फ्रांस में 100 से ज्यादा स्कूलों में चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल:3 साल की बच्ची का 'मॉनिटर' ने रेप किया; केस की खुली सुनवाई शुरू

फ्रांस इस समय एक बड़े चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल से जूझ रहा है। पेरिस समेत 100 से ज्यादा स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में बच्चों के साथ हिंसा, यौन शोषण और रेप के आरोपों की जांच चल रही है। मामले सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश बढ़ गया है। 100 से ज्यादा संस्थानों में जांच पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको ने बताया कि राजधानी में 84 प्रीस्कूल, करीब 20 प्राइमरी स्कूल और लगभग 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। कई मामलों में छोटे बच्चों के साथ रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। आरोप स्कूल मॉनिटर्स पर लगे हैं। ये वे कर्मचारी होते हैं जो बच्चों की देखभाल लंच ब्रेक, खेल, सोने के समय और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान करते हैं। #MeTooSchool आंदोलन ने उठाई आवाज कोर्ट के बाहर #MeTooSchool आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर पर लिखा- “कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न डरे।” आंदोलन की सह-संस्थापक बार्का जरूआली ने कहा कि अब पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागने की जरूरत है। बच्चों को भूखा रखने और मारपीट के आरोप अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ मॉनिटर्स बच्चों पर चिल्लाते थे, बाल खींचते थे और खाना देने से मना कर देते थे। कुछ मामलों में बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप भी लगे हैं। पीड़ित परिवारों के वकीलों का कहना है कि कई अभिभावकों को शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई करवाने के लिए महीनों संघर्ष करना पड़ा। पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक कराया फ्रांस में बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई आमतौर पर बंद कमरे में होती है, लेकिन इस बार पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक रखने की मांग की। परिवारों के वकीलों के मुताबिक वे गिसेल पेलिको के चर्चित रेप केस से प्रेरित थे। गिसेल ने कहा था कि “शर्म पीड़ितों नहीं, अपराधियों को होनी चाहिए।” कोर्ट में शुरू हुआ पहला बड़ा ट्रायल स्कैंडल से जुड़े पहले बड़े मामलों में से एक का ट्रायल इस हफ्ते पेरिस में शुरू हुआ। 36 वर्षीय स्कूल सहायक डेविड जी. पर सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच 3 से 5 साल के पांच बच्चों के यौन शोषण और दो महिला सहकर्मियों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है। हालांकि, आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक बच्चों ने पुलिस को अपने शब्दों में अनुचित छूने की घटनाएं बताईं। अगर दोष साबित हुए तो आरोपी को 10 साल तक की जेल और 1.5 लाख यूरो तक जुर्माना हो सकता है। बच्चों में दिखा गंभीर मानसिक असर कुछ अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों में लंबे समय से डर और मानसिक तनाव के संकेत दिख रहे थे। एक वकील ने बताया कि 3 साल का एक बच्चा स्कूल जाने से डरने लगा था। आरोप है कि उसके साथ हिंसा करने वाले मॉनिटर के खिलाफ पहले भी शिकायतें थीं। प्रशासन पर बढ़ा दबाव मामले सामने आने के बाद पेरिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों के मुताबिक 2026 के पहले तीन महीनों में 78 स्कूल सहायकों को सस्पेंड किया गया, जिनमें 31 पर यौन शोषण के आरोप हैं। फ्रांस की स्वतंत्र संस्था CIIVISE के अनुसार देश में हर साल करीब 1.6 लाख बच्चे रेप या यौन शोषण का शिकार होते हैं। फ्रांस में स्कूल मॉनिटर कौन होते हैं? फ्रांस में स्कूल मॉनिटर, जिन्हें एनिमेटर या पेरिस्कोलर स्टाफ भी कहा जाता है, स्थानीय नगर प्रशासन द्वारा नियुक्त