Wednesday, 07 Oct 2026 | 01:31 PM

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 अप्रैल को आएंगी हिमाचल:शिमला, अटल टनल और पालमपुर का दौरा तय, 2 मई को वापस लौटेंगी दिल्ली, रिट्रीट में रुकेंगी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 अप्रैल को आएंगी हिमाचल:शिमला, अटल टनल और पालमपुर का दौरा तय, 2 मई को वापस लौटेंगी दिल्ली, रिट्रीट में रुकेंगी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 अप्रैल से छह दिन के दौरे पर हिमाचल प्रदेश आ रही हैं। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, वे शिमला, अटल टनल और पालमपुर यूनिवर्सिटी जाएंगी। राष्ट्रपति 27 अप्रैल को दिल्ली से चंडीगढ़ और वहां से सीधे शिमला के कल्याणी हेलिपेड आएंगी। वह दोपहर लगभग 12:15 बजे शिमला पहुंचेंगी और राष्ट्रपति निवास रिट्रीट (छराबड़ा) में ठहरेंगी। 29 अप्रैल को अटल टनल जाएंगी 28 अप्रैल की सुबह वे राष्ट्रपति निवास में आयोजित उद्घाटन समारोह में शामिल होंगी। 29 अप्रैल को राष्ट्रपति शिमला से अटल टनल रोहतांग जाएंगी, जहां वे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगी। इसके बाद शाम को वे वापस छराबड़ा स्थित रिट्रीट लौटेंगी। 30 अप्रैल को पालमपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में होंगी शामिल 30 अप्रैल को राष्ट्रपति पालमपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के 17वें दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी और उसी शाम शिमला वापस लौटेंगी। 1 मई को शिमला में “एट होम” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। 2 मई को राष्ट्रपति मुर्मू दिल्ली लौट जाएंगी। हर साल गर्मियों में शिमला आते रहे हैं राष्ट्रपति बता दें कि शिमला से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित छराबड़ा में राष्ट्रपति निवास रिट्रीट है। परंपरागत रूप से राष्ट्रपति यहां ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान ठहरते हैं। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी दो बार शिमला का दौरा कर चुकी हैं। राष्ट्रपति के दौरे की पुष्टि होते ही प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

ग्वालियर हाईकोर्ट से बलात्कार पीड़िता को मिली राहत:10 हफ्ते के गर्भ को मेडिकल बोर्ड की निगरानी में समाप्त करने का आदेश,आज जेएएच में होगी प्रक्रिया

ग्वालियर हाईकोर्ट से बलात्कार पीड़िता को मिली राहत:10 हफ्ते के गर्भ को मेडिकल बोर्ड की निगरानी में समाप्त करने का आदेश,आज जेएएच में होगी प्रक्रिया

ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने दुष्कर्म पीड़िता के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए उसके गर्भपात (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) की अनुमति दे दी है। कोर्ट के आदेश के अनुसार शुक्रवार (17 अप्रैल को) सुबह 10 बजे जीआर मेडिकल कॉलेज में यह प्रक्रिया कराई जाएगी। पीड़िता की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि 11 जनवरी को आरोपियों द्वारा उसे घर से ले जाकर दुष्कर्म किया गया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। वर्तमान में युवती की उम्र 18 वर्ष 5 माह बताई गई है। परिवार ने अदालत को जानकारी दी कि वे आर्थिक रूप से बच्चे का पालन-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं। साथ ही गर्भ के कारण युवती को लगातार शारीरिक पीड़ा, मानसिक आघात और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से मांगी थी रिपोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कमलाराजा अस्पताल एवं जीआर मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी। मेडिकल जांच के बाद बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पीड़िता का गर्भ 10 सप्ताह 3 दिन का है और सभी आवश्यक मेडिकल पैरामीटर सामान्य हैं। सुरक्षित गर्भपात का भरोसा दिलाया मेडिकल बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों की निगरानी और आवश्यक सुविधाओं के साथ गर्भपात सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पीड़िता को राहत देते हुए गर्भपात की अनुमति दी, जिससे उसे शारीरिक और मानसिक कष्ट से राहत मिल सके।

