KKR के कप्तान अजिंक्य रहाणे पर 12 लाख का जुर्माना:चेन्नई के खिलाफ मैच में स्लो ओवर रेट के चलते कार्रवाई; सीजन की पहली गलती

IPL 2026 के 22वें मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान अजिंक्य रहाणे पर स्लोओवर रेट के लिए जुर्माना लगाया गया है। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के खिलाफ एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए मैच के दौरान कोलकाता की टीम तय समय में अपने ओवर पूरे नहीं कर पाई थी। IPL की आचार संहिता के उल्लंघन के कारण BCCI ने कप्तान पर यह एक्शन लिया है। KKR का सीजन का यह पहला स्लोओवर रेट है मैच के बाद जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक,IPL की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के तहत यह कोलकाता नाइट राइडर्स का इस सीजन का पहला अपराध था। नियमों के अनुसार, सीजन की पहली गलती होने के कारण कप्तान अजिंक्य रहाणे पर केवल 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया। अगर टीम दोबारा ऐसी गलती करती है, तो जुर्माने की रकम बढ़ जाएगी और टीम के अन्य खिलाड़ियों पर भी मैच फीस का जुर्माना लग सकता है। क्या है स्लो ओवर रेट का नियम? IPL के नियमों के अनुसार, हर टीम को 20 ओवर फेंकने के लिए एक निश्चित समय (डेढ़ घंटा या 90 मिनट, जिसमें रणनीतिक ब्रेक शामिल हैं) दिया जाता है। अगर पारी खत्म होने तक टीम निर्धारित समय से पीछे रहती है, तो इसे ‘स्लो ओवर रेट’ माना जाता है। फील्ड पर मौजूद अंपायर और मैच रेफरी इसकी मॉनिटरिंग करते हैं। कप्तान की जिम्मेदारी होती है कि वह खेल की रफ्तार बनाए रखे। अगली गलती पर लग सकता है बैन IPL नियमों के मुताबिक, अगर रहाणे की टीम सीजन में दूसरी बार स्लो ओवर रेट की गलती करती है, तो कप्तान पर 24 लाख रुपये और टीम के बाकी सदस्यों पर मैच फीस का 25% या 6 लाख रुपये (जो भी कम हो) जुर्माना लगेगा। वहीं, तीसरी बार ऐसा होने पर कप्तान पर 30 लाख का जुर्माना और एक मैच का प्रतिबंध भी लग सकता है। ———————————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… सैमसन का बैट छूटा, त्यागी की बॉल पर बोल्ड हुए:रघुवंशी-रहाणे के कैच ड्रॉप, नूर के 3 विकेट से पलटा मैच; मोमेंट्स चेन्नई सुपर किंग्स ने IPL 2026 के 22वें मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स को 32 रन से हरा दिया। चेपॉक स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए मुकाबले में कई अहम मोमेंट्स रहे। पूरी खबर
KKR के कप्तान अजिंक्य रहाणे पर 12 लाख का जुर्माना:चेन्नई के खिलाफ मैच में स्लो ओवर रेट के चलते कार्रवाई; सीजन की पहली गलती

IPL 2026 के 22वें मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान अजिंक्य रहाणे पर स्लोओवर रेट के लिए जुर्माना लगाया गया है। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के खिलाफ एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए मैच के दौरान कोलकाता की टीम तय समय में अपने ओवर पूरे नहीं कर पाई थी। IPL की आचार संहिता के उल्लंघन के कारण BCCI ने कप्तान पर यह एक्शन लिया है। KKR का सीजन का यह पहला स्लोओवर रेट है मैच के बाद जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक,IPL की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के तहत यह कोलकाता नाइट राइडर्स का इस सीजन का पहला अपराध था। नियमों के अनुसार, सीजन की पहली गलती होने के कारण कप्तान अजिंक्य रहाणे पर केवल 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया। अगर टीम दोबारा ऐसी गलती करती है, तो जुर्माने की रकम बढ़ जाएगी और टीम के अन्य खिलाड़ियों पर भी मैच फीस का जुर्माना लग सकता है। क्या है स्लो ओवर रेट का नियम? IPL के नियमों के अनुसार, हर टीम को 20 ओवर फेंकने के लिए एक निश्चित समय (डेढ़ घंटा या 90 मिनट, जिसमें रणनीतिक ब्रेक शामिल हैं) दिया जाता है। अगर पारी खत्म होने तक टीम निर्धारित समय से पीछे रहती है, तो इसे ‘स्लो ओवर रेट’ माना जाता है। फील्ड पर मौजूद