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NRI महिला बोली- लुटेरे रुकते तो टुकड़े-टुकड़े कर देती:लुधियाना में कार रोककर तलवार उठाई और दौड़ पड़ी; 10 सवाल-जवाब में पूरी कहानी

NRI महिला बोली- लुटेरे रुकते तो टुकड़े-टुकड़े कर देती:लुधियाना में कार रोककर तलवार उठाई और दौड़ पड़ी; 10 सवाल-जवाब में पूरी कहानी

लुधियाना के डेहलों में NRI महिला हरजिंद कौर रात में सड़क पर तलवार लहराकर लुटेरों के पीछे दौड़ पड़ी। तलवार लेकर हरजिंद कौर लुटेरों को ललकारती रही और लुटेरे उसका रौद्र रूप देखकर फरार हो गए। हरजिंद कौर का कहना है कि अगर लुटेरे रूक जाते तो वो उनका गाटा लगा देती यानि टुकड़े-टुकड़े कर देती। गनीमत रही कि वो मौके से भाग गए। हरजिंद कौर का कहना है कि पहले उसने पुलिस को शिकायत नहीं दी। जब लोग इस घटना को स्क्रिप्टेड कहने लगे तो उन्हें लगा कि शिकायत दे देनी चाहिए। फिर उन्होंने पुलिस को इस मामले की शिकायत दी। डेहलों पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी। एनआरआई महिला ने बताया कि दिलेरी उनका खानदानी गुण है। उसके दादा दलीप सिंह पहलवान रहे हैं और उन्होंने उनके लिए घर में जिम भी बनाया था। आज भी उनके गांव राजगढ़ के घर में वो जिम है। अब 10 सवाल-जवाब में पढ़ें पूरी कहानी… हरजिंद कौर से सवाल जवाब में घटना और उसके बारे में जानिए… सवाल: आप कहां रहती हैं और क्या करती हैं? जवाब: मैं ऑस्ट्रेलिया में रहती हूं और वहां पर अपना कारोबार करती हूं। सवाल: लुधियाना में कहां रहती हैं और रात को कार में कहां जा रहे थे? कार में कौन-कौन सवार था? जवाब: मैं राजगढ़ गांव की हूं और ऑस्ट्रेलिया से कुछ दिन पहले यहां आई। रात को मैं अपनी सास व चाची के साथ डेहलों नहर वाली सड़क से जा रही थी। सवाल: आपको कैसे लगा कि वो लूटने का प्रयास कर रहे हैं और हुआ क्या था? जवाब: बाइक सवार काफी समय से हमारा पीछा कर रहा था। जब मैं स्पीड कम कर रही थी तो वो भी कम कर रहा था। उसे कई बार आगे जाने के लिए जगह दी। वो नहीं गया। मेरी चाची ने बताया कि ये लुटेरे हो सकते हैं। उन्होंने अपना मोबाइल ऑन कर दिया। उन्हाेंंने जब कार ओवरटेक की तो एकदम से अंडा कार के शीशे पर मार दिया। पहले मुझे लगा कि ऊपर से कुछ गिरा है। लेकिन जब देखा तो यह अंडा था। वो थोड़ी दूर जाकर रूक गए। सवाल: उसके बाद आपने क्या किया और गाड़ी में तलवार कहां से आई? जवाब: मैंने गाड़ी को ब्रेक लगाई और गाड़ी में पड़ी तलवार उठाई। हम सिख फैमिली से हैं तो गाड़ी में तलवार हमेशा रखते हैं। मैं तलवार लेकर बाहर निकलने लगी तो मेरी चाची ने मुझे रोकने की कोशिश की। उधर मेरी सास डर गई और घबराने लगी। मैं जबरदस्ती बाहर निकली। सवाल: आपको डर नहीं लगा कि वो हमला कर देंगे? जवाब: दो बातें हैं एक बुजदिल बनकर रोज मरते जाओ या फिर दिलेरी दिखाकर या तो लुटेरों से भिड़ जाओ या खुद मर जाओ। मैं बचपन से दिलेर हूं। मेरे दादा पहलवान थे। उन्होंने दिलेरी हमें विरासत में दी है। मैंने मन बना लिया था कि अगर वो रूके तो मैं उनके टुकड़े-टुकड़े कर दूंगी। सवाल : वहां पर उसके बाद क्या हुआ? जवाब: जब मैंने कार को ब्रेक लगाई तो उन्होंने बाइक बैक किया और हमारी तरफ आ रहे थे। उनकी योजना थी कि कार रूक गई अब उन्हें लूट लिया जाए। जब मैं तलवार लेकर बाहर निकली और जोर से चिल्लाई तो वो रूक गए। मैं फिर तलवार लेकर उनके पीछे भागी। इतने में पीछे से एक बाइक व कार आ गई। रोशनी हुई तो वो दोनों भाग गए। सवाल: लोगों ने आपकी मदद की? जवाब: जब मैं तलवार लेकर चिल्ला रही थी तो वहां से निकलने वाले और लोग भी रूक गए। एक बाइक सवार ने बताया कि दीदी वो दो ही नहीं थे बल्कि ज्यादा थे। लोगों ने कहा कि इस रूट पर ऐसा कई बार होता है। सवाल: आप फिर आगे गए या नहीं? जवाब: नहीं फिर हम वहां से वापस आ गए, क्योंकि मेरी सास बहुत घबरा गई थी। सवाल: सोसाइटी को क्या मैसेज देंगे? जवाब: लड़कियों को दिलेर बनाओ। उन्हें दिलेरी के किस्से सुनाओ। उनको महंगा मोबाइल दो या न दो पर उन्हें शस्त्र दो। गतका, जूडो कराटे व आत्मरक्षा के गुर सिखाओ ताकि ऐसी स्थिति में वो खुद की सुरक्षा कर सकें। मैं जब भी गांव आती हूं तो गांव की लड़कियों को सिमरन करवाती हैं और उन्हें दिलेर बनाती हूं। सवाल: आप में दिलेरी कहां से आई? जवाब: मेरे दादा पहलवान थे। मेरे पिताजी मुझे अकसर दिलेरी के किस्से सुनाते थे। मैं स्पोर्ट्स में रही हूं। निडर सीजन-2 की विनर रही, जिसमें एडवेंचर की एक्टिविटी होती थी और दिलेरी दिखाने वाले को जीत हासिल होती थी। मैं जेंडर में विश्वास नहीं करती हूं। मैं दिलेरी में विश्वास करती हूं। पुलिस कमिश्नर महिला को सम्मानित करेंगे थाना डेहलों की एसएचओ इंस्पेक्टर अवनीत कौर ने बताया कि NRI महिला जा रही थी, उसकी गाड़ी पर अंडे मारकर लूटने का प्रयास किया। वीडियो वायरल हुआ तो हमने महिला से संपर्क किया और उसके बाद एफआईआर दर्ज कr। उन्होंने बहुत बहादुरी से लुटेरों को भगाया। हमने 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस के सीनियर अफसरों को जानकारी दी है। पुलिस कमिश्नर महिला को सम्मानित करेंगे।

