षक मुकेश कुमार पाण्डेय को पवई, कृष्णगढ़ और मोहन्द्रा का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, उपनिरीक्षक हरीश पाण्डेय को गुनौर व सलेहा और उपनिरीक्षक विक्रांत जैन को अजयगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी दुकानों की निगरानी और स्टॉक प्रबंधन का कार्य देखेंगे। आरक्षक और नगर सैनिक बनेंगे सेल्समैन इन दुकानों पर शराब की बिक्री के लिए आबकारी आरक्षकों और नगर सैनिकों को विक्रयकर्ता (सेल्समैन) के रूप में तैनात किया गया है। इनमें आरक्षक सोनू कोरकू, कुलदीप जाटव और नगर सैनिक मोतीलाल प्रजापति व वीरेंद्र यादव सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। जिला आबकारी अधिकारी मुकेश कुमार मौर्य ने बताया- आमजन की सुविधा के लिए यह वैकल्पिक व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक नई नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
लांजी में शराब दुकान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन:रहवासी देरशाम तक धरने पर, विधायक ने कहा- लोगों की मांग सही है

बालाघाट के कोटेश्वर नगरी लांजी में भिलाई मार्ग पर प्रस्तावित शराब दुकान के विरोध में वार्डवासियों ने मोर्चा खोल दिया है। महिलाएं सहित बड़ी संख्या में लोग दो स्थानों पर पंडाल लगाकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और लगातार नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। रहवासी क्षेत्र में दुकान खोलने के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों के कारण प्रशासन के सामने दुकान खुलवाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। दरअसल, ठेके के बाद शराब ठेकेदार अब दुकान खोलना चाहते हैं, लेकिन रहवासी इसके विरोध में खड़े हैं। पिछले दो वर्षों से लांजी-सालेटेकरी मार्ग पर संचालित शराब दुकान को हटाकर अब दूसरे क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। गुरुवार देर शाम तक जनप्रतिनिधि और रहवासी विरोध में डटे रहे और शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग करते रहे। धरना दे रहे लोगों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी स्थिति में रिहायशी क्षेत्र में शराब दुकान स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया है कि दुकान को नगर सीमा से बाहर संचालित किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, शराब ठेकेदारों का कहना है कि वे प्रशासन के निर्देशों के अनुसार ही दुकान संचालित करेंगे। उनका यह भी तर्क है कि दुकान नहीं खुलने से शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस मामले पर विधायक राजकुमार कर्राहे का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि शराब दुकान को लेकर संबंधित ठेकेदार और एसडीएम से चर्चा की गई है और जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। विधायक ने वार्डवासियों की मांग को सही ठहराते हुए कहा कि जहां शराब दुकान प्रस्तावित है, वह एक रहवासी क्षेत्र है और वहां आवागमन अधिक रहता है। आसपास स्कूल, मंदिर, बैंक सहित अन्य गतिविधियां संचालित होती हैं, ऐसे में भारती लॉन और सिद्धेश्वर मंगल भवन के सामने शराब दुकान का खुलना उचित नहीं है। विधायक के इस बयान के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन जल्द ही कोई ठोस और संतुलित निर्णय ले सकता है।
शादी के गिफ्ट पर नाराजगी ‘क्रूरता नहीं:हाईकोर्ट ने पति पर दर्ज FIR की रद्द, न्यूजीलैंड सहित विदेश में हुई घटनाओं पर भी फैसला

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा कि शादी में दिए गए गिफ्ट को लेकर असंतोष जताना “क्रूरता” नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने न्यूजीलैंड में रह रहे पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। यह मामला मोहाली के खरड़ थाने का है। पत्नी ने साल 2015 में शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने आरोप लगाया था कि पति और उसके परिवार ने दहेज को लेकर मानसिक उत्पीड़न किया। शादी का गिफ्ट नहीं आया पसंद सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पति भारत में बहुत कम समय के लिए रहा था। शादी के बाद वह केवल 16 दिन भारत में रहा और बाद में 15 दिन के लिए आया। इस पूरे समय में उसके खिलाफ मुख्य