बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर वीकेंड पर मसूरी में घूमते दिखे:लोगों के साथ फोटो खिंचवाई; बेटी का समर कैंप में एडमिशन कराने आए

मसूरी में वीकेंड पर बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर नजर आए। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। शाहिद कपूर अपनी बेटी का दाखिला कराने के लिए वुडस्टॉक स्कूल पहुंचे थे। वुडस्टॉक स्कूल में इस साल का दूसरा समर प्रोग्राम चल रहा है। इसमें देश-विदेश के 151 बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। करीब 12 दिन तक चलने वाले कार्यक्रम में बच्चों के लिए शैक्षणिक, रचनात्मक, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। स्कूल परिसर पहुंचने पर शाहिद कपूर ने मुख्य विद्यालय भवन का भ्रमण किया। उन्होंने कैफेटेरिया, छात्रावास समेत अन्य व्यवस्थाओं को भी देखा। इस दौरान उन्होंने मसूरी और स्कूल परिसर की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया।
यात्रा बैग में अवश्य होना चाहिए: यात्रा पर जा रहे हैं? अपने स्टोर बैग में जरूर रखें ये 6 चीजें; कई बेकार से पुराने काम

माउंटेन ट्रिप ट्रैवल बैग अनिवार्य: माउंट की यात्रा का नाम बताया ही मन खुश हो जाता है। शहर की गर्मी और शोर-शराबे से दूर पहाड़ों पर जाना हर को पसंद होता है। लेकिन, पहाड़ों के मौसम में जितनी जल्दी बदलाव हो रहा है, उतनी ही जल्दी वहां की कमी की भी जरूरत महसूस हो सकती है। अगर आप भी जल्द ही किसी हिल स्टेशन या ट्रैकिंग पर जाने का प्लान बनवा रहे हैं तो सिर्फ कपड़े भरना ही काफी नहीं है। आपका स्मार्ट स्मार्ट फोन चाहिए। तो जानें वो 6 चीजें जो आपके ट्रेवल बैग में जरूर होनी चाहिए, जो मुश्किल समय में आपके बहुत काम की हैं। मल्टी-परपज जैकेट पहाड़ों पर धूप कब रियोलैण्ड में छिपला जाए और कब तेज हवाएं चलती रहें, इसका कोई भरोसा नहीं है। भारी भरकम नामित या जैकेट बैग में बहुत जगह घेरते हैं। इसकी जगह एक अच्छी क्वालिटी का भव्य विंडचाटर या मल्टी-परपज जैकेट स्थान है। यह आपको अचानक होने वाली बारिश वाली से भी बचाएगी और नावों से भी मिलेगी। आप इसे आसानी से बनाकर अपने छोटे-छोटे सलमानों में भी रख सकते हैं। पावर बैंक पहाड़ों के खूबसूरत नजारों की फोटो खींचते-खींचते फोन की बैटरी कब खत्म हो गई, पता ही नहीं। शीत तापमान में प्रौद्योगिकी की बैटरी सामान्य से अधिक तेजी से समाप्त होती है। पहाड़ों पर हर जगह विचित्र बिंदु ढूँढना भी मुश्किल होता है। एक 10000mAh या 20000mAh का पावर बैंक आपको इलेक्ट्रानिक फोन ऑन रखेगा, एमएपीएस देखने और डिवाइस से जुड़े रहने में मदद करेगा। प्रथम एड किट फिल्म पर चित्र बनाते समय छोटी-मोटी चोट लगाना या फिल्मांकन पर उल्टी आना बहुत आम बात है। यूरोपियन यूनियन में मेडिकल स्टोर आसानी से नहीं मिलेंगे। अपनी किट में बैंड-एड, पेनकिलर, बुखार और दूरबीन की दवा, उल्टी रोकथाम की दवा, एक एंटीसेप्टिक क्रीम और पेट दर्द की दवा जरूर रखें। यह किट आपके साथ-साथ आपके को-ट्रैवलर्स की जान भी बचा सकती है। पानी की बोतल या थर्मस पहाड़ों पर खुद को सीलबंद रखना बहुत जरूरी है, लेकिन वहां बार-बार ठंडा पानी पीने से नुकसान हो सकता है। बाहर से प्लास्टिक की पानी की बोतलें खरीदने से सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि प्लास्टिक से बने पानी की बोतलें भी होती हैं। एक अच्छा थर्मस स्टोर से आप अपने होटल या ढाबे में गर्म पानी भर सकते हैं। ठंड के मौसम में थोड़ा-थोड़ा गर्म पानी रहने से शरीर का तापमान भी सही रहता है और ऊर्जा भी बनी रहती है। मजबूत और आरामदायक कमरे पर्वतारोहण की यात्रा का असली मजा तब होता है जब आप