राहुल गांधी ‘दोहरी नागरिकता विवाद’ में इलाहाबाद HC ने FIR का आदेश दिया: क्या कोई भारतीय सांसद विदेशी पासपोर्ट रख सकता है? | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 18:13 IST कांग्रेस ने ऐतिहासिक रूप से इन दावों को पुनर्चक्रित ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के रूप में खारिज कर दिया है राहुल गांधी के मामले में, दांव असाधारण रूप से ऊंचे हैं; एक महत्वपूर्ण विशेष संसद सत्र के दौरान विपक्ष के नेता के रूप में, दोहरी नागरिकता का पता चलने से न केवल उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनावी प्रतियोगिताओं से भी रोका जा सकता है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई भारत में राजनीतिक परिदृश्य को शुक्रवार को झटका लगा जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा के विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश उनकी कथित दोहरी नागरिकता को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से संबंधित है – एक ऐसा आरोप, जो यदि प्रमाणित होता है, तो संसद में सेवा करने की उनकी योग्यता पर गहरा प्रभाव डालता है। निर्देश प्रभावी रूप से लखनऊ में एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत के पिछले जनवरी के फैसले को रद्द कर देता है, जिसने याचिका को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश में प्राथमिक आरोप क्या हैं? यह आदेश कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर आधारित है, जो यूनाइटेड किंगडम से “गोपनीय ईमेल” और कॉर्पोरेट दस्तावेज़ रखने का दावा करता है। याचिकाकर्ता के अनुसार, गांधी ने 2003 और 2009 के बीच अब भंग हो चुकी ब्रिटेन स्थित फर्म, मेसर्स बैकॉप्स लिमिटेड के वार्षिक रिटर्न में स्वेच्छा से अपनी राष्ट्रीयता “ब्रिटिश” घोषित की थी। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की अध्यक्षता में उच्च न्यायालय ने कहा कि इन आरोपों की प्रकृति के कारण आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत गहन जांच की आवश्यकता है। अदालत ने गांधी के वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली के कोतवाली पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार को या तो अपनी राज्य एजेंसियों के माध्यम से जांच कराने या मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की छूट दी गई है। याचिकाकर्ता ने फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “मील का पत्थर” बताया है, जबकि कांग्रेस ने अभी तक औपचारिक खंडन जारी नहीं किया है, हालांकि उसने ऐतिहासिक रूप से इन दावों को पुनर्चक्रित “राजनीतिक प्रतिशोध” के रूप में खारिज कर दिया है। क्या कोई भारतीय सांसद कानूनी रूप से ब्रिटिश नागरिकता धारण कर सकता है? भारत के संविधान के वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत, उत्तर निश्चित रूप से नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 9 स्पष्ट रूप से दोहरी नागरिकता पर रोक लगाता है। इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो “स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त करता है” स्वचालित रूप से भारत का नागरिक बनना बंद कर देता है। चूँकि अनुच्छेद 84 के तहत लोकसभा या राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए भारतीय नागरिकता एक अनिवार्य शर्त है, इसलिए किसी भी व्यक्ति के पास विदेशी पासपोर्ट होने की पुष्टि होने पर उसे तुरंत उसकी सीट से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। इस संवैधानिक कठोरता को 1955 के नागरिकता अधिनियम और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 द्वारा और अधिक मजबूत किया गया है। यदि एक जांच से पुष्टि होती है कि एक सांसद के पास विदेशी राष्ट्रीयता है, तो भारत के राष्ट्रपति, चुनाव आयोग की सलाह पर कार्य करते हुए, उनकी सीट को रिक्त घोषित करने की शक्ति रखते हैं। राहुल गांधी के मामले में, दांव असाधारण रूप से ऊंचे हैं; एक महत्वपूर्ण विशेष संसद सत्र के दौरान विपक्ष के नेता के रूप में, दोहरी नागरिकता का पता चलने से न केवल उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, बल्कि उन्हें भविष्य की चुनावी प्रतियोगिताओं से भी रोका जा सकता है। यह कानूनी घटनाक्रम वर्तमान संसद सत्र को कैसे प्रभावित करता है? उच्च न्यायालय के आदेश का समय राजनीतिक रूप से विस्फोटक है, जो संविधान (131वें संशोधन) विधेयक पर अंतिम बहस के साथ बिल्कुल मेल खाता है। जैसा कि सदन बड़े पैमाने पर 850 सीटों के विस्तार और महिला आरक्षण कोटा पर मतदान करने