मां का सपना पूरा करने मुंबई पहुंचीं मुस्कान:लोगों ने कहा- गलत काम करती होगी, फिर इंस्पेक्टर अविनाश में देखकर प्राउड फील किया

एक्ट्रेस मुस्कान वर्मा ने छोटे शहर रुड़की से निकलकर मुंबई में अपनी पहचान बनाई। म्यूजिक सीखने वाली मुस्कान के भीतर एक्टिंग का सपना उनकी मां ने जगाया, जो खुद एक्ट्रेस बनना चाहती थीं। शुरुआती दिनों में उन्हें संघर्ष, रिजेक्शन और लोगों के ताने झेलने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वेब सीरीज ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में बिन्नी के किरदार ने उन्हें नई पहचान दी। दैनिक भास्कर से बातचीत में मुस्कान ने अपने स्ट्रगल, कास्टिंग काउच, परिवार के सपोर्ट, रणदीप हुड्डा के साथ काम करने का अनुभव और भावुक क्रिमेशन सीन से जुड़ी यादें साझा कीं। सवाल: आपकी जर्नी बहुत खूबसूरत रही है। रुड़की जैसे शहर से मुंबई तक पहुंचना आसान नहीं होता। सबसे पहले एक्टिंग का सपना कब देखा? जवाब: सच कहूं तो यह सपना मेरी मम्मी का था। वह खुद एक्ट्रेस बनना चाहती थीं, लेकिन उस समय लड़कियों की जल्दी शादी हो जाती थी। उनका सपना अधूरा रह गया। धीरे-धीरे वही सपना मेरे अंदर आने लगा। मम्मी मुझे बचपन से दो रिबन, काजल और लिपस्टिक लगाकर हीरोइन की तरह तैयार करती थीं। लोग कहते थे कि जिस तरह यह बच्ची को तैयार करती है, यह जरूर फिल्मों में जाएगी। सवाल: यानी कहीं न कहीं मम्मी ने आपके अंदर वह सपना डाल दिया था? जवाब: बिल्कुल। फिर मैंने म्यूजिक का छह साल का कोर्स किया। मेरी मैम कहती थीं कि तुम्हें मुंबई जाकर कोशिश करनी चाहिए। उसके बाद मम्मी-पापा ने मुझे एक-दो साल का समय दिया कि जाओ और ट्राई करो। सवाल: जब घर से सीमित समय मिला था, तब मुंबई आने के बाद पहला मौका कैसे मिला? जवाब: मैं कोविड से थोड़ा पहले मुंबई आई थी और जल्दी ही मुझे एक टीवीसी ऐड मिल गया। फिर लगा कि शायद मैं सही दिशा में जा रही हूं। कोविड के दौरान पापा ने कहा था कि अब वापस आ जाओ, क्योंकि उस समय बहुत लोग मुंबई छोड़ रहे थे। लेकिन तभी मुझे ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ मिल गई। सवाल: मुंबई में शुरुआत कैसे हुई? पहली बार कहां रुकी थीं? जवाब: शुरुआत में मैं न्यू म्हाडा में रुकी थी। रिश्तेदारों के जरिए रहने की व्यवस्था हुई। धीरे-धीरे ऑडिशन देना शुरू किया, लोगों से मिलती गई और इंडस्ट्री को समझती गई। सवाल: छोटे शहर से आने वाले लोगों के लिए मुंबई को समझना आसान नहीं होता। आपने कैसे सीखा? जवाब: ऑडिशन में जाती गई और लोगों से मिलती गई। फिर दोस्त बने। किसी ने बताया कि ऐसे ऑडिशन देना होता है और ऐसे कास्टिंग डायरेक्टर से मिलना होता है। बाद में मैं मेडिटेशन और ब्रह्माकुमारी से भी जुड़ गई। मुझे लगता है कि भगवान कृष्ण की कृपा से सब होता चला गया। सवाल: आपने म्यूजिक की पढ़ाई की। तो सपना सिंगर बनने का था या एक्ट्रेस बनने का? जवाब: शुरुआत में सपना सिंगिंग का था। मेरी आवाज की तारीफ होती थी। लेकिन धीरे-धीरे एक्टिंग की तरफ झुकाव बढ़ता गया। सच कहूं तो अब काफी समय से मैंने रियाज नहीं किया है। एक्टिंग में इतना बिजी हो गई हूं कि म्यूजिक थोड़ा पीछे छूट गया। लेकिन अगर आगे कभी मौका मिला, तो मैं अपनी किसी फिल्म या प्रोजेक्ट में जरूर गाना चाहूंगी। सवाल: आपको कब लगा कि एक्टिंग ही करनी है? जवाब: जब मम्मी दिन में सोती थीं, तब मैं साड़ी पहनकर माधुरी दीक्षित के गानों पर डांस करती थी। शायद वहीं से सब शुरू हुआ। सवाल: पेरेंट्स क्या करते हैं और परिवार में सबसे ज्यादा सपोर्ट किसका मिला? जवाब: मेरे पापा पत्रकार हैं और मम्मी टीचर हैं। सबसे ज्यादा सपोर्ट मम्मी का मिला। पापा थोड़े स्ट्रिक्ट थे। म्यूजिक क्लास मम्मी ने उनसे छुपाकर कराई। उन्हें डर था कि मेरे सपने कहीं खत्म न हो जाएं। सवाल: मुंबई में संघर्ष कितना मुश्किल रहा? जवाब: बहुत मुश्किल था। यहां अच्छे और गलत दोनों तरह के लोग मिले। कॉम्प्रोमाइज जैसी बातें सुननी पड़ीं। लेकिन मैंने ऐसे कई प्रोजेक्ट छोड़ दिए। मुझे लगा कि गलत रास्ते से सफलता नहीं चाहिए। सवाल: उस दौरान आर्थिक स्थिति कैसे संभाली? जवाब: मैंने यहां लगभग एक साल नौकरी की। एक ऑफिस में काम करती थी। मैं घर से ज्यादा पैसे नहीं मांगती थी, क्योंकि डर था कि पापा वापस बुला लेंगे। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री को लेकर छोटे शहरों में बहुत गलत धारणाएं होती हैं। आपके साथ भी ऐसा हुआ? जवाब: हां, बहुत हुआ। लोगों ने कहा कि मुंबई जाकर पता नहीं क्या कर रही होगी। लेकिन मैंने कभी जवाब नहीं दिया। मैंने सोचा कि एक दिन मेरा काम ही जवाब देगा। आज वही लोग टीवी पर मुझे देखकर तारीफ करते हैं। सवाल: एक्टिंग में पहला बड़ा मौका कौन सा मिला? जवाब: मैंने पहले स्टार भारत के शो ‘राधा कृष्ण’ में चित्रलेखा का रोल किया। उसका ऑडिशन दिया और भूल गई थी। रात 12:30 बजे कॉल आया कि सुबह 6 बजे शूट के लिए निकलना है। सवाल: उस शो से कितना फायदा मिला? जवाब: सीखने को बहुत मिला, लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि मैं टीवी सीरियल्स के लिए नहीं बनी हूं। मैं कुछ अलग करना चाहती थी। सवाल: कभी ऐसा लगा कि शायद यह इंडस्ट्री आपके लिए नहीं है? जवाब: हां। एक बड़े शो में मैं फाइनल हो गई थी, लेकिन शूट से एक रात पहले रिप्लेस कर दिया गया। मैं डिप्रेशन में चली गई थी। लगा कि शायद मैं टैलेंटेड नहीं हूं। लेकिन बाद में समझ आया कि शायद भगवान ने मेरे लिए कुछ बड़ा सोच रखा था। सवाल: फिर ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में काम करने का मौका कैसे मिला? जवाब: एक कास्टिंग डायरेक्टर ने मुझे कॉल किया और कहा कि एक डायरेक्टर से मिल लो। मैं उस समय इसे सीरियस नहीं ले रही थी। उन्होंने चार-पांच बार कॉल किया, तब मैं मिलने गई। वहां मेरी मुलाकात डायरेक्टर नीरज पाठक से हुई और मुझे बिन्नी का रोल मिल गया। सवाल: पहली बार इतने बड़े सेट पर पहुंचीं। कैसा अनुभव रहा? जवाब: बहुत शानदार। मुझे कभी नहीं लगा कि मैं पहली बार काम कर रही हूं। नीरज पाठक सर इतने सपोर्टिव थे कि हर चीज प्यार से समझाते थे। वह किसी भी एक्टर से बेहतरीन एक्टिंग निकलवा लेते हैं। सवाल: रणदीप हुड्डा के साथ पहला सीन कैसा था? जवाब: बहुत अच्छा। उन्होंने मुझे कभी जूनियर जैसा महसूस नहीं कराया। हमारे बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता
मां का सपना पूरा करने मुंबई पहुंचीं मुस्कान:लोगों ने कहा- गलत काम करती होगी, फिर इंस्पेक्टर अविनाश में देखकर प्राउड फील किया

एक्ट्रेस मुस्कान वर्मा ने छोटे शहर रुड़की से निकलकर मुंबई में अपनी पहचान बनाई। म्यूजिक सीखने वाली मुस्कान के भीतर एक्टिंग का सपना उनकी मां ने जगाया, जो खुद एक्ट्रेस बनना चाहती थीं। शुरुआती दिनों में उन्हें संघर्ष, रिजेक्शन और लोगों के ताने झेलने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वेब सीरीज ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में बिन्नी के किरदार ने उन्हें नई पहचान दी। दैनिक भास्कर से बातचीत में मुस्कान ने अपने स्ट्रगल, कास्टिंग काउच, परिवार के सपोर्ट, रणदीप हुड्डा के साथ काम करने का अनुभव और भावुक क्रिमेशन सीन से जुड़ी यादें साझा कीं। सवाल: आपकी जर्नी बहुत खूबसूरत रही है। रुड़की जैसे शहर से मुंबई तक पहुंचना आसान नहीं होता। सबसे पहले एक्टिंग का सपना कब देखा? जवाब: सच कहूं तो यह सपना मेरी मम्मी का था। वह खुद एक्ट्रेस बनना चाहती थीं, लेकिन उस समय लड़कियों की जल्दी शादी हो जाती थी। उनका सपना अधूरा रह गया। धीरे-धीरे वही सपना मेरे अंदर आने लगा। मम्मी मुझे बचपन से दो रिबन, काजल और लिपस्टिक लगाकर हीरोइन की तरह तैयार करती थीं। लोग कहते थे कि जिस तरह यह बच्ची को तैयार करती है, यह जरूर फिल्मों में जाएगी। सवाल: यानी कहीं न कहीं मम्मी ने आपके अंदर वह सपना डाल दिया था? जवाब: बिल्कुल। फिर मैंने म्यूजिक का छह साल का कोर्स किया। मेरी मैम कहती थीं कि तुम्हें मुंबई जाकर कोशिश करनी चाहिए। उसके बाद मम्मी-पापा ने मुझे एक-दो साल का समय दिया कि जाओ और ट्राई करो। सवाल: जब घर से सीमित समय मिला था, तब मुंबई आने के बाद पहला मौका कैसे मिला? जवाब: मैं कोविड से थोड़ा पहले मुंबई आई थी और जल्दी ही मुझे एक टीवीसी ऐड मिल गया। फिर लगा कि शायद मैं सही दिशा में जा रही हूं। कोविड के दौरान पापा ने कहा था कि अब वापस आ जाओ, क्योंकि उस समय बहुत लोग मुंबई छोड़ रहे थे। लेकिन तभी मुझे ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ मिल गई। सवाल: मुंबई में शुरुआत कैसे हुई? पहली बार कहां रुकी थीं? जवाब: शुरुआत में मैं न्यू म्हाडा में रुकी थी। रिश्तेदारों के जरिए रहने की व्यवस्था हुई। धीरे-धीरे ऑडिशन देना शुरू किया, लोगों से मिलती गई और इंडस्ट्री को समझती गई। सवाल: छोटे शहर से आने वाले लोगों के लिए मुंबई को समझना आसान नहीं होता। आपने कैसे सीखा? जवाब: ऑडिशन में जाती गई और लोगों से मिलती गई। फिर दोस्त बने। किसी ने बताया कि ऐसे ऑडिशन देना होता है और ऐसे कास्टिंग डायरेक्टर से मिलना होता है। बाद में मैं मेडिटेशन और ब्रह्माकुमारी से भी जुड़ गई। मुझे लगता है कि भगवान कृष्ण की कृपा से सब होता चला गया। सवाल: आपने म्यूजिक की पढ़ाई की। तो सपना सिंगर बनने का था या एक्ट्रेस बनने का? जवाब: शुरुआत में सपना सिंगिंग का था। मेरी आवाज की तारीफ होती थी। लेकिन धीरे-धीरे एक्टिंग की तरफ झुकाव बढ़ता गया। सच कहूं तो अब काफी समय से मैंने रियाज नहीं किया है। एक्टिंग में इतना बिजी हो गई हूं कि म्यूजिक थोड़ा पीछे छूट गया। लेकिन अगर आगे कभी मौका मिला, तो मैं अपनी किसी फिल्म या प्रोजेक्ट में जरूर गाना चाहूंगी। सवाल: आपको कब लगा कि एक्टिंग ही करनी है? जवाब: जब मम्मी दिन में सोती थीं, तब मैं साड़ी पहनकर माधुरी दीक्षित के गानों पर डांस करती थी। शायद वहीं से सब शुरू हुआ। सवाल: पेरेंट्स क्या करते हैं और परिवार में सबसे ज्यादा सपोर्ट किसका मिला? जवाब: मेरे पापा पत्रकार हैं और मम्मी टीचर हैं। सबसे ज्यादा सपोर्ट मम्मी का मिला। पापा थोड़े स्ट्रिक्ट थे। म्यूजिक क्लास मम्मी ने उनसे छुपाकर कराई। उन्हें डर था कि मेरे सपने कहीं खत्म न हो जाएं। सवाल: मुंबई में संघर्ष कितना मुश्किल रहा? जवाब: बहुत मुश्किल था। यहां अच्छे और गलत दोनों तरह के लोग मिले। कॉम्प्रोमाइज जैसी बातें सुननी पड़ीं। लेकिन मैंने ऐसे कई प्रोजेक्ट छोड़ दिए। मुझे लगा कि गलत रास्ते से सफलता नहीं चाहिए। सवाल: उस दौरान आर्थिक स्थिति कैसे संभाली? जवाब: मैंने यहां लगभग एक साल नौकरी की। एक ऑफिस में काम करती थी। मैं घर से ज्यादा पैसे नहीं मांगती थी, क्योंकि डर था कि पापा वापस बुला लेंगे। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री को लेकर छोटे शहरों में बहुत गलत धारणाएं होती हैं। आपके साथ भी ऐसा हुआ? जवाब: हां, बहुत हुआ। लोगों ने कहा कि मुंबई जाकर पता नहीं क्या कर रही होगी। लेकिन मैंने कभी जवाब नहीं दिया। मैंने सोचा कि एक दिन मेरा काम ही जवाब देगा। आज वही लोग टीवी पर मुझे देखकर तारीफ करते हैं। सवाल: एक्टिंग में पहला बड़ा मौका कौन सा मिला? जवाब: मैंने पहले स्टार भारत के शो ‘राधा कृष्ण’ में चित्रलेखा का रोल किया। उसका ऑडिशन दिया और भूल गई थी। रात 12:30 बजे कॉल आया कि सुबह 6 बजे शूट के लिए निकलना है। सवाल: उस शो से कितना फायदा मिला? जवाब: सीखने को बहुत मिला, लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि मैं टीवी सीरियल्स के लिए नहीं बनी हूं। मैं कुछ अलग करना चाहती थी। सवाल: कभी ऐसा लगा कि शायद यह इंडस्ट्री आपके लिए नहीं है? जवाब: हां। एक बड़े शो में मैं फाइनल हो गई थी, लेकिन शूट से एक रात पहले रिप्लेस कर दिया गया। मैं डिप्रेशन में चली गई थी। लगा कि शायद मैं टैलेंटेड नहीं हूं। लेकिन बाद में समझ आया कि शायद भगवान ने मेरे लिए कुछ बड़ा सोच रखा था। सवाल: फिर ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ में काम करने का मौका कैसे मिला? जवाब: एक कास्टिंग डायरेक्टर ने मुझे कॉल किया और कहा कि एक डायरेक्टर से मिल लो। मैं उस समय इसे सीरियस नहीं ले रही थी। उन्होंने चार-पांच बार कॉल किया, तब मैं मिलने गई। वहां मेरी मुलाकात डायरेक्टर नीरज पाठक से हुई और मुझे बिन्नी का रोल मिल गया। सवाल: पहली बार इतने बड़े सेट पर पहुंचीं। कैसा अनुभव रहा? जवाब: बहुत शानदार। मुझे कभी नहीं लगा कि मैं पहली बार काम कर रही हूं। नीरज पाठक सर इतने सपोर्टिव थे कि हर चीज प्यार से समझाते थे। वह किसी भी एक्टर से बेहतरीन एक्टिंग निकलवा लेते हैं। सवाल: रणदीप हुड्डा के साथ पहला सीन कैसा था? जवाब: बहुत अच्छा। उन्होंने मुझे कभी जूनियर जैसा महसूस नहीं कराया। हमारे बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन: कैसे कांग्रेस ने सिद्धारमैया को शिवकुमार के लिए रास्ता बनाने के लिए मनाया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 01:12 IST कथित तौर पर कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को 2029 के चुनावों से पहले एक बड़ी राष्ट्रीय भूमिका का आश्वासन दिया, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के लिए एक प्रमुख ओबीसी चेहरे के रूप में स्थान मिला। कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लगभग तीन साल बाद प्रत्याशित परिवर्तन आया है, जिससे पार्टी के दो सबसे बड़े राज्य नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहा सत्ता संघर्ष समाप्त हो गया है, जिसे आलाकमान ने 2023 की विधानसभा जीत के बाद से सावधानीपूर्वक प्रबंधित किया था। (फ़ाइल तस्वीर/पीटीआई) महीनों की अटकलों और वर्षों के आंतरिक संतुलन के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अंततः कर्नाटक में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन को अंजाम देने के लिए तैयार दिख रही है। सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के गुरुवार को पद छोड़ने की संभावना है, जिससे उनके डिप्टी डीके शिवकुमार के लिए राज्य का शीर्ष पद संभालने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लगभग तीन साल बाद प्रत्याशित परिवर्तन आया है, जिससे पार्टी के दो सबसे बड़े राज्य नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहा सत्ता संघर्ष समाप्त हो गया है, जिसे आलाकमान ने 2023 की विधानसभा जीत के बाद से सावधानीपूर्वक प्रबंधित किया था। चुनाव के बाद जहां सिद्धारमैया सर्वसम्मत मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में उभरे, वहीं कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख के रूप में शिवकुमार को संगठन के पुनर्निर्माण और पार्टी की वापसी की इंजीनियरिंग के लिए व्यापक रूप से श्रेय दिया गया। मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, सिद्धारमैया और शिवकुमार की मौजूदगी में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन आगे बढ़ता दिख रहा है। सिद्धारमैया के करीबी सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को गुरुवार को अपने आवास पर नाश्ते के लिए बुलाया है, जिससे अटकलें तेज हो गई हैं कि परिवर्तन प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रही है। सुरजेवाला के भी दिन में बेंगलुरु पहुंचने की उम्मीद है। यह भी पढ़ें | कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद सिद्धारमैया की जगह शिवकुमार बनेंगे कर्नाटक के मुख्यमंत्री | शीर्ष बिंदु कांग्रेस ने सिद्धारमैया को कैसे मनाया? सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किया कि सिद्धारमैया का बाहर निकलना राजनीतिक रूप से सम्मानजनक और पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो। कथित तौर पर नेतृत्व ने सिद्धारमैया को 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले एक बड़ी राष्ट्रीय भूमिका का आश्वासन दिया, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के लिए एक प्रमुख ओबीसी चेहरे के रूप में स्थान मिला। सूत्रों ने बताया सीएनएन-न्यूज18 कांग्रेस के भीतर व्यापक राजनीतिक पुनर्गठन के हिस्से के रूप में सिद्धारमैया को बाद में राज्यसभा में भेजा जा सकता है। पार्टी नेताओं ने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि वह कर्नाटक की राजनीति को आकार देने में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहेंगे, जिसमें राज्य