एक्ट्रेस लाना क्लार्कसन का मर्डर अब भी मिस्ट्री:लाश कुर्सी पर, दांत जमीन पर बिखरे मिले; हत्यारे म्यूजिक प्रोड्यूसर की जेल में मौत

एक्ट्रेस लाना क्लार्कसन का मर्डर अब भी मिस्ट्री:लाश कुर्सी पर, दांत जमीन पर बिखरे मिले; हत्यारे म्यूजिक प्रोड्यूसर की जेल में मौत

3 फरवरी 2003 की बात है फिल्मी करियर खत्म होने के बाद एक्ट्रेस और मॉडल लाना क्लार्कसन अपने घर चलाने के लिए वेस्ट हॉलीवुड के एक क्लब हाउस ऑफ ब्लूज में पार्ट-टाइम काम करने लगी थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात मशहूर म्यूजिक प्रोड्यूसर फिल स्पेक्टर से हुई। पहली ही मुलाकात में दोनों एक साथ फिल के घर चले गए। फिल स्पेक्टर का घर बहुत बड़ा और सुंदर था। वह म्यूजिक इंडस्ट्री में एक जाना माना नाम था। शायद लाना को उम्मीद थी कि यह मुलाकात उसके करियर को फिर से शुरू करने में मदद कर सकती है। लेकिन तभी, करीब सुबह 5:30 बजे फिल का ड्राइवर कार में बैठा रेडियो सुन रहा था कि अचानक उसे गोली चलने जैसी आवाज सुनाई दी। हैरान होकर जब वह देखने गया तो उसने देखा कि लाना क्लार्कसन की लाश फर्श पर पड़ी थी। तुरंत बाद ड्राइवर ने 911 पर कॉल किया और कहा, मुझे लगता है मेरे बॉस ने किसी को मार दिया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ड्राइवर ने सीधे क्यों फिल को हत्या का दोषी माना। क्या वह झूठ बोल रहा था या इसके पीछे कोई और कहानी थी? आज अनसुनी दास्तानें में पढ़िए एक्ट्रेस और मॉडल लाना क्लार्कसन की मौत की दर्दनाक कहानी… लाना क्लार्कसन का जन्म कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम डोना क्लार्कसन और जेम्स एम. क्लार्कसन था। उनके एक भाई जेसी जे. क्लार्कसन और एक बहन फॉन थीं। उनका बचपन कैलिफोर्निया के सोनोमा काउंटी की पहाड़ियों में बीता। वहां रहते हुए उन्होंने क्लोवरडेल हाई स्कूल और पैसिफिक यूनियन कॉलेज प्रिपरेटरी स्कूल में पढ़ाई की। 1978 में क्रिसमस के दौरान उनका परिवार वापस साउथ कैलिफोर्निया लौटा और लॉस एंजेलिस के सैन फर्नांडो वैली इलाके में बस गया। लॉस एंजेलिस आने के बाद लाना का मन धीरे-धीरे मनोरंजन जगत की ओर बढ़ने लगा। अपनी खूबसूरती और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने एक्टिंग और मॉडलिंग में करियर बनाने का फैसला किया। 1980 के शुरुआती सालों में लाना क्लार्कसन को फिल्मों और टेलीविजन में छोटे-छोटे रोल मिलने लगे। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत निर्देशक एमी हेकरलिंग की कमिंग-ऑफ-एज कॉमेडी Fast Times at Ridgemont High (1982) से की और यह उनकी पहली बोलने वाली फिल्म थी। इसके बाद वह सरफेस (1983) में भी नजर आईं, जहां वह मिशेल फाइफर के पीछे बाबिलॉन क्लब के डांस फ्लोर पर दिखाई दीं। हालांकि, उनके करियर का पहला बड़ा मौका निको मस्टोराकिस की साइंस-फिक्शन थ्रिलर फिल्म Blind Date से मिला, जिसने उन्हें अधिक पहचान दिलाई। लाना क्लार्कसन को एक्ट्रेस के तौर पर सबसे ज्यादा पहचान निर्माता रोजर कॉर्मन की फैंटेसी फिल्म डेल्थस्टाल्कर (1983) से मिली। इसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों में काम मिलने लगा। अब लाना सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं थीं। उन्हें कई एड्स और मॉडलिंग के काम भी मिल रहे थे। इंडस्ट्री में उनकी एक अलग पहचान बन चुकी थी और उनका करियर लगातार बढ़ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे लाना की उम्र बढ़ने लगी, उनका करियर धीमा पड़ने लगा। कहा जाता है कि 30 साल के बाद कई हीरोइन्स को बड़ी फिल्में कम मिलने लगती हैं, और कुछ ऐसा ही लाना के साथ भी होने लगा। उनके पास बड़े प्रोजेक्ट्स के ऑफर नहीं आए और एक समय ऐसा आया जब उन्हें कोई काम नहीं मिला। इसके बाद जनवरी 2003 में पैसों की जरूरत के चलते लाना ने वेस्ट हॉलीवुड, कैलिफोर्निया के हाउस ऑफ ब्लूज में पार्ट-टाइम होस्टेस की नौकरी शुरू की। यहां वह लोगों का स्वागत करती थीं। हाउस ऑफ ब्लूज वह जगह थी जो दशकों तक संगीत प्रेमियों और सेलिब्रिटीज की पसंदीदा रही, लेकिन 2015 में इसे तोड़ दिया गया। 3 फरवरी 2003 को लाना की पहली मुलाकात म्यूजिक प्रोड्यूसर फिल स्पेक्टर से हुई। करीब 1:45 बजे फिल हाउस ऑफ ब्लूज पहुंचे और सीधे फाउंडेशन रूम यानी क्लब के VIP सेक्शन में गए। वहां लाना होस्टेस के तौर पर खड़ी थीं और लोगों का स्वागत और चेक-इन कर रही थीं। यहीं उनकी पहली मुलाकात हुई। फिल ने महंगी शैंपेन मंगवाई और दोनों की बातचीत शुरू हुई। फिर करीब 2:30 बजे फिल और लाना एक साथ उनकी कार से अल्हाम्ब्रा स्थित फिल के घर चले गए। उस समय लाना फिल्मों में काम नहीं कर रही थीं और हाउस ऑफ ब्लूज में होस्टेस की नौकरी कर रही थीं। लोग उनके काम और करियर को लेकर कई तरह की बातें कर रहे थे, लेकिन असली सच क्या था यह स्पष्ट नहीं था। इतना जरूर है कि उसी रात उनकी फिल स्पेक्टर से मुलाकात हुई और वे उनके साथ उनके घर चली गईं। फिल स्पेक्टर का घर काफी बड़ा और सुंदर था। लगभग 10,000 वर्गफुट का, जिसमें 10 बेडरूम और 11 बाथरूम थे। फिल कोई आम इंसान नहीं थे। उन्हें रॉक एंड रोल हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था और म्यूजिक इंडस्ट्री में उन्हें एक जीनियस माना जाता था। वह बेहद प्रतिभाशाली और मशहूर म्यूजिक प्रोड्यूसर थे। लेकिन उनका स्वभाव सही नहीं था। लोग कहते थे कि वह जल्दी गुस्सा हो जाते थे। खासकर जब उन्होंने शराब या ड्रग्स ली होती। उनके बारे में कई किस्से मशहूर थे कि वह अचानक बंदूक निकालकर लोगों को डराते थे। उनकी पत्नी रोनी स्पेक्टर ने बताया कि शादी की रात ही उन्होंने धमकी दी थी कि अगर वह उन्हें छोड़ देंगी तो उन्हें नुकसान पहुंचाएंगे। करीब सुबह 5:30 बजे फिल का ड्राइवर कार में बैठा रेडियो सुन रहा था कि अचानक उसे गोली चलने जैसी आवाज सुनाई दी। हैरान होकर जब वह देखने गया, तो उसने देखा कि लाना क्लार्कसन की लाश वहां पड़ी थी। तुरंत बाद ड्राइवर ने पहले फिल की सेक्रेटरी को फोन किया और फिर 911 पर कॉल किया। उसने कहा, मेरा नाम एड्रियाना है। मुझे लगता है कि मेरे बॉस ने किसी को मार दिया है। कुछ ही मिनटों में पुलिस वहां पहुंच गई। ड्राइवर से बात करने के बाद वे धीरे-धीरे मेन्शन की ओर बढ़े। घर जंगल जैसी जगह से घिरा हुआ था, इसलिए पुलिस को अंदाजा नहीं था कि अंदर क्या हालात होंगे। वे बहुत सावधानी से आगे बढ़ रहे थे। तभी दरवाजा खुला और फिल स्पेक्टर बाहर आए। वह उलझी-उलझी बातें कर रहे थे और साफ बोल नहीं पा रहे

जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा इंदौर:जात्रा–2026 में आदिवासी धुन 'अमू काका बाबा' और 'क्यों मारी रे' पर जमकर थिरके इंदौरी

जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा इंदौर:जात्रा–2026 में आदिवासी धुन 'अमू काका बाबा' और 'क्यों मारी रे' पर जमकर थिरके इंदौरी

गांधी हॉल परिसर में चल रहे तीन दिवसीय आदिवासी महोत्सव ‘जात्रा–2026’ ने दूसरे दिन ऐसा रंग जमाया कि पूरा इंदौर जनजातीय सुरों और तालों पर थिरकता नजर आया। शाम 7 से 10 बजे तक आयोजित लाइव म्यूजिकल नाइट में कलाकार आनंदीलाल भावेल और उनकी टीम की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सव में बदल दिया। झाबुआ और अलीराजपुर की लोक संस्कृति इंदौर में सजीव हो उठी। ‘अमू काका बाबा’, ‘चिलम तमाखू का डब्बा’, ‘क्यों मारी रे, क्यों पीटी रे’ और ‘छोटी-सी उमर में म्हारी शादी कराई दी’ जैसे लोकप्रिय लोकगीतों पर युवाओं से लेकर परिवारों तक ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। पारंपरिक वेशभूषा, मांदल की थाप और लोक धुनों की गूंज ने शहर और जनजातीय अंचलों के बीच की दूरी को मानो मिटा दिया। संस्कृति के साथ स्वास्थ्य और प्रकृति का संगम 20 से 22 फरवरी तक आयोजित ‘जात्रा-2026’ केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय जीवनदृष्टि का परिचायक बनकर उभरा है, जहां स्वास्थ्य और प्रकृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में धार, झाबुआ और अलीराजपुर की पारंपरिक औषधियां, वनोपज और हस्तशिल्प आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं। राजनीतिक व प्रशासनिक सहभागिता से बढ़ी गरिमा आयोजन में विधायक गोलू शुक्ला, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सावित्री ठाकुर की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। झाबुआ की कलेक्टर नेहा मीना ने भी आयोजन स्थल पर पहुंचकर कलाकारों और स्टॉल संचालकों से संवाद किया और व्यवस्थाओं की सराहना की। विधायक गोलू शुक्ला ने कहा कि होली से पहले शहर में ऐसा सांस्कृतिक उत्सव देखना सुखद है। पूरा झाबुआ-अलीराजपुर मानो इंदौर में बस गया हो। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। महामंडलेश्वर दे मां पवित्रानंद गिरी राजेंद्र आचार्य ने कहा कि जात्रा सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का जीवंत उदाहरण है। हम सब एक हैं, यह भाव इस आयोजन में स्पष्ट दिखाई देता है। आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति प्रस्तावित है। वनोपज और हस्तशिल्प बने खास पहचान ‘जात्रा–2026’ में बड़ी संख्या में कॉलेज के छात्र-छात्राएं आयोजन स्थल पर पहुंच रहे हैं। पारंपरिक सजावट और जनजातीय कला से सजे सेल्फी पॉइंट पर दिनभर युवाओं की भीड़ नजर आई। परिसर में गौसेवा का विशेष प्रबंध भी किया गया है, जिसने आयोजन को आध्यात्मिक स्पर्श दिया। शुगर फ्री हनी, पारंपरिक औषधियां और झाबुआ का प्रसिद्ध ‘गुड़ियाघर’ स्टॉल दर्शकों को खूब आकर्षित कर रहा है। हाथ से बने गुड्डे-गुड़िया और पारंपरिक तीर-कमान बच्चों के बीच खास लोकप्रिय रहे।

आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी

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होमवीडियोक्राइम आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी X आधी रात, सुनसान सड़क और 3 लुटेरे; परिवार को बचाने तलवार लेकर सड़क पर निकल गई लुधियाना की सिखनी   लुधियाना में ऑस्ट्रेलिया निवासी NRI हरजिंद कौर ने अदम्य साहस दिखाते हुए बदमाशों के लूट के मंसूबों को नाकाम कर दिया. ब्रिसबेन में एंकरिंग करने वाली हरजिंद अपनी सास और चाची के साथ कार से जा रही थीं. इसी दौरान बदमाशों ने कार के शीशे पर अंडे फेंककर उन्हें रोकने की साजिश रची. खतरे को भांपते हुए हरजिंद ने डरने के बजाय कार में रखी तलवार निकाल ली. उन्होंने रौद्र रूप अपनाकर लुटेरों को खुलेआम ललकारा, जिसे देख हमलावर डरकर भाग खड़े हुए. हरजिंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम परिवार की सुरक्षा के लिए उठाया. उन्होंने युवतियों को आत्मरक्षा के लिए ‘गतका’ सीखने और शस्त्र साथ रखने की नसीहत दी है ताकि वे सुरक्षित रह सकें.लुधियाना में ऑस्ट्रेलिया निवासी NRI हरजिंद कौर ने अदम्य साहस दिखाते हुए बदमाशों के लूट के मंसूबों को नाकाम कर दिया. ब्रिसबेन में एंकरिंग करने वाली हरजिंद अपनी सास और चाची के साथ कार से जा रही थीं. इसी दौरान बदमाशों ने कार के शीशे पर अंडे फेंककर उन्हें रोकने की साजिश रची. खतरे को भांपते हुए हरजिंद ने डरने के बजाय कार में रखी तलवार निकाल ली. उन्होंने रौद्र रूप अपनाकर लुटेरों को खुलेआम ललकारा, जिसे देख हमलावर डरकर भाग खड़े हुए. हरजिंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम परिवार की सुरक्षा के लिए उठाया. उन्होंने युवतियों को आत्मरक्षा के लिए ‘गतका’ सीखने और शस्त्र साथ रखने की नसीहत दी है ताकि वे सुरक्षित रह सकें.

High Protein Diet Risks | Women Health Tips | स्वास्थ्य पर हाई प्रोटीन का असर क्या होता है | फिटनेस ट्रेंड का साइड इफेक्ट |

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Last Updated:February 21, 2026, 21:08 IST Protein Side Effects: सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट बॉडी की चाहत कहीं आपकी सेहत की दुश्मन न बन जाए. दरअसल, महिलाओं में इन दिनों बिना डॉक्टरी सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट और सप्लीमेंट लेने का एक ऐसा ट्रेंड बढ़ा है, जिसने चिंता बढ़ा दी है. आखिर वो कौन सी गलती है जो फिटनेस के नाम पर आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर भारी पड़ रही है? प्रोटीन की वह कौन सी सीमा है, जिसे पार करते ही शरीर के अंदर समस्याएं शुरू हो जाती है? जो उन महिलाओं के लिए एक चेतावनी है जो इंटरनेट इन्फ्लुएंसर्स की बातों को बिना सोचे-समझे सच मान बैठी हैं. कन्नौज: सोशल मीडिया पर इन दिनों वजन घटाने और फिट दिखने की होड़ मची हुई है, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट भी छिपा है. इंटरनेट पर मौजूद फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स की बातों में आकर कई महिलाएं बिना किसी डॉक्टरी सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट और महंगे सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रही हैं. कन्नौज जिला अस्पताल के विशेषज्ञों ने इस बढ़ते ट्रेंड पर गहरी चिंता जताई है और महिलाओं को आगाह किया है कि बिना विशेषज्ञ की देखरेख के पोषक तत्वों का असंतुलन शरीर को स्थाई नुकसान पहुंचा सकता है. जरूरत से ज्यादा प्रोटीन बन सकता है शरीर पर बोझप्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक जरूरी तत्व है, लेकिन इसकी अति सेहत के लिए घातक साबित हो सकती है. जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु के अनुसार, जब महिलाएं शरीर की वास्तविक जरूरत को समझे बिना केवल प्रोटीन पर निर्भर हो जाती हैं, तो इसका सीधा असर उनके पाचन तंत्र पर पड़ता है. आवश्यकता से अधिक प्रोटीन का सेवन मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है जिससे गैस, पेट फूलने और कब्ज जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. इसके अलावा, यह स्थिति शरीर के भीतर के महत्वपूर्ण अंगों पर अतिरिक्त दबाव डालती है जिससे लंबे समय में अन्य जटिल बीमारियां जन्म ले सकती हैं. प्रोटीन की मात्रा तय करना बहुत जरूरी हैहर महिला के शरीर की बनावट और उसकी जीवनशैली अलग होती है, इसलिए प्रोटीन की मात्रा भी सबके लिए एक समान नहीं हो सकती. विशेषज्ञों का कहना है कि एक सामान्य महिला को उसके प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 1.75 से 1.80 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है. जो महिलाएं जिम में भारी कसरत करती हैं, उनके लिए यह मात्रा थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन गर्भावस्था या मेनोपॉज जैसी विशेष स्थितियों में यह पूरी तरह डॉक्टर के परामर्श पर निर्भर होना चाहिए. बिना सोचे-समझे किसी भी डाइट चार्ट को फॉलो करना न केवल बेअसर रहता है बल्कि हार्मोनल असंतुलन का कारण भी बन सकता है. पाउडर के बजाय प्राकृतिक स्रोतों पर दें ध्यानडॉ. शक्ति बसु ने महिलाओं को सलाह दी है कि उन्हें बाजाBAर में बिकने वाले डिब्बाबंद प्रोटीन पाउडर के बजाय रसोई में मौजूद प्राकृतिक खाद्य पदार्थों पर भरोसा करना चाहिए. दालें, पनीर, मछली, अंडा, सोयाबीन, दही और नट्स प्रोटीन के सबसे सुरक्षित स्रोत हैं जो शरीर को अन्य जरूरी विटामिन भी प्रदान करते हैं. केवल प्रोटीन बढ़ाने से ही वजन कम नहीं होता है, बल्कि इसके लिए सही मात्रा में पानी पीना, पर्याप्त नींद लेना और नियमित शारीरिक व्यायाम करना भी उतना ही आवश्यक है. सेहत से जुड़े इन खतरों को पहचानना है जरूरीहाई-प्रोटीन डाइट के दौरान शरीर अक्सर कुछ चेतावनी भरे संकेत देता है जिन्हें महिलाएं अक्सर अनदेखा कर देती हैं. यदि डाइट बदलने के बाद आपको लगातार सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन या डिहाइड्रेशन महसूस हो रहा है, तो यह समझ लेना चाहिए कि शरीर इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहा है. विशेषज्ञों ने अपील की है कि महिलाओं को सोशल मीडिया के शॉर्टकट तरीकों के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुभव को प्राथमिकता देनी चाहिए. फिट रहने की चाहत में अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करना किसी भी नजरिए से सही नहीं है और किसी भी बड़े बदलाव से पहले एक्सपर्ट की राय लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Kannauj,Uttar Pradesh First Published : February 21, 2026, 21:08 IST

