लौकी की टिक्की रेसिपी: स्वाद और सेहत का असर है लौकी की टिक्की, हरी चटनी के साथ करें चमत्कार; नोट करें कम तेल में बनने वाली विधि

सामग्री: 1 लोकी, 2 चम्मच आलू, 1/2 कप बेसन, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा मोटा अदरक, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला, 1/2 छोटा चम्मच जीरा, थोड़ा सा हरा धनिया, नमक स्वाद मसाला, तेल छवि: सोशल मीडिया सबसे पहले कद्दू की हुई लौकी को चित्र सा चित्र लें ताकि उसका अतिरिक्त पानी निकल जाए। अब एक बड़ा बाउल लोकी, मैश किए हुए आलू और बेसन में रखा गया है। छवि: एआई इसके बाद इसमें हरी मिर्च, अदरक, जीरा, लाल मिर्च पाउडर, गर्म मसाला, नमक और हरा धनिया के मिश्रण अच्छी तरह मिला लें। छवि: एआई अब इस मिश्रण से छोटी-छोटी टिक्कियां तैयार करें। गैस पर तवा गर्म करें और प्रभाव सा तेल का कपड़ा। तैयार टिक्कियों को तवे पर रखें और दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेक लें। छवि: एआई गरमा-गरम लोकी की टिक्की को हरा धनिया-पुदीना या दही के साथ परोसें। फ़्लोरिडा तो ऊपर से थोड़ा सा चाट मसाला भी छिड़क सकते हैं। यह टिक्की बच्चों की टिफिन, शाम की चाय के लिए भी बिल्कुल सटीक प्रभाव डालती है। छवि: एआई लोकी में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, जिससे शरीर पाया जाता है। वहीं बेसन और आलू के साथ बनने वाली यह टिक्की स्वादिष्ट होने के साथ पेट को लंबे समय तक बनाए रखने में भी मदद करती है। छवि: फ्रीपिक कम तेल में बनने की वजह से यह वेस्टइंडीज़ का अच्छा विकल्प बन जाता है। छवि: एआई
मेंटल हेल्थ को लेकर चिंतित परिवार:अमेरिका में बच्चों की होम स्कूलिंग पांच साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ी

अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में बच्चों को घर में पढ़ाने यानी होम स्कूलिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में अमेरिका में स्कूल जाने की उम्र के करीब 32 लाख यानी 6% बच्चों ने घर में पढ़ाई की। यह संख्या 2019 के मुकाबले दोगुनी है। पहले होम स्कूलिंग मुख्य रूप से परंपरावादी ईसाइयों से जुड़ी मानी जाती थी। लेकिन अब दूसरे समुदायों में भी इसका चलन बढ़ रहा है। कई पैरेंट्स स्कूलों में भेदभाव, संवेदनहीन पाठ्यक्रम, सोशल मीडिया के दबाव और बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर चिंतित हैं। डब्ल्यूएचओ के 44 देशों में हुए सर्वे के मुताबिक स्कूल का दबाव महसूस करने वाली 15साल की लड़कियों की संख्या 2018 से 2022 के बीच 54% से बढ़कर 63% हो गई। इंग्लैंड के एक सर्वे में घर में पढ़ने वाले छह में से एक बच्चे की पढ़ाई पर मानसिक स्वास्थ्य का असर पाया गया। हालांकि चीन, जर्मनी, ग्रीस, स्पेन औेर तुर्की में इसकी अनुमति मुश्किल से मिलती है। अमेरिका में सबसे ज्यादा 2019-24 के बीच होम स्कूलिंग के मामले में सबसे ज्यादा वृद्धि अमेरिका में हुई। यहां करीब 32 लाख बच्चों ने घर पर पढ़ाई की जो करीब 120% की वृद्धि है। ऐसे ही ब्रिटेन में एक लाख12 हजार ( 105%) और ऑस्ट्रेलिया में 63हजार ( 95%) बच्चों ने होम स्कूलिंग की।
बेसन बैंगन की सब्जी रेसिपी: बेसन में बेसन से बनी चटपटी बैंगन की करी सब्जी, पकते ही होंगे फैन; विधि नोट करें

