Sunday, 08 Nov 2026 | 11:46 PM

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जयपुर पहुंचे साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और गुरु रंधावा:ब्लैक मास्क में एयरपोर्ट से निकले, टाइट सिक्योरिटी रही; सौरभ शुक्ला भी आए नजर

जयपुर पहुंचे साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और गुरु रंधावा:ब्लैक मास्क में एयरपोर्ट से निकले, टाइट सिक्योरिटी रही; सौरभ शुक्ला भी आए नजर

जयपुर में शुक्रवार शाम को फिल्मी सितारों की हलचल देखने को मिली। साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा जयपुर पहुंचे। दोनों सितारे ब्लैक मास्क लगाए और कड़ी सुरक्षा के बीच एयरपोर्ट से बाहर निकले। इस दौरान अभिनेता सौरभ शुक्ला भी नजर आए। सितारों की मौजूदगी ने एयरपोर्ट पर लोगों का ध्यान खींचा। सुरक्षा के लिए बाहरी राज्य से बाउंसर्स बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। इन बाउंसर्स ने एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों को दोनों कलाकारों के फोटो और वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही दोनों अपनी-अपनी गाड़ियों से रवाना हो गए। जानकारी के मुताबिक, अल्लू अर्जुन और गुरु रंधावा जयपुर में ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय हीरा कंपनी डी बीयर्स ग्रुप के एक खास कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं। यह हाई-प्रोफाइल आयोजन ऐतिहासिक सिटी पैलेस में रखा गया है, जहां शाही विरासत और आधुनिक लग्जरी का संगम देखने को मिलेगा। यहां देखिए कुछ फोटोज… सिटी पैलेस में डी बीयर्स का खास आयोजन इस आयोजन की खास बात जयपुर के महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह का डी बीयर्स के नए चेहरे के रूप में परिचय कराया जाना है। ऐतिहासिक सिटी पैलेस में आयोजित इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय लग्जरी ब्रांड और जयपुर की शाही विरासत एक मंच पर नजर आएंगे। अल्लू अर्जुन के जयपुर पहुंचने की खबर सामने आने के बाद एयरपोर्ट पर उनकी एक झलक पाने की उम्मीद में लोगों की नजरें उन पर टिकी रहीं। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त रखी गई थी। ब्लैक मास्क में चेहरा ढके अल्लू अर्जुन सीधे अपनी कार तक पहुंचे और वहां से होटल के लिए रवाना हो गए। गुरु रंधावा के लिए भी इसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। उन्हें भी एयरपोर्ट से सीधे कार्यक्रम स्थल की ओर ले जाया गया। एयरपोर्ट पर सौरभ शुक्ला ने प्रशंसकों के साथ खिंचवाई तस्वीरें जयपुर एयरपोर्ट पर शुक्रवार को दिग्गज अभिनेता सौरभ शुक्ला भी नजर आए। अल्लू अर्जुन और गुरु रंधावा के विपरीत सौरभ शुक्ला प्रशंसकों के साथ सहज अंदाज में मिले और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। सौरभ शुक्ला जयपुर में नाटक ‘बर्फ’ की प्रस्तुतियों के लिए पहुंचे हैं। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 10 और 11 अक्टूबर को ‘बर्फ’ नाटक का मंचन किया जाएगा। ऐसे में इस सप्ताहांत जयपुर में फिल्म और संगीत जगत के सितारों के साथ रंगमंच के दर्शकों के लिए भी खास आकर्षण रहेगा।

नाना पाटेकर की मौत के मामले में पुलिस जांच:गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का केस; बेटे ने देर रात अंतिम संस्कार की वजह बताई

नाना पाटेकर की मौत के मामले में पुलिस जांच:गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का केस; बेटे ने देर रात अंतिम संस्कार की वजह बताई

गोवा पुलिस ने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के मामले में मेडिको-लीगल ‘अप्राकृतिक मौत’ (UD) का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक उन्हें मृत अवस्था में लाया गया था, जिसके चलते पुलिस केस दर्ज करना जरूरी था। वहीं, पुणे के फार्महाउस में देर रात हुए अंतिम संस्कार को लेकर बेटे मल्हार पाटेकर ने स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि गोवा से पार्थिव शरीर लाने में देरी होने और सुबह ही निधन हो जाने के कारण परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का केस समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गोवा पुलिस ने BNS की धारा 194 के तहत केस दर्ज किया है और पीएसआई नितिन नाइक इसकी जांच कर रहे हैं। पणजी में दर्ज केस की रिपोर्ट के मुताबिक, नाना पाटेकर को डोना पाउला स्थित ओशन पार्क से मणिपाल अस्पताल, बांबोलिम लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिवार के बयानों की जांच करेगी। अस्पताल ने कहा- मृत लाया गया था, कार्डियक अरेस्ट की आशंका मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉक्टर शेखर सालकर ने बताया कि नाना पाटेकर को अस्पताल में मृत अवस्था में ही लाया गया था। इसी वजह से नियमानुसार पुलिस केस दर्ज कराना पड़ा और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर भेजा गया। डॉक्टर के मुताबिक प्राथमिक तौर पर यह कार्डियक अरेस्ट का मामला लगता है। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर पहले से दिल की बीमारी के मरीज थे और उनका इलाज चल रहा था। बेटे मल्हार ने बताई देर रात अंतिम संस्कार की वजह समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में बेटे मल्हार पाटेकर ने देर रात अंतिम संस्कार करने की वजह बताई। आमतौर पर सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, लेकिन मल्हार ने कहा कि परिवार गोवा में था और पार्थिव शरीर को पुणे स्थित गांव के फार्महाउस लाने में समय लग गया। चूंकि निधन सुबह जल्दी हो गया था और काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने गुरुवार को ही इसे संपन्न करने का निर्णय लिया। पिता का विजन और ‘नाम फाउंडेशन’ का काम रहेगा जारी मल्हार पाटेकर ने कहा कि नाना साहब जैसे इंसान अपनी उपलब्धियों के जरिए हमेशा अमर रहते हैं। उन्होंने बताया कि मराठवाड़ा में ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए चल रहे सामाजिक काम बंद नहीं होंगे। इस संबंध में उनकी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बात हुई है और यह काम सीईओ गणेश थोरात की देखरेख में तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। पुणे के फार्महाउस में 3-गन सैल्यूट के साथ दी गई अंतिम विदाई गुरुवार रात पुणे के डोंजे गांव स्थित फार्महाउस पर नाना पाटेकर का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस बल ने उन्हें 3-गन सैल्यूट दिया। इस दौरान अभिनेता जैकी श्रॉफ, निर्देशक अनिल शर्मा, अनीस बज्मी और निर्माता फिरोज नाडियाडवाला समेत कई फिल्मी हस्तियां और राजनेता शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने और श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।