नरसिंहपुर हाईवे चौराहे पर मुक्तिधाम नहीं:अंतिम संस्कार के लिए 2 किमी दूर लोलरी जाना पड़ता, लोग बोले- कई बार शिकायत की

नरसिंहपुर हाईवे चौराहे पर मुक्तिधाम नहीं:अंतिम संस्कार के लिए 2 किमी दूर लोलरी जाना पड़ता, लोग बोले- कई बार शिकायत की

नरसिंहपुर जिले में नेशनल हाईवे 44 और 45 को जोड़ने वाले चौराहे के पास रहने वाले लोगों को मुक्तिधाम नहीं होने से समस्या का सामना करना पड़ रहा है। करीब 500 की आबादी वाले इस इलाके में आज तक मुक्तिधाम (श्मशान घाट) की सुविधा नहीं मिल पाई है। मुक्तिधाम न होने की वजह से यहां के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए अपने गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत लोलरी जाना पड़ता है। दूरी ज्यादा होने के कारण परिजनों को शव यात्रा निकालने में काफी दिक्कत आती है। कई बार तो मजबूरी में शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर ले जाना पड़ता है। स्थानीय निवासी विमलेश पटेल का कहना है कि दुख की घड़ी में इस सुविधा का न होना लोगों की परेशानी और बढ़ा देता है। सरकारी जमीन की कमी बनी बाधा इस समस्या को लेकर जब ग्राम पंचायत लोलरी की सचिव उमा श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने एक बड़ी तकनीकी दिक्कत बताई। उनके अनुसार, राजमार्ग क्षेत्र में सरकार के पास अपनी कोई जमीन खाली नहीं है। वहां जितनी भी जमीन है, वह निजी (प्राइवेट) है और उसकी कीमत बहुत ज्यादा है। पंचायत के पास इतना बजट नहीं है कि वह इतनी महंगी जमीन खरीद सके, यही वजह है कि मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने की प्रशासन से मांग स्थानीय लोग कई बार इस मामले में गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का कोई रास्ता निकाला जाए और क्षेत्र में जल्द से जल्द मुक्तिधाम बनवाया जाए ताकि लोगों को भटकना न पड़े।

मीनाक्षी शेषाद्री बोलीं- शास्त्रीय नृत्य गांव तक ले जाऊंगी:30 साल बाद खरगोन में दूसरी पारी का ऐलान; कहा- भविष्य को लेकर बहुत उत्सुक

मीनाक्षी शेषाद्री बोलीं- शास्त्रीय नृत्य गांव तक ले जाऊंगी:30 साल बाद खरगोन में दूसरी पारी का ऐलान; कहा- भविष्य को लेकर बहुत उत्सुक

फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री शनिवार शाम 5:30 बजे खरगोन पहुंची। वे नवग्रह मेले के समापन पर शास्त्रीय शास्त्री नृत्य प्रस्तुति में शामिल हो रही हैं। खरगोन पहुंचने पर 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री मीनाक्षी ने कहा कि वह बॉलीवुड में 30 साल के ब्रेक के बाद अपनी दूसरी पारी के लिए तैयार हैं। भरतनाट्यम थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन इस विशेष तरीके से किया जाए तो गांव तक के लोग आसानी से समझ सकते हैं। वे लेवल 1 व लेवल 2 सिटी से लेकर हिंदुस्तान के गांव तक शास्त्रीय संगीत को पहुंचाना चाहती है। खरगोन से इसकी शुरुआत कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसे परिवार में जन्मी जहां संगीत, नृत्य, अभिनय, शास्त्रीय ज्ञान व संस्कृत प्रचलित रहा। उसे वजह से मैं चलने से पहले नृत्य करना सीख लिया। मेरी मां ही मेरी गुरु थी भरतनाट्यम शैली में। शादी कर USA चली गईं थी पूर्व मिस इंडिया मीनाक्षी ने बताया दिल्ली में जब स्कूल की 12वीं कक्षा में थी तब मजाक में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले लिया था आश्चर्य की बात थी कि मिस इंडिया भी चुन ली गई। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। फौरन कई फिल्म भी ऑफर हो गई। मेरे पापा अंग्रेजी में समझाते थे सक्सेस इस एपीसी। ए मतलब एबिलिटी यानी योग्यता। बी यानी ब्रेक। यानी अपॉर्चुनिटी का सही दरवाजे से दस्तक देना। सी मतलब करेज यानी आत्म शक्ति, आत्मविश्वास व बड़ी शक्ति में विश्वास। मेरे सफर में यह तीन बातें सम्मिलित थी। 80-90 के दशक में 80 से 90 फिल्में की थी जिसमें हिंदी भाषा के अलावा तमिल तेलुगू की फिल्में भी शामिल हैं। उसके बाद शादी कर USA चली गई। 30 साल के गैप के बाद मैं भविष्य को लेकर उत्सुक हूं। दामिनी एक फिल्म है और मैंने उसमें दामिनी का पात्र किया। फिल्म में जो बताया गया आज भी हिंदुस्तान में वह हावी है। इसका दमन जरूरी है। महिलाओं को साहस दिखाने की आवश्यकता है और यह भारत है जहां शक्ति रूप से संसार रचा गया। शक्ति रूप से ही ठीक किया जा सकता है। मुझे अश्लीलता पसंद नहीं है। मैं वैसे ही पत्र निभाउं जो परिवार के साथ देख सकूं। शॉर्टकट से सक्सेस पर उन्होंने कहा, आज घोर कलयुग है। लक्ष्मी को शॉर्टकट से पा सकते हैं लेकिन सत्य की राह ही सही लक्ष्मी है। परिवर्तन का दौर है। सोशल मीडिया की वजह से बड़े भी फिल्में भी नहीं चल रही है।

एनेस्थेसिया ओवरडोज से 17 साल के लड़के की हुई मौत:दो डॉक्टरों पर गैरइरादतन हत्या के आरोप तय; सबूतों के आधार पर चलेगा ट्रायल

एनेस्थेसिया ओवरडोज से 17 साल के लड़के की हुई मौत:दो डॉक्टरों पर गैरइरादतन हत्या के आरोप तय; सबूतों के आधार पर चलेगा ट्रायल

इंदौर में सर्जरी के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही से 17 साल के किशोर अमित सेन की मौत के मामले में कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। जिला कोर्ट ने दो डॉक्टरों डॉ. कुश बंडी और डॉ. खुशबू चौहान के खिलाफ भादंवि की धारा 304 (भाग-2)/34 के तहत आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने दोनों आरोपियों द्वारा आरोपों से मुक्त करने के लिए दायर आवेदन पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, खारिज कर दिए। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से ट्रायल के लिए समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 मार्च तय की है। अब दोनों आरोपियों के खिलाफ नियमित ट्रायल चलेगा। यह है मामला पुलिस जांच के अनुसार, एनेस्थेसिया की ओवरडोज दिए जाने और अन्य चिकित्सकीय लापरवाहियों के कारण अमित सेन की मौत हो गई। दरअसल सड़क हादसे में घायल अमित को 29 मई 2023 को लसूडिया थाना क्षेत्र से राजश्री नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उसके बाएं पैर की सर्जरी होनी थी, इसी दौरान बेहोशी के इंजेक्शन के बाद उसकी हालत बिगड़ी और मृत्यु हो गई। मामले में पहले अस्पताल संचालक डॉ. देवेंद्र भार्गव, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कुश बंडी और एनेस्थेटिस्ट डॉ. खुशबू चौहान के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया था। हालांकि 24 फरवरी 2024 को डॉ. भार्गव के निधन के बाद उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी गई। शेष दो डॉक्टरों के खिलाफ चालान पहले ही पेश हो चुका है और अब ट्रायल आगे बढ़ेगा। जांच में सामने आई गंभीर खामियां घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर नर्सिंग होम की जांच कराई गई थी, जिसमें कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। इसके बाद नर्सिंग होम को सील भी किया गया। मृतक अमित अपने पिता रिंकू सेन का इकलौता पुत्र था।

