Tuesday, 01 Sep 2026 | 09:56 PM

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सपना टूट चुका था, तभी मिला बड़ा ब्रेक:चेतना पांडे पर विक्रम भट्ट ने भरोसा जताया, मिमोह बोले- फिल्म मिली, पापा गर्व से मुस्कुराए

सपना टूट चुका था, तभी मिला बड़ा ब्रेक:चेतना पांडे पर विक्रम भट्ट ने भरोसा जताया, मिमोह बोले- फिल्म मिली, पापा गर्व से मुस्कुराए

फिल्म हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट के कलाकार मिमोह चक्रवर्ती और चेतना पांडे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्ष, फिल्म और निजी अनुभव साझा किए। चेतना ने बताया कि वह एक्टिंग का सपना लगभग छोड़ चुकी थीं, लेकिन विक्रम भट्ट के एक फोन ने उनकी जिंदगी बदल दी। मिमोह ने फिल्म की कहानी को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। दोनों कलाकारों ने शूटिंग के किस्से, हॉरर फिल्मों के अनुभव, मिथुन चक्रवर्ती से मिली सीख और फिल्म की खासियतों पर बात की। सवाल: ‘हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट’ तक पहुंचने का आपका सफर कैसा रहा? जवाब/चेतना पांडे: इस फिल्म से मेरा जुड़ाव किस्मत जैसा है। मुंबई आए मुझे काफी समय हो गया है और मेरी संघर्षभरी यात्रा रही है। आउटसाइडर होने पर बहुत मेहनत और ऑडिशन देने के बाद भी कई बार लगता है कि बड़े सपने पूरे नहीं होंगे। मैं नैनीताल से हूं। इंडस्ट्री में आने के बाद समझ आया कि यहां जगह बनाना आसान नहीं है। मैंने छोटे-छोटे रोल किए, जैसे शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले में काम किया। कई बार लगा कि अब वह मौका नहीं मिलेगा, जिसका मैं इंतजार कर रही हूं। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। करीब तीन साल पहले मेरी मुलाकात विक्रम भट्ट सर से हुई थी। उस समय मैं लगभग अपने सपने छोड़ चुकी थी। मैंने उनसे कहा था कि मैंने बहुत मेहनत की है, लेकिन अब लगता है कि मुझे वह मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं टैलेंटेड हूं और एक दिन बड़ा काम करूंगी। फिर करीब एक साल तक हमारी बात नहीं हुई। मैं खतरों के खिलाड़ी सीजन 12 कर रही थी, तभी उनका फोन आया। उन्होंने कहा कि मुझसे मिलो, मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है। उस समय हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट की शूटिंग शुरू हो चुकी थी और दूसरी अभिनेत्री फिल्म कर रही थी। विक्रम सर ने मेरी तस्वीर देखी और उन्हें लगा कि उन्हें उनकी ‘सुनहरी’ मिल गई है। अगले दिन उन्होंने मुझे बुलाया और मेरा कॉन्ट्रैक्ट साइन हो गया। दूसरे दिन से मैंने शूटिंग शुरू कर दी। पहले दिन के बाद सर ने मेरी तारीफ की। तभी मुझे लगा कि यह फिल्म मुझे ही करनी थी। सवाल: मिमोह, आप पहले भी हॉन्टेड का हिस्सा रह चुके हैं। इस फिल्म की कौन-सी बात आपको सबसे खास लगी? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: सबसे खास इसकी कहानी लगी। ‘हॉन्टेड 3डी’ 15 साल पहले आई थी और भारत की पहली स्टीरियोस्कोपिक 3डी फिल्म थी। उसके गाने और कहानी दर्शकों को पसंद आए थे। जब विक्रम सर ने मुझे इसके सीक्वल की कहानी सुनाई तो मुझे तुरंत समझ आ गया कि दर्शकों को यह फिल्म पसंद आएगी। इसमें हॉरर, शानदार गाने और मजबूत कहानी है। मुझे लगता है कि इस फिल्म का असली हीरो इसकी कहानी है। हमने कलाकारों के तौर पर अपना सौ प्रतिशत देने की कोशिश की है, लेकिन दर्शकों को सबसे ज्यादा इसकी कहानी पसंद आएगी। इसी वजह से मैंने तुरंत फिल्म के लिए हां कर दी। सवाल: चेतना को फिल्म में लेने से पहले तीन दिन की शूटिंग किसी और अभिनेत्री के साथ हो चुकी थी। फिर सब कुछ दोबारा शूट करना पड़ा। उस समय क्या महसूस हुआ? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: विक्रम सर इस फिल्म को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। हॉन्टेड के प्रशंसकों की उम्मीदें बड़ी हैं। लोग आज भी पूछते हैं कि क्या यह पहली फिल्म जैसी होगी, इसके गाने कैसे होंगे और प्रेम कहानी कैसी होगी। विक्रम सर के दिमाग में ‘सुनहरी’ का किरदार पूरी तरह साफ था। जब चेतना ने पहला सीन किया, तब हम सभी को लगा कि हमें हमारी सुनहरी मिल गई है। सवाल: चेतना, फिल्म का सबसे मुश्किल सीन कौन-सा था? जवाब/चेतना पांडे: वह सीन टीजर में भी दिखाया गया है। उसमें मेरी पहली मुलाकात देव से होती है। उस सीन में मुझे बिना कुछ बोले आंखों और एक्सप्रेशंस से बताना था कि क्या हो रहा है और सामने वाले को कैसे व्यवहार करना है, क्योंकि वहां एक भूत मौजूद होता है। यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण सीन था। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन-सा सीन सबसे डरावना था और किस सीन में सबसे ज्यादा हंसी आई? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: हंसी वाला किस्सा एक गाने की शूटिंग के दौरान हुआ था। एक सीन में मुझे चेतना को देखते हुए बाहर निकलना था और कैमरे से नजर नहीं हटानी थी। मैं सीन में इतना डूबा था कि दीवार पर ध्यान नहीं गया। बाहर निकलते ही सीधे दीवार से टकरा गया और सिर लग गया। चेतना ने यह देखा तो जोर-जोर से हंसने लगीं। फिर पूरे सेट पर हंसी का माहौल बन गया। पूरे दिन हम लोग हंसते रहे। मजेदार बात यह थी कि हम हॉरर फिल्म शूट कर रहे थे, लेकिन उस दिन कॉमेडी ज्यादा हो गई। जहां तक डरावने सीन की बात है, हमारी फिल्म सिर्फ जंप स्केयर पर निर्भर नहीं करती। इसमें डर का एहसास माहौल और कहानी से आता है। फिल्म देखते समय दर्शकों को लगातार लगेगा कि कुछ बुरा होने वाला है और यही इसकी खासियत है। सवाल: चेतना, आपके लिए ‘सुनहरी’ का किरदार कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/चेतना पांडे: मेरे लिए इस फिल्म का हर सीन चुनौतीपूर्ण था। मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में फिर कभी इतना मुश्किल और परतदार किरदार मिलेगा। असल जिंदगी में मैं बहुत बातूनी और चंचल हूं, लेकिन सुनहरी बिल्कुल अलग है। वह शांत है, कम बोलती है और उसकी भावनाएं चेहरे और आंखों में नजर आती हैं। मैंने विक्रम सर से कई बार पूछा कि उन्होंने मुझमें ऐसा क्या देखा। उन्होंने कहा कि मेरे अंदर जो है, शायद मैं खुद भी नहीं जानती, लेकिन वह उसे देख सकते हैं। यह बात मेरे लिए बहुत खास थी। सवाल: क्या आप भूत-प्रेत या अलौकिक शक्तियों पर विश्वास करती हैं? जवाब/चेतना पांडे: पहले मैं इन चीजों पर ज्यादा विश्वास नहीं करती थी, लेकिन मेरे पिता ने अपने कुछ अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि एक बार उनके साथ ऐसी घटना हुई थी, जिसमें उन्हें कुछ समय तक याद नहीं रहा कि क्या हुआ था। पहाड़ों में ऐसी कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। मैंने आसपास भी कुछ घटनाएं देखी हैं, इसलिए अब मैं इन चीजों पर विश्वास करती हूं। हालांकि मेरे साथ अभी