नाना पाटेकर की मौत के मामले में पुलिस जांच:गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का केस; बेटे ने देर रात अंतिम संस्कार की वजह बताई

नाना पाटेकर की मौत के मामले में पुलिस जांच:गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का केस; बेटे ने देर रात अंतिम संस्कार की वजह बताई

गोवा पुलिस ने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के मामले में मेडिको-लीगल ‘अप्राकृतिक मौत’ (UD) का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक उन्हें मृत अवस्था में लाया गया था, जिसके चलते पुलिस केस दर्ज करना जरूरी था। वहीं, पुणे के फार्महाउस में देर रात हुए अंतिम संस्कार को लेकर बेटे मल्हार पाटेकर ने स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि गोवा से पार्थिव शरीर लाने में देरी होने और सुबह ही निधन हो जाने के कारण परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। गोवा पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मौत का केस समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गोवा पुलिस ने BNS की धारा 194 के तहत केस दर्ज किया है और पीएसआई नितिन नाइक इसकी जांच कर रहे हैं। पणजी में दर्ज केस की रिपोर्ट के मुताबिक, नाना पाटेकर को डोना पाउला स्थित ओशन पार्क से मणिपाल अस्पताल, बांबोलिम लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिवार के बयानों की जांच करेगी। अस्पताल ने कहा- मृत लाया गया था, कार्डियक अरेस्ट की आशंका मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉक्टर शेखर सालकर ने बताया कि नाना पाटेकर को अस्पताल में मृत अवस्था में ही लाया गया था। इसी वजह से नियमानुसार पुलिस केस दर्ज कराना पड़ा और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर भेजा गया। डॉक्टर के मुताबिक प्राथमिक तौर पर यह कार्डियक अरेस्ट का मामला लगता है। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर पहले से दिल की बीमारी के मरीज थे और उनका इलाज चल रहा था। बेटे मल्हार ने बताई देर रात अंतिम संस्कार की वजह समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में बेटे मल्हार पाटेकर ने देर रात अंतिम संस्कार करने की वजह बताई। आमतौर पर सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, लेकिन मल्हार ने कहा कि परिवार गोवा में था और पार्थिव शरीर को पुणे स्थित गांव के फार्महाउस लाने में समय लग गया। चूंकि निधन सुबह जल्दी हो गया था और काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने गुरुवार को ही इसे संपन्न करने का निर्णय लिया। पिता का विजन और ‘नाम फाउंडेशन’ का काम रहेगा जारी मल्हार पाटेकर ने कहा कि नाना साहब जैसे इंसान अपनी उपलब्धियों के जरिए हमेशा अमर रहते हैं। उन्होंने बताया कि मराठवाड़ा में ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए चल रहे सामाजिक काम बंद नहीं होंगे। इस संबंध में उनकी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बात हुई है और यह काम सीईओ गणेश थोरात की देखरेख में तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। पुणे के फार्महाउस में 3-गन सैल्यूट के साथ दी गई अंतिम विदाई गुरुवार रात पुणे के डोंजे गांव स्थित फार्महाउस पर नाना पाटेकर का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस बल ने उन्हें 3-गन सैल्यूट दिया। इस दौरान अभिनेता जैकी श्रॉफ, निर्देशक अनिल शर्मा, अनीस बज्मी और निर्माता फिरोज नाडियाडवाला समेत कई फिल्मी हस्तियां और राजनेता शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने और श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।

कानपुर में हाथों में मशाल लेकर दौड़े दंगाई:‘गांधी एंड माय मदर’ फिल्म की शूटिंग, लखनऊ से मॉरिस माइनर कार भी पहुंची

कानपुर में हाथों में मशाल लेकर दौड़े दंगाई:‘गांधी एंड माय मदर’ फिल्म की शूटिंग, लखनऊ से मॉरिस माइनर कार भी पहुंची