रतलाम में पटवारी 20 हजार की रिश्वत लेते ट्रैप:जमीन सीमांकन के लिए मांगे थे 30 हजार; तहसील ऑफिस में लोकायुक्त ने पकड़ा

रतलाम में पटवारी 20 हजार की रिश्वत लेते ट्रैप:जमीन सीमांकन के लिए मांगे थे 30 हजार; तहसील ऑफिस में लोकायुक्त ने पकड़ा

रतलाम जिले के सैलाना में गुरुवार दोपहर उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने पटवारी कैलाश वरख्या को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी ने किसान से 5 हेक्टेयर कृषि भूमि के सीमांकन (नपती) के एवज में यह राशि मांगी थी। वर्तमान में लोकायुक्त की टीम सैलाना तहसील कार्यालय के नायब नाजिर कक्ष में आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई कर रही है। लोकायुक्त निरीक्षक राजेंद्र वर्मा के अनुसार, ग्राम अडवानिया (तहसील सैलाना) निवासी जितेंद्र पाटीदार ने 10 अप्रैल को उज्जैन कार्यालय में एसपी आनन्द कुमार यादव को लिखित आवेदन दिया था। जितेंद्र ने शिकायत में बताया था कि उसके पिता ईश्वर लाल पाटीदार के नाम पर सैलाना और बागरियों की खेड़ी में करीब 5 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इस भूमि की वास्तविक स्थिति और सीमा जानने के लिए 22 जनवरी 2026 को लोकसेवा केंद्र के माध्यम से सीमांकन के लिए आवेदन किया गया था। घर आकर मांगे 30 हजार, 10 अप्रैल को लिए थे 3 हजार रुपए आवेदन के काफी दिन बाद भी सीमांकन नहीं होने पर जितेंद्र 9 मार्च 2026 को तहसील कार्यालय गया। वहां हल्का पटवारी कैलाश वरख्या से पूछताछ की, तो उसने कहा कि फीस जमा करा दोगे तो नपती हो जाएगी। इसके बाद 9 अप्रैल को पटवारी शिकायतकर्ता के घर पहुंचा और सीमांकन के लिए 30 हजार रुपए की मांग की। शिकायतकर्ता के निवेदन पर 10 अप्रैल को पटवारी ने 7 हजार रुपए कम कर दिए और उसी दिन 3 हजार रुपए नकद ले लिए। तहसील कार्यालय के नाजिर कक्ष में रंगे हाथों पकड़ाया उज्जैन लोकायुक्त एसपी ने शिकायत का सत्यापन कराया, जो सही पाई गई। इसके बाद गुरुवार 16 अप्रैल को लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। दोपहर में जैसे ही जितेंद्र ने सैलाना तहसील कार्यालय के नायब नाजिर कक्ष में पटवारी कैलाश को रिश्वत के शेष 20 हजार रुपए दिए, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।

गाजियाबाद में 200 झोपड़ियों में भीषण आग, सिलेंडर फट रहे:10 किमी दूर से दिख रहा धुआं, 8 गाड़ियां बुझाने में लगीं

गाजियाबाद में 200 झोपड़ियों में भीषण आग, सिलेंडर फट रहे:10 किमी दूर से दिख रहा धुआं, 8 गाड़ियां बुझाने में लगीं