की तैयारी कर रहा है, एफआईआर सरकार की गांधी की आक्रामक “जहर की गोली” आलोचना के लिए एक शक्तिशाली प्रति-कथा के रूप में कार्य करती है। यह कदम संभावित रूप से कांग्रेस नेतृत्व को अपने नेता की पहचान पर रक्षात्मक कानूनी लड़ाई के लिए “गणितीय गैरमांडरिंग” पर आक्रामक होने के लिए मजबूर करता है। गृह मंत्रालय (एमएचए) ने पहले ही इस मामले पर 2019 के नोटिस से संबंधित गोपनीय रिकॉर्ड का अध्ययन कर लिया है, जांच तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। क्या जांच को सीबीआई के अधिग्रहण के लिए आगे बढ़ना चाहिए, इसमें संभवतः अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दो दशक पहले की राष्ट्रीयता घोषणाओं को सत्यापित करने के लिए यूके कंपनी हाउस के रिकॉर्ड का अवलोकन शामिल होगा। अभी के लिए, “नागरिकता बम” ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि जब सरकार भारत के चुनावी मानचित्र को फिर से बनाती है, तो उसके मुख्य आलोचक की व्यक्तिगत स्थिति कानूनी माइक्रोस्कोप के तहत बनी रहती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 18:12 IST समाचार राजनीति राहुल गांधी ‘दोहरी नागरिकता विवाद’ में इलाहाबाद HC ने FIR का आदेश दिया: क्या कोई भारतीय सांसद विदेशी पासपोर्ट रख सकता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
दिखने में साधारण…. लेकिन असर चौंकाने वाला, क्या है बनमारा पौधे का सच? वैज्ञानिक भी कर रहे हैं रिसर्च

Last Updated:April 17, 2026, 18:06 IST हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला बनमारा, जिसे स्थानीय भाषा में काला बांसा कहा जाता है, एक ऐसा जंगली पौधा है जो तेजी से फैलता है. यह जहां एक ओर पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी माना जाता है, वहीं दूसरी ओर इसके आक्रामक स्वभाव के कारण यह पर्यावरण के लिए चुनौती भी बन जाता है. बागेश्वर: बनमारा जिसे स्थानीय भाषा में काला बांसा भी कहा जाता है, पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से फैलने वाला एक जंगली पौधा है. यह मुख्य रूप से उत्तराखंड, दार्जिलिंग और हिमालयी इलाकों में पाया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम एगेराटिना एडेनोफोरा है. यह पौधा देखने में साधारण झाड़ी जैसा होता है, जिसमें छोटे सफेद फूल खिलते हैं. यह तेजी से फैलता है, कई बार खेती योग्य जमीन और जंगलों पर कब्जा कर लेता है. हालांकि, इसके औषधीय गुणों के कारण ग्रामीण इलाकों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. पारंपरिक ज्ञान में इसे एक उपयोगी जड़ी-बूटी माना जाता है, लेकिन इसकी सही पहचान और उपयोग की जानकारी होना बेहद जरूरी है. बनमारा के पत्तों और तने का रस पारंपरिक रूप से घाव भरने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ग्रामीण लोग इसे छोटे कट, खरोंच या जख्म पर लगाते हैं, जिससे खून बहना कम होता है, घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा को सुरक्षित रखने और संक्रमण से बचाने में सहायक माने जाते हैं. कई लोग इसे एंटीसेप्टिक की तरह इस्तेमाल करते हैं, खासकर तब जब आसपास कोई दवा उपलब्ध नहीं होती है. हालांकि, इसका उपयोग केवल बाहरी रूप से ही करना सुरक्षित माना जाता है. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि इस पौधे में सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण इसे दर्द और सूजन में राहत के लिए भी उपयोग किया जाता है. बनमारा के पत्तों को पीसकर प्रभावित जगह पर लगाने से सूजन में कमी आ सकती है. इसके प्राकृतिक तत्व शरीर की सूजन प्रतिक्रिया को कम करने में मदद करते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए इसे लगाने से पहले थोड़ी मात्रा में परीक्षण करना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की एलर्जी या जलन की समस्या न हो. Add News18 as Preferred Source on Google बनमारा का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे खुजली, दाद या हल्के संक्रमण में भी किया जाता है. इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके पत्तों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाते हैं. इससे त्वचा को ठंडक मिलती है, जलन में राहत मिल सकती है. हालांकि, यह कोई प्रमाणित चिकित्सा उपचार नहीं है, इसलिए गंभीर त्वचा रोगों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. गलत उपयोग से समस्या बढ़ भी सकती है. कुछ शोधों में पाया गया है कि बनमारा पौधे में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं. ये तत्व शरीर