अंपायर और मैच रेफरी इसकी मॉनिटरिंग करते हैं। कप्तान की जिम्मेदारी होती है कि वह खेल की रफ्तार बनाए रखे। अगली गलती पर लग सकता है बैन IPL नियमों के मुताबिक, अगर रहाणे की टीम सीजन में दूसरी बार स्लो ओवर रेट की गलती करती है, तो कप्तान पर 24 लाख रुपये और टीम के बाकी सदस्यों पर मैच फीस का 25% या 6 लाख रुपये (जो भी कम हो) जुर्माना लगेगा। वहीं, तीसरी बार ऐसा होने पर कप्तान पर 30 लाख का जुर्माना और एक मैच का प्रतिबंध भी लग सकता है। ———————————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… सैमसन का बैट छूटा, त्यागी की बॉल पर बोल्ड हुए:रघुवंशी-रहाणे के कैच ड्रॉप, नूर के 3 विकेट से पलटा मैच; मोमेंट्स चेन्नई सुपर किंग्स ने IPL 2026 के 22वें मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स को 32 रन से हरा दिया। चेपॉक स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए मुकाबले में कई अहम मोमेंट्स रहे। पूरी खबर
शिवपुरी में 1 महीने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन:पोहरी बस स्टैंड से ब्रिज तक का रास्ता बंद; जानिए नए रूट्स

शिवपुरी में पोहरी फाटक रेलवे ओवर ब्रिज पर आरई वॉल और सर्विस रोड का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसके चलते आज 15 अप्रैल से शहर में करीब एक महीने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया है। वर्तमान में पोहरी बस स्टैंड के पहले गेट से लेकर ब्रिज तक का रास्ता पूरी तरह बंद है और प्रशासन ने यातायात सुचारू रखने के लिए वाहनों के वैकल्पिक मार्ग तय कर दिए हैं। पोहरी की तरफ जाने वाले वाहन मनियर अंडरपास से गुजरेंगे यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन ने नए रूट निर्धारित किए हैं। पोहरी की ओर जाने वाले सभी चार पहिया और भारी वाहन अब मनियर अंडरपास से होकर अपने गंतव्य तक जाएंगे। वहीं, दूसरी तरफ शिवपुरी शहर में प्रवेश करने वाले वाहन रेलवे फाटक से होते हुए कमला हेरिटेज होटल मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। बस स्टैंड से पोहरी जाने वाले दोपहिया वाहनों को छूट प्रशासन द्वारा लागू की गई इस डायवर्जन व्यवस्था में स्थानीय दोपहिया वाहन चालकों को थोड़ी राहत दी गई है। पोहरी बस स्टैंड से पोहरी की ओर जाने वाले दोपहिया वाहनों के लिए रास्ता चालू रखा गया है। हालांकि, बड़े वाहनों के लिए पोहरी बस स्टैंड के पहले गेट से लेकर ब्रिज तक का मार्ग करीब एक महीने तक बंद रहेगा। यातायात प्रभारी ने की डायवर्जन मार्ग का पालन करने की अपील यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि निर्माण कार्य को सुरक्षित और समय सीमा में पूरा करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने सभी वाहन चालकों से अपील करते हुए कहा कि, “वे निर्धारित डायवर्जन मार्ग का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।”
जेल में तेज बुखार में तड़पते रहे विक्रम भट्ट:भगवान से कहते थे- मैं यहां नहीं मरना चाहता, 30 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में हुई थी जेल

30 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में दिसंबर से फरवरी तक जेल में रहे फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने जेल के दर्दनाक दिनों को याद किया है। फिल्ममेकर की मानें तो उन्हें कड़ाके की ठंड की वजह से तेज बुखार हुआ, वो दर्द से कराह रहे थे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसवाले उन्हें डॉक्टर के पास तक नहीं ले गए। जेल के कैदियों ने ही मदद की। ऐसे में वो भगवान से लगातार कहते थे कि वो जेल में नहीं मरना चाहते। विक्रम भट्ट ने जेल के दिनों को याद कर ऑफिशियल सोशल मीडिया से लिखा है, पावर ऑफ प्रेयर्स। उदयपुर जेल में मेरी कैद के लगभग तीन हफ्ते बाद, जनवरी की कड़ाके की ठंड में, एक रात मैं बैरक नंबर 10 में तेज बुखार के साथ कांपते हुए उठा। चार कंबल ओढ़ने के बाद भी ऐसा लग रहा था जैसे शरीर पर कुछ भी नहीं है। पास में सो रहे कैदियों ने मेरे लिए और