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बाल झड़ने से हैं परेशान? रोजाना डाइट में शामिल करें ये सस्ती हरी पत्ती, जड़ों को बना देगी स्टील जैसा मजबूत

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Last Updated:April 01, 2026, 22:13 IST आजकल बालों का झड़ना एक आम समस्या बन गई है, जिससे हर उम्र के लोग परेशान हैं. ऐसे में लोग महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय अब नेचुरल उपायों की ओर रुख कर रहे हैं. शेपू यानी डिल लीव्स एक ऐसा ही सुपरफूड है, जो पोषण से भरपूर होने के साथ बालों की जड़ों को मजबूत बनाने और हेयर फॉल कम करने में मददगार माना जाता है. ख़बरें फटाफट शेपू यानी डिल लीव्स एक ऐसी हरी सब्जी है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके फायदे बेहद चौंकाने वाले हो सकते हैं. पोषक तत्वों से भरपूर यह पत्तेदार सब्जी शरीर को अंदर से मजबूत बनाने के साथ-साथ बालों की सेहत सुधारने में भी अहम भूमिका निभाती है. इसमें विटामिन A, C, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्कैल्प को पोषण देकर बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं. यही कारण है कि इसे नियमित डाइट में शामिल करने से बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम हो सकता है और बाल पहले से ज्यादा हेल्दी नजर आने लगते हैं. आज के समय में हेयर फॉल एक आम समस्या बन चुकी है, जिसका मुख्य कारण खराब खान-पान, तनाव और पोषण की कमी है. ऐसे में शेपू का सेवन इन समस्याओं को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स स्कैल्प को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे बालों की जड़ें कमजोर नहीं पड़तीं. साथ ही, इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्कैल्प की सूजन और इरिटेशन को कम करते हैं, जिससे बालों के गिरने की समस्या कंट्रोल में आती है. यह बालों को अंदर से पोषण देकर उन्हें घना और मजबूत बनाने में सहायक होता है. सिर्फ बालों के लिए ही नहीं, शेपू पाचन तंत्र के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. यह डाइजेशन को बेहतर बनाता है और शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है. जब शरीर को सही पोषण मिलता है, तो उसका असर सीधे बालों और त्वचा पर दिखाई देता है. इसके अलावा, शेपू में मौजूद तत्व शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिससे अंदर की गंदगी बाहर निकलती है और ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है. इसका सीधा फायदा बालों की ग्रोथ और उनकी क्वालिटी पर भी पड़ता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 01, 2026, 22:13 IST

असम में ‘घुसपैठिए’ बनाम ‘लुटेरे’: विधानसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी, प्रियंका गांधी पर तीखी बयानबाज़ी | चुनाव समाचार

Lucknow Super Giants Vs Delhi Capitals IPL 2026 Live (AP Photo)