को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. इस पौधे के इन गुणों पर अभी और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है. पारंपरिक उपयोग के आधार पर इसे लाभकारी माना जाता है, लेकिन इसे औषधि के रूप में अपनाने से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है. दार्जिलिंग और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बनमारा का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में सांप के काटने और मानसिक समस्याओं के इलाज में भी किया जाता रहा है. इन दावों के पीछे ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. यह अधिकतर लोक मान्यताओं और पुराने अनुभवों पर आधारित है. कई ग्रामीण आज भी इन परंपराओं का पालन करते हैं, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के अनुसार ऐसे मामलों में डॉक्टर की सहायता लेना बेहद जरूरी है. केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है, खासकर जब मामला गंभीर हो. बनमारा पौधा जहां इंसानों के लिए सीमित उपयोग में लाभकारी माना जाता है, वहीं यह पशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है. खासकर घोड़े और अन्य पालतू जानवर अगर इसे खा लें तो उनके लिए यह विषैला साबित हो सकता है. इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए जिन क्षेत्रों में यह पौधा अधिक मात्रा में उगता है, वहां पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. जानवरों को इससे दूर रखना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की बीमारी या नुकसान से बचा जा सके. बनमारा एक आक्रामक खरपतवार है, जो बहुत तेजी से फैलता है, स्थानीय पौधों को नुकसान पहुंचाता है. यह जमीन की उर्वरता को प्रभावित करता है और जैव विविधता के लिए खतरा बन सकता है. जंगलों और खेती की जमीन में फैलकर यह अन्य उपयोगी पौधों की वृद्धि को रोक देता है. इसलिए कई क्षेत्रों में इसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता जरूरी है. First Published : April 17, 2026, 18:06 IST
सरपंच पति पर हमला करने वाले तीन आरोपी पकड़ाए:शादी विवाद में रॉड से किया था वार , 6 बदमाश अभी भी फरार

बालाघाट जिले के हट्टा थाना क्षेत्र में सरपंच पति आतिश लिल्हारे पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने 10 दिन बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घटना 7 अप्रैल को कोहकाडीबर गांव में एक शादी समारोह के दौरान हुई थी। जानकारी के अनुसार, शादी समारोह में विवाद के बाद नौ लोगों ने मिलकर आतिश लिल्हारे पर हमला कर दिया था। हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनका इलाज गोंदिया अस्पताल में चल रहा है। तीन आरोपी गिरफ्तार, हथियार भी बरामद पुलिस ने कोहकाडीबर निवासी महेश पिछोडे, राजेन्द्र मस्करे और सीताराम जामरे को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से लोहे की रॉड और अन्य हमला करने में इस्तेमाल किए गए हथियार भी जब्त किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। छह आरोपी अभी भी फरार मामले में चिमनलाल बिरनवार, राजू बिरनवार, गुड्डु बिरनवार, शैलेन्द्र मसकरे, सीताराम मसकरे और योगेश बिसेन अभी फरार हैं। थाना प्रभारी अविनाश राठौर ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं और उन्हें जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
युवक का सेप्टिक टैंक में 9 टुकड़ों में मिला शव:6 दिन से लापता था, स्थानीय निवासियों ने बड़े भाई पर मर्डर का जताया शव

मंडला के अंजनिया चौकी क्षेत्र में शुक्रवार को एक युवक का शव घर के सेप्टिक टैंक से 9 टुकड़ों में बरामद किया गया है। मृतक की पहचान करियागांव निवासी आशीष साहू के रूप में हुई है। वह 6 दिन पहले यानी 11 अप्रैल से लापता था। खोजबीन के बाद परिजनों ने 15 अप्रैल को अंजनिया चौकी में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सेप्टिक टैंक से बदबू आने पर हुआ खुलासा जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को मृतक के पिता मुन्ना लाल साहू ने पुलिस को सूचना दी कि घर के सेप्टिक टैंक से तेज बदबू आ रही है। पुलिस मौके पर पहुंची और टैंक की जांच की, तो अंदर कपड़े में लिपटे शव के टुकड़े मिले। बाद में मुन्ना लाल ने शव की पहचान अपने बेटे आशीष के रूप में की। घटना की सूचना मिलते ही एडिशनल एसपी शिवकुमार वर्मा भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया। एफएसएल टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए अंजनिया भेजा गया है। मृतक के बड़े भाई पर हत्या का शक इस मामले में मृतक के बड़े भाई घनश्याम साहू पर शक जताया जा रहा है। पिता और स्थानीय लोगों ने भी उसी पर संदेह व्यक्त किया है। फिलहाल पुलिस घनश्याम से गहन पूछताछ कर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों भाई अलग-अलग काम करते थे। आशीष ने कुछ समय पहले ट्रैक्टर खरीदा था और उसी से रोजगार चला रहा था, जबकि घनश्याम मंडला की एक फैक्ट्री में काम करता है। दोनों की मां भी 2019 से लापता बताई जा रही है। पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और हत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने में जुटी है।