वहां पैदल चलते हैं और वहां की सुंदरता का पता लगाते हैं। पहाड़ों के रास्ते आबाद-खाबड़ और फुलान शामिल हो सकते हैं। मित्रवत स्नीकर्स या हिल्स यहां बिल्कुल काम नहीं आते। एक अच्छी पकड़ वाले ट्रैकिंग शूज या स्पोर्ट्स शूज यात्रियों को मोच से बचाएंगे और आप बिना थके लंबी दूरी तय कर जाएंगे। फैब्रिकस्केयर और हाईजीन की वस्तुएं माउंट की अविश्वसनीय और रूखी हवा आपकी त्वचा को बहुत जल्दी नुकसान पहुंचा सकती है। विचारधारा पर सूरज की किरणें सबसे ज्यादा तेजी से चल रही हैं, जिससे टैनिंग और सनबर्न का खतरा बढ़ रहा है। एक छोटी सी क्लिप में सनस्क्रीन, अच्छा एक लिप बाम, वेट वाइप्स, और मॉइश्चराइजर जरूर रखें। वेट वाइप्स तब बहुत काम आते हैं जब ठंडे पानी से मुंह धोने की बदबू न हो रही हो। खण्डों पर जाकर अपना सामान पतले हो सकते हैं और कोशिश करें कि वहां कोई भी प्लास्टिक का कूड़ा न छोड़ें। अपने बैग में 6 नी को शामिल करें और बेफ़िक्र बैग में अपने पहाड़ों की यात्रा का मज़ा लें। यह अवश्य पढ़ें: बजट फ्रेंडली कपल ट्रिप: कम बजट में यादगार बनाना चाहते हैं हनीमून? भारत के इन स्थानों को जानें; कपल्स के लिए बिल्कुल सही जगह है (टैग्सटूट्रांसलेट)ट्रेवल बैग आइटम्स(टी)ट्रैवल बैग में यह होना चाहिए(टी)हिल स्टेशन यात्रा के लिए आवश्यक चीजें(टी)पर्वत यात्रा(टी)माउंटेन ट्रिप ट्रैवल बैग(टी)माउंटेन ट्रिप ट्रैवल बैग अनिवार्यताएं
PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में रविवार को जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। संगठन का आरोप है कि डुडियाल के AMB इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना उकसावे के गोलीबारी की, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, घायलों की आधिकारिक संख्या या पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। JAAC का कहना है कि यह प्रदर्शन इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ है। साथ ही, यह आंदोलन JAAC के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, प्रशासनिक विफलताओं और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा है। संगठन ने गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है। कई इलाकों से पहुंचे लोग, विदेश में भी प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, डेरा इस्माइल खान में चल रहे धरना स्थल पर भी कई अलग-अलग इलाकों से लोगों के काफिले लगातार पहुंचते रहे। प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी बताई गई। JAAC ने कहा कि रावलाकोट और चक की महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारी प्रशासन के दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे। वहीं, JAAC की अपील पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। JAAC का कहना है कि शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद पूरे PoJK में तनाव बढ़ गया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर ‘रीलिज शौकत मीर’ अभियान चलाया, जिसके तहत लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ‘लॉन्ग लिव कश्मीर’ और ‘लॉन्ग लिव द पीपल’ जैसे नारे लगाए गए। खबर लागातर अपडेट हो रही है…
नई बायोपिक:15 साल बाद बड़े परदे पर लौटेंगी सेलिना, निभाएंगी ‘सिस्टर निवेदिता’ का किरदार