अमीषा पटेल@51, जन्म पर देखने पहुंचीं इंदिरा गांधी:दादा के नाम पर रोड, कभी झगड़े में ममता कुलकर्णी ने कहा- तुम्हारी औकात क्या है, जानिए करियर स्टोरी

अमीषा पटेल@51, जन्म पर देखने पहुंचीं इंदिरा गांधी:दादा के नाम पर रोड, कभी झगड़े में ममता कुलकर्णी ने कहा- तुम्हारी औकात क्या है, जानिए करियर स्टोरी

9 जून 1975 अमीषा पटेल का जन्म गुजरात के रईस बिजनेसमैन अमित पटेल और पंजाबी NRI मां आशा के घर हुआ। मां और पिता का नाम जोड़कर उन्हें अमीषा नाम दिया गया। 5 की उम्र में उन्हें भरतनाट्यम की ट्रेनिंग दिलवाई गई। उनके दादाजी रजनी पटेल मशहूर बैरिस्टर और कांग्रेस के बड़े राजनेता थे। उनके नाम पर 1986 में मुंबई की रोड का नाम बैरिस्टर रजनी पटेल मार्ग रखा गया है। मनीष पॉल के पॉडकास्ट में अमीषा ने बताया था कि उनके दादाजी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक बनने वाले थे। वो इंदिरा गांधी के करीबी थे। इंदिरा गांधी, अमीषा पटेल के पेरेंट्स की शादी में भी पहुंची थीं। उन्होंने खुद शादी ऐसी डेट पर रखी, जिस दिन वो काम में व्यस्त न हों और शादी अटेंड कर सकें। यहां तक की जब अमीषा का जन्म हुआ, इंदिरा गांधी वो पहली शख्स थीं, जो अस्पताल पहुंची थीं। 16 साल की उम्र में अमीषा अपने पिता के साथ सहेली के संगीत में पहुंची थीं। वहां पिता के साथ बोर्डिंग स्कूल में पढ़ चुके बचपन के दोस्त राकेश रोशन भी पहुंचे थे। जब अमीषा ने बिंदास अंदाज में डांस करना शुरू किया तो राकेश रोशन की उन पर नजर पड़ गई। वो सीधे उनके पिता के पास पहुंचे और पूछा- ये कौन है। गर्लफ्रेंड? जवाब मिला- नहीं राकेश, ये मेरी बेटी है अमीषा। अभी अभी बोस्टन से पढ़ाई कर लौटी है। राकेश ने उनसे कहा- जब मैं अपने बेटे ऋतिक को लॉन्च करूंगा, तो तुम्हारी बेटी को हीरोइन बनाऊंगा। पिता ने कहा- नहीं, वो तो पढ़ाई के लिए बॉस्टन जा रही है। फिल्मों में काम करने का तो सवाल ही नहीं उठता। शुरुआती पढ़ाई के बाद अमीषा ने बोस्टन की TUFT यूनिवर्सिटी से बायो जेनेटिक इंजीनियरिंग की और बाद में इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की। अमीषा के पिता अमित पटेल का अक्सर फिल्मी दुनिया के लोगों के साथ उठना-बैठना होता था। एक दिन उन्होंने बॉस्टन में रह रहीं अमीषा को कॉल कर बताया कि विनोद अंकल (विनोद खन्ना) चाहते हैं कि तुम उनके बेटे अक्षय खन्ना की डेब्यू फिल्म हिमालय पुत्र से फिल्मों में डेब्यू करो, लेकिन हमने इनकार कर दिया। हम नहीं चाहते कि तुम्हारी पढ़ाई पर असर पड़े। अमीषा ने इस बात कर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि फिल्मों में आने का उन्होंने खुद भी कभी सोचा नहीं था। कुछ दिन बीते, तो पिता ने फिर बताया फिरोज खान ने भी उन्हें बेटे फरदीन खान की फिल्म प्रेम अगन ऑफर की है, लेकिन इस बार भी उन्होंने इनकार कर दिया। जब वो फाइनल ईयर में बॉम्बे लौटीं, तो एक दिन राकेश रोशन ने उन्हें लंच पर इनवाइट किया। अमीषा पिता-मां के साथ गईं। वहां राकेश के बेटे ऋतिक भी मौजूद थे। उन्होंने पढ़ाई की खूब बातें कीं, अमीषा ने अपना सीवी और अमेरिका के मॉर्गन स्टेनली बैंक से मिली जॉब का लेटर भी दिखाया। कुछ देर बाद जब अमीषा वॉशरूम गईं तो राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक से पूछा कि क्या उन्हें अपकमिंग फिल्म कहो न प्यार है में कास्ट करना चाहिए। ऋतिक की हामी मिलने पर राकेश ने अमीषा के आते ही उन्हें फिल्म ऑफर कर दी। दरअसल, उस समय राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक रोशन और करीना कपूर के साथ फिल्म कहो न प्यार है शुरू की थी, लेकिन करीना ने राकेश रोशन और मां बबीता की अनबन होने पर फिल्म छोड़ दी थी। ऑफर मिलने पर अमीषा ने पूछा- आपकी फिल्म में तो हीरोइन फाइनल हो चुकी है। इस पर राकेश ने कहा- नहीं, मैं तुम्हें हीरोइन बनाना चाहता हूं। ये सुनकर अमीषा ने हामी भर दी। उन्होंने सोचा कि अगर पहली फिल्म फ्लॉप हुई, तो वो इकोनॉमिक्स में नौकरी शुरू कर देंगी, लेकिन खुशकिस्मती से फिल्म सुपरहिट रही और अमीषा पटेल एक स्टार बन गईं और आज भी फिल्मों से जुड़ी हुई हैं। आज अमीषा पटेल 51 साल की हो चुकी है। उनके बर्थडे के खास मौके पर जानिए, उनकी जिंदगी से जुड़ी रोचक कहानी, कुछ मजेदार किस्सों के साथ- कहो न प्यार है करते हुए मिली गदर, 12 घंटों तक दिया स्क्रीनटेस्ट अमीषा पटेल ने कुछ दिनों की एक्टिंग ट्रेनिंग लेने के बाद कहो न प्यार है की शूटिंग शुरू की। इसी समय उन्हें अनिल शर्मा की फिल्म गदर के ऑडिशन की जानकारी मिली। वो ऑडिशन के लिए गईं, जिसके लिए पहले ही 500 लड़कियां ऑडिशन दे चुकी थीं। 22 लड़कियों को स्क्रीनटेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था, जिनमें अमीषा भी शामिल हुईं। उनका स्क्रीनटेस्ट 12 घंटे तक चला। आखिरकार अनिल शर्मा ने उन्हें गदर में कास्ट कर लिया। सिलेक्शन के बाद अमीषा पटेल को गदर साइन करने पर ताने मिले। सभी का मानना था कि करियर की शुरुआत में अमीषा को मां का रोल नहीं करना चाहिए, लेकिन वो ये रोल करने पर अड़ी थीं। अमीषा ने एक साथ कहो न प्यार है और गदर की शूटिंग की। एक फिल्म में वो चुलबुली लड़की थीं और दूसरी में एक भारत-पाकिस्तान के बीच हुए दंगों की सर्वाइवर। सबसे पहले उनकी फिल्म कहो न प्यार है रिलीज हुई। हर किसी ने राकेश रोशन को सलाह दी कि वो न्यूकमर ऋतिक और अमीषा की इस फिल्म को शाहरुख खान की फिल्म फिर भी दिल है हिंदुस्तानी और आमिर खान की फिल्म मेला के आसपास रिलीज न करें। कहो न प्यार है 14 जनवरी 2000 में रिलीज हुई, जबकि मेला 7 जनवरी 2000 और फिर भी दिल है हिंदुस्तानी 21 जनवरी 2000 को रिलीज हुई। बड़े क्लैश के बावजूद कहो न प्यार है ब्लॉकबस्टर रही और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसके बाद रिलीज हुई अमीषा पटेल की फिल्म गदर भी ब्लॉकबस्टर रही और उनकी गिनती टॉप एक्ट्रेस में होने लगी। गदर में अमीषा ने पाकिस्तानी सकीना का किरदार निभाया, जिसमें सनी देओल ने तारा सिंह का किरदार निभाया था। दोनों की जोड़ी काफी पसंद की गई थी। कुछ सालों बाद अमीषा पटेल को सनी देओल के भाई बॉबी देओल के साथ हमराज फिल्म मिली। फिल्म के क्लाइमैक्स सीन में अमीषा को अक्षय खन्ना को गोली मारकर, बॉबी से गले लगना था। फिल्म की शूटिंग जयपुर के किले में हुई, जहां शूटिंग देखने के लिए भारी भीड़ जमा थी। जैसे ही अमीषा ने बॉबी