में प्रमुख मंत्रियों के चयन और भविष्य की राजनीतिक नियुक्तियों में उनकी भूमिका शामिल है। माना जाता है कि कांग्रेस ने 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले एकता की आवश्यकता पर जोर दिया है, राहुल गांधी ने कथित तौर पर यह सुनिश्चित करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई है कि संक्रमण प्रक्रिया के दौरान सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों एकजुट रहें। राज्यसभा की गणना भी फोकस में मुख्यमंत्री परिवर्तन की अटकलें तेज होने के बावजूद, कांग्रेस ने अभी तक कर्नाटक से 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। खाली होने वाली चार राज्यसभा सीटों में से कांग्रेस को तीन पर आसानी से जीत मिलने की उम्मीद है, जबकि भारतीय जनता पार्टी को एक सीट हासिल होने की संभावना है। खड़गे का राज्यसभा का कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है और उनके कर्नाटक से दोबारा चुने जाने की उम्मीद है. पार्टी अपनी व्यापक जाति और राजनीतिक संतुलन रणनीति के तहत एक सीट के लिए शिवकुमार के भाई डीके सुरेश को एक महिला उम्मीदवार या एक ओबीसी उम्मीदवार के साथ मैदान में उतारने पर भी विचार कर रही है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया कर्नाटक सत्ता परिवर्तन: कैसे कांग्रेस ने सिद्धारमैया को शिवकुमार के लिए रास्ता बनाने के लिए मनाया? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन(टी)सिद्धारमैया का इस्तीफा(टी)डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री(टी)कांग्रेस आलाकमान(टी)कर्नाटक की राजनीति(टी)राज्यसभा चुनाव कर्नाटक(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे कार्यकाल(टी)राहुल गांधी की भूमिका
सैम ऑल्टमैन बोले- AI से नौकरी जाने का खतरा नहीं:रोजगार में इंसानी हिस्सा बदलना नामुमकिन; शुरुआती डर गलत साबित हुआ

ओपन-AI के CEO सैम ऑल्टमैन ने मंगलवार को सिडनी में कहा कि AI की तेज ग्रोथ और इस्तेमाल से दुनिया में जॉब्स एपोकैलिप्स यानी नौकरियों का संकट नहीं आएगा। उन्होंने माना कि तकनीक ने उतने व्हाइट कॉलर जॉब्स खत्म नहीं किए हैं, जितने का उन्हें पहले डर था। ऑल्टमैन ने कहा- मैं गलत साबित होने पर खुश हूं कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (CBA) की एक कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली शामिल हुए सैम ऑल्टमैन ने कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। CBA के चीफ एग्जीक्यूटिव मैट कॉम्यन को दिए इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने कहा कि शुरुआत में वह ग्लोबल एम्प्लॉयमेंट लेवल पर AI के प्रभाव को लेकर चिंतित थे। उन्होंने कहा कि जब 2022 में चैटजीपीटी लॉन्च हुआ था, तब ओपन-AI ने जो तकनीकी भविष्यवाणियां की थीं, वे लगभग सही साबित हुईं। लेकिन, इसके सोशल और इकोनॉमिक प्रभावों को लेकर वे काफी गलत थे। ऑल्टमैन ने कहा कि वे इस बात पर गलत साबित होने के लिए बहुत खुश हैं। एंट्री-लेवल व्हाइट कॉलर जॉब्स पर नहीं पड़ा असर ऑल्टमैन ने कहा कि उन्हें लगता था कि अब तक एंट्री-लेवल की व्हाइट कॉलर नौकरियां खत्म हो चुकी होंगी, लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ। अब वे बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं कि ऐसा क्यों नहीं हुआ। वे इसके लिए आभारी हैं, क्योंकि पुरानी आशंकाएं अब गलत साबित हो चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा कि लोग उनसे कह रहे हैं कि आप दुनिया को इस डर और चिंता से बचा सकते थे। लेकिन उस समय मुझे यह एक वास्तविक जोखिम लगा, जिसके बारे में बात करना जरूरी था। उन्होंने यह भी कहा कि आगे चलकर यह जोखिम अभी भी सामने आ सकता है। कंपनियों में AI से बदलाव जारी, ओपन-AI ला सकती है IPO हालांकि ऑल्टमैन ने नौकरियों से जुड़े कोई सटीक आंकड़े नहीं दिए, लेकिन वे पहले भी AI के बढ़ने से इंडस्ट्री में छंटनी की संभावना जता चुके हैं। दुनिया की कई बड़ी कंपनियां जैसे HSBC, अमेजन, स्टैंडर्ड चार्टर्ड और CBA पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि उनके यहां कुछ नौकरियों को AI से बदला जा रहा है। इसी बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओपन-AI आने वाले हफ्तों में अमेरिका में IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) लॉन्च करने के लिए तैयारी कर रही है। अक्टूबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 1 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यूएशन का टारगेट रख सकती है और कम से कम 60 बिलियन डॉलर जुटा सकती है। रोजगार में इंसानी हिस्सा बदलना नामुमकिन ऑल्टमैन ने बताया कि उन्हें इस बात का अहसास हो चुका है कि भले ही AI कई इंडस्ट्री और नौकरियों में एक्टिव भूमिका निभा रहा है, लेकिन रोजगार का एक इंसानी हिस्सा ऐसा है जिसे कभी बदला नहीं जा सकता। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्लैक और ईमेल मैसेज का जवाब देने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन बाद में वे खुद जवाब देने लगे। खुद के उदाहरण से समझी इंसानी बातचीत की अहमियत ऑल्टमैन ने बताया कि जब उन्होंने AI से मैसेज का जवाब दिलवाना शुरू किया, तो वह ‘यह सैम का AI है’ लिखकर जवाब देता था। यह उनके लिए एक बड़ा उदाहरण था कि हम सच में लोगों की परवाह करते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के साथ बातचीत करना उनके समय का एक बड़ा हिस्सा है। वे आने वाले समय में इसे AI को सौंपने के बारे में सोच भी नहीं सकते। इस अहसास ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि नौकरियों में आवश्यक मानवीय बातचीत को AI कभी रिप्लेस नहीं कर पाएगा। सैम ने कहा कि सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरीकों से यह साफ है कि नौकरियों की तस्वीर हमारी सोच से काफी अलग होने वाली है। उन्हें नहीं लगता कि नौकरियों का कोई ऐसा महासंकट आएगा, जैसा कि इस सेक्टर की कुछ कंपनियां दावा करती हैं। क्या है जॉब्स एपोकैलिप्स? यह वह स्थिति होती है, जिसके तहत यह आशंका जताई जा रही थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के आने से पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर इंसानी नौकरियां खत्म हो जाएंगी और एक गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। हालांकि, अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI नौकरियां पूरी तरह खत्म करने के बजाय काम करने के तरीकों को बदल रहा है। ये खबर भी पढ़ें… CNG ₹2 तक महंगी, दिल्ली में कीमत ₹83.09 किलो: इस महीने चौथी बार दाम बढ़े, अब तक ₹6 इजाफा ईरान जंग के बीच कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी CNG के दाम पिछले दो हफ्तों के भीतर चौथी बार बढ़ गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने आज मंगलवार 26 मई को CNG ₹2 प्रति किलोग्राम महंगी कर दी है। दिल्ली-NCR सहित कई शहरों में ये दाम बढ़ाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तराखंड में 'पे एंड प्ले' से खुलेंगे गेम्स स्टेडियम:100 रुपए में स्विमिंग, 250 में शूटिंग; इंटरनेशनल-नेशनल खिलाड़ियों के लिए फ्री

उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेल-2025 के लिए तैयार किए गए विश्वस्तरीय स्टेडियम और खेल मैदान अब आम खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए भी उपलब्ध होंगे। राज्य सरकार ने इन सुविधाओं को ‘पे एंड प्ले’ व्यवस्था के तहत संचालित करने का फैसला किया है । विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा ने इसके लिए विस्तृत शासनादेश और फीस स्ट्रक्चर जारी कर दिया है । नई व्यवस्था के तहत देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, रजत जयंती खेल परिसर, परेड ग्राउंड के साथ-साथ हल्द्वानी, रुद्रपुर और हरिद्वार के स्टेडियमों का उपयोग निर्धारित शुल्क देकर किया जा सकेगा । इस व्यवस्था से जहां एक तरफ खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेंगी, वहीं खेल विभाग को भी नियमित राजस्व प्राप्त होगा, जिसे ‘खेल विकास निधि’ में जमा किया जाएगा । प्रतिभा निखारने का केंद्र बनेंगे स्टेडियम खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों के दौरान विश्वस्तरीय खेल अवस्थापना तैयार की थी। सरकार का उद्देश्य इन सुविधाओं को केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इन्हें खिलाड़ियों के नियमित प्रशिक्षण और प्रतिभा निखारने का केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। किस खेल के लिए कितनी देनी होगी फीस? शासनादेश में खेलों के लिए प्रति घंटा किराया और मासिक सदस्यता शुल्क तय किया गया है । बुकिंग ‘यूनिफाइड स्पोर्ट्स पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन की जा सकेगी। जिसमें शूटिंग के लिए 250 रुपए प्रति घंटा और 5,000 रुपए मासिक है। स्विमिंग के लिए 100 रुपए प्रति घंटा और 2,000 रुपए मासिक है। बैडमिंटन के प्रति कोर्ट के लिए 150 रुपए प्रति घंटा और 2,500 रुपए मासिक है। टेबल टेनिस की प्रति टेबल के लिए 100 रुपए प्रति घंटा और 2,000 रुपए मासिक है। लॉन टेनिस/पिकलबॉल के लिए 250 रुपए प्रति घंटा और 3,000 रुपए मासिक है। स्क्वैश के प्रति कोर्ट के लिए 300 रुपए प्रति घंटा और 6,000 रुपए मासिक है। आइस स्पोर्ट्स में स्केट्स के साथ 500 रुपए प्रति घंटा और 10,000 रुपए मासिक है। जिम्नास्टिक कोच के साथ 2,000 रुपए मासिक है। क्रिकेट ग्राउंड का किराया 3,000 रुपए प्रति घंटा है लेकिन इसमें मासिक सुविधा नहीं है। फुटबॉल और हॉकी फील्ड का किराया क्रमशः 3,000 रुपए और 2,000 रुपए प्रति घंटा है। खिलाड़ियों को इन सुविधाओं के साथ चेंजिंग रूम, वॉशरूम और आधुनिक उपकरणों का लाभ भी मिलेगा। रजत जयंती खेल क्लब की मेंबरशिप भी शुरू देहरादून के विश्वस्तरीय राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम कैंपस में स्थित ‘रजत जयंती खेल क्लब’ के लिए सरकार ने प्रीमियम मेंबरशिप मॉडल भी पेश किया है। इसमें चार टियर रखे गए हैं। सिल्वर मेंबरशिप के लिए 1,50,000 रुपए सालाना है, जिसमें जिम, एथलेटिक्स ट्रैक, बिलियर्ड्स के अलावा किन्हीं 2 खेलों का एक्सेस है। गोल्ड मेंबरशिप 2,00,000 रुपए सालाना है, जिसमें किन्हीं 4 खेलों का एक्सेस है। प्लैटिनम मेंबरशिप 2,50,000 रुपए सालाना है, जिसमें सभी खेल सुविधाओं और सौना का एक्सेस है। एलीट फैमिली मेंबरशिप का चार्ज 7,00,000 रुपए सालाना जिसमें 4 सदस्यों के लिए सभी सुविधाएं और 100 गेस्ट पास हैं। इन खिलाड़ियों को मिलेगी बिल्कुल फ्री एंट्री सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीटों और उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने वाले राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सत्यापन के बाद इन खेल सुविधाओं में निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। इसके अलावा भविष्य में ग्रामीण और युवा प्रतिभाओं को पहचानने के लिए ‘स्काउटिंग प्रोग्राम’ भी चलाए जाएंगे । स्कूल और कॉर्पोरेट आयोजनों पर मिलेगी छूट अगर कोई स्कूल या शिक्षण संस्थान खेल प्रतियोगिताओं के लिए स्टेडियम बुक करता है, तो उसे 30% की छूट मिलेगी। वहीं, सरकारी विभागों को 40%, स्पोर्ट्स फेडरेशन को 50% और कॉर्पोरेट इवेंट्स के लिए 20% तक का डिस्काउंट दिया जाएगा। प्राइवेट इंडिविजुअल बुकिंग पर कोई छूट नहीं मिलेगी