सेलीना जेटली करीब 15 साल बाद बड़े परदे पर वापसी करने जा रही हैं। वह निर्देशक राम कमल मुखर्जी की अगली बायोपिक में सिस्टर निवेदिता (मार्गरेट नोबल) का किरदार निभाएंगी। अपने एक इंटरव्यू में सेलिना ने कहा कि यह फिल्म उनके करियर के सबसे खास अनुभवों में से एक है। उन्होंने बताया कि राम कमल मुखर्जी के साथ काम करना उनके लिए अलग अनुभव रहा और इस किरदार को निभाना उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी जैसा है। सेलिना कहती है…‘सिस्टर निवेदिता मुझे सबसे ज्यादा इसलिए प्रभावित करती हैं, क्योंकि उनका जन्म भारत में नहीं हुआ था, फिर भी उन्होंने अपना जीवन भारत, इसकी संस्कृति, आध्यात्मिक विचारधारा और लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया।’ कौन हैं सिस्टर निवेदिता सिस्टर निवेदिता स्वामी विवेकानंद की आयरिश शिष्या थीं, जिन्होंने अपना जीवन भारत की शिक्षा, समाजसेवा और राष्ट्रजागरण को समर्पित कर दिया। महिला शिक्षा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को आज भी प्रेरणास्रोत माना जाता है।
सवाल पूछना अधिकार, पर मकसद सच की तलाश होना चाहिए:इंसान की बड़ी क्षमता उसका दिमाग और दिमाग का सबसे असरदार औजार- एक अच्छा सवाल

भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत हमेशा यह रही है कि उसने सवाल पूछने से कभी डरना नहीं सीखा। उपनिषदों में शिष्य गुरु से बेझिझक प्रश्न करता है। बुद्ध सदियों से चली आ रही मान्यताओं को चुनौती देते हैं। चार्वाक ईश्वर और वेदों तक पर सवाल उठाते हैं। कबीर धर्म और समाज में फैले पाखंड पर खुलकर चोट करते हैं। भारतीय दर्शन की लगभग हर परंपरा का आधार संवाद, तर्क और वाद-विवाद की समृद्ध परंपरा रही है। इंसान की सबसे बड़ी कुव्वत उसका दिमाग है और दिमाग का सबसे असरदार औजार है- एक अच्छा सवाल। इंसान और बाकी तमाम जीव-जंतुओं के बीच सबसे बड़ा फर्क सिर्फ यह नहीं है कि इंसान दो पैरों पर चलता है, औजार बनाता है या आसमान छूती इमारतें खड़ी कर लेता है। असली फर्क यह है कि इंसान सवाल पूछता है। वह सिर्फ यह नहीं देखता कि सूरज हर सुबह निकलता है; वह जानना चाहता है कि सूरज उगता हुआ दिखाई क्यों देता है। वह किसी बात को महज इसलिए सच नहीं मान लेता कि सब उसे सच मानते हैं; वह पूछता है आखिर यह सच क्यों है, और यही जिज्ञासा, यही सवाल करने की बेचैनी इंसान को इंसान बनाती है। किसी छोटे बच्चे को देखिए। दुनिया में आने के कुछ ही सालों में वह सवालों की चलती-फिरती मशीन बन जाता है। यह क्या है? वह कौन है? ऐसा क्यों है? वैसा क्यों नहीं है? अगर हम गौर से देखें, तो समझ आएगा कि जिज्ञासा इंसान की सबसे स्वाभाविक फितरत है। इतिहास गवाह है कि जिस समाज ने सवालों को दबाया, वह ठहर गया; और जिसने सवालों का इस्तकबाल किया, वह आगे बढ़ता गया। जरा सोचिए, विज्ञान की पूरी इमारत किस बुनियाद पर खड़ी है? किसी दिन न्यूटन के दिमाग में यह सवाल कौंधा कि पेड़ से गिरता हुआ सेब हमेशा नीचे ही क्यों आता है, ऊपर क्यों नहीं चला जाता। अगर कुछ सवाल कभी न पूछे गए होते तो शायद हम आज भी अंधविश्वासों और गलत धारणाओं के जंगल में भटक रहे होते। विज्ञान जवाबों नहीं, सवालों से जन्म लेता है। सवाल सिर्फ विज्ञान के दायरे तक ही नहीं रहते हैं। अदब, फन और फलसफा भी सवालों की कोख से ही जन्म लेते हैं। एक शायर जब पूछता है कि इंसान दु:खी क्यों है, मोहब्बत क्या है, तन्हाई क्यों है, इंसाफ किसे कहते हैं, तब शायरी पैदा होती है। एक लेखक जब अपने समाज से सवाल करता है, एक फिल्मकार जब अपने दौर की उलझनों, नाइंसाफियों और विसंगतियों पर उंगली रखता है, तब मायने रखने वाला सिनेमा बनता है। कला का काम तैयार जवाब बांटना नहीं, ऐसे सवाल पैदा करना है जो हमें अपने बारे में कुछ नया सोचने पर मजबूर कर दें। मुझे तब फिक्र होती है, जब लोग किसी फिल्म, किताब या खयाल से असहमत होने के बजाय उसे चुप करा देना चाहते हैं। किसी सवाल को सिर्फ इसलिए दबा देना कि वह असुविधाजनक है, किसी आत्मविश्वास से भरे