अमेरिका में 27 साल रही भारतवंशी महिला हिरासत में:ICE ने पूछताछ के बाद किया डिटेन; वेंकटा के पास 2013 से ग्रीन कार्ड

अमेरिका में 27 साल से रह रहीं भारतीय मूल की वेंकटा वासमसेट्टी को इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में ले लिया। 11 अगस्त को शार्लोट स्थित ICE कार्यालय में नियमित चेक-इन के दौरान पूछताछ के बाद उन्हें डिटेन किया गया। वेंकटा के पास 2013 से ग्रीन कार्ड है और वह नॉर्थ कैरोलिना के सरकारी स्कूल में स्पेशल-नीड्स बच्चों को पढ़ाती हैं। भारत जाने के बाद ग्रीन कार्ड पर सवाल उठा वेंकटा जुलाई 2022 में बीमार माता-पिता की देखभाल के लिए भारत आई थीं। वहां उन्हें कोविड हुआ और करीब दो हफ्ते अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वह फरवरी 2023 में करीब 7 महीने बाद अमेरिका लौटीं। अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी लंबी गैर-मौजूदगी को आधार बनाकर सवाल उठाया कि क्या उन्होंने अमेरिका में अपना स्थायी निवास छोड़ दिया था। वेंकटा के वकीलों ने कहा कि उनका घर, नौकरी और परिवार अमेरिका में है और उन्होंने स्थायी रूप से भारत लौटने का इरादा नहीं किया था। ग्रीन कार्डधारक 180 दिन से ज्यादा अमेरिका से बाहर रहें तो इमिग्रेशन अधिकारी यह जांच कर सकते हैं कि उन्होंने अमेरिका को अपना स्थायी घर बनाए रखा है या नहीं। मई में जज ने डिपोर्टेशन केस खत्म किया वेंकटा के खिलाफ डिपोर्टेशन की कार्रवाई चल रही थी और उन्हें नियमित रूप से ICE के सामने पेश होना पड़ता था। 19 मई को इमिग्रेशन जज ने केस खत्म कर दिया। जज ने कहा कि सरकार यह स्पष्ट और ठोस सबूत नहीं दे पाई कि वेंकटा को अमेरिका से बाहर किया जा सकता है। इसके बावजूद 11 अगस्त को ICE कार्यालय में चेक-इन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल उन्हें जॉर्जिया के इरविन काउंटी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। डायबिटीज की मरीज, वकीलों ने कोर्ट में चुनौती दी वेंकटा को गंभीर डायबिटीज है और उनके वकील के मुताबिक, हिरासत में लिए जाने के समय उनके पास इंसुलिन और जरूरी मेडिकल सप्लाई नहीं थीं। उनके वकीलों ने हिरासत को फेडरल कोर्ट में चुनौती दी है। 13 अगस्त को जज ने ICE से तीन दिन में यह बताने को कहा कि वेंकटा को हिरासत में रखने का कानूनी आधार क्या है। वेंकटा का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उनकी दो बेटियां और दो पोते-पोतियां अमेरिकी नागरिक हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- रूस सीक्रेट रूट से ईरान को हथियार भेज रहा:मिसाइल-ड्रोन पार्ट्स और गोला-बारूद शामिल; ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर समुद्री रास्ते का इस्तेमाल रूस सीक्रेट रास्ते के जरिये ईरान के सैन्य भंडार को मजबूत करने में मदद कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को TNT विस्फोटक, ड्रोन के पार्ट्स और गोला-बारूद भेज रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
7 महीने में 3 गुना बढ़ा कंपनियों का AI खर्च:रैम्प के एआई इंडेक्स के मुताबिक टॉप फर्म्स प्रति कर्मचारी खर्च कर रहीं 7 लाख