सामग्री: 3 बैंगन, 2 कप बेसन, 2 प्याज, 2 टमाटर, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा जीरा, 1/2 छोटा मसाला हल्दी, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा धनिया पाउडर, 1/2 छोटा मसाला गरम मसाला, नमक, तेल, हरा धनिया छवि: फ्रीपिक सबसे पहले बैंगन को धोकर लॉन्ग या प्रोमोशनल में काटें लें। अब होने वाला है एक कड़ाही में लिटिल ऑयल स्टोलम बैंगन को पुष्पांजलि और नरभक्षण तक भून लें। उदाहरण के लिए एक प्लेट में श्रमिक अलग रख दें। छवि: फ्रीपिक अब उसी कड़ी में बेसन स्टैमिनास्टिक स्टाक पर सांत्वना आने तक सूखा भून लें। ध्यान रखें कि बेसन जले नहीं। बेसन को भी अलग हटा लें। छवि: एआई इसके बाद कड़ाही में तेल और जीरा चटकाएं। फिर प्याज़ और हरी मिर्च के टुकड़े टुकड़े टुकड़े होने तक। अब टमाटर और मसाले जैसे हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और नमक शामिल हैं। छवि: एआई सभी प्रकार के अच्छी तरह से पकाए गए तो इसमें बेसन डाल डेज शामिल हैं। अब छोटे पानी के कलाकारों को बनाए रखने के लिए बेसन गुठलीदार न। इसके बाद भुने हुए बैंगन डाला और 5 मिनट तक सीमेंट डेस्टिनेशन पर डंप किया। छवि: फ्रीपिक अंतिम में गरम मसाला और हरा धनिया स्टॉबिलिटी गैस बंद कर दें। बेसन बैंगन की यह सब्जी बाहर से हल्की और अंदर से नर्मी होती है। इसे और भी मजेदार बना देता है। छवि: एआई अगर आप कुछ नया और देसी स्वाद वाला खाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए काम करती है। गरमा-गरम रोटी या पराठे के साथ यह बेसन बैंगन की सब्जी खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है. छवि: एआई बेसन को ही पोर्टफोलियो में शामिल किया गया ताकि उसका कच्चापन खत्म हो जाए। स्ट्राबेरी तो थोड़ा सा इसमें अमचूर पाउडर प्लास्टर का स्वाद भी दे सकते हैं। बैंगन को ज्यादा देर तक पानी में नहीं रखा जा सकता, बाकी का स्वाद बदला जा सकता है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)बेसन बैंगन सब्जी रेसिपी(टी)बेसन बैंगन सब्जी(टी)बेसन बैंगन सब्जी रेसिपी(टी)सब्जी रेसिपी(टी)बैंगन सब्जी(टी)बेसन बैंगन मसालेदार सब्जी रेसिपी
हॉस्टल रूम में वॉर्डन के कथित चोरी का वीडियो वायरल:एग्जाम देने गए छात्र के कमरे में घुसकर की चोरी, छात्र बोले-'ऐसा पहले भी हुआ'

वॉर्डन का हॉस्टल रूम में घुसकर कथित चोरी करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो गाजियाबाद के ABES इंजीनिरिंग कॉलेज का है। इसमें कॉलेज का वॉर्डन छात्र के रूम में घुसकर अलमारी और बाकी सामान खंगालता हुआ दिखाई दे रहा है। इस वीडियो में वॉर्डन स्टूडेंट के वॉलेट से कुछ रुपए निकालकर जेब में रखते दिखाई दे रहा है। वीडियो शेयर कर रहे यूजर्स के मुताबिक, ये घटना उस समय की है जब छात्र सेमेस्टर एग्जाम देने गए हुए थे। इसी दौरान हॉस्टल वॉर्डन सुनील कुमार, जिसे छात्र ‘मारियो’ के नाम से बुलाते हैं, कमरे में दाखिल हुआ। वीडियो में वह अलमारी, बैग और दराज खोलकर देखता नजर आता है। कुछ देर बाद वो अलमारी से छात्र का वॉलेट चेक करता है और उसमें से नकदी निकालकर जेब में रख लेता है। वीडियो में वो छात्रों के कमरे से लाइटर भी चेक करता दिखाई दे रहा है। ऑनलाइन छात्र ‘चोर वॉर्डन’ कह रहे लोग इस वीडियो को ऑनलाइन शेयर करते वॉर्डन को चोर कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद, कई छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में पहले भी सामान गायब होने की शिकायतें होती रही हैं। लेकिन कभी गंभीर कार्रवाई नहीं हुई। कुछ छात्रों ने दावा किया कि परीक्षा के दौरान कमरों में चोरी की घटनाएं पहले भी हुईं। कुछ यूजर्स बोलें- ‘वीडियो भ्रामक दावे के साथ शेयर हो रहा’ हालांकि, कई यूजर्स कंमेंट में इसे भ्रामक बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ‘हमारे हॉस्टल के दिनों में भी ऐसा होता था। ये आमतौर पर हॉस्टल में बैन गैरकानूनी चीजें ढूंढने के लिए किया जाता था। वो (वॉर्डन) कुछ चोरी नहीं कर रहा। इसे ‘साइलेंट रेड’ कहते हैं।’ एक दूसरे यूजर ने लिखा, ‘ये थोड़ा मिसलीडिंग लग रहा है। वो बस लाइटर उठा रहा है। ज्यादा संभावना यही है कि वीडियो उसने खुद रिकॉर्ड किया हो, ताकि ये दिखा सके कि वो हॉस्टल में रहने वाले लोगों पर झूठा आरोप नहीं लगा रहा।’ कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई बयान नहीं फिलहाल कॉलेज प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग वॉर्डन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है और मामले ने कॉलेज कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छिड़ गई है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… स्टूडेंट बोले-CBSE OSM में टीचर्स ने धुंधली कॉपी जांची:CBSE वेबसाइट क्रैश; री-इवैल्यूएशन फीस 100 की जगह 8000 मांग रहे सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी CBSE के ऑन स्क्रिन मार्किंग सिस्टम में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। स्कैन की हुई धुंधली कॉपी जांचने, फीस भरने के बावजूद स्टेटस पेंडिंग दिखाने से लेकर CBSE के पोस्ट-वेरिफिकेशन के सर्वर डाउन रहने और टेक्निकल ग्लिच जैसी कई खामियां सामने आई हैं। पूरी खबर पढ़ें…
मस्क बेच रहे पृथ्वी के बाद की दुनिया का ब्लूप्रिंट:मंगल पर 10 लाख लोगों की बस्ती, चांद पर फैक्ट्री, अंतरिक्ष में डेटासेंटर का प्लान

‘हम नहीं चाहते कि इंसानों का भी वही हश्र हो जो डायनासोर का हुआ था।’ ये किसी साइंस फिक्शन फिल्म का डायलॉग नहीं है। इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने आईपीओ फाइलिंग में ये लिखा है। कंपनी अगले माह अमेरिकी शेयर बाजार में अब तक के सबसे बड़े डेब्यू की तैयारी में है। अमूमन आईपीओ दस्तावेज वित्तीय आंकड़ों से भरे होते हैं। पर, स्पेसएक्स का 300 से ज्यादा पन्नों का दस्तावेज कारोबारी रिपोर्ट से ज्यादा भविष्य की पटकथा जैसा है। यह खुद को ऐसी संस्था के रूप में पेश कर रही है, जो मानव चेतना को सितारों तक पहुंचाना चाहती है। यानी मस्क सिर्फ रॉकेट नहीं, पृथ्वी के बाद की दुनिया का ब्लूप्रिंट बेच रहे हैं। जानें कुछ ऐसे दावे, जिनसे टेक और वित्तीय जगत में हलचल है… – मंगल पर बस्ती कंपनी का सबसे बड़ा सपना मंगल को इंसानों का दूसरा घर बनाना है। फाइलिंग में 63 बार मंगल का जिक्र है। इसे सिर्फ रिसर्च स्टेशन या छोटी कॉलोनी नहीं, बल्कि मानव प्रजाति के बैकअप की तरह तैयार करने का विचार है। ताकि पृथ्वी पर आपदा से सभ्यता खत्म न हो। वहां 10 लाख लोगों को बसाने का लक्ष्य है। फाइलिंग में गुंबदनुमा शहरों, सोलर पैनलों और वहां रहते परिवारों के विजुअल्स भी दिए हैं। मस्क का सपना है कि मंगल पर ऊर्जा जरूरतें वहीं से पूरी हों और बाकी सामान स्टारशिप से पहुंचे। – चांद पर नई अर्थव्यवस्था फाइलिंग में चांद पर मैन्युफैक्चरिंग हब, चांद की अर्थव्यवस्था और क्षुद्रग्रहों पर खनन योजनाओं का जिक्र है। यानी भविष्य में चांद सिर्फ वैज्ञानिक मिशन का ठिकाना नहीं, बल्कि निर्माण, ऊर्जा, खनन और सप्लाई-चेन का केंद्र बन सकता है। – अंतरिक्ष में एआई डेटा सेंटर विज्ञान-कथा जैसा ही सपना है एआई डेटा सेंटर धरती से बाहर ले जाना। कंपनी ने 2028 तक सौर-ऊर्जा संचालित कक्षीय एआई कंप्यूट उपग्रह तैनात करने की बात कही है। अंतरिक्ष की ठंड में बड़े-बड़े डेटा सेंटर सौर ऊर्जा से चलेंगे। धरती पर बिजली-पानी बचेंगे। लक्ष्य 10 लाख तक उपग्रहों वाले डेटा सेंटर सिस्टम का है, जो 500 से 2,000 किमी ऊंचाई पर तैनात होंगे। हर साल 100 गीगावॉट एआई कम्प्यूट क्षमता तैनात करने की योजना है। – पूरा दाव स्टारशिप पर है इन तीनों सपनों की चाबी स्टारशिप है। मंगल पर इंसान भेजना हो, चांद पर कार्गो उतारना हो या अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाना, सबके लिए भारी सामान को बार-बार कम लागत में कक्षा तक पहुंचाना जरूरी है। स्पेसएक्स ने कहा है कि स्टारशिप 2026 की दूसरी छमाही में पेलोड डिलीवरी शुरू कर सकता है। लेकिन यही सबसे बड़ा जोखिम है। अगर स्टारशिप