कंबल जुटाए। मैंने पैरासिटामोल ली और सोचा कि ठीक हो जाऊंगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगली सुबह मैं जेल के अस्पताल गया। वहां थर्मामीटर तक नहीं था। उन्होंने ऑक्सीजन चेक की और कहा कि सब ठीक है। आगे फिल्ममेकर ने लिखा, ‘मैंने कहा, ये मजाक है क्या? मुझे एक्सियल स्पॉनडिलोआर्थिटिस है, जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है, और मेरे लिए तेज बुखार खतरनाक हो सकता है। आखिरकार डॉक्टर ने मुझे बाहर अस्पताल ले जाने के लिए एक नोट लिख दिया। लेकिन कोई आया ही नहीं। पहले पुलिस एक VIP की सुरक्षा में व्यस्त थी। फिर एक आदिवासी मेले में। दिन पर दिन मैं बैरक में इंतजार करता रहा। मेरे दिन दर्द में बीतते थे, और रातें बुखार में।’ आगे भावुक होकर फिल्ममेकर ने लिखा, ‘एक समय ऐसा आया जब मुझे समझ आ गया कि मैं कहीं नहीं जा रहा हूं। तो मैंने वही किया जो मैं कर सकता था। मैंने तेल और नमक खाना बंद कर दिया, जितना हो सके पानी पिया, और बैरक में लगी देवी की एक बड़ी तस्वीर के सामने बैठ गया। और मैंने प्रार्थना की। मैंने कहा, “अगर आप हैं, अगर मेरी प्रार्थनाओं का कभी कोई मतलब रहा है, तो मुझे एक चमत्कार दिखाइए। मैं यहां मरना नहीं चाहता। मेरे बच्चों को मेरी जरूरत है। मेरी पत्नी को मेरी जरूरत है। मेरे 90 साल के पिता को मेरी जरूरत है।”’ आखिर में फिल्ममेकर ने लिखा, ‘हर दिन मैं प्रार्थना करता रहा। और धीरे-धीरे, कुछ बदलने लगा। बुखार कम होने लगा। दर्द धीरे-धीरे घटने लगा। दिन-ब-दिन मैं ठीक होने लगा। एक सुबह मैंने देवी की ओर देखा और बस इतना कहा, “मुझे मेरी जिंदगी वापस देने के लिए धन्यवाद।”’ जेल अधिकारियों पर लापरवाही करने के आरोप भी लगाए अपनी पोस्ट में विक्रम भट्ट ने जेल प्रशासन पर लापरवाही करने के भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा है कि शिकायत करने के 15 दिन बाद पुलिसवाले उन्हें अस्पताल ले जाने आए थे, लेकिन तब तक वो ठीक हो चुके है। इस पर उन्होंने पुलिसवालों से कहा था, “जनाब, आप करीब 15 दिन देर से आए हैं। शायद आप मेरे भूत को देखने आए हैं।” जब उन्होंने अधिकारी से पूछा कि अगर ये इमरजेंसी होती तो वो क्या करते, जवाब मिला, “ओह, तब हम आपको जेल गार्ड्स के साथ भेज देते।” इस पर विक्रम लिखते हैं, ‘वे मुझे पहले भी भेज सकते थे। शायद उन्होंने नहीं भेजा। या शायद भगवान मुझे पहले कुछ सिखाना चाहते थे। इसलिए जब लोग कहते हैं कि भगवान नहीं है, तो मैं बहस नहीं करता। मैं बस मुस्कुरा देता हूं। क्योंकि कुछ चमत्कार सिर्फ उसी को दिखाई देते हैं, जिसे उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।’ ढाई महीने जेल में रहे, जानिए क्या था विवाद राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप है कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा- 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था।
जेल में तेज बुखार में तड़पते रहे विक्रम भट्ट:भगवान से कहते थे- मैं यहां नहीं मरना चाहता, 30 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में हुई थी जेल

30 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में दिसंबर से फरवरी तक जेल में रहे फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने जेल के दर्दनाक दिनों को याद किया है। फिल्ममेकर की मानें तो उन्हें कड़ाके की ठंड की वजह से तेज बुखार हुआ, वो दर्द से कराह रहे थे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसवाले उन्हें डॉक्टर के पास तक नहीं ले गए। जेल के कैदियों ने ही मदद की। ऐसे में वो भगवान से लगातार कहते थे कि वो जेल में नहीं मरना चाहते। विक्रम भट्ट ने जेल के दिनों को याद कर ऑफिशियल सोशल मीडिया से लिखा है, पावर ऑफ प्रेयर्स। उदयपुर जेल में मेरी कैद के लगभग तीन हफ्ते बाद, जनवरी की कड़ाके की ठंड में, एक रात मैं बैरक नंबर 10 में तेज बुखार के साथ कांपते हुए उठा। चार कंबल ओढ़ने के बाद भी ऐसा लग रहा था जैसे शरीर पर कुछ भी नहीं है। पास में सो रहे कैदियों ने मेरे