कर्मचारी होते हैं। ये सीधे फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के अधीन नहीं होते। इनकी जिम्मेदारी नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में 3 से 11 साल तक के बच्चों की निगरानी करना होती है। ये बच्चों को लंच ब्रेक, दोपहर की नींद, खेलकूद और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान संभालते हैं। ये शिक्षक नहीं होते, बल्कि खेल, क्राफ्ट और मनोरंजन गतिविधियां संचालित करते हैं। वहीं सेकेंडरी स्कूलों (कॉलेज और हाई स्कूल) में अनुशासन, सुरक्षा और अनुपस्थिति की निगरानी ‘स्कूल लाइफ’ स्टाफ करता है, जो विशेष प्रशासनिक अधिकारियों के अधीन काम करता है। फ्रांस में तीन साल की उम्र से स्कूल जाना जरूरी है। इसलिए नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में छोटे बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा इन मॉनिटर्स के साथ बिताते हैं। मॉनिटर्स सीधे शिक्षा मंत्रालय या स्कूल के कर्मचारी नहीं होते। इन्हें स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद या सिटी हॉल की तरफ से भर्ती किया जाता है। अब यह सिस्टम विवादों में है। ऐसा कहा जा रहा है कि मॉनिटर्स की भर्ती प्रक्रिया बहुत कमजोर है। कई लोगों को बिना खास ट्रेनिंग, मनोवैज्ञानिक जांच या पेशेवर डिग्री के काम पर रख लिया जाता है। बड़ी संख्या में लोग अस्थायी या घंटे के हिसाब से काम करते हैं, इसलिए निगरानी और जवाबदेही भी कमजोर रहती है। क्या है #MeTooSchool आंदोलन? #MeTooSchool फ्रांस का एक अभिभावक और सामाजिक आंदोलन है, जो स्कूलों में बच्चों के खिलाफ यौन शोषण, हिंसा और उत्पीड़न के मामलों को सामने लाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करता है। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि शुरुआती शिकायतों को स्कूल प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया था। पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको के मुताबिक राजधानी में 84 नर्सरी स्कूल, 20 प्राइमरी स्कूल और 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने बताया कि 2026 की शुरुआत से अब तक 78 स्कूल और आफ्टर-स्कूल कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें 31 पर यौन हिंसा के आरोप हैं। उन्होंने बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए 2 करोड़ यूरो की योजना की घोषणा की है। आगे क्या? फ्रांस सरकार स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में सुरक्षा नियम कड़े कर सकती है। बच्चों के साथ काम करने वाले स्टाफ की जांच और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन बढ़ाए जाने की संभावना है। आने वाले महीनों में और ट्रायल और गिरफ्तारी हो सकती हैं।
कार्तिक आर्यन स्टारर स्पोर्ट्स ड्रामा में 'बजरंगी भाईजान' जैसा इमोशन:नकली बर्फबारी के बाद अब असली कश्मीर में शूटिंग करेंगे कबीर खान

कबीर खान अपनी नई फिल्म में फिर फैमिली-इमोशन और चाइल्ड-कनेक्ट वाले जॉनर में लौट रहे हैं। फिल्म में कार्तिक आर्यन मुख्य भूमिका में हैं और कहानी एक बच्चे व एक मैच्योर किरदार के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। सूत्रों के मुताबिक, फिल्म का टोन काफी हद तक सलमान खान स्टारर ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी भावनात्मक अपील वाला रखा गया है। मेकर्स इसे भारी वीएफएक्स या बड़े सेट्स की बजाय कंटेंट-ड्रिवन फिल्म के तौर पर तैयार कर रहे हैं। फिल्म का बजट भी नियंत्रित रखा गया है। मड आइलैंड में बना कश्मीर, कृत्रिम बर्फबारी भी की गई फिल्म का पहला बड़ा शेड्यूल मुंबई के मड आइलैंड में पूरा किया गया, जहां करीब 15 दिनों तक कश्मीर जैसा सेट तैयार किया गया था। प्रोडक्शन डिजाइन टीम ने वहां कश्मीरी गलियां, बाजार और लोकल मकानों का सेट लगाया। इसी सेट पर पत्थरबाजी और सुरक्षा बलों से जुड़े कुछ अहम सीक्वेंस शूट किए गए। रात के सीन्स के लिए बड़े कृत्रिम चांद और हाई-इंटेंसिटी