आरोप सिर्फ इतना था कि उसे शादी में दिए गए गिफ्ट पसंद नहीं आए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल गिफ्ट को लेकर नाराजगी जताना क्रूरता नहीं है। अदालत के अनुसार, इस तरह की बात न तो किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर करती है और न ही इससे किसी की जान को कोई खतरा होता है, इसलिए इसे कानून के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता विदेश में हुई घटनाओं पर भी फैसला अदालत ने विदेश में हुई घटनाओं को लेकर भी साफ फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की ज्यादातर घटनाएं न्यूजीलैंड में हुई थीं, इसलिए भारत में इन पर केस तभी चल सकता है जब केंद्र सरकार की अनुमति हो। बिना अनुमति भारत में ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पत्नी ने पहले घरेलू हिंसा और भरण-पोषण से जुड़े मामले भी दर्ज किए थे, लेकिन उसमें उसे कोई राहत नहीं मिली। हालांकि बच्चे के लिए भरण-पोषण तय किया गया था। साथ ही, दोनों का विवाह वर्ष 2022 में समाप्त हो चुका है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट संदेश दिया कि पारिवारिक विवाद और आपराधिक मामलों में अंतर समझना जरूरी है। केवल छोटे-छोटे घरेलू मतभेदों को आधार बनाकर गंभीर आपराधिक धाराओं का सहारा लेना कानून का गलत इस्तेमाल है।
असम चुनाव 2026: ‘मोहब्बत और नफरत की सोच के बीच…’, टाटा में सीएम हिमंत बिस्बा सरमा पर राहुल गांधी का वार, कांग्रेस की पांच गारंटी का ऐलान

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। इस बीच विपक्ष में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के कम्युनिस्ट नेता राहुल गांधी ने गुरुवार (2 अप्रैल, 2026) को असम के तिताबर विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल ओझा को संबोधित किया। राहुल गांधी यहां समिति प्राण कुर्मी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। तिताबर को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री युवा गोगोई ने असम का नेतृत्व करते हुए कई बार नामांकन जीता था। राहुल गांधी को संबोधित करते हुए बोले राहुल गांधी सदन को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता से जो कुछ छीना है, उसे वापस लाना होगा और मुख्यमंत्री को इसके लिए माफ़ी मांगनी होगी। उन्होंने कहा, ‘जो भी जनता ने लिया है, वह वापस आएगा।’ मुख्यमंत्री को माफ़ी माँगनी उपज, लेकिन केवल माफ़ी से काम नहीं मिलता- हम क़ानून का सहारा। वह कहीं भी, पास या दूर, उन्हें उत्तरदेह दोषी ठहराएगा। कितना भी हिल लें या उछल लें, कानून से बच नहीं सकते।’ भारत जोड़ो यात्रा का ज़िक्र कर बोले राहुल गांधी राहुल गांधी ने असम की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह भूमि श्रीमंत शंकरदेव, भूपेन हजारिका, ज्योति प्रसाद अघारा और जुबिन गर्ग जैसे महान व्यक्तित्वों की है, जो हमेशा प्रेम, एकता और विश्वसनीयता का संदेश देते हैं। उन्होंने अपनी यात्रा में भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैसाबोल में मोहब्बत की बात की। असम के लोग भी इसी भावना में विश्वास करते हैं, लेकिन यहां के मुख्यमंत्री इससे बिल्कुल दूर हैं और केवल नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।’ जुबिन गर्ग का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे असम की असली भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने कहा, ‘जो भी गरीब व्यक्ति उनके पास जाता था, वह मुस्कान के साथ लौट आता था।’ वे हमेशा एकता और इंसानियत की बात करते थे।’ राहुल ने सीएम हिमंत बिस्वा सरमा को सैद्धांतिक विश्लेषण दिया राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा सरमा ने पूर्व मुख्यमंत्री युवा गोगोई के साथ मिलकर काम किया और भाजपा सरकार अपने पिछले वादों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने 500 रुपये के प्रॉमिस को पूरी तरह से हिट करने का वादा किया। साथ ही, छह सेट किए गए वादों को भी अधूरा बताया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि असम की जमीन पर कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों का कब्जा है और राज्य सरकार दिल्ली से तय हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार के दबाव में असम के हालात प्रभावित हो रहे हैं। सभा के अंत में राहुल गांधी ने कहा, ‘यह चुनावी मोहभंग और अधर्म की सोच के बीच की लड़ाई है। कांग्रेस को वोट और गरीब व आम जनता की सरकार का समर्थन।’ कांग्रेस पार्टी की प्रमुख पाँच गारंटियाँ क्या हैं? इस दौरान कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने अपनी ओर से पांच प्रमुख पार्टियों की घोषणा कर दी। जिसमें, महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता और सहायता के लिए 50 हजार रुपये ज़ुबीन गर्ग से जुड़े 100 दिनों के भीतर न्याय पर 10 लाख लोगों को भूमि पट्टा वृद्ध नागरिकों को 1,250 रुपये की मासिक सहायता गंभीर के लिए 25 लाख रुपये तक का निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा यह भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट ने रेत माफिया को ‘चंबल के नए डकैत’ कहा; राजस्थान, एमपी और यूपी के लिए कड़ी चुनौती (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)राहुल गांधी(टी)कांग्रेस(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)तिताबर(टी)गुवाहाटी(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)राहुल गांधी(टी)कांग्रेस(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)तिताबार(टी)गुवाहाटी
बरगवां आरओबी निर्माण में देरी, कंपनी पर कार्रवाई तय:सिंगरौली में डेढ़ साल पहले शुरू होना था काम, पीडब्ल्यूडी ने नोटिस दिया

सिंगरौली जिले के बरगवां में प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण कार्य में लगातार देरी हो रही है। परियोजना का काम जुलाई 2025 में शुरू होना था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। इससे स्थानीय निवासियों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर रेलवे क्रॉसिंग पर जाम की समस्या बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, जिस कंपनी को आरओबी निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसने अभी तक साइट पर सक्रिय रूप से काम शुरू नहीं किया है। प्रारंभिक तैयारियों में भी सुस्ती देखी गई है, जिसके कारण परियोजना की समयसीमा प्रभावित हो रही है। स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों में इस देरी को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परियोजना में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना अनिवार्य है। पीडब्ल्यूडी रीवा संभाग में ब्रिज का काम देखने वाले एसडीओ पीके सिंह बघेल ने बताया, “आरओबी निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। यदि जल्द काम शुरू नहीं किया गया, तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
तमिलनाडु चुनाव: 21 सीटों पर द्रमुक, अन्नाद्रमुक नहीं। टीवीके का सबसे अच्छा मौका? | भारत समाचार

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 19:21 IST तमिलनाडु की चुनावी गतिशीलता में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित करते हुए, उनके संबंधित गठबंधन सहयोगियों के उम्मीदवार अपनी पार्टी के प्रतीकों का उपयोग करके आमने-सामने होंगे। छोटी या उभरती पार्टियों के सुविधाजनक दृष्टिकोण से, प्रमुख प्रतीकों की अनुपस्थिति एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है। (प्रतीकात्मक छवि) असामान्य रूप से प्रतिस्पर्धी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, राज्य भर में 21 निर्वाचन क्षेत्रों में द्रमुक के परिचित “उगते सूरज” या मतपत्र पर अन्नाद्रमुक के “दो पत्तों” के बिना चुनाव होंगे। इसके बजाय, उनके संबंधित गठबंधन सहयोगियों के उम्मीदवार अपनी पार्टी के प्रतीकों का उपयोग करके मुकाबला करेंगे, जो तमिलनाडु की चुनावी गतिशीलता में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव को रेखांकित करेगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह 2021 के चुनावों में 11 ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों से उल्लेखनीय उछाल का संकेत देता है, जो गठबंधन रणनीतियों में छोटे दलों के बढ़ते वजन की ओर इशारा करता है। यह बदलाव टीवीके और एनटीके जैसे उभरते खिलाड़ियों के लिए भी अपनी चुनावी पकड़ मजबूत करने का रास्ता खोल रहा है। टीओआई ने चुनाव विशेषज्ञ आर चंद्रशेखरन के हवाले से कहा, “दोनों पार्टियों ने