Wednesday, 16 Sep 2026 | 04:55 PM

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ईरान के डर से ट्रम्प ने सीक्रेट फ्लाइट ली थी:तुर्किये में एयरफोर्स वन में बैठने का दिखावा किया, फिर सामान वाली गाड़ी दूसरे प्लेन में पहुंचे

ईरान के डर से ट्रम्प ने सीक्रेट फ्लाइट ली थी:तुर्किये में एयरफोर्स वन में बैठने का दिखावा किया, फिर सामान वाली गाड़ी दूसरे प्लेन में पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन जाने के लिए सीक्रेट रूप से एक छोटे मिलिट्री विमान का इस्तेमाल किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से ट्रम्प की हत्या की विश्वसनीय धमकी मिलने के बाद उनकी यात्रा का पूरा प्लान बदला गया था। तुर्किये की राजधानी अंकारा से निकलते समय ट्रम्प कैमरों के सामने पुराने एयरफोर्स वन में सवार हुए। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली कैटरिंग गाड़ी से चुपचाप छोटे मिलिट्री विमान C-32A तक पहुंचाया गया। पहले बड़े विमान में बैठे, फिर चुपचाप बाहर निकले ट्रम्प 8 जुलाई को नाटो समिट में शामिल होने के लिए अंकारा में थे। वे तुर्किये नए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे, जो कतर के शाही परिवार ने अमेरिका को दिया है। वापसी के समय ट्रम्प पुराने, हल्के नीले रंग के एयरफोर्स वन की सीढ़ियां चढ़ते हुए कैमरों में दिखाई दिए। उस समय यही माना गया कि वे इसी विमान से ब्रिटेन जाएंगे। ट्रम्प ने खुद कहा था कि वे नए विमान की जगह पुराने एयरफोर्स वन से ब्रिटेन जाएंगे। उन्होंने इसे “पुराने समय की याद में” उड़ान बताई थी। नया विमान भी ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस जाना था, जहां अमेरिकी सैनिक उसे देख सकते थे। लेकिन पुराने विमान में बैठने के बाद ट्रम्प उसी से ब्रिटेन नहीं गए। सामान वाली गाड़ी से दूसरे विमान तक पहुंचाया वॉशिंगटन पोस्ट ने एक अमेरिकी अधिकारी और अपनी जांच में मिली अन्य सामग्री के हवाले से बताया कि ट्रम्प के पुराने एयरफोर्स वन में सवार होने के कुछ देर बाद एक कैटरिंग गाड़ी वहां से निकली। इस गाड़ी के जरिए ट्रम्प को एयरपोर्ट पर खड़े छोटे C-32A विमान तक पहुंचाया गया। यह बोइंग 757 का मिलिट्री वर्जन है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में सामने आए वीडियो में भी कैटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। इसके बाद C-32A ट्रम्प को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प विमान में नहीं हैं पुराने एयरफोर्स वन में यात्रा कर रहे पत्रकारों को लगा कि राष्ट्रपति उनके साथ ही विमान में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। इस विमान में मौजूद पत्रकारों को उड़ान के दौरान प्रेस केबिन की खिड़कियों के शेड बंद रखने को कहा गया। ऐसी सावधानी आमतौर पर युद्ध वाले इलाकों में उड़ान के दौरान बरती जाती है। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने जवाब दिया, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे।” ट्रम्प वाला विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर C-32A रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया, जिसमें पत्रकार सवार थे। यह साफ नहीं है कि ट्रम्प C-32A से उतरने के बाद पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। हालांकि, ट्रम्प के साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल के मुताबिक, वे रात 10:56 बजे पुराने एयरफोर्स वन की सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। उन्होंने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की और कतर से मिले नए विमान की तरफ चले गए। ईरान से खतरे के कारण बदला गया था पूरा प्लान वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रम्प को निशाना बनाए जाने की विश्वसनीय धमकी के बाद उनकी तुर्किये से वापसी को सीक्रेट रखा गया। अमेरिकी मीडिया में पहले भी रिपोर्ट आई थी कि ईरान से जुड़े खतरे के कारण ट्रम्प ने तुर्किये से कतर के नए विमान में वापस जाने के बजाय पुराने एयरफोर्स वन का इस्तेमाल किया। यानी जिस विमान में ट्रम्प को जाते हुए दिखाया गया, वह असल में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल हुआ था। ट्रम्प को दूसरे विमान से ब्रिटेन भेजा गया। ऐसा तरीका पहले भी इस्तेमाल हो चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए दूसरे विमान का इस्तेमाल करने का ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है। साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब क्लिंटन एक बिना पहचान वाले सरकारी विमान से पाकिस्तान पहुंचे थे, जबकि उनका आधिकारिक एयरफोर्स वन डिकॉय के तौर पर भेजा गया था। कतर का नया विमान भी सवालों में रहा ट्रम्प जिस नए बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, उसे कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3Harris Technologies ने इसे राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। इसके कुछ दिन बाद यह उन्हें लेकर पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचा। नए विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में मौजूद कुछ सुरक्षा सुविधाएं नए विमान में नहीं हैं या अलग तरह से काम करती हैं। इनमें मिसाइल हमले से बचाने वाली सुरक्षा भी शामिल है। व्हाइट हाउस ने कहा- राष्ट्रपति की सुरक्षा सबसे जरूरी सीक्रेट उड़ान की खबर सामने आने के बाद व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने नए विमान की सुरक्षा का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नए एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। चेउंग ने कहा, “अमेरिका के कई दुश्मन हैं जो राष्ट्रपति को निशाना बनाना चाहते हैं। इन खतरों से निपटने के लिए हम अपने पास मौजूद हर तरीके का इस्तेमाल करते हैं।” पेंटागन ने इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