अमीषा पटेल@51, जन्म पर देखने पहुंचीं इंदिरा गांधी:दादा के नाम पर रोड, कभी झगड़े में ममता कुलकर्णी ने कहा- तुम्हारी औकात क्या है, जानिए करियर स्टोरी

अमीषा पटेल@51, जन्म पर देखने पहुंचीं इंदिरा गांधी:दादा के नाम पर रोड, कभी झगड़े में ममता कुलकर्णी ने कहा- तुम्हारी औकात क्या है, जानिए करियर स्टोरी

9 जून 1975 अमीषा पटेल का जन्म गुजरात के रईस बिजनेसमैन अमित पटेल और पंजाबी NRI मां आशा के घर हुआ। मां और पिता का नाम जोड़कर उन्हें अमीषा नाम दिया गया। 5 की उम्र में उन्हें भरतनाट्यम की ट्रेनिंग दिलवाई गई। उनके दादाजी रजनी पटेल मशहूर बैरिस्टर और कांग्रेस के बड़े राजनेता थे। उनके नाम पर 1986 में मुंबई की रोड का नाम बैरिस्टर रजनी पटेल मार्ग रखा गया है। मनीष पॉल के पॉडकास्ट में अमीषा ने बताया था कि उनके दादाजी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक बनने वाले थे। वो इंदिरा गांधी के करीबी थे। इंदिरा गांधी, अमीषा पटेल के पेरेंट्स की शादी में भी पहुंची थीं। उन्होंने खुद शादी ऐसी डेट पर रखी, जिस दिन वो काम में व्यस्त न हों और शादी अटेंड कर सकें। यहां तक की जब अमीषा का जन्म हुआ, इंदिरा गांधी वो पहली शख्स थीं, जो अस्पताल पहुंची थीं। 16 साल की उम्र में अमीषा अपने पिता के साथ सहेली के संगीत में पहुंची थीं। वहां पिता के साथ बोर्डिंग स्कूल में पढ़ चुके बचपन के दोस्त राकेश रोशन भी पहुंचे थे। जब अमीषा ने बिंदास अंदाज में डांस करना शुरू किया तो राकेश रोशन की उन पर नजर पड़ गई। वो सीधे उनके पिता के पास पहुंचे और पूछा- ये कौन है। गर्लफ्रेंड? जवाब मिला- नहीं राकेश, ये मेरी बेटी है अमीषा। अभी अभी बोस्टन से पढ़ाई कर लौटी है। राकेश ने उनसे कहा- जब मैं अपने बेटे ऋतिक को लॉन्च करूंगा, तो तुम्हारी बेटी को हीरोइन बनाऊंगा। पिता ने कहा- नहीं, वो तो पढ़ाई के लिए बॉस्टन जा रही है। फिल्मों में काम करने का तो सवाल ही नहीं उठता। शुरुआती पढ़ाई के बाद अमीषा ने बोस्टन की TUFT यूनिवर्सिटी से बायो जेनेटिक इंजीनियरिंग की और बाद में इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की। अमीषा के पिता अमित पटेल का अक्सर फिल्मी दुनिया के लोगों के साथ उठना-बैठना होता था। एक दिन उन्होंने बॉस्टन में रह रहीं अमीषा को कॉल कर बताया कि विनोद अंकल (विनोद खन्ना) चाहते हैं कि तुम उनके बेटे अक्षय खन्ना की डेब्यू फिल्म हिमालय पुत्र से फिल्मों में डेब्यू करो, लेकिन हमने इनकार कर दिया। हम नहीं चाहते कि तुम्हारी पढ़ाई पर असर पड़े। अमीषा ने इस बात कर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि फिल्मों में आने का उन्होंने खुद भी कभी सोचा नहीं था। कुछ दिन बीते, तो पिता ने फिर बताया फिरोज खान ने भी उन्हें बेटे फरदीन खान की फिल्म प्रेम अगन ऑफर की है, लेकिन इस बार भी उन्होंने इनकार कर दिया। जब वो फाइनल ईयर में बॉम्बे लौटीं, तो एक दिन राकेश रोशन ने उन्हें लंच पर इनवाइट किया। अमीषा पिता-मां के साथ गईं। वहां राकेश के बेटे ऋतिक भी मौजूद थे। उन्होंने पढ़ाई की खूब बातें कीं, अमीषा ने अपना सीवी और अमेरिका के मॉर्गन स्टेनली बैंक से मिली जॉब का लेटर भी दिखाया। कुछ देर बाद जब अमीषा वॉशरूम गईं तो राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक से पूछा कि क्या उन्हें अपकमिंग फिल्म कहो न प्यार है में कास्ट करना चाहिए। ऋतिक की हामी मिलने पर राकेश ने अमीषा के आते ही उन्हें फिल्म ऑफर कर दी। दरअसल, उस समय राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक रोशन और करीना कपूर के साथ फिल्म कहो न प्यार है शुरू की थी, लेकिन करीना ने राकेश रोशन और मां बबीता की अनबन होने पर फिल्म छोड़ दी थी। ऑफर मिलने पर अमीषा ने पूछा- आपकी फिल्म में तो हीरोइन फाइनल हो चुकी है। इस पर राकेश ने कहा- नहीं, मैं तुम्हें हीरोइन बनाना चाहता हूं। ये सुनकर अमीषा ने हामी भर दी। उन्होंने सोचा कि अगर पहली फिल्म फ्लॉप हुई, तो वो इकोनॉमिक्स में नौकरी शुरू कर देंगी, लेकिन खुशकिस्मती से फिल्म सुपरहिट रही और अमीषा पटेल एक स्टार बन गईं और आज भी फिल्मों से जुड़ी हुई हैं। आज अमीषा पटेल 51 साल की हो चुकी है। उनके बर्थडे के खास मौके पर जानिए, उनकी जिंदगी से जुड़ी रोचक कहानी, कुछ मजेदार किस्सों के साथ- कहो न प्यार है करते हुए मिली गदर, 12 घंटों तक दिया स्क्रीनटेस्ट अमीषा पटेल ने कुछ दिनों की एक्टिंग ट्रेनिंग लेने के बाद कहो न प्यार है की शूटिंग शुरू की। इसी समय उन्हें अनिल शर्मा की फिल्म गदर के ऑडिशन की जानकारी मिली। वो ऑडिशन के लिए गईं, जिसके लिए पहले ही 500 लड़कियां ऑडिशन दे चुकी थीं। 22 लड़कियों को स्क्रीनटेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था, जिनमें अमीषा भी शामिल हुईं। उनका स्क्रीनटेस्ट 12 घंटे तक चला। आखिरकार अनिल शर्मा ने उन्हें गदर में कास्ट कर लिया। सिलेक्शन के बाद अमीषा पटेल को गदर साइन करने पर ताने मिले। सभी का मानना था कि करियर की शुरुआत में अमीषा को मां का रोल नहीं करना चाहिए, लेकिन वो ये रोल करने पर अड़ी थीं। अमीषा ने एक साथ कहो न प्यार है और गदर की शूटिंग की। एक फिल्म में वो चुलबुली लड़की थीं और दूसरी में एक भारत-पाकिस्तान के बीच हुए दंगों की सर्वाइवर। सबसे पहले उनकी फिल्म कहो न प्यार है रिलीज हुई। हर किसी ने राकेश रोशन को सलाह दी कि वो न्यूकमर ऋतिक और अमीषा की इस फिल्म को शाहरुख खान की फिल्म फिर भी दिल है हिंदुस्तानी और आमिर खान की फिल्म मेला के आसपास रिलीज न करें। कहो न प्यार है 14 जनवरी 2000 में रिलीज हुई, जबकि मेला 7 जनवरी 2000 और फिर भी दिल है हिंदुस्तानी 21 जनवरी 2000 को रिलीज हुई। बड़े क्लैश के बावजूद कहो न प्यार है ब्लॉकबस्टर रही और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसके बाद रिलीज हुई अमीषा पटेल की फिल्म गदर भी ब्लॉकबस्टर रही और उनकी गिनती टॉप एक्ट्रेस में होने लगी। गदर में अमीषा ने पाकिस्तानी सकीना का किरदार निभाया, जिसमें सनी देओल ने तारा सिंह का किरदार निभाया था। दोनों की जोड़ी काफी पसंद की गई थी। कुछ सालों बाद अमीषा पटेल को सनी देओल के भाई बॉबी देओल के साथ हमराज फिल्म मिली। फिल्म के क्लाइमैक्स सीन में अमीषा को अक्षय खन्ना को गोली मारकर, बॉबी से गले लगना था। फिल्म की शूटिंग जयपुर के किले में हुई, जहां शूटिंग देखने के लिए भारी भीड़ जमा थी। जैसे ही अमीषा ने बॉबी