छोटी पार्टियों से वोट ट्रांसफर को ध्यान में रखा है। डीएमके नेता एमके स्टालिन ने यह आकलन करने के बाद 20 से अधिक पार्टियों को अपने गठबंधन में लाया है कि साझेदार एक निर्वाचन क्षेत्र में 5,000 से 20,000 वोटों का योगदान कर सकते हैं।” पुनर्गणना से सहयोगियों को अधिक सीटें आवंटित की गई हैं, जिनमें से कई प्रमुख पार्टी के बजाय अपने स्वयं के प्रतीकों के तहत चुनाव लड़ना पसंद कर रहे हैं। चन्द्रशेखरन ने आगे कहा कि अभिनेता विजय के तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के प्रवेश से राजनीतिक गणित जटिल हो गया है। उनके अनुसार, इस नए कारक से पिछले चुनावों की तुलना में जीत का अंतर कम होने की संभावना है, जिससे द्रमुक के नेतृत्व वाले और अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले दोनों गठबंधनों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। छोटी या उभरती पार्टियों के सुविधाजनक दृष्टिकोण से, प्रमुख प्रतीकों की अनुपस्थिति एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है। जैसा कि राष्ट्रीय दलों के वॉर रूम में काम कर चुके राजनीतिक विश्लेषक वी भारती ने टीओआई को बताया, दो प्रमुख प्रतीकों की अनुपस्थिति तीसरे और चौथे मोर्चों के लिए फायदेमंद हो सकती है। हालाँकि, उन्होंने आगाह किया कि ये पार्टियाँ अकेले इस कारक पर भरोसा नहीं कर सकतीं, खासकर इसलिए क्योंकि इनमें से कई निर्वाचन क्षेत्र स्थापित गठबंधन सहयोगियों के गढ़ बने हुए हैं। इनमें से कई सीटों पर जमीनी हकीकत मजबूत खिलाड़ियों के पक्ष में बनी हुई है। उदाहरण के लिए, थल्ली को लंबे समय से सीपीआई का गढ़ माना जाता है, जहां पार्टी लगातार जीत हासिल करती रही है। विरुधाचलम में विजयकांत की डीएमडीके की विरासत है, जिसने 2006 और 2011 दोनों में सीट जीती थी, और अब प्रेमलता 15 साल के अंतराल के बाद चुनाव लड़ने के लिए लौट रही हैं। कट्टुमन्नारकोइल में, वीसीके नेता थोल थिरुमावलवन उस जगह से चुनाव लड़ रहे हैं जो परंपरागत रूप से उनकी पार्टी का गढ़ रहा है। विशेष रूप से, 21 निर्वाचन क्षेत्रों में से नौ का प्रतिनिधित्व वर्तमान में कांग्रेस विधायकों द्वारा किया जाता है। भारती ने कथित तौर पर कहा, “गठबंधन के उम्मीदवारों को इन सीटों पर स्थापित मतदाता आधार वाले स्थानीय नेताओं का समर्थन प्राप्त है। प्रतिस्पर्धा करने के लिए, टीवीके और एनटीके को तुलनीय स्थानीय उपस्थिति और प्रभाव वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की आवश्यकता होगी।” जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 19:21 IST न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु चुनाव: 21 सीटों पर द्रमुक, अन्नाद्रमुक नहीं। टीवीके का सबसे अच्छा मौका? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)डीएमके एआईएडीएमके गठबंधन(टी)उगता सूरज प्रतीक(टी)दो पत्तियों का प्रतीक(टी)छोटी पार्टियों का प्रभाव(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम टीवीके(टी)नाम तमिलर काची एनटीके(टी)गठबंधन साझेदार सीटें
जान जोखिम में पर 45,000 की तनख्वाह छोड़ना मुश्किल:खाड़ी से रेमिटेंस बंद हुआ तो डूब जाएगी 2.4 करोड़ परिवारों की इकोनॉमी

जब सायरन बजता है, तो नॉर्मा टैक्टाकॉन बस दुआ करती हैं। 49 साल की नॉर्मा कतर में घरेलू कामगार हैं। फिलीपींस में उनके पति और तीन बच्चे हैं। अमेरिका-इजराइल से जंग के बीच खाड़ी के देश ईरान के निशाने पर हैं। नॉर्मा उसी आग की लपटों में फंसी हैं। वे कहती हैं, ‘हवा में मिसाइलें देखकर डर लगता है। मुझे जिंदा रहना है- बच्चों के लिए। मैं ही उनका सब कुछ हूं।’ दरअसल फिलीपींस में घरेलू काम से जो मिलता है, उससे 4-5 गुना यानी प्रति माह 500 डॉलर (करीब 45,000 रुपए) खाड़ी में मिलता है। यही वजह है कि जान जोखिम में होने के बावजूद वो घर नहीं लौट पा रहीं। नॉर्मा अकेली नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के मुताबिक, खाड़ी देशों में 2.4 करोड़ प्रवासी मजदूर हैं। इनमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, फिलीपींस और इंडोनेशिया के लोग सबसे ज्यादा हैं। इस युद्ध में अब तक कम से कम 12 दक्षिण एशियाई मजदूर जान गंवा चुके हैं। नेपाल के दिबास श्रेष्ठ (29) अबुधाबी में सिक्योरिटी गार्ड थे। 