आखरी अपडेट:01 अप्रैल, 2026, 21:50 IST प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करने के लिए असम में थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्वनाथ में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित किया; (दाएं) कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 1 अप्रैल, 2026 को असम के डिब्रूगढ़ जिले में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करती हैं। (छवि: (PMO/@INCIndia/X /PTI) प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने विधानसभा चुनावों से पहले “असम की आत्मा” के लिए लड़ाई लड़ी, विकास, पहचान और “एक-परिवार” शासन पर एक-दूसरे पर कटाक्ष किया। असम में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच कड़ा चुनावी मुकाबला है। प्रधान मंत्री मोदी और प्रियंका गांधी बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रचार करने के लिए असम में थे, जहां उन्होंने “घुसपैठिया” बनाम “माफिया” कथा पर एक-दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए। मोदी ने डिब्रूगढ़ जिले में मनोहारी चाय एस्टेट का दौरा किया, जहां उन्होंने महिला श्रमिकों के साथ सीधे बातचीत करके और चाय की पत्तियां तोड़कर 2014 से भाजपा के प्रति देखे गए “महत्वपूर्ण झुकाव” को मजबूत करने की कोशिश की। चाय बागान कार्यबल, जिसमें 850 से अधिक बागानों के मतदाता शामिल हैं, ऐतिहासिक रूप से असमिया राजनीति में एक निर्णायक कारक रहे हैं। भाजपा को श्रम शक्ति का सच्चा हितैषी बताते हुए उन्होंने दावा किया कि जहां कांग्रेस ने श्रमिकों को 60 वर्षों तक “अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष” करने की अनुमति दी, वहीं उनके प्रशासन ने महत्वपूर्ण भूमि अधिकार देना शुरू कर दिया है। मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “चाय असम की आत्मा है! यहां की चाय ने दुनिया भर में अपनी जगह बनाई है। यह एक बहुत ही यादगार अनुभव था।” इस बीच, गांधी ने तिंगखोंग और नाज़िरा में अपनी रैलियों का इस्तेमाल अपनी कहानी को ख़त्म करने के लिए किया, और भाजपा पर चाय श्रमिकों के लिए दैनिक वेतन बढ़ाने के अपने विशिष्ट वादे को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि असम की अपार प्राकृतिक संपदा के बावजूद, कार्यबल गरीब बना हुआ है जबकि “केवल एक परिवार समृद्ध हो रहा है”। मोदी ने छह दशकों में कांग्रेस द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए गए “तीन पुलों” और उनकी सरकार द्वारा केवल 10 वर्षों में बनाए गए “पांच पुलों” के बीच एक तीव्र अंतर दिखाते हुए “डबल-इंजन” सरकार का कार्ड खेला। उन्होंने कहा कि जगीरोड पर सेमीकंडक्टर सुविधा जैसी भविष्य की ओर देखने वाली परियोजनाएं जल्द ही प्रौद्योगिकी के लिए विश्व स्तर पर जानी जाएंगी। हालाँकि, गांधी ने कहा कि ये भव्य परियोजनाएँ जनता के दैनिक संघर्षों की प्रणालीगत उपेक्षा का मुखौटा थीं। उन्होंने विफल आर्थिक नीति के प्रमाण के रूप में “चरम” मुद्रास्फीति और आवश्यक वस्तुओं की अनुपलब्धता की ओर इशारा किया। गांधी ने कहा, “असम में पिछले पांच वर्षों में लोगों की समस्याएं और खतरे बढ़े हैं। महंगाई चरम पर है और हर आवश्यक वस्तु पहुंच से बाहर है। रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाने वाले युवाओं के लिए कोई नौकरी नहीं है।” उन्होंने कहा कि भाजपा