कानपुर की सड़कों पर गुरुवार रात जलती मशाल और हंसिया लेकर भीड़ दौड़ रही थी। लोग चिल्ला रहे थे- ‘मार दो’। चारों तरफ सन्नाटा पसरा था और लोग घरों में छिपे थे। यह कोई हकीकत नहीं, बल्कि धनकुट्टी में फिल्म ‘गांधी एंड माय मदर’ की शूटिंग का दृश्य था। फिल्म 1940 के दशक में बंगाल में हुई हिंसा पर आधारित है। उस दौर को पर्दे पर जीवंत दिखाने के लिए दंगे के बाद उजड़े घर का सेट तैयार किया गया। दुकानों के बोर्ड और बैनर बांग्ला भाषा में बदल दिए गए। शूटिंग में 1940 के दौर की मिलिट्री जीप के साथ ब्रिटिश ब्रांड की मॉरिस माइनर कार का भी इस्तेमाल किया जाएगा। गुरुवार शाम 6 बजे शुरू हुई शूटिंग शुक्रवार सुबह 5 बजे तक अलग-अलग लोकेशन पर चली। फिल्म का निर्देशन सुधीर मिश्रा कर रहे हैं। इसमें मनोज बाजपेयी गांधी जी की भूमिका निभा रहे हैं। अभिनेता सौरभ शुक्ला और अभिनेत्री दिव्या दत्ता भी फिल्म का हिस्सा हैं। शुक्रवार को शूटिंग का आखिरी दिन होगा। देखिए 3 तस्वीरें… पांच शव देखकर घबराया नौजवान फिल्म के एक दृश्य में दंगे के बाद एक नौजवान घर के भीतर दाखिल होता है। आंगन में सामान बिखरा है, मटका टूटा पड़ा है और चारपाई पलटी हुई है। आसपास घर के पांच सदस्यों के शव पड़े हैं। इस दृश्य को फिल्माने के लिए टीम को पांच बार रीटेक लेना पड़ा। दो बार असिस्टेंट डायरेक्टर के निर्देशन में शॉट फिल्माए गए, लेकिन बीच में सुधीर मिश्रा को कलाकारों को दृश्य समझाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। इस एक सीन को पूरा करने में करीब एक घंटे का समय लगा। 50 से ज्यादा जूनियर आर्टिस्ट ने निभाए अलग-अलग किरदार दंगे के दृश्यों के लिए 50 से ज्यादा जूनियर आर्टिस्ट पहुंचे। इनमें स्थानीय और आसपास के इलाकों के कलाकारों के साथ दिल्ली और मुंबई से आए कलाकार भी शामिल थे। एक दृश्य में सफेद वर्दी पहने पुलिसकर्मी 1940 के दौर की मिलिट्री जीप में बैठकर दंगे वाली सड़क से गुजरते नजर आए। जीप से एनाउंसमेंट किया गया कि गांधी जी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। लखनऊ से मंगाई गई मॉरिस माइनर कार ब्रिटिश ब्रांड मॉरिस मोटर्स की मॉरिस माइनर कार धनकुट्टी पहुंची है। यह मॉडल 1948 से 1971 के बीच बनाया जाता था। इसे लखनऊ से मंगाया गया है और शुक्रवार को शूटिंग में इस्तेमाल किया जाएगा। उस दिन मनोज बाजपेयी भी फिल्मांकन के लिए पहुंचेंगे। कत्था वाले धर्मशाला में दूसरी बार हुई फिल्म की शूटिंग धनकुट्टी स्थित कत्था वाले धर्मशाला में इसी साल फरवरी में एक वेब सीरीज की शूटिंग हुई थी। धर्मशाला के मैनेजर प्रेम प्रकाश ने बताया कि उस समय यहां तीन दिन तक शूटिंग चली थी। पुरानी इमारत और उसके माहौल को देखकर फिल्म निर्माताओं ने इस बार भी इसे चुना है। मौजूदा फिल्म की शूटिंग यहां दो दिन तक की जा रही है। धर्मशाला से जुड़ा है आंदोलन का इतिहास करीब 100 साल पुराने कत्था वाले धर्मशाला का संबंध स्थानीय आंदोलन के इतिहास से भी बताया जाता है। स्थानीय निवासी नागेंद्र अवस्थी के मुताबिक, 1959 के सांतिया कांड में एक पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए शुरू हुआ विरोध पुलिस और लोगों के बीच टकराव में बदल गया था। उन्होंने बताया कि उस समय धर्मशाला के मैनेजर अंबिका शुक्ला उर्फ अंबिका जालिम ने महिला को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाई थी। इसके बाद तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष श्याम मिश्रा ने महिला के समर्थन में पुलिस के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। स्थानीय विवरण के अनुसार, कई दिनों तक हिंसा हुई और कर्फ्यू लगाना पड़ा था। राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं निर्देशक सुधीर मिश्रा सुधीर मिश्रा हिंदी सिनेमा के चर्चित निर्देशकों में शामिल हैं। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘ये वो मंजिल तो नहीं’ 1987 में आई थी, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। उन्होंने ‘मैं जिंदा हूं’, ‘धारावी’, ‘इस रात की सुबह नहीं’, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’, ‘कलकत्ता मेल’, ‘चमेली’, ‘खोया खोया चांद’, ‘ये साली जिंदगी’, ‘इंकार’, ‘दास देव’, ‘सीरियस मेन’ और ‘अफवाह’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। उनकी वेब सीरीज में ‘होस्टेजेस’, ‘तनाव’ और ‘जहानाबाद – ऑफ लव एंड वॉर’ शामिल हैं। ————- ये भी पढ़ें- बसपा में वापसी के बाद पहली-बार मायावती संग दिखे आकाश: कांशीराम की तस्वीर पर फूल चढ़ाए; बुआ ने फोन कर दिल्ली से बुलाया बसपा सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार को BSP के संस्थापक कांशीराम को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। भतीजे आकाश आनंद भी उनके साथ नजर आए। मायावती की तरफ से माफ किए जाने और पार्टी में वापसी के बाद यह पहला मौका है, जब आकाश बुआ मायावती के साथ दिखाई दिए। पढ़िए पूरी खबर…

धलसिम मैं नहीं, मेरी किस्मत लेकर आई:विद्युत जामवाल बोले- मुझे ढूंढते-ढूंढते दुनिया के 11 बेस्ट फाइटर्स में शामिल किया

धलसिम मैं नहीं, मेरी किस्मत लेकर आई:विद्युत जामवाल बोले- मुझे ढूंढते-ढूंढते दुनिया के 11 बेस्ट फाइटर्स में शामिल किया

