अमेरिकी सेना ने 12 साल बाद सीरिया छोड़ा:जॉर्डन लौट रहे सैनिक, सरकार बोली- अब देश में एक ही प्रशासन चलेगा

करीब 12 साल की सैन्य मौजूदगी के बाद अमेरिका ने सीरिया से अपने सभी सैनिक और ठिकाने खाली कर दिए। अप्रैल 2026 में हसाका के कसराक एयरबेस से आखिरी अमेरिकी काफिला निकल गया। इसके बाद सीरियाई सरकार ने सभी बेस अपने कब्जे में ले लिए। सीरियाई विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम देश को एकजुट करने और पूरे इलाके पर सरकार का नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में बड़ा मोड़ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि करीब 2000 सैनिक जॉर्डन जा रहे है। अमेरिका ने हसाका, रुमैलान और देइर एज-जोर में मौजूद कम से कम सात बड़े ठिकाने खाली किए। आखिरी ठिकाना कसराक एयरबेस था। अब इस पर सीरियाई सेना का नियंत्रण है। सीरियाई सरकार और SDF के बीच समझौता इस बीच, सीरिया सरकार और SDF के बीच हुए समझौते के बाद कुर्द लड़ाकों को राष्ट्रीय सेना में शामिल किया जा रहा है। हसाका और क़ामिशली जैसे शहरों में सरकारी बल तैनात हो चुके हैं और सीमाई इलाकों पर भी दमिश्क का नियंत्रण बढ़ा है। इसी साल दोनों पक्षों के बीच झड़पें भी हुई थीं, जिसके बाद मार्च में एक नया समझौता हुआ। इसके तहत SDF और कुर्द प्रशासनिक ढांचे को धीरे-धीरे राज्य में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई। सीरिया ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय एंटी-ISIL गठबंधन में शामिल होकर अपनी भूमिका बदली है। इससे अमेरिका के लिए सीरिया में सैन्य मौजूदगी का आधार कमजोर हुआ और अब वह क्षेत्र में अपनी रणनीति को नए सिरे से तय कर रहा है। SDF एक कुर्द-नेतृत्व वाला गठबंधन है, जिसे 2015 में बनाया गया था और इसमें कुर्द, अरब और दूसरे स्थानीय समूह शामिल हैं। सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान जब सरकार कमजोर हुई, तब कुर्द लड़ाकों ने उत्तर-पूर्वी इलाकों पर कब्जा कर लिया। बाद में यही SDF के रूप में मजबूत ताकत बन गया। अमेरिका की वापसी से SDF पर असर अमेरिका के हटने के बाद सबसे बड़ा असर सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) पर पड़ा है। पिछले एक दशक में उत्तर-पूर्वी सीरिया के बड़े हिस्से पर इसी संगठन का नियंत्रण रहा था। यह पूरी तरह अमेरिकी समर्थन पर टिका हुआ था। हालांकि SDF और सीरियाई सरकार के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने दमिश्क में SDF के कमांडर मजलूम अब्दी और राजनीतिक प्रमुख इलहम अहमद से मुलाकात की है। विदेश मंत्री असाद हसन अल-शैबानी भी मौजूद थे। यह बैठक SDF को राष्ट्रीय ढांचे में शामिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इससे पहले जनवरी 2025 में दमिश्क और SDF के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत कुर्द लड़ाकों को सीरियाई सेना में शामिल किया जा रहा है। सीमा चौकियों और सरकारी संस्थानों का नियंत्रण दमिश्क को सौंपा जाएगा। अमेरिका की वापसी टर्निग पॉइंट साबित हुई अमेरिका की वापसी इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी टर्निंग पॉइंट साबित हुई। जब तक अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद थे, SDF खुद को सुरक्षित मानता था। वह एक तरह से स्वतंत्र ताकत की तरह काम कर रहा था। जैसे ही अमेरिका ने अपने बेस खाली किए, SDF अकेला पड़ गया और उसे सीरियाई सरकार की शर्तें माननी पड़ीं। इसका सीधा असर संसाधनों पर पड़ा। सीरिया के बड़े तेल और गैस क्षेत्र, जैसे अल-उमर और कोनिको, जो पहले SDF के नियंत्रण में थे, अब सरकार के हाथ में आने लगे। इससे उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। तुर्किये