बार-बार प्रयोग लायक और सस्ता नहीं बना तो ये सपने महंगे पोस्टर बनकर रह सकते हैं। एआई से अश्लील सामग्री का खतरा, बढ़ सकते हैं मुकदमे फाइलिंग में कंपनी ने स्वीकार किया कि ग्रोक के स्पाइसी और अनहिंज्ड मोड्स अश्लील सामग्री, गलत सूचना, गैर-सहमति वाली तस्वीरें और भेदभावपूर्ण कंटेंट पैदा कर सकते हैं। इससे नियामकीय जांच और मुकदमों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही कंपनी ने स्वीकार किया कि ट्विटर का नाम बदलकर एक्स (X) करना बेहद महंगा साबित हुआ। फाइलिंग के अनुसार, नाम बदलने के बाद कंपनी की वैल्यू में 3.71 अरब डॉलर (35,516 करोड़ रुपए) की गिरावट आई।
चीन की कोयला खदान में ब्लास्ट, 82 लोगों की मौत:अंदर 247 मजदूर काम कर रहे थे; जिनपिंग बोले- गुनहगारों को नहीं छोड़ेंगे

चीन के शांक्सी प्रांत में एक कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 82 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा चीन में पिछले एक दशक का सबसे बड़ा कोयला खदान हादसा माना जा रहा है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक विस्फोट शुक्रवार को शांक्सी प्रांत के किनयुआन काउंटी में हुआ। यह इलाका बीजिंग से करीब 520 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। हादसे से पहले खदान में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का अलर्ट जारी किया गया था। इसके कुछ समय बाद जोरदार विस्फोट हुआ। जिस समय धमाका हुआ, उस वक्त खदान के अंदर 247 मजदूर काम कर रहे थे। अभी यह साफ नहीं है कि कितने लोग अब भी अंदर फंसे हुए हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है। दिलचस्प बात यह है कि हादसे के तुरंत बाद शिन्हुआ ने शुरुआती रिपोर्ट में सिर्फ आठ लोगों की मौत की जानकारी दी थी और कहा था कि 200 से ज्यादा मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन बाद में अचानक मृतकों की संख्या बढ़कर 82 बताई गई। सरकारी मीडिया ने यह साफ नहीं किया कि आंकड़ा इतनी तेजी से कैसे बढ़ा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों को बचाने के लिए पूरी ताकत से ऑपरेशन चलाने के आदेश दिए हैं। उन्होंने हादसे की पूरी जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करने की बात कही है। हादसे से जुड़ी तस्वीरें… कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से धमाके की आशंका सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, खदान के अंदर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का स्तर काफी ज्यादा बढ़ गया था। माना जा रहा है कि इसी वजह से विस्फोट हुआ। फिलहाल हादसे के असली कारण की जांच की जा रही है। शांक्सी प्रांत चीन में कोयला प्रोडक्शन का बड़ा सेंटर माना जाता है। लेकिन यहां की खदानों का सुरक्षा रिकॉर्ड काफी खराब रहा है। पिछले कुछ सालों में यहां ऐसे कई बड़े हादसे हो चुके हैं। चीन में अब भी एनर्जी के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। देश की आधे से ज्यादा एनर्जी जरूरतें कोयले से पूरी होती हैं। इस खबर को अपडेट किया जा रहा है…
पहाड़ी छाछ कैसे बनायें: इस गर्म मसाले को मसाले के टुकड़ों की विशेष ‘भूति छाछ’, मिनटों में तैयार करें; नोट करें आसान रेसिपी