15 बैंकों को सोना-चांदी के इंपोर्ट का नया लाइसेंस मिला:SBI, PNB और HDFC लिस्ट में शामिल, देश में सप्लाई की कमी नहीं होगी

केंद्र सरकार ने देश के 15 प्रमुख बैंकों को 31 मार्च 2029 तक सोना और चांदी इंपोर्ट करने की अनुमति दे दी है। इस लिस्ट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और HDFC बैंक जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह मंजूरी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने नोटिफिकेशन जारी कर इसकी जानकारी दी है। इन 15 बैंकों को सोना-चांदी के इम्पोर्ट की मंजूरी मिली अक्षय तृतीया से पहले आई नई लिस्ट यह फैसला 19 अप्रैल 2026 को आने वाली अक्षय तृतीया से ठीक पहले लिया गया है। भारत में अक्षय तृतीया को शादी के सीजन के अलावा सोना खरीदने का सबसे बड़ा मौका माना जाता है। रिटेल सेल्स में इस त्योहार की हिस्सेदारी करीब 15% से 20% तक होती है। पिछले कुछ हफ्तों में कीमतों में आई गिरावट के कारण एनालिस्ट इसे खरीदारों के लिए अच्छा मौका मान रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के बाद मची थी हलचल इससे पहले एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सरकारी नोटिफिकेशन न होने के कारण बैंकों ने गोल्ड और सिल्वर के ऑर्डर रोक दिए थे। इसके चलते कंसाइनमेंट कस्टम पर फंस गए थे। इस खबर के बाद शुक्रवार को ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। कल्याण ज्वेलर्स का शेयर 6% और टाइटन का शेयर 3% तक टूट गया। वहीं सरकारी ट्रेडिंग कंपनी MMTC के शेयरों में 16% की तेजी रही। आम आदमी को 3 बड़े फायदे ट्रेड डेफिसिट कंट्रोल करने के लिए भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2025 में भारत में सोने की मांग गिरकर 710.9 मीट्रिक टन रही, जो 5 साल का निचला स्तर है। ईरान संघर्ष की वजह से तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ने की आशंका है। ऐसे में सरकार ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) को कंट्रोल करने के लिए रेगुलेट कर रही है। सोना-चांदी का अवैध व्यापार रोकने में मदद मिलेगी DGFT के इस कदम से अगले 3 साल के लिए बुलियन ट्रेड में स्पष्टता आएगी। इससे ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और इंस्टीट्यूशनल खरीदारों को सप्लाई चेन बनाए रखने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य सोने-चांदी के आयात को रेगुलेटेड चैनलों के जरिए लाना है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अवैध व्यापार पर रोक लगे। नोटिफिकेशन में देरी से फंसा था करोड़ों का सोना-चांदी पिछले कुछ दिनों से देश में सोने और चांदी की नई खेप आने में दिक्कत हो रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की ओर से औपचारिक नोटिफिकेशन जारी न होने के कारण बैंकों ने नए ऑर्डर देना बंद कर दिया था। जो खेप पहले ही भारत पहुंच चुकी थी, वह भी कस्टम क्लियरेंस न मिलने की वजह से बंदरगाहों पर अटकी हुई थी। दरअसल, पिछला आधिकारिक आदेश 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया था। नई लिस्ट जारी होने में देरी से ज्वेलर्स और डीलरों को डर था कि इससे घरेलू बाजार में सप्लाई कम हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। नॉलेज पार्ट: DGFT क्या है? डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का एक अटैच्ड ऑफिस है। इसका मुख्य काम विदेशी व्यापार से जुड़ी नीतियां बनाना और उन्हें लागू करना है, जैसे एक्सपोर्ट-इंपोर्ट (EXIM) पॉलिसी।
Cottage Cheese Vs Paneer: कॉटेज चीज और पनीर में फर्क है? किसमें ज्यादा प्रोटीन, सेहत के लिए क्या है हेल्दी ऑप्शन, जानें दोनों का अंतर