गाजियाबाद में गुरुवार दोपहर 12 बजे करीब 200 झुग्गी-झोपड़ियों में भीषण आग लग गई। सिलेंडरों में लगातार ब्लास्ट हो रहे हैं। धुएं का गुबार करीब 10 किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा है। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल है। लोग अपने घरों का सामान और गैस सिलेंडर लेकर भागते नजर आए। फिलहाल, फायर ब्रिगेड की आठ गाड़ियां आग बुझाने में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने नोएडा से भी दमकल की गाड़ियां मंगाई हैं। आसपास के घरों को खाली कराया जा रहा है। आग इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के कनवानी गांव में लगी है। घटना में फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया- जहां आग लगी, वहां कम से कम 500 झुग्गी-झोपड़ियां थीं। इस वक्त सिर्फ आग और धुआं ही नजर आ रहा है। हालांकि, डीएम रविन्द्र कुमार ने बताया- 150 से ज्यादा झुग्गियों में आग लगी है। यहां पर कबाड़ का काम होता था। काम करने वाले ही यहां झुग्गियां बनाकर रहते थे। अगर किसी से लापता होने की खबर आती है, तो सर्वे भी कराया जाएगा। आग की 4 तस्वीरें… गाजियाबाद में आग की घटना से जुड़े पल-पल की अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

बड़वानी में बजरंग दल ने 13 गोवंश को मुक्त कराया:तीन लोडिंग वाहनों से हो रही थी तस्करी, जुलवानिया थाने में केस दर्ज

बड़वानी में बजरंग दल ने 13 गोवंश को मुक्त कराया:तीन लोडिंग वाहनों से हो रही थी तस्करी, जुलवानिया थाने में केस दर्ज

बड़वानी जिले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से ले जाए जा रहे 13 गोवंश को मुक्त कराया। गुरुवार को यह कार्रवाई तीन लोडिंग वाहनों को रोककर की गई। सभी वाहनों को जुलवानिया पुलिस थाने में खड़ा कराया गया है, जहां पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। बजरंग दल के जिला संयोजक शुभम ठाकुर ने बताया कि गुरुवार दोपहर वे खलघाट से सेंधवा की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने तीन पिकअप वाहनों में गोवंश को भरा हुआ देखा। कार्यकर्ताओं ने वाहनों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक तेजी से गाड़ी भगाने लगे। शुभम ठाकुर के अनुसार, कार्यकर्ताओं ने पीछा कर तीनों वाहनों को जुलवानिया के पास रोका। जांच के दौरान वाहनों में 13 गोवंश पाए गए। इस दौरान चार आरोपियों को पकड़ा गया, जबकि एक वाहन चालक गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गया। पकड़े गए आरोपियों और वाहनों को जुलवानिया थाने लाया गया। बड़वानी जिले के एबी रोड पर गोवंश का अवैध परिवहन लगातार जारी है। मध्य प्रदेश शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद तस्कर सक्रिय हैं। इस मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार ज्ञापन और चेतावनी भी दी जा चुकी है, लेकिन गोवंश की तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जुलवानिया पुलिस ने बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपे गए गोवंश और वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग:याचिका खारिज; CJI बोले- जरूरत जागरूकता की है, हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग:याचिका खारिज; CJI बोले- जरूरत जागरूकता की है, हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा आदेश नीतिगत दायरे में आता है और न्यायपालिका इसे जारी नहीं कर सकती। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जान-बूझकर वोट न डालने वालों के लिए दंडात्मक कार्रवाई की मांग और वोटिंग अनिवार्य बनाने वाली याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। बेंच ने PIL याचिकाकर्ता अजय गोयल से कहा कि वे अपनी शिकायतों को लेकर संबंधित पक्षों से संपर्क करें।याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि जो लोग जान-बूझकर वोट डालने से दूर रहते हैं, उनके लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। CJI ने कहा- लोकतंत्र कानूनी दबाव के बजाय जन जागरूकता से फलता-फूलता है। एक ऐसे देश में जो कानून के शासन से चलता है और लोकतंत्र में विश्वास रखता है। जहां हमने 75 सालों में हमने दिखाया है कि हम इस पर कितना भरोसा और विश्वास करते हैं, वहां हर किसी से यह उम्मीद की जाती है कि वह वोट डालने जाए। अगर वे नहीं जाते, तो नहीं जाते। जरूरत जागरूकता की है, लेकिन हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते। CJI ने चुनाव के दौरान होने वाले परेशानिायं भी बताईं सुनवाई केदौरान बेंच ने अनिवार्य वोटिंग कानून की व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र किया और कहा कि चुनाव के दिनों में, जजों समेत कई नागरिकों को काम करना पड़ता है। दरअसल, याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया था कि कोर्ट को चुनाव आयोग को निर्देश देना चाहिए कि वह वोट न डालने वालों के लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाए। इस पर CJI ने घर पर रहने के काम को अपराध बनाने के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अगर हम आपका सुझाव मान लेते हैं, तो मेरे साथी जस्टिस बागची को वोट डालने के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा, भले ही उस दिन काम का दिन हो।” बेंच ने समाज के वंचित वर्गों के लिए भी चिंता जताई। बेंच ने पूछा, “अगर कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि मुझे अपनी दिहाड़ी कमानी है, तो मैं वोट कैसे डालूं, हम उनसे क्या कहें।” याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह एक समिति बनाए, जो उन लोगों पर रोक लगाने के प्रस्ताव दे, जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में नाकाम रहते हैं। हालांकि CJI ने कहा, ‘हमें आशंका है कि ये मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं।’