एक तरफ ‘स्ट्रीट फाइटर’ की दुनिया, दूसरी तरफ हॉलीवुड के बड़े-बड़े नाम और इनके बीच भारत का एक ऐसा एक्टर, जिसने अपनी पहचान किसी फिल्मी खानदान या स्टारडम से नहीं, बल्कि अपनी बॉडी, ब्रीदिंग और मार्शल आर्ट्स से बनाई। विद्युत जामवाल अब धलसिम बनकर ग्लोबल स्क्रीन पर उतर रहे हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि विद्युत इस किरदार को कोई बहुत बड़ा चैलेंज मानते ही नहीं। उनके लिए ढालसिम का मिलना कुछ ऐसा था, जैसे किस्मत ने दरवाजा खटखटाया और उन्होंने बस दरवाजा खोल दिया। लास वेगास में गायत्री मंत्र से लेकर जेसन मोमोआ, 50 सेंट, रोमन रेंस और कोडी रोड्स के साथ बिताए 45 दिनों तक, धलसिम के गंजे लुक से लेकर टाइगर श्रॉफ के साथ आने वाली फिल्म तक- विद्युत ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कई ऐसी बातें कहीं, जिनमें उनका एक्शन स्टार वाला अंदाज भी है और जिंदगी को देखने का बिल्कुल अलग नजरिया भी। सवाल: जब ‘स्ट्रीट फाइटर’ के धलसिम का ऑफर आया तो क्या लगा- ‘ये किरदार तो मेरे लिए ही बना है’ या फिर सामने एक बड़ा चैलेंज दिखा? जवाब: चैलेंज तो बिल्कुल नहीं लगा। डायरेक्टर ने मुझे फोन किया तो उन्होंने मेरे बारे में पूरी रिसर्च की हुई थी। उन्हें पता था कि मैं कौन हूं और मैं इस किरदार के साथ क्या कर सकता हूं। वो कॉल ही बहुत बेहतरीन था। मुझे लगा कि किस्मत बहुत अच्छी चीज है। आप बस थम जाइए, चीजें अपने आप आपके पास पहुंचती रहेंगी। मेरे लिए शायद यही फॉर्मूला काम कर गया। उन्हें दुनिया के 11 बेस्ट फाइटर्स की तलाश थी और उन्होंने मुझे तलाश लिया। योग और कलरीपायट्टु का जो मिश्रण इस किरदार में है, वो मेरे लिए कमाल था। सवाल: धलसिम और विद्युत में सबसे बड़ा फर्क क्या है और सबसे बड़ा कनेक्शन क्या है? जवाब: फर्क ये है कि धलसिम बाल-बच्चों वाला आदमी है। उसकी पत्नी है, बच्चे हैं। लेकिन हम दोनों में एक खूबी बहुत मिलती है- वो दूसरों के लिए लड़ता है, अपने लिए नहीं। मेरे लिए भी लड़ाई के पीछे कोई मकसद होना चाहिए। कोई कारण नहीं है तो लड़ने की जरूरत ही क्या है? सवाल: धलसिम के किरदार में आपका योग, मेडिटेशन, ब्रीदिंग और कंट्रोल भी दिखाई देता है। क्या आपको लगता है कि आज के युवाओं को भी इन चीजों की जरूरत है? जवाब: यूथ को जो करना है, वो करना चाहिए। उन्हें जो फॉलो करना है, वो करें। वो होशियार हैं, समझदार हैं। सवाल: लेकिन आज की जनरेशन के आसपास इतना शोर है कि खुद पर कंट्रोल रखना मुश्किल है। ऐसे में वो दुनिया में भारत का नाम कैसे रोशन करेंगे? जवाब: शायद ये चीजें उनमें नहीं होंगी, तभी तो वो दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे। हमसे पुरानी पीढ़ियां इन्हीं चीजों को पाने के चक्कर में काफी समय लगा चुकी हैं। आज की जनरेशन बहुत उम्दा है। इनके दिमाग अलग हैं, इनकी सोच अलग है। हमारा सिर्फ एक काम है- इनकी सोच को मत रोको। इन्हें उड़ने दो। अगर आपके बच्चे हैं तो उनसे कहिए- ‘तुम जो करना चाहते हो करो, मैं संभाल लूंगा।’ बस इतना याद रखना कि कुछ चीजें दायरे में की जाती हैं। और वो दायरा ये बच्चे जानते हैं। सवाल: आप योग, कलरीपायट्टु, ब्रीदिंग और खुद को जानने की बात करते हैं। असल में यूथ को इनमें से क्या सीखना चाहिए? जवाब: हमने इन सबको अलग-अलग नाम दे दिए हैं- डिसिप्लिन, योग वगैरह। असल में ये सिर्फ खुद को जानने की कोशिश है। आप योग से खुद को जानें, मार्शल आर्ट्स से जानें, आर्ट से जानें या कुकिंग से। बस खुद को जानने की कोशिश रुकनी नहीं चाहिए। आप खुद को जितना जान जाएंगे, किसी को कुछ समझाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। योग इसलिए अच्छा माध्यम है क्योंकि वो आपको बेसिक्स सिखाता है- आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार। कैसे सांस लेनी है, कैसे बैठना है, कैसे चलना है। जिसे सही चलना और बैठना आ गया, वो सही सोचना भी सीख सकता है। सवाल: लास वेगास में ट्रेलर लॉन्च के दौरान आपने गायत्री मंत्र, सूर्य और चंद्र का पाठ किया। वहां मौजूद हॉलीवुड सितारे आपको देखते रह गए। उस वक्त आपके दिमाग में क्या चल रहा था? जवाब: दरअसल, मैं पहला आदमी था जिसे माइक दे दिया गया था। मुझे लगा कि जब डर लगे तो गायत्री मंत्र का जाप कर लेना चाहिए। गायत्री मंत्र हो गया तो लगा कि अब सूर्य चालीसा भी पढ़ लो और फिर चंद्र भी कर ही लो! लेकिन जिस तरह वहां पूरा माहौल शांत हो गया, वो बहुत अच्छा था। कई चीजों को भाषा की जरूरत नहीं होती। वो सिर्फ एक एहसास होता है। इन मंत्रों में वो शक्ति है जो आपको शांत कर देती है। वहां बैठे हर आदमी के अंदर एक शांति आ गई थी। बहुत अच्छी फीलिंग थी। सवाल: जेसन मोमोआ, 50 सेंट, रोमन रेंस और कोडी रोड्स जैसे बड़े नाम एक ही सेट पर हों तो क्या वहां स्टारडम का माहौल रहता था? जवाब: फनी या सीरियस जैसा कुछ नहीं था। सब दिग्गज हैं। 50 सेंट, रोमन रेंस, जेसन मोमोआ, कोडी रोड्स- इनके साथ बैठना और नॉर्मल बातें करना बहुत सहज था। आपने जिंदगी में क्या किया है, वो अलग बात है और आप असल में क्या हैं, वो अलग चीज है। आप जैसे हैं वैसे रहें तो सब सही रहता है। कभी मजाक हुआ तो सब हंसे। सब कुछ बहुत नॉर्मल था। सवाल: इंडिया को लेकर भी इन सितारों से बातचीत हुई? जवाब: ये लोग इंडिया कई बार आ चुके हैं और इंडियंस को जानते हैं। रोमन रेंस को इंडिया बहुत पसंद है। उसके मुताबिक डब्ल्यूडब्ल्यूई की असली ऑडियंस इंडिया ही है। उसने यहां का पागलपन देखा है। कोडी की इंडिया आने की दिली तमन्ना है। 50 सेंट ने इंडिया में कई शोज किए हैं। लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ी बात ये थी कि मैं एक ऐसे मार्शल आर्टिस्ट को रिप्रेजेंट कर रहा था जिसने इस पारंपरिक कला में काम किया है। उनके साथ 45 दिन बिताने के बाद इंसान की असलियत दिख जाती है। मैं गर्व से कह सकता हूं कि दुनिया में हर इंडियन मार्शल आर्टिस्ट की कद्र होगी। सवाल: धलसिम के गंजे लुक पर घरवालों और दोस्तों