का दबाव भी एक बड़ा फैक्टर रहा, क्योंकि तुर्किये SDF को आतंकवादी संगठन मानता है।। अमेरिका की मौजूदगी में तुर्किये खुलकर कार्रवाई नहीं कर पा रहा था। उसके हटते ही SDF को संभावित हमले का खतरा बढ़ गया। इसी दबाव और बदलते हालात ने SDF को सरकार के साथ समझौते की राह पर ला दिया। अमेरिका के जाने के बाद सीरिया में सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार पर है। ISIS के बचे हुए नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका और सीरिया के संबंध में सुधार हो रहे अमेरिका और सीरिया के संबंध दशकों तक तनावपूर्ण रहे, लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता गिरने के बाद इनमें तेजी से सुधार हुआ। मई 2025 में सऊदी अरब में ट्रम्प और शरा की पहली मुलाकात हुई, जिसके बाद अमेरिका ने सीरिया पर लगे अधिकांश प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। अमेरिका और सीरिया के राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1835 में हुई थी। हालांकि, 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध के बाद हालात बदले। 2012 में अमेरिका ने दमिश्क से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए और सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक राज्य घोषित किया। असद सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल और ईरान और हिजबुल्लाह को समर्थन देने के आरोप लगे। अमेरिका ने सीरियाई विपक्ष का समर्थन किया और 2014 से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। इसके तहत पूर्वी सीरिया में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए। —————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में परमाणु-स्पेस पर रिसर्च करने वाले 5 वैज्ञानिक गायब:5 की रहस्यमय हालत में मौत, ट्रम्प सरकार बोली- मामले की जांच करेंगे अमेरिका में न्यूक्लियर और स्पेस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों की मौत और गुमशुदगी के मामलों पर अब व्हाइट हाउस सवालों के घेरे में है। 2023 से अब तक ऐसे 10 मामले सामने आए हैं, जिनमें वैज्ञानिक या अधिकारी या तो लापता हो गए या संदिग्ध हालात में मरे। बुधवार को व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में पहली बार प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट से इन घटनाओं पर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा, “मैंने अभी संबंधित एजेंसियों से इस बारे में बात नहीं की है। मैं ऐसा करूंगी और आपको जवाब दूंगी।” पूरी खबर पढ़ें…
सिंगरौली में 38 डिग्री पहुंचा तापमान, स्कूल का समय बदला:कलेक्टर ने आदेश जारी किया, सुबह 7.30 से दोपहर 12.30 तक लगेंगी क्लासेज

सिंगरौली जिले में बढ़ती गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के संचालन समय में बदलाव किया है। कलेक्टर की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, जिले के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में कक्षाएं अब सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक संचालित होंगी। यह व्यवस्था 30 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। डेढ़ बजे तक रूकेंगे टीचर्स और स्टाफ इस आदेश के तहत, शिक्षकों और अन्य स्टाफ को दोपहर 1:30 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहकर शैक्षणिक कार्य संपादित करना होगा। यह निर्णय विद्यार्थियों को दोपहर की तेज गर्मी से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। जिले में इन दिनों तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। 38°C दर्ज किया गया तापमान तापमान के आंकड़ों की तुलना करें तो, 17 अप्रैल 2025 को सिंगरौली में अधिकतम तापमान लगभग 38°C दर्ज किया गया था। वहीं, 17 अप्रैल 2026 को यह बढ़कर करीब 40-41°C तक पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि इस साल गर्मी का असर अधिक तीव्र है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां पूर्व निर्धारित समय-सारणी के अनुसार ही संचालित होंगी। अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाएं और धूप से बचाव के उपाय अपनाएं।
