खाने का तेल अब 9 स्टैंडर्ड पैक-साइज में ही मिलेगा:कंपनियों को वॉल्यूम के साथ वजन लिखना भी जरूरी, 3 महीने में लागू होंगे नए नियम

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने शनिवार को लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत खाने वाले तेल के लिए स्टैंडर्ड पैक साइज अनिवार्य कर दिए हैं। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांड्स के बीच कीमतों की तुलना करने और सही फैसला लेने में मदद करना है। इसके लिए विभाग ने नेट क्वांटिटी और स्टैंडर्ड पैक साइज तय करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) में बदलाव किया है। तेल कंपनियों और इंपोर्टर्स को इन नए नियमों को अपनाने के लिए 3 महीने का समय दिया गया है। 9 तय साइज में ही बिकेगा कुकिंग ऑयल नई SoP के तहत अब देश में प्रमुख कुकिंग ऑयल सिर्फ 9 तय स्टैंडर्ड पैक साइज में ही बेचे जा सकेंगे। ये साइज 200 ml/g, 500 ml/g, 1 लीटर/किग्रा, 2 लीटर/किग्रा, 3 लीटर/किग्रा, 4 लीटर/किग्रा, 5 लीटर/किग्रा, 15 लीटर/किग्रा और 20 लीटर/किग्रा होंगे। ये नए नियम पाम ऑयल, सोयाबीन, सनफ्लावर, सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटनसीड, कॉर्न ऑयल और सभी तरह के ब्लेंडेड एडिबल ऑयल्स (मिश्रित तेल) पर लागू होंगे। वॉल्यूम के साथ वजन लिखना भी जरूरी नए नियमों के मुताबिक, अगर खाने वाले तेल के पैकेट पर उसकी मात्रा वॉल्यूम यानी लीटर या मिलीलीटर में दिखाई गई है, तो उस पर लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 के तहत उसके बराबर का वजन (ग्राम या किलोग्राम) भी साफ-साफ लिखना होगा। यह नियम देश में बनने वाले (डोमेस्टिक) और विदेशों से आयात होने वाले (इंपोर्टेड) दोनों तरह के खाद्य तेलों यानी खाने के तेल पर समान रूप से लागू होगा। छोटे पैकेट्स को नियम से मिली छूट बाजार में कम कीमत वाले छोटे पैकेट्स की उपलब्धता लगातार बनी रहे, इसके लिए सरकार ने कुछ छूट भी दी है। 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम साइज वाले पैकेट्स को इस स्टैंडर्ड पैक साइज के नियम से बाहर रखा गया है। इसके अलावा जो माइनर एडिबल ऑयल्स (कम इस्तेमाल होने वाले तेल) हैं, उन्हें भी इस दायरे से छूट दी गई है। जो कंपनियां डेडलाइन से पहले इसे अपनाना चाहती हैं, वे तुरंत इसकी शुरुआत कर सकती हैं। 90% इंडस्ट्री की सहमति से लिया फैसला सरकार का यह आधिकारिक फैसला एडिबल ऑयल सेक्टर के लगभग 90% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख उद्योग संघों यानी इंडस्ट्री एसोसिएशन के साथ लंबी और विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है। इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से सभी कंपनियों को बराबरी का मौका मिलेगा। तीन साल से बाजार में बढ़ रहा था कंफ्यूजन क्या है लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट?
खाने का तेल अब 9 स्टैंडर्ड पैक-साइज में ही मिलेगा:कंपनियों को वॉल्यूम के साथ वजन लिखना भी जरूरी, 3 महीने में लागू होंगे नए नियम

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने शनिवार को लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क के तहत खाने वाले तेल के लिए स्टैंडर्ड पैक साइज अनिवार्य कर दिए हैं। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को अलग-अलग ब्रांड्स के बीच कीमतों की तुलना करने और सही फैसला लेने में मदद करना है। इसके लिए विभाग ने नेट क्वांटिटी और स्टैंडर्ड पैक साइज तय करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) में बदलाव किया है। तेल कंपनियों और इंपोर्टर्स को इन नए नियमों को अपनाने के लिए 3 महीने का समय दिया गया है। 9 तय साइज में ही बिकेगा कुकिंग ऑयल नई SoP के तहत अब देश में प्रमुख कुकिंग ऑयल सिर्फ 9 तय स्टैंडर्ड पैक साइज में ही बेचे जा सकेंगे। ये नए नियम पाम ऑयल, सोयाबीन, सनफ्लावर, सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कॉटनसीड, कॉर्न ऑयल और सभी तरह के ब्लेंडेड एडिबल ऑयल्स (मिश्रित तेल) पर लागू होंगे। वॉल्यूम के साथ वजन लिखना भी जरूरी नए नियमों के मुताबिक, अगर खाने वाले तेल के पैकेट पर उसकी मात्रा वॉल्यूम यानी लीटर या मिलीलीटर में दिखाई गई है, तो उस पर लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 के तहत उसके बराबर का वजन (ग्राम या किलोग्राम) भी साफ-साफ लिखना होगा। यह नियम देश में बनने वाले (डोमेस्टिक) और विदेशों से आयात होने वाले (इंपोर्टेड) दोनों तरह के खाद्य तेलों यानी खाने के तेल पर समान रूप से लागू होगा। छोटे पैकेट्स को नियम से मिली छूट बाजार में कम कीमत वाले छोटे पैकेट्स की उपलब्धता लगातार बनी रहे, इसके लिए सरकार ने कुछ छूट भी दी है। 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम साइज वाले पैकेट्स को इस स्टैंडर्ड पैक साइज के नियम से बाहर रखा गया है। इसके अलावा जो माइनर एडिबल ऑयल्स (कम इस्तेमाल होने वाले तेल) हैं, उन्हें भी इस दायरे से छूट दी गई है। जो कंपनियां डेडलाइन से पहले इसे अपनाना चाहती हैं, वे तुरंत इसकी शुरुआत कर सकती हैं। 