जैकलीन के केस से जज ने खुद को अलग किया:सुकेश से जुड़े ₹200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई अब दूसरी बेंच करेगी

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने के दिल्ली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने सुनवाई की शुरुआत में जैकलीन के वकील और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बताया कि मामला किसी अन्य बेंच के सामने लिस्ट किया जाएगा। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि एक संबंधित मामले में उनके बेटे सरकार की ओर से पेश हो चुके हैं। उन्होंने मामले को 25 जून को ऐसी बेंच के सामने लिस्ट करने का निर्देश दिया, जिसमें दोनों में से कोई एक सदस्य न हो। दिल्ली की एक अदालत ने 30 मई को जैकलीन फर्नांडिस, कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और 15 अन्य लोगों के खिलाफ 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था। जैकलीन 3 जून को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुई थीं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक्ट्रेस ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया था। क्या है 200 करोड़ का यह मामला यह पूरा मामला हाई-प्रोफाइल ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है। सुकेश पर आरोप है कि उसने दिल्ली की रोहिणी जेल के अंदर से ही फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से 200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली की थी। जांच एजेंसी ED का दावा है कि सुकेश ने इसी वसूली की रकम का एक बड़ा हिस्सा जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया था। सुकेश ने जैकलीन को लुभाने के लिए करोड़ों रुपए के गिफ्ट दिए थे। ED की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी हैं जैकलीन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच के बाद दाखिल की गई अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जैकलीन फर्नांडिस को भी आरोपी बनाया था। ED का कहना है कि जैकलीन को सुकेश के आपराधिक बैकग्राउंड और जबरन वसूली के पैसों के बारे में पहले से जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने उससे महंगे तोहफे लेना जारी रखा। इन गिफ्ट्स में लग्जरी गाड़ियां, महंगे ब्रांडेड बैग, कपड़े, ज्वेलरी और कई कीमती पेट्स (पालतू जानवर) शामिल थे। लीगल टीम की दलील- जैकलीन खुद पीड़ित हैं दूसरी तरफ, जैकलीन फर्नांडिस की लीगल टीम लगातार कोर्ट में यह दलील दे रही है कि एक्ट्रेस इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं। उनके वकीलों का कहना है कि जैकलीन खुद सुकेश चंद्रशेखर की साजिश का शिकार हुई हैं और उन्होंने सुकेश को एक बिजनेसमैन समझकर उससे दोस्ती की थी। जांच के दौरान सुकेश और जैकलीन की कई निजी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। फिलहाल इस मामले में कोर्ट यह तय कर रहा है कि आरोपों के आधार पर केस को आगे कैसे बढ़ाया जाए।
बॉस ने नहीं दी सिक लीव, ऑफिस में ही मौत:2 बार मेडिकल भी दिखाया था; 29 साल की महिला ने वॉशरूम में दम तोड़ा

साउथ अफ्रिकन महिला सीना धलधला की ऑफिस में मौत ने कॉर्पोरेट वर्क कल्चर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। रोजबैंक स्थित कार्ट ट्रैक कंपनी में सेंटर एजेंट के रूप में काम करने वाली सीना धलधला लंबे समय से बीमार थी और ऑफिस के वॉशरूम में उनकी मौत हो गई। हर बार रिजेक्ट हुई एप्लिकेशन परिवार के लोगों ने बताया कि उसने छुट्टी के लिए दो बार एप्लिकेशन दी लेकिन हर बार उसे रिजेक्ट कर दिया गया। यहां तक कि महिला को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय उनके मैनेजर इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि इलाच का खर्च कौन उठाएगा। कर्मचारियों ने कंपनी पर लगाया लापरवाही का आरोप सीना के साथ काम करने वाले कर्मचारियों ने कंपनी पर सीना की बीमारी को लेकर लापरवाही का आरोप लगाया है। सीना के साथ काम करने वाल एक व्यक्ति के अनुसार, मौत से एक दिन पहले सीना घुटनों के बल बैठकर रो रही थी। वह कह रही थी कि मैं बहुत बीमार हूं। उसके बाद भी मुझे शनिवार को भी आना है। वो भी तब जब मैंने बता दिया है कि मेरी तबियत बहुत खराब है। परिवार ने बुलाई प्राइवेट हॉस्पिटल से एंबुलेंस जिस दिन सीना की मौत हुई, उस दिन शाम को करीब साढ़े 6 बजे टीम लीडर ने उसे ऑफिस में बुलाया। जब वे वापिस आईं तो वे रो रही थीं। सीना की आंटी नोमुसा ने बताया कि उनकी भतीजी ने दो बार सिक लीव के लिए आवेदन किया था, जिसे ठुकरा दिया गया। वह फिजिकली और इमोशनली टूट चुकी थी। नोमुसा ने कहा कि मुझे खुद प्राइवेट हॉस्पिटल से एंबुलेंस बुलानी पड़ी। सीना के परिवार ने कंपनी पर लगाया आरोप सीना के परिवार का आरोप है कि मैनेजर ने एम्बुलेंस का इंतजार करने की बात कही, लेकिन उनके पास अस्पताल का कोई रेफरेंस नंबर भी नहीं था। वे सिर्फ ये कहते रहे कि नब्ज धीमी चल रही है लेकिन उन्होंने समय पर कोई कदम नहीं उठाया। सीना के रिक्वेस्ट करने पर कंपनी ने उससे यह कहा गया कि वह कंपनी की पॉलिसी का गलत इस्तेमाल कर रही है। लेबर एडवोकेट्स और सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि सीना की मौत एक वर्कप्लेस पर काम का प्रेशर होने का जीता जागता उदाहरण है। ये वही प्रेशर है जो कर्मचारियों के बीमार होने पर भी दिया जाता है। सीना की मौत ने ऑफिस की मेडिकल लीव पॉलिसीज पर भी सवाल खड़े किए हैं। ये खबर भी पढ़ें इंजीनियर की नौकरी बोरिंग लगी तो नूडल्स का स्टॉल लगाया:मेटा की नौकरी छोड़ी, मदद करती गर्लफ्रेंड के साथ वीडियो वायरल फाइनेंशियल एडवाइजर और कंटेंट क्रिएटर लुइसा ते ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो इंटरव्यू शेयर किया। ये इंटरव्यू एल्विन का है जो मेटा कंपनी से नौकरी छोड़ कर नूडल्स बेचने का काम कर रहे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें
होर्मुज में 90 दिन फंसे रहे रायपुर के रुद्रांश:जहाज के ऊपर से गुजरती थीं मिसाइलें-ड्रोन, सायरन बजते ही इंजन रूम में छिपते थे

जैसे ही हमले का सायरन बजता, जहाज के सभी 22 कर्मचारी भागकर नीचे इंजन रूम में छिप जाते थे। आसमान में मिसाइलें, ड्रोन और फाइटर जेट चक्कर काट रहे होते थे और अंदर सब अपनी जान बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना करते थे। रायपुर के रहने वाले रुद्रांश चौबे इस कार्गो शिप में असिस्टेंट कैप्टन और चीफ ऑफिसर हैं। उन्होंने मौत के इसी खौफ के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में 3 महीने बिताए, ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग के दौरान उनका जहाज ठीक उसी इलाके में फंस गया जहां लड़ाई चल रही थी। कई बार मिसाइलें जहाज के बिल्कुल ऊपर से गुजरीं, एक ड्रोन का टूटा हुआ मलबा भी उनके जहाज पर आकर गिरा। 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद कंपनी ने एक स्पेशल बोट (नाव) भेजकर रुद्रांश और उनके साथियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। पढ़िए पूरा इंटरव्यू:- सवाल: उस समय वहां की स्थिति कैसी थी और आप कैसे फंस गए? जवाब: हम अपना कार्गो डिस्चार्ज करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट में गए थे। इसके बाद हमें अगला कार्गो लेना था, तभी पता चला कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है और होर्मुज में आवाजाही बंद कर दी गई है। इसके बाद करीब 3 महीने तक हम उसी क्षेत्र में रहे। इस दौरान हमने कार्गो लोड और डिस्चार्ज भी किया और भारत लाने के लिए एक और कार्गो लोड किया। लंबे समय तक जहाज एंकर पर खड़ा रहा और हम वहीं फंसे रहे। सवाल: समुद्र के बीच 24 घंटे रहना पड़ता था, उस दौरान स्थिति कैसी थी? जवाब: समुद्र में रहने के दौरान हर समय सतर्क रहना