Last Updated:April 17, 2026, 17:29 IST Cottage Cheese vs Paneer: कॉटेज चीज और पनीर को लेकर ज्यादातर लोगों को कंफ्यूजन रहता है. दोनों ही ताजे चीज हैं जिनका इस्तेमाल रेसिपीज में किया जाता है, लेकिन इन दोनों की अपनी-अपनी कुछ खास विशेषताएं होती हैं. ऐसे में सेहत और कुकिंग के लिहाज से बेस्ट ऑप्शन क्या है, चलिए इस लेख में समझते हैं. ख़बरें फटाफट भारतीय घरों में डेयरी प्रॉडक्ट का इस्तेमाल काफी लंबे समय से होता आ रहा है. दूध, दही और घी के बारे में लगभग हर कोई जानता है. लेकिन आज के समय में जब बात पनीर की आती है, तो कंफ्यूजन बढ़ जाता है और मन में दस तरह के सवाल उठने लगते हैं. इसका कारण है वेस्ट में दूध से बनाए जाने वाले प्रोडक्ट. कॉटेज चीज ऐसा ही एक खाए जाने वाला डेयरी आइटम है, जिसे लगभग पनीर की तरह ही होता है. कई लोग इसे पनीर ही मानते हैं. लेकिन वास्तव में दोनों कितने अलग हैं, और आपकी सेहत के लिए बेस्ट ऑप्शन क्या है, चलिए जानते हैं. क्या पनीर और कॉटेज चीज एक ही है?नहीं, पनीर और कॉटेज चीज एक ही नहीं है. हालांकि दोनों ही फ्रेश चीज है, जिसका इस्तेमाल भारतीय घरों में बड़े स्तर पर होता है. लेकिन दोनों में बनाने प्रक्रिया से लेकर सेहत से जुड़े फायदों तक दोनों में काफी अंतर होता है. हालांकि सॉफ्ट और फिक्स्ड, फर्म टेक्सचर के कारण ज्यादा करी वारी रेसिपीज के लिए लोगों की पहली पसंद पनीर ही होती. पनीर और कॉटेज चीज में अंतर मेकिंग प्रोसेस- घर पर कॉटेज चीज बनाने के लिए फुल-क्रीम दूध को गर्म किया जाता है, और फिर उसमें सिरका या नींबू का रस मिलाया जाता है ताकि दूध फट जाए और चीज मट्ठे से अलग हो जाए. 30 मिनट तक रखने के बाद, चीज को छान लिया जाता है. फिर इसे ठंडे पानी से धोया जाता है. फिर इसमें स्वाद के अनुसार नमक और क्रीम मिलाया जाता है. वहीं, पनीर को बनाने के लिए 1 लीटर फुल-फैट दूध को उबालें, उसे फाड़ने के लिए उसमें 2–3 बड़े चम्मच नींबू का रस या सिरका डालें. इससे जब दूध फट जाए तो उसे मलमल के कपड़े से छान लें. खट्टापन हटाने के लिए उसे धो लें, और फिर 1–2 घंटे तक किसी भारी चीज से दबाकर रखें. इस तरह आपको बिना किसी प्रिजर्वेटिव के ताजा और मुलायम पनीर मिल जाएगा. टेस्ट और टेक्सचर- कॉटेज पनीर अपनी मुलायम और क्रीमी बनावट के साथ-साथ हल्के स्वाद के लिए जाना जाता है. इसके दही के कणों को मट्ठे में ढीला छोड़ दिए जाने के कारण इसकी बनावट थोड़ी दानेदार होती है. जबकि पनीर चीज का एक ठोस टुकड़ा होता है, जिसकी बनावट घनी और भुरभुरी होती है, और इसका स्वाद हल्का व दूधिया होता है. न्यूट्रिशन वैल्यू- USDA के अनुसार, पनीर की 100g सर्विंग में लगभग 21g प्रोटीन होता है. जबकि कॉटेज चीज में ये मात्रा लगभग 11g होता है.पनीर में प्रोटीन की मात्रा कॉटेज चीज की तुलना में लगभग दोगुनी होती है.वहीं, पनीर में कैलोरी की मात्रा प्रति 100g 321 होती है और कॉटेज चीज की 100g सर्विंग में 98 कैलोरी होती हैं. इसके अलावा कॉटेज चीज में आमतौर पर कैल्शियम, फॉस्फॉरस, सेलेनियम और विटामिन B12 की अच्छी-खासी मात्रा होती है. वहीं, पनीर में भी कैल्शियम और फॉस्फोरस के अलावा विटामिन A और राइबोफ्लेविन भी होता है. फायदे- कॉटेज चीज मौजूद गुण इसे हड्डियों, एनर्जी और मेटाबॉलिज्म के लिए एक पौष्टिक विकल्प बनाते हैं. जबकि पनीर एनर्जी और हड्डियों के साथ आंखों के लिए भी फायदेमंद साबित होता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 17, 2026, 17:29 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
‘विधायी हाथ की सफाई’, ‘महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं’: राहुल गांधी ने लोकसभा में क्या कहा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 16:20 IST विपक्ष के नेता ने दावा किया कि सरकार ने विवादास्पद परिसीमन प्रक्रिया को विफल करने के लिए महिला सशक्तीकरण के वादे को ‘राजनीतिक ढाल’ के रूप में इस्तेमाल किया है। गांधी ने तर्क दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है, तो वह मौजूदा 543 सीटों के ढांचे के भीतर कोटा को तुरंत लागू करेगी। फ़ाइल चित्र/पीटीआई भारत के चुनावी मानचित्र पर विधायी लड़ाई को तेज करते हुए, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद की विशेष बैठक के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर तीखा हमला किया। गांधी ने आरोप लगाया कि नया कानून 2023 के 106वें संशोधन अधिनियम से एक “खतरनाक प्रस्थान” है, उन्होंने दावा किया कि सरकार ने विवादास्पद परिसीमन अभ्यास को विफल करने के लिए महिला सशक्तीकरण के वादे को “राजनीतिक ढाल” के रूप में इस्तेमाल किया है। भरी लोकसभा में बोलते हुए, उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा विधेयक का “महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है” और इसके बजाय यह सीटों के असंवैधानिक विस्तार के माध्यम से राजनीतिक शक्ति को मजबूत करने का एक कदम है। राहुल गांधी यह दावा क्यों करते हैं कि 2026 का विधेयक 2023 के कानून से अलग है? विपक्ष के तर्क का सार नई जनगणना से महिलाओं के कोटे को अलग करने में निहित है। गांधी ने बताया कि 2023 अधिनियम, जिसका उन्होंने और कांग्रेस पार्टी ने समर्थन किया था, विशेष रूप से 33 प्रतिशत आरक्षण के कार्यान्वयन को “अधिनियम के शुरू होने के बाद आयोजित पहली जनगणना” से जोड़ता है। 