तान्या मित्तल को अमीर पति नहीं चाहिए:बोलीं- मेरा पार्टनर रोज मुझसे 10-15 लाख रुपए मांगे और मैं दे सकूं

इन्फ्लुएंसर और पूर्व बिग बॉस कंटेस्टेंट तान्या मित्तल ने कहा कि वह अमीर पार्टनर नहीं चाहतीं। वह खुद इतनी आर्थिक रूप से मजबूत बनना चाहती हैं कि अपने पार्टनर की हर बड़ी पैसों से जुड़ी जरूरत को आसानी से पूरा कर सकें। पिंकविला को दिए इंटरव्यू में तान्या मित्तल ने कहा, ‘मैं जिससे प्यार करती हूं या जिसके साथ हूं, उसके लिए अपना सब कुछ देने को हमेशा तैयार रहती हूं। मैं ऐसा पहले भी कर चुकी हूं और आगे भी करूंगी। मैं नहीं चाहती कि मुझे कोई अमीर पति मिले। अगर मेरे पति के पास कुछ भी न हो, तब भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’ इन्फ्लुएंसर ने आगे कहा, ‘मैं चाहती हूं कि वह रोज सुबह उठकर मुझसे 10-15 लाख रुपए मांगे और मेरी इतनी क्षमता हो कि मैं उसे हर दिन 10-15 लाख रुपए दे सकूं। मतलब, मैं ऐसी गर्लफ्रेंड/पत्नी बनना चाहती हूं।’ तान्या जल्द रियलिटी शो में दिखेंगी तान्या मित्तल जल्द कॉमेडी और कुकिंग रियलिटी शो ‘मां है ना’ में नजर आएंगी। इसमें तान्या मां सुनीता मित्तल के साथ जोड़ी में दिखेंगी। हाल ही में ‘मां है ना’ के प्रमोशनल इवेंट्स के दौरान तान्या और स्प्लिट्सविला X6 विनर गुल्लू उर्फ कुशल तंवर के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिली थी। जब गुल्लू के बारे में पूछा गया, तो तान्या ने कहा कि दूसरों को हराने के लिए उनका खाना खराब करना गलत है। जब आप खुद पर कॉन्फिडेंट नहीं होते, तब आप दूसरों के साथ ऐसा करते हैं। तान्या ने यह भी कहा था कि वह उन लोगों को पसंद नहीं करतीं जो लाइन क्रॉस करते हैं। दोनों की बातचीत का वीडियो वायरल हो गया। तान्या ने ‘मेल ईगो’ तोड़ने की बात कही इसके बाद बिना किसी का नाम लिए तान्या ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, ‘एक बार फिर पुरुषों के अहंकार को चुनौती देकर खुशी हुई। जलन हो रही है? मैं समझ सकती हूं। कुछ पुरुष मजबूत और आत्मनिर्भर महिलाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ सिर्फ उनके बारे में बातें ही कर पाते हैं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘जब कुछ लोग एक ऐसी महिला से असहज महसूस कर रहे हैं जो खुद को किसी के लिए छोटा नहीं करती, तब मैं अपनी मेहनत से आगे बढ़ रही हूं, सफलता हासिल कर रही हूं और लोगों का प्यार व आशीर्वाद बटोर रही हूं। जलते रहिए, देखते रहिए और बातें करते रहिए। मैं अपनी पहचान और काम से हमेशा याद रखी जाऊंगी।’
अमिताभ के बाद तेंदुलकर ने वैभव की तारीफ की:बोले- इस लड़के में कुछ खास, टेस्ट के लिए जल्दबाजी न करें; नेचुरल गेम खेलने दें

पूर्व दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने युवा बैटर वैभव सूर्यवंशी की तारीफ की है। उन्होंने कहा- वैभव वाकई बेहद खास खिलाड़ी हैं। उनमें मैदान के चारों ओर शॉट खेलने की अद्भुत कला है। 53 साल के तेंदुलकर ने सलाह दी कि कोई भी उनके नेचुरल गेम के साथ छेड़छाड़ न करें। मुंबई में आयोजित क्रिकइन्फो ऑनर्स इवेंट में तेंदुलकर को 21वीं सदी का सर्वश्रेष्ठ इंटरनेशनल मेंस बैटर चुना गया। एक दिन पहले शनिवार को अमिताभ बच्चन ने सोशल प्लेटफॉर्म X पर वैभव की तारीफ करते हुए लिखा- ‘15 साल की उम्र का अद्भुत सूर्या। इस उम्र में तो हम बंटों और गुल्ली-डंडा भी ठीक से नहीं खेल पा रहे थे।’ सचिन- वैभव सिर्फ हवा में शॉट नहीं घुमा रहे तेंदुलकर ने कहा- ‘आज सभी वैभव की बात कर रहे हैं। मैंने भी उन्हें बैटिंग करते हुए देखा है। उनमें कुछ बहुत खास बात है। सिर्फ गेंद को हिट करने की ताकत ही नहीं, बल्कि उनकी कलाई का काम (रिस्ट वर्क) भी कमाल का है, जिसने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया।’ सचिन ने कहा, ‘मैदान के हर कोने में शॉट खेलने के लिए आपकी कलाई मजबूत होनी चाहिए। वे सिर्फ हवा में बल्ला नहीं घुमा रहे। वे बाकी खिलाड़ियों की तुलना में गेंद की लाइन और लेंथ को जल्दी भांप लेते हैं और आसानी से बाउंड्री पार करा देते हैं।’ तेंदुलकर की सलाह टेस्ट क्रिकेट के लिए जल्दीबाजी न करें, दबाव से बचाएं क्या वैभव को जल्द भारतीय टेस्ट टीम में चुनना चाहिए। इस पर तेंदुलकर ने कहा कि वे भी वैभव को टेस्ट क्रिकेट खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन इसमें जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। वे जैसे हैं, वैसे ही रहें। टेस्ट में अनुभव के साथ वे चुनौतियों से निपटना सीख जाएंगे। मास्टर ब्लास्टर ने कहा, ‘वैभव एक ऐसे खिलाड़ी दिखते हैं जो बहुत कॉन्फिडेंट हैं और उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है। मैं उनके नेचुरल इंस्टिंक्ट (स्वाभाविक प्रवृत्ति) के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं चाहूंगा। जिस तरह से वे गेंद को देखते हैं और उस पर रिएक्ट करते हैं, वह बेहतरीन है। अगर हम उन्हें एक साथ बहुत सारी चीजें बताकर बाधाएं खड़ी करेंगे, तो उनका वह सिग्नल इंटरप्ट (प्रभावित) हो जाएगा। मैं उन्हें खुलकर अपना खेल खेलने की आजादी दूंगा।’ चयन का फैसला सिलेक्टर्स पर छोड़ें सचिन ने कहा, ‘न केवल मैं, बल्कि हर कोई उन्हें किसी न किसी स्टेज पर टेस्ट क्रिकेट खेलते देखना चाहेगा। उस पर लगातार यह दबाव नहीं बनाना चाहिए कि उसे इस स्क्वॉड में चुना जाना चाहिए। यह फैसला उन सिलेक्टर्स पर छोड़ देना चाहिए जो इसके लिए जिम्मेदार हैं।’ गेल का रिकॉर्ड तोड़ा; IPL में बनाए 776 रन, 72 छक्के जड़े वैभव सूर्यवंशी के लिए IPL 2026 का सीजन रिकॉर्ड तोड़ने वाला रहा। राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए 15 साल के इस खिलाड़ी ने 237.31 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 72 छक्के जड़े। इसके साथ ही वैभव ने क्रिस गेल के एक सीजन में सबसे ज्यादा 59 छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। ————————————————– IPL से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… IPL 2026 ने दिए भारत को 10 फ्यूचर स्टार्स, सूर्यवंशी ने 776 रन बनाए IPL का फाइनल आज अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाएगा। इस सीजन में कई अनकैप्ड खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से टीमों की जीत में अहम भूमिका निभाई। वैभव सूर्यवंशी, प्रिंस यादव, प्रफुल हिंगे और आयुष म्हात्रे जैसे युवा सितारे चर्चा में रहे। स्टोरी में ऐसे ही 10 अनकैप्ड भारतीय प्लेयर्स, जो आने वाले समय में टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर
अमिताभ के बाद तेंदुलकर ने वैभव की तारीफ की:बोले- इस लड़के में कुछ खास, टेस्ट के लिए जल्दबाजी न करें; नेचुरल गेम खेलने दें

पूर्व दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने युवा बैटर वैभव सूर्यवंशी की तारीफ की है। उन्होंने कहा- वैभव वाकई बेहद खास खिलाड़ी हैं। उनमें मैदान के चारों ओर शॉट खेलने की अद्भुत कला है। 53 साल के तेंदुलकर ने सलाह दी कि कोई भी उनके नेचुरल गेम के साथ छेड़छाड़ न करें। मुंबई में आयोजित क्रिकइन्फो ऑनर्स इवेंट में तेंदुलकर को 21वीं सदी का सर्वश्रेष्ठ इंटरनेशनल मेंस बैटर चुना गया। एक दिन पहले शनिवार को अमिताभ बच्चन ने सोशल प्लेटफॉर्म X पर वैभव की तारीफ करते हुए लिखा- ‘15 साल की उम्र का अद्भुत सूर्या। इस उम्र में तो हम बंटों और गुल्ली-डंडा भी ठीक से नहीं खेल पा रहे थे।’ सचिन- वैभव सिर्फ हवा में शॉट नहीं घुमा रहे तेंदुलकर ने कहा- ‘आज सभी वैभव की बात कर रहे हैं। मैंने भी उन्हें बैटिंग करते हुए देखा है। उनमें कुछ बहुत खास बात है। सिर्फ गेंद को हिट करने की ताकत ही नहीं, बल्कि उनकी कलाई का काम (रिस्ट वर्क) भी कमाल का है, जिसने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया।’ सचिन ने कहा, ‘मैदान के हर कोने में शॉट खेलने के लिए आपकी कलाई मजबूत होनी चाहिए। वे सिर्फ हवा में बल्ला नहीं घुमा रहे। वे बाकी खिलाड़ियों की तुलना में गेंद की लाइन और लेंथ को जल्दी भांप लेते हैं और आसानी से बाउंड्री पार करा देते हैं।’ तेंदुलकर की सलाह टेस्ट क्रिकेट के लिए जल्दीबाजी न करें, दबाव से बचाएं क्या वैभव को जल्द भारतीय टेस्ट टीम में चुनना चाहिए। इस पर तेंदुलकर ने कहा कि वे भी वैभव को टेस्ट क्रिकेट खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन इसमें जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। वे जैसे हैं, वैसे ही रहें। टेस्ट में अनुभव के साथ वे चुनौतियों से निपटना सीख जाएंगे। मास्टर ब्लास्टर ने कहा, ‘वैभव एक ऐसे खिलाड़ी दिखते हैं जो बहुत कॉन्फिडेंट हैं और उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है। मैं उनके नेचुरल इंस्टिंक्ट (स्वाभाविक प्रवृत्ति) के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं चाहूंगा। जिस तरह से वे गेंद को देखते हैं और उस पर रिएक्ट करते हैं, वह बेहतरीन है। अगर हम उन्हें एक साथ बहुत सारी चीजें बताकर बाधाएं खड़ी करेंगे, तो उनका वह सिग्नल इंटरप्ट (प्रभावित) हो जाएगा। मैं उन्हें खुलकर अपना खेल खेलने की आजादी दूंगा।’ चयन का फैसला सिलेक्टर्स पर छोड़ें सचिन ने कहा, ‘न केवल मैं, बल्कि हर कोई उन्हें किसी न किसी स्टेज पर टेस्ट क्रिकेट खेलते देखना चाहेगा। उस पर लगातार यह दबाव नहीं बनाना चाहिए कि उसे इस स्क्वॉड में चुना जाना चाहिए। यह फैसला उन सिलेक्टर्स पर छोड़ देना चाहिए जो इसके लिए जिम्मेदार हैं।’ गेल का रिकॉर्ड तोड़ा; IPL में बनाए 776 रन, 72 छक्के जड़े वैभव सूर्यवंशी के लिए IPL 2026 का सीजन रिकॉर्ड तोड़ने वाला रहा। राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए 15 साल के इस खिलाड़ी ने 237.31 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 72 छक्के जड़े। इसके साथ ही वैभव ने क्रिस गेल के एक सीजन में सबसे ज्यादा 59 छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। ————————————————– IPL से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… IPL 2026 ने दिए भारत को 10 फ्यूचर स्टार्स, सूर्यवंशी ने 776 रन बनाए IPL का फाइनल आज अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाएगा। इस सीजन में कई अनकैप्ड खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से टीमों की जीत में अहम भूमिका निभाई। वैभव सूर्यवंशी, प्रिंस यादव, प्रफुल हिंगे और आयुष म्हात्रे जैसे युवा सितारे चर्चा में रहे। स्टोरी में ऐसे ही 10 अनकैप्ड भारतीय प्लेयर्स, जो आने वाले समय में टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर
आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं

1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी। सवाल: फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ किस बारे में है? जवाब: यह सिर्फ एक आरबीआई गवर्नर नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी की कहानी है। आर्थिक संकट के समय हर नजर आप पर हो तो कितना दबाव होता है, फिल्म यही दिखाती है। ऐसे समय परिवार और निजी जिंदगी पीछे छूट जाती है। फिल्म उसी संघर्ष और दबाव को दिखाती है। सवाल: फिल्म में इकोनॉमिक्स और आरबीआई जैसे कठिन विषय हैं। आम दर्शक इसे कैसे समझ पाएंगे? जवाब: फिल्म में जीडीपी, फिस्कल डेफिसिट और इन्फ्लेशन जैसे शब्द हैं, लेकिन उन्हें आसान तरीके से दिखाया गया है। यह क्लासरूम वाली फिल्म नहीं, बल्कि ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ है। यहां कम समय में देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने की चुनौती ही रोमांच पैदा करती है। सवाल: इस किरदार की तैयारी कैसे की? जवाब: मैंने स्क्रिप्ट कई बार पढ़ी और जो बातें समझ नहीं आईं, उन्हें डायरेक्टर व राइटर्स से समझा। डायरेक्टर पढ़ने का मटेरियल और वीडियो भेजते थे। किरदार का लुक और बोलने का तरीका तय किया गया। करीब ढाई महीने तैयारी चली। टेक्निकल शब्दों को समझकर उन्हें आसान तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना सबसे मुश्किल था। सवाल: एक तरफ आप राम गोपाल वर्मा की फिल्म कर रहे थे, जहां माहौल बिल्कुल अलग था, जबकि ‘गवर्नर’ के सेट पर लोग आपको बहुत शांत और गंभीर इंसान के तौर पर देखने लगे थे। ऐसा क्या था इस किरदार में? जवाब: यह किरदार कम बोलने वाला इंसान है, जो ज्यादातर अपने विचारों में व्यस्त रहता है। नंबर, गणित और बड़ी जिम्मेदारियों से जुड़े लोग अक्सर शांत होते हैं और लगातार चुनौतियों पर सोचते रहते हैं। आरबीआई गवर्नर भी हर समय संकट सुलझाने में लगा रहता है, इसलिए यह गंभीर नहीं बल्कि भीतर से लगातार सोचने वाले व्यक्ति का किरदार है। सवाल: क्या फिल्म में गंभीरता के साथ ह्यूमर भी देखने को मिलेगा? जवाब: बिल्कुल। फिल्म में फैमिली बॉन्डिंग है। मधु मेरी पत्नी का रोल कर रही हैं। उनकी फिल्म ‘रोजा’ देखकर पागल हो गए थे। उनके साथ के सीन हल्के और प्यारे हैं। ऑफिस के कुछ हिस्सों में भी ह्यूमर है। थ्रिलर होने के कारण दर्शक कहानी से जुड़े रहेंगे। सवाल: आप इतिहास के छात्र भी रहे हैं। 1991 के आर्थिक संकट और आज के हालात में क्या समानता देखते हैं? जवाब: 1991 में गल्फ वॉर के दौरान तेल के दाम बढ़ रहे थे और भारत आर्थिक संकट से जूझ रहा था। आज भी यूएस-ईरान जैसे तनावों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल महंगा होता है, डॉलर मजबूत होता है और भारत जैसे देशों पर दबाव बढ़ता है। इतिहास पूरी तरह नहीं दोहराता, लेकिन उसकी झलक जरूर दिखती है। सवाल: ऐसे संकट के समय आम आदमी क्या कर सकता है? जवाब: बड़े आर्थिक फैसले एक्सपर्ट्स और सरकारों का काम हैं। आम आदमी अपने खर्च नियंत्रित कर सकता है। मुश्किल समय में लोग फिजूल खर्च, घर खरीदने, घूमने और बड़े खर्चों से बचते हैं। लोग संभलकर चलते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आगे का समय कठिन हो सकता है। सवाल: क्या आम आदमी सिस्टम बदल सकता है? जवाब: सिस्टम तभी तक मजबूत रहता है, जब तक आम आदमी सवाल नहीं पूछता। समस्याएं नहीं सुनी जाएं तो लोग आवाज उठाते हैं। इतिहास में कई बार आम आदमी ने बदलाव लाया है। इमरजेंसी और 1991 के संकट जैसे दौरों में भी लोगों की ताकत सामने आई है। सवाल: फिल्म की रिलीज के साथ दूसरी बड़ी फिल्में भी आ रही हैं। क्या ऐसी फिल्मों को सोलो रिलीज मिलनी चाहिए? जवाब: भारत में सबसे बड़ी समस्या थिएटर की कमी है। सरकार और इंडस्ट्री ज्यादा सिनेमाघर बनवाएं तो छोटी-बड़ी सभी फिल्मों को बराबर मौका मिलेगा। हर फिल्म को दर्शकों तक पहुंचने का अधिकार है। सवाल: क्या कुछ बड़े प्रोडक्शन हाउस की मोनोपोली भी खत्म होनी चाहिए? जवाब: हां। यह तय होना चाहिए कि किस बजट की फिल्म को कितने शो मिलें। छोटी फिल्मों को बड़ी फिल्मों के ज्यादा स्क्रीन लेने से नुकसान नहीं होना चाहिए। हर फिल्म को दर्शकों तक पहुंचने का बराबर मौका मिलना चाहिए। सवाल: ओटीटी ने इस तरह की फिल्मों को कितना फायदा पहुंचाया? जवाब: ओटीटी ने बहुत फायदा पहुंचाया और मुझे भी अच्छा काम करने का मौका मिला। लेकिन अब प्लेटफॉर्म ज्यादा कमर्शियल और असुरक्षित हो गए हैं। पहले अलग तरह की कहानियों को ज्यादा मौका मिलता था, जो अब कम हो गया है। सवाल: दर्शक इस फिल्म से क्या लेकर जाएंगे? जवाब: इस फिल्म का सबसे बड़ा संदेश “जिद” है, लेकिन समझदारी वाली जिद। यह किरदार हर मुश्किल में रास्ता निकालने की कोशिश करता है और आखिर तक हार नहीं मानता। सवाल: क्या आपको लगता है कि आपकी जिंदगी और इस किरदार में कुछ समानता है? जवाब: हां, मेरी जिंदगी में भी जिद रही है। कभी समझदारी वाली, तो कभी थोड़ी बेवकूफी वाली जिद। लेकिन उसी जिद ने मुझे यहां तक पहुंचाया है।
शिवकुमार को सीएलपी नेता चुने जाने के बाद कर्नाटक में ‘डीकेएस सरकार’ हकीकत के करीब पहुंची | शीर्ष बिंदु | भारत समाचार