सुकेश के खिलाफ जैकलीन सरकारी गवाह बनेंगी:₹200 करोड़ की ठगी केस में सहयोग को तैयार; इन्हीं पैसों से लग्जरी गिफ्ट लिए थे

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस ने 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक्ट्रेस ने जानकारी दी कि वे इस मामले में जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। कोर्ट ने एक्ट्रेस की बात सुनने के बाद उन्हें निर्देश दिया है कि इसके लिए उन्हें सबसे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पास एक औपचारिक अर्जी दाखिल करनी होगी। यह मामला ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है। सुकेश पर आरोप है कि उसने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से करीब 200 करोड़ रुपए की ठगी की थी। ED की जांच में सामने आया था कि सुकेश ने ठगी के इन पैसों से जैकलीन फर्नांडिस को करोड़ों रुपए के कीमती गिफ्ट्स दिए थे। इसमें लग्जरी बैग, हीरे की ज्वेलरी, महंगे घोड़े और बिल्लियां शामिल थीं। इस वजह से ED ने जैकलीन को भी इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी बनाया था। सरकारी गवाह बनने से क्या बदलेगा? जैकलीन फर्नांडिस काफी समय से इस हाई-प्रोफाइल केस में आरोपी के तौर पर जांच का सामना कर रही हैं। अब उन्होंने कोर्ट के सामने प्रस्ताव रखा है कि वे सरकारी गवाह बनकर सच्चाई सामने लाना चाहती हैं। अगर ED उनकी अर्जी स्वीकार कर लेती है और कोर्ट इसकी अनुमति देता है, तो जैकलीन इस केस में आरोपी से गवाह बन जाएंगी। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इससे उन्हें सजा में छूट या कानूनी कार्रवाई से राहत मिल सकती है, बशर्ते वे सुकेश के खिलाफ पुख्ता जानकारी दें। जैकलीन ने लिए थे कई महंगे गिफ्ट ED के मुताबिक, जैकलीन से दोस्ती हो जाने के बाद सुकेश ने उनके ऊपर 7 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए थे। सुकेश ने जैकलीन को ये चीजें गिफ्ट की थीं… मामले की पूरी टाइमलाइन करियर और इमेज पर पड़ा है असर सुकेश चंद्रशेखर केस की वजह से जैकलीन फर्नांडिस को पिछले तीन-चार सालों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। उन्हें विदेश जाने के लिए हर बार कोर्ट से परमिशन लेनी पड़ती थी। उनके कई ब्रांड एंडोर्समेंट और फिल्में भी प्रभावित हुईं। माना जा रहा है कि सरकारी गवाह बनकर जैकलीन खुद को इस कानूनी पेच से बाहर निकालना चाहती हैं ताकि वे अपने एक्टिंग करियर पर दोबारा ध्यान दे सकें।
सुकेश के खिलाफ जैकलीन सरकारी गवाह बनेंगी:₹200 करोड़ की ठगी केस में सहयोग को तैयार; इन्हीं पैसों से लग्जरी गिफ्ट लिए थे

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस ने 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक्ट्रेस ने जानकारी दी कि वे इस मामले में जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। कोर्ट ने एक्ट्रेस की बात सुनने के बाद उन्हें निर्देश दिया है कि इसके लिए उन्हें सबसे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पास एक औपचारिक अर्जी दाखिल करनी होगी। यह मामला ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है। सुकेश पर आरोप है कि उसने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से करीब 