90% इंडस्ट्री की सहमति से लिया फैसला सरकार का यह आधिकारिक फैसला एडिबल ऑयल सेक्टर के लगभग 90% हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख उद्योग संघों यानी इंडस्ट्री एसोसिएशन के साथ लंबी और विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है। इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से सभी कंपनियों को बराबरी का मौका मिलेगा। तीन साल से बाजार में बढ़ रहा था कंफ्यूजन क्या है लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट? ये खबर भी पढ़ें… 85% इथेनॉल मिक्स वाला फ्लेक्स फ्यूल लॉन्च: दिल्ली में पहला पंप खुला; पेट्रोल से 20 रुपए सस्ता मिलेगा, कीमत ₹82.12 प्रति लीटर 85% एथेनॉल मिक्स वाला E85 फ्यूल दिल्ली में आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडियन ऑयल (IOC) के पूसा रोड आउटलेट पर दिल्ली के पहले E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन का उद्घाटन किया। पूरी खबर पढ़ें…
जाह्नवी कपूर ने क्या विवादित शॉट्स पर जताई थी आपत्ति:एक्ट्रेस की कथित पर्सनल चैट लीक; दावा- पेड्डी में राम चरण ने डायरेक्टर को डांटा था

फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की एक कथित पर्सनल चैट सोशल मीडिया पर लीक हो गई है। जाह्नवी के फैन क्लब्स की तरफ से शेयर किए गए इन स्क्रीनशॉट्स में दावा किया जा रहा है कि अभिनेत्री ने फिल्म की शूटिंग के दौरान कुछ आपत्तिजनक कैमरा एंगल पर चिंता जताई थी। यह चैट फिल्म के डायरेक्टर बुच्ची बाबू सना की माफी के बाद सामने आई है। चैट के मुताबिक, को-स्टार राम चरण ने भी इस मामले में जाह्नवी का सपोर्ट किया था और डायरेक्टर को डांटा था। हालांकि, जाह्नवी कपूर या उनकी टीम ने अभी तक इन मैसेजेस की पुष्टि नहीं की है। यह विवाद तब बढ़ा जब फिल्म ‘पेड्डी’ में जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को पर्दे पर दिखाने के तरीके की दर्शकों ने आलोचना की। लोगों का कहना है कि फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार की कहानी से ज्यादा उसकी शारीरिक बनावट पर फोकस किया गया है। आपत्तिजनक शॉट्स पर जाह्नवी ने दी थी चेतावनी फैन पेजेस पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक, जाह्नवी कपूर ने फिल्म में अपने किरदार के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कैमरा एंगल का बार-बार विरोध किया था। 30 अक्टूबर की तारीख वाले एक मैसेज में कथित तौर पर अभिनेत्री ने लिखा, “मैंने उन्हें साफ मना किया था कि फिल्म में कोई भी छाती और कमर के शॉट्स नहीं होने चाहिए।” सपोर्ट में आए राम चरण लीक हुई चैट में जाह्नवी ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर उनके को-स्टार राम चरण ने उनका पूरा साथ दिया था। जाह्नवी ने लिखा, “राम सर बहुत अच्छे हैं। उन्होंने डायरेक्टर पर चिल्लाते हुए साफ कहा कि तुम आगे से कभी उसके ऐसे एंगल से शॉट नहीं लोगे। इसके बाद डायरेक्टर उदास हो गए थे।” डायरेक्टर मांग चुके माफी डायरेक्टर बुच्ची बाबू सना ने शनिवार को बयान जारी कर माफी मांगी। बुची बाबू सना ने आधिकारिक X अकाउंट पर बयान जारी कर लिखा, एक फिल्ममेकर के तौर पर, मेरा मानना है कि सिनेमा को लोगों का मनोरंजन करना चाहिए, उन्हें प्रेरित करना चाहिए और उनसे जुड़ना चाहिए। इसका मकसद कभी भी किसी को असहज महसूस कराना या उनका अपमान करना नहीं होना चाहिए। हमने पेड्डी के कुछ सीन पर आए रिएक्शन को गंभीरता से लिया है। महिलाओं के सम्मान की बात करते हुए बाबू ने लिखा, मैं हमेशा महिलाओं का सम्मान करता आया हूं, चाहे वह पर्दे पर हों या असल जिंदगी में। हमारा इरादा कभी भी किसी महिला किरदार को गलत तरीके से दिखाने या उसका अपमान करने का नहीं था, लेकिन अगर फिल्म का कोई हिस्सा लोगों को ऐसा महसूस कराता है, तो हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं आपत्तिजनक सीन्स में बदलाव करेंगे सीन में बदलाव की बात करते हुए बुच्ची बाबू ने लिखा, मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद हमने फिल्म के उन हिस्सों में बदलाव करने का फैसला किया है जिन पर आपत्ति जताई गई है। सिनेमा और दर्शकों का रिश्ता बहुत खास होता है। एक कहानीकार के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम समय के साथ बदलती सोच और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखें। अपने बयान के अंत में फिल्ममेकर ने लिखा, हर महिला सम्मान, गरिमा और सही रिप्रेजेंटेशन की हकदार है। हम आगे भी ऐसी कहानियां सुनाने के लिए कमिटेड हैं जो मजबूत किरदारों को सामने लाएं और इन वैल्यूज को बनाए रखें। अपनी राय ईमानदारी से शेयर करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद। किरदार को जरूरत से ज्यादा बोल्ड बताया दरअसल, फिल्म पेड्डी की रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि किरदार को कहानी की जरूरत के बजाय दर्शकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से अधिक बोल्ड तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसके चलते फिल्म मेकर्स की ऑनलाइन आलोचना होने लगी। हालांकि, पूरे विवाद पर अभी तक जाह्नवी कपूर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अभिनेत्री ने मामले पर पब्लिकली कोई बयान नहीं दिया है।