समाज की निशानी नहीं हो सकती। अगर कोई बच्चा पूछ ले कि यह नियम क्यों है, तो उसे चुप करा दिया जाता है। अगर कोई नौजवान जानना चाहे कि यह परंपरा किस बुनियाद पर बनी है, तो उससे कहा जाता है, बहुत सवाल मत करो। अगर कोई नागरिक सरकार से पूछ ले कि यह फैसला क्यों लिया गया, तो उसे विरोधी मान लिया जाता है। जबकि सच यह है कि सवाल पूछना विरोध नहीं, बल्कि समाज में अपनी हिस्सेदारी निभाने का तरीका है। जो शख्स सवाल पूछ रहा है, वह बता रहा है कि उसे समाज की फिक्र है। धर्म और आस्था के मामले में भी यही बात लागू होती है। आस्था का सम्मान करने का यह हरगिज मतलब नहीं कि इंसान अपनी सोचने-समझने की ताकत पर ताला लगा दे। पर सवाल पूछना और हर बात का विरोध करना एक ही चीज नहीं हैं। कुछ लोग समझते हैं हर बात में नुक्स निकालना ही अक्लमंदी की निशानी है। ऐसा नहीं है। सवाल पूछने का मकसद सच तक पहुंचना होना चाहिए। अगर आपका इरादा सामने वाले को नीचा दिखाना भर है, तो वह जिज्ञासा नहीं, अहंकार है, लेकिन अगर आपकी कोशिश समझने की है, सीखने की है, सच के थोड़ा और करीब जाने की है, तो आपका सवाल पूछना एक रचनात्मक सरोकार बन जाता है। बौद्धिक ईमानदारी की पहली शर्त यही है कि इंसान जो सवाल दूसरों से पूछता है, उसे अपने आप से भी पूछे। हम अक्सर दूसरों के खयालों को कसौटी पर कसते हैं, लेकिन अपने यकीनों की जांच नहीं करते। हमें खुद से भी यह पूछने का हौसला होना चाहिए कि मैं जो मानता हूं, उसे मानने की बुनियाद क्या है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मैंने कोई राय सिर्फ इसलिए अपना ली क्योंकि मेरे आसपास के ज्यादातर लोग उसे सही मानते हैं? अपने ही विश्वासों से सवाल करना आसान नहीं होता, लेकिन यही मानसिक परिपक्वता की सबसे बड़ी निशानी है। आज के दौर में, जब जानकारी पहले से कहीं ज्यादा और कहीं तेजी से हमारे सामने आती है, तब सवाल पूछने की जरूरत और भी बढ़ जाती है। इंटरनेट पर हर रोज लाखों दावे किए जाते हैं। हर विचार के हक में भी दलीलें मिल जाती हैं और उसके खिलाफ भी। ऐसे में आंख मूंदकर किसी बात को सच मान लेना खतरनाक हो सकता है। हमें पूछना होगा- इसका स्रोत क्या है? इसका सबूत क्या है? इसकी दलील क्या है? यही आलोचनात्मक सोच हमें भ्रम, अफवाह और प्रचार के जाल से बचाती है।सवाल पूछना सिर्फ हमारा अधिकार नहीं, हमारी जिम्मेदारी भी है। जो समाज सवाल पूछना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे सोचने की अपनी ताकत खो देता है, और जो इंसान सवाल पूछना छोड़ देता है, वह सीखना भी छोड़ देता है। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)
'नमो नारायण' कहकर अली गोनी ने ट्रोलर्स को जवाब दिया:एल्विश यादव के घी ब्रांड का नाम न लेने पर हुई ट्रोलिंग को बताया फनी

एक्टर अली गोनी ने सोशल मीडिया पर उन लोगों को जवाब दिया है, जिन्होंने एल्विश यादव के घी ब्रांड का नाम न लेने पर उन्हें ट्रोल किया था। हाल ही में अली ने एक वीडियो में घी की तारीफ की थी, लेकिन ब्रांड का नाम नहीं लिया। इसके बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर सवाल उठाए और इसे धर्म से जोड़कर रिएक्शन दिया। अली गोनी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो शेयर कर इस मामले पर अपनी सफाई दी। वीडियो में उन्होंने एल्विश यादव के घी ब्रांड का नाम भी लिया और कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि ब्रांड का नाम न लेने को लेकर विवाद खड़ा हो जाएगा। अली ने कहा, “नमो नारायण। नमो नारायण। आप लोगों को कुछ नया नहीं मिला बात बनाने का, तो आप लोगों ने ये बना दिया। मैं तो बस घी की तारीफ कर रहा था। मैंने तो इतना सोचा भी