ग्वालियर में मंदिर की गद्दी को लेकर खूनी संघर्ष:पूर्व पुजारी हरिदास बाबा के चेलों में चले लाठी-डंडे और चाकू,योगेंद्र दास महाराज को गंभीर चोट

ग्वालियर में मंदिर की गद्दी को लेकर खूनी संघर्ष:पूर्व पुजारी हरिदास बाबा के चेलों में चले लाठी-डंडे और चाकू,योगेंद्र दास महाराज को गंभीर चोट

ग्वालियर में मंदिर की गद्दी को लेकर चल रही पुरानी तनातनी बुधवार रात खूनी संघर्ष में बदल गई। सिरोल थाना क्षेत्र के डोंगरपुर पुतलीघर स्थित बाग वाले मंदिर में दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला लाठी-डंडों और चाकू तक पहुंच गया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार योगेंद्र दास महाराज पर चंद्रशेखर महाराज ने अपने साथियों मोहन कुशवाहा और कैलाश बघेल के साथ मिलकर रात करीब 11:30 बजे हमला कर दिया। इस हमले में योगेंद्र दास महाराज को पसली में चाकू लगा, वहीं सिर पर डंडा लगने से गंभीर चोट आई। घटना के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अदालत में विचाराधीन है मामला बताया जा रहा है कि दोनों ही पक्ष मंदिर के पूर्व पुजारी हरिदास बाबा के चेले हैं और लंबे समय से मंदिर पर कब्जे को लेकर उनके बीच विवाद चल रहा है। करीब 12 से 15 हजार वर्ग फीट में फैले इस मंदिर की गद्दी को लेकर मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, लेकिन अब यह विवाद हिंसक रूप ले चुका है। पुलिस को नहीं मिली लिखित शिकायत घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। सिरोल थाना प्रभारी गोविंद बगोई के अनुसार फिलहाल घायल पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं दी गई है, हालांकि मेडिकल परीक्षण कराया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

रिकॉर्ड जीत के साथ ‘कैंडिडेट्स’ जीते 20 साल के सिंदारोव:अब 19 वर्षीय गुकेश से सामना; दोपहर में नींद से बचने के लिए चुना था चेस

रिकॉर्ड जीत के साथ ‘कैंडिडेट्स’ जीते 20 साल के सिंदारोव:अब 19 वर्षीय गुकेश से सामना; दोपहर में नींद से बचने के लिए चुना था चेस