पश्चिम बंगाल में 15 को गिरफ़्तार करने के लिए गिरफ़्तार अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया, तूफान के कारण सड़क जाम कर दी गई

राष्ट्रीय बाहुबली अभिकरण ने पिछले महीने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के विधानसभा चुनाव में विशेष सघन पुनरीक्षण में शामिल नक्सली अधिकारियों पर अवैध रूप से बंधक बनाने और सड़क जाम करने के मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह जानकारी मंगलवार को अधिकारियों ने दी। दस्तावेज़ बता दें कि नेशनल बास्केटबॉल अभिकरण ने सोमवार को मालदा में व्यापक पैमाने पर हाइड्रोलिक अभियान चलाया: सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्तर पर कार्रवाई की। इसके बाद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग के निर्देशानुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सोमवार को मालदा जिले में व्यापक पाइपलाइन अभियान की रूपरेखा तैयार की। जांच के बाद एजेंसी ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि दो अलग-अलग मामलों में सड़क जाम करने और अवैध रूप से बंधक बनाने के आरोप में कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बांड के अनुसार, एक मामले में मुख्य शेयरधारकों जोशम मस्जिद और अस्माउल मस्जिद सहित 12 लोगों को हैबटोला-अमलीटोला रोड पर बंधक बनाए रखने के आरोप में लगभग आठ घंटे तक एक महिला विधायी अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि मोथाबाड़ी ब्लॉक में बागमारा पुल को जाम करने के संबंध में तीन अन्य लोगों- आलम गीर शेखर, नूरुल इस्लाम और हबीबुर रहमान को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह भी कहा जा रहा है कि एक अप्रैल को कार्टूनिस्टों से नाम हटाने के विरोध में एक बड़े पैमाने पर भीड़ ने उत्पात मचाया और सड़कों पर जाम लगा दिया, साम्यवाद में स्मारकों और सहयोगियों पर हमला किया गया। खबर यह भी है कि नोबेल कार्यालय में 7 सरकारी अधिकारियों को बंधक बनाया गया था। एक अन्य अधिकारी का वाहन बंद कर दिया गया था। तीन के बाद आतंकवादियों के लिए सुरक्षा बल आधी रात को मौक़े पर निरीक्षण। इस घटना के बाद विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में राजनीतिक विवाद तेज हो गया। ऐतिहासिक अन्य ऐतिहासिक और बड़ी साजिश की जांच कर रही है। ये भी पढ़ें: नई दिल्ली की बैठक से बीजिंग को लगी मिर्ची, चीन के विदेश मंत्रालय का आया ये लिंक (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)विधानसभा चुनाव(टी)मालदा जिला(टी)पश्चिम बंगाल(टी)विधानसभा चुनाव(टी)मालदा जिला
फिल्म 'चांद मेरा दिल' में भरतनाट्यम पर विवाद:अनन्या पांडे पर भड़कीं कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद; बोलीं- हमारे पसंदीदा डांस फॉर्म को मार दिया

बॉलीवुड एक्ट्रेस अनन्या पांडे की नई फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ के एक डांस सीन को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। फिल्म में उनके भरतनाट्यम और कन्टेंपररी मिक्स (फ्यूजन) डांस सीक्वेंस की आलोचना हो रही है। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद और क्लासिकल डांसर अनीता रत्नम सहित कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर नाराजगी जताई है। शमा मोहम्मद ने कहा कि अनन्या ने उनके पसंदीदा डांस फॉर्म को खराब कर दिया है। वहीं, फिल्म की असिस्टेंट कोरियोग्राफर ने अनन्या का बचाव करते हुए उनके काम की तारीफ की है। फिल्म रिलीज के बाद वायरल हुआ वीडियो विवेक सोनी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ 22 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस कॉलेज रोमांस ड्रामा फिल्म में अनन्या पांडे के अपोजिट एक्टर लक्ष्य मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म रिलीज होने के बाद से ही इसके एक डांस सीन की क्लिप एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर वायरल हो रही है। इस सीन में अनन्या का किरदार भरतनाट्यम और आधुनिक डांस स्टेप्स का एक फ्यूजन परफॉर्म करता है। इसी परफॉर्मेंस को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स अनन्या पांडे को ट्रोल कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने जताई आपत्ति इस डांस सीन पर राजनीति और कला जगत से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अनन्या पांडे ने मेरे पसंदीदा डांस फॉर्म भरतनाट्यम को खत्म कर दिया है। बचपन से भरतनाट्यम सीख चुकीं शमा ने आगे लिखा कि इस शास्त्रीय नृत्य को सीखने में लंबा समय लगता है, इसे किसी के लिए तुरंत तैयार नहीं किया जा सकता। कृपया भरतनाट्यम जैसी खूबसूरत कला का अपमान न करें। इसके साथ ही मशहूर क्लासिकल डांसर अनीता रत्नम ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस परफॉर्मेंस को देखकर ऐसा लगता है