राजगढ़ में अनाज उठाव धीमा पड़ने पर कलेक्टर का अल्टीमेटम:दो दिन में काम पूरा नहीं हुआ तो होगी निलंबन की कार्रवाई

राजगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदी अब प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गई है। खरीदी केंद्रों पर अनाज का उठाव धीमा होने से बिगड़ते हालात को देखते हुए कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई जिला उपार्जन समिति की बैठक में उन्होंने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया कि अगले दो दिनों के भीतर लंबित उठाव हर हाल में पूरा किया जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने विशेष रूप से खुले खरीदी केंद्रों से कम उठाव पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने डीएम नॉन के खिलाफ निलंबन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और काम में ढिलाई करने वालों को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा। बैठक में राजगढ़, नरसिंहगढ़ और ब्यावरा क्षेत्रों में धीमी परिवहन व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। कलेक्टर ने ट्रकों की संख्या बढ़ाने और चालान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी स्थिति में अनाज खरीदी केंद्रों पर रुका नहीं रहना चाहिए। अनुशासनहीनता पर भी सख्ती बरती गई। बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर जिला विपणन अधिकारी और लीड बैंक मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अब कोई भी अधिकारी बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। कुल मिलाकर, प्रशासन ने यह साफ संकेत दे दिया है कि उपार्जन कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही पर सीधी कार्रवाई होगी। प्रशासन का मुख्य ध्यान समय पर उठाव, बेहतर परिवहन और किसानों को बिना किसी परेशानी के भुगतान सुनिश्चित करना है।
कितनी भी गर्मी हो नहीं लगेगी लूं! बस पीए ये पांच देसी ड्रिंक, शरीर में बनी रहेगी ताकत, फायदे भी कमाल

Last Updated:May 01, 2026, 16:19 IST Best Drink in Summer: अप्रैल के शुरुआत से ही भीषण गर्मी पड़ रही है. तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पंहुच गया है. ऐसे में मई और जून में लूं यानी हीट स्ट्रोक का असर और भी खतरनाक हो सकता है. डॉक्टर निलय जैन का कहना है कि लूं को हल्के में नहीं लेना चाहिए. लूं में पसीना नहीं आता, बीपी कम हो जाता है और मरीज कोमा में भी जा सकता है. ऐसे में इससे कई लोग अपनी जान तक गंवा देते हैं. बालाघाट. अप्रैल का महीना खत्म होने से पहले ही तापमान 43 डिग्री पार पहुंच चुका था. वहीं, अब मई का महीना भी शुरू हो चुका है. ऐसे में लूं के थपेड़ों के चलते दोपहर में निकलना काफी मुश्किल हो गया है. सुबह नौ बजे से ही सूर्य से निकलने वाली आग मानव को झुलसा देती है, जिससे शरीर बीमार पड़ सकता है. ऐसे में भरी गर्मी के दिनों में सेहत का ध्यान रखना भी मुश्किल हो सकता है. ऐसे में लोकल 18 ने बालाघाट जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर निलय जैन से बातचीत की, जानिए उन्होंने क्या टिप्स दी है. डॉक्टर निलय जैन का कहना है कि लूं को हल्के में नहीं लेना चाहिए. लूं में पसीना नहीं आता, बीपी कम हो जाता है और मरीज कोमा में भी जा सकता है. ऐसे में इससे कई लोग अपनी जान तक गंवा देते हैं. ऐसे में गर्मियों के सीजन में अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए. किन बातों का रखें ख्यालडॉक्टर निलय जैन का कहना है कि धूप में कम ही निकले. वहीं, जरूरत न हो तो 11 से 4 बजे के बीच नहीं निकलना चाहिए. गर्मी से बचने के लिए छाता लेकर निकलना चाहिए. वहीं, दिन भर जरूरत के हिसाब से पानी पीना चाहिए. सिर को ढक कर और मुंह को बांधकर निकलना चाहिए. ऐसे में आप लूं से बच सकते हैं. ये पेय पदार्थ लूं से बचाएंगेडॉक्टर निलय जैन ने बताया कि गर्मियों के दिनों में आम का पन्ना बनाकर पी सकते