नहीं था कि आप लोग नाम को लेकर इतना बड़ा… दिस इज सो फनी। उन्होंने आगे कहा, “मैं कभी इन चीजों पर इतना ध्यान नहीं देता, बट ये बहुत फनी था। मतलब इतनी घटिया बात आप लोग करेंगे, लेकिन नमो नारायण। और मुझे कोई भी नाम लेने से कोई प्रॉब्लम नहीं है। मेरे लिए सब बराबर है। कुछ नया ढूंढो यार, कुछ नया ढूंढो भाई।” अली गोनी पहले भी हुए थे ट्रोल गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब अली गोनी इस तरह के विवाद में आए हैं। इससे पहले वह मुंबई में गर्लफ्रेंड जैस्मिन भसीन के साथ गणपति पूजा में शामिल हुए थे। उस दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे को लेकर भी उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा था। बाद में फिल्मीझान को दिए एक पॉडकास्ट में अली ने कहा था कि वह पहली बार गणपति उत्सव में शामिल हुए थे। उन्हें कभी नहीं लगा था कि एक छोटी-सी बात इतना बड़ा विवाद बन जाएगी। उन्होंने कहा था, “मेरे धर्म में इसकी इजाजत नहीं है। हम पूजा नहीं करते हैं। हमारा एक ही बिलीवर है। हम नमाज पढ़ते हैं, हम प्रार्थना करते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि वो हर धर्म का सम्मान करते हैं। अली गोनी ने यह भी बताया था कि वायरल वीडियो में जैस्मिन भसीन उनके मुंह को इसलिए पकड़ रही थीं, क्योंकि पीछे लोग जयकारा लगा रहे थे और किसी ने कहा था, “गणपति सबसे क्यूट हैं।” इसके बाद जैस्मिन ने प्यार से अली की तरफ इशारा करते हुए कहा, “ये भी क्यूट है।” अली का कहना था कि इस वीडियो का गलत मतलब निकाला गया और ऐसा दिखाया गया, जैसे जैस्मिन उन्हें “गणपति बप्पा मोरया” बोलने के लिए कह रही थीं।
वर्ल्ड अपडेट्स:लिथुआनिया में परमाणु हथियारों पर लगी संवैधानिक रोक हटाने की तैयारी, संसद में प्रस्ताव पेश

रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच लिथुआनिया ने अपने संविधान से परमाणु हथियारों की तैनाती पर लगी रोक हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 141 सदस्यीय संसद (सीमास) के 51 सांसदों ने संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इस पहल को राष्ट्रपति गितानास नौसेदा का समर्थन प्राप्त है। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद-137 को हटाने की बात कही गई है। यह अनुच्छेद देश में सामूहिक विनाश के हथियारों और विदेशी सैन्य अड्डों की मौजूदगी पर रोक लगाता है। सरकार का तर्क है कि बदलते सुरक्षा माहौल में यह प्रावधान अब अप्रासंगिक हो गया है। लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देश लंबे समय से रूस से संभावित खतरे का हवाला देते रहे हैं। हालांकि रूस इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि नाटो देशों पर हमला करने की उसकी कोई योजना नहीं है। मॉस्को का आरोप है कि पश्चिमी देश रूस के खतरे का इस्तेमाल पूर्वी यूरोप में सैन्य विस्तार को उचित ठहराने के लिए कर रहे हैं। इस बीच, पूर्वी यूरोप में नाटो की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में अमेरिका द्वारा पूर्वी यूरोप के अतिरिक्त नाटो देशों में परमाणु हथियार तैनात करने की संभावना जताई गई है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि नाटो का परमाणु ढांचा उसकी सीमाओं के और करीब लाया गया तो वह इसे प्रत्यक्ष सैन्य खतरा मानते हुए जवाब देगा।
वर्ल्ड अपडेट्स:लिथुआनिया में परमाणु हथियारों पर लगी संवैधानिक रोक हटाने की तैयारी, संसद में प्रस्ताव पेश

रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच लिथुआनिया ने अपने संविधान से परमाणु हथियारों की तैनाती पर लगी रोक हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 141 सदस्यीय संसद (सीमास) के 51 सांसदों ने संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इस पहल को राष्ट्रपति गितानास नौसेदा का समर्थन प्राप्त है। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद-137 को हटाने की बात कही गई है। यह अनुच्छेद देश में सामूहिक विनाश के हथियारों और विदेशी सैन्य अड्डों की मौजूदगी पर रोक लगाता है। सरकार का तर्क है कि बदलते सुरक्षा माहौल में यह प्रावधान अब अप्रासंगिक हो गया है। लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देश लंबे समय से रूस से संभावित खतरे का हवाला देते रहे हैं। हालांकि रूस इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि नाटो देशों पर हमला करने की उसकी कोई योजना नहीं है। मॉस्को का आरोप है कि पश्चिमी देश रूस के खतरे का इस्तेमाल पूर्वी यूरोप में सैन्य विस्तार को उचित ठहराने के लिए कर रहे हैं। इस बीच, पूर्वी यूरोप में नाटो की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में अमेरिका द्वारा पूर्वी यूरोप के अतिरिक्त नाटो देशों में परमाणु हथियार तैनात करने की संभावना जताई गई है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि नाटो का परमाणु ढांचा उसकी सीमाओं के और करीब लाया गया तो वह इसे प्रत्यक्ष सैन्य खतरा मानते हुए जवाब देगा।
कैप नंबर-122 वैभव सूर्यवंशी,37 साल पुराना सचिन का रिकॉर्ड तोड़ा:इंटरनेशनल डेब्यू करने पर पिता को किया फोन, मैच से पहले दी थी ये सलाह

वैभव सूर्यवंशी ने शनिवार को अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था। इसी के साथ वैभव ने सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। क्रिकेट में हर नए खिलाड़ी को पहले इंटरनेशनल मैच से पहले डेब्यू कैप दी जाती है। यह सम्मान उसके देश के लिए पहली बार खेलने का प्रतीक होता है। वैभव सूर्यवंशी को कैप नंबर 122 मिली है। इस खुशखबरी को सबसे पहले वैभव ने अपने पापा को दी। वैभव के पापा संजीव सूर्यवंशी ने उन्हें मैच में बिना प्रेशर लिए खेलने की सलाह दी। वैभव के पापा ने मैच से पहले दी थी सलाह वैभव सूर्यवंशी ने कैप मिलने के बाद कहा, ‘काफी अच्छा लग रहा है। किसी के लिए भी टीम इंडिया में खेलना ही बहुत बड़ी बात है। मेरे लिए यह एक प्राऊड मोमेंट है। सबसे पहले मैंने ये बात अपने पापा को बताई। फिर मैंने अपनी मम्मी और कोच रोमी सर के अलावा साथ रहने वाले लोगों को यह खुशखबरी सुनाई।’ वैभव ने आगे कहा, ‘पापा ये बात सुनकर काफी खुश हुए। उन्होंने मुझे यही सलाह दी कि जो करते आ रहे हो वही करो। कोई प्रेशर नहीं लेना है। बस अपना गेम खेलते रहना है।’ निडर होकर अपना क्रिकेट खेलो वैभव को तिलक वर्मा ने डेब्यू कैप दिया था। तिलक वर्मा ने वैभव को कैप के साथ बधाई देते हुए कहा, ‘फैमिली और तुम्हारे लिए ये बहुत ही प्राऊड मोमेंट है। उन्होंने तुम्हारे पीछे काफी मेहनत की है। तुमने यह कैप अपने टैलेंट और डिटरमिनेशन के कारण हासिल किया है। निडर होकर अपना क्रिकेट खेलो। यहां से कुछ भी नहीं बदल रहा है। बस अच्छे एटीट्यूड के साथ अपना गेम खेलते रहो और चेहरे पर मुस्कान रखो। हर भारतीय और देश को गौरवान्वित करो। कंग्रॅजुलेशन कैप नंबर 122 वैभव सूर्यवंशी।’ भारत की पहली डेब्यू कैप अमर सिंह को मिली थी दुनिया की पहली टेस्ट डेब्यू कैप 1877 में ऑस्ट्रेलिया के चार्ल्स बैनरमैन को मिली थी। भारत का पहला टेस्ट डेब्यू कैप नंबर-1 अमर सिंह को मिला। उन्होंने 1932 में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के पहले टेस्ट मैच में पदार्पण किया था। डेब्यू कैप का नंबर बताता है कि उस फॉर्मेट में वह खिलाड़ी अपने देश का कितने नंबर का खिलाड़ी है। वैभव इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी 15 साल 99 दिन के वैभव सूर्यवंशी इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले दुनिया के दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। उनसे आगे सिर्फ पाकिस्तान के हसन रजा हैं, जिन्होंने 1996 में 14 साल 227 दिन की उम्र में जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू किया था। भारत की बात करें तो वैभव ने सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। सचिन ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल 205 दिन की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू किया था। शेफाली वर्मा ने 15 साल 239 दिन की उम्र में भारत के लिए पहला मैच खेला था। वैभव टी-20 डेब्यू पर स्टंप आउट होने वाले पहले भारतीय वैभव ने टी-20 डेब्यू मैच में 10 गेंदों में 14 रन बनाए। इसमें 2 छक्के शामिल रहे। वैभव टी-20 डेब्यू पर स्टंप आउट होने वाले पहले भारतीय बन गए। उन्हें विल जैक्स की गेंद पर जोस बटलर ने स्टंप आउट किया। वैभव ने फील्डिंग में पहला कैच भी पकड़ा। वैभव ने इंटरनेशनल क्रिकेट की सिर्फ तीसरी गेंद पर छक्का जड़ दिया। उन्होंने तीसरे ओवर में जोफ्रा आर्चर की पहली ही गेंद पर सिक्स मारा। यह उनके इंटरनेशनल करियर का पहला छक्का था। वैभव इंटरनेशनल में डेब्यू करने वाले चौथे सबसे युवा खिलाड़ी वैभव इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले चौथे सबसे युवा खिलाड़ी बने हैं। महिलाओं में जर्सी की निया चार्लोट ग्रेग सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाली क्रिकेटर हैं। उन्होंने 2019 में 11 साल, 40 दिन की उम्र में पहला टी-20 इंटरनेशनल खेला था। उनके नाम सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। पुरुषों में रोमानिया के मारियन गेरासिम सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले पुरुष क्रिकेटर हैं। उन्होंने 2020 में 14 साल और 16 दिन की उम्र में पहला टी-20 इंटरनेशनल खेला था।
250वें स्वतंत्रता दिवस पर जश्न में डूबा अमेरिका:न्यूयॉर्क में परेड, वॉशिंगटन में फाइटर प्लेन्स की उड़ान, मियामी ड्रॉन शो और आतिशबाजी की 20 तस्वीरें

अमेरिका आज अपनी आजादी के 250 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। इस मौके पर वॉशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क, फिलाडेल्फिया, टेक्सास और मियामी समेत देशभर में परेड, एयर शो, आतिशबाजी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कॉन्सर्ट आयोजित किए जा रहे हैं। राजधानी वॉशिंगटन डीसी में ऐतिहासिक इमारतों के ऊपर भव्य आतिशबाजी और लड़ाकू विमानों के फ्लाईपास्ट ने समारोह को खास बना दिया। देखिए अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की 20 तस्वीरें… न्यूयॉर्क से मियामी तक जश्न की 5 तस्वीरें आतिशबाजी और रंगारंग जश्न की 9 तस्वीरें एयर शो और परेड की 6 तस्वीरें आजादी के पिछले सबसे बड़े जश्न ————————– ये खबर भी पढ़ें…. अमेरिका की आजादी के 250 साल का जश्न:देशभर में परेड, ट्रम्प संबोधन देंगे; वॉशिंगटन में इतिहास की सबसे बड़ी आतिशबाजी होगी अमेरिका में आजादी के 250 साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है। फिलाडेल्फिया, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी समेत 50 राज्यों में परेड, ऐतिहासिक कार्यक्रम और म्यूजिक कॉन्सर्ट का आयोजन हो रहा है। व्हाइट हाउस के मुताबिक थोड़ी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इसके बाद राजधानी वॉशिंगटन डीसी में इतिहास की सबसे बड़ी आतिशबाजी होगी। पूरी खबर पढ़ें…