जुबिन नौटियाल बोले- प्रकृति और वन्यजीवों को बचाना असली मुद्दा:रामनगर में कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल में की शिरकत, संरक्षण प्रयासों की तारीफ

जुबिन नौटियाल बोले- प्रकृति और वन्यजीवों को बचाना असली मुद्दा:रामनगर में कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल में की शिरकत, संरक्षण प्रयासों की तारीफ

रामनगर में कॉर्बेट प्रशासन की ओर से आयोजित लिटरेचर फेस्टिवल के आखिरी दिन मशहूर गायक जुबिन नौटियाल पहुंचे। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम प्रकृति, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने का बेहतर माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बचाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक विभाग या व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की है। डॉ. साकेत बडोला के कहने पर फेस्टिवल में पहुंचे जुबिन नौटियाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने उन्हें लिटरेचर फेस्टिवल के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि आयोजन में अच्छे फोटोग्राफर और स्टोरीटेलर शामिल हो रहे थे। इस पहल से प्रभावित होकर उन्होंने तुरंत कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला किया। कॉर्बेट को बताया उत्तराखंड और देश की पहचान जुबिन नौटियाल ने कॉर्बेट नेशनल पार्क को उत्तराखंड के साथ ही पूरे देश की पहचान बताया। उन्होंने डॉ. साकेत बडोला और उनकी टीम की ओर से वन्यजीव और प्रकृति संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कॉर्बेट से पूरे देश को सीखने की जरूरत है। बोले- बेवजह के मुद्दों पर नहीं, प्रकृति पर ध्यान दें जुबिन नौटियाल ने कहा कि कई बार समाज ऐसे मुद्दों पर आपस में लड़ता है, जो उतने महत्वपूर्ण नहीं होते। असली मुद्दा प्रकृति और पर्यावरण है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल को इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया। नाना पाटेकर के निधन पर जताई संवेदना फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर जुबिन नौटियाल ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नाना जी ने उन्हें हमेशा बहुत प्यार और अपनापन दिया। जुबिन ने कहा कि छोटे शहरों से मुंबई पहुंचने वाले कलाकारों के लिए जब बड़े कलाकार प्यार और गर्मजोशी से बात करते हैं तो उन्हें लगता है कि वे भी इस दुनिया का हिस्सा हैं। जुबिन नौटियाल ने नाना पाटेकर के परिवार, उनके प्रशंसकों और पूरी फिल्म इंडस्ट्री के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति है।

रानी मुखर्जी ने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में किए दर्शन:सुख-शांति की कामना की, केदारनाथ में पूर्वजों की स्मृति में कराई पूजा

रानी मुखर्जी ने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में किए दर्शन:सुख-शांति की कामना की, केदारनाथ में पूर्वजों की स्मृति में कराई पूजा

बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी गुरुवार को उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंचीं। सबसे पहले उन्होंने केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। श्राद्ध पक्ष के अवसर पर उन्होंने अपने पूर्वजों की स्मृति में विशेष पूजा भी कराई और बाबा केदार का आशीर्वाद लिया। केदारपुरी की आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता से हुईं अभिभूत तीर्थ पुरोहित हिमांशु तिवारी ने रानी मुखर्जी को विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। इस दौरान अभिनेत्री ने केदारनाथ धाम में काफी समय बिताया और तीर्थ पुरोहितों से बातचीत की। उन्होंने केदारपुरी की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण की भी तारीफ की। रानी मुखर्जी ने कहा कि बाबा केदार की नगरी स्वर्ग के समान है और यहां पहुंचकर मन को शांति का अनुभव होता है। पुनर्निर्माण कार्यों और यात्रा व्यवस्थाओं की ली जानकारी पूजा के दौरान रानी मुखर्जी ने केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों और यात्रा व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली। तीर्थ पुरोहित के मुताबिक, अभिनेत्री धाम के आध्यात्मिक वातावरण और हिमालयी सुंदरता को देखकर काफी प्रसन्न नजर आईं। केदारनाथ पहुंचने की खबर के बाद उनके प्रशंसकों और स्थानीय लोगों में भी उत्सुकता देखने को मिली। बदरीविशाल के दरबार में पहुंचकर की पूजा-अर्चना केदारनाथ के बाद रानी मुखर्जी बदरीनाथ धाम पहुंचीं। यहां उन्होंने भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से अभिनेत्री का स्वागत किया गया। समिति पदाधिकारियों ने उन्हें बदरीविशाल और बाबा केदार का प्रसाद भेंट किया। दोनों धामों की आध्यात्मिक अनुभूति को बताया अद्भुत रानी मुखर्जी ने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की आध्यात्मिक अनुभूति और प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार की ओर से केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए किए जा रहे कार्यों की भी तारीफ की। बद्रीनाथ में प्रभारी अधिकारी राजन नैथानी, प्रोटोकॉल अधिकारी राकेश सेमवाल, मंदिर अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ समेत योगंबर नेगी, राहुल नेगी, वैभव उनियाल, राकेश झिंक्वाण और विकास सनवाल मौजूद रहे।