पड़ता था। युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों में ड्रोन, मिसाइल और लड़ाकू विमानों की गतिविधियां दिखाई देती थीं। रेडियो पर लगातार अलग-अलग तरह के अलर्ट और सूचनाएं मिल रही थीं। जीपीएस स्पूफिंग जैसी घटनाएं भी हो रही थीं। शुरुआत में स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि हमें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है और कहां जाना है। बाद में डीजी शिपिंग, इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन और हमारी कंपनी की ओर से जारी सुरक्षा दिशा निर्देशों का पालन कर हमने स्थिति का सामना किया। सवाल: पहली ही नौकरी और घर से दूर सीधे युद्ध के मैदान में एंट्री, मौत के इस साए के बीच खुद को और घर वालों की चिंता को कैसे संभाला? जवाब: मेरी कोशिश रहती थी कि हर दिन घरवालों को अपनी स्थिति की जानकारी दूं। समाचारों में वे लगातार हमले और तनाव की खबरें देखते थे, इसलिए उन्हें यह बताना जरूरी था कि मैं सुरक्षित हूं। सैटेलाइट कम्युनिकेशन के जरिए हम संपर्क में रहते थे। हालांकि कई बार जीपीएस स्पूफिंग और तकनीकी समस्याओं के कारण चार-पांच दिन तक बात नहीं हो पाती थी, लेकिन हम किसी तरह एक छोटा मैसेज भेजकर अपने सुरक्षित होने की जानकारी दे देते थे। सवाल: क्या कभी ऐसा हुआ कि ड्रोन या मिसाइल का खतरा आपके जहाज के बेहद करीब पहुंच गया हो? जवाब: जी हां, एक बार जब हमारा जहाज बहरीन के आसपास था, तब हमारे जहाज के ऊपर एक ड्रोन विस्फोट हुआ था। उसके कुछ अवशेष जहाज पर आकर गिरे थे। इस घटना के बाद सभी लोगों को महसूस हुआ कि स्थिति वास्तव में गंभीर है। इसके अलावा मिसाइलें, ड्रोन और लड़ाकू विमान लगातार हमारे ऊपर से गुजरते दिखाई देते थे। शुरुआत में इससे काफी डर लगा, लेकिन बाद में हमने सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया और खुद को संभाला। सवाल: उस समय सबसे ज्यादा डर किस बात का लगता था? जवाब: डर यही था कि कहीं कोई मिसाइल या ड्रोन गलती से हमारे जहाज को निशाना न बना ले। रात में जब अलर्ट आते थे या ऊपर से लड़ाकू विमान गुजरते थे, तब मन में कई तरह के विचार आते थे। ऐसे समय में हम ईश्वर को याद करते थे और सुरक्षित रहने की प्रार्थना करते थे। सवाल: समुद्र में उतरते वक्त बड़े-बड़े सपने रहे होंगे और वहां जाकर मिसाइलें देखनी पड़ीं, पहली नौकरी का यह अनुभव कैसा रहा? जवाब: कॉलेज और एनसीसी के दौरान हमने कई आपात परिस्थितियों के बारे में पढ़ा और प्रशिक्षण लिया था कि संकट के समय कैसे काम करना चाहिए। लेकिन यह पहली बार था जब हमने ऐसी स्थिति को करीब से देखा। शुरुआत में काफी घबराहट थी और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। बाद में सुरक्षा नियमों का पालन किया, आपात स्थिति में वहां से सुरक्षित निकलने की तैयारियां समझीं और एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ाकर हालातों का सामना किया। सवाल: उस समय जहाज पर कितने लोग थे और आप लोग एक-दूसरे का मनोबल कैसे बढ़ाते थे? जवाब: हमारे जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर थे। उनमें सबसे कम अनुभव मेरा ही था, क्योंकि यह मेरी पहली समुद्री यात्रा और पहली नौकरी थी। हमने एक सरल तरीका अपनाया था कि युद्ध और तनाव के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें। हमारा मानना था कि अगर हम अपना काम ठीक से करते रहेंगे तो डर हम पर हावी नहीं होगा। हमने स्थिति को एक समस्या की तरह देखा और उसके समाधान पर ध्यान दिया। इसी सोच के कारण हम युद्ध की परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दे पाए। सवाल: क्या जहाज पर खाने-पीने या दूसरी जरूरतों की कोई समस्या हुई? जवाब: नहीं, जहाज में पर्याप्त राशन और जरूरी सामान मौजूद था। असली चुनौती मानसिक दबाव था। हर दिन अनिश्चितता के बीच गुजर रहा था और किसी को नहीं पता था कि हालात कब सामान्य होंगे। सवाल: फिर आप वहां से बाहर कैसे निकले? जवाब: मेरा 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो चुका था। इसी दौरान कंपनी ने हमारे लिए खास व्यवस्था की। एक सर्विस बोट के जरिए हमें बंदरगाह तक पहुंचाया गया। मैं और मेरे साथ नौ अन्य क्रू मेंबर जहाज से उतरे। इसके बाद हम दुबई पहुंचे और वहां से हवाई मार्ग से अपने-अपने घरों के लिए रवाना हुए। सवाल: अब होर्मुज फिर से बंद हो गया है, जब आप वहां फंसे थे तो आपका कैसा एक्सपीरियंस रहा था? जवाब: वह ऐसा एक्सपीरियंस था जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। उस संकट के समय हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता पूरी टीम को
मूवी रिव्यू – ‘मैं वापस आऊंगा रिव्यू’:इम्तियाज अली की फिल्म दिल को छूती है, लेकिन मूवी की लंबाई धैर्य की परीक्षा लेती है

इम्तियाज अली जब भी फिल्म बनाते हैं तो कहानी सिर्फ कहानी नहीं रहती, एक एहसास बन जाती है। ‘मैं वापस आऊंगा’ भी उसी तरह की फिल्म है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार उनकी प्रेम कहानी किसी पहाड़, शहर या सफर के बीच नहीं, बल्कि भारत पाकिस्तान बंटवारे की त्रासदी के बीच जन्म लेती है। यह फिल्म प्रेम की बात करती है, लेकिन सिर्फ प्रेम की नहीं। यह उन यादों की भी बात करती है जो उम्र के आखिरी पड़ाव तक इंसान का पीछा नहीं छोड़तीं। यह उन लोगों की कहानी है जिन्होंने अपना घर खोया, अपना शहर खोया और कई मामलों में अपना प्यार भी खो दिया। फिल्म की कहानी फिल्म की शुरुआत 95 वर्षीय ईशर सिंह ग्रेवाल से होती है। उम्र और बीमारी ने उनके शरीर को कमजोर कर दिया है, लेकिन एक जिद अब भी बाकी है। वह पाकिस्तान के सरगोधा वापस जाना चाहते हैं। उनके पोते निर्वैर को समझ नहीं आता कि आखिर दादा बार बार उसी जगह लौटने की बात क्यों करते हैं। धीरे धीरे कहानी अतीत की तरफ जाती है और सामने आती है ईशर और जिया की प्रेम कहानी। युवा ईशर के किरदार में वेदांग रैना हैं और जिया के रोल में शरवरी। दोनों की दुनिया में प्रेम है, सपने हैं और साथ जीने की उम्मीद है। फिर बंटवारा होता है और सब कुछ बदल जाता है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बंटवारे को राजनीतिक घटना की तरह नहीं, बल्कि आम लोगों के दर्द की तरह दिखाती है। हालांकि पहला हिस्सा कहानी को स्थापित करने में थोड़ा ज्यादा समय लेता है। कई बार लगता है कि फिल्म अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए जरूरत से ज्यादा घूम रही है। लेकिन दूसरे हिस्से में कहानी भावनात्मक तौर पर मजबूत होती जाती है और अंत तक आते आते असर छोड़ती है। फिल्म में एक्टिंग अगर इस फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ चुनना हो तो वह नसीरुद्दीन शाह हैं। उन्होंने ईशर सिंह के किरदार को निभाया नहीं, जिया है। भूलती हुई यादें, अधूरी बातें, खोया हुआ प्यार और आखिरी बार अतीत को छू लेने की बेचैनी, सब कुछ उनके चेहरे पर दिखाई देता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां बिना संवाद बोले भी वह दर्शकों को भावुक कर देते हैं। वेदांग रैना ने भी शानदार काम किया है। उनके भीतर एक सच्चाई दिखाई देती है जो किरदार को विश्वसनीय बनाती है। यह उनके करियर की अब तक की सबसे मजबूत परफॉर्मेंस में गिनी जा सकती है। शरवरी स्क्रीन पर आते ही ध्यान खींचती हैं। उनके किरदार में मासूमियत भी है और भावनात्मक गहराई भी। इम्तियाज अली की फिल्मों की नायिकाओं में जो एक अलग तरह की गर्माहट होती है, वह जिया के किरदार में भी दिखाई देती है। दिलजीत दोसांझ अपने किरदार में सहज हैं, लेकिन सच यह है कि फिल्म का सबसे भावुक और प्रभावशाली हिस्सा नसीरुद्दीन शाह और वेदांग रैना के हिस्से में जाता है। दिलजीत की कहानी जरूरी है, मगर उतनी यादगार नहीं बन पाती। फिल्म में डायरेक्शन इम्तियाज अली की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से भावनाओं को