के विकास के संस्करण ने युवा पीढ़ी को दरकिनार कर दिया है और व्यापक विकास के बजाय, खदानों और जमीन जैसी राज्य की संपत्तियों को “बड़े उद्योगपतियों को सौंप दिया जा रहा है”। उन्होंने आरोप लगाया, “एक परिवार असम में सब कुछ लूट रहा है। और जब वे लूट नहीं रहे हैं, तो खदानें, जमीनें और हर दूसरी संपत्ति बड़े उद्योगपतियों को सौंपी जा रही है।” प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उस पर वोट बैंक बनाने के लिए ”घुसपैठियों को बचाने के लिए कानून लाने” की योजना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पहले अवैध आप्रवासियों को पवित्र “सत्रों, नामघरों और मंदिर की भूमि” पर बसने के लिए प्रोत्साहित किया था। चुनाव असम की रक्षा के लिए एक विकल्प है”शान“(गर्व) और”सुरक्षाउन्होंने कहा, ”(सुरक्षा) जनजातीय पहचान की रक्षा के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और छठी अनुसूची जैसे उपायों के माध्यम से।” गांधी ने खतरे को दोबारा परिभाषित करते हुए इसका प्रतिकार किया और इस बात पर जोर दिया कि “असम की संस्कृति और सभ्यता” को वास्तविक खतरा एक सत्तावादी नेतृत्व से है जो “भय और धमकियों” के माध्यम से शासन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार “कायरों” द्वारा चलाई जाती है जो महिलाओं को ‘ओरुनोदोई’ जैसी सरकारी योजनाओं से हटाने की धमकी देकर रैलियों में भाग लेने के लिए मजबूर करते हैं। उन्होंने पिछले वादों के बावजूद, मांग करने वाले समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने में भाजपा की विफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “विभिन्न आदिवासी समुदाय वर्षों से एसटी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। भाजपा ने उन्हें एसटी का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन वे इसे देने में विफल रहे।” प्रधानमंत्री ने लगातार कांग्रेस के “दो परिवारों” – दिल्ली में गांधी परिवार और असम में गोगोई – पर हमला किया और उन पर जनता की भलाई पर वंशवादी हितों को प्राथमिकता देने और पार्टी को “भ्रष्टाचार की जननी” करार देने का आरोप लगाया। “कांग्रेस के लिए, दो परिवार हैं – एक दिल्ली में और दूसरा असम में, और उनकी प्राथमिकता उनके परिवारों का हित है, न कि लोगों का… उन्होंने (कांग्रेस) असम के साथ समझौता किया है आत्मा (आत्मा), शान (गर्व), Pehchan (पहचान) और सुरक्षा (सुरक्षा),” उन्होंने कहा। बदले में, गांधी ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में “केवल एक परिवार सब कुछ लूट रहा है”। उन्होंने सारदा और स्मार्ट सिटी घोटालों सहित ऐतिहासिक भ्रष्टाचार के आरोपों को उठाया और प्रशासन को “डबल-ग़ुलामी (गुलामी)” सरकार ने आरोप लगाया कि सरमा मोदी के गुलाम हैं, जो बदले में ”अमेरिका के गुलाम” हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा ने कहा कि उन्होंने डबल इंजन सरकार दी है। वास्तव में, यह डबल गुलामी सरकार है। पीएम मोदी अमेरिका की गुलामी में लगे हुए हैं और हिमंत बिस्वा सरमा मोदी की गुलामी में लगे हुए हैं।” (एजेंसी इनपुट के साथ) जगह : गुवाहाटी (गौहाटी), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 01 अप्रैल, 2026, 21:50 IST समाचार चुनाव असम में ‘घुसपैठिए’ बनाम ‘लुटेरे’: विधानसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी, प्रियंका गांधी