हैं. बेल का शरबत और सत्तू पी सकते हैं. इसके सेवन से शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक मिलती है. दोपहर के समय भुना जीरा मिलाकर पीना चाहिए. वहीं, कच्चे प्याज को भी खाने के साथ लेना चाहिए. अगर बाालाघाट के संदर्भ में बात करें, तो आप चावल के आटे की पेज बनाकर पी सकते हैं, जिससे आपको न सिर्फ ठंडक मिलेगी बल्कि ऊर्जा भी मिलेगी. वहीं, महुआ की राब भी लू से बचाने में कारगर है. About the Author Mohd Majid with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Balaghat,Madhya Pradesh
खंडवा में मजदूर दिवस पर MR संगठन का प्रदर्शन:बोलें- केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानून खत्म किए, चार नए लेबर कोड में परिवर्तित किया

1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर मप्र मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव (MR) खंडवा के सदस्यों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर श्रम कार्यालय पहुंचकर श्रम अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव उपस्थित रहे और श्रम कानूनों में किए गए बदलावों पर विरोध जताया। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व के 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर उन्हें चार नए लेबर कोड में परिवर्तित किया गया है। उनका आरोप है कि इन नए श्रम कोड्स के लागू होने से मजदूरों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं और शोषण की संभावनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से नौकरी की सुरक्षा, कार्य समय, वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ज्ञापन के माध्यम से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स ने सरकार से मांग की कि श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए इन लेबर कोड्स पर पुनर्विचार किया जाए और मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने एकजुट होकर मजदूर हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इस दौरान यूनिट के अध्यक्ष अनूप फुलमाली, सचिव नवीन आरतानी, वरिष्ठ सदस्य देवेंद्रसिंह सोलंकी, सह सचिव अंकित महेश्वरी, उपाध्यक्ष गुलनाज सिद्दीकी, गौरव सोनी, अंजलि महाजन, सुनील गोस्वामी, शक्ति सिंह सोलंकी, अंकित शहापुरकर, मनीष खेतवास, ऋषदीप और चेतन राठौर सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
सत्तू की चटनी रेसिपी: गर्मी में पेट को कूल-कूल रखेगी सत्तू की चटनी, खाने का स्वाद भी हो जाएगा दोगुना; विधि नोट करें

सामग्री: 4 बड़े मसाले का सत्तू, प्याज, 3-4 कलियां लहसुन, 1-2 हरी मिर्च, 1 मसाले का रस, 1 छोटा मसाला मसाले का तेल, हरा धनिया, नमक का स्वाद, ठंडा पानी छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले एक बाउल में सत्तू डाल लें। इसमें इलेक्ट्रॉनिक कटा प्याज, लहसुन और हरी मिर्च डाली जाती है। छवि: फ्रीपिक अब इसमें नमक, नींबू का रस और सरसों का तेल डालें। धीरे-धीरे-धीरे-धीरे थोड़ा ठंडा पानी डाले इसे अच्छे से मिक्स करें। ध्यान रखें कि मैसाचुसेट्स प्लास्टिक न हो, हल्की गाडी ही जगह। छवि: एआई अंतिम में ऊपर से हरा धनिया स्ट्रक्चर अच्छा मिला लें। आपका स्वादिष्ट और अनोखा-ठंडी सत्तू की चटनी तैयार है। सत्तू शरीर को अंदर से ठंडा करता है। पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और पेट की गर्मी को कम करता है। छवि: एआई इसमें प्रोटीन और प्रचुर मात्रा में मात्रा होती है। यह खाना जल्दी बन जाता है और लंबे समय तक पेट भरा रहता है। सत्तू की चटनी को आप रोटी, पराठा, लिट्टी या चावल के साथ खा सकते हैं. छवि: फ्रीपिक गर्मी में ये आपके खाने का स्वाद डबल कर देवी। अगर आप रोज-रोज एक जैसा खाना खा गए हैं, तो यह आसान और स्वादिष्ट सत्तू आपकी थाली में नया स्वाद लेकर आएगा। छवि: एआई
मंदसौर में तूफान-कार भिड़ी, दो गंभीर:छह घायल, टक्कर के बाद वाहन पलटा, कार सवार फरार