उज्बेकिस्तान के 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर जावोखिर सिंदारोव ने ‘कैंडिडेट्स चेस टूर्नामेंट’ जीता। 13 मैचों में अजेय रहते हुए उन्होंने 6 जीत दर्ज की, जो 2013 में राउंड रॉबिन फॉर्मेट आने के बाद से इस टूर्नामेंट का रिकॉर्ड है। अब वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उनका सामना भारत के मौजूदा चैम्पियन 19 साल के डी. गुकेश से होगा। सिंदारोव के पास 2004 के बाद उज्बेकिस्तान को पहला और ओवरऑल सिर्फ दूसरा चैम्पियन देने का मौका है। दूसरी ओर, गुकेश इन दिनों फॉर्म से जूझ रहे हैं और टॉप-10 से भी बाहर हो गए हैं। सिंदारोव – कभी वीडियो गेम्स की लत लग गई थी सिंदारोव ने साढ़े चार साल की उम्र में किंडरगार्टन में दोपहर की नींद से बचने के लिए शतरंज चुना। ट्रेनिंग के बाद 6 महीने में ही दादाजी को हराने लगे और 12 की उम्र में दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर्स में शुमार हो गए। बीच में वीडियो गेम्स की लत के कारण उनकी रेटिंग गिर गई। हालांकि, कोविड में वापस करियर पटरी पर लाए। सिंदारोव बेहद शांत स्वभाव के हैं। कैंडिडेट्स में उनकी एक चाल ने नंबर-2 हिकारू नाकामुरा को 67 मिनट तक सोचने पर मजबूर कर दिया। उस माहौल में भी सिंदारोव बेफिक्र उबासी लेते रहे। अंततः दबाव में नाकामुरा से गलती हुई और सिंदारोव जीत गए। 2025 में वर्ल्ड कप जीतने के बाद ताशकंद लौटने पर सैन्य बैंड और प्रधानमंत्री ने उनका स्वागत किया। इस जीत के बाद उन्होंने सबसे पहला मैसेज अपनी 5 साल पुरानी दोस्त, कजाकिस्तान की ग्रैंडमास्टर बिबिसारा असौबायेवा को किया था। कैंडिडेट्स में भी दोनों एक-दूसरे को प्रेरित करते नजर आए थे। गुकेश – चैम्पियंस का वॉलपेपर लगाकर तैयारी करते गुकेश के लैपटॉप का वॉलपेपर दुनिया के 16 विश्व चैम्पियनों की तस्वीरों से सजा था। वे रोज उसे देखते और उन्हीं के बीच होने का सपना बुनते। दिसंबर 2024 में जब खुद विश्व चैम्पियन बने, तो उस ऐतिहासिक फेहरिस्त में उनका नाम भी जुड़ गया। 2021 के लॉकडाउन में उन्हें फिल्मों की ऐसी लत लगी कि वे दिन में दो-दो फिल्में देखने लगे। जैसे ही अहसास हुआ कि यह शतरंज को नुकसान पहुंचा रहा है, उन्होंने तुरंत फिल्मों पर ब्रेक लगा दिया। दही-चावल खाने के शौकीन गुकेश को शतरंज का जुनून ऐसा था कि क्लास टॉपर होने के बावजूद चौथी क्लास के बाद स्कूल छोड़ दिया था। बिना स्कूल गए उन्होंने खिलाड़ियों से बात कर फर्राटेदार इंग्लिश सीखी और दोस्तों के साथ फिल्में देखकर हिंदी समझनी शुरू की। गुकेश की दीवानगी ऐसी थी कि कोच चेस की जो किताबें 2-3 दिन में खत्म करने को देते थे, वे घर जाकर पिता के साथ उन्हें कुछ ही घंटों में हल कर देते थे।

यूट्यूब एप से पूरी तरह हटा सकेंगे 'शॉर्ट्स':टाइम मैनेजमेंट में नया 0 मिनट का ऑप्शन मिला; रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी

यूट्यूब एप से पूरी तरह हटा सकेंगे 'शॉर्ट्स':टाइम मैनेजमेंट में नया 0 मिनट का ऑप्शन मिला; रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी

यूट्यूब ने ‘टाइम मैनेजमेंट’ का नया फीचर जारी किया है। इसके जरिए अब आप एप पर शॉर्ट्स देखने की समय सीमा को ‘जीरो’ पर सेट कर सकते हैं। इससे शॉर्ट्स फीड पूरी तरह से हट जाएगी। इसका मकसद स्क्रीन टाइम को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करना है। यूट्यूब ने पिछले साल अक्टूबर में शॉर्ट्स के लिए टाइमर फीचर पेश किया था, जिसमें न्यूनतम समय सीमा 15 मिनट थी। जनवरी में इस फीचर का विस्तार करते हुए माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल देने के लिए ‘जीरो मिनट’ का विकल्प लाने की घोषणा की गई थी। सभी अकाउंट के लिए फीचर रोलआउट यूट्यूब की प्रवक्ता मैकेंजी स्पिलर के मुताबिक, अब यह विकल्प सभी पैरेंट्स के लिए लाइव हो चुका है और धीरे-धीरे सामान्य एडल्ट अकाउंट्स के लिए भी रोल आउट किया जा रहा है। होम स्क्रीन से भी शॉर्ट्स के सुझाव हट जाएंगे जैसे ही आप ‘जीरो मिनिट’ की लिमिट चुनेंगे, शॉर्ट्स टैब पर कोई वीडियो नहीं दिखेगा। वहां केवल एक नोटिफिकेशन दिखाई देगा कि आपने अपनी ‘शॉर्ट्स फीड लिमिट’ पूरी कर ली है। लिमिट सेट करने के बाद होम स्क्रीन से भी शॉर्ट्स के सुझाव हट जाएंगे। बिंज वॉचिंग और रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी भारत में यूट्यूब के करोड़ों यूजर्स हैं और शॉर्ट्स का क्रेज बहुत ज्यादा है। ऐसे में यह फीचर उन लोगों के लिए काफी मददगार साबित होगा जो डूम स्क्रॉलिंग यानी अनचाहे स्क्रॉलिंग की आदत छोड़ना चाहते हैं। डिजिटल वेलबीइंग की दिशा में यह यूट्यूब का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। फीचर ऑन करने लिए 3 स्टेप्स फॉलो करें नॉलेज पार्ट: क्या है डूमस्क्रॉलिंग लगातार छोटे वीडियो स्क्रॉल करते रहने की आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहते हैं। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है, बल्कि मानसिक तनाव और नींद न आने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

आम खाने का सही तरीका क्या है? सिर्फ 1 गलती की और शरीर में भर सकता है जहर, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए सही नियम