लिए और कंबल जुटाए। मैंने पैरासिटामोल ली और सोचा कि ठीक हो जाऊंगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगली सुबह मैं जेल के अस्पताल गया। वहां थर्मामीटर तक नहीं था। उन्होंने ऑक्सीजन चेक की और कहा कि सब ठीक है। आगे फिल्ममेकर ने लिखा, ‘मैंने कहा, ये मजाक है क्या? मुझे एक्सियल स्पॉनडिलोआर्थिटिस है, जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है, और मेरे लिए तेज बुखार खतरनाक हो सकता है। आखिरकार डॉक्टर ने मुझे बाहर अस्पताल ले जाने के लिए एक नोट लिख दिया। लेकिन कोई आया ही नहीं। पहले पुलिस एक VIP की सुरक्षा में व्यस्त थी। फिर एक आदिवासी मेले में। दिन पर दिन मैं बैरक में इंतजार करता रहा। मेरे दिन दर्द में बीतते थे, और रातें बुखार में।’ आगे भावुक होकर फिल्ममेकर ने लिखा, ‘एक समय ऐसा आया जब मुझे समझ आ गया कि मैं कहीं नहीं जा रहा हूं। तो मैंने वही किया जो मैं कर सकता था। मैंने तेल और नमक खाना बंद कर दिया, जितना हो सके पानी पिया, और बैरक में लगी देवी की एक बड़ी तस्वीर के सामने बैठ गया। और मैंने प्रार्थना की। मैंने कहा, “अगर आप हैं, अगर मेरी प्रार्थनाओं का कभी कोई मतलब रहा है, तो मुझे एक चमत्कार दिखाइए। मैं यहां मरना नहीं चाहता। मेरे बच्चों को मेरी जरूरत है। मेरी पत्नी को मेरी जरूरत है। मेरे 90 साल के पिता को मेरी जरूरत है।”’ आखिर में फिल्ममेकर ने लिखा, ‘हर दिन मैं प्रार्थना करता रहा। और धीरे-धीरे, कुछ बदलने लगा। बुखार कम होने लगा। दर्द धीरे-धीरे घटने लगा। दिन-ब-दिन मैं ठीक होने लगा। एक सुबह मैंने देवी की ओर देखा और बस इतना कहा, “मुझे मेरी जिंदगी वापस देने के लिए धन्यवाद।”’ जेल अधिकारियों पर लापरवाही करने के आरोप भी लगाए अपनी पोस्ट में विक्रम भट्ट ने जेल प्रशासन पर लापरवाही करने के भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा है कि शिकायत करने के 15 दिन बाद पुलिसवाले उन्हें अस्पताल ले जाने आए थे, लेकिन तब तक वो ठीक हो चुके है। इस पर उन्होंने पुलिसवालों से कहा था, “जनाब, आप करीब 15 दिन देर से आए हैं। शायद आप मेरे भूत को देखने आए हैं।” जब उन्होंने अधिकारी से पूछा कि अगर ये इमरजेंसी होती तो वो क्या करते, जवाब मिला, “ओह, तब हम आपको जेल गार्ड्स के साथ भेज देते।” इस पर विक्रम लिखते हैं, ‘वे मुझे पहले भी भेज सकते थे। शायद उन्होंने नहीं भेजा। या शायद भगवान मुझे पहले कुछ सिखाना चाहते थे। इसलिए जब लोग कहते हैं कि भगवान नहीं है, तो मैं बहस नहीं करता। मैं बस मुस्कुरा देता हूं। क्योंकि कुछ चमत्कार सिर्फ उसी को दिखाई देते हैं, जिसे उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।’ ढाई महीने जेल में रहे, जानिए क्या था विवाद राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप है कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा- 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था।
खेत पर पानी देने गए मजदूर की संदिग्ध मौत:हरदा में 1 घंटे बाद गेट पर मिला शव; बेटे को हत्या का शक, पुलिस कर रही एक्सीडेंट की जांच

हरदा के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रन्हाईकला में बीती मंगलवार रात खेत पर पानी देने गए एक मजदूर विश्राम गठिया का शव 1 घंटे बाद संदिग्ध परिस्थितियों में खेत के गेट पर मिला है। मृतक के सिर और मुंह पर चोट के निशान मिले हैं, जिसे लेकर उसके बेटे ने हत्या की आशंका जताई है। पुलिस ने एक्सीडेंट की सूचना पर मर्ग कायम कर बुधवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है और सीसीटीवी फुटेज खंगालकर मामले की जांच कर रही है। रात 10 बजे खेत पर गया था मजदूर, सिर और मुंह से बह रहा था खून ग्राम रन्हाईकला निवासी मजदूर विश्राम गठिया मंगलवार रात करीब 10 बजे किसान मुकेश दोगने के खेत पर पानी देने गया था। लगभग एक घंटे बाद, रात करीब 11 बजे उसका शव किसान के खेत के गेट के पास पड़ा मिला। ग्रामीणों ने इसकी सूचना मृतक के बड़े बेटे कन्हैया को दी। मौके पर पहुंचने पर कन्हैया ने देखा कि उसके पिता के सिर