आखरी अपडेट:30 मई, 2026, 23:33 IST विधान सौधा में एक अहम बैठक में डीके शिवकुमार को सर्वसम्मति से सीएलपी नेता चुना गया, जिसके बाद उन्होंने अगली कर्नाटक सरकार बनाने का दावा पेश किया। कर्नाटक के मनोनीत मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के साथ। (पीटीआई) कर्नाटक में ‘डीकेएस सरकार’ का रास्ता अब साफ हो गया है कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) शनिवार को सर्वसम्मति से डीके शिवकुमार को अपना नेता चुना और उन्होंने राज्य में अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया। सीएलपी ने बेंगलुरु के विधान सौधा में एक करीबी बैठक की, जिसमें सीएलपी सचिव अल्लमप्रभु पाटिल, एआईसीसी के कर्नाटक प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल हुए। 28 मई को इस्तीफा देने वाले निवर्तमान सीएम सिद्धारमैया ने अगले नेता के रूप में शिवकुमार का नाम प्रस्तावित किया। अपेक्षाकृत सहज नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान, सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ मैराथन वार्ता का दौर चला, जिसका उद्देश्य नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देना और नई सरकार के गठन के लिए पाठ्यक्रम तैयार करना था। 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद से, सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण व्यवस्था की लगातार चर्चा चल रही थी, जिसमें 2.5 साल बाद सत्ता का हस्तांतरण शामिल होगा। सीएलपी बैठक में क्या हुआ? सीएलपी बैठक में तीन प्रमुख प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिससे पार्टी के विधायी नेता के रूप में डीके शिवकुमार के औपचारिक चुनाव का मार्ग प्रशस्त हुआ। पहले प्रस्ताव में, सिद्धारमैया ने प्रस्ताव दिया कि नए सीएलपी नेता का चयन कांग्रेस आलाकमान पर छोड़ दिया जाए। प्रस्ताव का वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने समर्थन किया और हाथ उठाकर सर्वसम्मति से पारित कर दिया। दूसरे प्रस्ताव में सिद्धारमैया ने सीएलपी नेता पद के लिए डीके शिवकुमार का नाम प्रस्तावित किया. प्रस्ताव का फिर से परमेश्वर ने समर्थन किया और उपस्थित सभी विधायकों से सर्वसम्मति से अनुमोदन प्राप्त किया, औपचारिक रूप से शिवकुमार को सीएलपी नेता के रूप में चुना गया। सीएलपी नेता के रूप में चुने जाने के बाद, शिवकुमार ने सिद्धारमैया को उनके नेतृत्व और पार्टी में योगदान के लिए धन्यवाद देते हुए एक प्रस्ताव पेश किया। कर्नाटक कांग्रेस इकाई के भीतर एकता के प्रदर्शन के बीच यह प्रस्ताव अपनाया गया। शिवकुमार ने सरकार बनाने का दावा पेश किया सीएलपी नेता चुने जाने के बाद शिवकुमार ने लोक भवन में राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और औपचारिक रूप से राज्य में अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया। शिवकुमार के साथ निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राज्य के अन्य वरिष्ठ नेता भी थे। राज्यपाल गहलोत ने उन्हें 3 जून को राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया. पत्र के अनुसार, शपथ समारोह 3 जून 2026 को शाम 4:05 बजे लोक भवन परिसर में होगा। राज्यपाल को अपना दावा पेश करते हुए लिखे अपने पत्र में, शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक सीएलपी, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 135 सदस्य, 2 संबद्ध सदस्य और 1 रायता संघ विधायक शामिल थे, ने सर्वसम्मति से उन्हें कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में चुना था। सिद्धारमैया ने शिवकुमार को बधाई दी सिद्धारमैया ने बाद में डीके शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने पर बधाई दी और उनकी अदम्य गतिशीलता, संगठनात्मक कौशल और अटूट निष्ठा की प्रशंसा की। एक नया ऋण प्राप्त करने के लिए ಆಯ್ಕೆಯಾಗಿರುವ ಸಂಗಾತಿ ಡಿ.ಕೆ.ಶಿವಕುಮಾರ್ ಅವರಿಗೆ एक और विकल्प चुनें, एक और विकल्प चुनें, ठीक है एक नया ऋण प्राप्त करने के लिए एक नया ऋण प्राप्त करने के लिए यह एक अच्छा विकल्प है. और भी बहुत कुछ… pic.twitter.com/Hlep9qJaGF – सिद्धारमैया (@siddaramaiah) 30 मई, 2026 निवर्तमान मुख्यमंत्री ने कर्नाटक के विकास को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों के बीच पार्टी के वैचारिक मूल्यों को बनाए रखने की शिवकुमार की क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया। शिवकुमार ने यह भी कहा कि वह सीएलपी के नेता के रूप में चुने जाने पर ”विनम्र” हैं और आश्वासन दिया कि पार्टी समर्पण, अखंडता और उद्देश्य के साथ राज्य के लोगों की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध है। आज विधान सौधा में आयोजित सीएलपी बैठक में सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में चुने जाने पर विनम्र महसूस हुआ। श्री @siddaramaiah और अन्य नेताओं के साथ, मैंने माननीय राज्यपाल श्री @TCGEHLOT से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का अपना दावा पेश किया… pic.twitter.com/cbq3Gn7wHU – डीके शिवकुमार (@DKशिवकुमार) 30 मई, 2026 भाजपा ने नेतृत्व परिवर्तन पर कटाक्ष किया जहां कांग्रेस नेताओं ने सत्ता के सुचारु परिवर्तन की सराहना की, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शिवकुमार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नेतृत्व परिवर्तन से भ्रष्टाचार में डूबी सरकार के “चरित्र” में कोई बदलाव नहीं आएगा। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन कांग्रेस की इस स्वीकारोक्ति को दर्शाता है कि सिद्धारमैया का शासन कई मोर्चों पर विफल रहा है। उन्होंने कहा, “इसलिए, उन्हें उन्हें बदलना पड़ा। अन्यथा, 2028 (विधानसभा चुनाव) चला जाएगा।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया शिवकुमार को सीएलपी नेता चुने जाने के बाद कर्नाटक में ‘डीकेएस सरकार’ हकीकत के करीब पहुंची | शीर्ष बिंदु अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक के मुख्यमंत्री का इस्तीफा(टी)सिद्धारमैया का इस्तीफा(टी)डीके शिवकुमार सबसे आगे(टी)कांग्रेस विधायक दल की बैठक(टी)कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन(टी)कर्नाटक की नई सरकार(टी)थावरचंद गहलोत राज्यपाल(टी)कर्नाटक सीएम समाचार