जैसे भरतनाट्यम को बंधक बना लिया गया हो। यूजर्स ने पुरानी फिल्मों से की तुलना सोशल मीडिया पर कई ट्रेंड डांसर और यूजर्स अनन्या के डांस मूव्स, चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज की आलोचना कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि भरतनाट्यम की शुरुआत ईसा पूर्व 200 में हुई थी और साल 2026 में अनन्या पांडे के साथ यह खत्म हो गया। विवाद बढ़ने के बाद कई लोग साई पल्लवी की फिल्म ‘श्याम सिंघा रॉय’ और श्रीदेवी की फिल्म ‘जाग उठा इंसान’ के क्लासिकल डांस वीडियो शेयर कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि बॉलीवुड अक्सर दक्षिण भारतीय कला और संस्कृति को सही तरीके से दिखाने में नाकाम रहता है। कोरियोग्राफर ने किया अनन्या पांडे का बचाव इस मामले में फिल्म की टीम की तरफ से अभी तक अनन्या पांडे या डायरेक्टर विवेक सोनी का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, फिल्म की असिस्टेंट कोरियोग्राफर अनन्या कुरुप ने एक्ट्रेस के बचाव में सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर की है। उन्होंने फिल्म के बिहाइंड द सीन (बीटीएस) वीडियो और क्रेडिट रोल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा कि अनन्या पांडे के साथ काम करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। उन्होंने भरतनाट्यम सीखने के लिए कड़ी मेहनत की है और फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ में बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। कई फैंस भी यह कहकर अनन्या का सपोर्ट कर रहे हैं कि यह कोई पारंपरिक डांस नहीं बल्कि सिर्फ एक फ्यूजन रूटीन था।
कर्नाटक में फिलहाल कोई मुख्यमंत्री नहीं बदला जाएगा: कांग्रेस का कहना है कि चर्चा केवल राज्यसभा चुनावों पर केंद्रित है भारत समाचार

आखरी अपडेट:26 मई, 2026, 17:49 IST न्यूज18 कर्नाटक में फिलहाल कोई मुख्यमंत्री नहीं बदला जाएगा: कांग्रेस का कहना है कि चर्चा केवल राज्यसभा चुनाव पर केंद्रित है चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया कर्नाटक में फिलहाल कोई मुख्यमंत्री नहीं बदला जाएगा: कांग्रेस का कहना है कि चर्चा केवल राज्यसभा चुनाव पर केंद्रित है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
कनाडा में वसूली रैकेट बेनकाब, 17 पंजाबी अरेस्ट:फायरिंग-फिरोती की 24 वारदात में हाथ, पंजाब से जुड़े तार; होंगे डिपोर्ट

कनाडा में भारतीय मूल के युवाओं द्वारा चलाए जा रहे एक बेहद हिंसक और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय वसूली रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पील रीजनल पुलिस ने ओंटारियो पुलिस, कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी और अमेरिकी खुफिया एजेंसी के साथ मिलकर एक बड़े संयुक्त ऑपरेशन में ‘फॉर ब्रदर्स’ नाम के गैंग के 17 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी भारतीय नागरिक हैं। गिरोह ने कनाडा और अमेरिका के कई शहरों में कारोबारियों को निशाना बनाकर जबरन वसूली, आगजनी और अंधाधुंध गोलीबारी जैसी 24 से अधिक वारदातों को अंजाम दिया था। आरोपियों पर कुल 106 गंभीर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। चूंकि ये सभी गैर-कनाडाई नागरिक हैं, इसलिए अब इन्हें तुरंत भारत डिपोर्ट (देश से बाहर) किए जाने का सामना करना पड़ रहा है। रिहायशी इलाकों में आतंक और 324 गोलियां चलाईं इस गिरोह का आतंक इस कदर था कि इन्होंने कनाडा के ब्राम्पटन, मिसिसॉगा, ब्रिटिश कोलंबिया और अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थानीय व्यापारियों, रेस्टोरेंट मालिकों और ट्रक कंपनियों को बेरहमी से निशाना बनाया। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह रैकेट कम से कम 24 अलग-अलग हिंसक घटनाओं में सीधे तौर पर शामिल था। दहशत फैलाने के लिए इस गैंग ने रिहायशी इलाकों में चलती गाड़ियों से ताबड़तोड़ फायरिंग की और आगजनी की वारदातों को अंजाम दिया। इन घटनाओं में कुल मिलाकर चौंकाने वाली 324 गोलियां चलाई गईं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी खौफ था। भारत से जुड़े हैं तार, एक आरोपी वहां भी वांटेड पुलिस जांच के अनुसार यह 17 आरोपी अलग-अलग वीजा स्टेटस (जैसे स्टूडेंट या वर्क परमिट) पर कनाडा और अमेरिका में रह रहे थे। पुलिस ने खुलासा किया है कि इस गैंग के तार सीधे भारत में बैठे सरगनाओं से जुड़े हुए हैं। आरोपियों में से एक अपराधी ऐसा भी है, जो भारत में पहले से ही हत्या के प्रयास के एक मामले में वांछित चल रहा है। कहां-कहां से हुई गिरफ्तारियां? इस गिरोह के सदस्य कनाडा और अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में फैलकर नेटवर्क चला रहे थे। सबसे ज्यादा 14 आरोपियों को ओंटारियो से गिरफ्तार किया गया है। वहीं, ब्रिटिश कोलंबिया से दो और कैलिफोर्निया से FBI की मदद से एक आरोपी को दबोचा गया है। ये लोग मुख्य रूप से कनाडा में रहने वाले साउथ एशियन (विशेषकर पंजाबी) मूल के संपन्न कारोबारियों को अपना शिकार बनाते थे ताकि वे बदनामी और डर के मारे पुलिस के पास न जाएं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच है, गिरफ्तार आरोपियों की सूची इकबाल सिंह भगड़िया (25 वर्ष) रविंदर सिंह (25 वर्ष) दिलवरप्रीत सिंह (26 वर्ष) प्रभदीप सोहल (22 वर्ष) अजयदीप सिंह (29 वर्ष) राजन सिंह (28 वर्ष) आकाशदीप सिंह (24 वर्ष) जशनबीर सिंह (21 वर्ष) प्रतापबीर घुमन (22 वर्ष) नवरूप सिंह (24 वर्ष) मोहिंदर सिंह (30 वर्ष) मनदीप सिंह (21 वर्ष) अमृतजोत सिंह (22 वर्ष) जशनप्रीत सिंह (22 वर्ष) सख्त कार्रवाई की तैयारी में कनाडा सरकार इस बड़ी कामयाबी के बाद कनाडाई कानून प्रवर्तन एजेंसियां इन आरोपियों पर सख्त रुख अपना रही हैं। पुलिस और सीबीएसए मिलकर इन सभी के वीजा स्टेटस को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। अदालती कार्रवाई पूरी होते ही सभी को डिपोर्ट कर भारत वापस भेज दिया जाएगा।