और मुंह पर चोट के निशान थे और खून बह रहा था। इसके बाद उसने तत्काल परिजनों और पुलिस को घटना की जानकारी दी। परिवार में हैं दिव्यांग पत्नी और 2 बेटे सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू की। मृतक के बेटे ने अपने पिता की हत्या की आशंका जताई है। बताया गया है कि मृतक विश्राम घर में अकेला कमाने वाला था। उसकी पत्नी दिव्यांग है और उसके दो बेटे (जिनकी उम्र 18 और 14 साल है) तथा एक बूढ़ी मां हैं। SI बोले- एक्सीडेंट की सूचना मिली थी, CCTV से जुटा रहे साक्ष्य जांच अधिकारी एसआई सोहनसिंह राजपूत ने बताया कि, “ग्राम रन्हाईकला में एक व्यक्ति की एक्सीडेंट से मौत होने की सूचना मिली थी।” पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। बुधवार सुबह जिला अस्पताल में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अब घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर साक्ष्य जुटा रही है।
केजरीवाल बोले-जज के बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते:तुषार CBI के वकील हैं, ऐसे में जज कांता मेहता के खिलाफ आदेश कैसे दे पाएंगी

अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाला केस की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को फिर से हटाने की मांग की है। केजरीवाल ने बुधवार को जस्टिस कांता की अदालत में एक और हलफनामा दायर किया है। इसमें केजरीवाल ने जज के दो बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करने का मुद्दा उठाया है। केजरीवाल ने लिखा- जज के दोनों बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। तुषार मेहता उनके बच्चों को केस सौंपते हैं। तुषार मेहता CBI की तरफ से पेश होने वाले वकील हैं। ऐसे में, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ आदेश कैसे जारी कर पाएंगी? इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें केस से हटाया जाए। केजरीवाल के हलफनामे में जज के बच्चों का जिक्र… केजरीवाल ने जज को हटाने की अर्जी क्यों लगाई, 5 पॉइंट्स में समझिए ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस आदेश को CBI ने चुनौती दी, जिसकी सुनवाई वर्तमान में जस्टिस शर्मा कर रही हैं। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने नोटिस जारी किया और उस आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी, जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई थी। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत थीं और ट्रायल कोर्ट को PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) की कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर, अरुण पिल्लई और चनप्रीत सिंह रायट ने जस्टिस शर्मा को हटाने की अर्जी दाखिल की। 13 अप्रैल: केजरीवाल की कोर्टरूम में 10 बड़ी दलीलें… – 9 मार्च को सुनवाई के दौरान CBI के अलावा कोई मौजूद नहीं था। बिना उनकी बात सुने कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में गलत बता दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर फैसला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने 5 मिनट की सुनवाई में उसे गलत बता दिया। आदेश आया तो मुझे लगा कि मामला पक्षपात की तरफ जा रहा है। मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद मैंने यह आवेदन दिया। – पहले आपने कहा था कि ‘एप्रूवर’ (गवाह बने आरोपी) के बयान मान्य हैं। लेकिन यहां सिर्फ 5 मिनट की सुनवाई के बाद आपने कहा कि ट्रायल कोर्ट की एप्रूवर के बयानों पर की गई टिप्पणियां गलत हैं। यह मेरे लिए सबसे चिंताजनक बात थी। – मैं इस अदालत के सत्येंद्र जैन बनाम ED फैसले पर भरोसा करना चाहता हूं। उस मामले में जमानत पर सुनवाई चल रही थी। 