1 मार्च को ईरान के हमले में उनकी मौत हो गई। उनके चाचा रमेश बताते हैं, ‘मैंने उन्हें नेपाल लौटने को कहा था, पर वे कहते थे- यहां अच्छी जिंदगी है।’ दिबास 2015 के भूकंप में क्षतिग्रस्त हुए माता-पिता का घर बनवाने के लिए पैसे जोड़ रहे थे। दुबई में बांग्लादेश के 55 साल के अहमद अली की मौत मिसाइल के मलबे से हुई। अली हर महीने 45-55 हजार रुपए घर भेजते थे। घर लौटना आसान भी नहीं है। युद्ध ने दुबई, अबुधाबी और कतर की उड़ानें बाधित कर दी हैं। फिलीपींस की आखिरी वापसी फ्लाइट में 234 मजदूरों को कुवैत, कतर और बहरीन से 8 घंटे सड़क मार्ग से सऊदी अरब ले जाया गया, तब जाकर वे फ्लाइट पकड़ पाए। पर ज्यादातर लोग घर जाना ही नहीं चाहते। म्यांमार की सू सू (31) दुबई में रियल एस्टेट कंपनी में काम करती हैं। वह म्यांमार में गृहयुद्ध से भागकर आई थीं। वे घर में काम कर रही हैं, सायरन सुनकर खिड़की से दूर हो जाती हैं। फिर भी कहती हैं, ‘यहां का माहौल शांत लगता है। मुझे भरोसा है कि सब ठीक हो जाएगा।’ खाड़ी से आए पैसे पर कुछ देशों की अर्थव्यवस्था 10% तक निर्भर फिलीपींस के कुल विदेशी मजदूरों में से आधे से ज्यादा करीब 10 लाख खाड़ी देशों में हैं। उनके भेजे पैसे फिलीपींस की अर्थव्यवस्था का 10% हैं। बांग्लादेश के 1.4 करोड़ प्रवासियों में से अधिकांश खाड़ी में काम करते हैं। उनकी रेमिटेंस देश की जीडीपी की जीवनरेखा है। आईएलओ के मुताबिक, खाड़ी में 2.4 करोड़ प्रवासी मजदूर हैं, जो कंस्ट्रक्शन से लेकर घरेलू काम तक हर सेक्टर की रीढ़ हैं। युद्ध ने इस पूरी व्यवस्था को हिला दिया है।
हनी सिंह-बादशाह को अश्लील गाने पर हाई कोर्ट की फटकार:सभी जगह से हटाने के आदेश; कहा- अश्लीलता और महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को सिंगर हनी सिंह और बादशाह के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उनके करीब दो दशक पुराने विवादित गाने ‘माफिया मुंडीर’ वॉल्यूम 1 को इंटरनेट के सभी प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इस गाने के बोल को ‘बेहद अश्लील’ और महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया है। जस्टिस पुरुशेंद्र कौरव की अदालत ने हनी सिंह और बादशाह को नोटिस जारी कर कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि गाने का टाइटल और बोल इतने आपत्तिजनक हैं कि उन्हें आधिकारिक आदेश में लिखना भी संभव नहीं है। अदालत ने निर्देश दिया कि गूगल, यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे सभी म्यूजिक और वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म से इस गाने के ओरिजिनल वर्जन, रीमिक्स और यूआरएल को तुरंत ब्लॉक किया जाए। कोर्ट ने कहा- ‘अंतरात्मा को झकझोर दिया’ जस्टिस कौरव ने अपने चैंबर में गाने को सुनने और उसके बोल पढ़ने के बाद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा, यह उन चुनिंदा मामलों में से एक है जिसने कोर्ट की अंतरात्मा को अंदर तक हिला दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गाने के बोल महिलाओं का अपमान करते हैं और उन्हें मजाक का पात्र बनाते हैं। इसमें कोई भी कलात्मक या सामाजिक मूल्य नहीं है। कोर्ट ने साफ किया कि कलात्मक अभिव्यक्ति की आड़ में ऐसी अश्लीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हिंदू शक्ति दल ने दायर की थी याचिका यह कार्रवाई हिंदू शक्ति दल की याचिका पर हुई है। याचिका में दलील दी गई थी कि यह गाना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध है और युवाओं पर गलत असर डाल रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में एक कॉन्सर्ट के दौरान हनी सिंह ने इस गाने की कुछ लाइनें गाई थीं, जिससे साबित होता है कि यह गाना उन्हीं का है। इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी विवादित लिंक ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे कंटेंट को पैसे कमाने की इजाजत नहीं कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री फैलाना, जो नाबालिगों के लिए भी उपलब्ध है, समाज के लिए ठीक नहीं है। जस्टिस कौरव ने कहा, समाज में शालीनता के मानकों की अनदेखी की जा रही है। कानून से चलने वाला कोई भी सभ्य समाज ऐसे कंटेंट को पैसे कमाने का जरिया बनने की इजाजत नहीं दे सकता। इस मामले की अगली सुनवाई अब 7 मई को तय की गई है।