‘वह तब भी राजनीतिज्ञ नहीं थीं, और अब भी नहीं हैं’: काकोली घोष का महुआ मोइत्रा पर कटाक्ष | भारत समाचार

Indian captain Harmanpreet Kaur. (Picture Credit: PTI)

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 23:25 IST विद्रोही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अज्ञात पूर्व सहयोगी पर हमला किया, उनकी राजनीतिक साख पर सवाल उठाए, ममता बनर्जी खेमे के साथ टीएमसी की दरार बढ़ने पर 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया। विद्रोही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अज्ञात पूर्व सहयोगी पर हमला किया, उनकी राजनीतिक साख पर सवाल उठाए, ममता बनर्जी खेमे के साथ टीएमसी की दरार बढ़ने पर 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर दरार सोमवार को उस समय और बढ़ गई, जब बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पार्टी की एक पूर्व सहयोगी पर निशाना साधते हुए, उनकी राजनीतिक साख पर सवाल उठाते हुए और उन पर प्रचार पाने का आरोप लगाते हुए दिखाई दीं। सीएनएन-न्यूज18 से बात करते हुए, घोष दस्तीदार ने कहा कि अब तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व का बचाव करने वाले कुछ नेता उस समय आसपास नहीं थे जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। घोष दस्तीदार ने कहा, “जब ममता बनर्जी ने 1976 में शुरुआत की थी, तब इनमें से कोई भी आसपास नहीं था। मुझे लगता है कि जो महिला किसी विदेशी देश से ट्वीट कर रही है, वह उस समय पैदा भी नहीं हुई थी। वह तब कोई राजनेता नहीं थी, और वह अब भी कोई राजनेता नहीं है।” यह टिप्पणी पार्टी के भीतर बढ़ते तनाव के बीच और असंतुष्ट तृणमूल कांग्रेस सांसदों से जुड़े चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के तहत घोष दस्तीदार द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हस्ताक्षर सौंपने के कुछ घंटों बाद आई। ‘मीडिया का ध्यान आकर्षित करना’ जब उन नेताओं के बारे में पूछा गया जो ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के साथ खड़े हैं, तो विद्रोही सांसद ने उनकी राजनीतिक साख को खारिज कर दिया और उनके इरादों पर सवाल उठाया। घोष दस्तीदार ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया, “मैं आपको एक बात बता दूं। आपने कहा था कि कुछ लोग हैं जो बहुत लंबे समय से ममता बनर्जी के साथ हैं। वह एक ऐसी महिला हैं जो अपने प्रचार के लिए मीडिया का ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं।” यह टिप्पणियाँ तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की हालिया आलोचना की प्रतिक्रिया प्रतीत होती हैं, जिन्होंने कथित तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने के इच्छुक सांसदों पर “लालची” और “स्वयं-सेवा करने वाले गद्दार” होने का आरोप लगाया था। हालाँकि, घोष दस्तीदार ने अपनी टिप्पणी के दौरान किसी का नाम नहीं लिया। बागी खेमे का 20 सांसदों के समर्थन का दावा घोष दस्तीदार, जो 20 सांसदों के समर्थन का दावा करते हैं, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती देने वाले असंतुष्ट समूह के प्रमुख चेहरों में से एक के रूप में उभरे हैं। उनकी नवीनतम टिप्पणियाँ पार्टी के भीतर बढ़ते विभाजन को रेखांकित करती हैं क्योंकि बागी सांसद ममता बनर्जी खेमे से जुड़े नेताओं की आलोचना का विरोध करना जारी रखते हैं। विद्रोही सांसद की टिप्पणियों ने बनर्जी के साथ उनके लंबे जुड़ाव को भी उजागर किया, घोष दस्तीदार ने सुझाव दिया कि अब पार्टी नेतृत्व का बचाव करने वालों में से कई इसके प्रारंभिक वर्षों के दौरान आंदोलन का हिस्सा नहीं थे। राजनीतिक तनाव बढ़ गया सार्वजनिक आदान-प्रदान विद्रोही सांसदों और तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के बीच बढ़ते टकराव में नवीनतम अध्याय का प्रतीक है। असंतुष्ट नेताओं द्वारा अपने पदों को तेजी से सार्वजनिक करने और पार्टी नेतृत्व को भीतर से आलोचना का सामना करने के साथ, आने वाले हफ्तों में पश्चिम बंगाल में आंतरिक गतिरोध एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बने रहने की उम्मीद है। न तो तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व और न ही पहले की टिप्पणी करने वाले नेता ने लेखन के समय घोष दस्तीदार की टिप्पणियों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी थी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘वह तब भी राजनीतिज्ञ नहीं थीं, और अब भी नहीं हैं’: काकोली घोष का महुआ मोइत्रा पर कटाक्ष अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस में दरार(टी)ममता बनर्जी नेतृत्व(टी)काकोली घोष दस्तीदार(टी)बागी टीएमसी सांसद(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)आंतरिक पार्टी संघर्ष(टी)असंतुष्ट सांसद एनडीए(टी)भारतीय राजनीतिक समाचार