झाबुआ में कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ:मंत्री निर्मला भूरिया ने जैविक खेती पर जोर दिया

झाबुआ में कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ:मंत्री निर्मला भूरिया ने जैविक खेती पर जोर दिया

झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र प्रक्षेत्र में शनिवार को दो दिवसीय जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ हुआ। इसका उद्देश्य कृषक कल्याण वर्ष के संकल्प को साकार करना है। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया मुख्य अतिथि थीं, जबकि कलेक्टर नेहा मीना ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मेले का फोकस कृषि, उद्यानिकी तकनीक विस्तारण और तिलहन मिशन पर है, जिसका लक्ष्य किसानों को आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और उन्नत विपणन प्रणालियों से जोड़ना है। अपने संबोधन में मंत्री निर्मला भूरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण के लिए समर्पित किया गया है। मंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य और भूमि पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया। उन्होंने कृषि सखियों और उपस्थित जनसमूह से मिश्रित खेती व जैविक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। कलेक्टर नेहा मीना ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता केवल मेले का आयोजन नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के किसान तक पहुंचाना है। उन्होंने जिले की जैविक खेती के क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र किया। मीना ने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में तकनीकी प्रशिक्षण दें, ताकि ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम के दौरान ग्राम खेड़ी के विमल भाभोर को बायो रिसोर्स सेंटर के लिए सहायता प्रदान की गई। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और फसल बीमा योजना के तहत कई हितग्राहियों को ड्रिप सिस्टम और बीमा पॉलिसी वितरित की गईं। उद्यानिकी और पशुपालन विभाग द्वारा भी ट्रैक्टर, सब्जी खेती और बकरी पालन के लिए लाखों रुपए की सहायता राशि के चेक प्रदान किए गए। मेले में लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों ने सूक्ष्म सिंचाई, नरवाई प्रबंधन और आधुनिक कृषि यंत्रों की बारीकियों को समझा। कार्यक्रम के समापन पर मंत्री भूरिया ने उपस्थित जनसमूह को नशामुक्ति की शपथ दिलाई। उन्होंने एक प्रश्नोत्तरी के माध्यम से कृषि सखी गंगा मेडा को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। मेले की अन्य तस्वीरें…

सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें:उनकी चिंता करें, जिसके खिलाफ उनका बल्ला चलेगा; वर्ल्डकप के तीनों मैच में 0 पर आउट हुए

सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें:उनकी चिंता करें, जिसके खिलाफ उनका बल्ला चलेगा; वर्ल्डकप के तीनों मैच में 0 पर आउट हुए

टी-20 वर्ल्ड कप के तीन मैचों में बिना खाता खोले आउट हुए टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा के सपोर्ट में कप्तान सूर्यकुमार यादव का बयान आया है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूर्या बोले, अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय नहीं है। मुझे चिंता उन लोगों की है, जो अभिषेक की चिंता कर रहे हैं। मुझे फिक्र उन टीमों की है, जिनके खिलाफ अभिषेक का बल्ला चलेगा। उसने पिछले साल टीम के लिए सब कुछ किया था, अब हमारी बारी है कि हम उसका साथ दें। भारत का मुकाबला रविवार को सुपर-8 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद में खेला जाएगा। अब तक खाता भी नहीं खेल सके टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा का मौजूदा फॉर्म चिंता का विषय बना हुआ है। वे लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट हुए हैं। इस वर्ल्ड कप में उन्होंने अब तक तीन मुकाबले खेले हैं, लेकिन उनका खाता भी नहीं खुल पाया है। प्लेइंग-11 में बदलाव पर हंस पड़े जब प्लेइंग इलेवन में बदलाव और संजू सैमसन को शामिल करने पर सवाल पूछा गया तो सूर्यकुमार हंस पड़े। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि क्या अभी अभिषेक को हटा दूं? या तिलक को? पिच और परिस्थितियों पर भरोसा पिच को लेकर सूर्यकुमार ने कहा कि टीम हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार है। उन्होंने माना कि विकेट ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं थे, लेकिन टीम ने हालात के मुताबिक खुद को ढालने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा, बल्लेबाजी में परिस्थिति का सम्मान करना जरूरी है। हमारे पास पर्याप्त कौशल है। कभी-कभी स्थिति के अनुसार खेलना पड़ता है। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो मैच का रुख बदल सकते हैं। ——————————- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ———————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी सामने आई है। भारतीय टॉप ऑर्डर के पहले आठ बल्लेबाजों में से छह बाएं हाथ के हैं। टीमें इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…