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Last Updated:April 16, 2026, 11:57 IST Aam Khane Ka Sahi Tarika : गर्मियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में ‘फलों के राजा’ आम की खुशबू महकने लगी है. रसीले आम का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाना लाजमी है. स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ आम विटामिन्स और मिनरल्स का खजाना भी है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही इस मीठे फल को आपकी सेहत के लिए ‘जहर’ समान बना सकती है? न्यूट्रिशनिस्ट निराली टांक ने हाल ही में आम खाने के उन सही नियमों के बारे में बताया है, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं. Mango Eating Tips : ज्यादातर लोग बाजार से आम खरीदकर लाते हैं, उन्हें नल के नीचे धोते हैं और तुरंत काटकर खाना शुरू कर देते हैं. पहली नजर में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से यह बहुत बड़ी गलती है. बिना सही प्रक्रिया के आम खाने से न केवल पेट खराब हो सकता है, बल्कि यह स्किन और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डालता है. अगर आप आम के शौकीन हैं, तो आपको इसे खाने का सही तरीका और एक्सपर्ट की सलाह जरूर जाननी चाहिए. भिगोना क्यों है जरूरी? (Why Soaking is Essential) न्यूट्रिशनिस्ट निराली टांक के अनुसार, आम को खाने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले पानी में भिगोकर रखना अनिवार्य है. यह प्रक्रिया केवल ऊपरी धूल-मिट्टी साफ करने के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण है. आम की तासीर प्राकृतिक रूप से गर्म होती है. अगर इसे सीधे खाया जाए, तो यह शरीर के ‘थर्मोजेनेसिस’ (आंतरिक गर्मी) को बढ़ा देता है. यही कारण है कि कई लोगों को आम खाने के बाद चेहरे पर फुंसियां या मुंहासे निकलने की शिकायत होती है. शरीर की गर्मी पर नियंत्रण (Controlling Body Heat)- पानी में भिगोने से आम की यह अतिरिक्त गर्मी (Heat Content) काफी हद तक कम हो जाती है. जब आम ठंडा हो जाता है, तो यह शरीर में गर्मी पैदा करने के बजाय ठंडक पहुंचाता है. जो लोग आम खाने के बाद पेट में जलन या मुंह में छालों से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह तरीका रामबाण है. यह छोटा सा काम आम को शरीर के लिए सुरक्षित और पचाने में बेहद आसान बना देता है. Add News18 as Preferred Source on Google फाइटिक एसिड से सुरक्षा (Neutralizing Phytic Acid)- एक और गंभीर कारण है आम में मौजूद ‘फाइटिक एसिड’ (Phytic Acid). फाइटिक एसिड एक ऐसा तत्व है जिसे ‘एंटी-पोषक तत्व’ माना जाता है. यह शरीर को कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स को सोखने से रोकता है. जब हम आम को कुछ देर पानी में भिगोते हैं, तो यह एसिड पानी में निकल जाता है. ऐसा करने से आम में मौजूद भरपूर पोषण आपके शरीर को पूरी तरह मिल पाता है और आप एनीमिया जैसी समस्याओं से बचे रहते हैं. रसायनों और टॉक्सिन्स से बचाव (Safety from Chemicals)- आजकल फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और तेजी से पकाने के लिए कीटनाशकों (Pesticides) और केमिकल्स का भारी इस्तेमाल होता है. ये रसायनिक तत्व छिलके की ऊपरी परत पर चिपके रहते हैं. केवल सादे पानी से धोने भर से ये साफ नहीं होते. जब आम को एक घंटे तक पानी के बर्तन में डुबोकर रखा जाता है, तो ये हानिकारक रसायन पानी में घुलकर निकल जाते हैं, जिससे शरीर के अंदर ‘टॉक्सिन्स’ या जहर पहुंचने का खतरा खत्म हो जाता है. पाचन तंत्र पर असर (Impact on Digestion)- गलत तरीके से आम खाने का सबसे पहला असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है. बिना भिगोए आम खाने से कब्ज, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी संवेदनशील हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप आम को सही विधि से खाते हैं, तो इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन को दुरुस्त रखता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाता है. खाने का सही समय (The Ideal Time to Eat)- न्यूट्रिशनिस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आम को कभी भी मुख्य भोजन (Heavy Meal) के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए. इसे या तो सुबह के नाश्ते के समय लें या फिर दोपहर के स्नैक के रूप में. खाने के तुरंत बाद आम खाने से शरीर में ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह है. इसलिए समय और तरीके का तालमेल ही आपको आम के असली फायदों से रूबरू कराएगा. अंत में, यह ध्यान रखें कि आम केवल एक फल नहीं बल्कि सेहत का खजाना है, बशर्ते आप इसे प्रकृति के नियमों के अनुसार खाएं. तो अगली बार जब आप घर में आम लाएं, तो उसे सीधे थाली में सजाने के बजाय एक घंटे के लिए ठंडे पानी की बाल्टी में जरूर डालें. अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ न करें और न्यूट्रिशनिस्ट द्वारा बताए गए इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर गर्मियों के इस सुनहरे तोहफे का सुरक्षित आनंद लें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) First Published : April 16, 2026, 11:57 IST