23 मई 2026 को 10:33 IST पर अद्यतन किया गया पहाड़ी छाछ बनाने की विधि: गर्मियों के मौसम में कुछ खास और बेहद ताजगी भरी छाछ चाहते हैं तो उत्तराखंड की ‘भूति छाछ’ है सबसे बेहतरीन। यह सिर्फ शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाता है, बल्कि पाचन के लिए भी रामबाण माना जाता है। आइए जानते हैं इसे मिनटों में तैयार करने की बेहद आसान रेसिपी। अनुसरण करना : यह एक पारंपरिक पेय है, जिसका स्वाद इसके प्यारे प्यारे और पहाड़ी नमक की वजह से बिल्कुल अलग और लाजवाब होता है। छवि: मेटा एआई सामग्री – ताजा दही, नमक, सरसों का तेल, राई के दाने, सूखी लाल मिर्च, हरा धनियां या कैरी पत्ता छवि: मेटा एआई सबसे पहले एक बड़े पैमाने पर लैपटॉप में निवेशक छाछ लें। यदि आप दही का उपयोग कर रहे हैं, तो उसे पानी बड़े पैमाने पर अच्छी तरह से लें। अब आधा छोटा सा नमक ज्वालामुखी। छवि: मेटा एआई एक छोटी कड़ाही या तड़का पैन में सरसों का तेल गर्म करें। तेल गर्म होने पर इसमें राय शामिल है। जैसे ही राई चटकने लगे, सूखी लाल मिर्च और करी पत्ता दाल। छवि: मेटा एआई अब इस गरमा-गरम गुड़िया को सीधे-सीधे ऑनलाइन छाछ वाले बोतल में डाल दें। शराब की असली पहचान इस शराब की असली पहचान है। इसे अच्छी तरह मिला लें ताकि स्वाद पूरे गिलास में गिर जाए। छवि: मेटा एआई ऊपर से हल्का इलेक्ट्रिक कटा हुआ हरा धनिया। अगर ज्यादा ठंडक चाहिए तो कुछ बर्फ के टुकड़े मिलाए जा सकते हैं। आपकी पहाड़ी ‘भूति छाछ’ की कंपनी के लिए विज्ञापन तैयार है। छवि: मेटा एआई द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 23 मई 2026 को 10:33 IST पर
‘टॉफ़ी, रील और बढ़ती कीमतें’: ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मनीष सिसोदिया का पीएम मोदी पर कटाक्ष | भारत समाचार

आखरी अपडेट:23 मई, 2026, 09:38 IST आम आदमी पार्टी के मनीष सिसौदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में 10 दिनों में तीसरी बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे मुद्रास्फीति और परिवहन लागत की चिंता बढ़ गई है। आप नेता मनीष सिसौदिया आम आदमी पार्टी ने पिछले 10 दिनों में देश भर में ईंधन की कीमतों में बार-बार वृद्धि पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर बढ़ती मुद्रास्फीति और ईंधन की लागत को संबोधित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतें फिर बढ़ने पर आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसौदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की। एक्स पर एक पोस्ट में, सिसौदिया ने कहा, “सिर्फ दस दिनों में, आपने पेट्रोल और डीजल की कीमतें 5 रुपये बढ़ा दी हैं, मोदी जी! कुछ करें! आप कब तक टॉफी और लॉलीपॉप की रील दिखाकर देश के लोगों को अपनी विफलताओं से विचलित करते रहेंगे?” उन्होंने सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से आलोचकों को चुप कराने का भी आरोप लगाया। “ईडी और सीबीआई की शक्ति का उपयोग करके आप कब तक उन लोगों को चुप कराते रहेंगे जो आपसे सवाल करते हैं? कुछ करें – आप देश के प्रधान मंत्री हैं!” सिसौदिया ने कहा. दस दिन में पेट्रोल और डीजल के दाम 5 रुपये बढ़े, जानिए मोदी जी! कुछ किग!टॉफ़ी और लॉलीपॉप की रील्स कब तक देश की खबरों का ध्यान भटकाओगे अपनी नाकामियों से? कब तक सवाल सुपरमार्केट वालों से कहा ईडी-सीबीआई के दम पर बंद करोगे? कुछ करें आप देश के प्रधानमंत्री! https://t.co/r4SlmUrTlQ – मनीष सिसौदिया (@msisodia) 23 मई 2026 ईंधन की कीमतें फिर बढ़ीं शनिवार को एक बार फिर देश भर में ईंधन की कीमतें बढ़ा दी गईं क्योंकि सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच उच्च कच्चे आयात लागत से जुड़े कुछ नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही है। नई दिल्ली में संपीड़ित प्राकृतिक गैस की कीमतें एक बार फिर बढ़ा दी गई हैं, जो 10 दिनों से भी कम समय में तीसरी ईंधन वृद्धि है। सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में कीमतें 80.09 रुपये प्रति किलोग्राम से 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं। ताजा बढ़ोतरी शनिवार सुबह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी के तुरंत बाद