लाइट्स का इस्तेमाल किया गया ताकि मूनलाइट जैसा प्रभाव मिल सके। मुंबई की गर्मी के बीच सेट पर कृत्रिम बर्फबारी और ठंडा माहौल तैयार करने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया। कई सीन्स में लोकल कश्मीरी बैकग्राउंड और तनावपूर्ण माहौल को बेहद रियल तरीके से कैद करने की कोशिश की गई है। रियल लोकेशन को भी पूरी प्राथमिकता दे रहे हैं मेकर्स मुंबई शेड्यूल पूरा होने के बाद अब फिल्म की यूनिट असली कश्मीर में शूटिंग कर रही है। टीम बीती 13 तारीख को मुंबई से रवाना हुई थी और 15 तारीख से वहां मुख्य शूट शुरू हो चुका है। यह आउटडोर शेड्यूल करीब 10 दिनों का रखा गया। इसमें फिल्म के इमोशनल हिस्से, ट्रेनिंग मोंटाज और लोकल लोकेशन वाले सीन्स फिल्माए गए। कहानी में कश्मीर का बैकड्रॉप काफी अहम भूमिका निभाता है, इसलिए मेकर्स ने रियल लोकेशंस पर भी शूट को प्राथमिकता दी है। यूनिट घाटी के कम भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्राकृतिक लोकेशंस पर शूट कर रही है ताकि विजुअल्स ज्यादा वास्तविक लगें। कुछ सीन्स स्थानीय कलाकारों और वास्तविक माहौल के बीच शूट हो रहे हैं, जिससे कहानी में ग्राउंडेड फील मिले। एप्लॉज और कबीर के जॉइंट वेंचर में बन रही फिल्म शुरुआती दिनों में इस फिल्म के मेकर्स के नामों को लेकर काफी गोपनीयता बरती जा रही थी। क्लैपबोर्ड और फाइलों पर किसी फाइनल टाइटल के बजाय केवल ‘प्रोजेक्ट नंबर’ या ‘प्रोडक्श नं.’ लिखा हुआ था, लेकिन अब यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि इस फिल्म के पीछे समीर नायर की मशहूर और बड़ी कंपनी एप्लॉज एंटरटेनमेंट खड़ी है। कॉर्पोरेट स्तर पर एप्लॉज एंटरटेनमेंट जैसी बड़ी कंपनी का इस फिल्म को लीड करना फिल्म की मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और पोस्ट-प्रोडक्शन के स्केल को बढ़ा रहा है।
गुजरात की हार पर भड़के ग्लेन फिलिप्स:धमर्शाला में बोले- हम हार नहीं मानते, हर चीज का पक्ष में होना जरूरी, जो नहीं हुआ

आईपीएल के नॉकआउट मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के हाथों मिली हार के बाद गुजरात टाइटंस (GT) के खेमे में मायूसी तो है, लेकिन खिलाड़ियों का हौसला कम नहीं हुआ है। मैच के बाद गुजरात टाइटंस के ग्लेन फिलिप्स मीडिया रूम में पत्रकारों के सवालों का जवाब देने आए। इस दौरान एक पत्रकार के ‘सरेंडर’ करने वाले सवाल पर फिलिप्स बुरी तरह भड़क गए और उसे ‘बेवकूफाना सवाल’ करार दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान माहौल उस समय गरमा गया जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या पहली पारी खत्म होने के बाद ही आप लोगों को समझ आ गया था कि मैच हाथ से निकल चुका है और अब अगले मैच का इंतजार करना चाहिए? इस सवाल पर फिलिप्स ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि, यह बेहद ही बेवकूफाना और घटिया सवाल है। कोई भी टीम मैदान पर यह सोचकर नहीं उतरती कि चलो इस मैच को छोड़ देते हैं। हम प्रोफेशनल क्रिकेटर्स हैं, हम ऐसा क्यों करेंगे? हम मैदान पर गए और अपना सब कुछ झोंक दिया। हर चीज को आपके पक्ष में होना जरूरी होता है : फिलिप्स उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्य से जब आप 250 रन जैसे विशाल लक्ष्य का पीछा कर रहे होते हैं, तो हर चीज का आपके पक्ष में होना जरूरी होता है, जो उस दिन नहीं हुआ। मैच के टर्निंग पॉइंट को लेकर फिलिप्स ने माना कि खराब फील्डिंग का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा, “प्लेऑफ जैसे बड़े मैचों में फील्डिंग की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। रुतुराज का कैच जब वह 21 रन पर थे, तब छूटना हमें बहुत भारी पड़ा। उन्होंने हमें इसकी बड़ी सजा दी।” फिलिप्स ने स्वीकार किया कि कोई भी जानबूझकर कैच नहीं छोड़ता, लेकिन हमें अपनी मानसिकता में थोड़ा बदलाव करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि मैदान पर हर खिलाड़ी में गेंद को लपकने और कुछ खास करने की भूख दिखनी चाहिए। 