तमिलनाडु चुनाव 2026: विजय आज तमिलनाडु के तिरुपुर में होगा प्रचार, कड़ी सुरक्षा के बीच रोड शो

तमिलनाडु चुनाव 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर अभिनेता से नेता बने विजय मंगलवार को तिरुप्पुर में अपने चुनावी प्रचार को तेज करने जा रहे हैं। वे अपनी पार्टी टीवीके के उग्रवादियों के समर्थन में आठ अहम विधानसभा सीटों पर राच्यसभा में शामिल हुए। कहां-कहां प्रचार करेंगे विजय पार्टी स्क्वाड्रन के अनुसार, विजय तिरुप्पुर नॉर्थ, तिरुप्पुर साउथ, जन्हानी, पल्लदम, कांगयम, धारापुरम, उडुमलपेट और मदाथुकुलम प्रचार करेंगे। यह हाई-एनर्जी स्टार्टअप प्रोग्राम चुनाव से पहले समर्थन मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। विजय मंगलवार सुबह चेन्नई से कोयम्बटूर मेकअप के माध्यम से उड़ान। वहाँ से वे सड़क मार्ग से अज्ञानी जायेंगे, जहाँ से उनके प्रचार अभियान की मुख्य शुरुआत होगी। दोपहर 3 बजे वे अट्टायमपालयम डिवीजन से एक विशेष रूप से तैयार किए गए इंजन वाहन पर सवार रोड शो की शुरुआत करेंगे। यह रोड शो मासूमी के पुराने और नए बस स्टैंड जैसे प्रमुख क्षेत्र गुजरात से है। इस दौरान जनता को संबोधित करेंगे और टीवी के लिए वोट की अपील करेंगे। इसके बाद उनका काफिला राष्ट्रीय राजमार्ग पेरूमनलालुर अमेरिकागा में चला गया, जहां उन्होंने अपने प्रचार को आगे बढ़ाया। रोडशो के दौरान सख्त दिशा-निर्देश के साथ भारी पुलिस बल स्थापित करना रोड शो का अंतिम चरण पुलुवापट्टी तक जाएगा, जिसमें घुटनों की आबादी वाले और व्यावसायिक क्षेत्र को शामिल किया जाएगा। पूरे रास्ते विजय दीक्षा, पार्टी विचारधारा और आम जनता से संवाद करेंगे। प्रशासन ने इस कार्यक्रम को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक की अनुमति दी है और सुरक्षा के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बड़ी भीड़ की संभावना को देखते हुए अज्ञानी, पेरुमनल्लूर, पुलुवापट्टी और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल की स्थापना की गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए रखे हुए हैं.. इस बीच, एक फैसले में टीवीके ने विजय का धर्मपुरी में होने वाला प्रचार कार्यक्रम रद्द कर दिया, जबकि इसके लिए चुनाव आयोग से पहले ही मिलल था। इस जज से पार्टी कार्यकर्ता हैरान हैं और अभी तक इसका कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है. यह भी पढ़ें- आईपीएल 2026 एसआरएच बनाम आरआर: ‘नए खिलाड़ियों को मौका देना…’, जीत के बाद ये क्या बोले ईशान किशन
ग्वालियर में हिट एंड रन, CCTV फुटेज आया सामने:सड़क क्रॉस कर रहे वृद्ध को रौंदकर घसीटता ले गया, अस्पताल में मौत

ग्वालियर के कोतवाली क्षेत्र में गुब्बारा फाटक के पास सोमवार रात एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने एक वृद्ध को कुचल दिया और घसीटते हुए ले गया। वृद्ध गार्ड की नौकरी करता था। उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने देर रात मृत घोषित कर दिया। बताया गया है कि वृद्ध अपने घर के पास गुब्बारा फाटक से जिंसी नाला की सड़क क्रॉस कर रहा था, तभी अज्ञात वाहन ने उसे तेज टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। मृतक के भतीजे विक्रांत ने बताया कि टक्कर एक ऑटो ने मारी थी। ऑटो की रफ्तार काफी तेज थी और टक्कर मारने के बाद सुरेंद्र सिंह ऑटो के बंपर में फंस गए, लेकिन चालक ने गाड़ी नहीं रोकी। वृद्ध कुछ दूर तक ऑटो में फंसकर घिसटते रहे। हादसे के बाद चालक अपना ऑटो लेकर फरार हो गया। थाना प्रभारी मोहिनी वर्मा ने बताया कि रात करीब 11 बजे कोतवाली क्षेत्र में गुब्बारा फाटक रोड पर माधव प्लाजा के पास एक अनियंत्रित वाहन ने वृद्ध सुरेंद्र सिंह राठौर (62) को तेज टक्कर मार दी। सुरेंद्र के सिर में गंभीर चोट लगी थी। उन्हें उनके परिजन तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई घटना घटनास्थल के सामने शराब की दुकान है। इसी दुकान के सीसीटीवी कैमरे में हादसे के फुटेज कैद हुए हैं, जिसमें ऑटो टक्कर मारने के बाद वृद्ध को घसीटता हुआ दिखाई दे रहा है। आसपास की अन्य दुकानें बंद थीं। थाना प्रभारी मोहिनी ने बताया कि कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, लेकिन वे काफी दूर के हैं। घटना स्थल के आसपास के अन्य कैमरों को भी खंगाला जा रहा है।
पेड़ पर उगने वाली जलेबी! बाजार में सिर्फ 2 महीने आती है नजर, शरीर के लिए संजीवनी

Last Updated:April 14, 2026, 11:55 IST Sidhi News: बाजार में जंगल जलेबी की कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो है. इससे उन्हें रोजाना 400 से 500 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जिससे परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई में अच्छी मदद हो जाती है. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के जंगलों में पाया जाने वाला कीकर, जिसे स्थानीय भाषा में जंगल जलेबी के नाम से जाना जाता है, इन दिनों शहरों के बाजारों में खासा लोकप्रिय हो रहा है. खट्टी-मीठी स्वाद वाला यह जंगली फल न केवल लोगों की जुबान पर चढ़ रहा है बल्कि आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं के लिए आय का साधन भी बनते जा रहा है. सीधी जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में इसकी भरपूर पैदावार होती है. यह केवल दो महीने ही मिलती है. पुराने बस स्टैंड के पास जंगल जलेबी बेचने वाली फूलमती गोंड लोकल 18 को बताती हैं कि पहले वह जंगल से लकड़ियां इकट्ठा कर बेचती थीं, जिससे कम आमदनी होती थी और मेहनत भी ज्यादा लगती थी लेकिन अब जंगल जलेबी के कारण उन्हें बेहतर और सुरक्षित आय का विकल्प मिल गया है. उनका कहना है कि इस काम में जोखिम कम है और कम समय में ज्यादा कमाई हो जाती है. फूलमती ने बताया कि वह रोज सुबह तड़के जंगलों में जाकर जंगल जलेबी तोड़ती हैं और दोपहर तक शहर के मुख्य बाजार में बेचने पहुंच जाती हैं. बाजार में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो है. इससे उन्हें प्रतिदिन 400 से 500 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जिससे परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई में अच्छी मदद मिल रही है. सेहत के लिए फायदेमंद जंगल जलेबीआयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ आरपी परौहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गर्मी के मौसम में मिलने वाली जंगल जलेबी का सेवन शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है. इसके नियमित सेवन से इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है, त्वचा रोगों में राहत मिलती है, आंखों की रोशनी बेहतर होती है और शुगर नियंत्रण में मदद मिलती है. साथ ही यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी सहायक है. उन्होंने बताया कि यह फल शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. औषधीय गुणों को लेकर जागरूक हैं शहरी लोगवहीं ग्रामीण इलाकों में अभी भी इस फल को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता लेकिन शहरों में इसके स्वाद और औषधीय गुणों को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. इसके चलते जंगल जलेबी अब आदिवासी महिलाओं के लिए आय का बेहतर साधन बनती जा रही है. यह फल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 14, 2026, 11:55 IST
टीकमगढ़ में संत सेन महाराज की 726वीं जयंती:प्रतिमा स्थल पर पूजा, समाज को व्यसन मुक्त रखने पर जोर

टीकमगढ़ में मंगलवार को राष्ट्रीय सर्व सेन समाज संगठन ने संत शिरोमणि श्री सेन महाराज की 726वीं जयंती मनाई। इस अवसर पर सिविल लाइन रोड स्थित सेन महाराज की प्रतिमा स्थल पर पूजा-अर्चना की गई। यह कार्यक्रम संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोरेलाल सेन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। जयंती समारोह में भाजपा जिला अध्यक्ष सरोज राजपूत, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी गिरी और युवा प्रदेश महामंत्री राहुल तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के संरक्षक कन्हैयालाल मुखिया ने की। रमेश कुमार ने सेन महाराज का अभिषेक, पूजा-अर्चना और कन्या पूजन करवाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने संत सेन महाराज के जीवन चरित्र पर अपने विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय अध्यक्ष गोरेलाल सेन ने समाज को एकजुट रहने और बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को व्यसन मुक्त जीवन जीने का संकल्प भी दिलाया। इस अवसर पर देवेंद्र सेन, धनीराम सेन, राहुल बंटी वर्मा, छोटे लाल अंतौरा, रामनारायण सेन, गणेश सेन, मुन्ना लाल सेन, रामरतन सेन, चंद्रभान सेन, सूदन लाल, रामबगस सेन, वीरन मुखिया, कमलेश सेन सहित सेन समाज के कई सदस्य मौजूद रहे।
क्रिकेट नहीं, आर्मी में जाना चाहते थे साकिब:मां ने गहनें गिरवी रखकर दिलाए थे जूते, IPL में डेब्यू मैच में ही लिए 4 विकेट

गोपालगंज के साकिब हुसैन ने IPL के अपने डेब्यू मैच में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने 4 ओवर में 24 रन देते हुए 4 विकेट चटकाए। इसमें यशस्वी जायसवाल, डोनोवन फरेरा, जोफ्रा आर्चर और रवि बिश्नोई का विकेट शामिल है। साकिब को सनराइजर्स हैदराबाद ने 30 लाख रुपए में खरीदा था। मुकाबले के एक दिन पहले मैच खेलने की जानकारी दी गई थी। छोटे से गांव से निकले साकिब आर्मी में जाना चाहते थे। खेलने के लिए उनकी मां ने अपने गहनें गिरवी रखे थे और जूते दिलाए थे। जसप्रीत बुमराह को अपना आइडल मानते हैं साकिब 21 साल के साकिब दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं। वह चेन्नई सुपर किंग में नेट बॉलर के रूप में चयनित हुए थे। 2024-2025 सीजन के लिए हुई नीलामी का भी हिस्सा रह चुके हैं। 2024 में साकिब हुसैन को IPL टीम KKR ने 20 लाख रुपए में खरीदा था। जसप्रीत बुमराह को साकिब अपना आइडल मानते हैं। साकिब को कई बार घर चलाने के लिए टेनिस बॉल से मैच खेलना पड़ता था। टेनिस बॉल के एक मैच के बदले में 500-700 रुपए मिलते थे। गेंदबाजी के लिए अच्छे जूते तक नहीं थे साकिब सदर प्रखंड के दरगाह मोहल्ले में रहते हैं। उनके पिता अली अहमद हुसैन पेशे से मजदूर हैं। साकिब के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनके पास गेंदबाजी करने के लिए खास जूते तक नहीं थे। वह फटे जूतों से मैच खेलते थे। तब खेलने के लिए मां ने अपने गहने गिरवी रखे थे। शुरुआती दिनों में उनका सपना क्रिकेट नहीं, बल्कि आर्मी में जाने का था। शहर के मिंज स्टेडियम में वे दौड़ने जाते थे, जहां खिलाड़ियों को देखकर उनके भी मन में क्रिकेट खेलने की तमन्ना जागी। अंडर-19 में हाईएस्ट विकेट टेकर रहे इंटर तक पढ़ाई करने के बाद साकिब ने क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए। गोपालगंज के मिंज स्टेडियम में देवधारी गिरी टूर्नामेंट में उन्हें खेलने का मौका भी मिला। इसमें उनका बॉलिंग के लिए चयन हुआ। इसके बाद 2021 में पटना में होने वाले बिहार क्रिकेट लीग में शामिल हुए। फिर अंडर-19 खेलने चंडीगढ़ चले गए, जिसमें वह हाईएस्ट विकेट टेकर रहे। उनका मानना है कि चंडीगढ़ से ही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट शुरू हुआ, जिसने उन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी बेंगलुरू तक पहुंचाया। इसके बाद मुस्ताक अली ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। फिर उन्हें नेट बॉलिंग के लिए बुलाया गया था। धोनी ने की थी साकिब की तारीफ साकिब चेन्नई सुपर किंग्स के नेट बॉलर भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्हें महेंद्र सिंह धोनी से मिलने का मौका मिला। साकिब ने अपनी बॉलिंग को लेकर धोनी से राय ली। इस पर धोनी ने कहा, ‘अच्छा हो रहा है, तुम में अच्छा टैलेंट है। तुम ऐसे ही करते रहो। बस मेहनत करते रहो, सिलेक्शन तुम्हारे हाथ में नहीं है।’ साकिब धोनी को अपना आइडल भी मानते हैं। IPL डेब्यू मैच में पहला विकेट यशस्वी जयसवाल का लिया साकिब ने डेब्यू मैच में पहला विकेट यशस्वी जयसवाल का लिया। उन्होंने दूसरे ओवर की चौथी बॉल पर यशस्वी जयसवाल को आउट किया। 15वें ओवर की आखिरी बॉल पर उन्होंने दूसरा विकेट लिया था। साकिब ने डोनोवन फरेरा को क्लीन बोल्ड किया था और जडेजा-फरेरा की शतकीय साझेदारी तोड़ी थी। इसी के साथ उन्होंने 17वें ओवर में बैक टू बैक दो विकेट लिए थे। उन्होंने 8वां विकेट जोफ्रा आर्चर और 9वां विकेट रवि बिश्नोई का लिया था। साकिब ने रिकॉर्ड बुक में दर्ज कराया अपना नाम हुसैन ने अपनी तेज गति के साथ-साथ स्लोवर वन से प्रभावित किया। साकिब अब IPL डेब्यू में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले (संयुक्त रूप से) भारतीय गेंदबाज बने। उन्होंने अश्वनी कुमार के रिकॉर्ड की बराबरी की। MI के अश्विनी ने 2025 में KKR के खिलाफ डेब्यू करते हुए 24 रन देकर 4 विकेट चटकाए थे। साकिब ने मैच में अपनी शानदार गेंदबाजी का श्रेय टीम के गेंदबाजी कोच वरुण एरोन को दिया है। मैंने खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखा पोस्ट मैच प्रजेंटेशन में बात करते हुए साकिब ने कहा, “हर खिलाड़ी उम्मीद करता है कि उसका डेब्यू ऐसा रहे। मुझे सच में बहुत अच्छा लग रहा है। मैं बहुत खुश हूं। हमारे गेंदबाजी कोच ने एक दिन पहले बताया था कि मैं मैच खेल रहा हूं। उसके बाद से मेरा पूरा ध्यान मैच में अच्छा प्रदर्शन करने पर था। मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए मैंने खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखा।”
क्रिकेट नहीं, आर्मी में जाना चाहते थे साकिब:मां ने गहनें गिरवी रखकर दिलाए थे जूते, IPL में डेब्यू मैच में ही लिए 4 विकेट

गोपालगंज के साकिब हुसैन ने IPL के अपने डेब्यू मैच में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने 4 ओवर में 24 रन देते हुए 4 विकेट चटकाए। इसमें यशस्वी जायसवाल, डोनोवन फरेरा, जोफ्रा आर्चर और रवि बिश्नोई का विकेट शामिल है। साकिब को सनराइजर्स हैदराबाद ने 30 लाख रुपए में खरीदा था। मुकाबले के एक दिन पहले मैच खेलने की जानकारी दी गई थी। छोटे से गांव से निकले साकिब आर्मी में जाना चाहते थे। खेलने के लिए उनकी मां ने अपने गहनें गिरवी रखे थे और जूते दिलाए थे। जसप्रीत बुमराह को अपना आइडल मानते हैं साकिब 21 साल के साकिब दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं। वह चेन्नई सुपर किंग में नेट बॉलर के रूप में चयनित हुए थे। 2024-2025 सीजन के लिए हुई नीलामी का भी हिस्सा रह चुके हैं। 2024 में साकिब हुसैन को IPL टीम KKR ने 20 लाख रुपए में खरीदा था। जसप्रीत बुमराह को साकिब अपना आइडल मानते हैं। साकिब को कई बार घर चलाने के लिए टेनिस बॉल से मैच खेलना पड़ता था। टेनिस बॉल के एक मैच के बदले में 500-700 रुपए मिलते थे। गेंदबाजी के लिए अच्छे जूते तक नहीं थे साकिब सदर प्रखंड के दरगाह मोहल्ले में रहते हैं। उनके पिता अली अहमद हुसैन पेशे से मजदूर हैं। साकिब के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनके पास गेंदबाजी करने के लिए खास जूते तक नहीं थे। वह फटे जूतों से मैच खेलते थे। तब खेलने के लिए मां ने अपने गहने गिरवी रखे थे। शुरुआती दिनों में उनका सपना क्रिकेट नहीं, बल्कि आर्मी में जाने का था। शहर के मिंज स्टेडियम में वे दौड़ने जाते थे, जहां खिलाड़ियों को देखकर उनके भी मन में क्रिकेट खेलने की तमन्ना जागी। अंडर-19 में हाईएस्ट विकेट टेकर रहे इंटर तक पढ़ाई करने के बाद साकिब ने क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए। गोपालगंज के मिंज स्टेडियम में देवधारी गिरी टूर्नामेंट में उन्हें खेलने का मौका भी मिला। इसमें उनका बॉलिंग के लिए चयन हुआ। इसके बाद 2021 में पटना में होने वाले बिहार क्रिकेट लीग में शामिल हुए। फिर अंडर-19 खेलने चंडीगढ़ चले गए, जिसमें वह हाईएस्ट विकेट टेकर रहे। उनका मानना है कि चंडीगढ़ से ही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट शुरू हुआ, जिसने उन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी बेंगलुरू तक पहुंचाया। इसके बाद मुस्ताक अली ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। फिर उन्हें नेट बॉलिंग के लिए बुलाया गया था। धोनी ने की थी साकिब की तारीफ साकिब चेन्नई सुपर किंग्स के नेट बॉलर भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्हें महेंद्र सिंह धोनी से मिलने का मौका मिला। साकिब ने अपनी बॉलिंग को लेकर धोनी से राय ली। इस पर धोनी ने कहा, ‘अच्छा हो रहा है, तुम में अच्छा टैलेंट है। तुम ऐसे ही करते रहो। बस मेहनत करते रहो, सिलेक्शन तुम्हारे हाथ में नहीं है।’ साकिब धोनी को अपना आइडल भी मानते हैं। IPL डेब्यू मैच में पहला विकेट यशस्वी जयसवाल का लिया साकिब ने डेब्यू मैच में पहला विकेट यशस्वी जयसवाल का लिया। उन्होंने दूसरे ओवर की चौथी बॉल पर यशस्वी जयसवाल को आउट किया। 15वें ओवर की आखिरी बॉल पर उन्होंने दूसरा विकेट लिया था। साकिब ने डोनोवन फरेरा को क्लीन बोल्ड किया था और जडेजा-फरेरा की शतकीय साझेदारी तोड़ी थी। इसी के साथ उन्होंने 17वें ओवर में बैक टू बैक दो विकेट लिए थे। उन्होंने 8वां विकेट जोफ्रा आर्चर और 9वां विकेट रवि बिश्नोई का लिया था। साकिब ने रिकॉर्ड बुक में दर्ज कराया अपना नाम हुसैन ने अपनी तेज गति के साथ-साथ स्लोवर वन से प्रभावित किया। साकिब अब IPL डेब्यू में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले (संयुक्त रूप से) भारतीय गेंदबाज बने। उन्होंने अश्वनी कुमार के रिकॉर्ड की बराबरी की। MI के अश्विनी ने 2025 में KKR के खिलाफ डेब्यू करते हुए 24 रन देकर 4 विकेट चटकाए थे। साकिब ने मैच में अपनी शानदार गेंदबाजी का श्रेय टीम के गेंदबाजी कोच वरुण एरोन को दिया है। मैंने खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखा पोस्ट मैच प्रजेंटेशन में बात करते हुए साकिब ने कहा, “हर खिलाड़ी उम्मीद करता है कि उसका डेब्यू ऐसा रहे। मुझे सच में बहुत अच्छा लग रहा है। मैं बहुत खुश हूं। हमारे गेंदबाजी कोच ने एक दिन पहले बताया था कि मैं मैच खेल रहा हूं। उसके बाद से मेरा पूरा ध्यान मैच में अच्छा प्रदर्शन करने पर था। मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए मैंने खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखा।”
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में नशेड़ी का तांडव:वार्डों में लोटता रहा युवक, प्रबंधन संभालने में हुआ परेशान

रीवा के संजय गांधी अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया जब एक नशे की हालत में युवक ने अस्पताल परिसर में जमकर उत्पात मचाया। युवक बेसुध हालत में अलग-अलग वार्डों में लोटता रहा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में दहशत का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक लंबे समय तक अस्पताल परिसर में पड़ा रहा, लेकिन सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने देखते रहे। इस दौरान अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए। हालांकि, बाद में अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के मौके पर पहुंचने के बाद युवक को वहां से हटाया गया। घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और जिम्मेदारों की निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद तत्काल स्टाफ को भेजकर युवक को हटाया गया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए गार्डों की जिम्मेदारी तय की जा रही है। साथ ही पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी। मरीजों की सुरक्षा अस्पताल प्रबंधन की प्राथमिकता है।
6 साल अलग-अलग शहरों में बंधक बनाकर दुष्कर्म:दतिया में शादी का झांसा देकर भगा ले गया था; हॉस्टल में भाई बनकर दाखिला दिलाया

दतिया के बस स्टैंड से 3 फरवरी 2020 को 28 वर्षीय युवती का बोलेरो से जबरन अपहरण कर शादी का झांसा देते हुए अलग-अलग शहरों (झांसी, इलाहाबाद, ग्वालियर) में बंधक बनाकर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। 6 साल बाद पीड़िता 11 अप्रैल को अपने घर लौटी और परिजनों को आपबीती बताई। पुलिस ने सोमवार रात पीड़िता की शिकायत पर आरोपी पड़ोसी जितेन्द्र अहिरवार के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म, बंधक बनाकर रखने, मारपीट और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पढ़ाई के लिए बस स्टैंड पहुंची थी, बोलेरो में जबरन बैठाया जानकारी के अनुसार, परासरी गांव निवासी 28 वर्षीय युवती ने बताया कि पड़ोस में रहने वाला युवक जितेन्द्र अहिरवार वर्ष 2017 से उससे बातचीत करता था। 3 फरवरी 2020 को जब वह पढ़ाई के सिलसिले में दतिया बस स्टैंड पहुंची, तभी आरोपी उसे जबरन एक बोलेरो में बैठाकर झांसी ले गया। वहां एक होटल में रखकर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इलाहाबाद और झांसी में कमरे में रखा बंधक पीड़िता ने बताया कि इसके बाद आरोपी उसे इलाहाबाद ले गया, जहां करीब 5 महीने तक एक कमरे में बंधक बनाकर रखा। इस दौरान वह बाहर नहीं जाने देता था और विरोध करने पर मारपीट करता था। बाद में उसने झांसी में भी कई महीनों तक किराए के कमरे में बंधक बनाकर रखा और लगातार दुष्कर्म करता रहा। आरोपी ने उसे मोबाइल भी नहीं दिया और बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी देता था। ग्वालियर के हॉस्टल में भाई बनकर कराया दाखिल कुछ समय बाद आरोपी उसे ग्वालियर के एक हॉस्टल में छोड़ गया, जहां उसने खुद को युवती का भाई बताकर दाखिल कराया। यहां भी वह समय-समय पर आकर धमकाता और दुष्कर्म करता रहा। पीड़िता के मुताबिक, बार-बार कहने के बावजूद आरोपी ने उससे शादी नहीं की। हाल ही में जब युवती को पता चला कि परिवार ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई है, तो वह 11 अप्रैल को घर लौटी और परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिवार के साथ थाने पहुंचकर सोमवार रात को शिकायत दर्ज कराई गई।
TET परीक्षा के लिए नए सिरे से आदेश जारी होंगे:किन शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी यह तय करेगा विभाग; सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका पर भी मंथन

मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर असर डालने वाली TET परीक्षा को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग नया आदेश जारी करेगा। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए आदेश में टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता और छूट की स्थिति स्पष्ट की जाए। आयुक्त ने कहा कि नए आदेश में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य होगी और किन्हें नियमानुसार छूट या सरलीकरण मिलेगा। शासकीय अधिवक्ता से अभिमत की प्रक्रिया जारी विभाग ने बताया कि मामले में शासकीय अधिवक्ता से अभिमत प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। अभिमत मिलने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। सोमवार को लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इसमें कई प्रशासनिक निर्णय लिए गए। वेतनवृद्धि और समयमान के मामलों में शीघ्र आदेश बैठक में तय हुआ कि जिन शिक्षकों को वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान का लाभ मिलना है, उनके प्रकरणों में शीघ्र कार्रवाई कर आदेश जारी किए जाएंगे। यदि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं, तो परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए तहसील और विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण व सिलेबस आधारित मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डीपीआई स्तर पर परामर्श बैठक आयोजित होगी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर परामर्शदात्री बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ, शिक्षक कांग्रेस और राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष और महामंत्री उपस्थित रहे। सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को निर्देश दिया था कि अब टीचिंग सर्विस से जुड़े सभी शिक्षकों को अपनी सर्विस में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी TET पास करना जरूरी होगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा- जिन टीचर्स की नौकरी को 5 साल से ज्यादा बचे हैं, उन्हें टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) क्वालिफाई करना जरूरी होगा। अगर ऐसा नहीं किया तो उन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर कंपल्सरी रिटायरमेंट लेना होगा। क्या है TET एग्जाम टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी TET एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जो यह तय करती है कि कोई अभ्यर्थी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 8 तक) में टीचर बनने के योग्य है या नहीं। यह परीक्षा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा 2010 में अनिवार्य की गई थी। जानिए पूरा मामला RTE एक्ट, 2009 की धारा 23(1) के अनुसार, शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता NCTE द्वारा निर्धारित की जाएगी। NCTE ने 23 अगस्त 2010 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें कक्षा 1 से 8 तक शिक्षक बनने के लिए TET पास करना अनिवार्य किया गया था। NCTE ने शिक्षक पदों पर नियुक्त उम्मीदवारों को TET क्वालिफाई करने के लिए 5 साल का समय दिया, जिसे आगे चलकर 4 साल और बढ़ाया भी गया। NCTE के नोटिस के खिलाफ उम्मीदवारों ने कोर्ट का रुख किया। मद्रास HC बेंच ने जून 2025 में कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति 29 जुलाई 2011 से पहले हुई थी, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए TET पास करने की बाध्यता नहीं है, लेकिन पदोन्नति के लिए TET पास करना अनिवार्य रहेगा। इसी फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सर्विस में बने रहने और प्रमोशन दोनों के लिए TET क्वालिफाई करना अनिवार्य कर दिया है।
रोटी और चावल को पचने में कितना वक्त लगता है? किस चीज को पचाना आसान, डाइटिशियन से जानिए

Last Updated:April 14, 2026, 10:06 IST Roti vs Rice Digestion Time: रोटी और चावल दोनों भारतीय थाली के जरूरी फूड्स हैं. रोटी को थोड़ा भारी खाना माना जाता है, जबकि चावल हल्का फूड माने जाते हैं. डाइटिशियन रंजना सिंह के मुताबिक चावल रोटी की तुलना में जल्दी पच जाते हैं. रोटी में फाइबर ज्यादा होता है, जिसकी वजह से यह धीरे-धीरे पचती है और लंबे समय तक एनर्जी देती है. रोटी को पचने में ज्यादा वक्त लगता है, जबकि चावल जल्दी पच जाते हैं. Roti and Rice Digestion Facts: रोटी और चावल दोनों हमारी डाइट का अहम हिस्सा होते हैं. कई लोग रोटी खाना ज्यादा पसंद करते हैं, जबकि कुछ लोगों को चावल खाना अच्छा लगता है. कुछ लोग रोटी को हेल्दी मानते हैं, तो कुछ चावल को हल्का और जल्दी पचने वाला समझते हैं. अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर इन दोनों में से कौन सा खाना जल्दी पचता है और किसे पचाने में ज्यादा समय लगता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह बात सही है कि चावल को पचने में कम वक्त लगता है, लेकिन रोटी का सेवन करना भी जरूरी होता है. अगर आप दोनों को संतुलित मात्रा में खाएंगे, तो शरीर को ज्यादा फायदा मिलेगा. यूपी के गाजियाबाद स्थित रंजना न्यूट्रीग्लो क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि चावल को पचने में आमतौर पर 1 से 2 घंटे का समय लगता है. खासकर सफेद चावल जल्दी पच जाता है, क्योंकि इसमें फाइबर कम होता है. चावल शरीर में जाकर जल्दी ग्लूकोज में बदल जाता है. यही वजह है कि बीमार या कमजोर लोगों को अक्सर चावल खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह पेट को हल्का रखता है और जल्दी एनर्जी देता है. ब्राउन राइस में सफेद चावल की तुलना में ज्यादा फाइबर होता है और इसे पचने में ज्यादा समय लगता है. फिर भी रोटी के मुकाबले चावल जल्दी पच जाते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन ने बताया कि गेहूं की रोटी को पचने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है. इसमें फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जिससे इसे पूरी तरह पचने में लगभग 3 से 4 घंटे लग सकते हैं. यह धीरे-धीरे एनर्जी देता है और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है. जो लोग वजन कंट्रोल करना चाहते हैं या लंबे समय तक एनर्जी चाहते हैं, उनके लिए रोटी एक बेहतर विकल्प हो सकती है. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मल्टीग्रेन या बाजरे की रोटी गेहूं की रोटी से अलग तरह से पचती है और गेहूं से ज्यादा पौष्टिक होती है. ऐसे में रोटी किस अनाज से बनी है, उसका भी पाचन के समय पर असर पड़ता है. एक्सपर्ट का कहना है कि पाचन सिर्फ भोजन पर नहीं, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करता है. अगर आप धीरे-धीरे खाना खाते हैं, अच्छी तरह चबाते हैं और संतुलित मात्रा में खाना खाते हैं, तो पाचन बेहतर होता है. वहीं ज्यादा तला-भुना या भारी खाना खाने से पाचन धीमा हो सकता है, चाहे वह रोटी हो या चावल. जो लोग फिजिकली एक्टिव रहते हैं, उनका खाना जल्दी पच जाता है, जबकि एक जगह बैठकर घंटों काम करने वालों का पाचन स्लो हो सकता है. ऐसे में रोटी और चावल दोनों का संतुलित मात्रा में सेवन करना बेहतर है. अपनी जरूरत और स्वास्थ्य के अनुसार सही विकल्प चुन सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 14, 2026, 10:06 IST