हुई। पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़े दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर से 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गईं। डीजल की कीमतें 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गईं। पिछले 10 दिनों में ईंधन की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी ने मुद्रास्फीति और परिवहन लागत पर चिंताएं बढ़ा दी हैं। मेट्रो शहरों में ईंधन की कीमतें चार मेट्रो शहरों में संशोधित पेट्रोल की कीमतें अब हैं: दिल्ली: 99.51 रुपये प्रति लीटर कोलकाता: 110.64 रुपये प्रति लीटर मुंबई: 108.49 रुपये प्रति लीटर चेन्नई: 105.31 रुपये प्रति लीटर मेट्रो शहरों में डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं: दिल्ली: 92.49 रुपये प्रति लीटर कोलकाता: 97.02 रुपये प्रति लीटर मुंबई: 95.02 रुपये प्रति लीटर चेन्नई: 96.98 रुपये प्रति लीटर नवीनतम संशोधन का मतलब है कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतें अब 10 दिनों से भी कम समय के भीतर तीन बार बढ़ गई हैं। सीएनजी की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी से परिवहन ऑपरेटरों और दैनिक यात्रियों पर असर पड़ने की उम्मीद है जो दिल्ली में गैस से चलने वाले वाहनों पर निर्भर हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दिल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘टॉफी, रील और बढ़ती कीमतें’: ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर मनीष सिसौदिया का पीएम मोदी पर तंज अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी(टी)सिसोदिया(टी)मनीष सिसोदिया(टी)आप(टी)ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी(टी)भारत में आम आदमी पार्टी(टी)मनीष सिसौदिया(टी)पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी(टी)डीजल की कीमत में बढ़ोतरी(टी)सीएनजी की कीमत में बढ़ोतरी दिल्ली(टी)बढ़ती ईंधन की कीमतें(टी)भारत में मुद्रास्फीति
दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट का 12वां टेस्ट:इंजन फेल होने के बाद भी हिंद महासागर में लैंडिंग, पहली बार न्यू जनरेशन स्टारशिप का इस्तेमाल

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ‘स्टारशिप’ के नए और बड़े वर्जन (V3) का पहला लॉन्च सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। स्टारशिप सीरीज के पहले भी कई लॉन्च हो चुके हैं, लेकिन इस तीसरी पीढ़ी (V3) के अपग्रेड रॉकेट का पहला ही टेस्ट था और स्टारशिप का 12वां टेस्ट था। इसे भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। ये पूरी तरह से रीयूजेबल है। बूस्टर नहीं कर पाया कंट्रोल्ड लैंडिंग, फेल हुआ बर्न टेस्ट रॉकेट का पहला हिस्सा यानी ‘सुपर हैवी बूस्टर’ अपना ‘बूस्ट बैक’ बर्न पूरा नहीं कर सका। यह वह प्रक्रिया होती है जिसकी मदद से बूस्टर वापस आकर जमीन पर या समुद्र में एक नियंत्रित लैंडिंग करता है। बर्न पूरा न होने की वजह से यह बूस्टर पूरी तरह नियंत्रित तरीके से पानी में नहीं गिर सका। स्टारशिप का छठा इंजन स्टार्ट नहीं हुआ बूस्टर से अलग होने के बाद जब मुख्य स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट को आगे बढ़ना था, तब उसके छह में से केवल पांच इंजन ही चालू हो पाए। एक इंजन स्टार्ट न होने के कारण यह अपने पूरी तरह से सटीक ऑर्बिटल पाथ पर नहीं पहुंच पाया। हालांकि, इसके बावजूद इसकी ट्रेजेक्टरी इतनी सुरक्षित सीमा के भीतर थी कि यह एक ‘सबऑर्बिटल’ फ्लाइट को पूरा कर सका। इस तकनीकी खराबी के चलते टीम अंतरिक्ष में दोबारा इंजन स्टार्ट करने का टेस्ट नहीं कर पाई। इस टेस्ट का मुख्य मकसद रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च करना, उसे ऊपर ले जाना, ऊपर के हिस्से (स्टारशिप) से अलग करना और फिर इंजन को दोबारा चालू करके समुद्र (गल्फ ऑफ अमेरिका) में तय जगह पर सुरक्षित लैंड कराना था। अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें…. 