131वां संशोधन पेश करके, सरकार ने इस आवश्यकता को हटा दिया है, जिससे 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आगे बढ़ने की अनुमति मिल गई है। राहुल गांधी ने इसे “विधायी हाथ की सफाई” करार दिया, यह तर्क देते हुए कि सरकार अनिवार्य रूप से लैंगिक न्याय की आड़ में 2029 के चुनावों के लिए निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से तैयार करने के लिए 15 साल पुराने डेटा का उपयोग कर रही है। इसके अलावा, गांधी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2026 का विधेयक सदन को 850 सीटों तक व्यापक विस्तार प्रदान करता है, एक प्रावधान जो मूल 2023 जनादेश का हिस्सा नहीं था। उन्होंने दलील दी कि परिसीमन विधेयक में महिला कोटा का विलय कर सरकार ने विपक्ष के लिए ”जहर की गोली” बना दी है। विपक्ष के नेता ने सुझाव दिया कि 2023 अधिनियम महिलाओं के सम्मान के बारे में था, जबकि 2026 का संशोधन “गणितीय गैरमांडरिंग” के बारे में है, जिसका उद्देश्य दक्षिणी और पूर्वी राज्यों की कीमत पर हिंदी हार्टलैंड को लाभ पहुंचाना है। विपक्ष आरक्षण और परिसीमन के बीच संबंध को कैसे देखता है? राहुल गांधी और व्यापक भारतीय गुट के लिए, इन दोनों मुद्दों को जोड़ना “संघवाद पर हमला” है। गांधी ने तर्क दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है, तो वह मौजूदा 543 सीटों के ढांचे के भीतर कोटा को तुरंत लागू करेगी। उन्होंने सवाल किया कि 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर सीट-बंटवारे के लिए इंतजार क्यों करना चाहिए, जो सफल जनसंख्या स्थिरीकरण रिकॉर्ड वाले राज्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। गांधी ने आरोप लगाया कि दोनों को जोड़कर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जो भी सांसद “त्रुटिपूर्ण” परिसीमन मानचित्र के खिलाफ वोट करेगा, उसे गलत तरीके से “महिला विरोधी” करार दिया जाएगा। कांग्रेस नेता ने जाति-आधारित जनगणना की अपनी मांग भी तेज कर दी और कहा कि ओबीसी उप-कोटा के बिना आरक्षण की कोई भी बात खोखली है। उन्होंने दावा किया कि 2026 का कानून जानबूझकर इस मुद्दे को टालता है, “शक्ति संरचना को मजबूत करता है जो हाशिये पर पड़े लोगों को बाहर करता है।” अपने संबोधन के कुछ हिस्सों के दौरान ट्रेजरी बेंच की हंसी ने गांधी को यह दोहराने के लिए प्रेरित किया कि बिल की “चालाकी” – उनकी सहयोगी प्रियंका गांधी के पहले “चाणक्य” तंज का संदर्भ – अंततः मतदाताओं द्वारा देखा जाएगा। गांधी के ‘पिछले दरवाजे’ के आरोपों पर सरकार का प्रतिवाद क्या है? गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ट्रेजरी बेंच ने कहा है कि 131वां संशोधन तीस साल के गतिरोध को तोड़ने का एकमात्र व्यावहारिक तरीका है। सरकार का तर्क है कि 850 सीटों तक विस्तार एक “गणितीय आवश्यकता” है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत जनादेश को पूरा करते हुए कोई भी राज्य अपनी वर्तमान स्थिति न खोए। सरकार के दृष्टिकोण से, 2023 अधिनियम सिद्धांत प्रदान करता है, जबकि 2026 विधेयक यांत्रिकी प्रदान करता है। वे गांधी की “मध्ययुगीन” बयानबाजी को एक ऐतिहासिक सुधार को रोकने के प्रयास के रूप में खारिज करते हैं जिसे कांग्रेस सत्ता में अपने दशक के दौरान पूरा करने में विफल रही। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 16:20 IST समाचार राजनीति ‘विधायी हाथ की सफाई’, ‘महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं’: राहुल गांधी ने लोकसभा में क्या कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण(टी)संसद(टी)नारी शक्ति(टी)लोकसभा(टी)परिसीमन(टी)अमित शाह(टी)राहुल गांधी(टी)नरेंद्र मोदी
गुना में फसल बेचने आए किसानों का खतरनाक स्टंट, VIDEO:ट्रैक्टर को टायर से बांधकर खींचते नजर आए; दशहरा मैदान में लग रही है गेहूं मंडी