अमेरिका की टॉप 1% कंपनियां अब एआई टूल्स पर हर कर्मचारी के लिए औसतन करीब 7 लाख रुपए खर्च कर रही हैं। रैम्प के एआई इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी में यही कंपनियां प्रति कर्मचारी करीब 2.47 लाख रुपए खर्च कर रही थीं। यानी 7 महीनों में खर्च लगभग 3 गुना हो गया। टॉप 10% कंपनियां एआई पर करीब 62 हजार रुपए प्रति कर्मचारी खर्च कर रही हैं। औसत खर्च करीब 1140 रुपए प्रति कर्मचारी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एंथ्रोपिक और ओपनएआई जैसी कंपनियां अब प्रति-टोकन मॉडल पर आ गई हैं। इसमें इस्तेमाल किए गए टोकन के हिसाब से पैसा लिया जाता है। यानी एआई से जितना ज्यादा काम, उतने ज्यादा टोकन और उतना ज्यादा बिल। हाल के महीनों में उबर, अमेजन और वॉलमार्ट ने जरूरत से ज्यादा एआई इस्तेमाल रोकने के लिए लिमिट लगाई है। एआई बॉस ने इंसानी कर्मचारी को नौकरी से निकाला दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर प्रयोग चल रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को में एंडोन लैब नाम की फर्म ने लूना नामक एआई को एक रिटेल स्टोर चलाने की जिम्मेदारी सौंपी। हाल ही में लूना ने अपने एक इंसानी कर्मचारी को बर्खास्त करने की सिफारिश की। वह कर्मचारी 23 में से 17 शिफ्टों में देर से आया था। बाद में इंसानी कर्मचारियों ने इस सिफारिश को रिव्यू किया और उस कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया। एंडोन मार्केट ने अपने सोशल मीडिया पेज पर लिखा ‘पहली बार (हमारी जानकारी के अनुसार) किसी एआई बॉस ने किसी इंसानी कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया है। सैन फ्रांसिस्को में हमारे स्टोर को चलाने वाली एआई लूना ने बार-बार देर से आने के कारण एक कर्मचारी को बर्खास्त करने का फैसला किया। उस समय लूना क्लाउड ओपस 4.8 पर चल रही थी, लेकिन अधिकांश मॉडल ऐसा ही करते।’ अपनी अटेंडेंस नीति को भूल गया था एआई एंडोन लैब्स के मुताबिक लूना ने महीनों पहले अटेंडेंस संबंधी नीति बनाई थी, लेकिन बाद में वह उसे भूल गई। इसका नतीजा ये हुआ कि देर से आने वाला कर्मचारी कई महीनों तक वही गलती दोहराता रहा। आखिरकार एंडोन लैब्स ने लूना को अपनी मेमोरी में बनाई गई नीतियों को खोजने के लिए कहा और फिर उससे यह आकलन करने को कहा कि क्या कर्मचारी अभी भी कंपनी के लिए उपयुक्त है। इसके बाद लूना ने कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त करने की सिफारिश की।
शाहरुख के घर मन्नत में दो सांप दिखे:रेस्क्यू टीम ने एक पकड़ा, करीब 8 फीट लंबा था; दूसरे की तलाश हो रही

शाहरुख खान के मुंबई स्थित मशहूर बंगले मन्नत में 17 अगस्त को लॉन में दो सांप दिखे। सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। टीम ने एक सांप पकड़ लिया है, हालांकि दूसरा सांप अब भी बंगले में ही है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार रात करीब 8 बजे एक स्नेक रेस्क्यूअर को मन्नत के अंदर दो सांप दिखने की जानकारी दी गई। इसके बाद बंगले में तलाशी शुरू की गई, जिसमें एक सांप को सुरक्षित पकड़ लिया गया। रेस्क्यू किए गए सांप की लंबाई करीब 8 फीट थी। उसकी पहचान धामन के रूप में हुई, जिसे इंडियन रैट स्नेक भी कहा जाता है। यह सांप गैर-जहरीला होता है और बंगले के परिसर में एक सीढ़ी के नीचे छिपा मिला। दूसरा सांप तलाश के बाद भी नहीं मिला रेस्क्यू की कोशिश पूरी तरह सफल नहीं रही। परिसर में लोगों की आवाजाही शुरू होने पर दूसरा सांप भाग गया। देर शाम तक उसकी तलाश जारी रही, लेकिन वह नहीं मिला। गैर-जहरीला सांप मिलने से स्टाफ को राहत रिपोर्ट्स के मुताबिक, सांप के गैर-जहरीला होने की जानकारी मिलने के बाद मन्नत के सिक्योरिटी गार्ड्स और स्टाफ ने राहत महसूस की। इस बंगले का आधिकारिक नाम मन्नत लैंड्स एंड है। यह मुंबई के बांद्रा इलाके के बैंडस्टैंड में स्थित है। समुद्र के सामने बना शाहरुख का यह घर समय के साथ मुंबई की मशहूर जगहों में शामिल हो गया है। शाहरुख को देखने की उम्मीद में फैंस अक्सर बंगले के बाहर जमा होते हैं। मन्नत में नहीं रह रहे