10 मिनट पहले
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बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरों को लेकर विवाद हो गया है। यूनिवर्सिटी के सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) के नए आर्काइव में जिन्ना की तीन तस्वीरें लगाई गई थीं। इसका छात्रों ने विरोध किया और जिन्ना की एक तस्वीर फाड़ दी।
इसके जवाब में छात्र संगठन के नेता ने उसी जगह जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम आजम की तस्वीर लगा दी। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। मामला बढ़ने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने DUCSU के कुछ हालिया फैसलों को नियमों के खिलाफ बताया और कार्रवाई की चेतावनी दी।
छात्र संघ बोला- सम्मान नहीं, इतिहास दिखाना मकसद
DUCSU के नए सिरे से तैयार किए गए आर्काइव का उद्घाटन रविवार को हुआ था। यहां 1905 से 1971 तक ढाका यूनिवर्सिटी के इतिहास से जुड़ी सामग्री रखी गई है।
आर्काइव में जिन्ना से जुड़ी तीन तस्वीरें शामिल थीं। इनमें एक 1948 की तस्वीर थी। इसमें जिन्ना ढाका के तत्कालीन रेसकोर्स ग्राउंड में उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राज्य भाषा बनाने की बात कह रहे थे।
दूसरी तस्वीर 1940 में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन की थी। तीसरी 1970 के चुनाव से जुड़ी ‘डॉन’ अखबार की कटिंग थी।
DUCSU सचिव फातिमा तसनीम जुमा ने कहा कि ये तस्वीरें जिन्ना के सम्मान में नहीं लगाई गई थीं। उनका कहना था कि आर्काइव का मकसद यूनिवर्सिटी का इतिहास दिखाना है। इसलिए उस दौर की महत्वपूर्ण घटनाओं और उनसे जुड़े लोगों की तस्वीरें भी लगाई गई हैं।
DUCSU के जीएस एसएम फरहाद ने भी कहा कि जिन्ना की उर्दू वाली तस्वीर उनके समर्थन में नहीं थी। इसे इसलिए रखा गया था ताकि लोगों को पता चले कि भाषा के मुद्दे पर जिन्ना का क्या रुख था और उसका विरोध क्यों हुआ।
छात्र बोले- मुजीबुर रहमान की फोटो क्यों नहीं
तस्वीरें सामने आने के बाद कुछ छात्र संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि ढाका यूनिवर्सिटी का इतिहास भाषा आंदोलन और 1971 की आजादी की लड़ाई से जुड़ा है। ऐसे में जिन्ना की तस्वीरों को आर्काइव में जगह देना सही नहीं है।
छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि आर्काइव में जिन्ना की तीन तस्वीरें हैं, लेकिन बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की कोई अकेली और प्रमुख तस्वीर नहीं है। सोमवार को यह विरोध और बढ़ गया। खबर अपडेट हो रही है…
















