200 करोड़ रुपए की ठगी की थी। ED की जांच में सामने आया था कि सुकेश ने ठगी के इन पैसों से जैकलीन फर्नांडिस को करोड़ों रुपए के कीमती गिफ्ट्स दिए थे। इसमें लग्जरी बैग, हीरे की ज्वेलरी, महंगे घोड़े और बिल्लियां शामिल थीं। इस वजह से ED ने जैकलीन को भी इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी बनाया था। सरकारी गवाह बनने से क्या बदलेगा? जैकलीन फर्नांडिस काफी समय से इस हाई-प्रोफाइल केस में आरोपी के तौर पर जांच का सामना कर रही हैं। अब उन्होंने कोर्ट के सामने प्रस्ताव रखा है कि वे सरकारी गवाह बनकर सच्चाई सामने लाना चाहती हैं। अगर ED उनकी अर्जी स्वीकार कर लेती है और कोर्ट इसकी अनुमति देता है, तो जैकलीन इस केस में आरोपी से गवाह बन जाएंगी। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इससे उन्हें सजा में छूट या कानूनी कार्रवाई से राहत मिल सकती है, बशर्ते वे सुकेश के खिलाफ पुख्ता जानकारी दें। जैकलीन ने लिए थे कई महंगे गिफ्ट ED के मुताबिक, जैकलीन से दोस्ती हो जाने के बाद सुकेश ने उनके ऊपर 7 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए थे। सुकेश ने जैकलीन को ये चीजें गिफ्ट की थीं… मामले की पूरी टाइमलाइन करियर और इमेज पर पड़ा है असर सुकेश चंद्रशेखर केस की वजह से जैकलीन फर्नांडिस को पिछले तीन-चार सालों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। उन्हें विदेश जाने के लिए हर बार कोर्ट से परमिशन लेनी पड़ती थी। उनके कई ब्रांड एंडोर्समेंट और फिल्में भी प्रभावित हुईं। माना जा रहा है कि सरकारी गवाह बनकर जैकलीन खुद को इस कानूनी पेच से बाहर निकालना चाहती हैं ताकि वे अपने एक्टिंग करियर पर दोबारा ध्यान दे सकें।
‘पीएम मोदी और मेरे बीच पत्नी का मुद्दा नहीं है’: महिला आरक्षण पर बहस के बीच राहुल गांधी ने लोकसभा में चुटकी ली | भारत समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 14:57 IST महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़ने पर बहस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने उनके और पीएम मोदी के पत्नियां न होने का मजाक उड़ाया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को लोकसभा में। (संसद टीवी) परिसीमन विधेयक को महिला कोटा अधिनियम से जोड़ने पर विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष की बहस का नेतृत्व किया, जहां उन्होंने मजाक में कहा कि उनकी और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी दोनों की पत्नियां नहीं हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, “महिलाएं हमारी राष्ट्रीय कल्पना में, हमारे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में एक केंद्रीय और प्रेरक शक्ति हैं। हम सभी, इस कमरे में मौजूद हर व्यक्ति, अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ प्रभावित हुआ है, सिखाया है और सीखा है, चाहे वह माताएं, बहनें और पत्नियां हों।” उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “बेशक, प्रधानमंत्री और मेरे बीच ‘पत्नी’ वाला मुद्दा नहीं है। इसलिए हमें वह इनपुट नहीं मिलता। इसके लिए हमारी मां और बहनें हैं।” “कल, मेरी बहन ने कुछ ऐसा हासिल किया जो मैं शायद अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में नहीं कर पाया, वह था अमित शाह जी को मुस्कुराना।” दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी कहते हैं, “महिलाएं एक केंद्रीय शक्ति हैं, हमारी राष्ट्रीय कल्पना और हमारे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में एक प्रेरक शक्ति हैं। हम सभी – इस कमरे में मौजूद हर एक व्यक्ति – ने अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ प्रभावित