हैं शाहरुख खान शाहरुख खान के बंगले मन्नत में पिछले कुछ महीनों से रेनोवेशन का काम जारी है, जिसके चलते वह अपनी फैमिली के साथ बांद्रा के एक लग्जरी अपार्टमेंट में रह रहे हैं। पाली हिल बांद्रा के चार मंजिला लग्जरी अपार्टमेंट पूजा कासा का किराया हर महीने 24 लाख है। इस अपार्टमेंट में शाहरुख और उनका परिवार अगले 2 साल तक रहेगा। इस लग्जरी अपार्टमेंट को फिल्म प्रोड्यूसर वासु भगनानी ने बनाया है, जिसका मालिकाना हक प्रोड्यूसर के बेटे जैकी भगनानी और बेटी दीपशिखा देशमुख के पास है। पूरी रकम न होने के बावजूद खरीदा मन्नत शाहरुख ने 1997 में अपनी फिल्म यस बॉस की शूटिंग के दौरान मन्नत को पहली बार देखा। समुद्र के किनारे खड़ा यह बंगला उनकी नजर में बिल्कुल सपनों जैसा था। चुनौती यह थी कि एक सक्सेसफुल एक्टर होने के बावजूद शाहरुख के पास इतने बड़े घर को खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। 2001 में, जब उन्हें यह बंगला खरीदने का मौका मिला, उन्होंने हिम्मत दिखाई और अपने सपने को सच करने का फैसला लिया। शाहरुख की करीबी शबीना खान ने अपने आर्टिकल ‘द एसआरके स्टोरी’ में लिखा था कि जब शाहरुख ने ‘मन्नत’ खरीदा, तब उनके पास केवल 2 करोड़ रुपए थे, जबकि बंगले की कीमत करीब 30 करोड़ रुपए थी। बाकी पैसे उन्होंने लोन लेकर दिए। लेकिन अब समस्या थी घर को सजाना। उन्होंने एक इंटीरियर डिजाइनर से संपर्क किया, लेकिन उसकी फीस इतनी ज्यादा थी जिसके चलते शाहरुख ने गौरी से कहा कि वे खुद ही घर का इंटीरियर डिजाइन करें। गौरी ने यह चुनौती स्वीकार की और घर के हर कोने में अपनी कला का जादू बिखेर दिया। आज शाहरुख के घर मन्नत की कीमत 200 करोड़ रुपए से भी अधिक है। फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगे शाहरुख शाहरुख खान अपनी अगली फिल्म ‘किंग’ के लिए तैयार हैं। सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बनी यह एक्शन थ्रिलर 24 दिसंबर 2026 को थिएटर में रिलीज होगी। फिल्म में दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, सुहाना खान, राघव जुयाल और रानी मुखर्जी अहम भूमिकाओं में हैं।
शाहरुख के घर मन्नत में दो सांप दिखे:रेस्क्यू टीम ने एक सांप पकड़ा, लंबाई थी करीब 8 फीट; दूसरा अब भी अंदर मिसिंग

शाहरुख खान के मुंबई स्थित मशहूर बंगले मन्नत में 17 अगस्त को लॉन में दो सांप दिखे। सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। टीम ने एक सांप पकड़ लिया है, हालांकि दूसरा सांप अब भी बंगले में ही है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार रात करीब 8 बजे एक स्नेक रेस्क्यूअर को मन्नत के अंदर दो सांप दिखने की जानकारी दी गई। इसके बाद बंगले में तलाशी शुरू की गई, जिसमें एक सांप को सुरक्षित पकड़ लिया गया। रेस्क्यू किए गए सांप की लंबाई करीब 8 फीट थी। उसकी पहचान धामन के रूप में हुई, जिसे इंडियन रैट स्नेक भी कहा जाता है। यह सांप गैर-जहरीला होता है और बंगले के परिसर में एक सीढ़ी के नीचे छिपा मिला। दूसरा सांप तलाश के बाद भी नहीं मिला रेस्क्यू की कोशिश पूरी तरह सफल नहीं रही। परिसर में लोगों की आवाजाही शुरू होने पर दूसरा सांप भाग गया। देर शाम तक उसकी तलाश जारी रही, लेकिन वह नहीं मिला। गैर-जहरीला सांप मिलने से स्टाफ को राहत रिपोर्ट्स के मुताबिक, सांप के गैर-जहरीला होने की जानकारी मिलने के बाद मन्नत के सिक्योरिटी गार्ड्स और स्टाफ ने राहत महसूस की। इस बंगले का आधिकारिक नाम मन्नत लैंड्स एंड है। यह मुंबई के बांद्रा इलाके के बैंडस्टैंड में स्थित है। समुद्र के सामने बना शाहरुख का यह घर समय के साथ मुंबई की मशहूर जगहों में शामिल