11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था। 10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है। 29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था। नौवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए 9वें टेस्ट में लॉन्चिंग के करीब 30 मिनट बाद स्टारशिप ने कंट्रोल खो दिया था, जिस कारण पृथ्वी के वातावरण में एंटर करने पर ये नष्ट हो गया था। ये लगातार तीसरी बार था जब स्टारशिप आसमान में ही नष्ट हुआ था। हालांकि, बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। आठवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ब्लास्ट हो गई थी स्टारशिप का आठवां टेस्ट भारतीय समयानुसार 7 मार्च को हुआ था। लॉन्चिंग के 7 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया। लेकिन 8 मिनट बाद शिप (ऊपरी हिस्सा) के छह इंजनों में से 4 ने काम करना बंद कर दिया जिससे शिप ने कंट्रोल खो दिया। इसके बाद ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने शिप को ब्लास्ट कर दिया। गिरते मलबे की वजह से मियामी, ऑरलैंडो, पाम बीच और फोर्ट लॉडरडेल के हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं थी। सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया; लेकिन स्पेसक्राफ्ट आसमान में ही ब्लास्ट हुआ 17 जनवरी 2025 को भी स्टारशिप का सातवां टेस्ट पूरी तरह से कामयाब नहीं रहा था। लॉन्चिंग के 8 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया था, लेकिन शिप (ऊपरी हिस्सा) में ऑक्सीजन लीक से ब्लास्ट हो गया था। छठा टेस्ट: लॉन्चपैड पर उतरने में दिक्कत दिखी तो पानी पर लैंड कराया, ट्रम्प भी मौजूद रहे स्टारशिप का छठा टेस्ट 20 नवंबर 2024 को सुबह 03:30 बजे किया गया था। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी टेस्ट देखने के लिए स्टारबेस पहुंचे थे। इस टेस्ट में बूस्टर को लॉन्च करने के बाद वापस लॉन्चपैड पर कैच किया जाना था, लेकिन सभी पैरामीटर ठीक नहीं होने के कारण इसे पानी में लैंड कराने का फैसला लिया गया। स्टारशिप के इंजन को स्पेस में फिर से चालू किया गया। इसके बाद हिंद महासागर में लैंडिंग हुई। पांचवां टेस्ट: पहली बार बूस्टर को लॉन्चपैड पर कैच किया था स्टारशिप का पांचवां टेस्ट 13 अक्टूबर 2024 को किया गया था। इस टेस्ट में पृथ्वी से 96 Km ऊपर भेजे गए सुपर हैवी बूस्टर को लॉन्चपैड पर वापस लाया गया, जिसे मैकेजिला ने पकड़ा। मैकेजिला दो मेटल आर्म हैं जो चॉपस्टिक्स की तरह दिखाई देती हैं। वहीं स्टारशिप की पृथ्वी के वायुमंडल में री-एंट्री कराकर हिंद महासागर में
दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट का 12वां टेस्ट:इंजन फेल होने के बाद भी हिंद महासागर में लैंडिंग, पहली बार न्यू जनरेशन स्टारशिप का इस्तेमाल

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ‘स्टारशिप’ के नए और बड़े वर्जन (V3) का पहला लॉन्च सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। स्टारशिप सीरीज के पहले भी कई लॉन्च हो चुके हैं, लेकिन इस तीसरी पीढ़ी (V3) के अपग्रेड रॉकेट का पहला ही टेस्ट था और स्टारशिप का 12वां टेस्ट था। इसे भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। ये पूरी तरह से रीयूजेबल है। बूस्टर नहीं कर पाया कंट्रोल्ड लैंडिंग, फेल हुआ बर्न टेस्ट रॉकेट का पहला हिस्सा यानी ‘सुपर हैवी बूस्टर’ अपना ‘बूस्ट बैक’ बर्न पूरा नहीं कर सका। यह वह प्रक्रिया होती है जिसकी मदद से बूस्टर वापस आकर जमीन पर या समुद्र में