6 दिन की सुनवाई हो चुकी थी और वह आखिरी तारीख थी। अचानक ED ने पक्षपात की आशंका जताई। जिला न्यायाधीश ने इसे स्वीकार कर लिया। मामला हाईकोर्ट आया और वहां भी इसे स्वीकार कर लिया गया। उस मामले और मेरे मामले में काफी समानताएं हैं। उस मामले में अदालत ने कहा था कि सवाल जज की ईमानदारी का नहीं है, बल्कि पक्षकार के मन में उत्पन्न आशंका का है। मेरा मामला भी वैसा ही है। यहां भी सवाल जज की ईमानदारी का नहीं है। – जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ चल रही कार्रवाई को भी हाईकोर्ट ने रोक दिया। ट्रायल कोर्ट ने जो बातें लिखी थीं, वो CBI के खिलाफ नहीं, बल्कि IO के खिलाफ थीं। IO ने हाईकोर्ट में कोई राहत नहीं मांगी थी और वह वहां मौजूद भी नहीं था। फिर भी सिर्फ CBI के कहने पर उसके खिलाफ कार्रवाई रोक दी गई। इससे मेरे मन में शंका पैदा होती है। – कानून के मुताबिक डिस्चार्ज आदेश को बहुत कम मामलों में ही रोका जाता है, लेकिन हमें सुने बिना ही आदेश का एक हिस्सा रोक दिया गया और बाकी हिस्सा भी बदल दिया गया। ऐसा लग रहा है कि इस एकतरफा आदेश से ट्रायल कोर्ट का ज्यादातर फैसला खत्म कर दिया गया। मुझे CBI की याचिका की कॉपी भी नहीं दी गई थी। – मैंने देखा है कि इस केस और इसी मामले से जुड़े अन्य आरोपियों, जैसे मनीष सिसोदिया के केस की सुनवाई बहुत तेजी से हो रही है। ऐसी गति किसी और केस में नहीं दिखती। दोनों ही मामले विपक्षी नेताओं से जुड़े हैं। – इस कोर्ट में CBI और ED की लगभग हर दलील मान ली जाती है। उनकी हर मांग आदेश बन जाती है। सिर्फ एक मामला (अरुण पिल्लई केस) अलग रहा। जब भी ED या CBI कुछ कहती है, उसे स्वीकार कर लिया जाता है और आदेश उनके पक्ष में दिया जाता है। ट्रायल कोर्ट के लंबे फैसले के खिलाफ CBI ने सिर्फ 4 घंटे में याचिका दाखिल कर दी, जिसमें ज्यादा ठोस बात नहीं थी। फिर भी पहली ही सुनवाई में एकतरफा आदेश दे दिया गया। – इस अदालत के सामने पहले ही 5 मामले आ चुके हैं। मेरा मामला गिरफ्तारी से संबंधित था। संजय सिंह, के कविता और अमन ढल्ल की जमानत याचिकाएं भी यहां सुनी गई थीं। उन मामलों में इस अदालत द्वारा की गई टिप्पणियां अपने आप में निर्णय के समान हैं। – अधिवक्ता परिषद नाम का एक संगठन है, जो RSS से जुड़ा है। आपने उसके कार्यक्रमों में चार बार हिस्सा लिया है। हम उसकी विचारधारा के पूरी तरह खिलाफ हैं और खुलकर विरोध करते हैं। यह मामला राजनीतिक है। अगर कोई जज किसी खास विचारधारा से जुड़े कार्यक्रमों में जाता है, तो इससे पक्षपात की आशंका बनती है। ऐसे में मेरे मन में यह सवाल उठता है कि क्या मुझे निष्पक्ष न्याय मिलेगा या नही? – सोशल मीडिया पर भी एक मुद्दा चर्चा में है कि अगर जज के करीबी लोग किसी पक्ष या वकीलों से जुड़े हों, तो जज खुद को उस केस से अलग कर लेते हैं। अगर जज के करीबी लोग किसी पक्ष से जुड़े हों, तो वे खुद को मामले से अलग कर लेते हैं। मेरा निवेदन है कि इस बात पर भी विचार किया जाए। 27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल सहित 23 आरोपियों को बरी किया था 27 फरवरी को ट्रायल
एक्टर ने जबरदस्ती एक्ट्रेस को बीफ खिलाने की कोशिश की:भड़के फैंस, सफाई में मुस्लिम एक्टर शियास ने एक्ट्रेस की बीफ सर्व करते वीडियो जारी की

मलयाली एक्टर और मॉडल शियास करीम पर जबरदस्ती एक्ट्रेस को बीफ खिलाने के आरोप लगे हैं। इस घटना का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद उनकी जमकर आलोचना भी की जा रही है। एक्टर शियास करीम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो और एक्ट्रेस अनुमोल अनुकुट्टी, एक पार्टी में बुफे से खाना लेते नजर आ रहे हैं। एक्ट्रेस अनुमोल आगे चलती हुईं खाना निकाल रही हैं, तभी उनके पीछे खड़े एक्टर शियास उनसे बार-बार पूछते हैं- बीफ खाएगी। एक्ट्रेस ने साफ इनकार किया, तो एक्टर ने उनका मजाक भी बनाया। मना करने के बावजूद शियाज जबरदस्ती बार-बार पूछते हैं। इस पर एक्ट्रेस उन्हें नजरअंदाज करते हुए आगे निकल गईं। बता दें कि सामने आए वीडियो में एक्ट्रेस बीफ खाती नजर नहीं आई हैं और न ही शियास ने उनकी प्लेट में सर्व किया है। हालांकि इसके बावजूद एक्टर की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि मुस्लिम शियास को वैसे ही पोर्क खाने के लिए मजबूर करना चाहिए, जैसे वो