चीन में 150 kmph की रफ्तार से टकराया डॉल्फिन तूफान:शंघाई में 150 साल में सबसे ज्यादा बारिश, 10 लाख लोग सुरक्षित जगह पहुंचाए गए

चीन के पूर्वी हिस्से में करीब 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से डॉल्फिन तूफान टकराया है। इसके असर से पूर्वी और मध्य चीन में तेज बारिश हो रही है। शंघाई में 150 साल में सबसे ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। चीन के अधिकारियों के मुताबिक, तूफान के कारण पिछले कुछ दिनों में 10 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया। 1,500 से ज्यादा इमरजेंसी शेल्टर बनाए गए। कई जगह लैंडफॉल की भी खबरें सामने आई हैं। चीन के नेशनल मेटियोरोलॉजिकल सेंटर (NMC) ने सोमवार सुबह टाइफून अलर्ट को घटाकर सबसे निचले स्तर के ब्लू अलर्ट पर कर दिया। हालांकि, झेजियांग के कुछ हिस्सों में फ्लैश फ्लड का सबसे गंभीर अलर्ट अभी भी जारी है। 943 उड़ाने रद्द की गई, लोकल ट्रेन भी बंद शंघाई में भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। शहर के दो प्रमुख एयरपोर्ट पर सोमवार को 943 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। दक्षिण-पश्चिम चीन के चेंगदू से रविवार को शंघाई जा रही एक फ्लाइट बारिश के कारण शंघाई में लैंड नहीं कर सकी। विमान को कुछ देर शंघाई के ऊपर चक्कर लगाने के बाद बीजिंग डायवर्ट कर दिया गया। वहां उतरने के बाद विमान रात में चेंगदू लौट गया। इसके अलावा लोकल ट्रेन समेत कई आम लोगों के लिए परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं। झेजियांग के निंगबो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार दोपहर से उड़ानें फिर शुरू कर दी गईं। हालांकि, एयरपोर्ट ने कहा कि तूफान का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में कुछ उड़ानों में देरी हो सकती है या उन्हें रद्द करना पड़ सकता है। बीजिंग में बारिश का रेड अलर्ट जारी चीन की राजधानी बीजिंग भी अलर्ट पर है। शहर के पांच जिलों में सोमवार को भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया। कुछ इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बताया गया। बीजिंग के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है। लोगों को जरूरी काम के अलावा बाहर न निकलने और आउटडोर गतिविधियां रोकने की सलाह दी गई है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान अब उत्तर-पश्चिम दिशा में 15 से 20 kmph की रफ्तार से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, डॉल्फिन का क्लाउड सिस्टम करीब 1,300 km तक फैला है। चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।
चीन में 150 kmph की रफ्तार से टकराया डॉल्फिन तूफान:शंघाई में 150 साल में सबसे ज्यादा बारिश, 10 लाख लोग सुरक्षित जगह पहुंचाए गए

जापान में तबाही मचाने के बाद डॉल्फिन तूफान अब चीन पहुंच गया है। रविवार देर रात इसने पूर्वी चीन के तटीय इलाकों में दस्तक दी। उस समय इसकी रफ्तार करीब 150 किमी प्रति घंटे थी। इसके बाद कई शहरों में तेज बारिश शुरू हो गई। सबसे ज्यादा असर शंघाई में दिखा, जहां पिछले 150 साल में सबसे ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। चीनी अधिकारियों के मुताबिक, खतरे को देखते हुए 10 लाख से ज्यादा लोगों को पहले ही सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया था। चीनी मीडिया SCMP के मुताबिक अब तूफान कमजोर पड़ रहा है। इसलिए चीन की मौसम एजेंसी ने चेतावनी का स्तर घटा दिया है। हालांकि, लगातार बारिश की वजह से बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। कुछ जगहों पर पहाड़ों से मिट्टी और चट्टानें खिसकने की घटनाएं भी हुई हैं। 943 उड़ाने रद्द की गई, लोकल ट्रेन भी बंद शंघाई में भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। शहर के दो प्रमुख एयरपोर्ट पर सोमवार को 943 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। दक्षिण-पश्चिम चीन के चेंगदू से रविवार को शंघाई जा रही एक फ्लाइट बारिश के कारण शंघाई में लैंड नहीं कर सकी। विमान को कुछ देर शंघाई के ऊपर चक्कर लगाने के बाद बीजिंग डायवर्ट कर दिया गया। वहां उतरने के बाद विमान रात में चेंगदू लौट गया। इसके अलावा लोकल ट्रेन समेत कई आम लोगों के लिए परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं। झेजियांग के निंगबो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार दोपहर से उड़ानें फिर शुरू कर दी गईं। हालांकि, एयरपोर्ट ने कहा कि तूफान का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में कुछ उड़ानों में देरी हो सकती है या उन्हें रद्द करना पड़ सकता है। बीजिंग में बारिश का रेड अलर्ट जारी चीन की राजधानी बीजिंग भी अलर्ट पर है। शहर के पांच जिलों में सोमवार को भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया। कुछ इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बताया गया। बीजिंग के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है। लोगों को जरूरी काम के अलावा बाहर न निकलने और आउटडोर गतिविधियां रोकने की सलाह दी गई है। चीन के मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान अब उत्तर-पश्चिम दिशा में 15 से 20 kmph की रफ्तार से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, डॉल्फिन का क्लाउड सिस्टम करीब 1,300 km तक फैला है। चीन में बार-बार टाइफून क्यों आते हैं? 1. भूमध्य रेखा के पास और उत्तर में स्थित होना पश्चिमी प्रशांत महासागर में हर साल सबसे ज्यादा 25 से 30 तूफान आते हैं। यह दुनिया भर में आने वाले कुल तूफानों का लगभग 30% है। इसकी वजह इस इलाके का भूमध्य रेखा के पास (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में) स्थित होना है। पृथ्वी के घूमने के कारण यहां हवाओं को गोल घुमाने वाला बल (कोरियोलिस इफेक्ट) बहुत मजबूत होता है। तूफान बनने के बाद ये हवाओं के बहाव के साथ जापान, ताइवान, चीन, कोरिया और फिलीपींस की तरफ बढ़ते हैं। यही वजह है कि इन देशों में सबसे ज्यादा तूफान आते हैं। 2. समुद्र का तेजी से गर्म होना टाइफून बनने और मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह गर्म समुद्र है। जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है, तो पानी तेजी से भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप तूफान के लिए ईंधन का काम करती है, जिससे हवाएं और बारिश दोनों बेहद तेज हो जाती हैं। 1901 में दुनिया भर के महासागरों की सतह का औसत तापमान लगभग 15.2°C से 15.3°C था। बीते कुछ साल में यह औसतन वैश्विक समुद्र सतह तापमान 21.1°C को पार कर गया है, जो इतिहास में सबसे ज्यादा है।
कफन साथ लेकर चलते हैं सिंगर अली अली:लाइव कॉन्सर्ट में भावुक होकर कहा- जहां मरूं, वहीं जाने देना, मैंने मौत को स्वीकार कर लिया है

सिंगर लकी अली हाल ही में लाइव परफॉर्मेंस के दौरान मौत पर बात करते हुए भावुक हो गए। 67 साल के लकी अली ने बताया कि वह मौत के लिए तैयार रहते हैं और सफर के दौरान अपना कफन का कपड़ा साथ रखते हैं। ऑडियंस से बातचीत के दौरान लकी अली ने भावुक होकर कहा, “मुझे पता है, मैं भी आप सभी से प्यार करता हूं। एक दिन हम सभी को जाना है। मैं आपको इसके लिए तैयार नहीं कर रहा, लेकिन मैं खुद तैयार हूं। जब भी मैं सफर करता हूं, अपना इहराम साथ लेकर चलता हूं, जो मेरा कफन है। मैं जहां भी मरूं, मुझे वहीं से जाने देना।” वीडियो देख भावुक हुए फैंस लकी अली ने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से कॉन्सर्ट का ये वीडियो शेयर किया। इसके बाद फैंस ने कमेंट सेक्शन में उनके लिए प्यार और चिंता जाहिर की। लकी अली अपनी अलग आवाज और मशहूर गानों के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्मों के लिए अपनी आवाज दी। इनमें ‘कहो ना… प्यार है’, ‘युवा’, ‘बचना ऐ हसीनो’, ‘अंजाना अंजानी’ और ‘तमाशा’ शामिल हैं। 2015 में बॉलीवुड से लिया संन्यास, कहा- मेरे साथ गलत व्यवहार हुआ पिछले साल नवभारत टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “एक समय था, जब मैं फिल्मों में अभिनय करता था और गाने गाता था, लेकिन बाद में मुझे समझ नहीं आया कि आगे क्या करना है। मैं अपने अंदाज में गाना चाहता था। आजादी की इसी तलाश से ‘ओ सनम’ बना।” उन्होंने आगे कहा, “2015 में मैंने इंडस्ट्री से दूरी बना ली। लोगों ने मेरे साथ गलत व्यवहार किया था, लेकिन मैं उनकी नकारात्मकता की वजह से दूर नहीं हुआ। मुझे एक जैसी चीजों से ऊब हो गई थी। पिता की मौत के बाद मुझे लगा कि वहां मेरे लिए कुछ नहीं बचा है। मेरे दोस्त भी नहीं थे।” तीन शादियां कर चुके हैं लकी अली लकी अली की तीन शादियां हुई हैं। उनकी पहली शादी मेगन जेन मैक्लियरी से हुई थी। दोनों के दो बच्चे हैं। इसके बाद उन्होंने ईरान की रहने वाली इनाया से शादी की। दोनों के भी दो बच्चे हैं। 2010 में लकी अली ने ब्रिटिश मॉडल और पूर्व ब्यूटी क्वीन केट एलिजाबेथ हॉलम से शादी की। दोनों का एक बेटा है। 2017 में उनका तलाक हो गया। अपनी शादियों और रिश्तों के बारे में लकी अली ने पहले कहा था, “आपको एक ही साथी के साथ जिंदगी शुरू और खत्म करने की जरूरत नहीं है। मैंने तीन शादियां कीं और हर बार अलग देश में कीं। हर स्थिति अलग थी।” उन्होंने कहा, “मेरे पिता (महमूद) ने भी भारत से बाहर शादी की थी, इसलिए हमारे घर का माहौल काफी ग्लोबल था। मेरी कोई भी शादी नहीं चली, लेकिन मेरे सभी रिश्ते आज भी कायम हैं।” लकी अली ने आगे कहा, “हम साथ नहीं रहते, लेकिन हमेशा एक-दूसरे के लिए मौजूद रहते हैं। मैं हमेशा अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदार रहा हूं। मेरा मानना है कि बच्चों की परवरिश का सही तरीका सिर्फ प्यार है। बच्चे वही सीखते हैं, जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं।”
नेपाली पीएम ने भारतीय राजदूत से मुलाकात की:पहली बार किसी विदेशी डिप्लोमेट से अकेले मिले; कुछ देर में चीनी राजदूत से मिलेंगे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सोमवार को भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की। प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी विदेशी राजदूत के साथ शाह की यह पहली वन-टू-वन मुलाकात है। नवीन श्रीवास्तव ने शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के साथ अच्छे रिश्ते और सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। दोनों के बीच भारत-नेपाल संबंधों, विकास सहयोग और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। बालेन शाह ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते पुराने और भरोसेमंद हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, बिजली, सड़क और दूसरे विकास कार्यों में मिलकर काम जारी रखने पर जोर दिया। बालेन शाह कुछ देर में चीनी राजदूत झांग माओमिंग से भी मिलेंगे। पहले विदेशी अधिकारियों से अकेले नहीं मिलते थे शाह प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में शाह ने विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। वह विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते थे। इसी वजह से भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की 11-12 मई की नेपाल यात्रा के दौरान भी शाह से उनकी अकेले में मुलाकात नहीं हो सकी थी। शाह ने अमेरिकी अधिकारियों समीर पॉल कपूर और सर्जियो गोर से मुलाकात के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने 9 अप्रैल और 26 मई को काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें की थीं। नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने विदेशी राजदूतों से अकेले मुलाकात न करने का रुख अपनाया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका समेत कई देशों के राजदूतों और वरिष्ठ अधिकारियों से वन-टू-वन बैठक से दूरी बनाए रखी। शाह का मानना था कि शक्तिशाली देश नेपाल की सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। सामूहिक बैठकों से वह सभी देशों के साथ बराबरी का संदेश देना चाहते थे। लेकिन सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद सलाहकारों ने उन्हें घरेलू और विदेशी स्तर पर अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने नेताओं, कारोबारियों और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें शुरू कीं। अब विदेशी राजदूतों से सीधे मुलाकात भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक सीधे संवाद से दूरी बनाने पर नेपाल के कूटनीतिक रिश्तों पर असर पड़ने की चिंता भी थी। बालेन शाह के PM बनने से पहले क्या होता था? नेपाल में नई सरकार बनने के बाद भारत, चीन और अमेरिका जैसे बड़े देशों के राजदूत अक्सर सीधे प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात करते थे। कई बार ये बैठकें प्रधानमंत्री के निजी आवास पर होती थीं। इन मुलाकातों में विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद नहीं होते थे और इनका कोई औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था। नेपाल में लंबे समय से यह चलन था कि बड़े देशों के राजदूत प्रधानमंत्री से सीधे मिलकर अपनी बात रख सकते थे। माना जाता है कि इन मुलाकातों में आधिकारिक बातचीत के साथ व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाने पर भी जोर रहता था। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसी अनौपचारिक मुलाकातों से हितों के टकराव का खतरा रहता था और नेपाल के राष्ट्रीय हितों पर भी सवाल उठ सकते थे। ———————————- ये खबर भी पढ़ें…
26/11 हमले से जुड़े लश्कर आतंकी अब्दुल-अजीज की मौत:इस्लामाबाद में मस्जिद के बाहर अचानक गिरा; मौत की वजह साफ नहीं

26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कारी सईद अब्दुल-अजीज की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौत हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह कुबा मस्जिद के बाहर अचानक गिर पड़ा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मस्जिद पहुंचने से पहले अजीज ने एक रेस्टोरेंट में खाना खाया था। इसके बाद नमाज के लिए पहुंचने पर वह अचानक गिर पड़ा। मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अजीज पर 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की साजिश में शामिल होने का आरोप था। हमले में लश्कर के 10 आतंकियों ने मुंबई के कई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें 166 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। उस पर लश्कर की एक यूनिट संभालने का भी आरोप था, जो आतंकियों के बीच कम्युनिकेशन और जम्मू-कश्मीर में मारे गए लश्कर आतंकियों के परिवारों को आर्थिक मदद से जुड़े काम देखती थी। पाकिस्तान में लश्कर आतंकियों की रहस्यमय मौतों का सिलसिला जारी अजीज की मौत ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई आतंकियों और ऑपरेटिव्स की रहस्यमय तरीके से हत्या की खबरें सामने आती रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग-अलग घटनाओं में 30 से 40 लश्कर ऑपरेटिव्स मारे जा चुके हैं। हालांकि, इन घटनाओं और अजीज की मौत के बीच कोई सीधा संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि अजीज की मौत बीमारी या किसी दूसरे कारण से हुई। मामले में पाकिस्तानी अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। 26/11 हमले की पूरी टाइमलाइन 26 नवंबर 2008 की रात समुद्र के रास्ते आए 10 लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों ने मुंबई में कई जगहों पर हमला किया। CST, ताज होटल, ओबेरॉय-ट्राइडेंट और नरीमन हाउस मुख्य निशाने थे। 29 नवंबर की सुबह ताज होटल में आखिरी आतंकियों के मारे जाने के साथ ऑपरेशन खत्म हुआ। बॉम्बे हाईकोर्ट के मुताबिक, हमले में 166 लोगों की मौत और 238 लोग घायल हुए थे। 26 नवंबर | हमले की शुरुआत CST के बाद पुलिस पर हमला 27 नवंबर | कमांडो ऑपरेशन शुरू 28 नवंबर | दो जगह ऑपरेशन खत्म 29 नवंबर | ताज में आखिरी ऑपरेशन 10 आतंकियों का क्या हुआ? 9 आतंकी मारे गए | 1 आतंकी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया। जांच और अदालत की कार्रवाई में सामने आया कि हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का नेटवर्क था। लश्कर का आतंकी नेटवर्क कैसे काम करता है लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन का नेटवर्क केवल हमले करने वाले आतंकियों तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे भर्ती, ट्रेनिंग, कम्युनिकेशन, फंडिंग और संगठन से जुड़े लोगों के परिवारों की मदद जैसे अलग-अलग काम संभालने वाले नेटवर्क होते हैं।
26/11 हमले से जुड़े लश्कर आतंकी अब्दुल-अजीज की मौत:इस्लामाबाद में मस्जिद के बाहर अचानक गिरा; रेस्टोरेंट में खाना खाया था

26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कारी सईद अब्दुल-अजीज की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौत हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह कुबा मस्जिद के बाहर अचानक गिर पड़ा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मस्जिद पहुंचने से पहले अजीज ने एक रेस्टोरेंट में खाना खाया था। इसके बाद नमाज के लिए पहुंचने पर वह अचानक गिर पड़ा। मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अजीज पर 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की साजिश में शामिल होने का आरोप था। हमले में लश्कर के 10 आतंकियों ने मुंबई के कई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें 166 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। उस पर लश्कर की एक यूनिट संभालने का भी आरोप था, जो आतंकियों के बीच कम्युनिकेशन और जम्मू-कश्मीर में मारे गए लश्कर आतंकियों के परिवारों को आर्थिक मदद से जुड़े काम देखती थी। पाकिस्तान में लश्कर आतंकियों की रहस्यमय मौतों का सिलसिला जारी अजीज की मौत ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई आतंकियों और ऑपरेटिव्स की रहस्यमय तरीके से हत्या की खबरें सामने आती रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग-अलग घटनाओं में 30 से 40 लश्कर ऑपरेटिव्स मारे जा चुके हैं। हालांकि, इन घटनाओं और अजीज की मौत के बीच कोई सीधा संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि अजीज की मौत बीमारी या किसी दूसरे कारण से हुई। मामले में पाकिस्तानी अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। 26/11 हमले की पूरी टाइमलाइन 26 नवंबर 2008 की रात समुद्र के रास्ते आए 10 लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों ने मुंबई में कई जगहों पर हमला किया। CST, ताज होटल, ओबेरॉय-ट्राइडेंट और नरीमन हाउस मुख्य निशाने थे। 29 नवंबर की सुबह ताज होटल में आखिरी आतंकियों के मारे जाने के साथ ऑपरेशन खत्म हुआ। बॉम्बे हाईकोर्ट के मुताबिक, हमले में 166 लोगों की मौत और 238 लोग घायल हुए थे। 26 नवंबर | हमले की शुरुआत CST के बाद पुलिस पर हमला 27 नवंबर | कमांडो ऑपरेशन शुरू 28 नवंबर | दो जगह ऑपरेशन खत्म 29 नवंबर | ताज में आखिरी ऑपरेशन 10 आतंकियों का क्या हुआ? 9 आतंकी मारे गए | 1 आतंकी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया। जांच और अदालत की कार्रवाई में सामने आया कि हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का नेटवर्क था। लश्कर का आतंकी नेटवर्क कैसे काम करता है लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन का नेटवर्क केवल हमले करने वाले आतंकियों तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे भर्ती, ट्रेनिंग, कम्युनिकेशन, फंडिंग और संगठन से जुड़े लोगों के परिवारों की मदद जैसे अलग-अलग काम संभालने वाले नेटवर्क होते हैं।
एक्ट्रेस बोलीं-रानियां हैवी ज्वेलरी पहनती थीं,मेरे लिए आसान नहीं था:राजस्थानी ट्रेडिशनल ड्रेस पहनकर लगा, जैसे मैं भंसाली की फिल्म से निकलकर आई हूं

जयपुर कॉट्योर शो सीजन-14 के दूसरे दिन बॉलीवुड अभिनेत्री संदीपा धर ने ज्वेलरी डिजाइनर हुकुम सिंह के लिए शोस्टॉपर के रूप में रैंप वॉक किया। इस दौरान अभिनेत्री ने पारंपरिक राजस्थानी पोशाक के साथ बेहद खूबसूरत और भारी पारंपरिक ज्वेलरी पहनी थी। रैंप वॉक के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए संदीपा धर ने कहा- “इस पहनावे और ज्वेलरी को पहनकर वे खुद को एक रानी की तरह महसूस कर रही हैं। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे वे किसी राजमहल में हैं और वह महल उनका अपना ही है। संदीपा धर ने अपने राजस्थानी लुक को लेकर कहा कि मैं बता नहीं सकती कि मैं इस पहनावे को लेकर कितनी एक्साइटेड हूं। यह पोशाक और इतनी खूबसूरत ज्वेलरी पहनकर मैं अपनी खुशी शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती। मैं एक रानी की तरह महसूस कर रही हूं। ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी राजमहल में हूं और वह मेरा ही महल है। ‘ऐसा लग रहा है जैसे भंसाली की फिल्म से निकलकर आई हूं’ शिव ज्वेलर्स के हुकुम सिंह का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें राजस्थान की संस्कृति का हिस्सा बनने और इस तरह की पारंपरिक पोशाक व ज्वेलरी पहनने का अवसर मिला, यह उनके लिए खास अनुभव है। संदीपा ने कहा कि एक लड़की के तौर पर मुझे लगता है कि इस तरह तैयार होना हर लड़की का सपना होता है। आज मुझे लग रहा है कि मैं सीधे किसी संजय लीला भंसाली की फिल्म से निकलकर आई हूं। आसान नहीं है ऐसी ज्वैलरी पहनना राजस्थान की रानियों की ओर से पहनी जाने वाली भारी ज्वेलरी और पारंपरिक परिधानों को लेकर भी संदीपा ने दिलचस्प अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इतनी भारी ज्वेलरी पहनने के बाद शरीर और व्यक्तित्व में एक अलग तरह का ठहराव और ग्रेस आ जाता है। उन्होंने कहा कि शायद इसी वजह से उस समय की रानियां इतनी ग्रेसफुल दिखाई देती थीं। इस तरह की पोशाक और हैवी ज्वेलरी पहनने के बाद एक ठहराव आ जाता है। मैं तो एक दिन पहनकर ही थक गई हूं, लेकिन उन महिलाओं को सलाम है जो रोजाना इतनी भारी ज्वेलरी और पोशाक पहनती थीं। संदीपा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह सोचती हैं कि अगर उनका जन्म उस दौर में हुआ होता तो उन्हें रोज इस तरह तैयार होने का मौका मिलता। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी मायने में सुपर ह्यूमन होती हैं, जो इतनी भारी ज्वेलरी और परिधानों को भी सहजता से संभाल लेती थीं। तीन महीने बीकानेर में शूटिंग, राजस्थान से खास जुड़ाव संदीपा धर का राजस्थान से जुड़ाव हाल के समय में और गहरा हुआ है। उन्होंने बताया कि वह करीब तीन महीने बीकानेर में शूटिंग कर रही थीं और इस दौरान उनका जयपुर आना-जाना भी लगातार रहा। ऐसे में राजस्थान की संस्कृति, खान-पान और कला को करीब से समझने का मौका मिला। राजस्थान के खाने की तारीफ करते हुए संदीपा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यहां की थालियां खा-खाकर उनका वजन करीब पांच-छह किलो बढ़ गया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी कहा कि राजस्थान का खाना इतना शानदार है कि उसे छोड़ना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्थान से उनका जुड़ाव सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। यहां की कला, फाइन आर्ट, फर्नीचर, ज्वेलरी और पारंपरिक पोशाकें उन्हें बेहद प्रभावित करती हैं। संदीपा ने कहा कि राजस्थान की खासियत यह है कि यहां कला केवल संग्रहालयों या प्रदर्शनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई है। यहां के लोगों की प्रतिभा और पारंपरिक कला के प्रति जुड़ाव उन्हें बेहद खास लगता है। राजस्थान का आर्ट और कल्चर कमाल का है। चाहे फाइन आर्ट हो, फर्नीचर हो, ज्वेलरी हो या पोशाक, यहां हर चीज में कला दिखाई देती है। यहां के लोग बेहद प्रतिभाशाली हैं और यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि कला यहां लोगों की जिंदगी से इतनी गहराई से जुड़ी हुई है। 28 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर नजर आएंगी संदीपा संदीपा धर ने बातचीत में अपने आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका नया शो ‘चुंबक’ 28 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रहा है। इस शो को लेकर वह काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि ‘चुंबक’ के मेकर्स इससे पहले लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘खिचड़ी’ और ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ से जुड़े रहे हैं। संदीपा इस प्रोजेक्ट के जरिए पहली बार कॉमेडी जॉनर में काम कर रही हैं। इस शो में अभिनेत्री नीना गुप्ता सहित कई प्रतिभाशाली कलाकार नजर आएंगे। संदीपा ने उनके साथ काम करने के अनुभव को भी शानदार बताया और दर्शकों से 28 अगस्त को शो देखने की अपील की।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस:हारे तो मनमानी पर रोक लगेगी, नवंबर में होनी है वोटिंग

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की आशंका 65% तक है। नवंबर में मिडटर्म के लिए वोटिंग होनी है। मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के चार साल के कार्यकाल के बीच होने वाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के साथ राज्यों और स्थानीय सरकारों के कई अहम पदों के लिए वोटिंग होगी। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय हो चुके हैं। मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने पर उनके फैसलों पर रोक-टोक बढ़ सकती है। टैरिफ, वीजा और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में ट्रम्प को डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकाल के बाकी दो साल में उन्हें कांग्रेस के साथ ज्यादा तालमेल बनाकर चलना होगा। मिडटर्म में ट्रम्प की तीन सबसे बड़ी चुनौती… महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध 1. महंगाई: ट्रम्प की आर्थिक रेटिंग 32% पर फिसल गई अमेरिकी वोटरों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को वोट का बड़ा मुद्दा बताया। वहीं, एपी-एनओआरसी सर्वे में सिर्फ 32% लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था अच्छी तरह संभाल रहे हैं। 69% अमेरिकियों को मौजूदा आर्थिक हालात खराब लगते हैं। इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि रोजमर्रा का किराना महंगा पड़ रहा है, जबकि 48% को डर है कि अगले साल आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। ईरान युद्ध: 20% वोटरों के लिए बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। इसका असर सीधे अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ रहा है। इप्सोस सर्वे में 20% वोटरों ने ईरान युद्ध को वोट का अहम मुद्दा बताया। अगर जंग लंबी खिंची और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। यानी ट्रम्प के सामने चुनौती है ईरान पर सख्ती भी दिखानी है और अमेरिकी लोगों को महंगाई से राहत का भरोसा भी देना है। इमिग्रेशन: 61% अमेरिकी ट्रम्प की नीति से नाराज 2024 में इमिग्रेशन ट्रम्प की बड़ी ताकत था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। हालिया सर्वे में 61% अमेरिकियों ने ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया, जबकि समर्थन सिर्फ 39% रहा। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रम्प की इस नीति को 49% लोगों का समर्थन था। रिपब्लिकन वोटरों में भी समर्थन घटकर 80% रह गया है। सख्त डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच बढ़ती नाराजगी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है। ट्रम्प पर महाभियोग का खतरा बढ़ेगा अगर रिपब्लिकन कांग्रेस में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रम्प पर महाभियोग की कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में मजबूत होते हैं तो वे ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कांग्रेस के पास टैरिफ और इमिग्रेशन से जुड़े कानूनों पर बड़ा अधिकार है। वह ट्रम्प के फैसलों पर कानून बनाकर रोक लगा सकती है और वीजा नीति को भी चुनौती दे सकती है। ईरान युद्ध में भी कांग्रेस सैन्य कार्रवाई और युद्ध के लिए फंडिंग पर ट्रम्प पर दबाव बना सकती है। यानी कांग्रेस का बहुमत गया तो ट्रम्प की मनमानी पर लगाम लग सकती है।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस:हारे तो मनमानी पर रोक लगेगी, नवंबर में होनी है वोटिंग

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की आशंका 65% तक है। नवंबर में मिडटर्म के लिए वोटिंग होनी है। मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के चार साल के कार्यकाल के बीच होने वाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के साथ राज्यों और स्थानीय सरकारों के कई अहम पदों के लिए वोटिंग होगी। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय हो चुके हैं। मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने पर उनके फैसलों पर रोक-टोक बढ़ सकती है। टैरिफ, वीजा और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में ट्रम्प को डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकाल के बाकी दो साल में उन्हें कांग्रेस के साथ ज्यादा तालमेल बनाकर चलना होगा। मिडटर्म में ट्रम्प की तीन सबसे बड़ी चुनौती… महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध 1. महंगाई: ट्रम्प की आर्थिक रेटिंग 32% पर फिसल गई अमेरिकी वोटरों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को वोट का बड़ा मुद्दा बताया। वहीं, एपी-एनओआरसी सर्वे में सिर्फ 32% लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था अच्छी तरह संभाल रहे हैं। 69% अमेरिकियों को मौजूदा आर्थिक हालात खराब लगते हैं। इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि रोजमर्रा का किराना महंगा पड़ रहा है, जबकि 48% को डर है कि अगले साल आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। ईरान युद्ध: 20% वोटरों के लिए बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। इसका असर सीधे अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ रहा है। इप्सोस सर्वे में 20% वोटरों ने ईरान युद्ध को वोट का अहम मुद्दा बताया। अगर जंग लंबी खिंची और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। यानी ट्रम्प के सामने चुनौती है ईरान पर सख्ती भी दिखानी है और अमेरिकी लोगों को महंगाई से राहत का भरोसा भी देना है। इमिग्रेशन: 61% अमेरिकी ट्रम्प की नीति से नाराज 2024 में इमिग्रेशन ट्रम्प की बड़ी ताकत था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। हालिया सर्वे में 61% अमेरिकियों ने ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया, जबकि समर्थन सिर्फ 39% रहा। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रम्प की इस नीति को 49% लोगों का समर्थन था। रिपब्लिकन वोटरों में भी समर्थन घटकर 80% रह गया है। सख्त डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच बढ़ती नाराजगी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है। ट्रम्प पर महाभियोग का खतरा बढ़ेगा अगर रिपब्लिकन कांग्रेस में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रम्प पर महाभियोग की कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में मजबूत होते हैं तो वे ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कांग्रेस के पास टैरिफ और इमिग्रेशन से जुड़े कानूनों पर बड़ा अधिकार है। वह ट्रम्प के फैसलों पर कानून बनाकर रोक लगा सकती है और वीजा नीति को भी चुनौती दे सकती है। ईरान युद्ध में भी कांग्रेस सैन्य कार्रवाई और युद्ध के लिए फंडिंग पर ट्रम्प पर दबाव बना सकती है। यानी कांग्रेस का बहुमत गया तो ट्रम्प की मनमानी पर लगाम लग सकती है।
दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार हुए डायरेक्टर शकील नूरानी:एक्ट्रेस का आरोप-नशीली दवा दीं, दुष्कर्म के बाद गर्भनिरोधक गोलियां देते थे; 2016 का मामला

गोविंदा की फिल्म जोरू का गुलाम डायरेक्ट कर चुके 73 साल के शकील नूरानी को यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया गया है। 33 साल की एक्ट्रेस ने उन पर शोषण, ब्लैकमेलिंग समेत कई संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार, ये मामला 2016 का है। घटना 2016 की, केस अब दर्ज हुआ मुंबई पुलिस को मिली शिकायत के अनुसार, एक्ट्रेस की शकील नूरानी से पहली मुलाकात 2016 में लोखंडवाला में एक अवॉर्ड फंक्शन के दौरान हुई थी। उन्होंने उनसे आने वाले एक प्रोजेक्ट के बारे में बात की और काम के लिए संपर्क करने को कहा था। शिकायत के मुताबिक, बाद में एक्ट्रेस स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए शकील नूरानी के मालवानी स्थित घर गई थीं। वहां नूरानी ने उन्हें सॉफ्ट ड्रिंक पीने को दिया, जिसके बाद वह बेहोश हो गईं। होश आने पर वीडियो दिखाकर धमकाने का आरोप एक्ट्रेस ने FIR में आरोप लगाया कि होश आने के बाद शकील नूरानी ने उन्हें अपने मोबाइल पर एक्ट्रेस का वीडियो दिखाया। उन्होंने धमकी दी कि पुलिस से संपर्क करने या परिवार को जानकारी देने पर वह वीडियो सर्कुलेट कर देंगे। एक्ट्रेस का आरोप है कि नूरानी ने इसी कथित वीडियो के जरिए उन्हें धमकाया और कई बार उनका यौन उत्पीड़न किया। उन्होंने यह भी कहा कि यौन संबंधों के बाद नूरानी उन्हें बार-बार गर्भनिरोधक गोलियां देते थे। पुलिस ने सतारा के फार्महाउस किया गिरफ्तार FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि नूरानी सतारा जिले के मेधा इलाके में स्थित एक फार्महाउस में रह रहे हैं। मालवानी पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि FIR दर्ज होने के बाद नूरानी 40 दिन तक छिपे रहे। पुलिस टीम ने अंधेरी के लोखंडवाला स्थित उनके बेटे के घर की तलाशी भी ली, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। अधिकारी ने कहा, “टेक्निकल मदद से हमने उन्हें सतारा जिले के मेधा स्थित एक फार्महाउस में खोजा। मेधा पुलिस स्टेशन के हमारे साथियों ने उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद हमारी टीम ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया।” 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेजे गए पुलिस ने शकील नूरानी को शनिवार को बोरीवली हॉलीडे कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। नूरानी को मालवानी पुलिस ने दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता के मुताबिक घटना 2016 की है और मामला अब दर्ज हुआ। डीसीपी (जोन 2) संदीप घुगे ने कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद से पुलिस टीम जानकारी जुटा रही है। नूरानी के वकील विकास सिंह ने टीओआई से कहा कि उनके क्लाइंट को झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि मामला अदालत में है, इसलिए इस पर आगे कोई कॉमेंट नहीं करेंगे। नूरानी ने 1991 से 2000 के बीच फिल्में बनाईं शकील नूरानी ने 1990 और 2000 के शुरुआती दशक में फिल्में बनाई हैं। उनकी फिल्मों में ‘विष्णु देवा’ (1991), ‘श्रीमान आशिक’ (1993), ‘बड़े दिलवाला’ (1999) और ‘जोरू का गुलाम’ (2000) शामिल हैं। संजय दत्त से पुराना विवाद रहा शकील नूरानी इससे पहले संजय दत्त से विवाद को लेकर चर्चा में रहे थे। मुंबई की एक अदालत ने शकील नूरानी को धमकाने के मामले में संजय दत्त के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। नूरानी ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख कर आरोप लगाया था कि संजय दत्त ने उनकी फिल्म ‘जान की बाजी’ में काम करने के लिए 50 लाख रुपए एडवांस लिए थे। उनका आरोप था कि कुछ दिन की शूटिंग के बाद संजय दत्त ने आगे की शूटिंग के लिए डेट्स नहीं दीं।