254 का पीछा करना आसान नहीं, स्कोरबोर्ड का भारी दबाव था उन्होंने कहा कि, पिच और रन चेज पर बात करते हुए फिलिप्स ने कहा, “यह काली मिट्टी की पिच थी। जब आप 254 रन का पीछा करते हैं, तो स्कोरबोर्ड का भारी दबाव होता है। पंजाब किंग्स ने इस सीजन में एक-दो बार ऐसा करके इसे आसान दिखा दिया है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। मैं आज तक किसी ऐसी टीम का हिस्सा नहीं रहा जो 250 के करीब भी पहुंची हो।” बिना खेले प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यों?’ फिलिप्स ने दिया मजेदार जवाब एक पत्रकार ने जब चुटकी लेते हुए पूछा कि आप आज प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं थे, फिर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब दे रहे हैं, क्या यह अजीब नहीं लगता? इस पर फिलिप्स ने मुस्कुराते हुए कहा कि, बिल्कुल नहीं। कई बार जो खिलाड़ी बाहर बैठा होता है, उसका नजरिया ज्यादा साफ होता है। हमारे मुख्य कोच आशीष नेहरा हमेशा कहते हैं- ‘चिल पिल लो’ (Take a chill pill)। खिलाड़ियों के लिए जरूरी है कि वे इस हार को भूलकर अगले मैच पर ध्यान लगाएं। एक रन की हार से बेहतर है ऐसी हार, वापसी करना आसान 2 दिन बाद होने वाले अगले नॉकआउट मुकाबले में वापसी को लेकर फिलिप्स ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बड़ी हार से उबरना कई बार 1 या 2 रन की हार से ज्यादा आसान होता है। अगर आप 1 रन से हारते हैं, तो आप सोचते रह जाते हैं कि काश वहां सिंगल ले लिया होता। लेकिन जब आप 250 रन के चेज में बहुत पीछे रह जाते हैं, तो आप बस यह मान लेते हैं कि आज हमारा दिन नहीं था। अच्छी बात यह है कि टॉप-2 में रहने की वजह से हमारे पास वापसी का एक और मौका मौजूद है।
टीएमसी में फूट? भाजपा नेता का दावा, 50 तृणमूल विधायक, 20 सांसद पाला बदलने को तैयार | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 13:05 IST वर्तमान में, टीएमसी के पास पश्चिम बंगाल से 29 लोकसभा सांसद हैं, जबकि भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास एक है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बीजेपी चाहे तो अगले कुछ दिनों में पूरी टीएमसी खत्म हो जाएगी. टीएमसी में उथल-पुथल गहरायी: 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपनी हार के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर अशांति व्यापक होती दिख रही है, जब वरिष्ठ भाजपा नेता सौमित्र खान ने दावा किया कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद भाजपा के संपर्क में थे और अगर पार्टी नेतृत्व मंजूरी देता है तो वे पाला बदलने के इच्छुक हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से उन्होंने कहा, “अगर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व एक बार कह दे तो टीएमसी अब पार्टी नहीं रहेगी. हर कोई आने के लिए तैयार है. करीब 50 विधायक पार्टी से नाखुश हैं और 20 सांसद शामिल होने के लिए तैयार हैं.” वर्तमान में, टीएमसी के पास पश्चिम बंगाल से 29 लोकसभा सांसद हैं, जबकि भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास एक है। भाजपा नेता ने तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ”पापी” बताया और कहा कि ”पापियों को जेल जाना होगा।” दल-बदल विरोधी कानून के तहत, अयोग्यता से बचने के लिए संसदीय दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों को एक साथ पाला बदलने की जरूरत होती है। टीएमसी के मामले में, लोकसभा में 29 सांसदों के साथ, संख्या लगभग 19 या 20 बैठती है। भाजपा नेता के दावों को खारिज करते हुए, वरिष्ठ टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने आरोपों को “बिल्कुल फर्जी” बताया। रॉय ने कहा, “भाजपा और सौमित्र खान पत्रकारों को जो कुछ दे रहे हैं, वह बिल्कुल फर्जी है। ऐसा कुछ नहीं होगा।” यह अटकलें ऐसे समय में आई हैं जब टीएमसी के भीतर असंतोष तेजी से दिखाई देने लगा है। पार्टी के कई