ईरान के डर से ट्रम्प ने सीक्रेट फ्लाइट ली थी:तुर्किये में एयरफोर्स वन में बैठने का दिखावा किया, फिर सामान वाली गाड़ी दूसरे प्लेन में पहुंचे

ईरान के डर से ट्रम्प ने सीक्रेट फ्लाइट ली थी:तुर्किये में एयरफोर्स वन में बैठने का दिखावा किया, फिर सामान वाली गाड़ी दूसरे प्लेन में पहुंचे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन जाने के लिए सीक्रेट रूप से एक छोटे मिलिट्री विमान का इस्तेमाल किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से ट्रम्प की हत्या की धमकी मिलने के बाद उनकी यात्रा का पूरा प्लान बदला गया था। तुर्किये की राजधानी अंकारा से निकलते समय ट्रम्प कैमरों के सामने पुराने एयरफोर्स वन में सवार हुए। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली कैटरिंग गाड़ी से चुपचाप छोटे मिलिट्री विमान C-32A तक पहुंचाया गया। पहले बड़े विमान में बैठे, फिर चुपचाप बाहर निकले ट्रम्प 8 जुलाई को नाटो समिट में शामिल होने के लिए अंकारा में थे। वे तुर्किये नए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे, जो कतर के शाही परिवार ने अमेरिका को दिया है। वापसी के समय ट्रम्प पुराने, हल्के नीले रंग के एयरफोर्स वन की सीढ़ियां चढ़ते हुए कैमरों में दिखाई दिए। उस समय यही माना गया कि वे इसी विमान से ब्रिटेन जाएंगे। ट्रम्प ने खुद कहा था कि वे नए विमान की जगह पुराने एयरफोर्स वन से ब्रिटेन जाएंगे। नया विमान भी ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस जाना था, जहां अमेरिकी सैनिक उसे देख सकते थे। लेकिन पुराने विमान में बैठने के बाद ट्रम्प उसी से ब्रिटेन नहीं गए। सामान वाली गाड़ी से दूसरे विमान तक पहुंचाया वॉशिंगटन पोस्ट ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि ट्रम्प के पुराने एयरफोर्स वन में सवार होने के कुछ देर बाद एक कैटरिंग गाड़ी वहां से निकली। इस गाड़ी के जरिए ट्रम्प को एयरपोर्ट पर खड़े छोटे C-32A विमान तक पहुंचाया गया। यह बोइंग 757 का मिलिट्री वर्जन है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में सामने आए वीडियो में भी कैटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। इसके बाद C-32A ट्रम्प को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प विमान में नहीं हैं पुराने एयरफोर्स वन में यात्रा कर रहे पत्रकारों को लगा कि राष्ट्रपति उनके साथ ही विमान में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। इस विमान में मौजूद पत्रकारों को उड़ान के दौरान प्रेस केबिन की खिड़कियों के शेड बंद रखने को कहा गया। ऐसी सावधानी आमतौर पर युद्ध वाले इलाकों में उड़ान के दौरान बरती जाती है। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने जवाब दिया, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे।” ट्रम्प वाला विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर C-32A रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया, जिसमें पत्रकार सवार थे। यह साफ नहीं है कि ट्रम्प C-32A से उतरने के बाद पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। हालांकि, ट्रम्प के साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल के मुताबिक, वे रात 10:56 बजे पुराने एयरफोर्स वन की सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। उन्होंने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की और कतर से मिले नए विमान की तरफ चले गए। ईरान से खतरे के कारण बदला गया था पूरा प्लान वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रम्प को निशाना बनाए जाने की विश्वसनीय धमकी के बाद उनकी तुर्किये से वापसी को सीक्रेट रखा गया। अमेरिकी मीडिया में पहले भी रिपोर्ट आई थी कि ईरान से जुड़े खतरे के कारण ट्रम्प ने तुर्किये से कतर के नए विमान में वापस जाने के बजाय पुराने एयरफोर्स वन का इस्तेमाल किया। यानी जिस विमान में ट्रम्प को जाते हुए दिखाया गया, वह असल में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल हुआ था। ट्रम्प को दूसरे विमान से ब्रिटेन भेजा गया। ऐसा तरीका पहले भी इस्तेमाल हो चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए दूसरे विमान का इस्तेमाल करने का ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है। साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब क्लिंटन एक बिना पहचान वाले सरकारी विमान से पाकिस्तान पहुंचे थे, जबकि उनका आधिकारिक एयरफोर्स वन डिकॉय के तौर पर भेजा गया था। कतर का नया विमान भी सवालों में रहा ट्रम्प जिस नए बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, उसे कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3Harris Technologies ने इसे राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। इसके कुछ दिन बाद यह उन्हें लेकर पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचा। नए विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में मौजूद कुछ सुरक्षा सुविधाएं नए विमान में नहीं हैं या अलग तरह से काम करती हैं। इनमें मिसाइल हमले से बचाने वाली सुरक्षा भी शामिल है। व्हाइट हाउस ने कहा- राष्ट्रपति की सुरक्षा सबसे जरूरी सीक्रेट उड़ान की खबर सामने आने के बाद व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने नए विमान की सुरक्षा का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नए एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सुरक्षा के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। चेउंग ने कहा, “अमेरिका के कई दुश्मन हैं जो राष्ट्रपति को निशाना बनाना चाहते हैं। इन खतरों से निपटने के लिए हम अपने पास मौजूद हर तरीके का इस्तेमाल करते हैं।” पेंटागन ने इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

कोलंबिया में भूकंप से 132 लोगों की मौत, 570 घायल:86 इमारतें गिरीं, 1500 से ज्यादा घरों को नुकसान; सात एयरपोर्ट पर काम बंद

कोलंबिया में भूकंप से 132 लोगों की मौत, 570 घायल:86 इमारतें गिरीं, 1500 से ज्यादा घरों को नुकसान; सात एयरपोर्ट पर काम बंद

कोलंबिया में सोमवार को 7.4 तीव्रता के भूकंप सेअब तक 132 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा 570 लोगों के घायल होने की खबर है। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में 86 इमारतें ढह गईं, जबकि 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है। इनमें 37 पूरी तरह तबाह हो गईं। 18 स्वास्थ्य केंद्रों और 52 स्कूलों को भी नुकसान हुआ है। इसके अलावा 7 एयरपोर्ट पर काम रोक दिया गया है। पांच शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। राष्ट्रपति ने इमरजेंसी कमेटी की बैठक बुलाकर राहत और बचाव अभियान की निगरानी शुरू कर दी है। परेरा में सबसे ज्यादा मौतें परेरा शहर में अकेले 60 लोगों की मौत हुई है। करीब 5 लाख की आबादी वाला यह शहर भूकंप के केंद्र से 64 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। राजधानी बोगोटा समेत कई शहरों में भी तेज झटके महसूस किए गए। एहतियात के तौर पर लोग इमारतों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। चोको और रिसाराल्डा में भारी नुकसान अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप सोमवार सुबह करीब 7:34 बजे आया। इसका केंद्र चोको इलाके में सैन जोसे डेल पालमार के पास था। भूकंप की गहराई 107 किलोमीटर थी। चोको की राजधानी क्विब्दो में भी कई लोग घायल हुए हैं और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने आफ्टरशॉक्स की आशंका जताई है। बोगोटा से 100 रेस्क्यूकर्मी भेजे जाएंगे बोगोटा के मेयर ने प्रभावित इलाकों के लिए 6 कलेक्शन सेंटर बनाए हैं। यहां पानी, कंबल, पैक्ड खाना, हाइजीन सामान और फर्स्ट-एड किट जमा की जा रही हैं। प्रभावित शहरों में राहत और बचाव अभियान के लिए बोगोटा से 100 रेस्क्यूकर्मियों को भेजने की तैयारी है। कोलंबिया में ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं कोलंबिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यहां हर साल हजार से ज्यादा छोटे-बड़े भूकंप आते हैं। कोलंबिया में बार-बार भूकंप आने की सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश ‘रिंग ऑफ फायर’ नाम के भूकंप और ज्वालामुखी वाले क्षेत्र में आता है। यहां नाजका, कोकोस और दक्षिण अमेरिकी जैसी कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। इनमें से एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती रहती है। इसी वजह से जमीन के अंदर लगातार हलचल होती रहती है, जिससे अक्सर तेज भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।

कोलंबिया में भूकंप से 132 लोगों की मौत, 570 घायल:86 इमारतें गिरीं, 1500 से ज्यादा घरों को नुकसान; सात एयरपोर्ट पर काम बंद

कोलंबिया में भूकंप से 132 लोगों की मौत, 570 घायल:86 इमारतें गिरीं, 1500 से ज्यादा घरों को नुकसान; सात एयरपोर्ट पर काम बंद

साउथ अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार रात आए 7.4 तीव्रता के भूकंप से अब तक 132 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा 570 लोगों के घायल होने की खबर है। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में 86 इमारतें ढह गईं, जबकि 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है। 18 स्वास्थ्य केंद्रों और 52 स्कूलों को भी नुकसान हुआ है। इसके अलावा 7 एयरपोर्ट पर काम रोक दिया गया है। पांच शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। राष्ट्रपति ने इमरजेंसी कमेटी की बैठक बुलाकर राहत और बचाव अभियान की निगरानी शुरू कर दी है। भूकंप से जुड़ी 10 फोटोज परेरा में सबसे ज्यादा मौतें परेरा शहर में अकेले 60 लोगों की मौत हुई है। करीब 5 लाख की आबादी वाला यह शहर भूकंप के केंद्र से 64 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। राजधानी बोगोटा समेत कई शहरों में भी तेज झटके महसूस किए गए। एहतियात के तौर पर लोग इमारतों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। चोको और रिसाराल्डा में भारी नुकसान अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप सोमवार सुबह करीब 7:34 बजे आया। इसका केंद्र चोको इलाके में सैन जोसे डेल पालमार के पास था। भूकंप की गहराई 107 किलोमीटर थी। बोगोटा से 100 रेस्क्यूकर्मी भेजे जाएंगे बोगोटा के मेयर ने प्रभावित इलाकों के लिए 6 कलेक्शन सेंटर बनाए हैं। यहां पानी, कंबल, पैक्ड खाना, हाइजीन सामान और फर्स्ट-एड किट जमा की जा रही हैं। प्रभावित शहरों में राहत और बचाव अभियान के लिए बोगोटा से 100 रेस्क्यूकर्मियों को भेजने की तैयारी है। कोलंबिया में ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं कोलंबिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। यहां हर साल हजार से ज्यादा छोटे-बड़े भूकंप आते हैं। कोलंबिया में बार-बार भूकंप आने की सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश ‘रिंग ऑफ फायर’ नाम के भूकंप और ज्वालामुखी वाले क्षेत्र में आता है। यहां नाजका, कोकोस और दक्षिण अमेरिकी जैसी कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। इनमें से एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती रहती है। इसी वजह से जमीन के अंदर लगातार हलचल होती रहती है, जिससे अक्सर तेज भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।

कनाडा में पंजाबी युवक को नाक पर मारा मुक्का:20 मिनट फर्श पर तड़पता रहा, दस्तार उतरी; लोग इकट्ठे हुए तो भागा कनाडियन

कनाडा में पंजाबी युवक को नाक पर मारा मुक्का:20 मिनट फर्श पर तड़पता रहा, दस्तार उतरी; लोग इकट्ठे हुए तो भागा कनाडियन

कनाडा के एडमंटन में वॉल्मार्ट स्टोर में शॉपिंग पर आए पंजाबी युवक को कनाडियन युवक ने मुक्का जड़ दिया। इससे पंजाबी युवक फर्श पर गिर गया। वह करीब 20 मिनट तक फर्श पर गिरा रहा। झगड़े के बीच उसकी दस्तार भी उतर गई। यादविंदर सिंह नाम के युवक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस वीडियो को शेयर किया है। युवक ने बताया कि कनाडा में पंजाबियों के साथ मारपीट अब आम होने लगी है। हालांकि जिस युवक को पीटा, उसकी पहचान नहीं हो पाई है। वीडियों में लोग पुलिस को फोन लगाते हुए नजर आए। लोगों ने कहा कि 1 घंटे से भी ज्यादा समय हो गया है, लेकिन कनाडा पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। घटना को लेकर पुलिस का कोई आधिकारिक बयान अभी नहीं आया है। वीडियो में क्या दिख रहा है, विस्तार से पढ़िए… लोग बोले- कृपाण क्यों नहीं निकाली मुक्के का वीडियो सामने आने के बाद पंजाब कम्युनिटी के लोगों ने सोशल मीडिया पर घटना की निंदा की और कहा कि सिख व्यक्ति ने कृपाण डाल रखी है। जब कनाडियन ने हमला किया तो उसे कृपाण निकालनी चाहिए थी। वहीं कुछ यूजर्स ने युवक की सपोर्ट में लिखा कि ठीक किया नहीं निकाला नहीं तो स्थानीय लोग इसको लेकर भी इश्यू बना लेते। ट्रक ड्राइवर बताया जा रहा पंजाबी युवक पंजाबी कम्युनिटी के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर युवक को पंजाबी ट्रक ड्राइवर बताया। परविंदर नाम के युवक ने कहा कि हमारे पंजाबी ने भी गोरे को थप्पड़ मारे हैं। गोरे ने पहले नस्लीय टिप्पणी की थी। इसके बाद उसे ऐसे करने से रोका गया था, जिस पर गोरा भड़क गया और उसने अटैक कर दिया। 10 बार पुलिस को कॉल की गई परविंदर ने बताया कि घटना को लेकर कनाडा पुलिस को आधे घंटे के अंदर 10 बार कॉल की, लेकिन कोई नहीं आया। अगर यही घटना गोरे के साथ हुई होती तो 2 मिनट में पुलिस टूं-टूं करते हुए पहुंच जाती। उनसे कहा कि यहां पर केवल युवक ही नहीं महिलाएं भी हमारी दाढ़ियों को हाथ डाल रही हैं। पुलिस का बयान नहीं आया सामने उसने कहा कि जब ब्राउन कम्युनिटी कानून के लूपहोल्स सीख लेगी तो रेसिस्ट्स पर हमले हो सकते हैं। एडमंटन पुलिस सेवा की ओर से कोई प्रेस रिलीज नहीं आई। न तो घायल व्यक्ति की पहचान बताई गई, न चोट की स्थिति और न ही किसी गिरफ्तारी की जानकारी। स्टोर के कैमरे भी फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए।

वोडाफोन आईडिया का लॉस घटकर ₹3,754 करोड़ हुआ:पहली तिमाही में रेवेन्यू 6% बढ़ा; 200 से ज्यादा शहरों में 5G लाइव

वोडाफोन आईडिया का लॉस घटकर ₹3,754 करोड़ हुआ:पहली तिमाही में रेवेन्यू 6% बढ़ा; 200 से ज्यादा शहरों में 5G लाइव

देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आईडिया ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। 30 जून को खत्म हुई इस तिमाही में कंपनी का घाटा घटकर ₹3,754 करोड़ रह गया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को ₹6,608 करोड़ का घाटा हुआ था। हायर एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) और 4G-5G सेवाओं से जुड़ने वाले यूजर्स की वजह से कंपनी के घाटे में यह कमी दर्ज की गई है। रेवेन्यू ₹11,660 करोड़ और EBITDA 9.1% बढ़ा कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ-साथ कमाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है… CEO बोले- विलय के बाद पहली बार ग्राहक बढ़े वोडाफोन आईडिया लिमिटेड के CEO अभिजीत किशोर ने वित्तीय नतीजों पर खुशी जताते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2027 हमारे लिए एग्जीक्यूशन का साल है। पहली तिमाही का यह मजबूत प्रदर्शन हमारी रणनीति और अनुशासन का सबूत है। अभिजीत किशोर ने आगे कहा कि विलय के बाद यह पहला मौका है जब हमने ग्राहक जोड़े हैं, जो कि हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हम इस बढ़त को आगे भी बनाए रखेंगे। हमारा 5G नेटवर्क अब देश के 200 से अधिक शहरों में लाइव हो चुका है। ₹9,000 करोड़ के कैपेक्स ऑर्डर जारी कंपनी अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी निवेश कर रही है… कॉन्सोलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होता है EBITDA और ARPU?

वोडाफोन आईडिया का लॉस घटकर ₹3,754 करोड़ हुआ:पहली तिमाही में रेवेन्यू 6% बढ़ा; 200 से ज्यादा शहरों में 5G लाइव

वोडाफोन आईडिया का लॉस घटकर ₹3,754 करोड़ हुआ:पहली तिमाही में रेवेन्यू 6% बढ़ा; 200 से ज्यादा शहरों में 5G लाइव

देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आईडिया ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। 30 जून को खत्म हुई इस तिमाही में कंपनी का घाटा घटकर ₹3,754 करोड़ रह गया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को ₹6,608 करोड़ का घाटा हुआ था। हायर एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) और 4G-5G सेवाओं से जुड़ने वाले यूजर्स की वजह से कंपनी के घाटे में यह कमी दर्ज की गई है। रेवेन्यू ₹11,660 करोड़ और EBITDA 9.1% बढ़ा कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ-साथ कमाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है… CEO बोले- विलय के बाद पहली बार ग्राहक बढ़े वोडाफोन आईडिया लिमिटेड के CEO अभिजीत किशोर ने वित्तीय नतीजों पर खुशी जताते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2027 हमारे लिए एग्जीक्यूशन का साल है। पहली तिमाही का यह मजबूत प्रदर्शन हमारी रणनीति और अनुशासन का सबूत है। अभिजीत किशोर ने आगे कहा कि विलय के बाद यह पहला मौका है जब हमने ग्राहक जोड़े हैं, जो कि हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हम इस बढ़त को आगे भी बनाए रखेंगे। हमारा 5G नेटवर्क अब देश के 200 से अधिक शहरों में लाइव हो चुका है। ₹9,000 करोड़ के कैपेक्स ऑर्डर जारी कंपनी अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी निवेश कर रही है… कॉन्सोलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होता है EBITDA और ARPU?

कोलंबिया में 6.8 तीव्रता का भूकंप:केंद्र 94 किमी नीचे था, जान-माल के नुकसान की खबर नहीं

कोलंबिया में 6.8 तीव्रता का भूकंप:केंद्र 94 किमी नीचे था, जान-माल के नुकसान की खबर नहीं

दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में भूकंप आया है। जर्मनी के जीएफजेड सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के मुताबिक, भूकंप भारतीय समयानुसार सोमवार शाम करीब 6:04 बजे आया। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 93.7 किमी नीचे था। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान या सुनामी की कोई सूचना नहीं है। हम इसे लगातार अपडेट कर रहे हैं…

सरकार का ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का विचार नहीं:संसद में मंत्रालय ने कहा- खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा; 5 राज्यों की OPS फंड वापसी की मांग खारिज

सरकार का ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का विचार नहीं:संसद में मंत्रालय ने कहा- खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा; 5 राज्यों की OPS फंड वापसी की मांग खारिज

ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने को लेकर सरकार का रुख पूरी तरह साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि OPS को वापस लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने इसके पीछे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को मुख्य वजह बताया है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से पुरानी पेंशन योजना में वापस जाने के बारे में केंद्र सरकार और पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण को सूचित किया था।

एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल को रोक सकती है सरकार:चीनी की कीमतें काबू करने की तैयारी; अभी 10% महंगी मिल रही

एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल को रोक सकती है सरकार:चीनी की कीमतें काबू करने की तैयारी; अभी 10% महंगी मिल रही

देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इसको कंट्रोल करने और घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार अक्टूबर सीजन से एथेनॉल प्रोडक्शन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है। इस कदम से देश में चीनी का प्रोडक्शन बढ़ेगा, जिससे भारत को चीनी आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस मामले पर अंतिम फैसला अगले महीने के आखिरी तक लिया जा सकता है। महाराष्ट्र-कर्नाटक में कम बारिश से चिंता बढ़ी मामले से जुड़े दो सरकारी और दो उद्योग सूत्रों के अनुसार, देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश हुई है। इस वजह से अगले साल चीनी उत्पादन में गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है। उत्पादन घटने की स्थिति में एथेनॉल के बजाय चीनी सप्लाई को प्राथमिकता देने से घरेलू बाजार को राहत मिलेगी। इस संबंध में सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। 30 लाख मीट्रिक टन चीनी की सप्लाई बढ़ेगी इस साल चीनी मिलों ने कुल उत्पादन का लगभग 10% यानी करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की थी। यदि अगले सीजन में गन्ने के इस डायवर्जन पर रोक लगाई जाती है, तो घरेलू बाजार में उतनी ही मात्रा में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध हो सकेगी। इससे कम बारिश के कारण उत्पादन में होने वाले संभावित घाटे की भरपाई हो जाएगी। मांग बढ़ने से 10% बढ़े चीनी के दाम गन्ने की जगह मक्का और चावल से एथेनॉल बनेगा सरकार 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग के अपने लक्ष्य को जारी रखना चाहती है। गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की मात्रा में कटौती की भरपाई करने के लिए सरकार एथेनॉल उत्पादन में मक्का और चावल के उपयोग को बढ़ावा देगी। देश में फिलहाल मक्का-चावल का पर्याप्त स्टॉक है। सी-हेवी मोलासेस के इस्तेमाल की ही मिलेगी इजाजत मामले की सीधी जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि चीनी मिलों को गन्ने के जूस और बी-हेवी मोलासेस (ज्यादा चीनी वाला बाय-प्रोडक्ट) से एथेनॉल बनाने से मना किया जाएगा। मिलों को मुख्य रूप से सी-हेवी मोलासेस से ही एथेनॉल बनाने की अनुमति दी जाएगी। यह ऐसा बाय-प्रोडक्ट होता है जिसमें से अधिकांश चीनी पहले ही निकाली जा चुकी होती है। अगले सीजन की शुरुआत से पहले तय होगा एलोकेशन नवंबर से शुरू होने वाले मार्केटिंग वर्ष के लिए चीनी उद्योग के लिए एथेनॉल के एलोकेशन को नया सीजन शुरू होने से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद सरकारी तेल कंपनियां एथेनॉल खरीद के लिए टेंडर जारी करेंगी। केंद्र सरकार ने पहले ही चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है और पिछले महीने व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी लागू कर दी थी। चीनी मिलों की कमाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर उद्योग अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित नए प्रतिबंधों से चीनी उद्योग को कोई बड़ा आर्थिक नुकसान होने की संभावना नहीं है। एथेनॉल बनाने की तुलना में गन्ने से चीनी बनाकर बेचने पर मिलों को ज्यादा कमाई होने की उम्मीद है। क्या होता है बी-हेवी और सी-हेवी मोलासेस? ये खबर भी पढ़ें… डाबर ने FSSAI पर भेदभाव का आरोप लगाया: कहा- कॉम्पिटिटर्स को फायदा पहुंचा रही; बैन से ₹150 करोड़ के माल पर संकट था एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कंपनी ने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें…