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जबलपुर में सुसाइड प्वाइंट पर पुलिस तैनात:10वीं-12वीं का आया रिजल्ट, टीचर बोले-परीक्षा का दूसरा अवसर मिलेगा; घबराकर गलत निर्णय न लें

जबलपुर में सुसाइड प्वाइंट पर पुलिस तैनात:10वीं-12वीं का आया रिजल्ट, टीचर बोले-परीक्षा का दूसरा अवसर मिलेगा; घबराकर गलत निर्णय न लें

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) ने बुधवार को हाईस्कूल और हायर सेकंडरी का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया है। परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थी जहां खुश हैं, तो असफल रहे विद्यार्थी दुखी। ऐसे में टीचर और परिवार उन्हें मोटिवेट कर रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि शासन परीक्षा देने का दूसरा मौका भी दे रहा है। उधर, जबलपुर पुलिस ने अहतियाती कदम उठाते हुए तिलवाराघाट, बरगी डैम, भेड़ाघाट और गौरीघाट पर पुलिसकर्मी तैनात कर दिए हैं। इन स्थानों पर पूरी नजर रखी जा रही है। दरअसल, ऐसे में सुसाइड केस बढ़ जाते हैं। पिछले सालों में ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं। असफल हुए हैं तो घबराएं नहीं जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय ने सफल हुए छात्र-छात्राओं को बधाई दी है। साथ ही असफल छात्र-छात्राओं से कहा है कि यह घबराने का नहीं, बल्कि और मेहनत करने का समय है। वे कहते हैं कि शासन परीक्षा का दूसरा मौका दे रहा है। आप अपनी मेहनत से इस परिणाम को बदल सकते हैं। इसलिए दृढ इच्छाशक्ति के साथ फिर से परीक्षा की तैयारी में जुट जाएं और परिणाम को बदलकर दिखाएं। हतोत्साहित न हों विद्यार्थी मॉडल हाईस्कूल की प्रिंसिपल डॉ. अर्चना ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि परीक्षा छात्रों के लिए निश्चित रूप से ऐसा समय होता है, जब सफल न होने पर वे हतोत्साहित हो जाते हैं, लेकिन अब हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। शासन ने दूसरा मौका देने का निर्णय लिया है, जो छात्र असफल हुए हैं, उन्हें उम्मीद से अच्छा परिणाम लाने का एक और मौका और समय मिल रहा है। वे सब कुछ भूलकर परीक्षा की तैयारी में जुट जाएं। डॉ. अर्चना ने बताया कि मॉडल हाईस्कूल में दसवीं में दो बच्चे स्टेट मेरिट में आए हैं, जबकि 12वीं क्लास में चार बच्चों ने प्रदेश की टॉप टेन में जगह हासिल की है। जबलपुर के मॉडल हाईस्कूल में पढ़ने वाली दसवीं कक्षा की छात्रा सिया जैन ने चौथे नंबर की रैंक हासिल की है। उन्होंने अपने साथी छात्र-छात्राओं से अपील की है कि परीक्षा परिणाम विपरीत आने पर बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। हो सकता है कि हमारी मेहनत में कुछ कमी रह गई हो, लेकिन उसके लिए फिर से मौका मिलेगा। क्योंकि लाइफ एक बार ही मिलती है, लेकिन पढ़ाई के लिए मौके कई बार मिलते हैं।

सस्ता, देसी और ताकतवर! गर्मियों में सिर्फ 1 गिलास सत्तू पीते ही शरीर बन जाएगा कूल-कूल, थकान भी होगी दूर

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Last Updated:April 15, 2026, 13:35 IST Sattu Drink Benefits in Summer: चिलचिलाती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच अगर आप खुद को ठंडा रखना चाहते हैं, तो देसी एनर्जी ड्रिंक सत्तू से बेहतर कुछ नहीं है. ऋषिकेश के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार के अनुसार, सत्तू न केवल शरीर के तापमान को संतुलित रखता है, बल्कि महंगे कोल्ड ड्रिंक्स के मुकाबले कहीं ज्यादा पौष्टिक और किफायती भी है. प्रोटीन और फाइबर से भरपूर यह सुपरफूड पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और भीषण गर्मी में शरीर को अंदरूनी ठंडक प्रदान करता है. जानिए, क्यों सत्तू आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में भी सबसे बेहतरीन हेल्थ ड्रिंक है. ऋषिकेश: गर्मियों का मौसम आते ही तेज धूप, लू और बढ़ता तापमान लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करने लगता है. ऐसे में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. जहां एक तरफ लोग महंगे कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस की ओर भागते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक पुराना देसी उपाय आज भी उतना ही असरदार है.सत्तू. सादा, सस्ता और सेहत से भरपूर सत्तू न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि गर्मी से लड़ने की ताकत भी बढ़ाता है. यही वजह है कि अब सत्तू फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है, खासकर उन लोगों के बीच जो हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहते हैं. पोषक तत्वों का पावरहाउस है सत्तू लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि सत्तू मूल रूप से भुने हुए चने से तैयार किया जाता है, जिसे पीसकर पाउडर बनाया जाता है. इसमें प्राकृतिक रूप से प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और कई जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं. यही पोषक तत्व इसे गर्मियों का सुपर ड्रिंक बनाते हैं. एक गिलास सत्तू का शरबत शरीर को तुरंत एनर्जी देता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है. यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में लोग इसे रोजाना अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं. गर्मी के दिनों में लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. सत्तू इस मामले में एक नेचुरल कूलिंग एजेंट की तरह काम करता है. जब इसे ठंडे पानी, थोड़ा नमक और नींबू के साथ मिलाकर पिया जाता है, तो यह शरीर के तापमान को संतुलित करने में मदद करता है. साथ ही, यह शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करता है. सत्तू का सेवन करने से बार-बार प्यास नहीं लगती और शरीर अंदर से ठंडा महसूस करता है. यही वजह है कि कई लोग इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहते हैं. वजन घटाने और डायबिटीज में भी मददगार सत्तू की एक और खास बात यह है कि यह पाचन के लिए बेहद अच्छा होता है. गर्मियों में अक्सर भारी खाना खाने से पेट में जलन, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं हो जाती हैं. ऐसे में सत्तू पेट को हल्का रखता है और डाइजेशन को बेहतर बनाता है. इसमें मौजूद फाइबर आंतों को साफ रखने में मदद करता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में सहायक होता है. यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स भी अब सत्तू को डेली डाइट में शामिल करने की सलाह देने लगे हैं. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand First Published : April 15, 2026, 13:35 IST

मैंगो करी रेसिपी: सिर्फ 15 मिनट में बनाएं केरल वाली खास आम की कैरी, नोट करें रेसिपी

मैंगो करी रेसिपी: सिर्फ 15 मिनट में बनाएं केरल वाली खास आम की कैरी, नोट करें रेसिपी

मैंगो करी रेसिपी: गर्मी का मौसम आता ही है रसोई में, आम की सुगंध महकने लगती है। लेकिन क्या आपने कभी आम को एक चटपटी और क्रीमी कैरी के रूप में चखा है? अगर नहीं, तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं दक्षिण भारत, खासकर केरल का एक मशहूर व्यंजन। आइए जानते हैं कि इसे किस तरह का सामान बनाना चाहिए और इसे किस तरह बनाना चाहिए? मैंगो कैरी बनाने की सामग्री बदले हुए छोटे आमताजा दहीहल्दी पाउडरलाल मिर्च पाउडरनमकगुड़मसाला पेस्ट के लिएताजा कद्दूकस किया हुआ नारियलजीराहरी मिर्चनारियल का तेलरायमेथी दानालाल मिर्चकैरी पत्ता सबसे पहले आम को धोकर छीन लें। एक पोटैशियम में आम, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, नमक और आधा कप पानी के टुकड़े मध्यम मिश्रण पर बर्तन। धीरे-धीरे हमने बताया कि आम का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए ये 5-7 मिनट में ही नर्म हो जाएंगे।जब तक हम पक रहे हैं, तब तक प्लास्टर में नारियल, जीरा और हरी मिर्च को थोड़ा सा पानी, साधारण इलेक्ट्रोनिक पीस लें।जैसे ही मैं पाक गया, आँच को धीमा कर लिया और उसमें नारियल का पेस्ट डाल दिया। इसे 2-3 मिनट तक मिट्टी के बर्तनों पर प्लास्टर के टुकड़ों का कच्चापन निकल जाए। अब इसमें गुड़ डाला और अच्छी तरह मिला लें।अब गैस का प्रदर्शन बिल्कुल असामान्य कर दे या बंद कर दे। इसमें फेंटा हुआ दही और लगातार मसाले बने रहे। ध्यान रहे, दही बाबा के बाद करी को लेबलना नहीं है, बस प्रभाव सा गर्म करना है।एक छोटा सा पैन में नारियल का तेल गर्म करें। इसमें राई, मेथी दाना, सूखी लाल मिर्च और करी पत्ता डाला जाता है। जब राय चटकने लगे, तो इस दामाद को तुरंत तैयार करी के ऊपर डाल दें और एटीएम बंद कर दें। कढ़ी का असली स्वाद उनके प्यारे में होता है। सरसों के तेल या घी में मेथी दाना और कैरी पत्ते जरूर डालें। मेथी की विचित्र गुड़ियाहट, आम की मिठास के साथ एक बेहतरीन ‘बैलेंस’ संरचना है। (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल स्टाइल मैंगो करी रेसिपी(टी)केरल मैंगो करी(टी)दक्षिण भारतीय करी(टी)आम नारियल करी(टी)कच्चा आम रेसिपी(टी)केरल व्यंजन(टी)भारतीय ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)नारियल दही करी

भूत बंगला प्रमोट करने में हुई अक्षय कुमार की किरकिरी:नागिन 7 में की शूटिंग में टेली प्रॉम्पटर से डायलॉग पढ़ते दिखे, वीडियो वायरल; जमकर हुए ट्रोल

भूत बंगला प्रमोट करने में हुई अक्षय कुमार की किरकिरी:नागिन 7 में की शूटिंग में टेली प्रॉम्पटर से डायलॉग पढ़ते दिखे, वीडियो वायरल; जमकर हुए ट्रोल

बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार इन दिनों अपकमिंग फिल्म भूत बंगला के प्रमोशन में व्यस्त चल रहे हैं। एक्टर फिल्म प्रमोट करने के लिए एकता कपूर के सुपरनैचुरल टीवी शो नागिन 7 में कैमियो करते दिखे। हालांकि अब शो से एक क्लिप वायरल हो रहा है, जिसमें अक्षय कुमार टेली प्रॉम्पटर की मदद से डायलॉग पढ़ते नजर आ रहे हैं। नागिन 7 के वीकेंड में टेलीकास्ट किए गए एपिसोड में अक्षय कुमार ने नाग गुरू के रूम में कैमियो किया। एपिसोड में वो नागिन बनीं एक्ट्रेस प्रियंका चहर को ड्रैगन यमन से लड़ने का सुझाव दे रहे हैं। अब एपिसोड का एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर एक्टर को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। क्लिप में साफ देखा जा रहा है कि अक्षय कुमार अपने डायलॉग्स याद किए बिना ही टेली प्रॉम्पटर से पढ़ रहे हैं। उनकी आंखें प्रॉम्पटर के शब्दों को फॉलो करती हुई साफ दिखाई दीं। वीडियो सामने आने के बाद अक्षय को ट्रोल किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, 30 साल के करियर के बाद भी अगर 60 साल का एक्टर डायलॉग याद न रखे, तो कुछ लोगों को यह अजीब या शर्मनाक लग सकता है। हालांकि, कई कलाकार काम की स्पीड और प्रैक्टिकल कारणों की वजह से टेलीप्रॉम्प्टर का इस्तेमाल करते हैं। वहीं एक यूजर ने लिखा है, इस तरह आप एक साल में 4 फिल्में करते हैं।

इंग्लिश प्रीमियर लीग में सट्टेबाजी के विज्ञापनों पर रोक:रिसर्च – जीतने के बाद भी फैंस खुश होने की बजाय निराश कि पूरी रकम क्यों नहीं लगाई

इंग्लिश प्रीमियर लीग में सट्टेबाजी के विज्ञापनों पर रोक:रिसर्च - जीतने के बाद भी फैंस खुश होने की बजाय निराश कि पूरी रकम क्यों नहीं लगाई

खेलों में सट्टेबाजी (स्पोर्ट्स बेटिंग) के बढ़ते चलन और इसके लुभावने विज्ञापनों के बीच, एक ताजा रिपोर्ट ने इसके मनोवैज्ञानिक और आर्थिक खतरों को उजागर किया है। इंग्लिश प्रीमियर लीग के क्लबों द्वारा सट्टेबाजी स्पॉन्सरशिप पर रोक के बाद हो रहे वित्तीय नुकसान की शिकायतों के बीच, ब्रिटेन के एक वरिष्ठ खेल पत्रकार ने बेटिंग की वास्तविकता परखने के लिए एक प्रयोग किया, जिसके नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं। प्रीमियर लीग में अगले सीजन से खिलाड़ियों की जर्सी के फ्रंट पर सट्टेबाजी कंपनियों के विज्ञापन देने पर स्वैच्छिक रोक लगाई जा रही है। इस फैसले के बाद नौ से ज्यादा क्लबों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें सट्टेबाजी कंपनियों के बराबर पैसे देने वाले अन्य स्पॉन्सर नहीं मिल रहे हैं, जिससे उन्हें करोड़ों का नुकसान हो रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि सट्टेबाजी उद्योग का यह भारी-भरकम मुनाफा सीधे तौर पर आम फैंस की जेब से आता है, जो दांव लगाने की लत का शिकार हो रहे हैं। क्या खेलों की अच्छी समझ होने पर सट्टेबाजी से सुरक्षित तरीके से पैसा कमाया जा सकता है? यह जांचने के लिए ब्रिटिश खेल पत्रकार ने एक सोशल एक्सपेरिमेंट किया। उनका लक्ष्य 10 पाउंड (करीब 1000 रुपए) को सुरक्षित दांव लगाकर 1000 पाउंड (करीब 1 लाख रुपए) में बदलना था। शुरुआती दांव जीतने के बाद, उनकी 10 पाउंड की रकम 120 पाउंड तक पहुंच गई, जिससे यह भ्रम पैदा हुआ कि सिस्टम काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, दांव जीतने के बावजूद पत्रकार को खुशी के बजाय निराशा हुई कि उन्होंने पूरी रकम दांव पर क्यों नहीं लगाई। विशेषज्ञों के अनुसार, यही सट्टेबाजी का सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक जाल है। प्रयोग ने साबित किया कि खेलों की अनिश्चितता के कारण सट्टेबाजी में कोई ‘पक्का फॉर्मूला’ काम नहीं आता। ब्रिटेन के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 14 लाख वयस्क सट्टेबाजी की लत के शिकार हैं। स्मार्टफोन और विज्ञापनों में मशहूर हस्तियों (जैसे पूर्व फुटबॉलर पीटर क्राउच) की मौजूदगी ने इसे एक ग्लैमरस लाइफस्टाइल के रूप में पेश किया है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बेटिंग ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे इंसान के दिमाग को लगातार दांव लगाने के लिए प्रेरित करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति को मैच का रोमांच महसूस करने के लिए उस पर दांव लगाने की जरूरत पड़ती है, तो वास्तव में वह उस खेल का सच्चा प्रशंसक नहीं है। 20 में से 11 क्लबों की जर्सी पर सट्टेबाजी का विज्ञापन सीजन 2025-26 में इंग्लिश प्रीमियर लीग में उतरीं 20 टीमों में से 11 की जर्सी के सामने सट्टेबाजी का विज्ञापन था। यानी आधे से भी ज्यादा। इनमें से अधिकतर क्लब वे थे जो लीग की टॉप-6 टीमों में शामिल नहीं हैं, जैसे एस्टन विला, एवर्टन, वेस्ट हैम, क्रिस्टल पैलेस आदि। अब से सभी टीमें सिर्फ बाजू पर सट्टेबाजी का विज्ञापन लगा सकेंगी, जर्सी के फ्रंट पर नहीं।

शिवपुरी के खेल मैदान में मूर्ति रखने पर विवाद:बिना अनुमति रखी प्रतिमा; हटाने की अपील पर धरने पर बैठे ग्रामीण

शिवपुरी के खेल मैदान में मूर्ति रखने पर विवाद:बिना अनुमति रखी प्रतिमा; हटाने की अपील पर धरने पर बैठे ग्रामीण

शिवपुरी जिले के दिनारा थाना क्षेत्र स्थित छितीपुर गांव में खेल मैदान के बीच बिना अनुमति मूर्ति स्थापित करने पर विवाद हो गया है। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों से मूर्ति हटाने की अपील की। इसके विरोध में ग्रामीण मूर्ति के चारों ओर बैठकर धरने पर बैठ गए हैं। वर्तमान में थाना प्रभारी ने मामले की सूचना अनुविभागीय अधिकारी को दे दी है और उनके निर्देशानुसार आगे की जांच व कार्रवाई की जाएगी। खेल मैदान के बीच अज्ञात लोगों ने रखी मूर्ति, ग्रामीण हुए जमा यह घटना छितीपुर गांव के शासकीय खेल मैदान की है। इस मैदान का उपयोग गांव के युवा क्रिकेट और अन्य खेलों के लिए करते हैं। यहां अज्ञात लोगों द्वारा मैदान के बीच में एक मूर्ति स्थापित कर दी गई। जैसे ही मूर्ति रखे जाने की खबर गांव में फैली, बहुजन समाज की महिलाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। पुलिस की समझाइश बेअसर, मूर्ति के पास बैठकर किया प्रदर्शन दिनारा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया कि किसी भी सार्वजनिक या शासकीय भूमि पर मूर्ति स्थापित करने के लिए प्रशासनिक अनुमति आवश्यक होती है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि खेल मैदान के बीच मूर्ति होने से खिलाड़ियों को खेल गतिविधियों में बाधा आएगी। हालांकि, पुलिस की इस समझाइश के बावजूद ग्रामीण अपनी बात पर अड़े रहे और मूर्ति के पास बैठकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इस स्थिति के कारण मौके पर तनाव का माहौल बन गया। थाना प्रभारी बोले- अधिकारी के निर्देशानुसार होगी आगे की कार्रवाई दिनारा थाना प्रभारी रविन्द्र सिंह ने बताया कि, “शासकीय भूमि पर अज्ञात लोगों द्वारा मूर्ति रखी गई है, जो गांव के युवाओं के खेल के लिए इस्तेमाल होती है। मामले की सूचना अनुविभागीय अधिकारी को दे दी गई है, और उनके निर्देशानुसार आगे की जांच और कार्रवाई की जाएगी।”