जाह्नवी कपूर ने क्या विवादित शॉट्स पर जताई थी आपत्ति:एक्ट्रेस की कथित पर्सनल चैट लीक; दावा- पेड्डी में राम चरण ने डायरेक्टर को डांटा था

फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की एक कथित पर्सनल चैट सोशल मीडिया पर लीक हो गई है। जाह्नवी के फैन क्लब्स की तरफ से शेयर किए गए इन स्क्रीनशॉट्स में दावा किया जा रहा है कि अभिनेत्री ने फिल्म की शूटिंग के दौरान कुछ आपत्तिजनक कैमरा एंगल पर चिंता जताई थी। यह चैट फिल्म के डायरेक्टर बुच्ची बाबू सना की माफी के बाद सामने आई है। चैट के मुताबिक, को-स्टार राम चरण ने भी इस मामले में जाह्नवी का सपोर्ट किया था और डायरेक्टर को डांटा था। हालांकि, जाह्नवी कपूर या उनकी टीम ने अभी तक इन मैसेजेस की पुष्टि नहीं की है। यह विवाद तब बढ़ा जब फिल्म ‘पेड्डी’ में जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को पर्दे पर दिखाने के तरीके की दर्शकों ने आलोचना की। लोगों का कहना है कि फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार की कहानी से ज्यादा उसकी शारीरिक बनावट पर फोकस किया गया है। आपत्तिजनक शॉट्स पर जाह्नवी ने दी थी चेतावनी फैन पेजेस पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स के मुताबिक, जाह्नवी कपूर ने फिल्म में अपने किरदार के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कैमरा एंगल का बार-बार विरोध किया था। 30 अक्टूबर की तारीख वाले एक मैसेज में कथित तौर पर अभिनेत्री ने लिखा, “मैंने उन्हें साफ मना किया था कि फिल्म में कोई भी छाती और कमर के शॉट्स नहीं होने चाहिए।” सपोर्ट में आए राम चरण लीक हुई चैट में जाह्नवी ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर उनके को-स्टार राम चरण ने उनका पूरा साथ दिया था। जाह्नवी ने लिखा, “राम सर बहुत अच्छे हैं। उन्होंने डायरेक्टर पर चिल्लाते हुए साफ कहा कि तुम आगे से कभी उसके ऐसे एंगल से शॉट नहीं लोगे। इसके बाद डायरेक्टर उदास हो गए थे।” डायरेक्टर मांग चुके माफी डायरेक्टर बुच्ची बाबू सना ने शनिवार को बयान जारी कर माफी मांगी। बुची बाबू सना ने आधिकारिक X अकाउंट पर बयान जारी कर लिखा, एक फिल्ममेकर के तौर पर, मेरा मानना है कि सिनेमा को लोगों का मनोरंजन करना चाहिए, उन्हें प्रेरित करना चाहिए और उनसे जुड़ना चाहिए। इसका मकसद कभी भी किसी को असहज महसूस कराना या उनका अपमान करना नहीं होना चाहिए। हमने पेड्डी के कुछ सीन पर आए रिएक्शन को गंभीरता से लिया है। महिलाओं के सम्मान की बात करते हुए बाबू ने लिखा, मैं हमेशा महिलाओं का सम्मान करता आया हूं, चाहे वह पर्दे पर हों या असल जिंदगी में। हमारा इरादा कभी भी किसी महिला किरदार को गलत तरीके से दिखाने या उसका अपमान करने का नहीं था, लेकिन अगर फिल्म का कोई हिस्सा लोगों को ऐसा महसूस कराता है, तो हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं आपत्तिजनक सीन्स में बदलाव करेंगे सीन में बदलाव की बात करते हुए बुच्ची बाबू ने लिखा, मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद हमने फिल्म के उन हिस्सों में बदलाव करने का फैसला किया है जिन पर आपत्ति जताई गई है। सिनेमा और दर्शकों का रिश्ता बहुत खास होता है। एक कहानीकार के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम समय के साथ बदलती सोच और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखें। अपने बयान के अंत में फिल्ममेकर ने लिखा, हर महिला सम्मान, गरिमा और सही रिप्रेजेंटेशन की हकदार है। हम आगे भी ऐसी कहानियां सुनाने के लिए कमिटेड हैं जो मजबूत किरदारों को सामने लाएं और इन वैल्यूज को बनाए रखें। अपनी राय ईमानदारी से शेयर करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद। किरदार को जरूरत से ज्यादा बोल्ड बताया दरअसल, फिल्म पेड्डी की रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि किरदार को कहानी की जरूरत के बजाय दर्शकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से अधिक बोल्ड तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसके चलते फिल्म मेकर्स की ऑनलाइन आलोचना होने लगी। हालांकि, पूरे विवाद पर अभी तक जाह्नवी कपूर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अभिनेत्री ने मामले पर पब्लिकली कोई बयान नहीं दिया है।
पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट में पहुंचे बॉलीवुड सितारे:अनिल कपूर-शत्रुघ्न सिन्हा- गोविंदा ने दी श्रद्धांजलि