पकड़ना रही है और यहां भी वही दिखाई देता है। वह बंटवारे को आंकड़ों या इतिहास की किताबों की तरह नहीं दिखाते। वह दिखाते हैं कि उस दौर में बिछड़ना कैसा लगता होगा। किसी अपने का अचानक छूट जाना कैसा लगता होगा। फिल्म का दूसरा हिस्सा इम्तियाज की पकड़ को साबित करता है। कई दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं। खासकर वे सीन जहां प्रेम और बिछड़न एक साथ दिखाई देते हैं। हालांकि फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी भी यहीं है। लगभग तीन घंटे की अवधि हर दर्शक के लिए आसान नहीं होगी। पहले हिस्से में कई सीन ऐसे हैं जिन्हें छोटा किया जा सकता था। फिल्म कई बार जरूरत से ज्यादा ठहर जाती है। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म देखने में बेहद खूबसूरत लगती है। सिनेमेटोग्राफी फिल्म का बड़ा प्लस पॉइंट है। सरगोधा की गलियां, पुराने घर, खेत और उस दौर का माहौल स्क्रीन पर बहुत प्रभावी तरीके से उभरकर आता है। प्रोडक्शन डिजाइन पर भी मेहनत दिखाई देती है। फिल्म अपने समय और माहौल को विश्वसनीय बनाने में सफल रहती है। एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई होती तो फिल्म का असर और ज्यादा बढ़ सकता था। फिल्म में म्जूजिक इम्तियाज अली और ए आर रहमान की जोड़ी से हमेशा उम्मीदें रहती हैं। इस फिल्म में भी संगीत कहानी का हिस्सा बनकर आता है। बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को भावनात्मक ऊंचाई देता है। कुछ गाने सुनने के बाद भी याद रहते हैं, लेकिन एल्बम उस लेवल तक नहीं पहुंचता जहां रहमान के पुराने और यादगार काम पहुंचते रहे हैं। फिर भी फिल्म के मूड के हिसाब से संगीत पूरी तरह फिट बैठता है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी लंबाई है। करीब तीन घंटे की यह फिल्म कई जगह अपनी रफ्तार खो देती है। पहले हिस्से में धैर्य रखना पड़ता है। कुछ सब प्लॉट भी पूरी तरह प्रभाव नहीं छोड़ पाते। कई दर्शकों को यह भी लग सकता है कि फिल्म अपने भावनात्मक असर तक पहुंचने में जरूरत से ज्यादा समय लेती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘मैं वापस आऊंगा’ कोई ऐसी फिल्म नहीं है जो आपको सीट से बांधे रखे और हर दस मिनट में चौंकाए। यह धीरे धीरे खुलने वाली फिल्म है। इसके कुछ हिस्से बेहद खूबसूरत हैं, कुछ हिस्से थोड़े लंबे हैं, लेकिन जब फिल्म अपने भावनात्मक शिखर पर पहुंचती है तो असर छोड़ती है। नसीरुद्दीन शाह का शानदार अभिनय, वेदांग रैना और शरवरी की सादगी भरी केमिस्ट्री, इम्तियाज अली का संवेदनशील निर्देशन और ए आर रहमान का संगीत फिल्म को खास बनाते हैं। अगर आपको भावनात्मक कहानियां पसंद हैं और आप धीमी रफ्तार वाली फिल्मों से परहेज नहीं करते, तो ‘मैं वापस आऊंगा’ आपके लिए एक संतोषजनक सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है।
इमरान हाशमी की फिल्म की शूटिंग पर हरिद्वार में बवाल:सेट पर लगाया 'बार' का बोर्ड; हिंदूवादी संगठनों ने काटा हंगामा, हटाना पड़ा नाम

हरिद्वार में बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी की फिल्म की शूटिंग के दौरान बार एंड रेस्टोरेंट के सीन को लेकर विवाद हो गया। जैसे ही हरिद्वार में कुछ हिंदूवादी संगठनों और तीर्थ पुरोहितों को बार एंड रेस्टोरेंट के सेट के बारे में पता चला, तो वे मौके पर पहुंच गए। इसके बाद वहां जोरदार विरोध शुरू हो गया। बढ़ते विरोध को देखते हुए फिल्म यूनिट और मकान संचालकों को बोर्ड से “बार” शब्द हटाना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हो सका। शूटिंग कर रहे लोगों की तरफ से यह नहीं बताया गया कि किस फिल्म की शूटिंग चल रही थी। मामले को लेकर भी एक्टर की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। घटना के दौरान के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें दिखता है कि लोग फिल्म मेकर्स से बहस और धक्का-मुक्की