सांसदों, विधायकों और स्थानीय नेताओं ने हाल के हफ्तों में सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है। यह बेचैनी पूरे पश्चिम बंगाल में नागरिक निकायों से इस्तीफों की लहर के साथ भी आई है। हाल के दिनों में कथित तौर पर 100 से अधिक पार्षदों ने विभिन्न नगर पालिकाओं से इस्तीफा दे दिया है। सबसे बड़ा झटका भाटपाड़ा में लगा, जहां नगर पालिका अध्यक्ष रेबा राहा समेत 35 में से 30 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया. हलीशहर, कांचरापाड़ा, गारुलिया, उत्तरी बैरकपुर और कोंटाई से भी इसी तरह के इस्तीफे की खबरें आईं। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का गढ़ माने जाने वाले डायमंड हार्बर में आठ पार्षदों ने यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास नागरिक निकाय चलाने में बहुत कम अधिकार हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले, कई प्रमुख टीएमसी नेता भाजपा में चले गए थे, लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सत्ता बरकरार रखने के बाद वे वापस लौट आए। लेकिन इस बार समीकरण अलग हैं, टीएमसी के 15 साल के शासन को खत्म करने के बाद बीजेपी अब बंगाल की सत्ता में है। यह अटकलें ऐसे समय में आई हैं जब टीएमसी के भीतर बेचैनी के संकेत तेजी से दिखाई देने लगे हैं, हाल के हफ्तों में कई विधायकों, सांसदों और नेताओं ने सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया टीएमसी में फूट? भाजपा नेता का दावा, 50 तृणमूल विधायक, 20 सांसद पाला बदलने को तैयार अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
चांदी दो दिन में ₹9000 सस्ती, ₹2.66 लाख पर आई:सोना ₹1,800 रुपए सस्ता हुआ, 10 ग्राम सोना ₹1.57 लाख पर आया

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 27 मई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 1 किलो चांदी की कीमत 4,503 रुपए कम होकर 2.62 लाख रुपए पर आ गई है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 571 रुपए गिरकर 1.57 लाख रुपए हो गया है। चांदी की कीमत 2 दिन में 9 हजार और 1,800 रुपए सस्ता हो चुकी है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 27 मई 2026 सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.57 लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है। चांदी की कीमतों में क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.62 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑलटाइम हाई से काफी नीचे आई है। सोना 118 दिन में ₹19 हजार और चांदी ₹1.24 लाख सस्ती सोर्स: IBJA गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है: ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें।
चांदी दो दिन में ₹9000 सस्ती, ₹2.62 लाख पर आई:सोना ₹1,800 रुपए सस्ता हुआ, 10 ग्राम सोना ₹1.57 लाख पर आया

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कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के बीच सिद्धारमैया की पहली प्रतिक्रिया: नेहरू की सराहना, इस्तीफे पर चुप | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 12:09 IST सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक में जल्द ही एक बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है, जिसमें सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बाहर निकलते ही सिद्धारमैया ने कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के आसार के रूप में नेहरू की प्रशंसा की कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के मजबूत संकेतों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को अपने इस्तीफे की खबरों पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि वह इस मुद्दे पर “कल” बोलेंगे। संभावित सत्ता परिवर्तन पर अटकलें तेज होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलते हुए, सिद्धारमैया ने इसके बजाय भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रशंसा की, उन्होंने कहा कि नेहरू ने ऐसी योजनाएं पेश कीं जिन्होंने देश को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने में मदद की। सूत्रों ने संकेत दिया कि कर्नाटक में जल्द ही एक बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखा जा सकता है, जिसमें सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया के 28 मई को पद छोड़ने की उम्मीद है और बाद में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर व्यापक संतुलन अभ्यास के हिस्से के रूप में राज्यसभा में भेजा जा सकता है। कथित तौर पर कांग्रेस नेतृत्व राज्य में जाति और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने के लिए कई उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति पर भी विचार कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में दलित, अल्पसंख्यक, लिंगायत और ओबीसी समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं, हालांकि चर्चा अभी शुरुआती चरण में है। कथित तौर पर सिद्धारमैया को प्रमुख मंत्रियों के चयन और कर्नाटक के भविष्य के राजनीतिक ढांचे को आकार देने में भूमिका का आश्वासन दिया गया है। रिपोर्टों से पता चलता है कि उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दिल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के बीच सिद्धारमैया की पहली प्रतिक्रिया: नेहरू की सराहना, इस्तीफे पर चुप अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन(टी)सिद्धारमैया का इस्तीफा(टी)डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री(टी)कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक(टी)कर्नाटक राजनीतिक परिवर्तन(टी)उपमुख्यमंत्री कर्नाटक(टी)जाति संतुलन कांग्रेस(टी)राज्यसभा कदम
करिश्मा के बच्चों के पास फीस भरने के पैसे नहीं:सौतेली मां ने कोर्ट से संजय कपूर के EPF से पैसे निकालने की मांगी की, नोटिस जारी

करिश्मा कपूर के पूर्व पति संजय कपूर के निधन के बाद से ही उनके बच्चों और उनकी पत्नी प्रिया सचदेव के बीच प्रॉपर्टी और वसीयत पर कानूनी जंग जारी है। फैसला आने तक कोर्ट ने संजय कपूर की प्रॉपर्टी फ्रीज कर दी है। मामले की सुनवाई के समय करिश्मा कपूर के बच्चों ने दावा किया था कि उनके पास स्कूल-कॉलेज की फीस भरने तक के लिए पैसे नहीं हैं। इस पर अब संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर ने एक याचिका दायर कर पति के EPF अकाउंट से पैसे निकालने की इजाजत मांगी है। मामले में अब कोर्ट ने अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। प्रिया कपूर की याचिका की सुनवाई 26 मई को हुई, जिसमें 30 अप्रैल को कोऑर्डिनेट बेंच द्वारा संजय कपूर के सभी खातों को फ्रीज करने के आदेश पर आंशिक संशोधन की मांग हुई है। कोर्ट में सबमिट किए गए डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, प्रिया कपूर ने अंतरिम आदेश के अनुच्छेद 79 के खंड B और D में बदलाव करने का अनुरोध किया है। लाइव एंड लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रिया कपूर के वकील ने कोर्ट में साफ किया है कि EPF से निकाले गए पैसों का इस्तेमाल, सिर्फ करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए किया जाएगा। करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने कोर्ट में याचिका दायर कर पिता संजय कपूर की वसीयत और प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी मांगी थी। तब प्रिया कपूर ने कोर्ट में एक वसीयत दिखाई, जिसमें कियान और समायरा के नाम कुछ भी खास नहीं लिखा गया था। तब बच्चों ने पिता की राइटिंग, बार-बार बच्चों के नाम गलत लिखे जाने पर वसीयत को फर्जी बताया। मामले की सुनवाई करते हुए 30 अप्रैल को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संजय कपूर की प्रॉपर्टी और अकाउंट फ्रीज कर दिए थे। कोर्ट ने प्रिया कपूर पर लगाई इन चीजों की अस्थाई रोक- हालांकि तब सुनवाई में बच्चों की पढ़ाई और तलाक की शर्तों के लिए छूट दी गई थी। अब नई याचिका में प्रिया कपूर, कोर्ट के ऑर्डर में संशोधन की मांग कर रही हैं, इसलिए कोर्ट द्वारा केस से जुड़े सभी लोगों को नोटिस जारी कर उनकी सहमति मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई में होगी। क्यों करिश्मा के बच्चों की फीस भरना चाहती हैं प्रिया दरअसल, जब करिश्मा कपूर ने संजय कपूर से तलाक लिया था, तो बच्चों की पढ़ाई के खर्चे की जिम्मेदारी संजय कपूर ने लिखित ली थी। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी प्रिया ने उनके सारे अकाउंट्स पर हक जताया, जिसके बाद करिश्मा के बच्चों की जिम्मेदारी भी उन पर आई। वसीयत के लिए करिश्मा के बच्चों ने प्रिया के खिलाफ याचिका दायर की है, इसके बावजूद उनके खर्च की जिम्मेदारी प्रिया पर ही है। एक सुनवाई के दौरान करिश्मा की बेटी समायरा ने कोर्ट में कहा कि पिछले 2 महीनों से उनके कॉलेज की फीस नहीं भरी गई है। वो अमेरिका में पढ़ाई करती हैं। तब कोर्ट ने इस मामले पर दोनों पक्षों को फटकारा था। तब प्रिया के वकील ने कहा था कि वो बच्चों की फीस समय पर देंगे। लेकिन अकाउंट फ्रीज होने से अब उन्हें फीस चुकाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जून 2015 में हुआ संजय कपूर का निधन संजय कपूर की मौत 12 जून 2025 को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। करिश्मा कपूर ने 2003 में संजय से शादी की थी। इससे उन्हें दो बच्चे कियान-समायरा हुए। शादी के 13 साल बाद करिश्मा-संजय ने आपसी सहमति से तलाक लिया था। इसके बाद संजय ने प्रिया सचदेव से तीसरी शादी की थी। करिश्मा से पहले उन्होंने नंदिता महतानी से पहली शादी की थी, लेकिन वो भी टूट गई।
‘हमारे बीच कोई विभाजन नहीं’: 4 विधायकों के विजय के टीवीके में शामिल होने के बाद अन्नाद्रमुक ने एकता का संकेत दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 10:29 IST इस्तीफों के साथ, 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में अन्नाद्रमुक की ताकत घटकर 43 हो गई है। दलबदल 2026 के विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके के खराब प्रदर्शन के बाद हुआ, जहां पार्टी ने केवल 47 सीटें जीतीं। अन्नाद्रमुक संकट: सत्तारूढ़ तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) में शामिल हुए चार विधायकों के इस्तीफे के बाद अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएम) के भीतर बढ़ती उथल-पुथल के बीच, पार्टी ने बुधवार को अपने युद्धरत गुटों के संभावित पुनर्मिलन का संकेत दिया और एकता का आह्वान किया। एक्स पर एक पोस्ट में, एआईएडीएमके की आईटी विंग ने घोषणा की कि “हमारे बीच कोई विभाजन नहीं होगा” और कहा कि कोई भी पार्टी को कमजोर नहीं कर सकता है, जिसे अक्सर समर्थकों द्वारा “ईएफ किला” कहा जाता है। दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता और एआईएडीएमके के लिए उनके दृष्टिकोण का हवाला देते हुए, पार्टी ने कहा, “अब से, हमारे बीच कोई विभाजन नहीं होगा… अब कोई भी इस ईएफ किले को नष्ट करने का रास्ता नहीं ढूंढ सकता है। हमारा लक्ष्य केवल एक ही है… वह केवल हमारे दो पत्तों वाले झंडे को एक बार फिर से किले पर फहराना है।” ” எனக்கு பின்னாலும் இன்னும் எத்தனை நூற்றாண்டுகள் ஆனாலும் அனைத்திந்திய அண்ணா मोबाइल फोन नंबर उत्तर தியாகத்தால் வளர்ந்த இந்த எஃகு கோட்டையை இனி यह एक अच्छा विचार है! एक और विकल्प देखें… कृपया… pic.twitter.com/irmekC9pu6 – एआईएडीएमके आईटी विंग – SayyesToWomenSafety&AIADMK (@AIADMKITWINGOFL) 27 मई 2026 नवीनतम एक्स पोस्ट में अनुमान लगाया गया है कि एआईएडीएमके के भीतर प्रतिद्वंद्वी गुट विधानसभा में पार्टी की स्थिति को कमजोर करने की एक श्रृंखला के बाद समर्थन में और कमी को रोकने के लिए फिर से एकजुट हो सकते हैं। ताजा झटका अंबासमुद्रम विधायक एसाक्की सुबया के पार्टी से इस्तीफा देने और मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले टीवीके में शामिल होने के बाद आया। वह दो दिनों में खेमा बदलने वाले चौथे एआईएडीएमके विधायक बन गए। इससे पहले, एआईएडीएमके विधायक के मारागथम, डी जयकुमार और वी सत्यबामा ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गए, जिससे एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। इस्तीफों के साथ, 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में अन्नाद्रमुक की ताकत घटकर 43 हो गई है। खाली सीटों पर छह महीने के भीतर उपचुनाव होने की उम्मीद है। 