हो गया है। शाहरुख को देखने की उम्मीद में फैंस अक्सर बंगले के बाहर जमा होते हैं। मन्नत में नहीं रह रहे हैं शाहरुख खान शाहरुख खान के बंगले मन्नत में पिछले कुछ महीनों से रेनोवेशन का काम जारी है, जिसके चलते वह अपनी फैमिली के साथ बांद्रा के एक लग्जरी अपार्टमेंट में रह रहे हैं। पाली हिल बांद्रा के चार मंजिला लग्जरी अपार्टमेंट पूजा कासा का किराया हर महीने 24 लाख है। इस अपार्टमेंट में शाहरुख और उनका परिवार अगले 2 साल तक रहेगा। इस लग्जरी अपार्टमेंट को फिल्म प्रोड्यूसर वासु भगनानी ने बनाया है, जिसका मालिकाना हक प्रोड्यूसर के बेटे जैकी भगनानी और बेटी दीपशिखा देशमुख के पास है। पूरी रकम न होने के बावजूद खरीदा मन्नत शाहरुख ने 1997 में अपनी फिल्म यस बॉस की शूटिंग के दौरान मन्नत को पहली बार देखा। समुद्र के किनारे खड़ा यह बंगला उनकी नजर में बिल्कुल सपनों जैसा था। चुनौती यह थी कि एक सक्सेसफुल एक्टर होने के बावजूद शाहरुख के पास इतने बड़े घर को खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। 2001 में, जब उन्हें यह बंगला खरीदने का मौका मिला, उन्होंने हिम्मत दिखाई और अपने सपने को सच करने का फैसला लिया। शाहरुख की करीबी शबीना खान ने अपने आर्टिकल ‘द एसआरके स्टोरी’ में लिखा था कि जब शाहरुख ने ‘मन्नत’ खरीदा, तब उनके पास केवल 2 करोड़ रुपए थे, जबकि बंगले की कीमत करीब 30 करोड़ रुपए थी। बाकी पैसे उन्होंने लोन लेकर दिए। लेकिन अब समस्या थी घर को सजाना। उन्होंने एक इंटीरियर डिजाइनर से संपर्क किया, लेकिन उसकी फीस इतनी ज्यादा थी जिसके चलते शाहरुख ने गौरी से कहा कि वे खुद ही घर का इंटीरियर डिजाइन करें। गौरी ने यह चुनौती स्वीकार की और घर के हर कोने में अपनी कला का जादू बिखेर दिया। आज शाहरुख के घर मन्नत की कीमत 200 करोड़ रुपए से भी अधिक है। फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगे शाहरुख शाहरुख खान अपनी अगली फिल्म ‘किंग’ के लिए तैयार हैं। सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बनी यह एक्शन थ्रिलर 24 दिसंबर 2026 को थिएटर में रिलीज होगी। फिल्म में दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, सुहाना खान, राघव जुयाल और रानी मुखर्जी अहम भूमिकाओं में हैं।
30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद? 73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है। ग्रूमिंग गैंग क्या है जिससे जुड़ा है शबीर अहमद ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। इनमें से कई लड़कियां प्रेग्नेंट हुईं और उन्हें अबॉर्शन कराना पड़ा। कई लड़कियों ने अपने
30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद? 73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है।
कनाडा के वैंकूवर में ट्रेन ट्रैक पर चढ़ा सिख शख्स:पटरियों पर बैठकर गाना गाया, बोला- मुझे अंग्रेजी नहीं आती; ट्रेन सर्विस रोकनी पड़ी

कनाडा के वैंकूवर में एक सिख शख्स के स्काई ट्रेन के ट्रैक पर चले जाने से ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी। शख्स पटरियों पर बैठा रहा और वहां गाना गाता नजर आया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में शख्स बार-बार “आई डॉन्ट नो इंग्लिश यानी मुझे अंग्रेजी नहीं आती” कहता सुनाई दे रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने शख्स को ट्रैक से हटाने की कोशिश की। बाद में उसे वहां से बाहर निकाल लिया गया। शख्स को हटाए जाने के दौरान मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने तालियां भी बजाईं। ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी शख्स के ट्रैक पर होने के कारण स्काई ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई। यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और सुरक्षा के लिए ट्रेन सेवा को रोकना पड़ा। उपलब्ध जानकारी में शख्स के ट्रैक पर जाने की वजह और उसके खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। स्काई ट्रेन क्या है और यह कैसे चलती है? वैंकूवर की स्काई ट्रेनएक तरह की मेट्रो ट्रेन है। इसे चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। ट्रेन का सिस्टम कंप्यूटर से चलता है। स्काई ट्रेन का बड़ा हिस्सा सड़क के ऊपर बने ट्रैक पर चलता है। कुछ जगहों पर यह जमीन के नीचे भी जाती है। स्काई ट्रेन के ट्रैक पर आम लोगों का जाना सुरक्षित नहीं है। ट्रेन बहुत तेज चलती है। अगर कोई व्यक्ति अचानक ट्रैक पर आ जाए तो ट्रेन को तुरंत रोकना आसान नहीं होता। इसलिए जैसे ही पता चलता है कि कोई व्यक्ति ट्रैक पर है, सुरक्षा के लिए उस हिस्से की ट्रेन रोक दी जाती है। पुलिस और ट्रेन के कर्मचारी पहले उस व्यक्ति को ट्रैक से बाहर निकालते हैं। इसके बाद यह देखा जाता है कि ट्रैक पूरी तरह खाली और सुरक्षित है या नहीं। सब कुछ ठीक होने के बाद ही ट्रेन फिर से चलती है। एक व्यक्ति से कई ट्रेनें क्यों रुक सकती हैं? स्काई ट्रेन की कई ट्रेनें एक ही नेटवर्क पर चलती हैं। इसलिए ट्रैक के एक हिस्से में कोई खतरा होने पर सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि आसपास की दूसरी ट्रेनें भी रुक सकती हैं। यात्रियों को ट्रेन में इंतजार करना पड़ सकता है या उन्हें दूसरी ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन बदलना पड़ सकता है। यानी इस घटना में शख्स का ट्रैक पर बैठना सिर्फ पुलिस के लिए परेशानी नहीं था। उसकी वजह से यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरी ट्रेन सेवा को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
कनाडा के वैंकूवर में ट्रेन ट्रैक पर चढ़ा सिख शख्स:पटरियों पर बैठकर गाना गाया, बोला- मुझे अंग्रेजी नहीं आती; ट्रेन सर्विस रोकनी पड़ी

कनाडा के वैंकूवर में एक सिख शख्स के स्काई ट्रेन के ट्रैक पर चले जाने से ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी। शख्स काफी देर तक पटरियों पर बैठा रहा और वहां गाना गाता नजर आया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में शख्स बार-बार “आई डॉन्ट नो इंग्लिश” यानी मुझे अंग्रेजी नहीं आती है, कहते सुनाई दे रहा है। वीडियो में वह पटरियों पर उछल-कूद करता और गाना गाता भी नजर आ रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने शख्स को ट्रैक से बाहर निकाल लिया। उसे हटाए जाने के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने तालियां भी बजाईं। ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी शख्स के ट्रैक पर मौजूद होने के कारण स्काई ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन सेवा को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। किस वजह से शख्स ट्रैक पर गया था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। उसके खिलाफ पुलिस ने क्या कानूनी कार्रवाई की, इसकी भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। घटना का पूरा वीडियो… स्काई ट्रेन क्या है और यह कैसे चलती है? वैंकूवर की स्काई ट्रेन एक तरह की मेट्रो ट्रेन है। इसकी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए ट्रेन के अंदर ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। इसका संचालन कंप्यूटर आधारित सिस्टम से होता है। स्काई ट्रेन का बड़ा हिस्सा सड़क के ऊपर बने ट्रैक पर चलता है। कुछ हिस्सों में यह जमीन के नीचे भी जाती है। स्काई ट्रेन के ट्रैक पर आम लोगों का जाना बेहद खतरनाक होता है। ट्रेन के ट्रैक पर किसी व्यक्ति के पहुंचने की जानकारी मिलते ही सुरक्षा के लिए संबंधित हिस्से में ट्रेन की आवाजाही रोक दी जाती है। इसके बाद पुलिस और ट्रेन कर्मचारी पहले व्यक्ति को ट्रैक से बाहर निकालते हैं। फिर यह जांच की जाती है कि ट्रैक पूरी तरह खाली और सुरक्षित है या नहीं। सुरक्षा की पुष्टि होने के बाद ही ट्रेन सेवा दोबारा शुरू की जाती है। एक व्यक्ति के ट्रैक पर आने से कई ट्रेनें क्यों रुकती हैं? स्काई ट्रेन की कई ट्रेनें एक ही नेटवर्क से जुड़ी होती हैं। इसलिए ट्रैक के किसी एक हिस्से में सुरक्षा से जुड़ी समस्या होने पर उसका असर आसपास चल रही दूसरी ट्रेनों पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में यात्रियों को ट्रेन के अंदर इंतजार करना पड़ सकता है। कई बार उन्हें दूसरी ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन बदलना पड़ता है या अपनी यात्रा में देरी का सामना करना पड़ता है। यानी इस घटना में शख्स का ट्रैक पर बैठना सिर्फ पुलिस के लिए परेशानी नहीं बना। उसकी मौजूदगी के कारण यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेन सेवा भी रोकनी पड़ी और पूरे नेटवर्क की आवाजाही प्रभावित हुई।
कनाडा में पंजाबी लड़की को गोली लगी, मौत:दोस्त से मिलने गई थी; पड़ोसी बोले- 2 तेज आवाजों के बाद सुनाई दीं चीखें

कनाडा के एडमोंटन में पंजाबी लड़की की गोली लगने से मौत हो गई। वह अपनी दोस्त से मिलने एक टाउनहाउस कॉम्प्लेक्स गई थी। अगले दिन सुबह उसी जगह गोलीबारी की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुंची तो लड़की गंभीर हालत में मिली, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पड़ोसियों के मुताबिक लड़की की मौत से पहले घर से उसके चिल्लाने और रोने की आवाज सुनाई दी गई थी। एडमोंटन पुलिस सर्विस के होमिसाइड विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अभी तक किसी संदिग्ध की पहचान या गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामला 139 एवेन्यू और 32 स्ट्रीट के पास का है। 16 अगस्त की सुबह करीब 6:50 बजे पुलिस को गोलीबारी की सूचना मिली थी। परिवार ने मृतका की पहचान जैजमिन ढेसी के रूप में की है। वह अपनी मां और दो छोटे भाई-बहनों के साथ रहती थी। दोस्त से मिलने गई थी, उसी घर में नहीं रहती थी जांच में सामने आया कि जैजमिन उस घर में नहीं रहती थी जहां घटना हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पड़ोसियों ने बताया कि वह वहां अपनी एक दोस्त से मिलने आई थी। उसकी दोस्त का परिवार करीब दो महीने पहले ही उस जगह रहने आया था। पड़ोसी बोले- 2 तेज आवाजें सुनाई दीं, फिर चीखें आईं घटना के वक्त आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। एक पड़ोसी ने 2 तेज आवाजें सुनने की बात कही। इसके बाद एक लड़की के चीखने और रोने की आवाज सुनाई देने का भी दावा किया गया। मीडिया से बातचीत में एक पड़ोसी ने बताया कि उसकी नींद सुबह चीखों की आवाज से खुली। घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस पहुंची और आसपास के लोगों में डर फैल गया। एक अन्य पड़ोसी ने बताया कि उसकी छोटी बहन घटना के बाद इतनी डर गई कि वह सो नहीं पा रही थी। कुछ लोगों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और घरों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की बात कही। जिस घर में घटना हुई, वहां पहले भी पुलिस आने का दावा रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ पड़ोसियों ने उस घर को लेकर भी चिंता जताई है। उनका दावा है कि वहां लोगों की लगातार आवाजाही रहती थी और पुलिस पहले भी उस घर पर आ चुकी थी। कुछ स्थानीय लोगों ने देर रात होने वाली पार्टियों और कॉम्प्लेक्स में बाहरी लोगों के लगातार आने-जाने की शिकायत भी की है। हालांकि, ये पड़ोसियों के दावे हैं। पुलिस ने इन बातों को जैजमिन की मौत से जोड़कर कोई पुष्टि नहीं की है। घटना से पहले विवाद और डोरबेल कैमरे में धमकी से जुड़े दावे भी सामने आए हैं। पुलिस ने अभी तक यह नहीं कहा कि किसी विवाद या धमकी का गोलीबारी से कोई संबंध था। इसी कॉम्प्लेक्स में 20 साल पहले भी हुई थी हत्या घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इस टाउनहाउस कॉम्प्लेक्स के पुराने इतिहास का भी जिक्र किया। पड़ोसी तान्या डालुग के मुताबिक, करीब 20 साल पहले इसी कॉम्प्लेक्स में नादिन रॉबिन्सन नाम की महिला की हत्या हुई थी। हालांकि, इस मामले में किसी व्यक्ति पर आरोप तय नहीं हुआ था। ऑटोप्सी के बाद साफ होगी मौत की परिस्थितियां पुलिस के मुताबिक मृतका की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बुधवार को आएगी। मेडिकल एग्जामिनर की जांच से मौत के सटीक कारण और परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। फिलहाल पुलिस इसे संदिग्ध मौत के तौर पर देख रही है। पुलिस ने लोगों से मांगी जानकारी एडमिंटन पुलिस सर्विस ने घटना से जुड़ी कोई भी जानकारी रखने वाले लोगों से जांचकर्ताओं से संपर्क करने की अपील की है। जानकारी 780-423-4567 पर दी जा सकती है। गुमनाम सूचना 1-800-222-8477 नंबर पर दी जा सकती है।
ट्रंम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ की:कहा- 64.6 करोड़ वोटर्स के पास फोटो आईडी, अमेरिका में भी हो जरूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला देते हुए ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पास कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से पूछा था कि वैध फोटो पहचान पत्र के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। ट्रंम्प ने कहा कि हर अमेरिकी मतदाता के लिए फोटो आईडी जरूरी होनी चाहिए, ताकि चुनावी धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने ये बातें ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहीं। पंजीकरण के लिए नागरिकता का प्रमाण दिखाना जरूरी सेव अमेरिका एक्ट के तहत अमेरिका में वोटर के तौर पर पंजीकरण कराने के लिए नागरिकता का प्रमाण दिखाना जरूरी होगा। इसके अलावा, पूरे देश में मतदाता पहचान पत्र की अनिवार्यता लागू करने का प्रस्ताव है। इस कानून में डाक से वोट देने की प्रक्रिया को काफी सीमित करने की बात भी कही गई है। ट्रंप लगातार सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी (SAVE) यानी सेव अमेरिका एक्ट को पास कराने पर जोर दे रहे हैं और उनका दावा है कि इससे चुनावी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। सीनेट में आगे नहीं बढ़ी प्रक्रिया इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों पार्टी में मतभेद हैं। इसी वजह से अमेरिकी सीनेट इस महीने की शुरुआत में कानून पास करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए बिना पांच हफ्ते के अवकाश पर चली गई। ————- ये खबर पढ़ें… ट्रम्प बोले- लेविट को मुझसे ज्यादा अपने बच्चे पसंद:व्हाइट हाउस में उनकी जगह लेना मुश्किल; लेविट का प्रेस सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के पद छोड़ने पर मजाक किया। पूरी खबर पढ़ें…