गर्मी में अचानक नाक से खून आता है? जानें कारण, तुरंत राहत के आसान उपाय

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Last Updated:April 01, 2026, 21:48 IST गर्मी के मौसम में सूखी हवा और कम नमी का असर सीधे हमारी नाक पर पड़ता है, जिससे कई बार अचानक खून आने की समस्या हो जाती है. यह परेशानी खासकर बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है. हालांकि सही समय पर प्राथमिक उपचार और कुछ आसान उपाय अपनाकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है. नाक से खून बहना. गर्मी का मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है, जिनका असर सीधे हमारे शरीर पर पड़ता है. तेज धूप, गर्म हवाएं और शरीर में पानी की कमी कई परेशानियों को जन्म देती हैं. इन्हीं में से एक आम समस्या है अचानक नाक से खून आना, जिसे मेडिकल भाषा में Epistaxis कहा जाता है. यह परेशानी खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि उनका शरीर मौसम के बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होता है. डॉक्टरों के अनुसार, गर्मियों में हवा में नमी कम हो जाती है, जिससे नाक के अंदर की परत सूखने लगती है. नाक के भीतर की त्वचा बहुत पतली और नाजुक होती है, जिसमें छोटी-छोटी रक्त नलिकाएं मौजूद होती हैं. जब यह परत सूख जाती है, तो ये नलिकाएं कमजोर होकर आसानी से फट सकती हैं और खून बहने लगता है. गर्म हवा और कम ह्यूमिडिटी इस समस्या को और बढ़ा देते हैं. इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति जोर से नाक साफ करता है या बार-बार छींकता है, तो भी ये नसें टूट सकती हैं. एलर्जी, साइनस, इंफेक्शन या नाक में चोट लगने जैसे कारण भी नाक से खून आने की वजह बन सकते हैं. कुछ मामलों में यह समस्या केवल मौसम की वजह से नहीं होती, बल्कि अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़ी हो सकती है. जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर रहता है या जो खून को पतला करने वाली दवाइयां लेते हैं, उनमें भी नाक से खून आने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए अगर यह समस्या बार-बार हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है. अगर अचानक नाक से खून आने लगे, तो घबराने के बजाय सही तरीके से प्राथमिक उपचार करना चाहिए. सबसे पहले व्यक्ति को सीधे बैठना चाहिए और सिर को थोड़ा आगे की ओर झुकाना चाहिए, ताकि खून गले में जाने की बजाय बाहर निकले. इसके बाद नाक के नरम हिस्से को अंगूठे और उंगली से कुछ मिनटों तक दबाकर रखना चाहिए. इस दौरान मुंह से सांस लेना बेहतर होता है. साथ ही माथे या नाक पर ठंडी पट्टी या बर्फ लगाने से खून का बहाव कम होता है और जल्दी रुकने में मदद मिलती है. आमतौर पर ये उपाय कुछ ही मिनटों में असर दिखा देते हैं. अगर किसी को बार-बार नाक से खून आने की समस्या होती है, तो कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इसे काफी हद तक रोका जा सकता है. नाक के अंदर हल्का सा नारियल तेल या पेट्रोलियम जेली लगाने से नमी बनी रहती है और सूखापन कम होता है. गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. कमरे में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग भी फायदेमंद होता है. इसके अलावा, भाप लेने से भी नाक के अंदर की सूखापन कम होती है और यह समस्या नियंत्रित रहती है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 01, 2026, 21:48 IST

रेलवे ने जेसीबी से मंदिर तोड़ा, मूर्ति को फेंका:खंडवा में 500 से ज्यादा मकान तोड़े; कांग्रेस बोलीं- कहा गए हिंदुत्व पर वोट मांगने वाले?

रेलवे ने जेसीबी से मंदिर तोड़ा, मूर्ति को फेंका:खंडवा में 500 से ज्यादा मकान तोड़े; कांग्रेस बोलीं- कहा गए हिंदुत्व पर वोट मांगने वाले?

खंडवा में रेलवे प्रशासन ने अतिक्रमण के नाम पर अब तक 500 से ज्यादा मकान तोड़ दिए हैं। हजारों लोग बेघर हो गए हैं, इसी बीच नौवें दिन मंदिर तोड़े जाने के मामले ने विवाद खड़ा कर दिया। रेलवे की जेसीबी ने एक भीलटदेव के मंदिर को तोड़ दिया। इससे पहले मूर्ति को पानी की टंकी में फेंक दिया। घटनाक्रम के वीडियो भी सामने आए हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने हिंदुत्व की पहरेदारी करने वाली भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। सूरजकुंड क्षेत्र में मंदिर तोड़ने का मामला सामने आया तो मौके पर हिंदू जागरण मंच के संयोजक माधव झा सहित कई लोग पहुंचे और विरोध जताया। माधव झा ने कहा कि रेलवे की जमीन में मंदिर से पहले चर्च और दरगाह हैं, लेकिन उन्हें तोड़ने की हिमाकत तक नहीं की जा रही। मंदिर को तोड़ा गया और मूर्तियों सहित मलबे को पानी के टैंक में बहा दिया। इधर, रेलवे अधिकारियों से कहासुनी के बीच तय किया गया कि अब पहले चर्च और दरगाह टूटेगी, उसके बाद बाकी का अतिक्रमण तोड़ जाएगा। इसके अलावा हिंदूवादी नेता डॉ. अनीस अरझरे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि खंडवा को पाकिस्तान बना दिया गया हैं। नेता प्रतिपक्ष बोले- कहां है? बीजेपी नेता खंडवा में बुधवार को मंदिर तोड़ने के दो घटनाक्रम हुए हैं। सुबह नागचून रोड़ पर भी भीलटदेव का मंदिर तोड़ा गया। इस घटना को कारोबारी श्याम हेमवानी द्वारा एक मुस्लिम कॉलोनाइजर को जमीन बेचने के लिए अंजाम दिया गया। वहीं शाम को रेलवे ने भीलटदेव मंदिर तोड़ दिया। मामले में नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मुल्लु राठौर ने कहा कि, यह घटनाएं भाजपा की सरकार में हो रही हैं। जो हिंदूत्व के नाम पर वोट मांगती हैं। अब भाजपा के नेता कहां छिप गए हैं।