पार्किंसंस डिजीज से महिलाओं की जिंदगी हो जाती है ज्यादा मुश्किल, नई स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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Last Updated:April 15, 2026, 12:02 IST Parkinson’s Disease and Women: पार्किंसन एक न्यूरोलॉजिकल डिजीज है, जो बुजुर्गों को बुरी तरह प्रभावित करती है. एक रिसर्च में पता चला है कि पार्किंसंस डिजीज से महिलाओं की जिंदगी पुरुषों की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो जाती है. इस बीमारी के कारण महिलाओं को रोज के कामकाज, रिश्तों और आत्मनिर्भरता में ज्यादा परेशानियां महसूस होती हैं. पार्किंसंस डिजीज के कारण लोगों की जिंदगी बहुत मुश्किल हो जाती है. Parkinson’s Impact on Women: पार्किंसंस डिजीज धीरे-धीरे बढ़ने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो मुख्य रूप से शरीर की गति, संतुलन और मांसपेशियों के कंट्रोल को प्रभावित करती है. आमतौर पर 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है. इस बीमारी की वजह से लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होती है और वे अपने रोज के कामकाज भी नहीं कर पाते हैं. यह एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ बिगड़ती जाती है. इस बीमारी का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि मरीज के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक जीवन पर भी गहरा असर होता है. पुरुषों को पार्किंसंस डिजीज का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन महिलाएं भी इसका शिकार होती हैं. अब एक रिसर्च में इसे लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज की एक स्टडी में पाया गया कि महिलाओं पर पार्किंसंस डिजीज का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बोझ पुरुषों की तुलना में अधिक होता है. इस स्टडी में बताया गया कि पार्किंसंस के इलाज को केवल शारीरिक लक्षणों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है. इस अध्ययन में 484 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें 330 पुरुष और 154 महिलाएं थीं. सभी प्रतिभागियों का मूल्यांकन SCOPA-PS स्केल के माध्यम से किया गया, जो रोजमर्रा की गतिविधियों, रिश्तों, भावनात्मक स्थिति और आत्मनिर्भरता जैसे पहलुओं को मापता है. इस स्टडी के रिजल्ट से पता चला कि समान उम्र और सेम बीमारी के बावजूद महिलाओं को दैनिक जीवन में ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. महिलाएं घरेलू काम, शौक, मनोरंजन और सामाजिक संबंधों को निभाने में अधिक परेशानी महसूस करती हैं. वे खुद को अधिक निर्भर मानती हैं और अकेलेपन की भावना भी उनमें ज्यादा पाई गई. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण केवल बीमारी की गंभीरता नहीं, बल्कि सामाजिक भूमिकाएं और पारिवारिक अपेक्षाएं भी हैं, जो महिलाओं पर अधिक जिम्मेदारी डालती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कुछ मानसिक और भावनात्मक चुनौतियां महिला और पुरुष दोनों में समान रूप से पाई गईं. भविष्य को लेकर चिंता, बातचीत में कठिनाई और शर्म की भावना दोनों में एक जैसी होती है. यह दर्शाता है कि पार्किंसंस केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करती है. शोधकर्ताओं से सुझाव दिया है कि पार्किंसंस के इलाज में जेंडर-सेंसिटिव दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. मरीजों को दवाओं के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता, काउंसलिंग और सामाजिक समर्थन की भी आवश्यकता होती है. इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है और वे बीमारी के साथ बेहतर तरीके से जीवन जी सकते हैं. इस बीच एक केस स्टडी में यह भी सामने आया कि एक महिला मरीज AI चैटबॉट पर अत्यधिक निर्भर हो गई थी, जिसे बाद में मानसिक स्थिति और दवाओं के प्रभाव से जोड़ा गया. इलाज और दवा में बदलाव के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ. यह घटना यह भी दर्शाती है कि तकनीक का उपयोग सावधानी और सीमाओं के साथ करना जरूरी है. यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि पार्किंसंस रोग का प्रभाव सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक भी होता है और महिलाओं पर इसका असर अधिक गहरा देखा गया है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 15, 2026, 12:02 IST