एक नियंत्रित लैंडिंग करता है। बर्न पूरा न होने की वजह से यह बूस्टर पूरी तरह नियंत्रित तरीके से पानी में नहीं गिर सका। स्टारशिप का छठा इंजन स्टार्ट नहीं हुआ बूस्टर से अलग होने के बाद जब मुख्य स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट को आगे बढ़ना था, तब उसके छह में से केवल पांच इंजन ही चालू हो पाए। एक इंजन स्टार्ट न होने के कारण यह पूरी तरह से सटीक ऑर्बिटल पाथ पर नहीं पहुंच पाया। इसके बावजूद इसकी ट्रेजेक्टरी इतनी सुरक्षित सीमा के भीतर थी कि यह एक ‘सबऑर्बिटल’ फ्लाइट को पूरा कर सका। इस तकनीकी खराबी के चलते टीम अंतरिक्ष में दोबारा इंजन स्टार्ट करने का टेस्ट नहीं कर पाई। इस टेस्ट का मुख्य मकसद रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च करना, उसे ऊपर ले जाना, ऊपर के हिस्से (स्टारशिप) से अलग करना और फिर इंजन को दोबारा चालू करके समुद्र (गल्फ ऑफ अमेरिका) में तय जगह पर सुरक्षित लैंड कराना था। अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें…. 11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था। 10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त 2025 को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है। 29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था। नौवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए 9वें टेस्ट में लॉन्चिंग के करीब 30 मिनट बाद स्टारशिप ने कंट्रोल खो दिया था, जिस कारण पृथ्वी के वातावरण में एंटर करने पर ये नष्ट हो गया था। ये लगातार तीसरी बार था जब स्टारशिप आसमान में ही नष्ट हुआ था। हालांकि, बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। आठवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ब्लास्ट हो गई थी स्टारशिप का आठवां टेस्ट भारतीय समयानुसार 7 मार्च 2025 को हुआ था। लॉन्चिंग के 7 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया। लेकिन 8 मिनट बाद शिप (ऊपरी हिस्सा) के छह इंजनों में से 4 ने काम करना बंद कर दिया जिससे शिप ने कंट्रोल खो दिया। इसके बाद ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने शिप को ब्लास्ट कर दिया। गिरते मलबे की वजह से मियामी, ऑरलैंडो, पाम बीच और फोर्ट लॉडरडेल के हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं थी। सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया; लेकिन स्पेसक्राफ्ट आसमान में ही ब्लास्ट हुआ 17 जनवरी 2025 को भी स्टारशिप का सातवां टेस्ट पूरी तरह से कामयाब नहीं रहा था। लॉन्चिंग के 8 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया था, लेकिन शिप (ऊपरी हिस्सा) में ऑक्सीजन लीक से ब्लास्ट हो गया था। छठा टेस्ट: लॉन्चपैड पर उतरने में दिक्कत दिखी तो पानी पर लैंड कराया, ट्रम्प भी मौजूद रहे स्टारशिप का छठा टेस्ट 20 नवंबर 2024 को सुबह 03:30 बजे किया गया था। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी टेस्ट देखने के लिए स्टारबेस पहुंचे थे। इस टेस्ट में बूस्टर को लॉन्च करने के बाद वापस लॉन्चपैड पर कैच किया जाना था, लेकिन सभी पैरामीटर ठीक नहीं होने के कारण इसे पानी में लैंड कराने का फैसला लिया गया। स्टारशिप के इंजन को स्पेस में फिर से चालू किया गया। इसके बाद हिंद महासागर में लैंडिंग हुई। पांचवां टेस्ट: पहली बार बूस्टर को लॉन्चपैड पर कैच किया था स्टारशिप का पांचवां टेस्ट 13 अक्टूबर 2024 को किया गया था। इस टेस्ट में पृथ्वी से 96 Km ऊपर भेजे गए सुपर हैवी बूस्टर को लॉन्चपैड पर वापस लाया गया, जिसे मैकेजिला ने पकड़ा। मैकेजिला दो मेटल आर्म हैं जो चॉपस्टिक्स की तरह दिखाई देती हैं। वहीं स्टारशिप की पृथ्वी के वायुमंडल में री-एंट्री कराकर हिंद महासागर में