रतलाम रेल मंडल में संदीप शर्मा बने PRI:DRM ऑफिस में संभाला कार्यभार; पूर्व में इंदौर में थे पदस्थ

रतलाम रेल मंडल में संदीप शर्मा बने PRI:DRM ऑफिस में संभाला कार्यभार; पूर्व में इंदौर में थे पदस्थ

पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल स्थित मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय (DRM Office) के जनसंपर्क विभाग में बुधवार को संदीप शर्मा ने मुख्य जनसंपर्क निरीक्षक (PRI) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। संदीप शर्मा इससे पूर्व जनसंपर्क कार्यालय इंदौर में मुख्य जनसंपर्क निरीक्षक के पद पर कार्यरत रह चुके हैं। इसके अलावा वे चर्चगेट स्थित पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क कार्यालय में भी वरिष्ठ जनसंपर्क निरीक्षक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। गौरतलब है कि पूर्व मुख्य जनसंपर्क निरीक्षक मुकेश कुमार पांडेय के प्रमोशन के बाद उनका स्थान खाली हो गया था। पदोन्नति के बाद वे पश्चिम रेलवे में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में इंदौर में पदस्थ हो गए हैं, जिसके चलते रतलाम DRM कार्यालय में PRI का पद रिक्त था।

PM मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों पर बैठक जारी:पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा; शाह-जयशंकर सहित कई केंद्रीय मंत्री मौजूद

PM मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों पर बैठक जारी:पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा; शाह-जयशंकर सहित कई केंद्रीय मंत्री मौजूद

दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर PM मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम 7 बजे से कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक जारी है। इसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में मौजूदा हालात की समीक्षा हो रही है। मीटिंग में अमित शाह, एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जेपी नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रल्हाद जोशी, किंजरापु राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, PM के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी मौजूद हैं। मीटिंग में आम लोगों की जरूरी जरूरतों जैसे खाद्य, LPG और पेट्रोल-डीजल उपलब्धता पर चर्चा हो रही है। 10 दिन में दूसरे बार CCS मीटिंग कर रहे PM मोदी पिछले 10 दिनों के भीतर CCS की यह दूसरी मीटिंग है। इससे पहले 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CCS मीटिंग की अध्यक्षता की थी। इसमें भारत पर पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उपायों का आकलन किया गया था। PM ने कहा था कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है और पूरी दुनिया इससे प्रभावित हो रही है। उन्होंने निर्देश दिया था कि सरकार के सभी विभाग मिलकर काम करें ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अन्य अधिकारी मौजूद थे। कैबिनेट सचिव ने अब तक उठाए गए और प्रस्तावित कदमों की जानकारी दी थी। इसके अलावा कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSMEs, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा हुई। 27 मार्च : PM मोदी ने ईरान जंग पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ईरान जंग को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी। उन्होंने कहा कि सभी राज्य टीम इंडिया की तरह मिलकर काम करें और अपनी तैयारियां मजबूत रखें। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में PM ने राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और नागरिकों की सुरक्षा है। PM ने सप्लाई चेन सही रखने, जमाखोरी-कालाबाजारी करने वालों पर सख्ती करने को कहा। साथ ही खाद के स्टॉक व वितरण पर नजर रखने को कहा। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जंग, तेल-गैस पर संकट पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले के बाद युद्ध शुरू हुआ था। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए। अब युद्ध एक महीने से ज्यादा समय से जारी है और इसके जल्द खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। ईरान के नियंत्रण में स्थित होर्मुज (Strait of Hormuz) इस संघर्ष के कारण प्रभावित हुआ है। इसके चलते भारत सहित कई देशों को तेल और गैस सप्लाई में बाधा का सामना करना पड़ रहा है। होर्मुज से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई होती है। संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, नीदरलैंड, मलेशिया, इजराइल और ईरान सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने 24 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी बातचीत की थी। ——————————————- ये खबर भी पढ़ें… केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 50% से बढ़ाकर 70% किया, स्टील-ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर को प्राथमिकता केंद्र सरकार ने देश में जारी गैस संकट के बीच राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने शुक्रवार (27 मार्च) को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के एलोकेशन यानी कोटा को 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा उन उद्योगों को मिलेगा जो पूरी तरह LPG पर निर्भर हैं। पूरी खबर पढ़ें… सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई, तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती थीं सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती कर दी है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई है। न्यूज एजेंसी PTI ने यह जानकारी दी। पूरी खबर पढ़ें…

एमपी में आरटीई लॉटरी खुलेगी कल:1.78 लाख में से 1 लाख 22 हजार बच्चों को निजी स्कूलों में मिलेगा प्रवेश

एमपी में आरटीई लॉटरी खुलेगी कल:1.78 लाख में से 1 लाख 22 हजार बच्चों को निजी स्कूलों में मिलेगा प्रवेश

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत प्रदेश में निजी स्कूलों में बिना शुल्क प्रवेश के लिए 2 अप्रैल को दोपहर 2 बजे ऑनलाइन लॉटरी निकाली जाएगी। इस प्रक्रिया में इस बार करीब 1 लाख 78 हजार 714 पात्र बच्चों को शामिल किया है। जिन्हें प्रदेश के लगभग 22 हजार निजी स्कूलों की 1 लाख 22 हजार 551 सीटों पर प्रवेश मिलेगा। लॉटरी का सीधा प्रसारण राज्य शिक्षा केंद्र के यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। लॉटरी के बाद अभिभावक आरटीई पोर्टल पर अपने बच्चे को आवंटित स्कूल की जानकारी देख सकेंगे और प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेंगे। ऑनलाइन लॉटरी का होगा सीधा प्रसारण राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा गुरुवार को दोपहर 2 बजे आरटीई के तहत ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। इसका लाइव प्रसारण यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा, जिससे अभिभावक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से देख सकेंगे। लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर 2:15 बजे के बाद अभिभावक आरटीई पोर्टल पर लॉगिन कर अपने बच्चे को आवंटित स्कूल की जानकारी ले सकेंगे। साथ ही आवंटन पत्र डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। एसएमएस से भी मिलेगी जानकारी राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से अभिभावकों को सुविधा देने के लिए आवंटित स्कूल की जानकारी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इससे अभिभावकों को तुरंत जानकारी मिल सकेगी और उन्हें बार-बार पोर्टल चेक करने की आवश्यकता नहीं होगी। आरटीई अधिनियम के तहत गैर-अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहती हैं। इन सीटों पर बच्चों को पूरी तरह नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। प्रदेश में यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है, जिसमें आवेदन से लेकर स्कूल आवंटन तक सभी चरण डिजिटल माध्यम से पूरे किए जाते हैं। 3 से 15 अप्रैल तक चलेगी एडमिशन प्रक्रिया लॉटरी में चयनित बच्चों के अभिभावकों को 3 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच संबंधित स्कूल में जाकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस दौरान अभिभावकों को आवश्यक दस्तावेज लेकर स्कूल में उपस्थित होना होगा, ताकि समय सीमा के भीतर बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके। राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होती है और पात्र बच्चों को निष्पक्ष तरीके से स्कूल आवंटन सुनिश्चित किया जाता है।