खजुराहो में युवक के जिंदा जलने का VIDEO:हेरिटेज रिसोर्ट से बंदर भगा रहा था, हाईटेंशन लाइन से टकराया पाइप

खजुराहो में युवक के जिंदा जलने का VIDEO:हेरिटेज रिसोर्ट से बंदर भगा रहा था, हाईटेंशन लाइन से टकराया पाइप

खजुराहो के रेलवे स्टेशन के पास स्थित ‘दि खजुराहो हेरिटेज रिसोर्ट’ में एक कर्मचारी की करंट लगने से मौत हो गई। यह घटना मंगलवार शाम 6 बजे रिसोर्ट की छत से बंदर भगाते समय हुई। पूरी घटना का वीडियो बुधवार सुबह सामने आया है। मृतक की पहचान खजुराहो निवासी रिंकू रैकवार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उसने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए महज पांच दिन पहले ही इस होटल में काम शुरू किया था। क्या है पूरे वीडियो में वी़डियो में नजर आ रहा है कि होटल कर्मचारी रिंकू रैकवार रिसोर्ट से निकल आस-पास देखता है। उसे छत पर बंदर नजर आते हैं। वो दीवार के पास रखा करीब 15 फीट ऊंचा लौहे का पाइप उठाता है। दो बार पाइप को जमीन पर पटकता है। इसके बाद वो पाइप को सीधा खड़ा करके खड़ा हो जाता है। कुछ दूर खड़ा रहने के बाद वो पीछे की ओर चलने लगता है। इसी दौरान पाइप हाईटेंशन से टकरा जाता है। तेज धमाके के साथ रिंकू आग की लपटों में घिर जमीन पर गिर जाता है। धमाके की आवाज सुन एक महिला कर्मचारी बाहर आती है और चीखती हुई अंदर चली जाती है। वीडियो में नजर आ रहा है कि जिस जगह यानी पेट पर पाइप टिका हुआ था, वहां से छाती तक का हिस्सा पूरी तरह से जला हुआ है। छाती से लेकर पेट तक बड़ा सा छेद नजर आ रहा है। तस्वीरें देखिए… लापरवाही की होगी जांच हादसे की सूचना मिलते ही बमीठा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बुधवार सुबह पीएम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या होटल की छत के इतने करीब से हाईटेंशन लाइन का गुजरना नियमों के खिलाफ था या इसमें होटल प्रबंधन की ओर से कोई लापरवाही हुई है।

‘परिवर्तन नहीं, केवल प्रत्यावर्तन’: महुआ मोइत्रा का कहना है कि बीजेपी को बंगाल में ‘करारा झटका मिलेगा’ | चुनाव समाचार

The MP Board 10th and 12th results declared at mpbse.nic.in.