मंदसौर जिले के अचेरी के पास शुक्रवार दोपहर सड़क हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि छह अन्य को मामूली चोटें आईं। यह दुर्घटना प्रतापगढ़ से मंदसौर आ रहे एक तूफान वाहन और सामने से आ रही एक कार के बीच टक्कर से हुई। जानकारी के अनुसार, राजस्थान के प्रतापगढ़ निवासी 65 वर्षीय लक्ष्मण कुमावत अपनी 60 वर्षीय पत्नी मांगी बाई के साथ तूफान वाहन (MP44 TA 0399) में सवार होकर इलाज के लिए मंदसौर आ रहे थे। अचेरी के समीप उनकी गाड़ी की सामने से आ रही एक कार से जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि तूफान वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। वहीं, फोर्ड फ्रीस्टाइल कार (MP09 WB 7830) सड़क से नीचे उतर गई। दुर्घटना के तुरंत बाद कार सवार मौके से फरार हो गए। हादसे में लक्ष्मण कुमावत को हाथ, पैर और कमर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं, जबकि उनकी पत्नी मांगी बाई की पसलियों और हाथ में चोट लगी। दोनों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद लक्ष्मण की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें उदयपुर रेफर कर दिया गया है। तुफान में आठ लोग सवार थे तूफान वाहन में कुल आठ लोग सवार थे, जिनमें से छह लोगों को मामूली चोटें आई हैं। इनमें कमलाबाई (60 वर्ष), पेपा बाई (70 वर्ष), नरबादी बाई (30 वर्ष), कशिश (14 वर्ष, पिता कन्हैया लाल), सौम्या (6 वर्ष, पिता राकेश) और मानव (11 वर्ष, पिता मुनेश) शामिल हैं। सभी मामूली रूप से घायल लोगों का उपचार जिला अस्पताल में जारी है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल रिजल्ट से पहले फुल एक्शन में ये बीजेपी, चुनावी पोल में जीत का अनुमान के बाद तैयार हुआ मास्टर प्लान

पश्चिम बंगाल में मातृभाषा से पहले बीजेपी पूरी तरह से एक्शन मूड में आ गई है। 4 मई को वाली पार्टी से पहले, 2 मई को कोलकाता में पार्टी की एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उन प्रवासी नेताओं को भी बुलाया गया था, जिनमें पश्चिम बंगाल चुनाव विधानसभा और जोन में प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी. इन सभी नेताओं को मातृभाषा के दिन अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। इस उच्चस्तरीय विधानसभा में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बैसाही और चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव शामिल होंगे. पश्चिम बंगाल में वोटिंग के बाद ज्यादातर एक्जिट पोल बीजेपी की सरकार बनी हुई हैं। अब बीजेपी का पूरा फोकस फोकस पर है। प्रतिपक्षी भाजपा में लगातार बैठकों का दौर जारी है। बंगाल के प्रभारी सुनील बैसाखी और भूपेन्द्र यादव को पश्चिम बंगाल में ही रखा गया है। पहली वोटिंग के बाद 30 अप्रैल को सुनील बैसाखी और भूपेंद्र यादव ने कोलकाता में पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक कर वोटिंग करके ग्राउंड रिपोर्ट ली। इसके बाद 1 मई को दोनों ही नेताओं ने सिलीगुड़ी में पार्टी के स्थानीय नेताओं और काउंटी एजेंटों के साथ बैठक कर काउंटी केंद्र पर एसोसिएशन के वरिष्ठों की जानकारी दी। उसके बाद 2 मई को पार्टी की ओर से इन्वेस्टमेंट डॉक्युमेंट पर प्रवासी नेताओं को कोलकाता बुलाया गया है। उनके साथ भी बैठक की जाएगी और अपने-अपने विभाग वाले क्षेत्र में स्नातक स्तर की पढ़ाई को बनाए रखने के लिए पार्टी की ओर से निर्देश दिए जाएंगे। यह भी पढ़ें:- एग्जिट पोल 2026: बीजेपी का तूफान, सर्वे में ममता बनर्जी के साथ हो ‘खेला’ इस बैठक का फोकस बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी स्तर पर कोई गलती न हो। बूथ स्तर से लेकर बैंकिंग सेंटर तक, हर व्यवस्था की शुरुआत से समीक्षा की जाएगी। किस केंद्र पर कौन सा एजेंट रहेगा, एजेंटों की भूमिका क्या होगी और हर राउंड की निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाएगी, इस बैठक में इस पर अंतिम रणनीति तय होगी। ये सभी नेता अपने-अपने क्षेत्र की जमीनी रिपोर्ट और आंकड़े भी साझा करेंगे, ताकि जमीनी स्थिति का आकलन किया जा सके। यह भी पढ़ें:- ‘बंगाल में बीजेपी सत्ता में आई तो…’ बांग्लादेश की संसद में विधानसभा चुनाव को लेकर क्या बोला बांग्लादेशी अल्पसंख्यक, मचा हंगामा बिहार, बंगाल के कई क्वार्टर फाइनल मुकाबले बेहद करीबी माने जा रहे हैं। एक ओर ओर बिल्डर अपनी इंजीनियरिंग की दम वापसी पर दावा कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा अपनी ग्राउंड रिपोर्ट और एलेक्टिट पोल्स के उत्साह से उत्साहित होकर अपनी जीत का दावा कर रही है। ऐसे में मातृभाषा के दिन हर राउंड, हर टेबल और हर आंकड़े पर बिजनेस की पैनी नजर रहेगी। 2 मई की इस बैठक में सिर्फ बातचीत की समीक्षा नहीं की गई, बल्कि 4 मई की अंतिम जंग के लिए बीजेपी की अंतिम नींव बाजार में बनी हुई है। (टैग्सटूट्रांसलेट)विधानसभा चुनाव 2026(टी)बीजेपी(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)बंगाल चुनाव हिंसा(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम
2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

भारतीय लोन मार्केट का चेहरा बदल रहा है। पहली बार लोन लेने वालों (न्यू टू क्रेडिट) की दौड़ में महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे रही हैं। क्रेडिट एजेंसी क्रिफ हाई मार्क की ‘ब्रिजिंग द गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 12 माह में महिलाओं की हिस्सेदारी 41% हो गई, जो फरवरी 2022 तक 33% थी। यानी 10 में से 4 नई कर्जदार महिलाएं हैं। खास बात यह है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन बढ़ने के बीच यूपी, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाएं उद्यमी बनने के लिए बिजनेस लोन ले रही हैं, वहीं, दक्षिण में गोल्ड लोन का दबदबा है। पहले लोन में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का दबदबा पहली बार लोन लेने वालों में से 32% वॉशिंग मशीन, फ्रिज या टीवी खरीदने के लिए लोन लेते हैं। यही एंट्री पॉइंट बनता है। और एक बार जो रिश्ता बनता है, वह आगे भी बना रहता है। गोल्ड लोन लेने वालों में से 84.5% अगला लोन भी गोल्ड पर ही लेते हैं। पहली बार लोन लेन वाले लोगों की प्राथमिकता ? कंज्यूमर लोन – 31.6% गोल्ड लोन – 20.2% दो पहिया – 16.9% पर्सनल लोन -11.0% बिजनेस लोन – 9.5% एनबीएफसी नए लोगों को लोन का बड़ा सहारा आमतौर पर माना जाता है कि वित्तीय समावेशन का बोझ सरकारी बैंकों पर होता है, लेकिन डेटा इसके विपरीत कहानी कह रहा है। बैंक पहली बार कर्ज लेने वालों को लोन देने से बचते हैं। – एनबीएफसी का हिस्सा 50% से बढ़कर 61% हो गया – सरकारी बैंकों का हिस्सा 16% से घटकर 13.6% – निजी बैंकों का 22% से घटकर 15% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा महिलाओं की पसंद अब बदल रही है। वे केवल गहने गिरवी रखकर लोन नहीं ले रहीं, बल्कि अपना काम शुरू करने के लिए बिजनेस लोन भी ले रही हैं। शीर्ष 10 में से 5 राज्यों में महिलाओं के बीच बिजनेस लोन प्रमुख प्रोडक्ट बन गया है। महिलाओं की पहली पसंद 1. कंज्यूमर ड्यूरेबल 25.2% 2. गोल्ड लोन 21.8% 3. बिजनेस लोन 17.9% 4. पर्सनल लोन 8.3% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा है। दक्षिण भारत की महिलाएं गोल्ड लोन ज्यादा ले रही हैं, तो उत्तर और पूर्वी भारत (यूपी, बंगाल, बिहार) की महिलाएं बिजनेस लोन में आगे हैं। नए कर्जदार उम्मीद से ज्यादा सुरक्षित साबित हो रहे। इनकी सफलता दर बेहतर है। 67% ग्राहक एक साल में सुरक्षित रिस्क कैटेगरी में शामिल हुए। युवा – दोपहिया और पर्सनल लोन से शुरुआत 25 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए ‘मोबिलिटी’ और ‘लिक्विडिटी’ सबसे अहम है, यही वजह है कि टू-व्हीलर और पर्सनल लोन सेगमेंट में इनका दबदबा है। वहीं, 26 से 35 साल के युवा कंज्यूमर ड्यूरेबल, गोल्ड लोन और बिजनेस लोन में दबदबा रखते हैं। 25 साल से कम के युवा दो पहिया लोग-33.1% पर्सनल लोन 50.3% 26-35 साल के युवा सीडी 35.4% गोल्ड लोन 29.4% बिजनेस लोन 30.7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, उस प्रोडक्ट में उस आयु वर्ग (12 माह, फरवरी 26 को खत्म) – कंज्यूमर ड्यूरेबल: 80.4% ग्राहकों का रिस्क प्रोफाइल बेहतर हुआ। – टू-व्हीलर: 75.3% ग्राहकों ने दिखाया बेहतरीन अनुशासन। – दो पहिया लोन में छोटे-मझोले शहरों की हिस्सेदारी 71 फीसदी और कंज्यूमेर ड्यूरेबल लोन में करीब 67 फीसदी है।