गन्ने बनाम बेल का रस: गन्ना या फिर बेल का रस… गर्मी में ऊर्जावान पेय कौन सा है? जानिए फायदे

गन्ने बनाम बेल का रस: गन्ना या फिर बेल का रस... गर्मी में ऊर्जावान पेय कौन सा है? जानिए फायदे

गन्ना बनाम बेल का रस: गर्मी का पारा चढ़ना ही शरीर को वर्गीकृत और ऊर्जावान बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस मौसम में पास्ता के लिए लोग बार-बार कोल्ड ड्रिंक का सहारा लेते हैं, लेकिन प्राकृतिक फलों का रस न केवल ताजगी देता है बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करता है। जब देसी ‘नर्जी ड्रिंक’ की बात आती है, तो बात रस और बेल का शरबत की सबसे ऊपर होती है। दोनों की साबुत सेहत के लिए सबसे बढ़िया है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावशाली कौन है? आइए इस लेख में विस्तार से जानें। ब्रह्माण्ड का रस है प्रसिद्ध ऊर्जा का पावरहाउस बबूल का रस गर्मियों में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला पेय है। यह स्वाद में मीठा-मीठा है, स्वास्थ्य के लिए गुणकारी माना जाता है। चौथे में प्राकृतिक सुक्रोज होता है, जो शरीर में जाकर ही ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है। थकान मुक्ति के लिए यह सबसे बेहतरीन विकल्प है। बता दें, पीलिया जैसी बैचलर में डॉक्टर भी फ्रैंचाइज़ का रस पीने की सलाह देते हैं क्योंकि यह आपको लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। इतना ही नहीं, इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसी जरूरी चीजें होती हैं, जो टुकड़े और दांत लगाए जाते हैं। बेल को आयुर्वेद में औषधीय गुणों का खजाना माना गया है। गर्मियों में लू और धूप से बचने के लिए इसका सेवन रामबाण है। बेल के रस में कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर होती हैं। यह पेट को अंदर से ठंडा करता है। इसकी तासीर बेहद अनोखी है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है और तापमान को नियंत्रित करती है। बेल के सामूहिक रक्त को साफ करने और लेस्ली के धागों को बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।

Moringa For Health: थकान-कमजोरी से वजन कंट्रोल तक, जानें गर्मी में सहजन खाने के फायदे