सुरक्षा उल्लंघन का एनाटॉमी: बंगाल के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी का विवरण कैसे छीन लिया गया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:30 मई, 2026, 22:55 IST पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोनारपुर में गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि प्राथमिक सुरक्षा परिधि आने वाले सांसद और स्थानीय आबादी के बीच एक महत्वपूर्ण बफर जोन बनाए रखने में विफल रही। सोनारपुर समझौते का मूल कारण डामर पर सामरिक प्रतिक्रिया से परे तक फैला हुआ है; यह सीधे तौर पर पूर्वानुमानित बुद्धिमत्ता की बुनियादी विफलता की ओर इशारा करता है। छवि/पीटीआई जब एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक काफिला या समूह अत्यधिक अस्थिर क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो नियंत्रित वातावरण और कुल अराजकता के बीच का अंतर बहुत कम होता है। दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को हिंसक तरीके से निशाना बनाना, इस बात का उदाहरण पेश करता है कि कैसे एक परिष्कृत, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था से भी मिनटों के भीतर समझौता किया जा सकता है और उसे खत्म किया जा सकता है। शनिवार को अचानक वृद्धि – जिसमें उत्तेजित भीड़ ने सीधे पश्चिम बंगाल के संसद सदस्य पर पत्थर और अंडे फेंके – आधुनिक वीआईपी सुरक्षा में एक गंभीर भेद्यता को उजागर करता है: निष्क्रिय राजनीतिक असहमति से सक्रिय, समन्वित शारीरिक हमले में अप्रत्याशित परिवर्तन। जब सैकड़ों प्रदर्शनकारी एक साथ एक विशिष्ट आगमन बिंदु पर एकत्र होते हैं, तो भीड़ नियंत्रण की संरचनात्मक यांत्रिकी हमेशा झुक जाती है, जिससे करीबी सुरक्षा टीमों को तत्काल, रक्षात्मक फ़ॉलबैक स्थिति में मजबूर होना पड़ता है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोनारपुर में गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि प्राथमिक सुरक्षा परिधि आने वाले सांसद और स्थानीय आबादी के बीच एक महत्वपूर्ण बफर जोन बनाए रखने में विफल रही। हाई-प्रोफाइल वीआईपी पारगमन में, सुरक्षा एक स्तरित रक्षा मॉडल पर निर्भर करती है: स्थानीय पुलिस बाहरी रिंग में भीड़ प्रबंधन और मार्ग स्वच्छता को संभालती है, जबकि नेता के व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी आंतरिक रिंग का प्रबंधन करते हैं। जैसे ही बनर्जी हाल ही में चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचीं, बाहरी परिधि भंग हो गई। आक्रामक, गतिशील भीड़ का सामना करते हुए, स्थानीय पुलिस की तैनाती तेजी से बढ़ गई, जिससे प्रदर्शनकारियों को वाहन लाइन की दूरी को बंद करने की अनुमति मिल गई। इस संरचनात्मक पतन ने एक नियमित राजनीतिक यात्रा को तत्काल निकासी आपातकाल में बदल दिया, जिससे आंतरिक-रिंग सुरक्षा विवरण पूरी तरह से आपातकालीन भौतिक ढालों पर निर्भर हो गया। इनर कॉर्डन के महत्वपूर्ण यांत्रिकी एक बार जब बाहरी परिधि का उल्लंघन हो जाता है, तो वीआईपी के आंतरिक सुरक्षा विवरण के पास अपनी सामरिक संरचना को समायोजित करने के लिए केवल कुछ सेकंड होते हैं। सोनारपुर में, जैसे ही बनर्जी पर पत्थरों और अंडों की बारिश होने लगी, सांसद के निजी सुरक्षा अधिकारियों ने तुरंत एक आपातकालीन बंद-बंदी प्रोटोकॉल लागू किया, जिससे बनर्जी के चारों ओर एक कड़ा मानव सुरक्षा घेरा बनाया गया। इस विशिष्ट भौतिक संरचना का उद्देश्य भीड़ को शामिल करना या व्यवस्था बहाल करना नहीं है, बल्कि प्रभावों को अवशोषित करना, दृष्टि रेखाओं को अवरुद्ध करना और उड़ने वाले प्रोजेक्टाइल के खिलाफ तत्काल भौतिक अवरोध स्थापित करना है। रक्षात्मक मानव ढाल के लिए यह तीव्र परिवर्तन एक उच्च जोखिम वाला, अंतिम उपाय वाला पैंतरेबाज़ी है। क्योंकि स्थानीय प्रशासनिक प्रतिक्रिया में देरी हुई – अराजकता के शुरुआती क्षणों के दौरान एक ध्यान देने योग्य शून्य छोड़ दिया गया – आंतरिक विस्तार को दंगा विरोधी फैलाव इकाइयों के समर्थन के बिना जनता के गुस्से का खामियाजा भुगतने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसे परिदृश्यों में, प्राथमिक जोखिम लक्षित हत्या से भगदड़-प्रेरित आघात या कुंद-बल वाली वस्तुओं से गंभीर चोट में बदल जाता है। सुरक्षा टीम की सफलता को वीआईपी को सुरक्षित, मोबाइल निष्कर्षण बिंदु की ओर ले जाते समय सामंजस्य बनाए रखने की उनकी क्षमता से मापा जाता है। पूर्वानुमानित बुद्धि की विफलता सोनारपुर समझौते का मूल कारण डामर पर सामरिक प्रतिक्रिया से परे तक फैला हुआ है; यह सीधे तौर पर पूर्वानुमानित बुद्धिमत्ता की बुनियादी विफलता की ओर इशारा करता है। चुनाव के बाद तनाव से जूझ रहे क्षेत्रों में, सुरक्षा तैनाती स्थानीय भावना को मापने और घात बिंदुओं का अनुमान लगाने के लिए वास्तविक समय के स्थितिजन्य आकलन पर बहुत अधिक निर्भर होती है। जब एक शत्रुतापूर्ण भीड़ प्रक्षेप्यों को जमा करने और एक सटीक स्थान पर महत्वपूर्ण संख्या में इकट्ठा होने का प्रबंधन करती है, तो यह इंगित करता है कि स्थानीय कानून प्रवर्तन परिचालन तनाव के निर्माण की निगरानी या अवरोधन करने में विफल रहा है। यह ख़ुफ़िया ब्लाइंड स्पॉट एक हाई-प्रोफ़ाइल नेता के सुरक्षा विवरण के संरचनात्मक लाभों को प्रभावी ढंग से बेअसर कर देता है। पूर्व चेतावनी या पर्याप्त सुदृढीकरण लेन के बिना पथराव करने वाली भीड़ के सामने छोड़ दिया जाए तो काफिला एक स्थिर लक्ष्य बन जाता है। चूंकि दक्षिण 24 परगना के संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च करने के लिए दंगा-रोधी दस्ते और भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, इसलिए यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीतिक परिदृश्य में वीआईपी आंदोलन की व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन करने की तत्काल आवश्यकता को पीछे छोड़ देती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया सुरक्षा उल्लंघन का एनाटॉमी: बंगाल के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी का विवरण कैसे छीन लिया गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)अभिषेक बनर्जी(टी)सुरक्षा(टी)सोनारपुर
आशुतोष राणा के 'हमारे राम' शो के दौरान लगी आग:शॉर्ट सर्किट से कंट्रोल पैनल में भड़की लपटें, ऑडिटोरियम में अंधेरा; एक्टर और लोगों का रेस्क्यू

मध्य प्रदेश के जबलपुर में शनिवार शाम अभिनेता आशुतोष राणा के शो ‘हमारे राम’ के मंचन के दौरान रामपुर स्थित तरंग ऑडिटोरियम में अचानक आग लग गई। आग के बाद पूरे ऑडिटोरियम की बिजली बंद करनी पड़ी, जिससे परिसर में अंधेरा छा गया। सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम तत्काल रोक दिया गया। अभिनेता आशुतोष राणा समेत सभी कलाकारों और दर्शकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कार्यक्रम बाधित होने के कारण आयोजकों को दूसरा शो रद्द करना पड़ा। आशुतोष राणा दे रहे थे प्रस्तुति जानकारी के मुताबिक, शनिवार शाम करीब 7 बजे रामपुर स्थित मध्य प्रदेश विद्युत विभाग के तरंग ऑडिटोरियम में मंचन चल रहा था। कार्यक्रम में अभिनेता आशुतोष राणा सहित कई कलाकार प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान ऑडिटोरियम के ग्रीन रूम के नीचे स्थित एक कक्ष के कंट्रोल पैनल में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। इसके बाद कंट्रोल पैनल में आग भड़क उठी। देखते ही देखते कमरे में धुआं भर गया। आग की सूचना मिलते ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। सुरक्षा के लिए बंद की गई बिजली प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही ऑडिटोरियम की लाइटें बंद हो गईं और पूरे परिसर में अंधेरा छा गया। स्थिति को नियंत्रित करने और बड़े हादसे से बचने के लिए एहतियातन पूरे परिसर की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। आग और धुएं के कारण कार्यक्रम बीच में रोकना पड़ा। आयोजकों ने तत्काल कलाकारों और दर्शकों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। अभिनेता आशुतोष राणा को भी सुरक्षा के मद्देनजर ऑडिटोरियम से बाहर ले जाया गया। कर्मचारियों ने पहले खुद बुझाने की कोशिश की घटना के बाद ऑडिटोरियम प्रबंधन और कार्यक्रम आयोजकों ने परिसर में लगे अग्निशमन उपकरणों से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। हालांकि शुरुआती कोशिशों में आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी। इसके बाद नगर निगम के फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई और टीम मौके पर रवाना हुई। फायर ब्रिगेड ने पाया आग पर काबू फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया। दमकलकर्मियों ने कुछ ही देर में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आग बुझने के बाद अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। राहत की बात रही कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ।
सात्विक-चिराग सिंगापुर ओपन बैडमिंटन के फाइनल में पहुंचे:दुनिया की नंबर-1 जोड़ी को हराया; कोरिया के वर्ल्ड चैंपियंस को 21-19, 21-18 से हराया

भारत की मेंस डबल्स जोड़ी सात्विक साईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने सिंगापुर ओपन सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बना ली है। चौथी वरीयता वाली भारतीय जोड़ी ने शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर-1 साउथ कोरियाई जोड़ी किम वोन हो और सियो सेउंग जे को 21-19 और 21-18 से हरा दिया। 52 मिनट तक चले मुकाबले में सात्विक और चिराग ने 21-19, 21-18 से जीत दर्ज की। यह भारतीय जोड़ी की किम और सियो के खिलाफ पहली जीत भी है। पहले गेम में पिछड़ने के बाद वापसी की मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों जोड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पहले गेम के मिड-गेम ब्रेक तक कोरियाई जोड़ी 13-11 से आगे थी। हालांकि, सात्विक और चिराग ने दबाव में शानदार खेल दिखाया। उन्होंने लगातार अंक जुटाए और वापसी करते हुए पहला गेम 21-19 से अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में भी सात्विक और चिराग 11-14 से पीछे चल रहे थे। फिर वापसी करते हुए दूसरा गेम 21-18 से जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। रविवार को दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से मुकाबला अब भारतीय जोड़ी दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से रविवार को भिड़ेगी। दूसरा सेमीफाइनल इंडोनेशिया की फजार अल्फियान-मुहम्मद शोहिबुल फिकरी जोड़ी और चीन की लियांग वेई कांग-चांग वांग के बीच होगा। मिश्रित युगल में भारत को निराशा मिश्रित युगल वर्ग में भारत को निराशा हाथ लगी है। ध्रुव कपिला और तनिषा क्रास्टो की जोड़ी सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गई। भारतीय जोड़ी को जापान के युइची शिमोगामी और सयाका होबारा के खिलाफ 16-21, 21-17, 13-21 से हार का सामना करना पड़ा। तीन गेम तक चले इस मुकाबले में ध्रुव और तनिषा ने दूसरे गेम में वापसी की, लेकिन आखिरी गेम में जापानी जोड़ी ने बाजी मार ली। ——————————– स्पोर्ट्स की ये खबर भी पढ़ें… विनेश फोगाट को हराने वाली मीनाक्षी गोयत की कहानी:मां के कैंसर से टूटीं, खुद के पैर में चोट, डॉक्टरों ने कहा था- चल नहीं पाएगी “पहले मां को कैंसर हुआ। फिर खुद के पैर में चोट लगी। डॉक्टरों ने कहा था कि सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल हो सकता है, तब लगा था कि सब खत्म हो गया, लेकिन हार नहीं मानी।” हरियाणा के जींद जिले की 25 साल की पहलवान मीनाक्षी गोयत की यह कहानी संघर्ष, जज्बे और मेहनत की मिसाल है। पूरी खबर पढ़ें…
‘बीजेपी की राजनीति के बारे में बहुत कुछ बताता है’: विपक्ष ने बंगाल में अभिषेक बनर्जी पर हमले की निंदा की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:30 मई, 2026, 18:26 IST सोनारपुर में उत्तेजित भीड़ ने अभिषेक बनर्जी पर हमला कर दिया, लोगों ने उन पर अंडे और ईंटें फेंकी और उन्हें “चोर” कहा। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर पत्थर, जूते और अंडे फेंके जाने के बाद उन्होंने हेलमेट पहना। (पीटीआई) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में एक टीएमसी कार्यकर्ता के घर के दौरे के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हिंसक हमले की निंदा की और क्षेत्र में पुलिस कर्मियों की कमी पर सवाल उठाया। अभिषेक बनर्जी को शनिवार को सोनारपुर की अपनी हाई-प्रोफाइल यात्रा के दौरान शत्रुतापूर्ण विरोध का सामना करना पड़ा, जहां एक उत्तेजित भीड़ ने सांसद पर पथराव और अंडे फेंके, जब वह बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा में मारे गए एक टीएमसी कार्यकर्ता के घर गए थे। गुस्साई भीड़ ने अभिषेक बनर्जी का विरोध किया और उनके खिलाफ “चोर-चोर” के नारे भी लगाए। बनर्जी को फटी सफेद शर्ट और क्रिकेट हेलमेट पहने देखा गया, कई लोगों ने उन्हें धक्का दिया और पकड़ लिया। सांसद के सुरक्षा दस्ते ने उन्हें बचाने के लिए उनके चारों ओर एक सुरक्षात्मक घेरा बनाया। बाद में बनर्जी ने भाजपा पर घटना को अंजाम देने का आरोप लगाया। वीडियो | दक्षिण 24 परगना, पश्चिम बंगाल: टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ मारपीट, ‘बांग्लादेशी’ कहा गया; सोनारपुर निवासियों द्वारा पत्थरों और अंडों से हमला किया गया। बनर्जी कहते हैं, “यह भाजपा सरकार द्वारा प्रायोजित है, अदालत जाएंगे; बार-बार याद दिलाने के बावजूद कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं है।” (पूरा वीडियो… pic.twitter.com/Nuo0OHyQe1 – प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 30 मई, 2026 इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों ने हमले की निंदा की एक्स को संबोधित करते हुए, खड़गे ने बनर्जी पर “चौंकाने वाले हमले” की निंदा की और सांसद के लिए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “एक प्रमुख विपक्षी नेता के लिए जानबूझकर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की कमी भाजपा की प्रतिशोध और उत्पीड़न की राजनीति के बारे में बहुत कुछ कहती है। पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार को सभी विपक्षी नेताओं के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और ऐसे हमलों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। राजनीतिक मतभेद कभी भी किसी भी प्रकार की हिंसा को उचित नहीं ठहरा सकते।” सोनारपुर में सांसद श्री अभिषेक बनर्जी पर हुए चौंकाने वाले हमले की कड़ी निंदा करते हैं, जब वह राज्य में चुनाव के बाद की हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने गए थे। एक प्रमुख विपक्षी नेता के लिए जानबूझकर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की कमी भाजपा के बारे में बहुत कुछ कहती है… – मल्लिकार्जुन खड़गे (@खरगे) 30 मई, 2026 समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर बनर्जी पर ”जानलेवा हमला” कराने का आरोप लगाया। उन्होंने एक्स पर कहा, “बंगाल में अराजक भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि भाजपा नफरत भरी, नकारात्मक, हिंसक राजनीति के अलावा कुछ भी करने में सक्षम नहीं है। ऐसे संवेदनशील माहौल में भी पुलिस व्यवस्था का अभाव एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।” बंगाल में नागालैंड कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेता श्री अभिषेक मोदी जी के ऊपर मानवाधिकारवादी हमला करवाकर बंगाल की झूठी भाजपा सरकार ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा नफरत से भरी नकारात्मक हिंसक राजनीति और कुछ भी नहीं कर सकती है। तीसरे संवेदनशील संस्थान में भी पुलिस की व्यवस्था न होना एक बड़ी…—अखिलेश यादव (@yadavkhiresh) May 30, 2026 टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी कहा कि अभिषेक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई और भाजपा समर्थकों ने उन पर हमला किया और सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के दिन उनकी सुरक्षा क्यों वापस ले ली गई। ‘उन्होंने मुझे मारने की कोशिश की’ घटना के तुरंत बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र के उनके संस्करण का स्पष्ट उदाहरण बताया। हालांकि, भाजपा ने बनर्जी के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन विपक्षी टीएमसी के स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ जनता के गुस्से की एक सहज अभिव्यक्ति थी। बनर्जी ने स्थानीय प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही चुनाव चक्र समाप्त हुए एक महीना भी नहीं हुआ है, लेकिन अराजकता के शुरुआती क्षणों में पुलिस कहीं नजर नहीं आई। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “वे मुझे मारना चाहते थे। पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है। हम निश्चित रूप से उच्च न्यायालय को इस बारे में बताएंगे। हम राज्यपाल को भी इस बारे में बताएंगे। मैं निश्चित रूप से अदालत जाऊंगा।” बनर्जी ने कहा, “उन्होंने ईंट फेंकी, अंडा फेंका और पथराव किया। कृपया मुझे बताएं कि यह क्या है… उन्होंने मेरी आंख पर ईंट मारी और मैं अपनी आंख नहीं खोल पा रही हूं। उन्होंने मेरी पीठ, छाती, बांह और पैर पर मुक्का मारा।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘भाजपा की राजनीति के बारे में बहुत कुछ बताता है’: विपक्ष ने बंगाल में अभिषेक बनर्जी पर हमले की निंदा की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अभिषेक बनर्जी पर हमला(टी)अभिषेक बनर्जी(टी)टीएमसी सांसद पर हमला(टी)सोनारपुर हिंसा(टी)चुनाव बाद हिंसा बंगाल(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे प्रतिक्रिया(टी)अखिलेश यादव का बयान
अभिषेक बनर्जी को बंगाल के सोनारपुर में भीड़ के हमले का सामना करना पड़ा: हिंसक विरोध के दौरान पत्थर, अंडे फेंके गए | भारत समाचार

आखरी अपडेट:30 मई, 2026, 17:53 IST स्पष्ट रूप से उद्दंड अभिषेक बनर्जी ने भाजपा की आलोचना करते हुए व्यवधान को पूरी तरह से सुनियोजित हमला करार दिया। सत्तारूढ़ दल ने दावे को खारिज कर दिया बनर्जी ने स्थानीय प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही चुनाव चक्र समाप्त हुए एक महीना भी नहीं हुआ है, लेकिन अराजकता के शुरुआती क्षणों में पुलिस कहीं नजर नहीं आई। छवि/न्यूज़18 तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर की अपनी हाई-प्रोफाइल यात्रा के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध का सामना करना पड़ा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, स्थिति तेजी से हिंसा में बदल गई जब बनर्जी पश्चिम बंगाल में हाल ही में चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित पीड़ितों के परिवारों से मिलने पहुंचे तो उत्तेजित भीड़ ने उन पर पत्थर और अंडे फेंके। स्थानीय पुलिस की तैनाती को जनता के गुस्से के अचानक फैलने को रोकने के लिए संघर्ष करना पड़ा, जिसके कारण तीव्र सुरक्षा झड़पें हुईं और चोटों को रोकने के लिए सांसद के सुरक्षा विस्तार को उनके चारों ओर एक सुरक्षात्मक घेरा बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। घटना के तुरंत बाद मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से उद्दंड अभिषेक बनर्जी ने व्यवधान को पूरी तरह से सुनियोजित हमला करार दिया। उन्होंने सीधे तौर पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि यह हमला उनके लोकतंत्र के संस्करण का एक स्पष्ट उदाहरण है। बंगाल में अब क्या हो रहा है दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के लोकसभा नेता @AITCofficial चुनाव बाद हिंसा में भाजपा द्वारा मारे गए एक व्यक्ति के परिवार से मिलने गए। कुछ भाजपा समर्थकों ने @ अभिषेकएआईटीसी की पीट-पीटकर हत्या कर दी। जान जोखिम में. पुलिस कहां है…- डेरेक ओ’ब्रायन | ডেরেক ও’ব্রায়েন (@derekobrienmp) 30 मई, 2026 बंगाल में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बंगाल की जनता का भारी गुस्सा सड़कों पर…… pic.twitter.com/jN80NiPDFc– प्रदीप भंडारी(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) 30 मई, 2026 बनर्जी ने स्थानीय प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही चुनाव चक्र समाप्त हुए एक महीना भी नहीं हुआ है, लेकिन अराजकता के शुरुआती क्षणों में पुलिस कहीं नजर नहीं आई। टीएमसी नेतृत्व ने उस खुफिया विफलता की तत्काल जांच की मांग की है, जिसके कारण हाई-प्रोफाइल सांसद को पथराव करने वाली भीड़ का सामना करना पड़ा। सोनारपुर में हुई हिंसा पश्चिम बंगाल में अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य को रेखांकित करती है, जो चुनाव के बाद भी जारी है। भाजपा ने आंदोलन को प्रायोजित करने के बनर्जी के आरोपों का जोरदार खंडन किया है और कहा है कि विरोध प्रदर्शन विपक्षी टीएमसी के स्थानीय नेतृत्व के खिलाफ जनता के गुस्से की एक सहज अभिव्यक्ति थी। स्थानीय पुलिस ने सोनारपुर के संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च करने और व्यवस्था बहाल करने के लिए दंगा-रोधी दस्तों सहित बड़े पैमाने पर सुदृढीकरण तैनात किया है। जैसा कि तृणमूल ने अपने राष्ट्रीय महासचिव पर हमले के विरोध में सड़कों पर उतरने की कसम खाई है, इस टकराव से कानून-व्यवस्था मशीनरी पर और दबाव पड़ेगा और राज्य भर में गहरे बैठे राजनीतिक विभाजन को और गहरा किया जाएगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया अभिषेक बनर्जी को बंगाल के सोनारपुर में भीड़ के हमले का सामना करना पड़ा: हिंसक विरोध के दौरान पत्थर, अंडे फेंके गए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें







