Wednesday, 16 Sep 2026 | 06:06 PM

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सुष्मिता मुखर्जी बोलीं- मजबूरी में आत्मा बेची, बुरा लगता है:सी-ग्रेड फिल्में करने पर अफसोस जताकर कहा- तब कर्ज लेने वाले घर आकर गालियां देते थे

सुष्मिता मुखर्जी बोलीं- मजबूरी में आत्मा बेची, बुरा लगता है:सी-ग्रेड फिल्में करने पर अफसोस जताकर कहा- तब कर्ज लेने वाले घर आकर गालियां देते थे

कोलकाता में जन्मीं एक्ट्रेस सुष्मिता मुखर्जी ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है, जब उन्हें मजबूरी में सी-ग्रेड फिल्मों में काम करना पड़ा था। फिलहाल ‘जगन्नाथ और पूर्वी की दोस्ती अनोखी’ सीरियल में नजर आ रहीं सुष्मिता ने एक इमोशनल वीडियो में अपने संघर्षों पर खुलकर बात की है। मजबूरी में लिए थे गलत फैसले सुष्मिता ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा कि उन फिल्मों में काम करना उनके लिए बेहद परेशान करने वाला था, जो महिलाओं का अपमान करती थीं। उन्होंने कहा, ‘भगवान का शुक्र है कि मैंने सिर्फ खराब फिल्में चुनी थीं, पोर्नोग्राफी नहीं की। क्या मैंने अपनी आत्मा बेच दी? हां, मैंने अपनी आत्मा बेच दी। मुझे तब भी अच्छा नहीं लगा था और अब भी नहीं लगता, लेकिन यह मेरी मजबूरी थी।’ 2002 में दिवालिया हो गई थी प्रोडक्शन कंपनी एक्ट्रेस ने बताया कि 1983 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पासआउट होने के बाद उनके जीवन में एक ऐसा दौर आया जब उन्हें ये फैसले लेने पड़े। साल 2002 में सुष्मिता और उनके पति की मीडिया कंपनी ‘प्रयास प्रोडक्शन’ पर एक करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। उस समय टेक्नोलॉजी के नए दौर और एंजेल इन्वेस्टमेंट की जानकारी न होने के कारण उनकी कंपनी के साथ-साथ ट्रैक सिनेमा और अनिल चौधरी प्रोडक्शन भी दिवालिया हो गए थे। रिकवरी वाले घर आकर देते थे गालियां सुष्मिता ने बताया कि वह समय बहुत बुरा था। कर्ज देने वाले और रिकवरी एजेंट उनके घर आते थे और गालियां देते थे। उस वक्त उनके बच्चे बहुत छोटे थे, इसलिए उन्हें कर्ज चुकाने के लिए हर तरह का काम करना पड़ा। उन्होंने और उनके पति ने तीन-चार साल तक कड़ी मेहनत की ताकि वे एक करोड़ का कर्ज चुका सकें। बेटी की पढ़ाई के लिए भी थी पैसों की जरूरत आर्थिक दबाव का एक बड़ा कारण उनकी बेटी की पढ़ाई भी थी। सुष्मिता ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए उन्होंने उसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेजने का फैसला किया। हालांकि उनके पति इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को विदेश भेजा। उसकी पढ़ाई काफी महंगी थी, जिसके लिए उन्हें लगातार पैसे कमाने थे। फैसलों पर नहीं है कोई पछतावा सुष्मिता ने 1978 में फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा से शादी की थी, जिससे बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद 1993 में उन्होंने एक्टर और राजनेता राजा बुंदेला से दूसरी शादी की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने फैसलों पर कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी और वे आज अपने पैरों पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अब वह वही काम करती हैं जो उनके दिल को छूता है। उन्हें अब सम्मान भी मिलता है और वह अपनी कमाई से खुश हैं।

एआई मॉडल में बिना निर्देश भ्रामक व्यवहार का अनूठा मामला:खुद बनाई फर्जी पहचान, साइबर हमले की कोशिश की; पकड़े जाने पर सबूत मिटाए

एआई मॉडल में बिना निर्देश भ्रामक व्यवहार का अनूठा मामला:खुद बनाई फर्जी पहचान, साइबर हमले की कोशिश की; पकड़े जाने पर सबूत मिटाए

एआई अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन के एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट (एआईएसआई) की एक टेस्टिंग में दो एडवांस एआई मॉडल ऐसे व्यवहार करते मिले, जिसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी। टेस्ट के दौरान एंथ्रोपिक के माइथोस एआई ने इंसानों जैसी फर्जी ऑनलाइन पहचान बनाई। फिर निजी संदेश भेजे और लोगों को भरोसे में लेकर ‘गिटहब’ सिस्टम में नुकसान पहुंचाने वाला कोड डालने की कोशिश की। जब इसकी गतिविधियों पर सवाल उठे तो इसने अपने पुराने रिकॉर्ड को सामान्य दिखाने के लिए उसमें बदलाव किए और नई पहचान अपनाने पर भी विचार किया। यह पहली बार है जब किसी एआई मॉडल में बिना किसी निर्देश के इतने स्पष्ट ऑटोनोमस और भ्रामक व्यवहार देखने को मिला। हालांकि पूरी प्रक्रिया के दौरान मानव निगरानी मौजूद थी, इसलिए एआई अपने मकसद में सफल नहीं हो सका। इस मामले में एआई मॉडल को सिर्फ एक साइबर सिक्योरिटी चुनौती हल करने का काम दिया गया था। इसके लिए उसे इंटरनेट तक पहुंच दी गई थी, ताकि यह समझा जा सके कि वास्तविक परिस्थितियों में एआई क्या कर सकता है। लेकिन एआई ने तय दायरे से आगे बढ़कर खुद लोगों की पहचान खोजी, उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाए और उन्हें फाइल शेयरिंग सर्विस के जरिए संदेश भेजकर सिस्टम तक पहुंच हासिल करने की कोशिश की। एआईएसआई का कहना है कि इससे पता चलता है कि ज्यादा सक्षम होते एआई मॉडल भविष्य में उम्मीद से अलग व्यवहार भी कर सकते हैं। ब्रिटेन के एआई मंत्री कनिष्क नारायण ने कहा कि ऐसे जोखिमों की पहचान करना और उन्हें सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि इसे और सुरक्षित बनाया जा सके। एंथ्रोपिक और ओपनएआई, दोनों ने कहा कि यह परीक्षण सामान्य इस्तेमाल जैसे हालात में नहीं किया गया था। टेस्ट के दौरान उनके मॉडल की सामान्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को कम या हटाया गया था। एंथ्रोपिक ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि ओपनएआई ने कहा कि वह भविष्य में ऐसे परीक्षणों को और सुरक्षित बनाने के लिए मूल्यांकन एजेंसियों के साथ काम जारी रखेगी। टेस्ट में एआई को नहीं मिला था धोखा देने का कोई निर्देश एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट ने कहा कि माइथोस एआई को न तो लोगों को धोखा देने और न ही उससे बचने का कोई विशेष निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद उसने खुद फर्जी पहचान बनाई और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। संस्था के मुताबिक, पहली बार बिना किसी खास प्रॉम्प्ट के एआई में इस स्तर का स्वायत्त और भ्रामक व्यवहार देखने को मिला। हालांकि, ऐसी घटनाएं बहुत सीमित परिस्थितियों में हुईं।

हवा में 171 फीट के रॉकेट को पकड़ेगा चॉपस्टिक टावर:अगस्त में स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी स्पेसएक्स; मस्क बोले- सालभर में रोजाना 1 फ्लाइट होगी

हवा में 171 फीट के रॉकेट को पकड़ेगा चॉपस्टिक टावर:अगस्त में स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी स्पेसएक्स; मस्क बोले- सालभर में रोजाना 1 फ्लाइट होगी

स्पेसएक्स इसी महीने इतिहास रचने की तैयारी में है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो कंपनी अगस्त खत्म होने से पहले अपने स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी। इस टेस्ट में स्पेसएक्स की टीम लॉन्च टावर के जरिए स्टारशिप के ऊपरी हिस्से ‘शिप’ को हवा में कैच करने की कोशिश करेगी। सेप्सएक्स दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। केवल स्टारशिप का ऊपरी हिस्सा 171 फीट का है। ‘शिप’ को टावर के ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स से पकड़ेंगे साउथ टेक्सास के स्टारबेस साइट पर 2 लॉन्च टावर हैं, जिनमें बड़े ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स लगे हैं। यह स्टारशिप को पैड पर असेंबल करते हैं। इन्हीं टावर्स पर स्टारशिप को कैच करने की तैयारी है। इससे पहले स्पेसएक्स 3 टेस्ट फ्लाइट में स्टारशिप के निचले हिस्से बूस्टर को कैच करने का कारनामा कर चुकी है, लेकिन शिप को कैच करने की यह पहली कोशिश होगी। स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे फ्लाइट 14 के जरिए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स का एक बैच भेजा जाएगा। यह मौजूदा सैटेलाइट्स से बड़े और ज्यादा सक्षम हैं। 24 जुलाई को हुई फ्लाइट 13 में 20 स्टारलिंक V3 भेजे गए थे, जो सब-ऑर्बिट में थे। फ्लाइट 14 में इन्हें ऑपरेशनल ऑर्बिट में रखा जाएगा। फ्लाइट 13 की सफलता ने बढ़ाया कंपनी का भरोसा 24 जुलाई को स्टारशिप की फ्लाइट 13 लॉन्च हुई थी। यह एक सब-ऑर्बिट उड़ान थी। इसकी हिंद महासागर में लैंडिंग कराई गई थी। मस्क ने बताया कि फ्लाइट 13 के दौरान वायुमंडल में वापस आते समय शिप की ‘हीट शील्ड’ पूरी तरह सुरक्षित रही। पूरा रॉकेट आज भी सुरक्षित है। हीट शील्ड की सफलता ने ही कंपनी को फ्लाइट 14 में टावर कैच का जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। हीट शील्ड की समस्या सुलझ चुकी है, जल्द रोजाना 1 फ्लाइट होगी स्पेसएक्स की अर्निंग्स कॉल के दौरान इलॉन मस्क ने स्टारशिप के भविष्य और इसकी रफ्तार को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “मैं किसी भी तरह की नजर नहीं लगाना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि इस मोड़ पर हीट शील्ड की समस्या पूरी तरह से सुलझ चुकी है।” उन्होंने कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि उड़ानों की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ेगी। संभवतः आज से एक साल बाद हम रोजाना कम से कम एक फ्लाइट करेंगे, या शायद उससे भी ज्यादा।” नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘हीट शील्ड’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण? जब कोई स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो हवा के घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ‘हीट शील्ड’ स्पेसक्राफ्ट के बाहरी हिस्से पर लगाई जाने वाली एक सुरक्षात्मक परत है। यह इंसुलेटिंग मटीरियल से बनी होती है, जो इस गर्मी को झेलकर रॉकेट के अंदरूनी हिस्सों को जलने से बचाती है। स्टारशिप को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए हीट शील्ड का सुरक्षित रहना सबसे जरूरी शर्त है।

हवा में 171 फीट के रॉकेट को पकड़ेगा चॉपस्टिक टावर:अगस्त में स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी स्पेसएक्स; मस्क बोले- सालभर में रोजाना 1 फ्लाइट होगी

हवा में 171 फीट के रॉकेट को पकड़ेगा चॉपस्टिक टावर:अगस्त में स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी स्पेसएक्स; मस्क बोले- सालभर में रोजाना 1 फ्लाइट होगी