पंजाब में योग्यता आधारित भर्ती 67,000 के पार, मुख्यमंत्री मान ने 355 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे | भारत समाचार

Indian captain Harmanpreet Kaur. (Picture Credit: PTI)

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 22:26 IST भगवंत सिंह मान ने 355 नियुक्ति पत्र सौंपे, कहा कि आप ने बिना पेपर लीक के 67,037 योग्यता आधारित नौकरियां दी हैं, 65,000 संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए कानून की योजना बना रहे हैं; आईटीआई का विस्तार करें मिशन रोज़गार जारी रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कहते हैं, “पंजाब में सरकारी नौकरियों के लिए केवल योग्यता ही आधार है” पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को चंडीगढ़ में कई सरकारी विभागों में 355 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिससे 2022 में सत्ता संभालने के बाद से आम आदमी पार्टी सरकार की कुल योग्यता-आधारित भर्ती संख्या 67,037 हो गई। मान ने कहा कि उनमें से हर एक नियुक्ति राजनीतिक सिफारिशों, रिश्वतखोरी या पक्षपात के बिना की गई थी, और आप सरकार के सत्ता संभालने के बाद से पंजाब में एक भी परीक्षा पेपर लीक दर्ज नहीं किया गया है। नियुक्तियों में तकनीकी शिक्षा, सहयोग, स्थानीय सरकार, जल आपूर्ति और स्वच्छता, पशुपालन, लोक निर्माण, आवास और शहरी विकास और अन्य विभागों में चयनित उम्मीदवार शामिल थे। सभा को संबोधित करते हुए, मान ने राष्ट्रीय परीक्षा परिदृश्य के साथ सीधा अंतर बताया। उन्होंने कहा, “2017 के बाद से, देश भर में लगभग 93 परीक्षाओं के पेपर कथित तौर पर लीक हो गए हैं। एनईईटी समेत प्रमुख परीक्षाओं से जुड़ी घटनाओं ने लाखों युवाओं को निराश और हतोत्साहित किया है। 2022 में हमारी सरकार के सत्ता संभालने के बाद, पंजाब में एक भी पेपर लीक की घटना सामने नहीं आई है।” मान ने कार्यक्रम के बाद एक्स पर पोस्ट किया: “आज, 355 और युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जिससे अब तक प्रदान की गई सरकारी नौकरियों की कुल संख्या 67,037 हो गई है। ये सभी नौकरियां पूरी तरह से योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर दी गई हैं। ऐसे समय में जब देश भर में एनईईटी जैसे पेपर लीक हो रहे हैं, पंजाब ने ईमानदार भर्ती सुनिश्चित करके और शिक्षा के क्षेत्र में देश में शीर्ष स्थान हासिल करके एक उदाहरण स्थापित किया है।” 67,000 से अधिक नौकरियाँ, और कुछ उम्मीदवारों ने एक से अधिक नौकरियां एकत्र कीं सोमवार को पत्र प्राप्त करने वालों में वे उम्मीदवार भी शामिल थे जिन्होंने विभिन्न भर्ती चक्रों में कई विभागों में प्लेसमेंट हासिल करते हुए एक से अधिक बार प्रतिस्पर्धी सरकारी परीक्षाएं उत्तीर्ण की थीं। मान ने इसे सबूत के तौर पर उद्धृत किया कि प्रक्रिया में वास्तविक विश्वसनीयता थी। नियुक्त किए गए लोगों में से एक, एक चौकीदार का बेटा, को केवल योग्यता के आधार पर चौथी सरकारी नौकरी का प्रस्ताव मिला। उन्होंने सभा को बताया कि पारदर्शी प्रक्रिया ने उनके कई एनआरआई दोस्तों को पंजाब लौटने और सरकारी पदों के लिए आवेदन करने पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है। धूरी, पटियाला, अमृतसर और मोहाली के नवनियुक्त उम्मीदवारों ने कार्यक्रम में दर्शकों को बताया कि उन्होंने किसी को भुगतान किए बिना या किसी राजनीतिक संपर्क को बुलाए बिना प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। अमृतसर की मनप्रीत कौर ने कहा कि वर्षों की तैयारी के बाद आखिरकार उनकी कड़ी मेहनत का फल मिला। मोहाली की परमीत कौर ने कहा कि वह अपने परिवार में सरकारी नौकरी पाने वाली पहली महिला बन गई हैं। पटियाला के गांव बूटा सिंह वाला के सेवानिवृत्त सैनिक काला सिंह ने कहा कि उनकी भर्ती में हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं है। 65,000 संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की कतार में मान ने यह भी घोषणा की कि पंजाब सरकार वर्तमान में राज्य के विभागों और संस्थाओं में निजी ठेकेदारों के माध्यम से लगे 65,000 से अधिक संविदा कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार का मार्ग बनाने के लिए दो नए कानून लाने की योजना बना रही है। प्रस्तावित ढांचे के तहत, पांच साल की आउटसोर्स सेवा पूरी करने वाले श्रमिकों को सीधे राज्य रोजगार के तहत लाया जाएगा। दस साल की संविदा सेवा के बाद, वे नियमित स्वीकृत पदों पर अवशोषण के लिए पात्र हो जाते हैं। मान ने कहा, “इन कर्मचारियों ने राज्य के लिए अथक परिश्रम किया है। आगे चलकर, उनके और राज्य सरकार के बीच कोई ठेकेदार खड़ा नहीं होगा।” 25 नए आईटीआई, सिंगापुर और फिनलैंड में शिक्षक प्रशिक्षण कौशल विकास के मोर्चे पर, मान ने कहा कि वर्तमान में पंजाब भर में 25 नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का निर्माण चल रहा है, जबकि 13 मौजूदा आईटीआई को अपग्रेड किया जा रहा है। सरकार ने सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों के आधुनिकीकरण पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, और अलग से 23 करोड़ रुपये नंगल में कैप्टन अमोल कालिया उत्कृष्टता केंद्र की ओर जा रहे हैं, जिसे मान ने उन्नत कौशल विकास और उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण के लिए एक केंद्र के रूप में वर्णित किया है। छात्रों को स्नातक होने से पहले सीधे उद्योग का अनुभव देने के लिए राज्य के सभी 91 पॉलिटेक्निक कॉलेजों में एक सेमेस्टर इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया गया है। मान ने सिख क्रांति के तहत सरकार के शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की ओर भी इशारा किया। पंजाब के प्रिंसिपलों और शिक्षा अधिकारियों ने सिंगापुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रमुख शिक्षकों ने आईआईएम अहमदाबाद में उन्नत कार्यक्रमों में भाग लिया। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को फ़िनलैंड के तुर्कू विश्वविद्यालय भेजा गया। मान ने कहा कि सरकार ने इन सरकारी संस्थानों में निजी स्कूल के छात्रों के प्रवेश का हवाला देते हुए राज्य भर में 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस की स्थापना की है, जो यह दर्शाता है कि राज्य की स्कूली शिक्षा के बारे में धारणा कैसे बदल गई है। उन्होंने कहा कि जब 2022 में AAP ने नीति आयोग की रैंकिंग का हवाला देते हुए केरल को पछाड़कर पहले स्थान पर कब्जा कर लिया, तो पंजाब स्कूली शिक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर 27वें स्थान से आगे बढ़ गया था। मान कहते हैं, ”रिवर्स माइग्रेशन शुरू हो गया है।” मान ने कहा कि युवा पंजाबी जो विदेश चले गए थे, अब घर में रोजगार की संभावनाओं के कारण वापस लौट रहे हैं। उन्होंने यह दावा पहले भी किया है और इसे सरकार की नौकरियों और शिक्षा प्रोत्साहन के इच्छित परिणामों में से एक बताया है। उन्होंने कहा, “आप सरकार युवाओं के विदेश प्रवास को रोकने और उन्हें पंजाब में ही प्रगति के अवसर और

सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से टीएमसी में उथल-पुथल गहरा गई, 20 सांसदों ने कथित तौर पर एनडीए से आगे बढ़ने की मांग की | पश्चिम बंगाल

सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से टीएमसी में उथल-पुथल गहरा गई, 20 सांसदों ने कथित तौर पर एनडीए से आगे बढ़ने की मांग की | पश्चिम बंगाल

पूर्व टीएमसी दिग्गज सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफा देने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल तेज हो गई है, जिससे पार्टी के अंदर विद्रोह के नए दावे शुरू हो गए हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि लगभग 20 लोकसभा सांसद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व और टीएमसी के भविष्य पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। नाटकीय घटनाक्रम बंगाल की राजनीति को नया आकार दे सकता है और संभावित रूप से संसद में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। जैसे-जैसे संभावित विभाजन की अटकलें बढ़ती जा रही हैं, सभी की निगाहें अब ममता बनर्जी के अगले कदम पर हैं और क्या तृणमूल कांग्रेस आंतरिक संकट को नियंत्रित कर पाएगी। -हार्ड-फैक्ट्स n18oc_india n18oc_politics न्यूज18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube

राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 20 सांसदों के एनडीए में शामिल होने से तृणमूल कांग्रेस को बड़े पैमाने पर पलायन का सामना करना पड़ा | साफ़ बोलो

राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 20 सांसदों के एनडीए में शामिल होने से तृणमूल कांग्रेस को बड़े पैमाने पर पलायन का सामना करना पड़ा | साफ़ बोलो

एक आश्चर्यजनक राजनीतिक उथल-पुथल में, तृणमूल कांग्रेस के 28 में से 20 सांसद एनडीए में शामिल हो गए हैं, जो ममता बनर्जी के नेतृत्व के संभावित अंत का संकेत है। यह सामूहिक पलायन, राज्यसभा में इस्तीफों के साथ, इंडिया ब्लॉक के भविष्य और टीएमसी की स्थिरता पर सवाल उठाता है। उन रिपोर्टों के बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है, जिसमें दावा किया गया है कि 28 में से 20 तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल हो गए हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति के भविष्य और विपक्षी खेमे की स्थिरता के बारे में अटकलें तेज हो गई हैं। हालिया इस्तीफों और आंतरिक उथल-पुथल के साथ कथित पलायन ने टीएमसी की ताकत और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी भूमिका पर बहस छेड़ दी है। n18oc_India18oc_politicsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 08 जून, 2026, 18:40 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज इंडिया(टी)भारतीय राजनीतिक समाचार(टी)ममता बनर्जी समाचार(टी)विपक्षी एकता(टी)राजनीतिक विश्लेषण(टी)राजनीतिक विवाद(टी)राज्य सभा समाचार(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति

ऋषिकेश में स्कूटी पर घूमती नजर आईं रवीना टंडन:परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में हुईं शामिल, स्वामी चिदानंद सरस्वती का लिया आशीर्वाद

ऋषिकेश में स्कूटी पर घूमती नजर आईं रवीना टंडन:परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में हुईं शामिल, स्वामी चिदानंद सरस्वती का लिया आशीर्वाद

बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ऋषिकेश के जानकी सेतु पर स्कूटी पर घूमती नजर आईं। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान रवीना टंडन परमार्थ निकेतन पहुंची थीं। स्कूटी पर जानकी पुल पार करती नजर आईं रवीना रवीना टंडन साड़ी पहने और मुंह पर पीला गमछा ओढ़े स्कूटी पर जानकी पुल पार करती नजर आईं। इस दौरान वह ‘हर हर गंगे’ के जयकारे भी लगा रही थीं। उन्हें देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी सादगी की सराहना की। सैकड़ों लोग उन्हें देखने के लिए जमा हो गए और रवीना ने कई प्रशंसकों के साथ सेल्फी भी ली। गंगा आरती में हुईं शामिल रवीना टंडन ने परमार्थ निकेतन में कथा सुनी, गंगा आरती में हिस्सा लिया और गौ पूजन भी किया। इन दो दिनों में रवीना पूरी तरह भक्ति में लीन दिखीं। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती का आशीर्वाद भी लिया। प्रवास के बाद लौंटी मुंबई अपने प्रवास के बाद रवीना मुंबई लौट गई हैं। रवीना अक्सर परमार्थ निकेतन आती रहती हैं और उनका मानना है कि सभी को जीवन में एक बार ऋषिकेश का दौरा करना चाहिए।

20 सांसद, गुप्त बैठकें, बंद फोन: बंगाल से परे ममता बनर्जी के सामने संकट | भारत समाचार

Nepal Vs Hong Kong Final Live Score: Follow Latest Updates From The Asian Games Qualifier. (Picture Credit: IG/cricketassociationofnepal)

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 13:27 IST रिपोर्टों में कहा गया है कि लगभग 20 सांसद वर्तमान में दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर उन विकल्पों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं जिनमें एक अलग संसदीय ब्लॉक बनाना या टीएमसी से इस्तीफा देना शामिल है। टीएमसी में कोई भी बड़ा विभाजन न केवल राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी के प्रभाव को कमजोर करेगा, बल्कि विपक्षी गठबंधन के भीतर संतुलन को भी बदल सकता है। (एआई-जनरेटेड इमेज) पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस में नाटकीय विद्रोह के कुछ ही दिनों बाद, संकेत उभर रहे हैं कि राजनीतिक संकट अब संसद तक जा सकता है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद वर्तमान में दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर एकत्र हुए हैं और उन विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं जिनमें एक अलग संसदीय गुट बनाना या पार्टी से इस्तीफा देना भी शामिल है। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है कि बंगाल में पार्टी की विधायी शाखा को खंडित करने वाला विद्रोह जल्द ही संसदीय स्तर तक फैल सकता है। यह घटनाक्रम चिंताजनक क्षणों की एक श्रृंखला को जोड़ता है, जिनसे टीएमसी जूझ रही है, जिसमें एनडीटीवी द्वारा उद्धृत सूत्रों द्वारा किए गए दावे भी शामिल हैं कि जब पार्टी नेताओं ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया तो कई तृणमूल सांसदों से संपर्क नहीं हो सका, कुछ ने कथित तौर पर अपने फोन बंद कर दिए और नेतृत्व के साथ संचार से परहेज किया। यह भी पढ़ें | कहानी में ट्विस्ट? टीएमसी संकट गहराने के बाद ममता बनर्जी विद्रोहियों को वापस लाने की कैसे योजना बना रही हैं? एनडीटीवी ने बताया कि मुंबई से कोलकाता जा रहे तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद रविवार शाम को दिल्ली में अनिर्धारित रूप से रुके। सूत्रों ने चैनल को बताया कि समझा जाता है कि संक्षिप्त पड़ाव के दौरान सांसद ने लोगों की नजरों से दूर कई कम-प्रोफ़ाइल बैठकें कीं। सूत्रों के मुताबिक, सांसद कोलकाता से सटे जिलों के एक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उत्तर 24 परगना के एक तृणमूल सांसद, जिन्हें कथित तौर पर विधानसभा टिकट के लिए नजरअंदाज कर दिया गया था, वह भी एक दिन से अधिक समय से संपर्क से बाहर हैं, पार्टी के अंदरूनी सूत्र इस चुप्पी को बढ़ते असंतोष का संकेत मान रहे हैं। सूत्रों ने अभिनेता से सांसद बने एक व्यक्ति की ओर भी इशारा किया, जो रविवार को दिल्ली पहुंचे और माना जाता है कि वे धीरे-धीरे खुद को पार्टी से दूर कर रहे हैं। उत्तर बंगाल के कम से कम दो सांसद भी नेतृत्व की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे वर्तमान स्थिति से नाखुश हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने स्पष्टीकरण के रूप में यात्रा और कनेक्टिंग उड़ानों का हवाला दिया, लेकिन इस प्रकरण ने रैंकों के भीतर बढ़ते असंतोष की अटकलों को हवा दे दी। तृणमूल संकट में एक नया मोर्चा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद उथल-पुथल शुरू हो गई, जब तृणमूल विधायकों का एक बड़ा वर्ग विधानसभा में पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से अलग हो गया, जिससे ममता बनर्जी की सत्ता के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती पैदा हो गई। विद्रोह जल्द ही एक नियमित आंतरिक असहमति से बंगाल में सत्ता में आने के बाद से पार्टी के सामने सबसे बड़े संकट में बदल गया। यह भी पढ़ें | ममता का चलो दिल्ली आंदोलन: भारत के लिए आउटरीच या टीएमसी का अस्तित्व संघर्ष? अब, ध्यान संसद पर केंद्रित हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, विद्रोही सांसदों का मानना ​​है कि उनके पास स्वतंत्र रास्ता तय करने के लिए आवश्यक संख्या है, हालांकि प्रतिद्वंद्वी दावे इस बात पर कायम हैं कि कितने सांसद ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहते हैं। जबकि असंतुष्टों ने कथित तौर पर लगभग 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया है, तृणमूल नेतृत्व के करीबी नेताओं का कहना है कि विद्रोहियों ने अभी तक दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत औपचारिक विभाजन के लिए आवश्यक ताकत हासिल नहीं की है। एनडीटीवी ने पहले बताया था कि कम से कम 20 तृणमूल सांसद राजनीतिक मध्यस्थों के संपर्क में थे और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच विकल्प तलाश रहे थे। कुछ बागी नेताओं ने यह भी दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को पार्टी के संसदीय नेता के पद से हटाने के प्रयास चल रहे हैं। ममता का दिल्ली मिशन यह संकट राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण में सामने आया है। ममता बनर्जी आधिकारिक तौर पर विपक्षी चर्चा में भाग लेने के लिए इंडिया ब्लॉक की बैठक से पहले दिल्ली पहुंचीं। हालाँकि, कई रिपोर्टों से पता चलता है कि उनकी अपनी संसदीय पार्टी के भीतर विभाजन को रोकना भी उतनी ही जरूरी प्राथमिकता बन गई है। अभिषेक बनर्जी सहित वरिष्ठ नेता इस आशंका के बीच सांसदों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं कि असंतुष्ट लोग औपचारिक रूप से संसद में अलग मान्यता की मांग कर सकते हैं। दांव महत्वपूर्ण हैं. तृणमूल वर्तमान में संसद में सबसे बड़े विपक्षी दलों में से एक और इंडिया ब्लॉक का एक प्रमुख घटक बना हुआ है। कोई भी बड़ा विभाजन न केवल राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी के प्रभाव को कमजोर करेगा बल्कि ऐसे समय में विपक्षी गठबंधन के भीतर संतुलन को भी बदल सकता है जब पार्टियां मानसून सत्र और भविष्य की चुनावी लड़ाई से पहले फिर से संगठित होने का प्रयास कर रही हैं। विद्रोह को दबाने की कोशिश में, बनर्जी ने संगठनात्मक फेरबदल किया। जबकि अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने रहेंगे, दो संयुक्त राष्ट्रीय सचिव, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को नियुक्त किया गया है। यह भी पढ़ें | इंडिया ब्लॉक को किसने डुबाया? जदयू के संजय झा ने ममता, केजरीवाल द्वारा ‘तोड़फोड़’ की ओर इशारा किया अफवाहें, इस्तीफे और अनिश्चितता अनिश्चितता सोमवार को और अधिक गहरा गई जब वरिष्ठ तृणमूल नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने संसद और पार्टी दोनों से अपने इस्तीफे की घोषणा की, जो संकट शुरू होने के बाद से सबसे अधिक प्रोफ़ाइल निकासियों में से एक बन गया। उनके जाने से अटकलें तेज हो गई हैं कि अगर नेतृत्व विद्रोह

वैभव सूर्यवंशी पर फिदा कंगना रनौत, बोलीं-'वर्ल्ड कप लेकर आओ’:सौरव गांगुली ने कहा- वैभव को संभलकर खेलना होगा, ब्रिटेन की परिस्थितियां बहुत अलग होंगी

वैभव सूर्यवंशी पर फिदा कंगना रनौत, बोलीं-'वर्ल्ड कप लेकर आओ’:सौरव गांगुली ने कहा- वैभव को संभलकर खेलना होगा, ब्रिटेन की परिस्थितियां बहुत अलग होंगी

भारतीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट टीम में चयन के बाद दुनिया भर से तारीफ मिल रही है। अब बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी वैभव की जमकर तारीफ की। उन्होंने वैभव से वर्ल्ड कप की डिमांड कर दी है। कंगना ने कहा कि, ‘हमारे पास क्रिकेट देखने का टाइम नहीं होता है, लेकिन मैं क्रिकेट में इस यंग मैन को बेस्ट विशेज देती हूं। वह भी सचिन और विराट की तरह अच्छा करें। उस पर प्रेशर नहीं है, मगर वर्ल्ड कप लेकर आओ यार।’ वैभव सूर्यवंशी को उसके हाल पर छोड़ देना चाहिए दूसरी ओर पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भारत के लिए डेब्यू की दहलीज पर खड़े स्टार युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर कहा कि, ‘मेरा मानना है कि हमें उसे उसके हाल पर छोड़ देना चाहिए। वह अभी महज 15 साल का है और मुझे नहीं लगता कि वह दबाव की ज्यादा परवाह करेगा। आईपीएल में भी हमने यही देखा है।’ वैभव को संभलकर खेलना होगा गांगुली आगे कहा कि, ‘निश्चित रूप से भारत के लिए खेलना अलग बात है। वह ऐसे दौरे पर जाएगा, जहां विकेट थोड़े अलग होंगे। वहां गेंद अधिक सीम करेगी, उछाल ज्यादा होगा और नई गेंद से अधिक मूवमेंट मिलेगा। इसलिए खेल थोड़ा अलग होगा, लेकिन मुझे लगता है कि उसमें अपार प्रतिभा है। इसलिए उसे समय दीजिए। वैभव सूर्यवंशी का सिलेक्शन इंडियन टीम में हुआ बिहार के वैभव सूर्यवंशी का सिलेक्शन इंडियन टीम में हो गया है। वह इंडियन क्रिकेट टीम में चुने गए अब तक के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वैभव ने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पुरुष क्रिकेटर्स में सचिन तेंदुलकर 16 साल, 194 दिन की उम्र में भारतीय टीम में चुने गए थे। वहीं, वैभव 15 साल 71 दिन में चुने गए हैं। वैभव को जून-जुलाई में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज के साथ-साथ सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए चुना गया है। IPL में उनके बेहतर प्रदर्शन के बाद यह फैसला लिया गया है। IPL फाइनल में 15 साल के वैभव ने जीते थे 5 अवार्ड IPL फाइनल में 15 साल के वैभव ने 5 अवार्ड अपने नाम किए हैं। वैभव को सबसे ज्यादा रन बनाने के लिए ऑरेंज कैप के साथ इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन, मोस्ट वैलुएबल प्लेयर, सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन और मोस्ट सिक्सेज का भी खिताब मिला है। इन पुरस्कारों के जरिए उन्होंने कुल 45 लाख रुपये की इनामी राशि हासिल की, जबकि सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन बनने पर उन्हें टाटा सियेरा कार भी पुरस्कार में मिली। ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने वैभव वैभव को ऑरेंज कैप मिला है। वह ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने महज 15 साल और 65 दिन की उम्र में यह उपलब्धि अपने नाम की है। 16 मैचों में उन्होंने 776 रन बनाए हैं, जो इस सीजन किसी भी बल्लेबाज के सबसे ज्यादा रन हैं। इस बीच उन्होंने एक शतक और 5 अर्धशतक भी अपने नाम किए हैं। वैभव ने साई सुदर्शन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। साई सुदर्शन आईपीएल 2025 में ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। उन्होंने ये उपलब्धि 23 साल 237 दिन की उम्र में हासिल की थी। एक सीजन में 72 छक्कों का रिकॉर्ड वैभव ने सीजन में सबसे ज्यादा 237.30 के स्ट्राइक रेट से भी रन बनाए और ‘सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन’ का अवार्ड अपने नाम किया। आईपीएल के इतिहास में इतने स्ट्राइक रेट से किसी भी खिलाड़ी ने 700 या उससे ज्यादा रन नहीं बनाए। वहीं, सूर्यवंशी ने इस सीजन में रिकॉर्ड 72 छक्के लगाए। वह एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले खिलाड़ी बने। इससे पहले ये रिकार्ड क्रिस गेल के नाम था, जिन्होंने 59 छक्के लगाए थे। इस सीजन में जोरदार प्रदर्शन करने वाले सूर्यवंशी को ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ भी चुना गया है। एक सीजन में पावरप्ले में 500+ रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी सूर्यवंशी ने गुजरात के खिलाफ पावरप्ले में 31 रन बनाए। इसके साथ ही वह एक IPL सीजन के पावरप्ले में 500 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने इस सीजन पावरप्ले में 233.63 के स्ट्राइक रेट से 521 रन बनाए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड सनराइजर्स हैदराबाद के डेविड वॉर्नर के नाम था, जिन्होंने 2016 में पावरप्ले में 467 रन बनाए थे। IPL में सबसे कम पारियों में 1000 रन बनाने वाले भारतीय सूर्यवंशी ने न्यू चंडीगढ़ में IPL में अपने 1000 रन भी पूरे कर लिए। वे अपनी 23वीं पारी में इस आंकड़े तक पहुंचे। वे IPL में सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले भारतीय बने। उन्होेंने साई सुदर्शन को पीछे छोड़ा, जिन्होंने इसके लिए 25 पारी खेली थी। ओवरऑल IPL में सबसे कम पारी में हजार रन बनाने वाले खिलाड़ियों में वे शॉन मार्श (21 पारी) और लेंडल सिमंस (23 पारी) के बाद तीसरे नंबर पर हैं। IPL में सबसे ज्यादा बार 90s में आउट होने की बराबरी सूर्यवंशी ने गुजरात के खिलाफ क्वालीफायर-2 में 96 रन पर आउट हुए। वे IPL में सबसे ज्यादा बार ‘नर्वस नाइंटीज’ (90-99 रन) का शिकार होने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। वे इसी सीजन पिछली चार पारी में तीसरी बार 90 से 99 रन के बीच आउट हुए। इससे पहले डेविड वॉर्नर, केएल राहुल, ग्लेन मैक्सवेल और ऋतुराज गायकवाड़ IPL में 3-3 बार 90s में आउट हो चुके हैं। IPL के एक सीजन के प्लेऑफ में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले बल्लेबाज सूर्यवंशी ने क्वालीफायर-2 के मुकाबले में 7 छक्के लगाए। इसके साथ ही वे IPL के एक सीजन में प्लेऑफ में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने एलिमिनेटर में हैदराबाद के खिलाफ 12 छक्के लगाए थे। उनके प्लेऑफ में 19 छक्के हो गए हैं। इस मामले में उन्होंने ऋद्धिमान साहा (2014) और शुभमन गिल (2023) का 11-11 छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ा। IPL प्लेऑफ में दो 50+ स्कोर बनाने वाले राजस्थान के तीसरे बल्लेबाज वैभव ने गुजरात के खिलाफ फिफ्टी लगाई। इसके साथ ही वे IPL प्लेऑफ में दो 50+ स्कोर करने वाले राजस्थान के तीसरे खिलाड़ी बन