जिले में इन दिनों बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने मंडी पहुंच रहे हैं। शहर की नानाखेड़ी मंडी फुल होने के कारण किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉली दशहरा मैदान में खड़े कराए जा रहे हैं। इसी बीच यहां से किसानों द्वारा खतरनाक स्टंट करने का वीडियो सामने आया है। पिछले दो वर्षों से गेहूं बेचने आए किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉली दशहरा मैदान में खड़े किए जा रहे हैं। यहीं पर उपज की डाक नीलामी होती है और इसके बाद फसल सीधे व्यापारी के वेयरहाउस में ले जाकर तौली और खाली कराई जाती है। ट्रैक्टर से स्टंट का वीडियो वायरल ताजा मामला शुक्रवार का है, जब दशहरा मैदान में बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। इसी दौरान कुछ किसानों द्वारा ट्रैक्टर से खतरनाक स्टंट करते हुए वीडियो सामने आया, जिसमें वे ट्रैक्टर खींचने की प्रतियोगिता करते नजर आए। वीडियो में दो ट्रैक्टर पीछे की ओर से टायर के सहारे आपस में बंधे दिखाई दे रहे हैं। दोनों के बीच यह चुनौती थी कि कौन किसका ट्रैक्टर अपनी ओर खींच सकता है। एक मिनट तक चला जोर-आजमाइश वीडियो में दो लोग ‘एक, दो, तीन’ बोलकर प्रतियोगिता शुरू कराते हैं, जिसके बाद दोनों चालक अपने-अपने ट्रैक्टर से जोर लगाकर दूसरे को खींचने की कोशिश करते हैं। करीब एक मिनट तक यह खतरनाक खेल चलता रहा। इस तरह के स्टंट से मौके पर हादसे की आशंका बनी रही। हालांकि, अब तक इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘जादूगर पकड़ा गया’: पीएम मोदी पर राहुल गांधी का तंज, लोकसभा में हंगामा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 15:43 IST महिला कोटा विधेयक पर बहस को संबोधित करते हुए, राहुल गांधी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को “जादूगर” कहा, जिससे भाजपा सांसदों का विरोध शुरू हो गया। राहुल गांधी की फाइल फोटो. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को निचले सदन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को “जादूगर” कहकर व्यंग्यात्मक संदर्भ दिया, जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विरोध जताया। महिला कोटा विधेयक पर बहस को संबोधित करते हुए गांधी ने भाजपा पर देश का चुनावी नक्शा दोबारा तैयार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आप (भाजपा) जो कर रहे हैं, क्योंकि आप देश की राजनीति में जो हो रहा है उससे डरे हुए हैं, आप अपनी ताकत के क्षरण से डरे हुए हैं, और आप भारतीय राजनीतिक मानचित्र को फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आपने असम, जम्मू-कश्मीर में ऐसा किया और अब कल्पना कर रहे हैं कि आप इसे भारत में भी कर सकते हैं। आपको ऐसा करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता है।” यहां लाइव अपडेट्स फॉलो करें गांधी ने कहा कि भाजपा जानती थी कि विधेयक सदन में पारित नहीं होगा और वह घबरा रही है। उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि जादूगर पकड़ा गया है। बालाकोट का जादूगर, नोटबंदी का जादूगर, सिन्दूर का जादूगर अचानक पकड़ा गया है।” वीडियो | लोकसभा में बोलते हुए, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कहते हैं, “…यह महत्वपूर्ण है कि हर कोई इसे समझे। भाजपा जानती थी, वे बहुत स्पष्ट रूप से जानते थे कि यह विधेयक वास्तव में पारित नहीं किया जा सकता है। वे यह जानते थे। वे मूर्ख नहीं हैं। वे जानते थे कि हर विपक्षी व्यक्ति इसका विरोध करेगा। यह विधेयक… pic.twitter.com/v5A5nKcvNb– प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 17 अप्रैल 2026 उन्होंने कहा, “हर कोई जानता है कि हमारे दोस्त, जादूगर और व्यवसायी के बीच एक साझेदारी है।” बीजेपी ने की राहुल गांधी से माफी की मांग राहुल गांधी की टिप्पणी पर बीजेपी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि गांधी प्रधानमंत्री के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे और बालाकोट हमलों और ऑपरेशन सिन्दूर का संदर्भ देकर देश और सेना को बदनाम कर रहे थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से राहुल गांधी की टिप्पणी को हटाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता इस देश के प्रधानमंत्री के बारे में जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरा मानना है कि इसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है।” सिंह ने कहा, “उन्हें बार-बार ‘जादूगर’ कहना वास्तव में देश के लोगों का अपमान है। मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि उन्होंने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, उन्हें कार्यवाही से हटा दिया जाए। राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए।” और पढ़ें: ‘पीएम मोदी और मेरे बीच पत्नी का मुद्दा नहीं है’: महिला आरक्षण पर बहस के बीच राहुल गांधी ने लोकसभा में चुटकी ली स्पीकर