स्पेसएक्स इसी महीने इतिहास रचने की तैयारी में है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो कंपनी अगस्त खत्म होने से पहले अपने स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी। इस टेस्ट में स्पेसएक्स की टीम लॉन्च टावर के जरिए स्टारशिप के ऊपरी हिस्से ‘शिप’ को हवा में कैच करने की कोशिश करेगी। सेप्सएक्स दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। केवल स्टारशिप का ऊपरी हिस्सा 171 फीट का है। ‘शिप’ को टावर के ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स से पकड़ेंगे साउथ टेक्सास के स्टारबेस साइट पर 2 लॉन्च टावर हैं, जिनमें बड़े ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स लगे हैं। यह स्टारशिप को पैड पर असेंबल करते हैं। इन्हीं टावर्स पर स्टारशिप को कैच करने की तैयारी है। इससे पहले स्पेसएक्स 3 टेस्ट फ्लाइट में स्टारशिप के निचले हिस्से बूस्टर को कैच करने का कारनामा कर चुकी है, लेकिन शिप को कैच करने की यह पहली कोशिश होगी। स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे फ्लाइट 14 के जरिए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स का एक बैच भेजा जाएगा। यह मौजूदा सैटेलाइट्स से बड़े और ज्यादा सक्षम हैं। 24 जुलाई को हुई फ्लाइट 13 में 20 स्टारलिंक V3 भेजे गए थे, जो सब-ऑर्बिट में थे। फ्लाइट 14 में इन्हें ऑपरेशनल ऑर्बिट में रखा जाएगा। फ्लाइट 13 की सफलता ने बढ़ाया कंपनी का भरोसा 24 जुलाई को स्टारशिप की फ्लाइट 13 लॉन्च हुई थी। यह एक सब-ऑर्बिट उड़ान थी। इसकी हिंद महासागर में लैंडिंग कराई गई थी। मस्क ने बताया कि फ्लाइट 13 के दौरान वायुमंडल में वापस आते समय शिप की ‘हीट शील्ड’ पूरी तरह सुरक्षित रही। पूरा रॉकेट आज भी सुरक्षित है। हीट शील्ड की सफलता ने ही कंपनी को फ्लाइट 14 में टावर कैच का जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। हीट शील्ड की समस्या सुलझ चुकी है, जल्द रोजाना 1 फ्लाइट होगी स्पेसएक्स की अर्निंग्स कॉल के दौरान इलॉन मस्क ने स्टारशिप के भविष्य और इसकी रफ्तार को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “मैं किसी भी तरह की नजर नहीं लगाना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि इस मोड़ पर हीट शील्ड की समस्या पूरी तरह से सुलझ चुकी है।” उन्होंने कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि उड़ानों की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ेगी। संभवतः आज से एक साल बाद हम रोजाना कम से कम एक फ्लाइट करेंगे, या शायद उससे भी ज्यादा।” नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘हीट शील्ड’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण? जब कोई स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो हवा के घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ‘हीट शील्ड’ स्पेसक्राफ्ट के बाहरी हिस्से पर लगाई जाने वाली एक सुरक्षात्मक परत है। यह इंसुलेटिंग मटीरियल से बनी होती है, जो इस गर्मी को झेलकर रॉकेट के अंदरूनी हिस्सों को जलने से बचाती है। स्टारशिप को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए हीट शील्ड का सुरक्षित रहना सबसे जरूरी शर्त है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की सुरक्षा में चूक:हेलिकॉप्टर के पास से उड़ी कमर्शियल फ्लाइट, FAA ने जांच शुरू की

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की सुरक्षा में चूक:हेलिकॉप्टर के पास से उड़ी कमर्शियल फ्लाइट, FAA ने जांच शुरू की

वॉशिंगटन DC. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आधिकारिक हेलिकॉप्टर मरीन वन की उड़ान के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल में चूक का मामला सामने आया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक जिस वक्त ट्रम्प के हेलिकॉप्टर हवा में था, उसी दौरान व्हाइट हाउस के पास स्थित रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से उसी समय एक कमर्शियल विमान ने भी उड़ान भर ली। नियमों के अनुसार इस दौरान रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकना जरूरी होता है। हालांकि एयर ट्रैफिक कंट्रोल समय पर ऐसा नहीं कर सका और एक कमर्शियल जेट ने भी लगभग उसी समय टेकऑफ कर लिया। इस वजह से दोनों विमानों के बीच तय न्यूनतम सुरक्षा दूरी (स्टैंडर्ड सेपरेशन) नहीं रह सकी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दोनों विमान टक्कर की स्थिति में नहीं थे। घटना के बाद अमेरिकी विमानन नियामक फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने जांच शुरू कर दी है। व्हाइट हाउस बोला- राष्ट्रपति पर कोई खतरा नहीं था व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि इस घटना से राष्ट्रपति की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं था। उन्होंने कहा, “मरीन वन दुनिया के सबसे अनुभवी पायलट उड़ाते हैं और उड़ान के दौरान राष्ट्रपति कभी भी खतरे में नहीं थे।” FAA अब इस बात की जांच कर रहा है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल से यह प्रक्रियागत चूक कैसे हुई और कमर्शियल विमान को उड़ान की अनुमति क्यों दी गई। अमेरिकी विमानन नियमों के मुताबिक उड़ान के दौरान विमानों के बीच कम से कम 1.5 मील (करीब 2.4 किमी) की क्षैतिज दूरी या 500 फीट की ऊर्ध्वाधर दूरी बनाए रखना अनिवार्य है।

सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 78,700 पर पहुंचा:निफ्टी मामूली गिरावट के साथ 24,600 पर; आईटी शेयरों में बिकवाली, ऑटो में खरीदारी

सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 78,700 पर पहुंचा:निफ्टी मामूली गिरावट के साथ 24,600 पर; आईटी शेयरों में बिकवाली, ऑटो में खरीदारी

आज यानी गुरुवार, 6 अगस्त को सेंसेक्स 150 अंक (0.20%) की तेजी के साथ 78,700 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में 10 अंकों (0.04%) की गिरावट है, ये 24,600 पर आ गया है। आज के कारोबार में आईटी शेयरों में खरीदारी जबकि ऑटो शेयरों में बिकवाली है। एशियाई बाजारों में गिरावट अमेरिकी बाजार में कल मिला-जुला कारोबार रहा विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 2703 करोड़ के शेयर खरीदे कल सेंसेक्स 152 अंक चढ़कर 78,581 पर बंद हुआ था

सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 78,700 पर पहुंचा:निफ्टी मामूली गिरावट के साथ 24,600 पर; आईटी शेयरों में बिकवाली, ऑटो में खरीदारी

सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 78,700 पर पहुंचा:निफ्टी मामूली गिरावट के साथ 24,600 पर; आईटी शेयरों में बिकवाली, ऑटो में खरीदारी

आज यानी गुरुवार, 6 अगस्त को सेंसेक्स 150 अंक (0.20%) की तेजी के साथ 78,700 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में 10 अंकों (0.04%) की गिरावट है, ये 24,600 पर आ गया है। आज के कारोबार में आईटी शेयरों में खरीदारी जबकि ऑटो शेयरों में बिकवाली है। एशियाई बाजारों में गिरावट अमेरिकी बाजार में कल मिला-जुला कारोबार रहा विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 2703 करोड़ के शेयर खरीदे कल सेंसेक्स 152 अंक चढ़कर 78,581 पर बंद हुआ था

पाकिस्तान के 4 में से 2 सूबों में बागी तेवर:सरकार की पकड़ कमजोर; बलूचिस्तान-खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ी चुनौती

पाकिस्तान के 4 में से 2 सूबों में बागी तेवर:सरकार की पकड़ कमजोर; बलूचिस्तान-खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ी चुनौती