अनुमोल को बीफ खाने के लिए कर रहे हैं। एक्टर के सपोर्ट में उतरे कई यूजर्स वीडियो सामने आने के बाद जहां कई लोग शियाज के लिए भद्दी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ऐसे भी हैं, जो ये दावा कर रहे हैं कि एक्ट्रेस अनुमोली बीफ खाती हैं। अनुमोल की कई तस्वीरें भी वायरल की जा रही हैं, जिनमें वो खुद अपने हाथों से बीफ सर्व करती दिखी हैं। कुछ यूजर्स का ये भी कहना है कि केरल में बीफ खाना आम है और वहां 80-90 प्रतिशत हिंदू भी बीफ खाते हैं, ऐसे में मामले को गलत रूप देना बिल्कुल गलत है। विवाद बढ़ने पर एक्टर ने दी सफाई आलोचना होने और विवाद बढ़ने के बाद एक्टर शियाज करीम ने सफाई देते हुए ऑफिशियल इंस्टाग्राम से एक वीडियो पोस्ट की है, जिसमें वो साफ कह रहे हैं कि एक्ट्रेस अनुमोल बीफ खाती हैं, इसलिए उन्हें ऑफर किया गया था। शियाज ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी भी पोस्ट की है, जिसमें अनुमोली खुद बीफ खाती और सर्व करती नजर आई हैं। इसके अलावा भी उन्होंने बीफ की कई डिशेज के वीडियो पोस्ट किए हैं। बता दें कि शियास को बिग बॉस मलयाली सीजन 1 से पहचान मिली थी। इससे पहले भी वो विवादों में रह चुके हैं। 2024 में उनकी जिम ट्रेनर ने उन पर शादी का झासा देकर रेप करने के आरोप लगाए थे। वहीं एक्ट्रेस अनुमाल अनुकट्टी ने बिग बॉस मलयाली सीजन 7 जीता है।
एक्टर ने जबरदस्ती एक्ट्रेस को बीफ खिलाने की कोशिश की:भड़के फैंस, सफाई में मुस्लिम एक्टर शियास ने एक्ट्रेस की बीफ सर्व करते वीडियो जारी की

मलयाली एक्टर और मॉडल शियास करीम पर जबरदस्ती एक्ट्रेस को बीफ खिलाने के आरोप लगे हैं। इस घटना का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद उनकी जमकर आलोचना भी की जा रही है। एक्टर शियास करीम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो और एक्ट्रेस अनुमोल अनुकुट्टी, एक पार्टी में बुफे से खाना लेते नजर आ रहे हैं। एक्ट्रेस अनुमोल आगे चलती हुईं खाना निकाल रही हैं, तभी उनके पीछे खड़े एक्टर शियास उनसे बार-बार पूछते हैं- बीफ खाएगी। एक्ट्रेस ने साफ इनकार किया, तो एक्टर ने उनका मजाक भी बनाया। मना करने के बावजूद शियाज जबरदस्ती बार-बार पूछते हैं। इस पर एक्ट्रेस उन्हें नजरअंदाज करते हुए आगे निकल गईं। बता दें कि सामने आए वीडियो में एक्ट्रेस बीफ खाती नजर नहीं आई हैं और न ही शियास ने उनकी प्लेट में सर्व किया है। हालांकि इसके बावजूद एक्टर की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि मुस्लिम शियास को वैसे ही पोर्क खाने के लिए मजबूर करना चाहिए, जैसे वो अनुमोल को बीफ खाने के लिए कर रहे हैं। एक्टर के सपोर्ट में उतरे कई यूजर्स वीडियो सामने आने के बाद जहां कई लोग शियाज के लिए भद्दी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ऐसे भी हैं, जो ये दावा कर रहे हैं कि एक्ट्रेस अनुमोली बीफ खाती हैं। अनुमोल की कई तस्वीरें भी वायरल की जा रही हैं, जिनमें वो खुद अपने हाथों से बीफ सर्व करती दिखी हैं। कुछ यूजर्स का ये भी कहना है कि केरल में बीफ खाना आम है और वहां 80-90 प्रतिशत हिंदू भी बीफ खाते हैं, ऐसे में मामले को गलत रूप देना बिल्कुल गलत है। विवाद बढ़ने पर एक्टर ने दी सफाई आलोचना होने और विवाद बढ़ने के बाद एक्टर शियाज करीम ने सफाई देते हुए ऑफिशियल इंस्टाग्राम से एक वीडियो पोस्ट की है, जिसमें वो साफ कह रहे हैं कि एक्ट्रेस अनुमोल बीफ खाती हैं, इसलिए उन्हें ऑफर किया गया था। शियाज ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी भी पोस्ट की है, जिसमें अनुमोली खुद बीफ खाती और सर्व करती नजर आई हैं। इसके अलावा भी उन्होंने बीफ की कई डिशेज के वीडियो पोस्ट किए हैं। बता दें कि शियास को बिग बॉस मलयाली सीजन 1 से पहचान मिली थी। इससे पहले भी वो विवादों में रह चुके हैं। 2024 में उनकी जिम ट्रेनर ने उन पर शादी का झासा देकर रेप करने के आरोप लगाए थे। वहीं एक्ट्रेस अनुमाल अनुकट्टी ने बिग बॉस मलयाली सीजन 7 जीता है।