बिड़ला ने यह भी कहा कि वह संसद में “ऐसे शब्दों” की अनुमति नहीं देंगे और गांधी को फटकार लगाई, और उन्हें मामले पर कायम रहने का निर्देश दिया। गांधी ने यह कहकर जवाब दिया कि भाजपा नेताओं के बीच “केंद्रीय भ्रम” था, लेकिन बाद में वे “जादूगर” शब्द का उपयोग नहीं करने पर सहमत हुए। उन्होंने आगे टिप्पणी की, “आप (भाजपा) भारत के लोग नहीं हैं, आप सशस्त्र बल नहीं हैं, आप एक राजनीतिक संगठन हैं। हम भारत के लोगों पर हमला नहीं कर रहे हैं, हम सशस्त्र बलों पर हमला नहीं कर रहे हैं, हम आप पर हमला कर रहे हैं। आप सशस्त्र बलों के पीछे छिपे हुए हैं।” गांधी की यह टिप्पणी महिला आरक्षण के कार्यान्वयन को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने के सरकार के कदम के बीच आई है। उन्होंने तर्क दिया कि इस प्रस्ताव का उपयोग राज्यों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को नया स्वरूप देने के लिए किया जा रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 15:22 IST न्यूज़ इंडिया ‘जादूगर पकड़ा गया है’: पीएम मोदी पर राहुल गांधी का तंज, लोकसभा में हंगामा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राहुल गांधी लोकसभा भाषण(टी)राहुल गांधी(टी)लोकसभा हंगामा(टी)मोदी जादूगर टिप्पणी(टी)बीजेपी विरोध(टी)महिला कोटा बिल बहस(टी)चुनावी मानचित्र फिर से बनाना(टी)संवैधानिक संशोधन भारत
कंगना ने कांग्रेस पर निशाना साधा:कहा- जब मुझे टिकट मिला, तब मेरे लिए इनके प्रवक्ता ने लिखा, मंडी में क्या भाव चल रहा है

बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने हाल ही में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पर हमला बोला। कंगना ने कहा, ‘2024 में जब मुझे टिकट मिला, तब मेरी एक फोटो लगाकर और उसके नीचे कांग्रेस के प्रवक्ता ने लिखा- मंडी में क्या भाव चल रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘अध्यक्ष जी, मैं एक कलाकार हूं। मैंने रानी लक्ष्मीबाई जैसी योद्धा से लेकर गैंगस्टर में भटकी हुई लड़की, फैशन में ड्रग एडिक्ट, रज्जो में सेक्स वर्कर और थलाइवी में एक लीडर तक हर तरह के किरदार निभाए हैं, जिनके लिए मुझे राष्ट्रीय सम्मान भी मिले हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘एक कलाकार का धर्म होता है कि वह हर कला और किरदार में पूरी तरह ढल जाए। लेकिन इन्होंने मेरे फिल्मी किरदार और तस्वीर का इस्तेमाल करके नीचे लिखा, मंडी की लड़कियों के क्या भाव हैं।’ कंगना मंडी से सांसद हैं कंगना रनोट हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से 2024 से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद हैं। बता दें कि साल 2024 में 24 मार्च को कंगना को प्रत्याशी घोषित किए जाने के अगले दिन कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत के इंस्टाग्राम हैंडल से कंगना की तस्वीर के साथ लिखा गया था, ‘क्या भाव चल रहा है, मंडी में कोई बताएगा।’ सुप्रिया की पोस्ट के बाद कंगना ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए X पर लिखा था, ‘प्रिय सुप्रिया जी, एक कलाकार के रूप में मैंने अपने करियर के पिछले 20 साल में हर तरह की महिलाओं का किरदार निभाया। क्वीन में एक भोली-भाली लड़की से लेकर धाकड़ में जासूस तक, मणिकर्णिका में एक देवी से लेकर चंद्रमुखी में राक्षस तक।’ उन्होंने आगे लिखा था, ‘रज्जो में एक प्रॉस्टिट्यूट से लेकर थलाइवी में एक क्रांतिकारी नेता तक। हमें अपनी बेटियों को पूर्वाग्रहों के बंधनों से मुक्त करना चाहिए। हमें महिला के शरीर के अंगों के बारे में जिज्ञासा रखने से ऊपर उठना चाहिए। साथ ही हमें यौनकर्मियों के चुनौतीपूर्ण जीवन या परिस्थितियों को लेकर इस प्रकार के अपशब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। हर महिला अपनी गरिमा की हकदार है…।’ सुप्रिया ने सफाई दी थी वहीं, इस पोस्ट को लेकर सुप्रिया ने कहा था, ‘मेरे फेसबुक और इंस्टा के अकाउंट पर कई लोगों का एक्सेस है। इसमें से किसी व्यक्ति ने आज एक बेहद घृणित और आपत्तिजनक पोस्ट किया था। मुझे जैसे ही इसकी जानकारी हुई, मैंने वह पोस्ट हटा दिया। जो भी मुझे जानते हैं, वह यह अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं किसी भी महिला के लिए व्यक्तिगत बात नहीं करती हूं।’ ‘मेरी जानकारी में आया है कि यह पोस्ट पहले एक पैरोडी अकाउंट (@Supriyaparody) पर चल रहा था। यहां से किसी ने यह पोस्ट उठाकर मेरे अकाउंट पर पोस्ट कर दिया। मैं ऐसा करने वाले की पहचान में लगी हूं। मेरे नाम का दुरुपयोग कर बनाए गए पैरोडी अकाउंट को भी X में रिपोर्ट किया है।’