पाकिस्तान के चार सूबे हैं। इनमें से बलूचिस्तान सूबे में अलगाववादी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा सूबे में अफगा​न तालिबान का दबदबा है। आए दिन तालिबान के हमलों से यहां पाक फौज के पांव उखड़ रहे हैं। पढ़िए बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से भास्कर संवाददाता सिकंदर सूरी की ग्राउंड रिपोर्ट… बलूचिस्तान- PAK के हाथ से 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाक का सबसे बड़ा सूबा है। ये लगभग 45% क्षेत्र में फैला है। ईरान से इसकी सरहद लगती है। बलूचिस्तान में दूर-दूर तक खाली मैदान और रेगिस्तान हैं। यहां की वीरानगी में इन दिनों बागी तेवर और तेज हो गए हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग कर रहे हैं। हालात ये हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का बलूचिस्तान सूबे के लगभग 70% हिस्से पर कब्जा है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल कितने विद्रोहियों को ढेर करते हैं या गिरफ्तार करते हैं। असली सवाल यह है कि क्या पाकिस्तानी सरकार पुलिस स्टेशन खुले रख सकती है, हाईवे पर यातायात चला सकती है, बाजार और कारोबार सामान्य रख सकती है और लोगों को बिना डर के यात्रा करने की सुरक्षा दे सकती है? बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके क्वेटा, खुजदार और मसतुंग जैसे शहरों में घुसकर पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अस्थायी चौकियां बना रहे हैं और वाहनों की तलाशी लेते हैं। खुलेआम वसूली भी होती है। यह सब BLA फंड के लिए होता है। गुस्सा… खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा है बलूचिस्तान को पाकिस्तान के खनिजों की खदान भी कहते हैं। बात शुरू की तो खुजदार शहर के युवक मोमिन का पाक सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। मोमिन कहते हैं यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। चीन ने सीपैक के नाम पर यहां लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की फिशिंग बोट्स का कब्जा है। स्थानीय बलूच मछुआरों को चीनी बोट्स खदेड़ देती हैं। इनकी बोट्स बड़ी और ज्यादा पावर वाली होती हैं। ज्यादातर बलूच मछुआरों के पास अब भी पालदार नौकाएं हैं। बलूच बेरोजगार हो रहे हैं। 55 साल के असलम का कहना है कि यहां के रेयर अर्थ मिनरल पर अमेरिका का कब्जा है। पाक आर्मी चीफ मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने मिनरल की नुमाइश करते हैं। इस खजाने पर केवल बलूचों का हक है। खैबर…यहां तालिबानी शरिया सरकार काबिज खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का फ्रंटियर यानी सरहदी इलाका है। डूरंड लाइन पाक और अफगानिस्तान को अलग करती है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के पांच साल में खैबर के अधिकांश इलाके में इन्हीं का दबदबा है। खैबर में पाक सरकार के कानून नहीं तालिबान का शरिया चलता है। दरअसल, इस इलाके में विभाजन के समय से ही कबिलाई व्यवस्था लागू रही है। स्वात, सैदू, मिंगाेरा और मर्दन में ‘लोया जिरगा’ के जरिए ही कानून चलता है। ये जिरगा असल में शरिया कानून को लागू करती है। अफगान तालिबान इसका संरक्षक है। अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) संगठन को अपने ठिकानों में पनाह देता है। इमरान खान की सरकार ने 2021 में टीटीपी के साथ सुलह की कोशिश की, लेकिन इमरान की गद्दी जाते ही टीटीपी ने खैबर में अपने दबदबे को और बढ़ा लिया है। खैबर के वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना कई सैन्य ऑपरेशन कर चुकी है, लेकिन यहां अब टीटीपी काबिज है। आए दिन टीटीपी के हमलों के कारण स्कूल और काॅलेज बंद रहते हैं। पंजाब और सिंध के मूल निवासी कर्मचारी खैबर में अपनी पोस्टिंग नहीं चाहते हैं। खौफ… हमलों से पाक की 50 फौजी चौकियां खाली खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के आए दिन होने वाले हमलों से पाक सेना में खौफ है। इस साल टीटीपी फौज पर 145 से ज्यादा हमले कर चुकी है, इनमें 48 सैनिक मारे गए। खैबर में डूरंड लाइन पर अभी पाक सेना की 50 फौजी चौकियां खाली हैं। 22 पोस्ट पर ही पाक फौज तैनात है। स्वात में रहने वाले सगीर (22) का कहना है कि खैबर के लोग अपनी हुकूमत चाहते हैं। पाक सरकारों ने यहां पंजाबियों और सिंध के रिटायर्ड फौजियों को मुफ्त जमीन देकर बसाने की कोशिशें भी कीं। ये हमारी कबिलाई पहचान को मिटाने की साजिश थी। एक रणनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि टीटीपी और इस्लामिक स्टेट खुरासान यानी आईएसकेपी जैसे संगठन हमलों में आपसी सहयोग कर रहे हैं। इन दोनों संगठनों की ताकत से अब खैबर में पाक सरकार के पांव उखड़ रहे हैं।

पाकिस्तान के 4 में से 2 सूबों में बागी तेवर:सरकार की पकड़ कमजोर; बलूचिस्तान-खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ी चुनौती

पाकिस्तान के 4 में से 2 सूबों में बागी तेवर:सरकार की पकड़ कमजोर; बलूचिस्तान-खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ी चुनौती