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद दलबदल को अन्नाद्रमुक महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। अन्नाद्रमुक तमिलनाडु की 234 में से केवल 47 सीटें हासिल करने में सफल रही, जबकि विजय की टीवीके ने 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरकर राजनीतिक परिदृश्य को हिला दिया। हालाँकि, पार्टी बहुमत के निशान से 10 सीटें पीछे रह गई, जिससे चुनाव के बाद गहन बातचीत और गठबंधन बनाने के प्रयास शुरू हो गए। नतीजों ने तमिलनाडु की राजनीति में द्रमुक-विरोधी क्षेत्र के निर्विवाद चेहरे के रूप में ईपीएस के दावे को कमजोर कर दिया और पार्टी के अंदर एक अभूतपूर्व विद्रोह हुआ, जिसमें सी वी षणमुगम ने अन्नाद्रमुक सुप्रीमो पर सरकार बनाने के लिए कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाया। कम से कम 25 विधायकों ने पार्टी तोड़ दी, पार्टी व्हिप की अनदेखी की और टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया, जिससे विजय के विधायकों की संख्या 144 हो गई। विद्रोह के बाद से अन्नाद्रमुक के भीतर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू हो गई है, जिसमें दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई भी शामिल है। कई वरिष्ठ नेताओं ने ईपीएस की “तानाशाहीपूर्ण” कार्यप्रणाली की आलोचना की है और उन पर गठबंधन और उम्मीदवार चयन पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया है। विद्रोही गुट ने कहा कि एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता के दृष्टिकोण के अनुसार पार्टी को बहाल करने के लिए ईपीएस को हटाया जाना चाहिए। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘हमारे बीच कोई विभाजन नहीं’: 4 विधायकों के विजय के टीवीके में शामिल होने के बाद एआईएडीएमके ने एकता का संकेत दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)एआईएडीएमके(टी)पलानीस्वामी(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)जयललिता(टी)तमिल नाडु
रिपोर्ट- ईरान फिर जंग की तैयारी में जुटा:कहा- अमेरिका पर भरोसा नहीं; होर्मुज स्ट्रेट को सबसे बड़ा हथियार बताया

ईरान अमेरिका के साथ संभावित नए युद्ध के लिए तैयारी कर रहा है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान को वॉशिंगटन पर बिल्कुल भरोसा नहीं है और वह होर्मुज स्ट्रेट को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार मान रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी अधिकारी तीन मोर्चों पर काम कर रहे हैं- सैन्य तैयारी, घरेलू समर्थन और कूटनीति। हालांकि बातचीत का रास्ता खुला रखा गया है, लेकिन सेना और ईरान रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) हाई अलर्ट पर हैं। ईरान मानता है कि होर्मुज स्ट्रेट उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसी वजह से तेहरान इसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने के बड़े हथियार के तौर पर देख रहा है। ईरानी नेतृत्व ने कहा है कि नए संघर्ष की स्थिति में अमेरिका के सैन्य ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और उससे जुड़े हित निशाने पर हो सकते हैं। कुछ दिन पहले IRGC ने भी चेतावनी दी थी कि किसी नए अमेरिकी हमले का जवाब पहले से ज्यादा हिंसक होगा और उसका असर मिडिल-ईस्ट से बाहर तक महसूस किया जाएगा। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…