दिवंगत फिल्म निर्माता और पूर्व सीबीएफसी चीफ पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट शनिवार को मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित की गई। शाम 5 बजे से 7 बजे तक हुई इस प्रार्थना सभा में बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हुईं और उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रेयर मीट में अनिल कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, डेविड धवन, गोविंदा, चंकी पांडे, शक्ति कपूर समेत फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार पहुंचे। सभी ने निहलानी परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत निर्माता को याद किया। पहलाज निहलानी का 4 जून को 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वे लंबे समय से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई थी। पहलाज निहलानी ने ‘आंखें’, ‘शोला और शबनम’, ‘इल्जाम’ और ‘अंदाज’ जैसी कई सफल फिल्मों का निर्माण किया था। गोविंदा और डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी ने 90 के दशक में कई हिट फिल्में दीं। फिल्म निर्माण के अलावा वे 2015 से 2017 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष भी रहे थे।
पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट में पहुंचे बॉलीवुड सेलेब्स:हेमा मालिनी, अनिल कपूर और गोविंदा समेत कई कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि

दिवंगत फिल्म निर्माता और पूर्व सीबीएफसी चीफ पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट शनिवार को मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित की गई। शाम 5 बजे से 7 बजे तक हुई इस प्रार्थना सभा में बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हुईं और उन्हें श्रद्धांजलि दी। पहलाज निहलानी का 4 जून को 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वे लंबे समय से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। प्रेयर मीट में हेमा मालिनी अनिल कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, गोविंदा, चंकी पांडे, जैकी श्रॉफ और फरहान अख्तर समेत फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार पहुंचे। सभी ने निहलानी परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत निर्माता को याद किया। देखें प्रेयर मीट की तस्वीरें … पहलाज निहलानी ने ‘आंखें’, ‘शोला और शबनम’, ‘इल्जाम’ और ‘अंदाज’ जैसी कई सफल फिल्मों का निर्माण किया था। गोविंदा और डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी ने 90 के दशक में कई हिट फिल्में दीं। फिल्म निर्माण के अलावा वे 2015 से 2017 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष भी रहे थे। पहलाज निहलानी का करियर पहलाज निहलानी ने 1982 में बतौर प्रोड्यूसर पहली फिल्म हथकड़ी बनाई और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 1985 में उनकी दूसरी फिल्म आंधी-तूफान रिलीज हुई, जिसने उन्हें बॉलीवुड में एक निर्माता के रूप में पहचान दिलाई। साल 1986 में उन्होंने फिल्म इल्जाम बनाई, जिससे गोविंदा को पहला बड़ा ब्रेक मिला। फिल्म हिट रही और गोविंदा को देशभर में पहचान मिली। 1987 में आई आग ही आग के जरिए चंकी पांडे ने बॉलीवुड में कदम रखा। इसी साल निहलानी ने फिल्म गुनाहों का फैसला भी बनाई। 1990 के दशक में पहलाज निहलानी ने शोला और शबनम और आंखें जैसी सुपरहिट फिल्मों का निर्माण किया। आंखें उस दौर की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक साबित हुई। गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक गोविंदा ने पहलाज निहलानी के साथ आंखें, शोला और शबनम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था, लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ चंकी पांडे, पहलाज निहलानी, गोविंदा और डेविड धवन की पुरानी तस्वीर ‘अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो। लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।’ गोविंदा और पहलाज निहलानी ने कुल चार फिल्मों में साथ काम किया। इनमें इल्जाम, शोला और शबनम, आंखें और रंगीला राजा शामिल हैं। काम नहीं था, तो गोविंदा को दी शोला और शबनम उसी पॉडकास्ट में पहलाज ने कहा, ‘गोविंदा के पास काम नहीं था, तब शोला और शबनम हमने शुरू की तो उससे पहली बार कॉमेडी रोल करवाया। फिर जब काम नहीं था उसके बाद तब फिल्म आंखें करवाई। दोनों फिल्मों में एकदम अलग रोल था।’ पहलाज निहलानी ने कहा था- गोविंदा इनसिक्योर है जब पहलाज निहलानी से पूछा गया कि क्या गोविंदा के नेगेटिव एटीट्यूड की वजह से कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘जब सक्सेस मिलती है, तो आदमी हर दर्द सह लेता है, लेकिन जब सक्सेस की सीढ़ी से नीचे उतरते हैं तो तकलीफ होती है। गोविंदा में वो प्रॉब्लम शुरू से थी, क्योंकि वो खुद को इनसिक्योर मानता था।’ ‘उसके पिता महबूब खान के बहुत बड़े हीरो रहे हैं। बड़ी-बड़ी पिक्चरें की, अच्छे प्रोड्यूसर भी रहे, नुकसान हुआ। इसके बाद उसने इतना दर्द सहा, बहुत सारी चीजें उसके हाथ से निकल गईं, स्ट्रगल करना पड़ा। वो सारी चीजें उसके अंदर थीं। वो इनसिक्योरिटी रहती है। उसे था कि कहीं से पैसे आ जाएं। उसके पास भाई-बहन की जिम्मेदारियां थीं। वो पैसे में उलझा रहता था, उसे करना भी सब था।’ ‘इस वजह से उसका एटीट्यूड ऐसा हो गया था। जब काम और प्रेशर बहुत हो जाता है, तो आप छोड़ नहीं सके, तो चीजें बढ़ गईं। फिर आदत बन गई, वहमी हो गया। जब नहीं चलता आदमी तो सब उसे डैमेज करते हैं, वर्ना गोविंदा जैसा हीरो ढूंढने पर नहीं मिलेगा।’ दिव्या भारती को चोट लगी, तो रोक दी थी शूटिंग पहलाज निहलानी ने दिव्या भारती के साथ फिल्म शोला और शबनम की थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने दिव्या भारती के डेडिकेशन से जुड़ा किस्सा शेयर किया और बताया कि कैसे उन्हें दिव्या भारती की चोट के चलते एक्ट्रेस के इनकार के बावजूद शूटिंग रोकनी पड़ी थी। पहलाज निहलानी ने कहा था, ‘शोला और शबनम’ के दौरान हम 20 घंटे शूटिंग करते थे। हम सुबह से शूटिंग शुरू करते थे और उसके बाद बैक टू बैक सीन, फिर डांस और फिर दूसरे सीन शूट होते थे। एक दिन मुझे याद है हम ऊटी में शूट कर रहे थे और दिव्या का पैर एक कील पर पड़ गया। उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया।’ ‘मैं मॉनिटर के पास खड़ा था जब दिव्या शूट के लिए वापस आईं। उन्होंने किसी को पता नहीं चलने दिया कि उन्हें चोट लगी है। मैं भी नहीं समझ पाया फिर उन्होंने मुझसे रुमाल मांगा और अपने पैर में हुए जख्म पर बांध लिया। मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो वो कुछ नहीं बोलीं लेकिन मैंने उनके पैर से खून बहता देखा तो फिर तुरंत पैक अप करवा दिया।’ पहलाज निहलानी
‘कर्नाटक कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा वापस ले लिया, बीजेपी सदमे में’: सुरजेवाला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 18:46 IST रणदीप सुरजेवाला ने इस बात पर जोर दिया कि रेड्डी का व्यापक प्रशासनिक अनुभव पार्टी संरचना के लिए अमूल्य है शुरुआती खींचतान को एक संक्षिप्त गलतफहमी बताते हुए सुरजेवाला ने राज्य इकाई के लिए रेड्डी के गहरे संस्थागत महत्व को दोहराया। तस्वीर/एएनआई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के कर्नाटक राज्य प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने घोषणा की कि वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी ने आधिकारिक तौर पर अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। घोषणा, जो पार्टी के लिए संगठनात्मक निरंतरता को प्रभावी ढंग से सुरक्षित करती है, आंतरिक घर्षण को हल करने के उद्देश्य से उच्च-स्तरीय विचार-विमर्श की एक श्रृंखला का पालन करती है। सुरजेवाला ने इस बात पर जोर दिया कि रेड्डी का व्यापक प्रशासनिक अनुभव पार्टी ढांचे के लिए अमूल्य है, उन्होंने पुष्टि की कि अनुभवी राजनेता संगठन के एक वफादार सैनिक के रूप में अपने कर्तव्यों को जारी रखेंगे और अपने मंत्री पद को बरकरार रखेंगे। कथित तौर पर इस प्रस्ताव ने विपक्षी रणनीतियों को बाधित कर दिया है, कांग्रेस नेतृत्व ने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी आंतरिक परिवर्तन के सुचारू प्रबंधन को लेकर सदमे में है। आंतरिक गलतफहमी का समाधान इस्तीफा वापस लेने का कथित निर्णय विशिष्ट संगठनात्मक शिकायतों को दूर करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व और रेड्डी के बीच गहन चर्चा के बाद आया। शुरुआती खींचतान को एक संक्षिप्त गलतफहमी बताते हुए सुरजेवाला ने राज्य इकाई के लिए रेड्डी के गहरे संस्थागत महत्व को दोहराया। गतिरोध को तेजी से हल करके, पार्टी अपनी कैबिनेट स्थिरता की रक्षा करने और एक महत्वपूर्ण विधायी मोड़ पर एकीकृत मोर्चा पेश करने में कामयाब रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया है कि त्वरित समाधान ने संभावित गुटीय कमजोरियों को सफलतापूर्वक बेअसर कर दिया है, जिससे आलाकमान को अपना अविभाजित ध्यान अपने मूल विधायी और शासन एजेंडे पर वापस स्थानांतरित करने की अनुमति मिली है। विधायी नामांकन और रणनीतिक तैनाती नेतृत्व संकट को हल करने के समानांतर, कांग्रेस पार्टी ने आगामी विधान चुनावों के लिए अपनी रणनीतिक तैनाती को सफलतापूर्वक सुव्यवस्थित किया है। वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने कई प्रमुख सहयोगियों के साथ, राज्यसभा और राज्य विधान परिषद दोनों में महत्वपूर्ण सीटों के लिए औपचारिक रूप से नामांकन दाखिल किया है। यह समकालिक फाइलिंग पार्टी के राज्य तंत्र द्वारा अपनी विधायी ताकत को मजबूत करने के लिए एक अत्यधिक समन्वित प्रयास को रेखांकित करती है। यह प्रक्रिया कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा हाई-प्रोफाइल नामांकन दाखिल करने के बाद होती है, जो वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में हुई, जो राज्य इकाई के दीर्घकालिक प्रक्षेपवक्र के लिए मजबूत केंद्रीय समर्थन का संकेत देती है। शासन का एक नया अध्याय व्यवस्थित नामांकन दाखिलों के साथ आंतरिक विवाद के सफल नियंत्रण को नेतृत्व द्वारा कर्नाटक के लिए एक अत्यधिक उत्पादक प्रशासनिक युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। परिषद और संसदीय लाइन-अप को अंतिम रूप देने के साथ, राज्य सरकार पूरे क्षेत्र में अपने विकास और कल्याण वितरण प्रणालियों में तेजी लाने का इरादा रखती है। पूर्ण संरचनात्मक अनुशासन बनाए रखने और सत्ता के हस्तांतरण में किसी भी व्यवधान को रोककर, सत्तारूढ़ दल का लक्ष्य अपने शासन जनादेश को मजबूत करना है, यह सुनिश्चित करना है कि विधायी मशीनरी बिना किसी राजनीतिक रुकावट के सुचारू रूप से चले। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘कर्नाटक कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा वापस ले लिया है, बीजेपी सदमे में है’: सुरजेवाला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी विशेष: “पश्चिम बंगाल में वंशवाद की राजनीति का कोई स्थान नहीं है”

चुनाव में हार के बाद टीएमसी की आंतरिक कलह बढ़ गई है, ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि 61 विधायक अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ उनके गुट का समर्थन करते हैं। जालसाजी और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने से पार्टी के भविष्य और ममता बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। n18oc_breaking-newsn18oc_ Indian18oc_politicsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube
दावा- ट्रम्प सरकार की जासूसी करा रहा इजराइल:अमेरिकी रक्षा विभाग में गंभीर खुफिया खतरे का अलर्ट; इजराइल बोला- आरोप झूठे

अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं। इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के भीतर यह चिंता बढ़ गई है कि इजराइल अमेरिकी अधिकारियों और ट्रम्प सरकार की अंदरूनी जानकारी जुटाने के लिए जासूसी की कोशिश कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक दो मौजूदा और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने हाल ही में इजराइल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाकर ‘क्रिटिकल’ कर दिया है। यह एजेंसी का सबसे गंभीर अलर्ट माना जाता है। अमेरिका और इजराइल जैसे बेहद करीबी सहयोगियों के बीच ऐसा होना बेहद असाधारण माना जाता है। हालांकि इजराइल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इजराइली दूतावास का कहना है कि वह अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी नहीं करता और उसकी खुफिया एजेंसियां सहयोगियों नहीं, बल्कि दुश्मनों पर नजर रखती हैं। फोन-कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं करते अधिकारी काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाने का सबसे ज्यादा असर उन अमेरिकी अधिकारियों पर पड़ सकता है जो इजराइल की यात्रा करते हैं या इजराइली अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं। हालांकि अमेरिका और इजराइल के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का सहयोग फिलहाल जारी रहेगा। एक अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि अमेरिका पहले से ही अपने सीनियर अधिकारियों की इजराइल यात्रा के दौरान खास सावधानी बरतता है। अमेरिकी अधिकारी इस दौरान अपने फोन-लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचते हैं। इसकी जगह वे अस्थायी मोबाइल फोन और अलग कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। कई बार वे होटल के कमरों या ऐसी जगहों पर संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करने से भी बचते हैं, जहां निगरानी का खतरा हो सकता है।इसकी वजह यह है कि इजराइली खुफिया एजेंसियां जानकारी जुटाने के मामले में काफी आक्रामक मानी जाती हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसा कोई एक बड़ा घटनाक्रम नहीं था जिसकी वजह से खतरे का स्तर अचानक बढ़ाया गया हो। इसके बजाय कई घटनाओं और आकलनों के आधार पर यह फैसला लिया गया। ट्रम्प ने फोन पर नेतन्याहू को गाली दी थी यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान को लेकर ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। अप्रैल में युद्धविराम के बाद ट्रम्प ईरान के साथ एक बड़े समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नेतन्याहू का मानना है कि ईरान किसी समझौते का पालन नहीं करेगा। इस बीच लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियानों को लेकर भी अमेरिका और इजराइल के बीच मतभेद की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच फोन पर तीखी बातचीत भी हुई थी। बाद में ट्रम्प ने स्वीकार किया कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री को अपशब्द कहे थे। इससे यह अटकलें और तेज हो गईं कि दोनों नेताओं के बीच मध्य पूर्व की रणनीति को लेकर गंभीर मतभेद हैं। अमेरिका-इजराइल के रिश्तों में पहले भी कड़वाहट दिखी भले ही अमेरिका और इजराइल बहुत पक्के दोस्त माने जाते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच खुफिया स्तर पर अविश्वास और जासूसी का पुराना इतिहास रहा है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां पहले भी कई बार इजराइल की जासूसी गतिविधियों को लेकर अलर्ट का स्तर बढ़ा चुकी हैं और दोनों के बीच बड़े विवाद हुए हैं। 1. जोनाथन पोलार्ड केस (1985) जोनाथन पोलार्ड अमेरिका की नौसेना खुफिया एजेंसी में काम करता था। 1985 में उस पर आरोप लगा कि उसने अमेरिका के कई गोपनीय दस्तावेज इजराइल को दिए। पोलार्ड का कहना था कि वह इजराइल की मदद करना चाहता था, लेकिन अमेरिका ने इसे जासूसी माना। जांच के दौरान वह इजराइल के दूतावास में शरण लेने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 1987 में अमेरिकी अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले से अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में तनाव आ गया। करीब 30 साल जेल में रहने के बाद 2015 में पोलार्ड को पैरोल पर रिहा किया गया। 2020 में वह इजराइल चला गया, जहां उसका स्वागत एक राष्ट्रीय नायक की तरह किया गया। यह मामला आज भी अमेरिका में उन सबसे बड़े जासूसी मामलों में गिना जाता है, जिनमें किसी अमेरिकी नागरिक ने किसी सहयोगी देश के लिए जासूसी की थी। यह पहली बार था जब अमेरिका ने इजराइल को लेकर अपनी काउंटर-इंटेलिजेंस चौकसी को उच्चतम स्तर पर कर दिया था। 2. बेन-अमी कादिश केस (2008) बेन-अमी कादिश अमेरिकी सेना के लिए काम कर चुके एक मैकेनिकल इंजीनियर थे। 2008 में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने 1980 के दशक में अमेरिका के कई गोपनीय दस्तावेज इजराइल को दिए थे। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दस्तावेजों में मिसाइल रक्षा प्रणाली, लड़ाकू विमानों और परमाणु हथियारों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शामिल थी। आरोप था कि कादिश ने यह जानकारी एक इजराइली संपर्क को सौंपी थी। कादिश ने बाद में एक आरोप स्वीकार किया और 2009 में उन्हें सजा सुनाई गई। हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें जेल नहीं भेजा गया, बल्कि जुर्माना और निगरानी जैसी सजा दी गई। 3. स्टिंगरे जासूसी विवाद (2019) 2019 में अमेरिकी मीडिया में एक रिपोर्ट आई, जिसमें दावा किया गया कि व्हाइट हाउस और वाशिंगटन के कुछ संवेदनशील इलाकों के आसपास संदिग्ध ‘स्टिंगरे’ डिवाइस पाए गए थे। ये नकली मोबाइल टावर की तरह काम करके आसपास के मोबाइल फोनों से जानकारी जुटा रहे थे। जांच एजेंसियों को शक था कि इन उपकरणों के पीछे इजराइल हो सकता है और इनका मकसद राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके करीबी अधिकारियों की गतिविधियों और बातचीत पर नजर रखना था। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने कभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि इजराइल दोषी साबित हो गया है। दूसरी ओर, इजराइल ने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि वह अमेरिका में जासूसी नहीं करता।
दावा- ट्रम्प सरकार की जासूसी करा रहा इजराइल:अमेरिकी रक्षा विभाग में गंभीर खुफिया खतरे का अलर्ट; इजराइल बोला- आरोप झूठे

अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं। इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के भीतर यह चिंता बढ़ गई है कि इजराइल अमेरिकी अधिकारियों और ट्रम्प सरकार की अंदरूनी जानकारी जुटाने के लिए जासूसी की कोशिश कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक दो मौजूदा और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने हाल ही में इजराइल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाकर ‘क्रिटिकल’ कर दिया है। यह एजेंसी का सबसे गंभीर अलर्ट माना जाता है। अमेरिका और इजराइल जैसे बेहद करीबी सहयोगियों के बीच ऐसा होना बेहद असाधारण माना जाता है। हालांकि इजराइल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इजराइली दूतावास का कहना है कि वह अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी नहीं करता और उसकी खुफिया एजेंसियां सहयोगियों नहीं, बल्कि दुश्मनों पर नजर रखती हैं। फोन-कम्प्यूटर का इस्तेमाल नहीं करते अधिकारी काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाने का सबसे ज्यादा असर उन अमेरिकी अधिकारियों पर पड़ सकता है जो इजराइल की यात्रा करते हैं या इजराइली अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं। हालांकि अमेरिका और इजराइल के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का सहयोग फिलहाल जारी रहेगा। एक अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि अमेरिका पहले से ही अपने सीनियर अधिकारियों की इजराइल यात्रा के दौरान खास सावधानी बरतता है। अमेरिकी अधिकारी इस दौरान अपने फोन-लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचते हैं। इसकी जगह वे अस्थायी मोबाइल फोन और अलग कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। कई बार वे होटल के कमरों या ऐसी जगहों पर संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करने से भी बचते हैं, जहां निगरानी का खतरा हो सकता है।इसकी वजह यह है कि इजराइली खुफिया एजेंसियां जानकारी जुटाने के मामले में काफी आक्रामक मानी जाती हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसा कोई एक बड़ा घटनाक्रम नहीं था जिसकी वजह से खतरे का स्तर अचानक बढ़ाया गया हो। इसके बजाय कई घटनाओं और आकलनों के आधार पर यह फैसला लिया गया। ट्रम्प ने फोन पर नेतन्याहू को गाली दी थी यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान को लेकर ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। अप्रैल में युद्धविराम के बाद ट्रम्प ईरान के साथ एक बड़े समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नेतन्याहू का मानना है कि ईरान किसी समझौते का पालन नहीं करेगा। इस बीच लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियानों को लेकर भी अमेरिका और इजराइल के बीच मतभेद की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच फोन पर तीखी बातचीत भी हुई थी। बाद में ट्रम्प ने स्वीकार किया कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री को अपशब्द कहे थे। इससे यह अटकलें और तेज हो गईं कि दोनों नेताओं के बीच मध्य पूर्व की रणनीति को लेकर गंभीर मतभेद हैं। अमेरिका-इजराइल के रिश्तों में पहले भी कड़वाहट दिखी भले ही अमेरिका और इजराइल बहुत पक्के दोस्त माने जाते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच खुफिया स्तर पर अविश्वास और जासूसी का पुराना इतिहास रहा है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां पहले भी कई बार इजराइल की जासूसी गतिविधियों को लेकर अलर्ट का स्तर बढ़ा चुकी हैं और दोनों के बीच बड़े विवाद हुए हैं। 1. जोनाथन पोलार्ड केस (1985) जोनाथन पोलार्ड अमेरिका की नौसेना खुफिया एजेंसी में काम करता था। 1985 में उस पर आरोप लगा कि उसने अमेरिका के कई गोपनीय दस्तावेज इजराइल को दिए। पोलार्ड का कहना था कि वह इजराइल की मदद करना चाहता था, लेकिन अमेरिका ने इसे जासूसी माना। जांच के दौरान वह इजराइल के दूतावास में शरण लेने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 1987 में अमेरिकी अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले से अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में तनाव आ गया। करीब 30 साल जेल में रहने के बाद 2015 में पोलार्ड को पैरोल पर रिहा किया गया। 2020 में वह इजराइल चला गया, जहां उसका स्वागत एक राष्ट्रीय नायक की तरह किया गया। यह मामला आज भी अमेरिका में उन सबसे बड़े जासूसी मामलों में गिना जाता है, जिनमें किसी अमेरिकी नागरिक ने किसी सहयोगी देश के लिए जासूसी की थी। यह पहली बार था जब अमेरिका ने इजराइल को लेकर अपनी काउंटर-इंटेलिजेंस चौकसी को उच्चतम स्तर पर कर दिया था। 2. बेन-अमी कादिश केस (2008) बेन-अमी कादिश अमेरिकी सेना के लिए काम कर चुके एक मैकेनिकल इंजीनियर थे। 2008 में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने 1980 के दशक में अमेरिका के कई गोपनीय दस्तावेज इजराइल को दिए थे। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दस्तावेजों में मिसाइल रक्षा प्रणाली, लड़ाकू विमानों और परमाणु हथियारों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शामिल थी। आरोप था कि कादिश ने यह जानकारी एक इजराइली संपर्क को सौंपी थी। कादिश ने बाद में एक आरोप स्वीकार किया और 2009 में उन्हें सजा सुनाई गई। हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें जेल नहीं भेजा गया, बल्कि जुर्माना और निगरानी जैसी सजा दी गई। 3. स्टिंगरे जासूसी विवाद (2019) 2019 में अमेरिकी मीडिया में एक रिपोर्ट आई, जिसमें दावा किया गया कि व्हाइट हाउस और वाशिंगटन के कुछ संवेदनशील इलाकों के आसपास संदिग्ध ‘स्टिंगरे’ डिवाइस पाए गए थे। ये नकली मोबाइल टावर की तरह काम करके आसपास के मोबाइल फोनों से जानकारी जुटा रहे थे। जांच एजेंसियों को शक था कि इन उपकरणों के पीछे इजराइल हो सकता है और इनका मकसद राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके करीबी अधिकारियों की गतिविधियों और बातचीत पर नजर रखना था। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने कभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि इजराइल दोषी साबित हो गया है। दूसरी ओर, इजराइल ने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि वह अमेरिका में जासूसी नहीं करता।