करते नजर आ रहे हैं। तस्वीरें देखिए- कैसे शुरू हुआ विवाद हरिद्वार के श्रवणनाथ नगर स्थित भटिया भवन का है, जहां पिछले कुछ दिनों से बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी की फिल्म की शूटिंग चल रही थी। बुधवार देर रात फिल्म के एक दृश्य की शूटिंग के लिए मकान के बाहर “बार एंड रेस्टोरेंट” का बोर्ड लगाया गया। इसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि हरिद्वार विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी है, जहां करोड़ों श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर आते हैं। ऐसे में शहर के अंदर बार का बोर्ड लगाना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। लोगों ने आरोप लगाया कि फिल्मों की शूटिंग के नाम पर हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। देर रात तक चली बहस विरोध बढ़ने पर व्यापारियों, समाजसेवियों, भवन संचालकों और फिल्म यूनिट के सदस्यों के बीच देर रात तक बहस होती रही। लोगों ने स्पष्ट कहा कि धर्मनगरी की गरिमा और मर्यादा के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आखिरकार विरोध के दबाव में बोर्ड से “बार” शब्द हटा दिया गया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। मां गंगा व्यापार मंडल के अध्यक्ष कशिश भाटिया ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि भवन के बाहर “बार एंड रेस्टोरेंट” का बोर्ड लगाया गया है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार एक पवित्र तीर्थस्थल है, जहां मांस और मदिरा प्रतिबंधित हैं। ऐसे में शूटिंग के लिए भी इस तरह का बोर्ड लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए बोर्ड से “बार” शब्द हटा दिया गया। समाजसेवी करण पंडित ने कहा कि जिस स्थान पर बोर्ड लगाया गया था, वहां से कुछ ही दूरी पर मां गंगा का पावन तट स्थित है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की धार्मिक पहचान और आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे कोई फिल्म निर्माता हो या किसी बड़े उद्योग से जुड़ा व्यक्ति, धर्मनगरी की मर्यादा सर्वोपरि है। तीर्थ पुरोहितों ने भी उठाए सवाल तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित ने कहा कि हरिद्वार की पवित्रता बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों के विरोध के कारण ही बोर्ड हटाया गया और यह शहरवासियों की जागरूकता का परिणाम है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में भी यदि कोई हरिद्वार की धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगा तो उसका विरोध किया जाएगा। पूरे विवाद के दौरान यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस फिल्म की शूटिंग चल रही थी। फिल्म यूनिट से जुड़े लोगों ने केवल इतना कहा कि उनके पास शूटिंग की अनुमति है, लेकिन फिल्म का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि शूटिंग के लिए मुंबई से कलाकार और तकनीकी टीम हरिद्वार पहुंची हुई है। इस घटना के बाद एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में फिल्मांकन के दौरान स्थानीय परंपराओं, आस्थाओं और जनभावनाओं का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए। हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं…
पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा के जिम पर फायरिंग:दिल्ली में बदमाशों ने गोलियां चलाईं; लॉरेंस गैंग ने ली जिम्मेदारी, लिखा- कहा था सलमान खान से दूर रह

दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में गुरुवार तड़के एक जिम के बाहर मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह जिम दिल्ली में राजौरी गार्डन के रहने वाले 2 कारोबारियों का है। इसके ब्रांड एंबेसडर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर कुख्यात लॉरेंस गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इसमें गुरु रंधावा के बारे में लिखा है- इसे समझाया था कि सलमान खान से दूर रह, वह हमारा दुश्मन है, लेकिन ये उसके बहुत करीबी बन रहा था। जितने भी देशद्रोही हैं, जहां भी छिपे हैं, वहीं पर मारेंगे। हमलावरों ने जिम पर कम से कम 7 राउंड गोलियां चलाईं और वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए। हालांकि, हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जबरन वसूली, गैंगवार और आपसी रंजिश समेत सभी एंगल से जांच शुरू कर दी है। केयरटेकर के पहुंचने पर हुआ खुलासा घटना का पता तब चला जब सुबह करीब सवा 5 बजे जिम के केयरटेकर वहां पहुंचे। जिम के शीशे टूटे देख और गोलियों के निशान पाकर उन्होंने तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। जांच के लिए तुरंत फोरेंसिक टीम (FSL) को भी मौके पर बुलाया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से खाली कारतूस और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस हमलावरों की पहचान करने के लिए जिम के आसपास और भागने वाले रास्तों पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। जांच में सामने आया है कि जिस फिटनेस सेंटर पर हमला हुआ है, उसके मालिक राजौरी गार्डन के रहने वाले दो व्यवसायी हैं। वहीं, एक बेहद मशहूर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा इस जिम के ब्रांड एंबेसडर हैं। इसी वजह से इस हमले को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है। रंगदारी और आपसी रंजिश के एंगल से जांच शुरू दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, मामले की तफ्तीश के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। पुलिस इस मामले को फिरौती, गैंगस्टरों की आपसी रंजिश और मालिकों की किसी निजी दुश्मनी के एंगल से जोड़कर देख रही है। पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और बदमाशों की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं। सामने आई पोस्ट में क्या-क्या लिखा… घटना के बाद वायरल की गई पोस्ट में लिखा है- जय महाकाल, जय श्री राम, राम राम सभी भाइयों को। जो आज ये 24HS FITNESS (24 आवर्स फिटनेस) दिल्ली में गुरु रंधावा की जिम पर जो फायरिंग हुई है, वह मैंने अनिल पंडित USA और लॉरेंस ग्रुप ने की है। पोस्ट में आगे लिखा है- ये सलमान खान से कुछ ज्यादा ही करीबी हो रहा था। इसे हमने पहले भी समझाया था कि इससे दूर रहो, ये हमारा दुश्मन है, लेकिन इसको समझ नहीं आई और जितने भी हमारे दुश्मन हैं वे किसी भी कोने में छुप जाएं, जल्दी ही सबसे मुलाकात होगी। वेट एंड वॉच। पोस्ट में अंत में नोट लगाकर लिखा गया है- और जितने भी ये देशद्रोही हैं, जो देश के खिलाफ साजिश रचते हैं, दुनिया के किसी भी कोने में छुप जाना, वहीं पर ही मारेंगे। अंत में सलाम साहिदा नू, लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप, जितेंद्र गोगी मान ग्रुप, हैरी बॉक्सर, आरजू बिश्नोई, टायसन बिश्नोई, शुभम लोंकर, हरमन संधू और अंकित सेरसा का नाम लिखा है। हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं…
वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, 17 घायल

चीन के गुआनशी क्षेत्र में हुए एक जोरदार धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घायलों की हालत खतरे से बाहर है। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में गैस पाइपलाइन को हादसे की वजह मानने से इनकार किया है। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि धमाका किस वजह से हुआ। फिलहाल धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान चलाया गया।
वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, 17 घायल