आखरी अपडेट:15 अप्रैल, 2026, 11:18 IST News18 के साथ एक साक्षात्कार में, महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में चुनावी मूड, मतदाता सूची संबंधी चिंताओं, कल्याणकारी राजनीति और व्यापक मुकाबले के बारे में बात की। कृष्णानगर में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा। (छवि: पीटीआई) पश्चिम बंगाल में एक उच्च-स्तरीय चुनावी लड़ाई के बीच, तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा जुझारू और निर्भीक बनी हुई हैं। अपने “विवादास्पद और उग्र भाषणों” की आलोचना को खारिज करते हुए, उन्होंने इसे प्रासंगिकता का सूचक बताकर टाल दिया, “अगर मेरा वर्णन इस तरह किया जाता है, तो इसका मतलब है कि मैं कुछ महत्वपूर्ण कर रही हूं।” कृष्णानगर में प्रचार अभियान के दौरान, वह राजनीतिक माहौल के बारे में समान रूप से स्पष्ट हैं, उन्होंने भाजपा पर संस्थानों को हथियार बनाने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि कथित तौर पर बड़े पैमाने पर मतदाता विलोपन का “परमाणु हथियार की तरह उलटा असर हो सकता है, जिसका बटन उन्होंने एक बंदर को दे दिया है।” महुआ मोइत्रा ने News18 से पश्चिम बंगाल में चुनावी मूड, मतदाता सूची संबंधी चिंताओं, कल्याणकारी राजनीति और व्यापक मुकाबले के बारे में बात की. उन्होंने कृषि अर्थव्यवस्था में आवश्यक समर्थन के रूप में अक्सर “मुफ्त” के रूप में लेबल की जाने वाली योजनाओं का बचाव किया, जबकि भाजपा पर बंगाल के सामाजिक ताने-बाने में “तेजाब डालने” का आरोप लगाया। यहां तक ​​कि जब वह केंद्रीय एजेंसी की जांच का सामना कर रही थी, तब भी वह अवज्ञाकारी बनी रही, उसने प्रवर्तन निदेशालय को “जबरन वसूली निदेशालय” कहा और जोर देकर कहा, “पिक्चर अभी बाकी है. ” एक ” के प्रति आश्वस्तप्रत्यवर्तन” इसके बजाय “परिवर्तन“मोइत्रा ने कहा कि उनकी पार्टी मजबूत जनादेश की ओर बढ़ रही है। यहां मोइत्रा के साथ साक्षात्कार के संपादित अंश दिए गए हैं: प्रश्न: विकिपीडिया आपको “विवादास्पद और उग्र भाषणों” के लिए जाना जाता है। ऐसा क्यों? महुआ मोइत्रा: मेरे कॉलेज में एक कहावत थी – जिन महिलाओं के बारे में बात की जाती है वे कुछ करने वाली महिलाएं होती हैं। मैं इसे एक तारीफ के तौर पर लेता हूं. अगर मेरा वर्णन इस तरह किया जाता है, तो इसका मतलब है कि मैं कुछ महत्वपूर्ण काम कर रहा हूं। यदि विवाद मेरा पीछा करता है, तो मैं उसमें कुछ नहीं कर सकता। प्रश्न: कृष्णानगर में जमीनी स्तर पर मूड क्या है? महुआ मोइत्रा: मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के बारे में बोल सकता हूं। कृष्णानगर में एक नगर पालिका है; शेष मुख्यतः ग्रामीण है। शहरी विमर्श पर हावी होने वाले मुद्दे यहां हमेशा प्रासंगिक नहीं होते हैं। तथाकथित “बौद्धिक शहरी बंगाली” आलोचना कर सकते हैं, लेकिन हमने सरकारी सेवाओं को अंतिम मील तक पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया है। हमारी पार्टी ने ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लगातार काम किया है। प्रश्न: SIR का क्या प्रभाव पड़ेगा? क्या यह भाजपा के लिए एक राजनीतिक उपकरण है? महुआ मोइत्रा: यह भाजपा पर उल्टा पड़ेगा। मतदाताओं के नाम हटाए जाने का पैमाना बेहद चिंताजनक है। कथित तौर पर लगभग 27 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जिससे चुनाव पर असर पड़ा है। जो लोग सोचते हैं कि यह एक राजनीतिक हथियार है, उन्हें इसके बदले नुकसान हो सकता है। यह उनके लिए करारा झटका होने वाला है – उन्हें यह विचार किसने दिया, यह तो वे ही जानते हैं क्योंकि यह एक परमाणु हथियार की तरह है जिसका बटन उन्होंने एक बंदर को दे दिया है। चिंता की बात यह है कि इस बार चुनाव आयोग भाजपा की शाखा के रूप में काम कर रहा है और उन्होंने कई को हटा दिया है। प्रश्न: विपक्ष का दावा है कि आपका वोट आधार प्रभावित हुआ है। आपका जवाब? महुआ मोइत्रा: मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में वर्षों से रहने वाले लोगों को चिह्नित किया जा रहा है. ये क्षणिक आबादी नहीं हैं. हम वोट-बैंक की राजनीति में शामिल नहीं हैं। वर्षों से दूसरी ओर से हिंदू शरणार्थी बनकर आते रहे हैं। प्रश्न: ऐसी धारणा है कि आपकी सरकार चुनाव जीतने के लिए “मुफ़्त” पर निर्भर है। महुआ मोइत्रा: मैं “मुफ़्त उपहार” शब्द से असहमत हूँ। कृषि प्रधान समाज में ऐसा समर्थन आवश्यक है। लक्ष्मीर भंडार जैसी योजनाएं महिलाओं को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती हैं। जब तक रोजगार स्थिर नहीं हो जाता, युवाओं को भी सहारे की जरूरत है. यह समानता के निर्माण के बारे में है, न कि हैंडआउट बांटने के बारे में। प्रश्न: विपक्ष का कहना है कि बंगाल में उद्योग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव है। आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं? महुआ मोइत्रा: विकास को केवल बड़ी विनिर्माण इकाइयों से नहीं मापा जा सकता। कई यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएँ भारी उद्योग के बिना काम करती हैं। बंगाल का एमएसएमई सेक्टर मजबूत है. हमने सालाना 1.3 से 1.5 मिलियन नौकरियां पैदा की हैं। प्रश्न: क्या आप मानते हैं कि बंगाल ध्रुवीकृत है? महुआ मोइत्रा: भाजपा द्वारा ध्रुवीकरण लाया गया है। इसका असर सामाजिक ताने-बाने पर पड़ा है. उन्होंने हमारी संस्कृति में तेजाब डाला है. हम उस राजनीति में शामिल नहीं हुए हैं. मैं एक ब्राह्मण हूं जो महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी वाले निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है – यह स्वयं हमारे दृष्टिकोण को दर्शाता है। प्रश्न: मदरसों के लिए अधिक आवंटन सहित अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोप हैं। महुआ मोइत्रा: यही उनका आख्यान है. मैं इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दूँगा. पहचान विभाजन पर आधारित अभियान अत्यधिक समस्याग्रस्त हैं। देखिए हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में अपना अभियान कैसे चलाया – यह मिया मुस्लिम अभियान क्या था? वे लोगों को धर्म के आधार पर बांटते हैं. यहां तक ​​कि लोग दिल्ली में मछली भी नहीं बेच सकते – वे तय करेंगे कि हम क्या खाएंगे और क्या पहनेंगे? प्रश्न: मालदा की स्थिति पर आपका क्या विचार है? महुआ मोइत्रा: जिन लोगों के नाम हटा दिए गए, उनमें से कई लोगों के पास सीमित साधन हैं। कुछ को सुनवाइयों में मंजूरी दे दी गई लेकिन फिर भी उन्हें बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। आम ग्रामीणों के लिए उच्च न्यायालयों का दरवाजा खटखटाना संभव नहीं है। इससे जमीन पर संकट पैदा हो गया है. न्यायिक अधिकारी आए और प्रत्येक मामले पर दो मिनट में फैसला कर दिया – आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