2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

भारतीय लोन मार्केट का चेहरा बदल रहा है। पहली बार लोन लेने वालों (न्यू टू क्रेडिट) की दौड़ में महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे रही हैं। क्रेडिट एजेंसी क्रिफ हाई मार्क की ‘ब्रिजिंग द गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 12 माह में महिलाओं की हिस्सेदारी 41% हो गई, जो फरवरी 2022 तक 33% थी। यानी 10 में से 4 नई कर्जदार महिलाएं हैं। खास बात यह है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन बढ़ने के बीच यूपी, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाएं उद्यमी बनने के लिए बिजनेस लोन ले रही हैं, वहीं, दक्षिण में गोल्ड लोन का दबदबा है। पहले लोन में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का दबदबा पहली बार लोन लेने वालों में से 32% वॉशिंग मशीन, फ्रिज या टीवी खरीदने के लिए लोन लेते हैं। यही एंट्री पॉइंट बनता है। और एक बार जो रिश्ता बनता है, वह आगे भी बना रहता है। गोल्ड लोन लेने वालों में से 84.5% अगला लोन भी गोल्ड पर ही लेते हैं। पहली बार लोन लेन वाले लोगों की प्राथमिकता ? कंज्यूमर लोन – 31.6% गोल्ड लोन – 20.2% दो पहिया – 16.9% पर्सनल लोन -11.0% बिजनेस लोन – 9.5% एनबीएफसी नए लोगों को लोन का बड़ा सहारा आमतौर पर माना जाता है कि वित्तीय समावेशन का बोझ सरकारी बैंकों पर होता है, लेकिन डेटा इसके विपरीत कहानी कह रहा है। बैंक पहली बार कर्ज लेने वालों को लोन देने से बचते हैं। – एनबीएफसी का हिस्सा 50% से बढ़कर 61% हो गया – सरकारी बैंकों का हिस्सा 16% से घटकर 13.6% – निजी बैंकों का 22% से घटकर 15% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा महिलाओं की पसंद अब बदल रही है। वे केवल गहने गिरवी रखकर लोन नहीं ले रहीं, बल्कि अपना काम शुरू करने के लिए बिजनेस लोन भी ले रही हैं। शीर्ष 10 में से 5 राज्यों में महिलाओं के बीच बिजनेस लोन प्रमुख प्रोडक्ट बन गया है। महिलाओं की पहली पसंद 1. कंज्यूमर ड्यूरेबल 25.2% 2. गोल्ड लोन 21.8% 3. बिजनेस लोन 17.9% 4. पर्सनल लोन 8.3% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा है। दक्षिण भारत की महिलाएं गोल्ड लोन ज्यादा ले रही हैं, तो उत्तर और पूर्वी भारत (यूपी, बंगाल, बिहार) की महिलाएं बिजनेस लोन में आगे हैं। नए कर्जदार उम्मीद से ज्यादा सुरक्षित साबित हो रहे। इनकी सफलता दर बेहतर है। 67% ग्राहक एक साल में सुरक्षित रिस्क कैटेगरी में शामिल हुए। युवा – दोपहिया और पर्सनल लोन से शुरुआत 25 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए ‘मोबिलिटी’ और ‘लिक्विडिटी’ सबसे अहम है, यही वजह है कि टू-व्हीलर और पर्सनल लोन सेगमेंट में इनका दबदबा है। वहीं, 26 से 35 साल के युवा कंज्यूमर ड्यूरेबल, गोल्ड लोन और बिजनेस लोन में दबदबा रखते हैं। 25 साल से कम के युवा दो पहिया लोग-33.1% पर्सनल लोन 50.3% 26-35 साल के युवा सीडी 35.4% गोल्ड लोन 29.4% बिजनेस लोन 30.7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, उस प्रोडक्ट में उस आयु वर्ग (12 माह, फरवरी 26 को खत्म) – कंज्यूमर ड्यूरेबल: 80.4% ग्राहकों का रिस्क प्रोफाइल बेहतर हुआ। – टू-व्हीलर: 75.3% ग्राहकों ने दिखाया बेहतरीन अनुशासन। – दो पहिया लोन में छोटे-मझोले शहरों की हिस्सेदारी 71 फीसदी और कंज्यूमेर ड्यूरेबल लोन में करीब 67 फीसदी है।
डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर की पुण्यतिथि पर नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर:धार में दीनदयाल रसोई में जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया

धार में स्वर्गीय डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर की पुण्यतिथि और अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सेवा और समर्पण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया और दीनदयाल रसोई योजना के तहत जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया। डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर सेवालय ट्रस्ट द्वारा हटवाड़ा स्थित सेवालय क्लीनिक में नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के चिकित्सक डॉ. मुकेश चौहान ने 55 मरीजों का परीक्षण कर उपचार दिया। शिविर में मरीजों की बीपी और शुगर की जांच भी नि:शुल्क की गई। एडवोकेट सुहेल निसार के सहयोग से दीनदयाल रसोई योजना में तिथि भोज आयोजित किया गया। ट्रस्ट सदस्यों ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित कर जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया। कार्यक्रम की शुरुआत में ट्रस्ट संरक्षक डॉ. शरद विजयवर्गीय, एडवोकेट सुहेल निसार और अन्य अतिथियों ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। वक्ताओं ने उनके सेवा कार्यों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने जीवनभर गरीब और जरूरतमंदों की सेवा की। कोरोना काल में भी उन्होंने निस्वार्थ भाव से उपचार किया और इसी दौरान संक्रमित होकर प्राण त्याग दिए। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता, ट्रस्ट सदस्य और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर के सेवा भाव को याद किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन ईश्वर सिंह ठाकुर ने किया, जबकि आभार अजय सिंह ठाकुर ने व्यक्त किया। आयोजकों ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा भविष्य में भी ऐसे जनहित कार्य जारी रखे जाएंगे।
कुनिका सदानंद ने दरगाह वाले वीडियो पर रिएक्ट किया:भागवत कथा में जाने का वीडियो शेयर कर कहा- मजार, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे सभी जगह जाती हूं

टीवी शो बिग बॉस 19 की कंटेस्टेंट और एक्ट्रेस कुनिका सदानंद ने हाल ही में वायरल हुए उनके दरगाह पर चादर चढ़ाने वाले एक वीडियो पर रिएक्शन दिया। दरअसल, कुनिका सदानंद की एक पोस्ट में एक यूजर ने X पर कमेंट करते हुए एक्ट्रेस का मजार में चादर चढ़ाने का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि मजार जाने वालों को मंदिर जाने वालों से दिक्कत होगी… तुम बस एक गुलाम हो… हम तुम्हारा दर्द समझ सकते हैं… दूसरा दर्द ये है कि कुमार सानू बीजेपी में शामिल हो गए। जवाब में कुनिका ने वीडियो शेयर किया इसके जवाब में कुनिका सदानंद ने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में वह भागवत कथा में शामिल होती और लोगों को खाना परोसती नजर आईं। साथ ही उन्होंने लिखा कि मैं मजार भी जाती हूं, मंदिर भी जाती हूं, चर्च और गुरुद्वारे भी जाती हूं और हां, भागवत कथा भी सुनती हूं।। इससे पहले कुनिका सदानंद ने पीएम मोदी के वीडियो पर रिएक्ट करते हुए कहा, यह बहुत ही बेकार बात है। मुझे शर्म आती है कि मेरे प्रधानमंत्री इन सब फालतू चीजों में व्यस्त हैं। मणिपुर के आसपास फुटबॉल खेलने का समय है, लेकिन मणिपुर जाने का समय नहीं है। उन्होंने आगे लिखा था, आप क्यों डर रहे हैं, प्रधानमंत्री जी? अब आपके पास अपना मुख्यमंत्री है, वो आपकी सुरक्षा कर सकता है। ओह, मैं भूल गई… अगर आप जाएंगे तो आपसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछे जाएंगे, जिनका शायद आपके पास जवाब नहीं होगा। शर्म की बात है सर… क्या यही बदलाव का वादा आपने 12 साल पहले किया था?