चीन के गुआनशी क्षेत्र में हुए एक जोरदार धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घायलों की हालत खतरे से बाहर है। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में गैस पाइपलाइन को हादसे की वजह मानने से इनकार किया है। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि धमाका किस वजह से हुआ। फिलहाल धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान चलाया गया।
अमेरिका का ईरान पर लगातार दूसरे दिन हमला:जवाब में ईरान ने कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, होर्मुज फिर बंद किया

अमेरिका ने गुरुवार सुबह ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। ईरानी मीडिया के मुताबिक केश्म द्वीप, बंदर अब्बास, मीनाब और सीरिक में धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि कई इलाकों में एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव कर दिए गए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान समझौते की बातचीत में देरी कर रहा है, इसलिए अमेरिका दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने 49 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं और लड़ाकू विमानों से भी हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, किसी नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के लिए बंद कर दिया है, लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे खारिज कर दिया। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिका का ईरान पर लगातार दूसरे दिन हमला:जवाब में ईरान ने कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, होर्मुज फिर बंद किया

अमेरिका ने गुरुवार सुबह ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए है। अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद लगातार दूसरे दिन बड़ा अटैक है। ईरानी मीडिया के मुताबिक केश्म द्वीप, बंदर अब्बास, मीनाब और सीरिक में धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि कई इलाकों में एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव कर दिए गए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान समझौते की बातचीत में देरी कर रहा है, इसलिए अमेरिका दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने 49 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं और लड़ाकू विमानों से भी हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, किसी नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को सभी जहाजों के लिए बंद कर दिया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे खारिज कर दिया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. जॉर्डन बोला- 5 ईरानी मिसाइलें हवा में मार गिराईं: जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि ईरान से दागी गई 5 मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। 2. ईरान का दावा- अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराया: तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक दक्षिणी ईरान के जाम इलाके में अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को गिराया गया। अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। 3. होर्मुज के पास टैंकर पर अमेरिकी हमला: ओमान तट के पास एक ऑयल टैंकर पर अमेरिकी हमले के बाद आग लग गई। जहाज पर 24 भारतीय समेत 28 क्रू मेंबर सवार थे। एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कुछ क्रू मेंबर लापता बताए गए। 4. रूस ने अमेरिका-ईरान से हमले रोकने की अपील की: मॉस्को ने दोनों देशों से संयम बरतने और सैन्य कार्रवाई बंद कर कूटनीति का रास्ता अपनाने को कहा। 5. कतर का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा: कतर ने क्षेत्रीय तनाव कम करने और अमेरिका-ईरान टकराव पर बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल ईरान भेजा है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…