एक दिन में शूट हुआ अक्षय के साथ सॉन्ग:भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह से फिल्म के इंट्रो सॉन्ग को लेकर खास बातचीत

हिंदी और साउथ के मेनस्ट्रीम मेकर्स भोजपुरी एक्टर्स और सिंगर्स के साथ लगातार कोलैब कर रहें हैं। अब ‘वेलकम टू द जंगल’ के लिए भी अक्षय ने अक्षरा सिंह के साथ एक गाना किया है। अक्षरा फिल्म के एक खास इंट्रो सॉन्ग में अक्षय के साथ थिरकती दिखेंगी। उनसे हुई खास बातचीत… ‘वेलकम टू द जंगल’ का यह ऑफर आपके पास कैसे आया? इस फिल्म का ऑफर सीधे मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्य की तरफ से आया। मास्टर जी से मेरी बातचीत हमेशा होती रही है, लेकिन काफी समय पहले हम लोगों ने एक शो के दौरान साथ में काम किया था। उस वक्त उन्होंने स्टेज पर मेरा लाइव परफॉर्मेंस देखा था। मास्टर जी के जेहन में मेरा वो परफॉर्मेंस और मेरा हुनर हमेशा रहा। एक दिन अचानक उनका कॉल आया और उन्होंने कहा…‘अक्षरा, एक बहुत बड़ा गाना है अक्षय कुमार के साथ और वे लोग इसे तुम्हारे साथ करने के लिए उत्सुक हैं। आपका पहला रिएक्शन क्या था? मेरा पहला रिएक्शन तो यही था- ‘अरे बाप रे!’ मेरे मन में तुरंत यह ख्याल आया कि बॉलीवुड की इतनी बड़ी फिल्म के मेकर्स और खुद अक्षय सर ने ऐसा कैसे सोचा? पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री में से उन्होंने सिर्फ और सिर्फ मुझे ही क्यों चुना? मैंने अपनी यह दुविधा तुरंत मास्टर जी के सामने रख दी। इस पर उन्होंने जो मुझसे कहा, उसने मेरा हौसला सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। उन्होंने कहा…’अक्षरा, तुम्हें खुद अंदाजा नहीं है कि तुम क्या हो!’ बस फिर क्या था मैं तुरंत इस गाने के लिए तैयार हो गई। आपके इस गाने के फ्लेवर क्या है? यह कोई हिप-हॉप सॉन्ग नहीं है। यह फिल्म का इंट्रो सॉन्ग है, जो कहानी और किरदारों को दर्शकों से रूबरू कराएगा। यह पूरी तरह से एक कमर्शियल, कलरफुल और धमाकेदार सेटअप पर फिल्माया गया है। इसमें आपको बॉलीवुड का वो आइकॉनिक और एवरग्रीन ‘सरकाई लो खटिया जाड़ा लगे’ वाला असली देसी फ्लेवर देखने को मिलेगा। बैकग्राउंड से लेकर डांस मूव्स तक, सब कुछ बेहद पेप्पी है। शूटिंग के दौरान ब्रेक्स में अक्षय कुमार के साथ आपकी क्या बातचीत हुईं? अक्षय कुमार सर के साथ काम करने का अनुभव मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती। सेट पर जाने से पहले मेरे मन में थोड़ा डर था कि इतने बड़े सुपरस्टार हैं, पता नहीं कैसे बिहेव करेंगे? लेकिन जब उनसे मिली तो महसूस हुआ कि वे बेहद डाउन-टू-अर्थ इंसान हैं। उन्होंने मुझसे बहुत गर्मजोशी से मुलाकात की और कहा…‘अक्षरा, तुम कितनी सुंदर हो, कब से इंडस्ट्री में काम कर रही हो?’ यह सुनकर मैं बेहद खुश हुई। सिर्फ अक्षय सर ही नहीं, बल्कि सेट पर मौजूद हर किसी ने मेरे काम की तारीफ की। अक्षय सर ने कई बार मुझसे पूछा कि तुम्हें यह गाना कैसा लग रहा है? उन्होंने कहा कि मैं बहुत अच्छा काम करती हूं और इतने सालों से भोजपुरी सिनेमा को संभाल रही हूं, यह काबिले तारीफ है। उनके जैसे बड़े स्टार से इतनी इज्जत और प्यार मिलना मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं है। इस गाने की शूटिंग में कितने दिनों का समय लगा? शॉकिंग है कि पूरे गाने की शूटिंग को सिर्फ और सिर्फ एक ही दिन में पूरा कर लिया गया। जी हां, पूरा काम एक दिन के शेड्यूल में ही सिमट गया था। हम लोग सुबह-सुबह ही सेट पर पहुंच गए थे। गणेश आचार्य जी की सबसे बड़ी खूबी यही है कि उनकी टेकिंग और काम करने की रफ्तार बहुत तेज और अलग है। सुबह की शिफ्ट से शुरू करके रात के करीब 9:10 बजे तक हम लोगों ने पूरा गाना शूट कर लिया था। सेट पर गाने की शूटिंग के समय कोई दिलचस्प किस्सा हुआ? इस गाने की पहले शुरुआती लाइन्स थी- ‘हमार लागल बा दिलवा प्लेबॉय से…’। पहले इस लाइन के आगे ही राइमिंग बिठाने के लिए एक मशहूर साबुन ब्रांड का नाम इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन शूटिंग के आखिरी पलों में मेकर्स और मास्टर जी को लगा कि किसी ब्रांड का नाम सीधे इस्तेमाल करना शायद ठीक नहीं होगा, इसलिए लास्ट मिनट पर उसे चेंज कर दिया। हालांकि गाना सुनने में अब भी उतना ही मजेदार है। भोजपुरी और बॉलीवुड के काम करने के तरीके में क्या अंतर महसूस किया? एक एक्टर के तौर पर हम हर दिन, हर सेट पर कुछ न कुछ नया सीखते हैं। बॉलीवुड के इस सेट पर जो तकनीकी बारीकियां मैंने देखीं, वे मेरे लिए बेहद नया अनुभव थीं। भोजपुरी में हम पहले पूरा गाना या सीन शूट कर लेते हैं, फिर वह फुटेज एडिटिंग टेबल पर जाती है और लगभग 15-20 दिनों के बाद हमें अपना काम देखने को मिलता है। ‘वेलकम टू द जंगल’ के सेट पर तकनीक का एक अलग ही लेवल था। वहां ऑन-द-स्पॉट ‘शॉट चेक’ और एडिटिंग की सुविधा थी। मास्टर जी गाना शूट कर रहे थे और मॉनिटर पर शॉट तुरंत एडिट हो रहा था।