टाटा मोटर्स की 10लाखवीं गाड़ी को सीएम ने दिखाई झंडी:उसी ई-बस में बैठे, लखनऊ में 5 साल में 20 लाख गाड़ियां बनेंगी

टाटा मोटर्स की 10लाखवीं गाड़ी को सीएम ने दिखाई झंडी:उसी ई-बस में बैठे, लखनऊ में 5 साल में 20 लाख गाड़ियां बनेंगी

लखनऊ के चिनहट स्थित देवा रोड पर टाटा मोटर्स प्लांट में 10 लाखवीं गाड़ी (ई-बस) का बुधवार को फ्लैग ऑफ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाई। उसे सवार होकर उसकी खासियत जानी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी के साथ प्लांट का विजिट किया। टाटा मोटर्स के CEO और MD गिरीश वाघ ने कहा- आज हम सब यहां पर 10 लाखवें वाहन के विटनेस बने हैं। यहां पर कॉमर्शियल व्हीकल का उत्पादन करते हैं। सप्लायर, पार्टनर और कम्युनिटी का इको सिस्टम है। हम अगले 5 साल में 20 लाख व्हीकल बनाएंगे। समारोह में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन भी मौजूद हैं। 10 लाखवीं गाड़ी एक जीरो-एमिशन इलेक्ट्रिक बस है, जो राज्य और कंपनी की ग्रीन मोबिलिटी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश की नेट-जीरो 2070 की परिकल्पना और कंपनी के 2045 के लक्ष्य के अनुरूप है। यह प्रदेश की स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का है, जिसमें औद्योगिक निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में यह उपलब्धि प्रदेश के औद्योगिक आत्मविश्वास को और मजबूत करेगी। निवेशकों के लिए सकारात्मक संदेश देगी। करीब तीन दशकों से अधिक समय से संचालित यह प्लांट प्रदेश में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और कौशल विकास का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। 1992 में स्थापित लखनऊ प्लांट आज प्रदेश में 8 हजार से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। कौशल विकास के लिए ‘कौशल्या’, ‘लक्ष्य’ और ‘सक्षम’ जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित करता है। साथ ही, यह 100% नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित और जल-सकारात्मक सुविधा के रूप में पर्यावरण संरक्षण का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है। देखिए 5तस्वीरें… पल-पल के अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…