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Last Updated:April 01, 2026, 19:30 IST Sahjan Ke Fayde: सहजन का सेवन गर्मी के दिनों में आपको हेल्दी रहने में मदद कर सकता है. सब्जी से लेकर सांभर और जूस के रूप में आप इसका सेवन कर सकते हैं. मोरिंगा खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है, जिन्हें पाचन, मोटापे और कमजोरी की समस्या रहती है. ख़बरें फटाफट Sahjan Ke Fayde:  गर्मियों में अक्सर पाचन खराब होना, थकान, कमजोरी और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं, ऐसे में सहजन का सेवन बहुत फायदेमंद होता है. आयुर्वेद में इसे एक गुणकारी औषधि माना जाता है क्योंकि इसके पत्ते, फल और फूल सभी सेहत के लिए लाभकारी होते हैं. सहजन में विटामिन A, B, C, आयरन, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. ऐसे में गर्मियों के दिनों में मोरिंग का सेवन शरीर के लिए दवा का काम कर सकता है. इसका सेवन शरीर को ठंडक देता है, पाचन को मजबूत बनाता है और रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाता है. सहजन का सेवन खासतौर पर कुछ कंडीशन में बहुत ही फायदेमंद होता है. यहां आप जान सकते हैं कि किन लोगों को सहजन का सेवन जरूर करना चाहिए. किन लोगों को सहजन का सेवन करना चाहिए? मोरिंगा में फाइबर मौजूद होता है, जो पेट को साफ रखने में मदद करता है. ऐसे में वो लोग जिन्हें कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं रहती हैं उन्हें इसका सेवन करना चाहिए. भारी खाना खाने के बाद भी सहजन पाचन को ठीक करने में मदद करता है. यह वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक है क्योंकि यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और भूख को नियंत्रित करता है. गर्मी में शरीर में गंदगी और पानी जमा हो सकता है, जिसे सहजन प्राकृतिक रूप से बाहर निकालने में मदद करता है. यह सूजन कम करता है और शरीर को हल्का महसूस कराता है. यह खून में शुगर का स्तर संतुलित रखने में भी मददगार है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभकारी है. सहजन में कैल्शियम और विटामिन C होता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है और थकान को दूर करता है. इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्युनिटी बढ़ाते हैं, जिससे शरीर बीमारियों से बचा रहता है. सहजन का सेवन कैसे करें (How To Eat Moringa In summer)गर्मियों में सहजन को कई तरीकों से खाया जा सकता है, जैसे इसकी सब्जी, पत्तों का साग, सूप या जूस. इसके पत्तों को सुखाकर पाउडर बनाकर पानी में मिलाकर भी लिया जा सकता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 01, 2026, 19:30 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

निजी स्कूलों में मनमानी फीस के खिलाफ अभिभावकों का प्रदर्शन:कलेक्ट्रेट पहुंचा पालक संघ, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य करने सहित कई मांगे रखी

निजी स्कूलों में मनमानी फीस के खिलाफ अभिभावकों का प्रदर्शन:कलेक्ट्रेट पहुंचा पालक संघ, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य करने सहित कई मांगे रखी

नीमच में निजी स्कूलों की मनमानी फीस और नियमों के उल्लंघन के विरोध में बुधवार को पालक संघ जिला इकाई ने प्रदर्शन किया। पालकों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। संघ के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस विनियमन कानून का उल्लंघन कर मनमाने ढंग से शुल्क बढ़ा रहे हैं। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ रहा है। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य करने सहित कई मांगे रखी ज्ञापन में प्रमुख मांग की गई कि स्कूलों में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों के बजाय केवल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य किया जाए। इसके अतिरिक्त, किताबों और गणवेश पर अभिभावकों को कम से कम 30 प्रतिशत की छूट दिलाने के लिए विशेष मेलों का आयोजन करने की मांग की गई, ताकि इसमें होने वाली अनियमितताओं को रोका जा सके। पालक संघ ने सीएम राइज सांदीपनि स्कूल के अधूरे भवन निर्माण पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में देरी के कारण मध्यम और गरीब वर्ग के प्रतिभावान छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर उठाए सवाल संघ ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर भी सवाल उठाए। ज्ञापन में बताया गया कि जिले के कई निजी संस्थान बिना खेल मैदान, प्रयोगशाला और स्वच्छ पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं के संचालित हो रहे हैं। पालक संघ ने चेतावनी दी है कि अगर फीस बकाया होने पर टीसी या अंकसूची रोकने जैसी प्रथाओं पर रोक नहीं लगी और परिवहन शुल्क में एकरूपता सुनिश्चित नहीं की गई, तो जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जिन स्कूलों में निर्धारित मापदंडों का अभाव है, उनकी मान्यता तत्काल निरस्त की जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान तीसरी कक्षा का छात्र जयंत शुक्ला भी मौजूद था, जिसने तख्ती उठा रखी थी।