किया है, सिखाया है और सीखा है: माताएं,… pic.twitter.com/HBtu9g1bkZ– आईएएनएस (@ians_india) 17 अप्रैल 2026 हल्के-फुल्के क्षण के बाद, गांधी ने महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया, “यह महिला विधेयक नहीं है; इसका महिला सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है। यह चुनावी मानचित्र को बदलने का एक प्रयास है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 14:51 IST न्यूज़ इंडिया ‘पीएम मोदी और मेरे बीच पत्नी का मुद्दा नहीं है’: महिला आरक्षण पर बहस के बीच राहुल गांधी ने लोकसभा में चुटकी ली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राहुल गांधी लोकसभा भाषण(टी)राहुल गांधी टिप्पणी(टी)परिसीमन विवाद(टी)समाज में महिलाओं की भूमिका(टी)लोकसभा बहस(टी)विपक्षी नेता का भाषण(टी)नरेंद्र मोदी तुलना(टी)भारतीय राजनीति समाचार
जेन अल्फा; 31% बचत कर रहे, 70% कमाई की तलाश:भारतीय किशोर अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वित्तीय फैसलों और ब्रांड चयन में भी सक्रिय

देश के किशोर यानी जेन अल्फा अब सिर्फ खर्च करने वाले नहीं, फैसले लेने वाली ताकत बन रहे हैं। रुकम कैपिटल की ‘जेन अल्फा डिकोडेड’ रिपोर्ट के अनुसार देश के 70% किशोर पैसे कमाने के तरीके तलाश रहे हैं, जबकि 31% बच्चे अपनी पॉकेट मनी का बड़ा हिस्सा बचाते हैं। वहीं 25% खर्च से पहले माता-पिता से सलाह लेते हैं। सबसे बड़ा बदलाव फैसलों में दिखता है। 66% बच्चे घर के रोजमर्रा खर्च और खरीदारी को प्रभावित करते हैं। 50% बच्चे खुद ब्रांड की मांग करते हैं। डिजिटल एक्सेस – यूट्यूब का दबदबा, आधे से ज्यादा बच्चे सोशल मीडिया और 73% की फोन तक पहुंच 73%-स्मार्टफोन 82%-यू-ट्यूब 61%- यू-ट्यूब -किड्स 60%-लैपटॉप 51%-सोशल मीडिया 50%-ओटीटी – 66% बच्चे फूड, कपड़े और मनोरंजन के निर्णयों को प्रभावित करते हैं। – जेन अल्फा – 2010 के बाद जन्मे बच्चे, देश की आबादी के एक चौथाई। 42% बच्चे, नया फीचर आने पर ब्रांड बदल देते हैं आज के बच्चे बाजार में उपलब्ध सामानों को लेकर जागरूक हैं। उनका चुनाव अब सिर्फ आकर्षण पर निर्भर नहीं है। वे प्रोडक्ट के फीचर और उपयोगिता को ध्यान में रखते हैं। 34% बच्चे किसी प्रोडक्ट की उपयोगिता और 34% उसके शैक्षिक मूल्य से प्रभावित होते हैं। 42% बच्चे नए फीचर आने पर पुराने ब्रांड छोड़कर विकल्प को अपनाने के लिए तैयार रहते हैं। 21% जेन अल्फा बॉलीवुड संगीत तो 16% ट्रेंडिंग गानों को सुनते हैं संगीत की पसंद – 21% जेन अल्फा बच्चे बॉलीवुड संगीत सुनना पसंद करते हैं, जबकि 16% सोशल मीडिया के ट्रेंडिंग गानों को सुनना पसंद करते हैं। डांस का शौक – नृत्य में 26% बच्चे बॉलीवुड स्टाइल को प्राथमिकता देते हैं। दूसरी ओर 16 फीसदी बच्चे भारतीय शास्त्रीय नृत्य की ओर आकर्षित होते हैं। एजुटेक में प्रभाव – ऑनलाइन पढ़ाई और एजुटेक एप्स को चुनने में 40% जेन अल्फा बच्चे अपने माता-पिता के फैसलों को प्रभावित करते हैं। परिवार का समर्थन – 13% बच्चे अपनी मांग को मनवाने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों (जैसे दादा-दादी) का रणनीतिक समर्थन लेते हैं सर्वे – बच्चों, पैरेंट्स सहित 2,000 से अधिक शामिल।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र में बंदूक की नोक पर लूट:सिंगरौली में पांच हथियारबंद बदमाशों ने कर्मचारियों को बंधक बनाया, 35 लाख रुपए लूटे

सिंगरौली जिले के बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में दिनदहाड़े लूट की घटना हुई। पांच हथियारबंद बदमाश बैंक में घुसकर लगभग 30 से 35 लाख रुपए नकद लूटकर फरार हो गए। घटना शुक्रवार दोपहर तकरीबन 1 बजे की है। 5 हथियारबंद बदमाशों ने कर्मचारियों को बंधक बनाया प्रत्यक्षदर्शी आशीष कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ बैंक में मौजूद थे। इसी दौरान दो हथियारबंद बदमाश अंदर घुसे और बैंक कर्मचारियों को बंधक बना लिया। कुछ ही देर में तीन अन्य बदमाश भी बैंक में पहुंचे। उन्होंने सभी ग्राहकों और कर्मचारियों को बंदूक की नोक पर डराया-धमकाया। बदमाशों ने बैंक मैनेजर से नकदी की जानकारी मांगी और जानकारी न देने पर उनके साथ मारपीट की और हथियार की बट से हमला किया। नकदी से भरी एक पेटी लेकर फरार हुए बदमाश लगभग 20 मिनट तक बैंक के अंदर बदमाशों ने उत्पात मचाया। इसके बाद वे नकदी से भरी एक पेटी लेकर मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। सिंगरौली के पुलिस अधीक्षक ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि वे स्वयं मौके पर मौजूद हैं। पुलिस की टीमें बदमाशों की तलाश में जुटी हैं। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया गया है।
कर्नाटक कांग्रेस में उथल-पुथल: सिद्धारमैया दिल्ली रवाना, वफादारों के निष्कासन से ‘असहाय मुख्यमंत्री’ की चर्चा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 14:27 IST सिद्धारमैया के राजनीतिक सचिव नसीर अहमद को बर्खास्त करने और जब्बार को निलंबित करने के बाद, कथित एसडीपीआई संबंधों को लेकर दबाव बढ़ गया है और ज़मीर अहमद खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राष्ट्रीय राजधानी के ताज पैलेस में ‘ब्रिज बेंगलुरु’ नामक एक कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं। (न्यूज़18) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की शुक्रवार को नई दिल्ली यात्रा राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में हो रही है, सत्तारूढ़ कांग्रेस को इन आरोपों के बाद तीव्र आंतरिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है कि उनके कुछ करीबी विश्वासपात्रों ने दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के दौरान पार्टी के खिलाफ काम किया और कथित तौर पर एसडीपीआई समर्थित उम्मीदवारों का समर्थन किया। मुख्यमंत्री का राष्ट्रीय राजधानी के ताज पैलेस में ‘ब्रिज बेंगलुरु’ नामक एक कार्यक्रम में भाग लेने का कार्यक्रम है, जहां वह राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ बातचीत करेंगे। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से संकेत मिलता है कि दिल्ली दौरे में कांग्रेस आलाकमान नेता के साथ चर्चा भी शामिल हो सकती है। हालांकि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे संसद में व्यस्त हैं, अगर सिद्धारमैया अन्य नेताओं से मिलते हैं, तो उम्मीद है कि वह अपने समर्थकों द्वारा कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के विवाद पर स्पष्टीकरण देंगे। यह घटनाक्रम उपचुनाव अभियान से जुड़े वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद हुआ है। कर्नाटक कांग्रेस अल्पसंख्यक विंग के पूर्व प्रमुख अब्दुल जब्बार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है, जबकि सिद्धारमैया के राजनीतिक सचिव नसीर अहमद को कथित तौर पर नेतृत्व के निर्देशों के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद उनके पद से हटा दिया गया था। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री की लगातार चुप्पी ने उनके समर्थकों के एक वर्ग में बेचैनी पैदा कर दी है, कुछ नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या वह दबाव में हैं या निर्णायक रूप से हस्तक्षेप करने में असमर्थ हैं। कई पार्टी नेताओं ने निजी तौर पर इस बात पर चिंता जताई है कि दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में नामांकन दाखिल करने से पहले असंतोष के शुरुआती संकेतों के बावजूद कथित विद्रोह पर ध्यान कैसे नहीं दिया गया। एसडीपीआई उम्मीदवारों को समर्थन को पार्टी के भीतर अनुशासन के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जाता है, खासकर ऐसे समय में जब कांग्रेस कई राज्यों में अल्पसंख्यक समर्थन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। पार्टी के भीतर ध्यान अब सिद्धारमैया के लंबे समय से सहयोगी आवास मंत्री ज़मीर अहमद खान पर केंद्रित हो गया है, जिन पर कुछ नेताओं ने उपचुनाव के दौरान पार्टी हितों के खिलाफ काम करने का भी आरोप लगाया है। ज़मीर, जो जनता दल (सेक्युलर) में अपने दिनों से ही सिद्धारमैया के अंदरूनी घेरे में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं, अब पार्टी के भीतर से बढ़ते दबाव का सामना कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अल्पसंख्यक नेता ने सवाल किया कि क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई में विभिन्न मानक लागू किए जा रहे हैं। “अगर एमएलसी जब्बार को निलंबित कर दिया गया है और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव नसीर अहमद को हटा दिया गया है, तो ज़मीर अहमद खान को कैसे बख्शा जा सकता है? उन पर भी पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाया गया है। क्या अलग-अलग पैमाने हो सकते हैं?” नेता ने पूछा. इस बीच, सिद्धारमैया के करीबी सहयोगियों के बीच इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के दृढ़ सार्वजनिक रुख की कमी को लेकर निराशा बढ़ती दिख रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री केएन राजन्ना ने सिद्धारमैया की प्रतिक्रिया पर खुले तौर पर निराशा व्यक्त की। राजन्ना ने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी कि सिद्धारमैया इतने असहाय होंगे। हम नहीं जानते कि उनकी मजबूरियां क्या हैं। जो लोग पार्टी के प्रति वफादार हैं, उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। सिद्धारमैया कोई कड़ा रुख नहीं अपना रहे हैं और यह निराशाजनक है।” उपचुनाव के नतीजे अभी भी प्रतीक्षित हैं, कर्नाटक में कांग्रेस नेतृत्व के लिए आंतरिक संकट एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जिससे महत्वपूर्ण समय में गुटीय एकता और मुख्यमंत्री के अपने राजनीतिक नेटवर्क पर नियंत्रण पर सवाल उठ रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 17 अप्रैल, 2026, 14:27 IST समाचार राजनीति कर्नाटक कांग्रेस में उथल-पुथल: सिद्धारमैया दिल्ली रवाना, वफादारों के निष्कासन से ‘असहाय सीएम’ की चर्चा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कांग्रेस का आंतरिक संकट(टी)सिद्धारमैया का दिल्ली दौरा(टी)दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव(टी)कांग्रेस अनुशासनात्मक कार्रवाई(टी)एसडीपीआई समर्थित उम्मीदवार(टी)ज़मीर अहमद खान विवाद(टी)अब्दुल जब्बार का निलंबन(टी)नसीर अहमद को हटाना
बंगाल में वोटिंग से पहले यहां आ रहे नतीजे, 28 में से 22 नतीजे बीजेपी, कांग्रेस पर नहीं बल्कि ये पार्टी आगे

त्रिपुरा जन जातीय क्षेत्र वैश्विन जिला परिषद (टीटीएडी) की तीसरे चरण की शुरुआत में 28 से 22 मार्च के बाद टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) की बढ़त मजबूत स्थिति में है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के छह हिस्से पीछे हैं, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस और ‘इंडिजिंस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा’ (आईपी टिकट) के सभी हिस्से पीछे हैं। टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में एक महत्वपूर्ण सहयोगी है, फिर भी दोनों साथियों ने जदयू परिषद के चुनाव में अलग-अलग लड़ाई लड़ी है। राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग के आयुक्त (स्पेशल ड्यूटी पर अधिकारी) बिपुल बर्मन ने बताया, ‘सभी 17 वाहनों पर सुरक्षा कड़ी के बीच सुबह आठ बजे से शुरुआत हुई। ‘तीसरे चरण के बाद, टीपी कुल 28 वें चरण में से 22 चरण आगे हैं, जबकि भाजपा छह चरण पर आगे चल रही है।’ इसे भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव: 19 हत्या से जुड़े मामलों की जानकारी… जानें पश्चिम बंगाल के पहले चरण में कितने करोड़पति 2021 के चुनाव में टीआईपी ने 18 मंदिर बनाए, जबकि बीजेपी को नौ मंदिर मिले। 12 अप्रैल को टीटीएडी में लगभग 83 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान के दौरान हिंसा की हिट घटनाएं भी हुईं। टाटा राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के दो तिहाई हिस्से में विस्तार हुआ है और इसकी आबादी 13 लाख है। वर्तमान में टीटीएडीसी में, टीपीएमपी के पास जिला परिषद के 17 सदस्य हैं, जबकि भाजपा के पास नौ सदस्य हैं और दो सीटें रिक्त हैं। यह भी पढ़ें- ‘मेरी गाड़ी चेक करने की कोशिश, पीएम मोदी-अमित शाह की क्यों नहीं?’ इलेक्शन कमीशन पर भड़कीं ममता बनर्जी (टैग्सटूट्रांसलेट)चुनाव(टी)त्रिपुरा(टी)आदिवासी परिषद चुनाव(टी)टिप्रा मोती पार्टी(टी)टाआड(टी)टीडीएमपी(टी)त्रिपुरा जिला परिषद चुनाव(टी)चुनाव(टी)त्रिपुरा(टी)आदिवासी परिषद चुनाव(टी)टिपरा मोथी पार्टी(टी)टीटाडी(टी)टीडीएमपी
कच्चे केले के छिलके की चटनी रेसिपी: दादी-नानी के नुस्खों वाली कच्चे केले के चिप्स की रेसिपी, सिर्फ 5 मिनट में तैयार; बनाना भी आसान

कच्चे केले के छिलके की चटनी रेसिपी: हम अक्सर रसोई में केकड़े पकाते समय उनके चिप्स को सस्ते में समझकर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद और हमारी दादी-नानी के नुस्ख़ों में मौजूद इन छिलकों को ‘अमृत’ के समान माना जाता है? कच्चे केले की सब्जी तो हम सभी बड़े चाव से खाते हैं, इसके अलावा कच्चे केले की सब्जी का असली पावरहाउस हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि कच्चे केले के छिलके की झटपट बनने वाली चटनी, जो न केवल स्वाद में बेमिसाल है, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी बढ़िया है। आइए जानते हैं कच्चे केले की चटनी कैसे बनाई जाती है और क्या-क्या सामग्री रखी जाती है? कच्चे केले के छिलकेहरी मिर्चलहसुन की कलियाँअँग्रेज़ताजा हरा धनियाटेम्पलेट का रसनमकहल्दी का तेलमिठाई के लिए राई, सूखी लाल मिर्च और करी पत्ते सबसे पहले कच्चे केले के छिलके अच्छे तरीके से धो लें। अब 1-2 शहर आने तक लिटिल सा नमकलैन्ट कुकर में। शुककों का कालापन दूर हो जाता है और वे नग्न हो जाते हैं।ऑलबेज़ हुए चिप्स को ठंडा होने दें। अब एक मिश्रण या मिक्सी जार में छिलका, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक, हरा धनिया और थोड़ा सा नमक शामिल है।इसे दरदरा या डेमोक्रेट (जैसा आप चाहें) पीस लें। पीसते समय की जरूरत हो तो एक-दो बड़ी पानी दाल हो सकती है, लेकिन ध्यान रहे कि ज्यादातर हिस्सेदारी न हो।पिसी हुई दुकान को एक बाउल में रखा गया। इसमें उपरोक्त सेलेब का रस और एक मिन कच्चे सरसों का तेल मिलाप। यदि आप और अधिक स्वाद वाले हैं, तो एक पैन में थोड़ा सा तेल गरम कर लें जिसमें राई और करी का प्लास्टर तड़का और मसाले पर डाल दें। कच्चे केले के छिलके, विटामिन बी 6, बी 12 और गहनता से संतृप्त होते हैं। यह पाचन तंत्र को बनाए रखने और शरीर के रोग तंत्र की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। पुराने समय में जब भोजन की कमी थी, तब बुजुर्ग ‘जीरो वेस्ट कुकिंग’ (जीरो वेस्ट कुकिंग) का पालन करते थे, स्वाद और स्वास्थ्य दोनों बने रहते थे।