जिम में ऐसे कपड़े पहनकर बिल्कुल न जाएं ! बिगड़ जाएगा हार्मोनल बैलेंस, एक्सपर्ट बोले- अधिकतर लोग कर रहे गलती

Last Updated:April 15, 2026, 09:15 IST Gym Clothing Affect Your Health: जिम में पहनने के लिए बनाए जाने वाले स्पोर्ट्स वियर आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं. इन कपड़ों को बनाने में कई केमिकल्स मिलाए जाते हैं, ताकि ये पसीना सोख सकें और बदबू न आए. मगर ये केमिकल्स शरीर के संपर्क में आने से एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं. इससे कई हार्मोनल दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. अमेरिकी राज्य टेक्सास में इन स्पोर्ट्स वियर में पाए जाने वाले केमिकल्स की जांच की जा रही है. स्पोर्ट्स वियर कपड़ों में एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करने वाले केमिकल्स हो सकते हैं. How Your Workout Clothes Harm You: आजकल जिम जाने का ट्रेंड बढ़ गया है और अधिकतर लोग फिट रहना पसंद कर रहे हैं. जिम में जाकर वर्कआउट करना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. कई लोग जिम के लिए स्पोर्ट्स वियर खरीदते हैं और वर्कआउट के दौरान इन कपड़ों से पर्सनैलिटी में चार चांद लग जाते हैं. जिम में खास कपड़े पहनना लोगों को अच्छा लगता है, क्योंकि इन कपड़ों में पसीना जल्दी सूख जाता है और बदबू नहीं आती है. हालांकि अमेरिकी राज्य टेक्सास में इस तरह के कपड़ों की जांच शुरू हो गई है, क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है इन कपड़ों में कई केमिकल्स मिलाए जाते हैं, जो शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ सकते हैं. भारत में भी इस तरह के कपड़ों का ट्रेंड बढ़ गया है, जो चिंताजनक है. इन कपड़ों में ऐसे केमिकल्स पाए जाने की आशंका जताई गई है, जो शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं. ज्यादातर एक्टिववियर प्लास्टिक-बेस्ड पॉलिमर जैसे- पॉलिएस्टर और नायलॉन से बने होते हैं. इन कपड़ों को स्ट्रेचेबल, पसीना सोखने वाला और दुर्गंध-रोधी बनाने के लिए खास केमिकल्स मिलाए जाते हैं. यही केमिकल्स शरीर के संपर्क में आने पर स्किन और हार्मोन सिस्टम पर बुरा असर डाल सकते हैं. भारत में जिम में सिंथेटिक और टाइट कपड़े पहनने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन इन कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स की जांच और रेगुलेशन अभी भी सीमित है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. दिल्ली के RML हॉस्पिटल के स्किन स्पेशलिस्ट डॉ. कबीर सरदाना ने TOI को बताया कि भारत की गर्म और आर्द्र जलवायु में ऐसे कपड़े पहनने से फंगल इन्फेक्शन, स्किन इरिटेशन और रैशेज का खतरा बढ़ जाता है. खासकर शरीर के जिन हिस्सों में पसीना ज्यादा आता है, वहां ये समस्याएं ज्यादा हो सकती हैं. जांघों और कूल्हों के आसपास समस्या गंभीर हो सकती है. इन कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल्स जैसे PFAS और फ्थेलेट्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हार्मोनल गड़बड़ी से जोड़ा गया है. ये केमिकल्स कपड़ों को पानी और दाग से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. भारत में बिकने वाले कई ब्रांड्स इन्हीं तकनीकों का उपयोग करते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि जिम में पहनकर जाने वाले सभी कपड़े खतरनाक हैं, लेकिन जागरूक रहना जरूरी है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि लोगों को जिम में कॉटन या नैचुरल फैब्रिक वाले कपड़े पहनकर जाने चाहिए. वर्कआउट के दौरान बहुत टाइट कपड़े पहनने से बचें और वर्कआउट के बाद तुरंत कपड़े बदल लें. अगर त्वचा पर किसी तरह की जलन या खुजली महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. अमेरिका में शुरू हुई यह जांच अब भारत के लिए भी एक चेतावनी बन गई है. यह केवल फैशन या आराम का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है. ऐसे में इसे लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 09:15 IST