नाना पाटेकर ने कहा था- आई लव पंजाबी:गोल्डन टेंपल देख बोले थे- रब का शुक्र है, जीते जी दर्शन हो गए; चंडीगढ़ में किसान को ₹3 लाख दिए

नाना पाटेकर ने कहा था- आई लव पंजाबी:गोल्डन टेंपल देख बोले थे- रब का शुक्र है, जीते जी दर्शन हो गए; चंडीगढ़ में किसान को ₹3 लाख दिए

बॉलीवुड के सुपरस्टार नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ। मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। घटना के वक्त नाना के साथ घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर मौजूद थे। अब शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। नाना पाटेकर पंजाबियों को बहुत पसंद करते थे। 17 साल पहले वह पंजाब में शूटिंग कर रहे थे तो उन्होंने पंजाबी सीखी। उन्होंने कहा था कि पंजाबी उन्हें बहुत पसंद हैं। चंडीगढ़ में वेलकम की शूटिंग के दौरान उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के किसान पिता की बाइपास सर्जरी के लिए तुरंत 3 लाख रुपए दे दिए थे। इसके अलावा नाना पाटेकर जनवरी 2018 में पत्नी नीलकांति पाटेकर के साथ अमृतसर आए थे। यहां उन्होंने गोल्डन टेंपल में माथा टेका। यह गोल्डन टेंपल के दर्शन के बाद नाना ने कहा था- रब का शुक्र है कि जीते जी मुझे गोल्डन टेंपल में माथा टेकने का मौका मिला इस दौरान उन्होंने गोल्डन टेंपल की पूरी परिक्रमा की और फिर लंगर हॉल में जूठे बर्तन भी मांजे थे। इसके बाद जब वे फिर अमृतसर आए तो वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी में भी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने BSF की नशा विरोधी दौड़ में भी हिस्सा लिया था। नाना ने कहा था- ऐसी शांति कहीं नहीं मिली नाना पाटेकर ने गोल्डन टेंपल के दर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मुझे यहां आकर बहुत शांति मिली है, ऐसी शांति मैंने कभी कहीं और महसूस नहीं की। यहां के लोगों की सेवा और श्रद्धा देखकर मैं बहुत हैरान हूं। मैं सोच रहा हूं कि मैं पहले कभी यहां क्यों नहीं आया। यहां कोई छोटा-बड़ा या किसी तरह का भेदभाव नहीं है। अगर पूरा देश इस बात को समझ ले और अपनी जिंदगी में अपना ले तो हमारा देश सोने जैसा बन जाएगा। नाना पाटेकर ने पंजाब में शूटिंग के दौरान पंजाबी सीखी थी साल 2009 में एक: द पॉवर ऑफ वन की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर चंडीगढ़ और पंजाब में शूटिंग कर रहे थे। फिल्म में उन्हें CBI अधिकारी का किरदार निभाना था और उनके कई सीन पंजाब में लोगों से बातचीत करते हुए थे। अपने मराठी लहजे के बावजूद संवादों को पंजाबी अंदाज में बोलने के लिए उन्होंने बाकायदा स्थानीय पंजाबी महिलाओं से पंजाबी एक्सेंट सीखने की कोशिश की थी। उस दौरान एक रिपोर्ट में नाना ने कहा था कि मुझे पंजाबी पसंद हैं। मेरे पिता भी फर्राटेदार पंजाबी बोलते थे, क्योंकि टेक्सटाइल प्रिंटिंग के कारोबार में उनका रोजाना पंजाबियों से संपर्क रहता था। नाना पाटेकर को खेती-किसानी भी खूब पसंद थी। उन्होंने चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मैं प्रकृति के करीब रहना पसंद करता हूं और “दिल से किसान” हूं। चंडीगढ़ में असिस्टेंट डायरेक्टर के पिता को तुरंत मदद दी साल 2007 में फिल्म ‘वेलकम’ की शूटिंग के दौरान नाना को पता चला कि यूनिट के एक असिस्टेंट डायरेक्टर बिट्टू चंडोक के चाचा अवतार सिंह चंडीगढ़ में रहते हैं और किसान हैं। वह गंभीर रूप से बीमार थे और बाईपास सर्जरी के लिए करीब 3 लाख रुपये की जरूरत थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाना ने तुरंत 3 लाख रुपये का चेक दे दिया था। नाना ने इस मदद को ‘दान’ मानने से भी इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि अवतार सिंह उनके पिता की उम्र के हैं, इसलिए यह ऐसा था जैसे वह अपने पिता के लिए कुछ कर रहे हों। उन्होंने यह भी कहा था कि एक समय उनके पास कुछ नहीं था और जो कुछ उनके पास है, वह लोगों की वजह से है।

उत्तराखंड में घर खरीदना चाहते थे नाना पाटेकर:शूटिंग के लिए पहुंचे जोशीमठ, यहीं रहने की थी जिद; गंगा आरती कर लौटे

उत्तराखंड में घर खरीदना चाहते थे नाना पाटेकर:शूटिंग के लिए पहुंचे जोशीमठ, यहीं रहने की थी जिद; गंगा आरती कर लौटे

बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से गोवा के डोना पाउला में निधन हो गया। उनका उत्तराखंड से भी गहरा जुड़ाव रहा है। सितंबर-अक्टूबर 2022 में चमोली की नीती घाटी में मराठी फिल्म ‘ओले आले’ की शूटिंग के दौरान वे करीब नौ दिन पहाड़ों में रहे थे। चमोली की खूबसूरत वादियों, शांत वातावरण और स्थानीय लोगों की सादगी से वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने भविष्य में उत्तराखंड में जमीन खरीदकर घर बनाने की इच्छा जताई थी। शूटिंग के दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से पहाड़ी रहन-सहन, वेशभूषा, मौसम और आसपास के तीर्थ-पर्यटन स्थलों के बारे में भी जानकारी ली थी। नाना पाटेकर ने नीती गांव, तपोवन, लाता और मलारी क्षेत्र में फिल्म की शूटिंग की थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने यहां मकान बनाने की बात भी कही थी, जिसके बाद जोशीमठ की तत्कालीन SDM कुमकुम जोशी ने उनसे मुलाकात कर स्थानीय सेब और अखरोट भेंट किए थे। इसी दौरान 29 सितंबर 2022 को नाना पाटेकर ने ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में भी हिस्सा लिया था। नाना पाटेकर की उत्तराखंड से जुड़ी दो तस्वीरें- सेना के जवानों से भी मिले, स्थानीय बोली में की बातचीत शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने सेना की ब्रिगेड में अधिकारियों और जवानों से मुलाकात की थी। मराठी और तेलुगु भाषी जवानों से उन्होंने उनकी ही बोली में बातचीत की और खूब हंसी-मजाक किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि नाना का व्यवहार बेहद सहज और सरल था। वे शूटिंग से इतर आसपास के जीवन को जानने में भी काफी रुचि लेते थे। करीब नौ दिन चमोली में रहने के बाद नाना पाटेकर हेलिकॉप्टर से रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी पहुंचे थे। कोकोनट मोशन पिक्चर्स के बैनर तले निर्माता रिश्मन मजेठिया की फिल्म की शूटिंग नीती घाटी के लाता और मलारी क्षेत्र में हुई थी। फिल्म में नाना पाटेकर पिता की भूमिका निभा रहे थे। सीएम धामी से भी कही थी घर बनाने की बात उत्तराखंड को लेकर नाना पाटेकर की पसंद सिर्फ शूटिंग तक सीमित नहीं रही। 1 अक्टूबर 2022 को देहरादून में मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। सीएम धामी ने पहाड़ी टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया था। बातचीत के दौरान नाना ने उत्तराखंड के लोगों के व्यवहार और यहां के वातावरण की तारीफ करते हुए प्रदेश में अपना घर बनाने की इच्छा जताई थी। नाना पाटेकर का यह सपना पूरा नहीं हो सका। पहाड़ों में घर बसाने की उनकी इच्छा अब उत्तराखंड से जुड़ी उनकी खास यादों में शामिल हो गई है। नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर कार्डियक अरेस्ट हुआ था। उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। उनके निधन के बाद मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। ‘परिंदा’ में विलेन बने, 3 नेशनल अवॉर्ड जीते नाना ने 100 से ज्यादा फिल्में कीं। 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में नाना पाटेकर ने अन्ना का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 1994 की ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। 1996 की ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस तरह उन्हें करियर में 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए नाना पाटेकर को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों में भी काम किया। पीएम मोदी बोले- कई पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कुछ ही अभिनेता ऐसे थे, जिनमें नाना पाटेकर जैसी गहराई, अलग पहचान और खास मौजूदगी थी। उन्होंने हर किरदार में शानदार विविधता और रचनात्मकता दिखाई। उनके निभाए किरदार कई पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे। अक्षय कुमार ने कहा- नाना जी के निधन की खबर से बहुत दुखी हूं। वह उन चुनिंदा कलाकारों में से एक थे, जिन्हें आपको रुककर देखने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे उनके साथ (वेलकम) और फिर हाल ही में (हाउसफुल 5) में काम करने का मौका मिला। उन दोनों फिल्मों के सेट की बहुत सारी यादें हैं, जिन्हें मैं हमेशा अपने दिल के करीब रखूंगा। रितेश देशमुख ने कहा- मेरे पास शब्द नहीं हैं। नाना पाटेकर जी के निधन की खबर से ऐसा लग रहा है, जैसे मुझ पर कोई ट्रक चढ़ गया हो। मैं बेहद दुखी हूं। वह एक बेहतरीन अभिनेता थे और उनका कोई मुकाबला नहीं था। वह पर्दे से बाहर भी हीरो थे। लोगों की भलाई के लिए उन्होंने अपनी चैरिटी के जरिए लगातार काम किया। शिखर धवन ने कहा- भारतीय सिनेमा ने आज एक बेहद खास प्रतिभा को खो दिया है। नाना पाटेकर साहब, आपका काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ॐ शांति। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी बनकर कॉमेडी में भी छाए 2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया था। इस कॉमेडी रोल को काफी पसंद किया गया। वे इसके सीक्वल ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी के किरदार में नजर आए। फिल्म प्रहार के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी नाना पाटेकर ने फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में आर्मी मेजर की भूमिका निभाने के लिए भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण लिया था। इस दौरान उन्होंने करीब तीन साल तक ट्रेनिंग की थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद नाना पाटेकर टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े। उन्हें मानद कैप्टन के रूप में कमीशन मिला। बाद में उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद पद तक सेवाएं दीं और 2013 में रिटायर हुए। कारगिल युद्ध के दौरान भी सेना के साथ रहे नाना पाटेकर का सेना से जुड़ाव 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति लेकर करीब 2 महीने सेना के साथ अग्रिम इलाकों में बिताए। इस दौरान वह द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर जैसे क्षेत्रों में

रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:'परिंदा' के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया

रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:'परिंदा' के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक CPR देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर का करीब पांच दशक लंबा फिल्मी करियर रहा। उन्होंने थिएटर से शुरुआत की और बाद में फिल्मों का रुख किया। गमन, अंकुश, परिंदा, क्रांतिवीर, तिरंगा, अब तक छप्पन, अपहरण और वेलकम जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाई थीं। 1 जनवरी, 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के गांव मुरुद-जंजीरा में जन्मे विश्वनाथ गजानन पाटेकर, जिन्हें दुनिया ने नाना पाटेकर के नाम से जाना। नाना बचपन से ही बाकी बच्चों से अलग रहे। तेवर में बगावती सुर थे। समाज की कुरीतियों को कला के माध्यम से दिखाना चाहते थे। इसलिए पहले थिएटर में आए, फिर फिल्मों का रुख किया। नाना अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए भी चर्चा में रहते थे। जब रवि चोपड़ा ने इन्हें रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो इन्होंने गाली दे दी थी। फिल्म परिंदा की शूटिंग के वक्त नाना और फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा भिड़ गए थे। नाना पाटेकर से जुड़े कुछ खास किस्से.. 13 साल की उम्र, दिन में 16 किमी पैदल चलते थे नाना के पिता टेक्सटाइल पेंटिंग का एक छोटा सा बिजनेस चलाते थे। नाना जब 13 साल के थे, तभी किसी ने पिता के साथ फ्रॉड कर दिया। रातों-रात बिजनेस चौपट हो गया। सारी प्रॉपर्टी बिक गई। पैसे कमाने के लिए नाना को भी सड़क पर आना पड़ा। वे सुबह स्कूल जाते, शाम में फिल्म के पोस्टर्स पेंट करते थे। जहां पोस्टर पेंट करते थे, वहां से घर की दूरी 8 किलोमीटर थी। इस तरह दिन में 16 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करते थे। इस काम के लिए हर महीने 35 रुपए मिलते थे। यह बात 1963 के आस-पास की है। पैसों की इतनी किल्लत थी कि कभी-कभार खाना भी नसीब नहीं होता था। लंच या डिनर टाइम में नाना यूं ही अपने दोस्तों से मिलने चले जाते थे। इस उम्मीद में कि सामने से कोई दो रोटी खाने को पूछ ले। टीचर बगल में बिठाते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े नाना बचपन में बहुत शरारती थे। इतने शरारती कि टीचर इन्हें बगल में बिठाकर रखते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े। शरारत इतनी बढ़ गई कि नाना की मां ने उन्हें छठी कक्षा के बाद अपनी बहन के गांव भेज दिया। मां को लगा कि दूसरी जगह जाएगा तो सुधर जाएगा। नाना अपनी मौसी के घर एक-दो साल रहे, फिर वापस लौट आए। मौसी ने ही उन्हें वापस भेज दिया। उन्हें डर था कि नाना की संगत में कहीं उन्हीं के बच्चे न बिगड़ जाएं। खुद को बदसूरत समझते थे, पिता को लेकर पाला था भ्रम नाना अपने आप को दूसरों से कमतर आंकते थे। वे अपने आप को बदसूरत मानते थे। नाना के दोनों भाई लुक में उनसे ठीक थे। नाना को लगता था कि पिता बाकी भाइयों को ज्यादा तवज्जो देते हैं। नाना बचपन से ही गांव-दराज में होने वाले नाटक-ड्रामों में भाग लेते थे। एक बार वे गांव में नाटक कर रहे थे। उनके पिता बंबई (अब मुंबई) से सिर्फ नाटक देखने गांव आ गए। उस वक्त नाना का भ्रम टूट गया कि पिता उनसे प्यार नहीं करते। नाना को उस वक्त एहसास हुआ कि जैसे उन्होंने अपनी कला से पिता को प्रभावित किया, वैसे ही पूरी दुनिया को भी कर सकते हैं। पिता हॉस्पिटल में थे, उनकी दवाई के भी पैसे नहीं थे नाना ने पिता को लेकर जो भ्रम पाला था, वह तो समय के साथ खत्म हो गया, लेकिन एक बात का मलाल आज भी है। नाना अपने पिता के हाथ पर एक रुपया तक नहीं रख पाए। नाना ने यह बात दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कही थी। उन्होंने कहा था, ‘मुझे इस बात का गहरा दुख है कि अपनी कमाई से पिता के लिए कुछ नहीं कर पाया। उनका निधन भी एक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अस्पताल में हुआ था। उस वक्त उनकी दवाई के लिए भी मेरे पास पैसे नहीं थे। मेरे दोस्तों ने काफी मदद की। उन्होंने ही मुझे दवा के पैसे दिए थे।’ रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो रवि चोपड़ा को गालियां बक दीं स्मिता पाटिल ने नाना को बी.आर. चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा के पास भेजा। रवि चोपड़ा उस वक्त फिल्म ‘आज की आवाज’ बना रहे थे। उन्होंने नाना को रेपिस्ट का रोल ऑफर किया। ऑफर सुनते ही नाना भड़क उठे। उन्होंने सबके सामने रवि को गालियां बक दीं। नाना ने कहा कि तुम मुझे ऐरा-गैरा आदमी समझते हो, क्या मैं ऐसा रोल करूंगा? यह कहकर नाना वहां से लौटने लगे। तभी स्मिता पाटिल वहां पहुंच गईं। उन्होंने नाना और रवि, दोनों को समझाया। तब रवि चोपड़ा ने उन्हें मेन विलेन का रोल ऑफर किया। नाना इस बार भी सीधी तरह नहीं माने। उन्होंने कहा कि मैं कर तो लूंगा, लेकिन अपना किरदार खुद लिखूंगा। आखिरकार उन्होंने फिल्म में काम कर लिया था। विधु विनोद चोपड़ा के साथ हाथापाई, नाना का कुर्ता फट गया फिल्म परिंदा की शूटिंग के दौरान विधु विनोद चोपड़ा और नाना पाटेकर में लड़ाई हो गई थी। यह बात खुद विधु ने एक टीवी रियलिटी शो के दौरान स्वीकारी थी। उन्होंने कहा था, ‘नाना हर सीन में गाली देता था। मुझे यह बात बड़ी अजीब लगती थी। मुझे उस वक्त गालियां नहीं आती थीं। नाना बार-बार गालियां दिए जा रहा था। ऊपर से बिना शूटिंग किए घर जाने लगा। मैंने कहा कि पहले पैसे दो, फिर वापस जाओ। कम से कम मेरा नुकसान तो मत कराओ। यही बात कहते हुए मैंने उसका कुर्ता फाड़ दिया। अभी यह सब चल ही रहा था कि कैमरामैन ने शॉट रेडी कर दिया। आप फिल्म देखिए, एक सीन में नाना बनियान में बैठकर रोता दिखाई देगा। वह शॉट झगड़े के तुरंत बाद लिया गया था। खैर, शॉट परफेक्ट हो गया। बाद में नाना ने मुझे गले लगा लिया।’ सेफ्टी गार्ड पहनने से मना किया, आग में झुलसे