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30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक यौन अपराधी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शाबिर अहमद ब्रिटेन के कुख्यात ग्रूमिंग गैंग से जुड़ा हुआ है। उसे 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी पाया गया है। ग्रूमिंग गैंग ऐसे अपराधियों का गिरोह होता है, जो बच्चों को दोस्ती, प्यार, पैसे, उपहार या दूसरे लालच देकर अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण करता है। शाबिर मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है लेकिन उसके पास ब्रिटिश नागरिकता है। अब ब्रिटेन शाबिर को पाकिस्तान भेजना चाहता है, लेकिन इस्लामाबाद ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर शाबिर को रखने का दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों को वापस लेने, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर फिर से विचार कर सकता है। कौन है शाबिर अहमद?
73 वर्षीय शाबिर अहमद पाकिस्तान मूल का है। बच्चों के यौन शोषण मामले में उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 14 साल जेल में काट चुका है और हाल ही में रिहा हुआ है। ब्रिटेन उसकी नागरिकता समाप्त कर चुका है और अब उसे पाकिस्तान भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपना अधिकांश जीवन ब्रिटेन में बिताया, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी ब्रिटेन को ही उठानी चाहिए। वीजा प्रतिबंध की खबरों से भी नाराज पाकिस्तान
ब्रिटेन की कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान शाबिर अहमद को वापस लेने से इनकार करता है, तो ब्रिटिश सरकार पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर सख्ती कर सकती है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक सहायता घटाने की भी बात कही गई है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इन कदमों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है। डेली टेलीग्राफ से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि अगर वीजा और आर्थिक मदद को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। शाबिर अहमद केस की टाइमलाइन 2012: 22 साल की जेल की सजा
ब्रिटेन की अदालत ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग मामले में शाबिर अहमद को 30 बच्चों के यौन शोषण का दोषी ठहराया। अदालत ने उसे 22 साल कैद की सजा सुनाई। 2016: ब्रिटिश नागरिकता खत्म
दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी। जुलाई 2026: 14 साल बाद जेल से रिहाई
करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद शाबिर अहमद को सख्त शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। उस पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, तय इलाके से बाहर न जाने और कई अन्य प्रतिबंध लगाए गए। जुलाई 2026: ब्रिटेन ने पाकिस्तान भेजने की कोशिश शुरू की
रिहाई के बाद ब्रिटिश सरकार ने शाबिर अहमद को पाकिस्तान भेजने के लिए इस्लामाबाद से बातचीत शुरू की। जुलाई 2026: पाकिस्तान ने लेने से इनकार किया
पाकिस्तान ने कहा कि वह शाबिर अहमद को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उस पर दबाव बनाया गया, तो वह अवैध प्रवासियों की वापसी, सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर अपने रुख पर दोबारा विचार कर सकता है। ब्रिटेन-पाकिस्तान के बीच अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का समझौता ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 से एक समझौता है। इसके तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने की अनुमति नहीं है। इसमें मुख्य रूप से तीन तरह के लोग शामिल हैं: किसी व्यक्ति को पाकिस्तान वापस भेजने से पहले उसकी पहचान और नागरिकता की पुष्टि की जाती है। इसके बाद पाकिस्तान उसके लिए जरूरी यात्रा दस्तावेज जारी करता है और उसे वापस भेज दिया जाता है। इस समझौते में सिर्फ लोगों को वापस भेजना ही शामिल नहीं है। दोनों देश अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। समझौते के बाद भी पाकिस्तान शाबिर को क्यों नहीं अपना रहा? इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकता और कानून से जुड़े कई पेचीदा मुद्दे हैं। 1. पाकिस्तान का दावा- शाबिर उसका नागरिक नहीं ब्रिटेन ने शाबिर अहमद की ब्रिटिश नागरिकता पहले ही खत्म कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि शाबिर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता भी छोड़ दी थी। ऐसे में इस्लामाबाद का दावा है कि उसे पाकिस्तानी नागरिक नहीं मान सकता। 2. 2022 का समझौता हर मामले में लागू नहीं ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच 2022 में हुआ रिटर्न्स समझौते के तहत पाकिस्तान अपने उन नागरिकों को वापस लेता है, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। लेकिन किसी व्यक्ति को वापस भेजने से पहले उसकी राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करना जरूरी होता है। अगर पाकिस्तान यह मानने से इनकार कर दे कि संबंधित व्यक्ति उसका नागरिक है, तो उसे वापस भेजने की प्रक्रिया रुक सकती है। 3. ब्रिटेन का कानून भी अड़चन बना शाबिर अहमद का मामला दूसरे मामलों से अलग है। वह 1973 से पहले ब्रिटेन आ गया था। उस समय के कानून के तहत ऐसे कुछ लोगों को देश से बाहर भेजने पर रोक थी। इसलिए ब्रिटेन चाहकर भी उसे पाकिस्तान नहीं भेज सकता था। अब ब्रिटिश सरकार ने इस कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए कानून में बदलाव किया है। लेकिन इसके बाद भी शाबिर को पाकिस्तान तभी भेजा जा सकता है, जब पाकिस्तान उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। क्या 2022 का समझौता टूट सकता है? ब्रिटिश संसद में सरकार ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ मौजूदा रिटर्न्स व्यवस्था के तहत पिछले साल करीब 1,300 ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेजा गया था, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का अधिकार नहीं था। इनमें कई गंभीर अपराधों में दोषी लोग भी शामिल थे। यानी पाकिस्तान आम तौर पर अपने नागरिकों को वापस लेने से इनकार नहीं करता। शाबिर अहमद का मामला उसकी नागरिकता और कानूनी स्थिति की वजह से अलग माना जा रहा है।

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30 बच्चों से दुष्कर्म के दोषी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में विवाद:ब्रिटिश सरकार वापस PAK भेजने पर अड़ी, इस्लामाबाद ने दी चेतावनी

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