पाकिस्तान के चार सूबे हैं। इनमें से बलूचिस्तान सूबे में अलगाववादी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा सूबे में अफगा​न तालिबान का दबदबा है। आए दिन तालिबान के हमलों से यहां पाक फौज के पांव उखड़ रहे हैं। पढ़िए बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से भास्कर संवाददाता सिकंदर सूरी की ग्राउंड रिपोर्ट… बलूचिस्तान- PAK के हाथ से 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पाकिस्तानी सेना कितने विद्रोहियों को मार रही है या पकड़ रही है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार यहां पुलिस थाने चला पा रही है? क्या हाईवे सुरक्षित हैं? क्या बाजार खुल रहे हैं? और क्या लोग बिना डर के एक शहर से दूसरे शहर जा सकते हैं? बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। गुस्सा… खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा है बलूचिस्तान को पाकिस्तान के खनिजों की खदान भी कहते हैं। बात शुरू की तो खुजदार शहर के युवक मोमिन का पाक सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। मोमिन कहते हैं यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। चीन ने सीपैक के नाम पर यहां लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की फिशिंग बोट्स का कब्जा है। स्थानीय बलूच मछुआरों को चीनी बोट्स खदेड़ देती हैं। इनकी बोट्स बड़ी और ज्यादा पावर वाली होती हैं। ज्यादातर बलूच मछुआरों के पास अब भी पालदार नौकाएं हैं। बलूच बेरोजगार हो रहे हैं। 55 साल के असलम का कहना है कि यहां के रेयर अर्थ मिनरल पर अमेरिका का कब्जा है। पाक आर्मी चीफ मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने मिनरल की नुमाइश करते हैं। इस खजाने पर केवल बलूचों का हक है। खैबर…यहां तालिबानी शरिया सरकार काबिज खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का फ्रंटियर यानी सरहदी इलाका है। डूरंड लाइन पाक और अफगानिस्तान को अलग करती है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के पांच साल में खैबर के अधिकांश इलाके में इन्हीं का दबदबा है। खैबर में पाक सरकार के कानून नहीं तालिबान का शरिया चलता है। दरअसल, इस इलाके में विभाजन के समय से ही कबिलाई व्यवस्था लागू रही है। स्वात, सैदू, मिंगाेरा और मर्दन में ‘लोया जिरगा’ के जरिए ही कानून चलता है। ये जिरगा असल में शरिया कानून को लागू करती है। अफगान तालिबान इसका संरक्षक है। अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) संगठन को अपने ठिकानों में पनाह देता है। इमरान खान की सरकार ने 2021 में TTP के साथ सुलह की कोशिश की, लेकिन इमरान की गद्दी जाते ही TTP ने खैबर में अपने दबदबे को और बढ़ा लिया है। खैबर के वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना कई सैन्य ऑपरेशन कर चुकी है, लेकिन यहां अब TTP काबिज है। आए दिन TTP के हमलों के कारण स्कूल और काॅलेज बंद रहते हैं। पंजाब और सिंध के मूल निवासी कर्मचारी खैबर में अपनी पोस्टिंग नहीं चाहते हैं। खौफ… हमलों से पाक की 50 फौजी चौकियां खाली खैबर पख्तूनख्वा में TTP के आए दिन होने वाले हमलों से पाक सेना में खौफ है। इस साल TTP फौज पर 145 से ज्यादा हमले कर चुकी है, इनमें 48 सैनिक मारे गए। खैबर में डूरंड लाइन पर अभी पाक सेना की 50 फौजी चौकियां खाली हैं। 22 पोस्ट पर ही पाक फौज तैनात है। स्वात में रहने वाले सगीर (22) का कहना है कि खैबर के लोग अपनी हुकूमत चाहते हैं। पाक सरकारों ने यहां पंजाबियों और सिंध के रिटायर्ड फौजियों को मुफ्त जमीन देकर बसाने की कोशिशें भी कीं। ये हमारी कबिलाई पहचान को मिटाने की साजिश थी। एक रणनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि TTP और इस्लामिक स्टेट खुरासान यानी आईएसकेपी जैसे संगठन हमलों में आपसी सहयोग कर रहे हैं। इन दोनों संगठनों की ताकत से अब खैबर में पाक सरकार के पांव उखड़ रहे हैं।

चंडीगढ़ पुलिस कांस्टेबल भर्ती के नियम बदले:अब इंटरव्यू नहीं होगा, 3 भाषाओं में क्वेश्चन पेपर आएगा; गलत जवाब पर नेगेटिव मार्किंग

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चंडीगढ़ पुलिस विभाग के भर्ती नियमों में बदलाव हुआ है। पुलिस विभाग में ग्रुप-C (एग्जीक्यूटिव) पुरुष और महिला कांस्टेबलों की भर्ती के नियम बदल गए हैं। अब जहां लिखित परीक्षा आवेदक तीनों भाषाओं में दे पाएंगे, वहीं लिखित परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी होगी। सबसे खास बात यह है कि उन्हें इंटरव्यू की प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना पड़ेगा। केवल लिखित परीक्षा व बोनस अंकों से अंतिम मेरिट बनेगी। इसके लिए द कांस्टेबल भर्ती (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी गई है। वहीं, भविष्य में होने वाली भर्ती प्रक्रिया ट्रांसपेरेंट रिक्रूटमेंट प्रोसेस (TRP) के नियमों के तहत होगी। भर्ती प्रोसेस के 5 नियम जानिए